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	<title>rangmanch &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>कहीं चुनावी समीकरण बिगाड़ न दें रंगमंचीय कलाकार !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 04:50:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[मेयर चुनाव में वोट देने के लिए रंगकर्मियों ने की बैठक रंगकर्मियों ने कहा-&#8220;जो करेगा रंगमंच की बात, रंगकर्मी होंगे उनके साथ&#8221; आरा, 26 सितंबर. नगर निगम में चुनावी शंखनाद में कई लोग कूद पड़े हैं इस बार अपना भाग्य आजमाने. अब सबको चुनाव चिन्ह भी मिलेंगे और फिर जनता के बीच एक बार पुनः मिलने का कार्यक्रम शुरू होगा. ऐसे में रंग नगरी आरा में रंगकर्मियों ने भी नया रुख अख्तियार किया है. शहर के कलक्ट्री तालाब पर रविवार की सुबह आरा नगर निगम चुनाव 2022 के महापौर और उपमहापौर के चुनाव के मुद्दे पर आरा रंगमंच के कलाकारों ने एक बैठक की और यह तय किया कि जो रंगमंच और रंगकर्मियों की बात करेगा रंगमंच के कलाकार उनके साथ ही रहेंगे. बैठक की अध्यक्षता ऑल इंडिया थिएटर काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अशोक मानव ने किया. बैठक में निगम चुनाव 2022 के प्रत्याशियों पर विस्तार से चर्चा हुई. विदित हो कि शहर में रंगकर्मी कलाकारों की संख्या हजारों में है. बैठक में वरिष्ठ रंगकर्मी निर्देशक मनोज सिंह ने कहा कि जो प्रत्याशी अपनी कला संस्कृति, अपनी सांस्कृतिक विरासत की बात करेंगे हम सभी कलाकार उनको समर्थन करेंगे. आरा रंगमंच के संयोजक व रंगकर्मी अनिल कुमार तिवारी दीपू ने कहा की हम सभी कलाकार इस बार वैसे महापौर का चुनाव करें जो हम कलाकारों के भविष्य की सोचे. वरिष्ठ रंगकर्मी ओ पी पाण्डेय ने कहा कि आरा नगरी में रंगकर्म का इतिहास 160 वर्षों का है, लेकिन इस शहर में एक अच्छा प्रेक्षागृह और आर्ट गैलरी नही है. किस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मेयर चुनाव में वोट देने के लिए रंगकर्मियों ने की बैठक</strong></p>



<p><strong>रंगकर्मियों ने कहा-&#8220;जो करेगा रंगमंच की बात, रंगकर्मी होंगे उनके साथ&#8221;</strong></p>



<p>आरा, 26 सितंबर. नगर निगम में चुनावी शंखनाद में कई लोग कूद पड़े हैं इस बार अपना भाग्य आजमाने. अब सबको चुनाव चिन्ह भी मिलेंगे और फिर जनता के बीच एक बार पुनः मिलने का कार्यक्रम शुरू होगा. ऐसे में रंग नगरी आरा में रंगकर्मियों ने भी नया रुख अख्तियार किया है. शहर के कलक्ट्री तालाब पर रविवार की सुबह आरा नगर निगम चुनाव 2022 के महापौर और उपमहापौर के चुनाव के मुद्दे पर आरा रंगमंच के कलाकारों ने एक बैठक की और यह तय किया कि जो रंगमंच और रंगकर्मियों की बात करेगा रंगमंच के कलाकार उनके साथ ही रहेंगे. बैठक की अध्यक्षता ऑल इंडिया थिएटर काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अशोक मानव ने किया. बैठक में निगम चुनाव 2022 के प्रत्याशियों पर विस्तार से चर्चा हुई. विदित हो कि शहर में रंगकर्मी कलाकारों की संख्या हजारों में है. बैठक में वरिष्ठ रंगकर्मी निर्देशक मनोज सिंह ने कहा कि जो प्रत्याशी अपनी कला संस्कृति, अपनी सांस्कृतिक विरासत की बात करेंगे हम सभी कलाकार उनको समर्थन करेंगे. आरा रंगमंच के संयोजक व रंगकर्मी अनिल कुमार तिवारी दीपू ने कहा की हम सभी कलाकार इस बार वैसे महापौर का चुनाव करें जो हम कलाकारों के भविष्य की सोचे. वरिष्ठ रंगकर्मी ओ पी पाण्डेय ने कहा कि आरा नगरी में रंगकर्म का इतिहास 160 वर्षों का है, लेकिन इस शहर में एक अच्छा प्रेक्षागृह और आर्ट गैलरी नही है. किस बात का चुनाव होता है हर बार जब शहर की सांस्कृतिक पहचान ही गायब हो जाये. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="330" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/PNC_rangkarmiyo-ne-ki-baithak.jpg" alt="" class="wp-image-66958" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/PNC_rangkarmiyo-ne-ki-baithak.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/PNC_rangkarmiyo-ne-ki-baithak-350x178.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>शहर में एक आधुनिक प्रेक्षागृह की जरुरत है. रंगकर्मी मनोज श्रीवास्तव व लड्डू भोपाली ने कहा कि हम सभी कलाकार अपने स्तर से मतदाता जागरूकता अभियान चलाएंगे. यूट्यूब स्टार साहेब लाल यादव ने कहा कि कलाकार शुरू से उपेक्षित रहे है.सर्व सम्मति निर्णय लिया गया कि अक्टूबर के दूसरे रंगकर्मी किसे समर्थन देगें. सप्ताह में एक वृहद कार्यक्रम होगा केंद्र सरकार से कलाकार एवं वृद्ध नागरिकों का रेलवे टिकट रिआयत पुनः बहाल करवाने के लिए रंगकर्मी उपस्थित रहे. बताते चलें कि कोरोना काल में भी कलाकारों का हाल किसी ने नही पूछा. कोरोना काल के बात भी आजतक रंगकर्मियों की स्थिति बहुत ही खराब है. शहर में भी केवल निर्माण हो रहा है. सांस्कृतिक भवन तो जरूर बन गया लेकिन ठेके देने में ऐसे लोगों को चिन्हित किया गया जिन्होंने सिर्फ भवन बनाया उसमें स्टेज पर खड़े लोगों को एक दूसरे की आवाज नही सुनाई पड़ती. ऐसे में ऐसे सांस्कृतिक भवन का क्या काम!</p>



<p>हालांकि रंगमंच के इन कलाकारों ने अभी तक किसी का नाम नही लिया कि किसको ये वोट देंगे लेकिन इतना तो जरूर है इनलोगों की हर घरों के बीच अपनी एक खास पकड़ है. इनके जादू का असर जब मंच से हो जाता है तो घर जाकर जागरूक करने या कहीं नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से ही जागरूकता फैला दिया तो वोट पर प्रभाव पड़ना तो लाज़मी है.</p>



<p>रंगमंच के इन कलाकारों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि रेलवे में वृद्ध यात्रियों और कलाकारों के रियायत टिकट को पुनः चालू करने के लिए आगामी 11 अक्टूबर को सुबह 7 बजे जयप्रकाश स्मारक पर उपवास करेंगे. अगले बैठक में यह फैसला लिया जाएगा कि किस प्रत्याशी को सर्वसम्मति से वोट दिया जाय. मौके पर लक्ष्मण दुबे, सुधीर शर्मा, डॉ पंकज भट्ट, अम्बुज, कमलेश कुंदन, मो. शमीम समेत दर्जनों लोग उपस्थित थे.</p>



<p>आरा से <strong>सत्य प्रकाश सिंह</strong> की रिपोर्ट</p>
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			</item>
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		<title>क्या आप कर सकते हैं बॉडी ऐक्ट !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/kya-aap-kar-sakte-hain-body-act/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jul 2021 16:13:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[नाट्य कार्यशाला : 4th Day यूज ऑफ प्रॉप्स के साथ किया बॉडी एक्ट आरा, 20 जुलाई. अभिनय एवं ऐक्ट द्वारा आयोजित 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के चौथे दिन बच्चों ने वरिष्ठ रंगकर्मी व नाट्य गुरु चन्द्रभूषण पांडेय से तालीम लिया. रमना मैदान के दक्षिणी रोड में स्थित मंगलम दी वेन्यू में बच्चों को कार्यशाला में प्रशिक्षक चंद्रभूषण पांडेय ने बॉडी ऐक्ट की बारीकियों को बताया. उन्होंने बच्चों को बड़ी सहजता के साथ बतलाया कि वे भी उनसे सीखने आये हैं. ये सहजता बच्चों में आत्मबल को बढ़ाने और उनकी झिझकता को दूर करने के लिए उन्होंने अपनायी. उन्होंने बताया कि फेस एक्सप्रेशन से पहले बॉडी के एक्सप्रेशन की जरूरत होती है और इसके लिए पूरे बॉडी पर एक्टर का कमांड रहना बेहद जरूरी है. उन्होंने कई शारीरिक चाल को प्रैक्टिकल के रूप में कर के दिखाया और फिर यूज ऑफ प्रॉप्स के बारे में बताया. उन्होंने इसके साथ ही तुरन्त 8 तरह के प्रॉप्स का उपयोग करने को बच्चों को दे दिया. सभी ने प्रॉप्स का उपयोग तरह-तरह से अपनी कल्पना के चरित्रों के साथ उसे फिट कर दिखाया. चंद्रभूषण पांडेय: चंद्रभूषण पांडेय जिले के ऐसे चर्चित रंगकर्मी हैं जिन्होंने इस शहर को कई अच्छे अभिनेता और निर्देशक दिए हैं. स्कूल के जमाने मे वे राष्ट्रीय हॉकी प्लेयर भी रह चुके हैं. 4 दर्जन से उपर नाट्य कार्यशालाओं में जहाँ वे हजारों बच्चों को प्रशिक्षण दे चुके हैं वही रश्मि-रथी जैसे काव्य के नाट्य रूपांतरण के लिए भी देश मे प्रचलित हैं. वे बेहद सादे और सहज व्यक्तित्व के धनी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नाट्य कार्यशाला : 4th Day</strong><br> <strong>यूज ऑफ प्रॉप्स के साथ किया बॉडी एक्ट </strong></p>



<p>आरा, 20 जुलाई. अभिनय एवं ऐक्ट द्वारा आयोजित 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के चौथे दिन बच्चों ने वरिष्ठ रंगकर्मी व नाट्य गुरु चन्द्रभूषण पांडेय से तालीम लिया. रमना मैदान के दक्षिणी रोड में स्थित मंगलम दी वेन्यू में बच्चों को कार्यशाला में प्रशिक्षक चंद्रभूषण पांडेय ने बॉडी ऐक्ट की बारीकियों को बताया. </p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day-.jpg" alt="" class="wp-image-54369" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day-.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day--350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>बच्चो से बातें करते रँगगुरु चंद्रभूषण पाण्डेय</figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0040.jpg" alt="" class="wp-image-54368" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0040.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0040-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उन्होंने बच्चों को बड़ी सहजता के साथ बतलाया कि वे भी उनसे सीखने आये हैं. ये सहजता बच्चों में आत्मबल को बढ़ाने और उनकी झिझकता को दूर करने के लिए उन्होंने अपनायी. उन्होंने बताया कि फेस एक्सप्रेशन से पहले बॉडी के एक्सप्रेशन की जरूरत होती है और इसके लिए पूरे बॉडी पर एक्टर का कमांड रहना बेहद जरूरी है. उन्होंने कई शारीरिक चाल को प्रैक्टिकल के रूप में कर के दिखाया और फिर यूज ऑफ प्रॉप्स के बारे में बताया. उन्होंने इसके साथ ही तुरन्त 8 तरह के प्रॉप्स का उपयोग करने को बच्चों को दे दिया. सभी ने प्रॉप्स का उपयोग तरह-तरह से अपनी कल्पना के चरित्रों के साथ उसे फिट कर दिखाया.</p>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background">चं<strong>द्रभूषण पांडेय:</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_CB-Pandey.jpg" alt="" class="wp-image-54365" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_CB-Pandey.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_CB-Pandey-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>नाट्य गुरु चंद्रभूषण पांडेय</figcaption></figure>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background"><br><em><strong>चंद्रभूषण पांडेय जिले के ऐसे चर्चित रंगकर्मी हैं जिन्होंने इस शहर को कई अच्छे अभिनेता और निर्देशक दिए हैं. स्कूल के जमाने मे वे राष्ट्रीय हॉकी प्लेयर भी रह चुके हैं. 4 दर्जन से उपर नाट्य कार्यशालाओं में जहाँ वे हजारों बच्चों को प्रशिक्षण दे चुके हैं वही रश्मि-रथी जैसे काव्य के नाट्य रूपांतरण के लिए भी देश मे प्रचलित हैं. वे बेहद सादे और सहज व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति हैं. उनका मानना है कि थियेटर एक गेम है और इसे अपनी रचनात्मकता से बेहद सुंदर बना दर्शकों को घन्टो बांधा जा सकता है. बेहद प्रैक्टिकल जीवन जीने वाले चंद्रभूषण पांडेय भोजपुर के फरहदा के रहने वाले है और वर्तमान में आरा में रहते हैं. रविन्द्र भारती, सत्यकाम आनन्द, विष्णु शंकर बेलू,विष्णु प्रसाद,धमेंद्र ठाकुर,आलोक सिंह, शैलेन्द्र सच्चु, और ओ पी पांडेय जैसे कई रंगकर्मी और निर्देशक को इन्होंने प्रशिक्षित किया है.</strong></em><strong><em>वे एक अच्छे लेखक,निर्देशक और परिकल्पक के साथ असाधारण व्यक्तित्व के साधारण ढांचे में रहने वाले व्यक्ति हैं. वे कई वर्षों से आखर के वरीय सदस्य के साथ भोजपुरी कवि भी हैं जिनकी कई रचनाओं को आखर मैगजीन ने जगह भी दी है.</em></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day-1.jpg" alt="" class="wp-image-54367" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day-1-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0037.jpg" alt="" class="wp-image-54366" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0037.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0037-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आज कार्यशाला में अतिथि कलाकारों में चित्रकार रौशन राय, कमलेश कुंदन और कौशलेश कुमार ने बच्चों के बीच शिरकत किया और उन्हे उनके तत्क्षण तैयार सिचुएशन पर प्रॉप्स के साथ अभिनय के लिए सराहा. साथ ही उनकी गलतियों को भी उनके समक्ष रखा ताकि उसमें सुधार आये और हीरे की चमक की तरह वे चमक जिले का नाम रौशन करे. कार्यशाला के संयोजक ओ पी पांडेय हैं तथा मैनेजमेंट मनोज श्रीवास्तव देख रहे हैं.</p>



<p>आरा से <strong>सत्य प्रकाश सिंह</strong> की रिपोर्ट</p>
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		<item>
		<title>इम्प्रोवाइजेशन कर प्रस्तुतियां दी तो चकित हो गए देखने वाले!</title>
		<link>https://www.patnanow.com/improvisation-kar-prastuti-to-se-chakit-kiya-kalakaron-ne/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jul 2021 03:32:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[Theatre]]></category>
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					<description><![CDATA[लोकनर्तक पुनेश पार्थ बच्चों के हुए मुरीद, कहा लोक नृत्य के बारीकियों की देंगे बच्चों को तालीम रविंद्र भारती और ओ पी कश्यप ने तीसरे दिन थियेटर की बारीकियों को बताया आरा, 20 जुलाई. कुछ युवा कुछ लोग को पीट रहे थे और कुछ को धमका रहे थे. इस बीच कुछ लोग दहशत के मारे चिल्ला रहे थे और कुछ की साँसे फूली हुई थी&#8230;.. ये नजारा था रमना के दक्षिणी रोड में स्थित मंगलम दी वेन्यू के हॉल के अंदर का. जैसे ही हॉल के अंदर हुआ तो लगा जैसे काठ मार गया. हल्ला-हंगामा देखकर सचमुच डर के मारे जम गया. कुछ देर बार डरा रहे युवाओं के हाथ पर नजर गया तो उन्होंने उंगलियों को गन का शेप दिया था. यह देखकर लगा कि अरे ये तो बनावटी है. दरअसल हॉल के अंदर बच्चे प्लेन हाइजैक का सीन कर रहे थे. जहाँ अभिनव एवं ऐक्ट द्वारा आयोजित 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के तीसरे दिन वरिष्ठ रंगकर्मी व निर्देशक रविन्द्र भारती&#160; बच्चों को अभिनय के लिए मूल तत्वों की उपयोगिता को बता रहे थे. बच्चे उनके द्वारा बताए गए फिलिंग, ऑब्जरवेशन और रिकॉल की विधि को अपना कर उनके द्वारा दिये गए सिचुएशन को तुरंत क्रिएट कर रहे थे. अभिनय के इस कार्यशाला में तीसरे दिन फीलिंग, ऑब्सरबेशन और रिकॉल की तकनीकी चीजो के बारे में जाना. इन तीनो को कैसे एक व्यक्ति के अंदर विकसित किया जाय और फिर कैसे थियेटर में इसे यूज किया जाय इसको बच्चों ने समझा.&#160; तरह-तरह के सिचुएशन को तुरंत करने के लिए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>लोकनर्तक पुनेश पार्थ बच्चों के हुए मुरीद, कहा लोक नृत्य के बारीकियों की देंगे बच्चों को तालीम</strong></p>



<p><strong>रविंद्र भारती और ओ पी कश्यप ने तीसरे दिन थियेटर की बारीकियों को बताया</strong></p>



<p>आरा, 20 जुलाई. कुछ युवा कुछ लोग को पीट रहे थे और कुछ को धमका रहे थे. इस बीच कुछ लोग दहशत के मारे चिल्ला रहे थे और कुछ की साँसे फूली हुई थी&#8230;.. ये नजारा था रमना के दक्षिणी रोड में स्थित मंगलम दी वेन्यू के हॉल के अंदर का. जैसे ही हॉल के अंदर हुआ तो लगा जैसे काठ मार गया. हल्ला-हंगामा देखकर सचमुच डर के मारे जम गया. कुछ देर बार डरा रहे युवाओं के हाथ पर नजर गया तो उन्होंने उंगलियों को गन का शेप दिया था. यह देखकर लगा कि अरे ये तो बनावटी है. दरअसल हॉल के अंदर बच्चे प्लेन हाइजैक का सीन कर रहे थे. जहाँ अभिनव एवं ऐक्ट द्वारा आयोजित 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के तीसरे दिन वरिष्ठ रंगकर्मी व निर्देशक रविन्द्र भारती&nbsp; बच्चों को अभिनय के लिए मूल तत्वों की उपयोगिता को बता रहे थे. बच्चे उनके द्वारा बताए गए फिलिंग, ऑब्जरवेशन और रिकॉल की विधि को अपना कर उनके द्वारा दिये गए सिचुएशन को तुरंत क्रिएट कर रहे थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="385" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG_20210721_084322.jpg" alt="" class="wp-image-54354" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG_20210721_084322.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG_20210721_084322-350x207.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>हाइजैकिंग के सीन के दौरान एक बच्चा अपनी बहन को बचाने के लिए आतंकी के कंधे पर चढ़ उससे लोहा लेते दिखा जो सिन को जीवंत कर गया.</figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="388" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-05.jpg" alt="" class="wp-image-54353" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-05.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-05-350x209.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>हाइजैकिंग के सीन को अभिनय से दिखाते कार्यशाला के बच्चे</figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="376" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-04.jpg" alt="" class="wp-image-54352" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-04.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-04-350x202.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>हाइजैकिंग के सीन को अभिनय से दिखाते कार्यशाला के बच्चे</figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="387" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-03.jpg" alt="" class="wp-image-54351" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-03.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-03-350x208.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>हाइजैकिंग के सीन को अभिनय से दिखाते कार्यशाला के बच्चे</figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG_20210720_125444.jpg" alt="" class="wp-image-54350" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG_20210720_125444.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG_20210720_125444-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>फीलिंग और रेलैक्सेशन कि तकनीक बताते प्रशिक्षक रविन्द्र भारती</figcaption></figure>



<p>अभिनय के इस कार्यशाला में तीसरे दिन फीलिंग, ऑब्सरबेशन और रिकॉल की तकनीकी चीजो के बारे में जाना. इन तीनो को कैसे एक व्यक्ति के अंदर विकसित किया जाय और फिर कैसे थियेटर में इसे यूज किया जाय इसको बच्चों ने समझा.&nbsp; तरह-तरह के सिचुएशन को तुरंत करने के लिए बच्चों को दिया गया जिसे बच्चों ने बड़े सहजता से किया और लगा जैसे परिपक्व अभिनेता इसे कर रहे हैं. उनकी आपस मे कोऑर्डिनेशन ऐसा था मानो सबने कई दिनों तक प्रैक्टिस किया हो.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="389" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-06.jpg" alt="" class="wp-image-54355" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-06.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Theatre-workshop-3rd-day-06-350x209.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>बच्चों को प्रशिक्षण देते ओ पी कश्यप</figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="391" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG_20210721_084523.jpg" alt="" class="wp-image-54356" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG_20210721_084523.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG_20210721_084523-350x211.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>बच्चों से रु ब रु होते पुनीश पार्थ व मंगलेश तिवारी(दाएं से बाएं)</figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="375" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Punesh-Parth.jpg" alt="" class="wp-image-54357" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Punesh-Parth.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Punesh-Parth-350x202.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>लोक नर्तक पुनीश पार्थ</figcaption></figure>



<p>युवा रंगकर्मी ओ पी कश्यप ने डिक्शन,अनुशासन, और वॉयस के वैरिएशन के बारे में बताया और उसको विकसित करने के तरीकों के बारे में बताया. तीसरे दिन कार्यशाला में कई अतिथियो का भी आगमन हुआ जिन्होंने बच्चों के बीच अपने जीवन के अनुभव को शेयर किया. विवेकानंद पुरस्कार से सम्मानित मशहूर लोकनर्तक पुनेश पार्थ, लेखक राजेन्द्र शर्मा पुष्कर, रंगकर्मी-पत्रकार मंगलेश तिवारी और रोबोटिक टेक्नोलॉजी पर कार्य करने वाले लव कुमार ने आज नाट्य कार्यशाला में बच्चों के बीच अपने अनुभव शेयर किए. आये सभी अथितियों ने बच्चों के कार्य को सराहा और महा कि ऐसे कार्यशाला का होना बेहद जरूरी है. ऐसे कार्यशालाओं के जरिये कई नई प्रतिभाओं को निखारा जा सकता है. गेस्ट के रूप में आये पुनेश पार्थ बच्चों की प्रतिभा देख उनके मुरीद हो गए और जब बच्चों ने उनसे ट्रेनिग के लिए समय मांगा तो उन्होंने बच्चों से वादा किया कि वे आने वाले दिनों में लोक नृत्य के गुर इस कार्यशाला में आकर जरुए देंगे. कार्यशाला&nbsp; का मैनेजमेंट मनोज श्रीवास्तव दिख रहे हैं.</p>





<p>आरा से <strong>सत्य प्रकाश सिंह</strong> की रिपोर्ट</p>
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		<title>जहाँगीर खान हुए रंग नगरी आरा के मुरीद, नाट्य प्रशिक्षण देने पहुँचे थे जिला मुख्यालय</title>
		<link>https://www.patnanow.com/jahangir-khan-huye-rang-nagri-aara-ke-murid/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Jul 2021 20:59:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आरा में 20 दिवसीय थियेटर वर्कशॉप आरंभ, प्रशिक्षक जहाँगीर खान ने गदगद हो कहा &#8211; यहाँ असीम सम्भवनाएँ आयोजक ने अतिथियों को उपहार में दिए पौधे आरा,18. किसी भी कार्यक्रम के लिए वह पल तब खास हो जाता है जब वहाँ पहुँचा अतिथि उस कार्यक्रम से प्रभावित हो उसकी तारीफ दूसरों से करने लगे. जी हाँ रविवार को आरा से पटना पहुँचने के बादरंगमंच के जाने-माने रंगकर्मी-निर्देशक जहाँगीर खान ने कुछ ऐसा ही किया. दरअसल मौका था अभिनव एवं ऐक्ट के 20 दिवसीय निःशुल्क नाट्य कार्यशाला के उद्घाटन का जहाँ वे पहले दिन ही बतौर प्रशिक्षक मंगलम द वेन्यू में पहुंचे थे. युवाओं और बच्चों को ट्रेंनिग देने के बाद पटना लौटते ही सोशल मीडिया पर कार्यशाला के बारे में अपने अनुभव को शेयर करते हुए लिखा कि &#8220;आरा की धरती के बारे में सुना था, रविवार को काम करने के बाद युवाओं और बच्चों की ऊर्जा को देखकर अच्छा लगा.&#8221;ये तारीफें उन्होंने आरा और आरा के युवा नवोदित कलाकारों की उर्जा से प्रभावित हो कहीं. उन्होंने थियेटर वर्कशॉप के पहले दिन बच्चों को टीम कोऑर्डिनेशन और टीम कम्युनिकेशन के बारे में कई गतिविधियों और थियेटर गेम के जरिये बताया. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए भी कहा कि बच्चों में काफी संभावनाएं हैं. रंगसंस्था अभिनव एंड एक्टिव क्रिएटिव थिएटर(ऐक्ट) द्वारा आयोजित 20 दिवसीय थियेटर वर्कशॉप का आज से शुभारंभ हो गया. आगामी 6 अगस्त तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि शहर के डॉ विजय कुमार गुप्ता व डॉ संगीता कुमारी गुप्ता ने मंगलम द वेन्यू [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आरा में 20 दिवसीय थियेटर वर्कशॉप आरंभ, प्रशिक्षक जहाँगीर खान ने गदगद हो कहा &#8211; यहाँ असीम सम्भवनाएँ</strong></p>



<p><strong>आयोजक ने अतिथियों को उपहार में दिए पौधे</strong></p>



<p>आरा,18. किसी भी कार्यक्रम के लिए वह पल तब खास हो जाता है जब वहाँ पहुँचा अतिथि उस कार्यक्रम से प्रभावित हो उसकी तारीफ दूसरों से करने लगे. जी हाँ रविवार को आरा से पटना पहुँचने के बाद<br>रंगमंच के जाने-माने रंगकर्मी-निर्देशक जहाँगीर खान ने कुछ ऐसा ही किया. दरअसल मौका था <strong>अभिनव एवं ऐक्ट</strong> के <strong>20 दिवसीय  निःशुल्क नाट्य कार्यशाला </strong>के उद्घाटन का जहाँ वे पहले दिन ही बतौर प्रशिक्षक <strong>मंगलम द वेन्यू</strong> में पहुंचे थे.</p>



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<p></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="393" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Jahangir-khan-Theaterist.jpg" alt="" class="wp-image-54325" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Jahangir-khan-Theaterist.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Jahangir-khan-Theaterist-350x212.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



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<p>युवाओं और बच्चों को ट्रेंनिग देने के बाद पटना लौटते ही सोशल मीडिया पर कार्यशाला के बारे में अपने अनुभव को शेयर करते हुए लिखा कि &#8220;आरा की धरती के बारे में सुना था, रविवार को काम करने के बाद युवाओं और बच्चों की ऊर्जा को देखकर अच्छा लगा.&#8221;<br>ये तारीफें उन्होंने आरा और आरा के युवा नवोदित कलाकारों की उर्जा से प्रभावित हो कहीं. उन्होंने थियेटर वर्कशॉप के पहले दिन बच्चों को टीम कोऑर्डिनेशन और टीम कम्युनिकेशन के बारे में कई गतिविधियों और थियेटर गेम के जरिये बताया. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए भी कहा कि बच्चों में काफी संभावनाएं हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="300" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day10.jpg" alt="" class="wp-image-54333" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day10.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day10-350x162.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>रंगसंस्था अभिनव एंड एक्टिव क्रिएटिव थिएटर(ऐक्ट) द्वारा आयोजित <strong>20 दिवसीय थियेटर वर्कशॉप</strong> का आज से शुभारंभ हो गया. आगामी 6 अगस्त तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि शहर के <strong>डॉ विजय कुमार गुप्ता</strong> व <strong>डॉ संगीता कुमारी गुप्ता</strong> ने <strong><em>मंगलम द वेन्यू </em></strong>में दीप प्रज्ज्वलित कर मंगलमय शुभारंभ किया. इस मौके पर <strong>विशिष्ट अथितियों</strong> के रूप में <em><strong>वरिष्ठ रंगकर्मी व रंग-गुरु चंद्रभूषण पांडेय,संस्था के संरक्षक तारकेश्वर शरण सिन्हा और प्रो नीरज सिंह</strong></em> ने भी संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="486" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day1.jpg" alt="" class="wp-image-54326" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day1-350x262.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



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<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day-4.jpg" alt="" class="wp-image-54328" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day-4.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day-4-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उद्घाटन के इस मौके पर डॉ विजय गुप्ता ने कहा कि अभिनव जैसी संस्था नाट्य कला के लिए जो अद्वितीय कार्य कर रही है वह अनमोल है. कला को नए युवाओं में पिरोने के इस नेक कार्य में जो भी सहयोग होगा उसके लिए मैं हमेशा तैयार हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यह परिवार के अच्छे संस्कार का परिणाम है कि हम जहाँ जन्म लेते हैं उस मिट्टी के लिए सोचते हैं. मैं भी इसी मिट्टी का हूँ और आयोजकों की तारीफ करते हुए कहा कि ये सभी भी इसी मिट्टी के हैं. आज संयोग है कि हम सब यहाँ की धरती और नई पीढ़ी के लिए कुछ कर रहे हैं. क्या पता इन नए पौधों में कला का कौन सा खूबसूरत फूल खिल जाए और इस जनपद का नाम रौशन करे. डॉ संगीता गुप्ता ने इस मौके पर कार्यशाला में आये सभी बच्चों को बधाई दिया और कहा कि आप सभी ऐसे दिग्गजों के बीच हैं जहाँ अपने सपने को कला के माध्यम से साकार कर सकते हैं. इसलिए मन लगाकर सीखिए और इस जिले का नाम रौशन कीजिये. वहीं इस मौके पर प्रो नीरज सिंह ने बच्चो को नाट्य कला के इतिहास के बारे बताया और कहा कि जीवन मे आगे बढ़ने के लिए सबसे जरूरी अनुशासन है. वही संस्था के संरक्षक तारकेश्वर शरण सिन्हा ने कहा कि कला जन्म से ही हमारे अंदर विद्यमान रहती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="298" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day2.jpg" alt="" class="wp-image-54329" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day2.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day2-350x160.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कार्यशाला में नाटक, डांस, म्यूजिक, क्राफ्ट, मेकअप व अन्य कला का निःशुल्क प्रशिक्षण कई नामी प्रशिक्षकों के माध्यम से दिया जाएगा. यह कार्यक्रम 20 दिनों तक लगातार जारी रहेगा. इस मौके पर आगत अतिथियों को संस्था की ओर से पौधा उपहार के रूप में दिया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="379" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day05.jpg" alt="" class="wp-image-54334" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day05.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day05-350x204.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



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<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="295" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day6.jpg" alt="" class="wp-image-54331" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day6.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day6-350x159.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="478" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day7.jpg" alt="" class="wp-image-54332" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day7.jpg 478w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_20-days-workshop-1st-day7-279x350.jpg 279w" sizes="(max-width: 478px) 100vw, 478px" /></figure>



<p>वर्कशॉप के पहले दिन इस मौके पर नन्ही सी खुशी गुप्ता ने एक भजन और एक शास्त्रीय गायन से जहाँ उपस्थित लोगों का मन मोह लिया वही नृत्य पेश कर लोगों की तालियाँ बटोरी. इशिका पांडेय, भव्या समृद्धि, ममता कुमारी, ने जहां सोलो डॉन्स की प्रस्तुति से वाहवाही बटोरी वही शानवी गुप्ता,अंजली और रागिनी ने ग्रुप डांस के जलवे से सबका दिल जीत लिया.</p>



<p>कार्यक्रम का संचालन संयोजक ओ पी पांडेय ने और धन्यवाद ज्ञापन रविन्द्र भारती ने किया. इस मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी व रंगगुरु चंद्रभूषण पांडेय, तारकेश्वर शरण सिन्हा, प्रो नीरज सिंह, लाल मोहन राय, अनिल सिंह, शैलेन्द्र सच्चु, शशि सागर बब्बू, प्रशांत चौधरी, मनोज श्रीवास्तव, सतीश मुन्ना, शमशाद प्रेम, भास्कर मिश्रा, कौशलेश कुमार के साथ प्रशिक्षक जहाँगीर खान और बच्चों के अभिभावक भी मौजूद थे.</p>



<p>आरा से<strong> सत्य प्रकाश सिंह</strong> की रिपोर्ट</p>
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		<title>हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं -परवेज अख्तर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Jul 2021 05:57:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[दुर्भाग्यवश हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं है, जबकि यह उसी का माध्यम है चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम किसी व्यक्ति द्वारा कला-सृजन, उस व्यक्ति के रचनात्मक रुझान और उसकी नैसर्गिक* कला-प्रतिभा पर निर्भर करता है। कलात्मकता का प्रशिक्षण कदाचित सम्भव नहीं है। रंगमंच में प्रशिक्षण दरअसल शिल्प का ही होता है। फिर भी रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम। लेकिन प्रशिक्षण केन्द्र कुछ इस तरह का माहौल या हाइप बनाते हैं, गोया औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नाट्यकर्मी ही रंगमंच के वास्तविक नायक हैं। जबकि वस्तुस्थिति यह है कि बहुत बड़ी संख्या में अप्रशिक्षित या अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित कलाकर्मी रचनात्मक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करते और अति-महत्वपूर्ण रचते हुए दिखते हैं और कला-जगत उनका उच्च-मूल्यांकन भी करता है। हालाँकि सभी कलाओं में शिल्प-के-प्रशिक्षण का अत्यधिक महत्व है; इसका विकल्प नहीं है लेकिन कितने हैं, जिन्हें औपचारिक प्रशिक्षण का अवसर मिल पाता है ? वैसे देखें, तो आप पाएँगे कि अप्रशिक्षित कोई होता नहीं। चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं; जबकि अधिकांश हिन्दी-नाट्यकर्मी, नाट्य-दल में अपनी सक्रियता के क्रम में अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित होते रहते हैं।कला प्रशिक्षण केन्द्र, वास्तव में &#8216;शिल्प&#8217; या &#8216;क्राफ़्ट&#8217; तथा &#8216;तकनीक&#8217; का प्रशिक्षण देते हैं, कला अथवा कलात्मकता का नहीं। रंगमंच कला में, अंतर्शिल्पीय दक्षता की आवश्यकता होती है। नाट्य-शिल्प के अन्तर्गत स्टेज-क्राफ़्ट, लाइटिंग, म्यूजिक, मेक-अप, कास्ट्यूम, सीनिक-डिजाईन आदि-इत्यादि रंगमंच-कला के मुख्य-सर्जक अभिनेता और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><em><strong>दुर्भाग्यवश हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं है, जबकि यह उसी का माध्यम है</strong></em></p>



<p><strong>चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं</strong></p>



<p><strong>कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम</strong></p>



<p>किसी व्यक्ति द्वारा कला-सृजन, उस व्यक्ति के रचनात्मक रुझान और उसकी नैसर्गिक* कला-प्रतिभा पर निर्भर करता है। कलात्मकता का प्रशिक्षण कदाचित सम्भव नहीं है। रंगमंच में प्रशिक्षण दरअसल शिल्प का ही होता है। फिर भी रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम। लेकिन प्रशिक्षण केन्द्र कुछ इस तरह का माहौल या हाइप  बनाते हैं, गोया औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नाट्यकर्मी ही रंगमंच के वास्तविक नायक हैं। जबकि वस्तुस्थिति यह है कि बहुत बड़ी संख्या में अप्रशिक्षित या अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित कलाकर्मी रचनात्मक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करते और अति-महत्वपूर्ण रचते हुए दिखते हैं और कला-जगत उनका उच्च-मूल्यांकन भी करता है। हालाँकि सभी कलाओं में शिल्प-के-प्रशिक्षण का अत्यधिक महत्व है; इसका विकल्प नहीं है लेकिन कितने हैं, जिन्हें औपचारिक प्रशिक्षण का अवसर मिल पाता है ?</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/90692943_1068117303564768_2086601734959923200_n.jpg" alt="" class="wp-image-54288" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/90692943_1068117303564768_2086601734959923200_n.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/90692943_1068117303564768_2086601734959923200_n-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> वैसे देखें, तो आप पाएँगे कि अप्रशिक्षित कोई होता नहीं। चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं; जबकि अधिकांश हिन्दी-नाट्यकर्मी, नाट्य-दल में अपनी सक्रियता के क्रम में अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित होते रहते हैं।कला प्रशिक्षण केन्द्र, वास्तव में &#8216;शिल्प&#8217; या &#8216;क्राफ़्ट&#8217; तथा &#8216;तकनीक&#8217; का प्रशिक्षण देते हैं, कला अथवा कलात्मकता का नहीं। रंगमंच कला में, अंतर्शिल्पीय दक्षता की आवश्यकता होती है। <strong>नाट्य-शिल्प के अन्तर्गत स्टेज-क्राफ़्ट, लाइटिंग, म्यूजिक, मेक-अप, कास्ट्यूम, सीनिक-डिजाईन आदि-इत्यादि रंगमंच-कला के मुख्य-सर्जक अभिनेता और उसकी कला को उत्प्रेरित करते हैं, उसे सजाते-सँवारते हैं। रंगमंच कला सृजन में चूँकि शिल्प और तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिये प्रशिक्षण का अत्यधिक महत्त्व है</strong>। अप्रशिक्षित नाट्यकर्मी &#8216;ट्रायल एंड एरर&#8217; के ज़रिये शिल्प का ज्ञान प्राप्त करता है, जिसमें समय का अपव्यय होता है। जबकि प्रशिक्षण के दौरान इस समझ को विकसित करने में समय की बचत होती है और शिल्प में दक्षता तथा पेशेवर तकनीक जानने का अवसर नाट्यकर्मी को मिलता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="496" height="618" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_mask.jpg" alt="" class="wp-image-54289" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_mask.jpg 496w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_mask-281x350.jpg 281w" sizes="(max-width: 496px) 100vw, 496px" /></figure>



<p><strong>रंगमंच में शिल्प-तकनीक-डिजाईन के प्रशिक्षण के साथ, जो कुछ महत्वपूर्ण कार्य प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा किये जाने होते हैं – वे हैं, उचित परिप्रेक्ष्य में रंगमंच-कला के मूल्यांकन करने की क्षमता विकसित करना और इस समझ को विकसित करना, जो ‘कथ्य’ और ‘शिल्प’ के संतुलन के बुनियादी उसूल से प्रशिक्षुओं को परिचित कराये।आशु-रचना (improvisation) की कला, रंगमंच का सबसे विशिष्ट कौशल है। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न छवि, ध्वनि, विचार, भावना (emotion, sentiment), शब्द और अन्य सभी दृश्य-श्रव्य अवयवों के रंगमंचीय उपयोग के प्रसंग में आशु-रचना के अभ्यास करवाये जाते हैं</strong>। इसी क्रम में यह भी बताया जाता है कि परिस्थिति के अनुसार किस प्रकार अपनी नाट्य-रचना को संयोजित किया जाए।सांकेतिकता, प्रतीकात्मकता और कल्पनाशीलता नाट्य-कला की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। यह, वह विशिष्टता है, जो नाट्य-सृजन को काव्यात्मक ऊँचाई देती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_parvez_akhtar.jpg" alt="" class="wp-image-54290" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_parvez_akhtar.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_parvez_akhtar-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong><em>वरिष्ठ निर्देशक परवेजअख्तर</em></strong></figcaption></figure>



<p>यह स्पष्ट है कि नाट्य-प्रशिक्षण संस्थान; शिल्प कौशल, डिजाईन और तकनीक के प्रशिक्षण के साथ; नाट्य-कला की विशिष्टताओं से प्रशिक्षुओं को परिचित कराते हैं। उनका यह दायित्व भी है कि भावी नाट्य नेतृत्व अपने क्षेत्र के दर्शकों के रंगमंच की ज़रूरत का अनुमान लगाने और अपने दर्शकों की आशाओं-आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति, उनकी नाट्य-भाषा में करने में सक्षम हों।लेकिन स्थिति ऐसी है नहीं। दुर्भाग्यवश हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं है, जबकि यह उसी का माध्यम है। हाँ, निर्देशक का वर्चस्व हिन्दी रंगमंच में बढ़ता गया है। इसलिए <strong>रंगमंच की त्रयी &#8211; नाटककार, दर्शक और अभिनेता के दबाव से मुक्त निर्देशक, ‘शिल्प’ और ‘तकनीक’ के अतिरेक या आतंक के माध्यम से अपनी सत्ता की स्थापना की दिशा में प्रयासरत दिखता है।</strong> यह रंगमंच और दर्शकों दोनों के हित में नहीं है।इस विरोधाभास की तुलना फ़िल्म की उस विडम्बना से की जा सकती है, जिसमें वर्चस्व &#8216;स्टार-एक्टर&#8217; का है और निर्देशक को, फ़िल्म जिसका माध्यम है, वैसा महत्त्व नहीं मिलता। उसी तरह; अभिनेता-का-माध्यम रंगमंच, निर्देशक के नाम से जाना जाने लगा है।</p>



<p>*(यहाँ &#8216;नैसर्गिक&#8217; से मेरा तात्पर्य प्रकृति द्वारा प्रदत्त उन क्षमताओं से है, जो हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती हैं, बल्कि होती हैं। अभ्यास से मेरे जैसा बेसुरा-व्यक्ति, कोरस गायक तो शायद बन जाए; किन्तु स्वतन्त्र गायक; एक ऐसा गायक जो संगीत-कला में योगदान देने में सक्षम हो, नहीं बन सकता।) </p>



<p><strong> वरिष्ठ निर्देशक परवेज अख्तर के  FB वाल से साभार </strong></p>
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