<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>rathyatra &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
	<atom:link href="https://www.patnanow.com/tag/rathyatra/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.patnanow.com</link>
	<description>Patna News Portal - हर ख़बर पर नज़र</description>
	<lastBuildDate>Tue, 20 Jun 2023 05:25:41 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.6.1</generator>

<image>
	<url>https://www.patnanow.com/assets/2022/08/cropped-PatnaNow_Logo_2022-32x32.png</url>
	<title>rathyatra &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
	<link>https://www.patnanow.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>पुरी में भगवान जगन्नाथ का रथयात्रा आज से</title>
		<link>https://www.patnanow.com/rath-yatra-of-lord-jagannath-in-puri-from-today/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Jun 2023 05:25:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[bhagvan jagarnnath]]></category>
		<category><![CDATA[bhuvneshvar]]></category>
		<category><![CDATA[puri]]></category>
		<category><![CDATA[rathyatra]]></category>
		<category><![CDATA[udisa]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=75535</guid>

					<description><![CDATA[रथ बनाने के लिए सोने की कुल्हाड़ी का होता है उपयोग 742 चूल्हों पर बन रहा है भगवान जगन्नाथ के लिए प्रसाद विशाल रथों को हजारों लोग मोटे-मोटे रस्सों से खींचते हैं पुरी में आज से भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा की शुरुआत हो रही है. रात 10:04 बजे जगन्नाथ जी, बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ निकलेंगे. अगले दिन रात 7.09 बजे वे अपनी मौसी के घर, यानी गुंडिचा मंदिर जाएंगे और 9 दिनों तक वहीं रुकेंगे. इसके बाद वापस जगन्नाथ मंदिर लौट आएंगे.यात्रा के लिए तीन भव्य रथ बनाए गए हैं. पहले रथ में भगवान जगन्नाथ, दूसरे रथ में बलराम और तीसरे रथ में सुभद्रा सवार होंगी. भगवान जगन्&#x200d;नाथ भी इस बात से अछूते नहीं हैं. जब रथ पर सवार होकर हर साल भगवान जगन्&#x200d;नाथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा जाते हैं तो वहां उनका भी लाड़-दुलार बहुत खास तरीके से होता है. उन्&#x200d;हें तमाम पसंदीदा व्&#x200d;यंजनों का भोग लगाया जाता है. आइए जानते हैं इस पूरी यात्रा के दौरान क्&#x200d;या-क्&#x200d;या होता है और कैसे की जाती है भगवान जगन्&#x200d;नाथ की पूजा. सोने की झाड़ू से सफाई रथयात्रा आरंभ होने से पूर्व पुराने राजाओं के वंशज पारंपरिक ढंग से सोने की झाड़ू से ठाकुरजी के प्रस्थान मार्ग को बुहारते हैं. इसके बाद मंत्रोच्चार एवं जयघोष के साथ रथयात्रा शुरू होती है. कई वाद्ययंत्रों की ध्वनि के मध्य विशाल रथों को हजारों लोग मोटे-मोटे रस्सों से खींचते हैं. सबसे पहले बलभद्र का रथ तालध्वज प्रस्थान करता है. थोड़ी देर बाद सुभद्रा की यात्रा शुरू होती है. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p class="has-white-color has-luminous-vivid-orange-background-color has-text-color has-background"><strong>रथ बनाने के लिए सोने की कुल्हाड़ी का होता है उपयोग </strong></p>



<p class="has-white-color has-luminous-vivid-orange-background-color has-text-color has-background"><strong>742 चूल्हों पर बन रहा है भगवान जगन्नाथ के लिए  प्रसाद</strong></p>



<p class="has-white-color has-luminous-vivid-orange-background-color has-text-color has-background"><strong>विशाल रथों को हजारों लोग मोटे-मोटे रस्सों से खींचते हैं</strong></p>



<p>पुरी में आज से भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा की शुरुआत हो रही है. रात 10:04 बजे जगन्नाथ जी, बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ निकलेंगे. अगले दिन रात 7.09 बजे वे अपनी मौसी के घर, यानी गुंडिचा मंदिर जाएंगे और 9 दिनों तक वहीं रुकेंगे. इसके बाद वापस जगन्नाथ मंदिर लौट आएंगे.यात्रा के लिए तीन भव्य रथ बनाए गए हैं. पहले रथ में भगवान जगन्नाथ, दूसरे रथ में बलराम और तीसरे रथ में सुभद्रा सवार होंगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/jagarnnath-650x488.png" alt="" class="wp-image-75540" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/jagarnnath-650x488.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/jagarnnath-350x263.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/jagarnnath.png 700w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>भगवान जगन्&#x200d;नाथ भी इस बात से अछूते नहीं हैं. जब रथ पर सवार होकर हर साल भगवान जगन्&#x200d;नाथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा जाते हैं तो वहां उनका भी लाड़-दुलार बहुत खास तरीके से होता है. उन्&#x200d;हें तमाम पसंदीदा व्&#x200d;यंजनों का भोग लगाया जाता है. आइए जानते हैं इस पूरी यात्रा के दौरान क्&#x200d;या-क्&#x200d;या होता है और कैसे की जाती है भगवान जगन्&#x200d;नाथ की पूजा.</p>



<p><strong>सोने की झाड़ू से सफाई</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="416" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/rath-yatra-416x650.png" alt="" class="wp-image-75541" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/rath-yatra-416x650.png 416w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/rath-yatra-224x350.png 224w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/rath-yatra.png 512w" sizes="(max-width: 416px) 100vw, 416px" /></figure>



<p>रथयात्रा आरंभ होने से पूर्व पुराने राजाओं के वंशज पारंपरिक ढंग से सोने की झाड़ू से ठाकुरजी के प्रस्थान मार्ग को बुहारते हैं. इसके बाद मंत्रोच्चार एवं जयघोष के साथ रथयात्रा शुरू होती है. कई वाद्ययंत्रों की ध्वनि के मध्य विशाल रथों को हजारों लोग मोटे-मोटे रस्सों से खींचते हैं. सबसे पहले बलभद्र का रथ तालध्वज प्रस्थान करता है. थोड़ी देर बाद सुभद्रा की यात्रा शुरू होती है. अंत में लोग जगन्नाथ जी के रथ को बड़े ही श्रद्धापूर्वक खींचते हैं. लोग मानते हैं कि रथयात्रा में सहयोग से मोक्ष मिलता है, अत: सभी कुछ पल के लिए रथ खींचने को आतुर रहते हैं. जगन्नाथजी की यह रथयात्रा गुंडीचा मंदिर पहुंचकर संपन्न होती है. गुंडीचा मंदिर वहीं है, जहां विश्वकर्मा ने तीनों देव प्रतिमाओं का निर्माण किया था. इसे गुंडीचा बाड़ी भी कहते हैं. यह भगवान की मौसी का घर भी माना जाता है. सूर्यास्त तक यदि कोई रथ गुंडीचा मंदिर नहीं पहुंच पाता तो वह अगले दिन यात्रा पूरी करता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="390" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/rath-650x390.png" alt="" class="wp-image-75542" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/rath-650x390.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/rath-350x210.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/rath-768x461.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/rath.png 1200w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>गुंडीचा मंदिर में भगवान एक सप्ताह प्रवास करते हैं. इस बीच इनकी पूजा अर्चना यहीं होती है. ये रथ यहां पर सात दिन तक रहते हैं. यहां पर इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था काफी चुस्त व दुरुस्त रखी जाती है. इस एक सप्&#x200d;ताह के दौरान यहां विभिन्&#x200d;न उत्&#x200d;सवों का आयोजन होता है और भगवान को विभिन्&#x200d;न व्&#x200d;यंजनों का भोग लगाया जाता है. इस दौरान भगवान जगन्&#x200d;नाथ और उनके भाई-बहन बलभद्र और सुभद्रा का लाड़ प्&#x200d;यार ठीक उसी तरह होता है जैसे बच्&#x200d;चों को अपनी मौसी के घर में प्&#x200d;यार मिलता है. आषाढ़ शुक्ल दशमी को जगन्&#x200d;नाथजी की वापसी यात्रा शुरू होती है. इसे बाहुड़ा यात्रा कहते हैं. शाम से पूर्व ही रथ जगन्&#x200d;नाथ मंदिर तक पहुंच जाते हैं. जहां एक दिन प्रतिमाएं भक्तों के दर्शन के लिए रथ में ही रखी रहती हैं. अगले दिन प्रतिमाओं को मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के गर्भगृह में पुन: स्थापित कर दिया जाता है. मंदिर में भगवान जगन्&#x200d;नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा की सौम्य प्रतिमाओं को श्रद्धालु एकदम निकट से देख सकते हैं. भक्त एवं भगवान के बीच यहां कोई दूरी नहीं रखी जाती. काष्ठ की बनी इन प्रतिमाओं को भी कुछ वर्ष बाद बदलने की परंपरा है. जिस वर्ष अधिक मास रूप में आषाढ़ माह अतिरिक्त होता है उस वर्ष भगवान की नई मूर्तियां बनाई जाती हैं. यह अवसर भी उत्सव के रूप में मनाया जाता है. पुरानी मूर्तियों को मंदिर परिसर में ही समाधि दी जाती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/puri-650x488.png" alt="" class="wp-image-75543" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/06/puri-650x488.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/puri-350x263.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/puri-768x576.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/06/puri.png 1200w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>रथयात्रा यहां का सामुदायिक पर्व है. घरों में कोई भी पूजा इस अवसर पर नहीं होती और न ही कोई उपवास रखा जाता है. जगन्&#x200d;नाथपुरी और भगवान जगन्&#x200d;नाथ की कुछ मौलिक विशेषताएं हैं. माना जाता है कि यहां सभी घरों के भगवान जगन्&#x200d;नाथजी हैं. जब रथ यात्रा का पर्व होता है तो लोग अपने घरों में पूजा करने के स्&#x200d;थान पर रथ यात्रा में शामिल होते हैं. रथ के निर्माण का कार्य अक्षय तृतीया से ही शुरू हो जाता है. बलदेव, श्रीकृष्ण व सुभद्रा के लिए अलग-अलग तीन रथ बनाए जाते हैं.</p>



<p>आषाढ़ की शुक्ल द्वितीय को तीनों रथों को &#8216;सिंहद्वार&#8217; पर लाया जाता है. स्नान व वस्त्र पहनाने के बाद प्रतिमाओं को अपने-अपने रथ में रखा जाता है. इसे पहोन्द्रि महोत्सव कहते हैं. जब रथ तैयार हो जाते हैं, तब पुरी के राजा एक पालकी में आकर इनकी पूजा करते हैं तथा प्रतीकात्मक रूप से रथ मण्डप को सोने की झाडू से साफ करते हैं. इस परंपरा को छर पहनरा कहते हैं.अब सर्वाधिक प्रतीक्षित व शुभ घड़ी आती है. ढोल, नगाड़ों, तुरही तथा शंखध्वनि के बीच भक्तगण इन रथों को खींचते हैं. भव्य रथ घुमावदार मार्ग पर आगे बढ़ते हैं तथा गुडींचा मंदिर के पास रुकते हैं. ये रथ यहा पर सात दिन तक रहते हैं.आषाढ़ दसवीं को रथों की मुख्य मंदिर की ओर पुर्नयात्रा प्रारंभ होती है. सभी रथों को मंदिर के ठीक सामने लाया जाता है, परन्तु प्रतिमाएं अभी एक दिन तक रथ में ही रहती हैं.आषाढ़ एकादशी के दिन मंदिर के द्वार देवी &#8211; देवताओं के लिए खोल दिए जाते हैं, तब इनका शृंगार विभिन्न आभूषणों व शुद्ध स्वर्ण से किया जाता है. इस धार्मिक कार्य को सुनबेसा कहा जाता है. मूर्तियों को मंदिर में फिर से स्&#x200d;थापित कर दिया जाता है और इसी के साथ संपन्&#x200d;न होती है रथ यात्रा.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
