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		<title>Eco friendly rawan bacha payega apna astitava</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Aug 2024 07:33:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[इसबार इको फ्रेंडली विशाल रावण का बनेगा पुतला 35 से 40 फीट ऊंचा होगा रावण का पुतला पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए रावण के पुतले का होगा निर्माण चित्रकार संजीव सिन्हा व टीम बनाएगी रावण का पुतला विजयदशमी के दिन होगा रावण के पुतले का दहन आरा,31 अगस्त. शारदीय नवरात्र के अवसर पर 18 दिवसीय रामलीला के आयोजन को लेकर तैयारी तेज हो गई है. लोक परंपरा के अनुसार विजयदशमी को रामलीला मैदान में रावण के पुतले का दहन होता है. इस बार 35 से 40 फीट के विशाल रावण के पुतले का निर्माण किया जाएगा. आरा शहर के चर्चित चित्रकार संजीव सिन्हा रावण के पुतले का निर्माण करेंगे. बताते चलें कि संजीव सिन्हा की कृतियां हमेशा सुर्खियों में रहती है. उन्होंने अपने काम से न सिर्फ अपनी बल्कि इस जिले की पहचान भी वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर दिलाया है. संजीव भोजपुर में रावण के विशालकाय प्रतिमा की शुरुआत करने वाले पहले शख्स हैं इसके पहले इतने बड़े पुतले कक निर्माण नही होता था. रावण के पुतले का निर्माण पहली बकर संजीव ने 25 फिट का किया था. अब वह बढ़कर 40 तक पहुंच गया है. रावण के पुतले के निर्माण को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है. चित्रकार संजीव सिन्हा ने बताया कि इस बार रावण के पुतले का निर्माण पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए किया जाना है. इसमें कोई भी ऐसी सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जो जलने पर ज्यादा प्रदूषण फैलाए. इस बार रावण के पुतले के निर्माण में सबसे ज्यादा इस्तेमाल जुट का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इसबार इको फ्रेंडली विशाल रावण का बनेगा पुतला</strong></p>



<p><strong>35 से 40 फीट ऊंचा होगा रावण का पुतला</strong></p>



<p><strong>पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए रावण के पुतले का होगा निर्माण</strong></p>



<p><strong>चित्रकार संजीव सिन्हा व टीम बनाएगी रावण का पुतला</strong></p>



<p><strong>विजयदशमी के दिन होगा रावण के पुतले का दहन</strong></p>



<p>आरा,31 अगस्त. शारदीय नवरात्र के अवसर पर 18 दिवसीय रामलीला के आयोजन को लेकर तैयारी तेज हो गई है. लोक परंपरा के अनुसार विजयदशमी को रामलीला मैदान में रावण के पुतले का दहन होता है. इस बार 35 से 40 फीट के विशाल रावण के पुतले का निर्माण किया जाएगा. आरा शहर के चर्चित चित्रकार संजीव सिन्हा रावण के पुतले का निर्माण करेंगे. बताते चलें कि संजीव सिन्हा की कृतियां हमेशा सुर्खियों में रहती है. उन्होंने अपने काम से न सिर्फ अपनी बल्कि इस जिले की पहचान भी वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर दिलाया है. संजीव भोजपुर में रावण के विशालकाय प्रतिमा की शुरुआत करने वाले पहले शख्स हैं इसके पहले इतने बड़े पुतले कक निर्माण नही होता था. रावण के पुतले का निर्माण पहली बकर संजीव ने 25 फिट का किया था. अब वह बढ़कर 40 तक पहुंच गया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="679" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/08/1000801278-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-86622" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/08/1000801278-scaled.jpg 679w, https://www.patnanow.com/assets/2024/08/1000801278-431x650.jpg 431w, https://www.patnanow.com/assets/2024/08/1000801278-1018x1536.jpg 1018w, https://www.patnanow.com/assets/2024/08/1000801278-1357x2048.jpg 1357w" sizes="(max-width: 679px) 100vw, 679px" /></figure>



<p>रावण के पुतले के निर्माण को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है. चित्रकार संजीव सिन्हा ने बताया कि इस बार रावण के पुतले का निर्माण पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए किया जाना है. इसमें कोई भी ऐसी सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जो जलने पर ज्यादा प्रदूषण फैलाए. इस बार रावण के पुतले के निर्माण में सबसे ज्यादा इस्तेमाल जुट का किया जाना है. रावण के कपड़ों के लिए जुट का इस्तेमाल किया जाएगा. पुतला निर्माण में 15 दोनों का वक्त लगेगा. इसमें प्रतिदिन 6 से 7 आदमी काम करेंगे. पुतले की ऊंचाई 35 से 40 फीट की होगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/08/1000801270-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-86623" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/08/1000801270-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/08/1000801270-650x488.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>आरा नगर रामलीला समिति की अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने बताया कि रावण के पुतले के निर्माण को लेकर तैयारी पूर्ण कर ली गई है. पुतला निर्माण को लेकर चित्रकार संजीव सिन्हा को जिम्मेवारी सौंपी गई है. इस बार विजयदशमी के दिन भव्य कार्यक्रम के बीच रावण के पुतले का दहन होगा जो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र होगा. इको सिस्टम को सपोर्ट करने के बाद भी बनने वाला रावण क्या अपना अस्तित्व बचा पायेगा? इस सवाल का जवाब जब पटना नाउ ने कई लोगों से पूछा तो सभी सोच में पड़ गए! कुछ देर की खामोशी के बाद सबका जवाब यही था कि बुराई का प्रतीक रावण कितना भी प्यारा क्यों न बने अगर उसका अंत नही होगा तो फिर मैसेज गलत जाएगा. इसलिए उसका जलना तो तय है.</p>



<p>अब यह बात अलग है कि रावण के पुतले को इको फ्रेंडली बनाया जा रहा है लेकिन जलेगा तो रावण ही क्योंकि बुराई चाहे जैसी भी हो उसका तो अंत ही होता है. वह बाहरी आवरण में दिखने वाली हो या फिर आपके अंदर.</p>
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		<title>हर साल रावण का वध क्यों होता है ?</title>
		<link>https://www.patnanow.com/why-is-ravana-killed-every-year/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Oct 2023 06:56:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[रावण ने ब्रह्माजी की 10 हजार वर्षों तक तपस्‍या की और हर 1,000वें वर्ष में उसने अपने 1 शीश की आहुति दी रावण के दस सिर 6 शास्त्रों और 4 वेदों के प्रतिक हैं देशभर में दशहरे के त्यौहार पर रावण का पुतला दहन करने की परंपरा है. इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी. नौ दिन की नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है और दशहरे से 21वें दिन पर दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है.  अब अगर आपके मन में ये सवाल उठता है कि रावण का दहन क्यों किया जाता है तो इसका जवाब हम आपके लिए लाए हैं. कहा जाता है कि रावण दहन से बुराई पर अच्छाई की जीत का उदाहरण मिलता है. सोने की लंका का सम्राट रावण अस्त्र-शस्त्रों का पारंगत, तपस्वी और प्रकांड विद्वान तथा राजधर्म का ज्ञाता था. कहा जाता है कि रावण अपने दस सिर से 10 दिशाओं पर नियंत्रण कर सकता था. रावण ने ब्रह्माजी की 10 हजार वर्षों तक तपस्‍या की और हर 1,000वें वर्ष में उसने अपने 1 शीश की आहुति दी, इसी तरह जब वह अपना 10वां शीश चढ़ाने लगा तो ब्रह्माजी प्रकट हुए और रावण से वर मांगने को कहा. रावण ने ब्रह्माजी से ऐसा वर मांग लिया की उसे मारना मुश्किल था. चारों वेदों और 6 उपनिषदों का ज्ञान रखने वाले रावण पर जब राम ने विजय प्राप्त की तो इसे विजयादशमी कहा जाने लगा. जिसे विजय पर्व के रूप में मनाया जाता है. रावण का सर्वनाश उसके क्रोध और [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p></p>



<p><strong>रावण ने ब्रह्माजी की 10 हजार वर्षों तक तपस्‍या की और हर 1,000वें वर्ष में उसने अपने 1 शीश की आहुति दी</strong></p>



<p><strong>रावण के दस सिर 6 शास्त्रों और 4 वेदों के प्रतिक हैं</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="600" height="450" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/21-ravan-1.jpg" alt="" class="wp-image-79650" style="aspect-ratio:1.3333333333333333;width:923px;height:auto" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/21-ravan-1.jpg 600w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/21-ravan-1-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<p>देशभर में दशहरे के त्यौहार पर रावण का पुतला दहन करने की परंपरा है. इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी. नौ दिन की नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है और दशहरे से 21वें दिन पर दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है.  अब अगर आपके मन में ये सवाल उठता है कि रावण का दहन क्यों किया जाता है तो इसका जवाब हम आपके लिए लाए हैं. कहा जाता है कि रावण दहन से बुराई पर अच्छाई की जीत का उदाहरण मिलता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="390" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/रावन-650x390.png" alt="" class="wp-image-79651" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/रावन-650x390.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/रावन-350x210.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/रावन.png 750w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सोने की लंका का सम्राट रावण अस्त्र-शस्त्रों का पारंगत, तपस्वी और प्रकांड विद्वान तथा राजधर्म का ज्ञाता था. कहा जाता है कि रावण अपने दस सिर से 10 दिशाओं पर नियंत्रण कर सकता था. रावण ने ब्रह्माजी की 10 हजार वर्षों तक तपस्‍या की और हर 1,000वें वर्ष में उसने अपने 1 शीश की आहुति दी, इसी तरह जब वह अपना 10वां शीश चढ़ाने लगा तो ब्रह्माजी प्रकट हुए और रावण से वर मांगने को कहा. रावण ने ब्रह्माजी से ऐसा वर मांग लिया की उसे मारना मुश्किल था. चारों वेदों और 6 उपनिषदों का ज्ञान रखने वाले रावण पर जब राम ने विजय प्राप्त की तो इसे विजयादशमी कहा जाने लगा. जिसे विजय पर्व के रूप में मनाया जाता है. रावण का सर्वनाश उसके क्रोध और अहंकार के कारण हुआ. राम ने जब रावण का वध किया, तो इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर देखा गया. इसी वजह से बुराई रूपी रावण के पुतले के दहन की परंपरा हर साल निभाई जाती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/रावन-१-650x366.png" alt="" class="wp-image-79652" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/रावन-१-650x366.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/रावन-१-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/रावन-१-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/रावन-१.png 850w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>रावण को राक्षस के राजा के रूप में दर्शाया गया है जिसके 10 सिर और 20 भुजाएँ थी और इसी कारण उनको &#8220;दशमुखा&#8221; (दस मुख वाला ), दशग्रीव (दस सिर वाला ) नाम दिया गया था. रावण के दस सिर 6 शास्त्रों और 4 वेदों के प्रतिक हैं, जो उन्हें एक महान विद्वान और अपने समय का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति बनाते हैं. वह 65 प्रकार के ज्ञान और हथियारों की सभी कलाओं का मालिक था .रावण को लेकर अलग-अलग कथाएँ प्रचलित हैं .वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण दस मस्तक, बड़ी दाढ़, ताम्बे जैसे होंठ और बीस भुजाओं के साथ जन्मा था l वह कोयले के समान काला था और उसकी दस ग्रिह्वा कि वजह से उसके पिता ने उसका नाम दशग्रीव रखा था l इसी कारण से रावण दशानन, दश्कंधन आदि नामों से प्रसिद्ध हुआ .</p>



<p><strong>PNCDESK</strong><br><br><br><br><br></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>रावण बौद्धिक संपदा का बेजोड़ संरक्षणदाता</title>
		<link>https://www.patnanow.com/ravan-the-unrivaled-patron-of-intellectual-property/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Oct 2022 05:45:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
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		<category><![CDATA[Ravan the unrivaled patron of intellectual property]]></category>
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					<description><![CDATA[रावण के सबक से आप भी बन सकते है विद्वानरावण के ही प्रसंग में श्रीकृष्ण जुगनू का अभिमत है लंकापति रावण पर विजय का पर्व अकसर यह याद दिलाता है कि रावण की सभा बौद्धिक संपदा के संरक्षण की केंद्र थी. उस काल में जितने भी श्रेष्&#x200d;ठजन थे, बुद्धिजीवी और कौशलकर्ता थे, रावण ने उनको अपने आश्रय में रखा था. रावण ने सीता के सामने अपना जो परिचय दिया, वह उसके इसी वैभव का विवेचन है. अरण्&#x200d;यकाण्&#x200d;ड का 48वां सर्ग इस प्रसंग में द्रष्&#x200d;टव्&#x200d;य है.उस काल का श्रेष्&#x200d;ठ शिल्&#x200d;पी मय, जिसने स्&#x200d;वयं को विश्&#x200d;वकर्मा भी कहा, उसके दरबार में रहा. उसकाल की श्रेष्&#x200d;ठ पुरियों में रावण की राजधानी लंका की गणना होती थी &#8211; यथेन्&#x200d;द्रस्&#x200d;यामरावती. मय के साथ रावण ने वैवाहिक संबंध भी स्&#x200d;थापित किया. मय को विमान रचना का भी ज्ञान था. कुशल आयुर्वेदशास्&#x200d;त्री सुषेण उसके ही दरबार में था जो युद्धजन्&#x200d;य मूर्च्&#x200d;छा के उपचार में दक्ष था और भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली सभी ओषधियों को उनके गुणधर्म तथा उपलब्धि स्&#x200d;थान सहित जानता था. शिशु रोग निवारण के लिए उसने पुख्&#x200d;ता प्रबंध किया था. स्&#x200d;वयं इस विषय पर ग्रंथों का प्रणयन भी किया.श्रेष्&#x200d;ठ वृक्षायुर्वेद शास्&#x200d;त्री उसके यहां थे जो समस्&#x200d;त कामनाओं को पूरी करने वाली पर्यावरण की जनक वाटिकाओं का संरक्षण करते थे &#8211; सर्वकाफलैर्वृक्षै: संकुलोद्यान भूषिता. इस कार्य पर स्&#x200d;वयं उसने अपने पुत्र को तैनात किया था. उसके यहां रत्&#x200d;न के रूप में श्रेष्&#x200d;ठ गुप्&#x200d;तचर, श्रेष्&#x200d;ठ परामर्शद और कुलश संगीतज्ञ भी तैनात थे. अंतपुर में सैकड़ों औरतें भी वाद्यों से स्&#x200d;नेह रखती थीं.उसके यहां श्रेष्&#x200d;ठ सड़क [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p><strong>रावण के सबक से आप भी बन सकते है विद्वान<br></strong><br>रावण के ही प्रसंग में श्रीकृष्ण जुगनू का अभिमत है लंकापति रावण पर विजय का पर्व अकसर यह याद दिलाता है कि रावण की सभा बौद्धिक संपदा के संरक्षण की केंद्र थी. उस काल में जितने भी श्रेष्&#x200d;ठजन थे, बुद्धिजीवी और कौशलकर्ता थे, रावण ने उनको अपने आश्रय में रखा था. रावण ने सीता के सामने अपना जो परिचय दिया, वह उसके इसी वैभव का विवेचन है. अरण्&#x200d;यकाण्&#x200d;ड का 48वां सर्ग इस प्रसंग में द्रष्&#x200d;टव्&#x200d;य है.<br>उस काल का श्रेष्&#x200d;ठ शिल्&#x200d;पी मय, जिसने स्&#x200d;वयं को विश्&#x200d;वकर्मा भी कहा, उसके दरबार में रहा. उसकाल की श्रेष्&#x200d;ठ पुरियों में रावण की राजधानी लंका की गणना होती थी &#8211; यथेन्&#x200d;द्रस्&#x200d;यामरावती. मय के साथ रावण ने वैवाहिक संबंध भी स्&#x200d;थापित किया. मय को विमान रचना का भी ज्ञान था. कुशल आयुर्वेदशास्&#x200d;त्री सुषेण उसके ही दरबार में था जो युद्धजन्&#x200d;य मूर्च्&#x200d;छा के उपचार में दक्ष था और भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली सभी ओषधियों को उनके गुणधर्म तथा उपलब्धि स्&#x200d;थान सहित जानता था. शिशु रोग निवारण के लिए उसने पुख्&#x200d;ता प्रबंध किया था. स्&#x200d;वयं इस विषय पर ग्रंथों का प्रणयन भी किया.<br>श्रेष्&#x200d;ठ वृक्षायुर्वेद शास्&#x200d;त्री उसके यहां थे जो समस्&#x200d;त कामनाओं को पूरी करने वाली पर्यावरण की जनक वाटिकाओं का संरक्षण करते थे &#8211; सर्वकाफलैर्वृक्षै: संकुलोद्यान भूषिता. इस कार्य पर स्&#x200d;वयं उसने अपने पुत्र को तैनात किया था. उसके यहां रत्&#x200d;न के रूप में श्रेष्&#x200d;ठ गुप्&#x200d;तचर, श्रेष्&#x200d;ठ परामर्शद और कुलश संगीतज्ञ भी तैनात थे. अंतपुर में सैकड़ों औरतें भी वाद्यों से स्&#x200d;नेह रखती थीं.<br>उसके यहां श्रेष्&#x200d;ठ सड़क प्रबंधन था और इस कार्य पर दक्ष लोग तैनात थे तथा हाथी, घोड़े, रथों के संचालन को नियमित करते थे. वह प्रथमत: भोगों, संसाधनों के संग्रह और उनके प्रबंधन पर ध्&#x200d;यान देता था. इसी कारण नरवाहन कुबेर को कैलास की शरण लेनी पड़ी थी. उसका पुष्&#x200d;पक नामक विमान रावण के अधिकार में था और इसी कारण वह वायु या आकाशमार्ग उसकी सत्&#x200d;ता में था : </p>



<p><strong>यस्&#x200d;य तत् पुष्&#x200d;पकं नाम विमानं कामगं शुभम्. वीर्यावर्जितं भद्रे येन या&#x200d;मि विहायसम्.</strong></p>



<p>उसने जल प्रबंधन पर पूरा ध्&#x200d;यान दिया, वह जहां भी जाता, नदियों के पानी को बांधने के उपक्रम में लगा रहता था : नद्यश्&#x200d;च स्तिमतोदका:, भवन्ति यत्र तत्राहं तिष्&#x200d;ठामि चरामि च. कैलास पर्वतोत्&#x200d;थान के उसके बल के प्रदर्शन का परिचायक है, वह &#8216;माउंट लिफ्ट&#8217; प्रणाली का कदाचित प्रथम उदाहरण है. भारतीय मूर्तिकला में उसका यह स्&#x200d;वरूप बहुत लोकप्रिय रहा है. बस&#8230;. उसका अभिमान ही उसके पतन का कारण बना. वरना नीतिज्ञ ऐसा कि राम ने लक्ष्&#x200d;मण को उसके पास नीति ग्रहण के लिए भेजा था, विष्&#x200d;णुधर्मोत्&#x200d;तरपुराण में इसके संदर्भ विद्यमान हैं.</p>



<p></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="487" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/raavan-२.png" alt="" class="wp-image-67322" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/raavan-२.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/10/raavan-२-350x262.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>हर शख्स के भीतर बुराईयों और अच्छाईयों का समागम होता है. जब बुराईयां हावी होने लगती हैं तो इंसान दानव और अच्छाईयों के बहुतायत पर देवता हो जाता है. कई बार बुरे विचार जेहन में आते हैं लेकिन हम उन पर काबू पाने की पुरजोर कोशिश करते हैं. यही चीजें हमें गलत और सही के दायरे में लाती है. इस तरह देखा जाए तो रावण के भीतर भी कई कमियां थीं. इसके बावजूद वह प्रकाण्ड विद्वान था. अपने साम्राज्य की जनता के लिए एक कुशल प्रशासक था. कहते हैं कि रावण की मौत से ठीक पहले राम ने भ्राता लक्ष्मण को रावण के पास ज्ञानार्जन के लिए भेजा था. आप भी जान लें कि रावण ने लक्ष्मण को क्या-क्या सीख दी.</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">1. अपने सारथी, दरबान, खानसामे और भाई से दुश्मनी मोल मत लीजिए. वे कभी भी नुकसान पहुंचा सकते हैं.</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">2. खुद को हमेशा विजेता मानने की गलती मत कीजिए, भले ही हर बार तुम्हारी जीत हो.</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">3. हमेशा उस मंत्री या साथी पर भरोसा कीजिए जो तुम्हारी आलोचना करती हो.</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">4. अपने दुश्मन को कभी कमजोर या छोटा मत समझिए, जैसा कि हनुमान के मामले में भूल हूई.</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">5. यह गुमान कभी मत पालिए कि आप किस्मत को हरा सकते हैं. भाग्य में जो लिखा होगा उसे तो भोगना ही पड़ेगा.</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">6. ईश्वर से प्रेम कीजिए या नफरत, लेकिन जो भी कीजिए , पूरी मजबूती और समर्पण के साथ.</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">7. जो राजा जीतना चाहता है, उसे लालच से दूर रहना सीखना होगा, वर्ना जीत मुमकिन नहीं.</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">8. राजा को बिना टाल-मटोल किए दूसरों की भलाई करने के लिए मिलने वाले छोटे से छोटे मौके को हाथ से नहीं निकलने देना चाहिए.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="487" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravan.png" alt="" class="wp-image-67323" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravan.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravan-350x262.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>रावण के माता- पिता का नाम कैकसी और विश्वश्रवा था. रावण &#8216;दस मुख&#8217; या &#8216;दशानन&#8217; के नाम से भी जाना जाता था. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण राक्षसों का राजा था जिसके 10 सिर और 20 हाथ थे. रावण के छह भाई और दो बहने थीं. जिनके नाम भगवान कुबेर, विभीषण, कुंभकरण, राजा कारा, राजा अहिरावण, कुम्भिनी और शूर्पणखा था.</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color">ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवाणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा॥</p>



<p>रामायण के अनुसार रावण ने भगवान राम के साथ लड़ाई कर अपना सब कुछ खो दिया था. यह लड़ाई इसलिए लड़ी गई थी क्&#x200d;योंकि रावण ने सीता का अपहरण कर लिया था. उनको वास्तुकला, शास्त्रों में ज्ञान और ज्योतिष की अच्&#x200d;छी तरह से जानकरी थी, इसलिए कहा जाता है कि उनके दस सिर इसी कारण से थे. वे तंत्र शास्&#x200d;त्र और ज्&#x200d;योतिष पर किताब लिख चुके हैं जिसका नाम रावण संहिता है जिसे ज्&#x200d;योतिष की सबसे बेहतरीन किताब माना जाता है. इस वजह से उनमें बहुत अधिक आत्मविश्वास और अहंकार आ गया था. इसी का परिणाम था कि भगवान राम ने उन्&#x200d;हें लड़ाई के दौरान मार डाला था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="563" height="307" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/raavan-1.png" alt="" class="wp-image-67324" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/raavan-1.png 563w, https://www.patnanow.com/assets/2022/10/raavan-1-350x191.png 350w" sizes="(max-width: 563px) 100vw, 563px" /></figure>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color">रावण से संबंधित 10 अज्ञात बातें जो आप नहीं जानते </p>



<p>1. क्या आप जानते हैं कि रावण को यह नाम शिव से मिला था?</p>



<p>यह तब हुआ जब रावण शिव को कैलाश से लंका में स्थानांतरित करना चाहता था, जिसके लिए उसने पर्वत उठा लिया था. लेकिन शिव ने पर्वत पर अपना पैर रख दिया और अपनी एक पैर की अंगुली से रावण की अंगुली कुचल दी. रावण दर्द से दहाड़ा, लेकिन वो शिव की शक्ति को जानता था इसीलिए उसने शिव तांडव स्त्रोतम् प्रदर्शन शुरू कर दिया. और ये कहा जाता है कि रावण ने अपने 10 में से 1 सिर को वीणा की तुम्बी के रूप में, अपने एक हाथ को धरनी के रूप में और स्ट्रिंग के रूप में अपनी तंत्रिकाओं के उपयोग से एक वीणा को रूपांकित किया जो रूद्र-वीणा के नाम से जानी जाती है . इससे शिव प्रभावित हो गए और उसे ‘रावण’, जो व्यक्ति जोर से दहाड़ता है, का नाम दिया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="426" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravvan_4721174-m-650x426.jpg" alt="" class="wp-image-67325" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravvan_4721174-m-650x426.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravvan_4721174-m-350x229.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravvan_4721174-m-768x503.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravvan_4721174-m.jpg 835w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>2. यह आश्चर्यजनक बात है कि रावण ने राम के लिए एक यज्ञ का प्रदर्शन किया था और जब वह मर रहा था तब उसने लक्ष्मण को बहुमूल्य ज्ञान प्रदान किया था.रामायण के अनुसार, यह कहा जाता है कि राम की सेना को लंका जाने के लिए पुल का निर्माण करना था जिसके लिए शिव का आशीर्वाद चाहिए था. इसके लिए उन्होंने यज्ञ की स्थापना की, और उस समय की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि रावण पूरी दुनिया में शिव का सबसे बड़ा भक्त था और वह आधा ब्राह्मण भी था, इसीलिए यज्ञ को स्थापित करने के लिए वह सबसे उचि&#x200d;त व्यक्ति था. रावण ने यज्ञ का प्रदर्शन किया और राम को अपना आशीर्वाद दिया.इसके आलावा, हम सब जानते हैं की रावण अभी तक के सबसे विद्वान व्यक्ति रहे हैं. इसीलिए जब रावण मर रहा था तो राम ने लक्ष्&#x200d;मण को शासन कला और कूटनीति में महत्वपूर्ण सबक सीखने के लिए रावण के बगल में बैठने को कहा था.</p>



<p>3. पुष्पक विमान एक ऐसा हवाई जहाज था जिसे केवल कुछ ही लोग नियंत्रित कर सकते थे और रावण ने अपने दम पर इसे नियंत्रित करना सीख लिया था. रावण के पास इस तरह के कई हवाई जहाज थे और उन्हें उतारने के लिए हवाई अड्डे भी थे.महियांगना में वैरागनटोटा और गुरुलुपोथा, होर्टन मैदानों में थतूपोल कांदा, कुरुनेगाला में वारियापोला,  कुछ ऐसे जगहें हैं लंका में जिन्हें आज भी हवाई अड्डे के रूप में देखा जाता हैं जिसे रावण ने उपयोग किया था. इसके अलावा, रावण एक असाधारण वीणा वादक भी था  और ऐसा माना जाता है कि उनको संगीत में गहरी रूचि थी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravan.jpg" alt="" class="wp-image-67326" width="532" height="670"/></figure>



<p>4. रावण एक असीम गति का आदमी था . उन्होंने किसी से भी तेज होने की तकनीक में महारथ हासिल कर ली थी और इसीलिए वह किसी की भी कैद के हर प्रयास से बच जाता था. वह इतना शक्तिशाली था कि वह ग्रहों की स्थिति को  भी बदल सकता था .अपने बेटे मेघनाद के जन्म के दौरान, रावण ने सभी ग्रहों को अपने बेटे के ग्यारहवें घर में रहने का निर्देश दिया था परंतु शनि या शनि गृह ने ऐसा करने से इंकार कर दिया और वे बारहवें घर में स्थापित रहे. शनि देव के इस व्यवहार के कारण, रावण ने उन्हें गिरफ्तार कर कारावास में डाल दिया था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravan-1.jpg" alt="" class="wp-image-67327" width="478" height="560" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravan-1.jpg 360w, https://www.patnanow.com/assets/2022/10/ravan-1-299x350.jpg 299w" sizes="(max-width: 478px) 100vw, 478px" /></figure>



<p><strong>5. क्या आप जानते हैं की कुम्भकरण और रावण विष्णु के द्वार रक्षक (द्वारपाल) के अवतार थे?</strong></p>



<p>जय और विजय भगवान विष्णु के स्वर्गीय निवास, वैकुंठ के द्वार रक्षक (द्वारपाल) थे. एक बार भगवान ब्रह्मा के चार कुमार भगवन विष्णु से वैकुंठ मिलने गए. इन चारों कुमारों ने ब्रह्मचर्य (कुंवारापन) का पथ चुना और अपने दिव्य पिता से अनुरोध किया कि वह उनको सदा पांच वर्ष के रहने का वरदान प्रदान करें.यह सोच कर की वह शरारती बच्चे हैं, जय और विजय ने उन्हें वैकुण्ठ के भीतर जाने से यह कह कर रोक दिया की विष्णु अभी आराम कर रहे हैं और इसलिए इस वक़्त नहीं मिल सकते. इससे नाराज़, कुमारों ने उनसे कहा कि विष्णु भगवान हमेशा अपने भक्तों के लिए उपलब्ध रहते हैं, चाहे वह किसी भी समय उन्हें बुलाएँ.फिर उन्होंने जय और विजय को श्राप दिया कि वह अपने भगवान से अलग हो जायेंगे. जब उन्होंने माफ़ी मांगी, तब कुमारों ने कहा कि या तो वह सात जन्मों तक धरती पर विष्णु के अवतार के सहयोगी दलों के रूप में रहें या फिर तीन जन्म उनके दुश्मन के रूप में व्यतीत कर सकते हैं. उन्होंने बाद वाला विकल्प चुना. उन तीन जन्मों में से एक जन्म में वह रावण और कुम्भकरण के रूप में आये.</p>



<p>6. हम जानते हैं कि रावण ने सीता का अपहरण किया, अजीब और आश्चर्यजनक बात ये है की &#8216;रामायण&#8217; जैन मूलपाठ के अनुसार, रावण सीता का पिता था और जातिवाद के विरुद्ध भी था.दोनों राम और रावण जैनियों के भक्त थे . रावण जादुई शक्तियों का विद्याधर राजा था . इसके अलावा जैनियो के विचार के अनुसार यह भी कहा जाता है कि रावण को राम ने नहीं अपितू लक्ष्मण ने मारा था. यह घटनाएँ 20 वे तीर्थंकर मुनिसुव्रत के समय की कही जाती है.</p>



<p>7. रावण से सीखने के लिए बहुत सारी चीज़ें हैं, भले ही वह बुराई का प्रतीक है. उन्होंने बहुत से तांत्रिक उपाय बताए है, जिनमें से एक है, कैसे हम अचानक से अमीर बन सकते हैं. इस उपाय को करने के लिए, कोई भी शुभ दिन पर सुबह जल्दी उठकर दिनचर्या को पूरा करके पवित्र नदी या जलाशय जाएँ. किसी भी एक पेड़ के नीचे शांत और एकांत स्थान को देखे और एक चमड़े की सीट को फैला ले .फिर किसी बैठक पर बैठकर 21 दिनों के लिए इस धन मंत्र का जाप करें . और इस जप के लिए रुद्राक्ष मोतियों का इस्तेमाल करें. 21 दिनों के बाद अचानक धन की आय से आप आश्चर्यचकित हो जायेंगे.</p>



<p><strong>8. क्या आप रावण की मौत के पीछे की कहानी को जानते हैं?</strong></p>



<p>अनर्नेय रघुवंश में एक निरपेक्ष प्रतापी राजा था. रावण जब पूरे संसार पर कब्ज़ा करने के लिए निकले तब अनर्नेय से मिले, और उनके बीच घमासान युद्ध हुआ. राजा अनर्नेय उस युद्ध में अपनी जान गवां बैठे परंतु मरने से पहले उन्होंने रावण को श्राप दिया कि उसको मारने वाला अनर्नेय के वंश की पीढ़ी में से कोई होगा. बाद में, भगवान राम ने अनर्नेय के वंश में जन्म ले कर रावण का वध किया.</p>



<p>9. अजीब परंतु आश्चर्यजनक बात यह है कि रावण को महसूस होने लगा था कि उसकी बसाई हुई दुनिया का अंत होने वाला है.वह अपनी किस्मत जानता था कि उसकी मौत विष्णु के अवतार से होगी, और इससे मोक्ष प्राप्त होगा और राक्षस की योनी से मुक्ति मिलेगी.</p>



<p><strong>10. रावण के 10 सिरों के पीछे की कहानी जो की बहुत अद्भुत है.</strong></p>



<p>रामायण के कुछ संस्करणों के अनुसार, रावण के दस सि&#x200d;र थे ही नहीं बल्कि ऐसा प्रतीत होता था, जो रावण की माँ ने रावण को नौ मोतियों के हार के रूप में दिया था इससे किसी भी देखने वाले को एक ऑप्टिकल भ्रम पैदा हो जाता था. और कुछ अन्य संस्करणों में यह कहा गया है की शिव को खुश करने के लिए, रावण ने अपने सि&#x200d;र के टुकड़े कर दिए थे, इतनी भक्ति देख कर शिव ने हर एक टुकड़े को एक नए सि&#x200d;र में पिरो दिया. उसके दस सर थे काम (हवस), क्रोध (गुस्सा) मोह (भ्रम), लोभ (लालच), मादा (गौरव), विद्वेष (ईर्ष्या), मानस (मन), बुद्धि (ज्ञान), चित्त (इच्छापत्र), और अहंकार (अहंकार) &#8211; यह सब  दस सि&#x200d;र बनाते हैं. और इसीलिए रावण के पास ये सब गुण थे.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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