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		<title>व्यथा कथा डीएम साहब की&#8230;. राजस्व कर्मचारियों की करतूत के बहाने</title>
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		<pubDate>Mon, 20 Mar 2023 06:51:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[किरतपुर में हुई लाखों की हेराफेरी सरकार की छवि तार-तार,डीएम के तेवर हैं तल्ख संजय मिश्र,दरभंगा दरभंगा जिले के डीएम राजीव रौशन इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि राजस्व विभाग के लोगों की कुत्सित करस्तानी की शिकायत बार बार और लगातार आती है. खास कर राजस्व कर्मचारी और उनके निजी मुंशी की. जिले के टॉप ब्यूरोक्रैट की वेदना हकीकत के कारण निःसृत हो रही कि इनका नाता सीधे आम जनों से है और उनके बुरे कारनामों से सरकार की छवि तो ध्वस्त होती ही है साथ ही लोग निराश हो जाते हैं. डीएम की समझ मोटे तौर पर दो कारणों से है. राजस्व कर्मचारी अक्सर निर्धारित जगह पर नहीं बैठते और ये कि वे निजी मुंशी रखते हैं. समाज के बीच निजी मुंशी को दलाल के नजरिए से देखा जाता जो कि अपने आकाओं खातिर अवैध वसूली करता है. अवैध वसूली तो अपनी जगह… ये मालगुजारी जमा करने आने वाले लोगों की दी गई वैध रकम भी गटक लेता है. लूट के इस आयाम का इजहार आधिकारिक बैठकों में संभव नहीं. डीएम की पीड़ा को सही से समझने के लिए जिले के 18 में से एक किरतपुर प्रखण्ड की एक केस स्टडी में डुबकी लगाते हैं..दरभंगा जिले का एक प्रखण्ड है किरतपुर. बाढ़ प्रभावित इलाका. वहां एक राजस्व कर्मचारी हुए जुगेश कुमार. सर्कल इंस्पेक्टर तक के प्रभार में रहे. रसियारी &#8211; पौनी पंचायत की राजस्व वसूली की अपनी जिम्मेदारी. लेकिन कई परिवार कराह रहे. हर साल की तरह जब जमीन की रसीद कटाने, परिमार्जन, दाखिल खारिज जैसे काम [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



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<p><strong>किरतपुर में हुई लाखों की हेराफेरी</strong></p>



<p><strong>सरकार की छवि तार-तार,डीएम के तेवर हैं तल्ख</strong></p>



<p><strong>संजय मिश्र,दरभंगा</strong></p>



<p>दरभंगा जिले के डीएम राजीव रौशन इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि राजस्व विभाग के लोगों की कुत्सित करस्तानी की शिकायत बार बार और लगातार आती है. खास कर राजस्व कर्मचारी और उनके निजी मुंशी की. जिले के टॉप ब्यूरोक्रैट की वेदना हकीकत के कारण निःसृत हो रही कि इनका नाता सीधे आम जनों से है और उनके बुरे कारनामों से सरकार की छवि तो ध्वस्त होती ही है साथ ही लोग निराश हो जाते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="506" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/dm-darbhanga-650x506.jpg" alt="" class="wp-image-72478" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/dm-darbhanga-650x506.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/dm-darbhanga-350x272.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/dm-darbhanga.jpg 708w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>डीएम की समझ मोटे तौर पर दो कारणों से है. राजस्व कर्मचारी अक्सर निर्धारित जगह पर नहीं बैठते और ये कि वे निजी मुंशी रखते हैं. समाज के बीच निजी मुंशी को दलाल के नजरिए से देखा जाता जो कि अपने आकाओं खातिर अवैध वसूली करता है. अवैध वसूली तो अपनी जगह… ये मालगुजारी जमा करने आने वाले लोगों की दी गई वैध रकम भी गटक लेता है. लूट के इस आयाम का इजहार आधिकारिक बैठकों में संभव नहीं.</p>



<p>डीएम की पीड़ा को सही से समझने के लिए जिले के 18 में से एक किरतपुर प्रखण्ड की एक केस स्टडी में डुबकी लगाते हैं..दरभंगा जिले का एक प्रखण्ड है किरतपुर. बाढ़ प्रभावित इलाका. वहां एक राजस्व कर्मचारी हुए जुगेश कुमार. सर्कल इंस्पेक्टर तक के प्रभार में रहे. रसियारी &#8211; पौनी पंचायत की राजस्व वसूली की अपनी जिम्मेदारी. लेकिन कई परिवार कराह रहे. हर साल की तरह जब जमीन की रसीद कटाने, परिमार्जन, दाखिल खारिज जैसे काम होने की खबर मिली तो इस पंचायत के गृहस्थ बड़े उत्साह से सीओ दफ्तर पहुंचे. राजस्व के लिए जो राशि बताई गई इनने वो राशि जमा कर दी. इनसे कहा गया कि एक सप्ताह में रसीद देने सहित अन्य काम हो जाएंगे. खुशी खुशी और संतोष के साथ लोग अपने घर लौटे.</p>



<p>ये बीते साल यानि 2022 के अक्टूबर की ही बात होगी. सप्ताह बीता तो लोग सीओ दफ्तर पहुंचे. उन्हें कोई रसीद नहीं मिली. न ही जुगेश कुमार मिले और न ही उसके साथ रहने वाले निजी मुंशी मिले. दफ्तर के लोगों ने बताया कि जुगेश कुमार का तबादला हो चुका था और वे प्रभार सौंप कर जा चुके हैं.रसीद और अन्य काम की आस में गए लोगों के पैर के नीचे की जमीन खिसक गई जब वहां के लोगों ने किसी भी जिम्मेदारी को ओढ़ने से इनकार कर दिया. नाम नहीं छापने की शर्त पर पीड़ितों ने बताया कि पैसे ले लिए गए लेकिन न ऑनलाइन एंट्री की गई और न ही रसीद मिली.</p>



<p>पीड़ितों का कहना है कि सीओ सतीश कुमार से मिले तो उनकी झिड़की सुननी पड़ी. सीओ ऑफिस जाने और निराश होने का सिलसिला चलता रहा. पर कोई सुनवाई नहीं. करीब छह महीने होने को हैं अब हताशा में जी रहे पीड़ितों ने सीओ ऑफिस जाना छोड़ दिया है.</p>



<p>खेती से मिलने वाली गाढ़ी कमाई के इस तरह लुट जाने से वे सन्न हैं. बुदबुदाते हुए कहते हैं कि आखिर सरकारी दफ्तर में इस तरह की लूट कैसे संभव है ? अधिकारी जिम्मेदारी लेने से कैसे भाग सकते? ये पीड़ा महज रसियारी निवासियों की नहीं है. तरवारा, ढेंगा, लछमिनिया, झगरुआ, माही, जमालपुर, किरतपुर के निवासियों की भी यही दर्द भरी दास्तां है. पीड़ितों का दावा है कि इन गांवों के करीब 50 परिवार जुगेश कुमार और उसके अवैध मुंशी हरिभूषण के छल की चपेट में आए हैं. वे न्याय की उम्मीद छोड़ चुके हैं. जुगेश कुमार का फोन नंबर 7491881988 बंद रहता है.इस गोरखधंधे को ये संवाददाता काफी समय से ट्रैक कर रहा है. जब इस संबंध में सीओ सतीश कुमार के फोन नंबर 8544412509 पर फोन नंबर 7765801271 से उनका पक्ष पूछा गया तो उनका रूखा अंदाज रहा. टका सा जबाव आया कि जिसने जानकारी दी उसी से पूछें. व्हाट्सएप से मैसेज कर उनका पक्ष मांगा तो कोई जवाब नहीं आया.</p>



<p>इस संबंध में एडीएम राजेश झा से मिलकर पक्ष लेने की कोशिश की तो उन्होंने मामले को देखने की बात कही. साथ ही ये भी कहा कि किरतपुर में एक आर ओ (रेवेन्यू ऑफिसर) भेजा जा रहा.जो हाल किरतपुर प्रखण्ड का है वैसा हाल अन्य प्रखंडों के सीओ दफ्तर का हो तो हैरत नहीं होनी चाहिए. तभी डीएम की तल्खी सामने आई है. 16 मार्च 2023 की राजस्व से संबंधित विशेष बैठक में विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर डीएम राजीव रौशन बिफर पड़े. उन्होंने आदेश किया है कि राजस्व कर्मचारी निर्धारित स्थल पर ही कार्यालय चलाएं. उन्होंने कहा कि कहीं से भी अवैध मुंशी रखने की शिकायत मिलेगी तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी. डीएम ने जिला सूचना एवं जन संपर्क पदाधिकारी को निर्देश दिया कि राजस्व विभाग से समन्वय स्थापित कर अंचल वार सभी हल्का कर्मचारी के कार्यालय का पता दूरभाष नंबर सहित प्रसारित करवा दें.</p>



<p>नहीं मालूम डीएम की व्यथा से उपजी तत्परता का जुगेश कुमार जैसे राजस्व कर्मचारियों पर कितना असर होगा? किरतपुर के पीड़ितों की आंखों में चमक कब लौटेगी? फिलहाल तो उनमें इतनी आशंका है कि जुगेश कुमार ने जो कंप्यूटर प्रिंटआउट उन्हें थमाया था उसे दिखाने तक को तैयार नहीं. बमुश्किल 4 परिवार के लोग परिमार्जन के लिए दिए गए प्रिंटआउट दिखाने को तैयार हुए. कोशिश है कि अन्य पीड़ित भी राशि के बदले दी गई प्रिंटआउट या अन्य कागज दिखाने की हिम्मत जुटाएंगे.</p>



<p>रिपोर्ट जारी है…</p>
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