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		<title>’पोरस सिकंदर&#8217; नाटक से अनिल मुखर्जी शताब्दी नाट्योत्सव का हुआ समापन</title>
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		<pubDate>Mon, 20 Mar 2023 16:14:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पारसी रंगमंच शैली के जरिए नाटक में तत्कालीन समय को टीम ने अच्छे से किया उजागर : आर के सिन्हाराज्य में राष्ट्रीय नाट्य विधालय की इकाई की हो स्थापनापोरस सिकंदर देख इतिहास में खो गए दर्शक राजधानी पटना में अनिल कुमार मुखर्जी नाट्योत्सव के अंतिम दिन बिहार सचिवालय स्पोर्ट्स फाउंडेशन के रंगकर्मियों द्वारा पोरस सिकंदर नाटक का मंचन रवीन्द्र भवन मे किया गया. इस अवसर पर भाजपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व सांसद आर के सिन्हा ने कलाकारों को बेहतरीन नाटक प्रस्तुत करने के लिए बधाई दी.उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश है कि पटना में कालिदास रंगालय का पुनर्निर्माण हो साथ में राष्ट्रीय नाट्य विधालय की इकाई की हो स्थापना की जाए इसके लिए मैं भी प्रयास कर रहा हूँ आप सभी भी करें. महोत्सव के अतिम दिन पोरस सिकंदर नाटक मे विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं को दृश्यों और पारसी शैली की अभिनय शैली के माध्यम से मंच पर दर्शाया गया. सिकंदर अपने पिता की मृत्यु के पश्चात अपने सौतेले व चचेरे भाइयों का कत्ल करने के बाद यूनान के मेसेडोनिया के सिन्हासन पर बैठा था। अपनी महत्वाकांक्षा के कारण वह विश्व विजय को निकला. जब सिकंदर ईरान से आगे बड़ा तो उसका सामना भारतीय सीमा पर बसे छोटे छोटे राज्यों से हुआ. भारत की सीमा में पहुंचते ही पहाड़ी सीमाओं पर भारत के अपेक्षाकृत छोटे राज्यों अश्वायन एवं अश्वकायन की वीर सेनाओं ने कुनात, स्वात, बुनेर, पेशावर में सिकंदर की सेनाओं को भयानक टक्कर दी। मस्सागा (मत्स्यराज) राज्य में तो महिलाएं तक उसके सामने खड़ी हो गईं, पर धूर्त और [&#8230;]]]></description>
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<p><br></p>



<p><strong>पारसी रंगमंच शैली के जरिए नाटक में तत्कालीन समय को टीम ने अच्छे से किया उजागर : आर के सिन्हा<br>राज्य में राष्ट्रीय नाट्य विधालय की इकाई की हो स्थापना<br>पोरस सिकंदर देख इतिहास में खो गए दर्शक</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/ezgif-2-d665e1b8ed.gif" alt="" class="wp-image-72507"/></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/2-3.jpg" alt="" class="wp-image-72508" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/2-3.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/2-3-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>राजधानी पटना में अनिल कुमार मुखर्जी नाट्योत्सव के अंतिम दिन बिहार सचिवालय स्पोर्ट्स फाउंडेशन के रंगकर्मियों द्वारा पोरस सिकंदर नाटक का मंचन रवीन्द्र भवन मे किया गया. इस अवसर पर भाजपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व सांसद आर के सिन्हा ने कलाकारों को बेहतरीन नाटक प्रस्तुत करने के लिए बधाई दी.उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश है कि पटना में कालिदास रंगालय का पुनर्निर्माण हो साथ में राष्ट्रीय नाट्य विधालय की इकाई की हो स्थापना की जाए इसके लिए मैं भी प्रयास कर रहा हूँ आप सभी भी करें. महोत्सव के अतिम दिन पोरस सिकंदर नाटक मे विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं को दृश्यों और पारसी शैली की अभिनय शैली के माध्यम से मंच पर दर्शाया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/11-3.jpg" alt="" class="wp-image-72509" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/11-3.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/11-3-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सिकंदर अपने पिता की मृत्यु के पश्चात अपने सौतेले व चचेरे भाइयों का कत्ल करने के बाद यूनान के मेसेडोनिया के सिन्हासन पर बैठा था। अपनी महत्वाकांक्षा के कारण वह विश्व विजय को निकला. जब सिकंदर ईरान से आगे बड़ा तो उसका सामना भारतीय सीमा पर बसे छोटे छोटे राज्यों से हुआ. भारत की सीमा में पहुंचते ही पहाड़ी सीमाओं पर भारत के अपेक्षाकृत छोटे राज्यों अश्वायन एवं अश्वकायन की वीर सेनाओं ने कुनात, स्वात, बुनेर, पेशावर में सिकंदर की सेनाओं को भयानक टक्कर दी। मस्सागा (मत्स्यराज) राज्य में तो महिलाएं तक उसके सामने खड़ी हो गईं, पर धूर्त और धोखे से वार करने वाले यवनी (यूनानियों) ने मत्स्यराज के सामने संधि का नाटक करके उन पर रात में हमला किया और उस राज्य की राजमाता, बच्चों सहित पूरे राज्य को उसने तलवार से काट डाला. यही हाल उसने अन्य छोटे राज्यों में किया. मित्रता संधि की आड़ में अचानक आक्रमण कर कई राजाओं को बंधक बनाया। भोले-भाले भारतीय राजा उसकी चाल का शिकार होते रहे. अंत में उसने गांधार-तक्षशिला पर हमला किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/19.jpg" alt="" class="wp-image-72510" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/19.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/19-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>गांधार-तक्षशिला के राजा आम्भी ने सिकंदर से लड़ने के बजाय उसका भव्य स्वागत किया. आम्भी ने ऐसे इसलिए किया क्योंकि उसी पोरस से शत्रुता थी और दूसरी ओर उसकी सहायता करने वाला कोई नहीं था. गांधार-तक्षशिला के राजा आम्भी ने पोरस के खिलाफ सिकंदर की गुप्त रूप से सहायता की. सिकंदर ने पोरस के पास एक संदेश भिजवाया जिसमें उसने पोरस से सिकंदर के समक्ष समर्पण करने की बात लिखी थी, लेकिन पोरस एक महान योद्ध था और उसने सिकंदर को युद्ध मे इतना तबाह कर डाला कि वह वापस मौत लौट गया और रास्ते मे उसकी मृत्य मृत्यु भी हो गई.पोरस की वीरता की गाथा नाटक मे दिखाई गई इसमे पोरस की भूमिका मे नंद लाल सिंह को लोगों ने काफी पसंद किया. सिकंदर की भूमिका मे प्रभावी अभिनय करते अवधेश नारायण प्रभाकर विशाल इस नाटक के निर्देशक भी थे.कलाकारों को पूर्व सांसद आर के सिन्हा ने सम्मानित किया साथ ही उनके आने वाले दिनों के लिए शुभकामनायें भी दी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/27.jpg" alt="" class="wp-image-72511" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/27.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/27-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color">मंच पर कलाकार</p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color">अवधेश नारायण प्रभाकर &#8220;विशाल&#8221; सिकन्दर (यूनान का सम्राट) ,नन्द लाल सिंह- पोरस (पंजाब का राजा),अभिमन्यु दास -दिवाकर (पोरस का बेटा)मिथिलेश कुमार सिन्हा। -तक्षशील (तक्षशीला का राजा),मनीष कुमार श्रीवास्तव -सुमंत (पोरस का सेनापति) शशि रंजन कुमार -हेफिस्टियन (यूनान का सेनापति),शिव शंकर लाल श्रीवास्तव सफीर (सिकन्दर का दूत)न विभा कुमारी- अम्बालिकाशी की बहन)रश्मि भारती -मनोरमा तक्षशील की बेटी,संगीता चंद्रा-इन्दिरा (अटक की राजकुमारी) कृति ज्योत्स्ना वर्मा-सुमित्रा (सेनापति सुमन्त की पत्नी)गौतम कुमार -ऋषि दाण्डायन (भारत का ज्योतिषी),आदर्श वैभव-पोरस का सैनिक नं.-1 ,रीतेश कुमार झा &#8211; पोरस का सैनिक नं-2,राकेश कुमार- सिकन्दर का सैनिक नं0-1।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/28.jpg" alt="" class="wp-image-72512" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/28.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/28-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><br>नेपथ्य में<br>चन्दना घोष एवं शशांक घोष &#8211; रूप सज्जा,डॉ० नित्यानन्द सिंह एवं रोहित कुमार -मच व्यवस्था ऋद्धि-सिद्धि एवं आशा रानी -वस्त्र विन्यास,अभिमन्यु दास,परिधान व्यवस्था, अजय ब्रह्मानन्द-संगीतकार ,ज्योति- पाली कुमारी ने तकनीकि व्यवस्था ,नाट्यकार / निर्देशक / परिकल्पक &#8211; अवधेश नारायण प्रभाकर &#8220;विशाल&#8221;।</p>



<p>&#8211;<strong>रवीन्द्र भारती </strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बिहार की बेटी लक्ष्मी झा ने मात्र 36 घंटे में माउंट किलिमंजारो पर्वत पर  फहराया तिरंगा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bihars-daughter-lakshmi-jha-hoisted-the-tricolor-on-mount-kilimanjaro/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Mar 2023 06:31:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[महज 36 घंटे में चढ़ाई पूरी करने वाली पहली भारतीय महिला बनी सहरसा की लक्ष्मी झा को यह कीर्तिमान बनाने में भाजपा के पूर्व सांसद आरके सिन्हा का था सहयोग एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली बनी थी बिहार की पहली बेटी लक्ष्मी&#160;&#160; भाजपा के पूर्व सांसद ने आर के सिन्हा ने दी बधाई और शुभकामनाएं रवीन्द्र भारती दुनिया का सबसे ऊँचा माउंट किलिमंजारो पर्वत शृंखला पर बिहार की बेटी लक्ष्मी तिरंगा फहराया कर दुनिया भर की महिलाओं को सन्देश दिया कि महिलायें ठान लें तो कोई भी काम कर सकती है .अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर लक्ष्मी झा ने भारत का तिरंगा लहरा कर एक कीर्तिमान अपने नाम स्थापित किया. सात मार्च को उन्होंने चढ़ाई शुरू की और आठ मार्च को तिरंगा फहरा कर सफलता हासिल की.उन्होंने यह काम सिर्फ 36 घंटे में पूरा कर दुनिया की पहली महिला बनने का कीर्तिमान अपने नाम किया . &#160;इस अभियान की शुरुआत में पूर्व सांसद आर के सिन्हा ने फ्लैग ऑन कर उसने &#160;अभियान को राष्ट्रीय ध्वज दे कर शुरू किया था. बिहार के सहरसा ज़िले के बनगाँव की रहने वाली लक्ष्मी झा साउथ अफ्रीका के माउंट किलिमंजारो पर्वत की 19341 फीट ऊँची चोटी पर आठ मार्च महिला दिवस के दिन पहुंची. इस सम्बन्ध में में पूर्व सांसद आरके सिन्हा ने कहा कि लक्ष्मी की यात्रा में होने खर्च और प्रशिक्षण का खर्च वे खुद वहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी जब माउंट एवरेस्ट की बेस कैंप पर पहुंची थी उसके पहले से मैं इनकी प्रतिभा को जानता हूँ। उनको इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>महज 36 घंटे में चढ़ाई पूरी करने वाली पहली भारतीय महिला बनी</strong></p>



<p><strong>सहरसा की लक्ष्मी झा को यह कीर्तिमान बनाने में भाजपा के पूर्व सांसद आरके सिन्हा का था सहयोग</strong></p>



<p><strong>एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली बनी थी बिहार की पहली बेटी लक्ष्मी&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p><strong>भाजपा के पूर्व सांसद ने आर के सिन्हा ने दी बधाई और शुभकामनाएं</strong></p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती</strong></p>



<p>दुनिया का सबसे ऊँचा माउंट किलिमंजारो पर्वत शृंखला पर बिहार की बेटी लक्ष्मी तिरंगा फहराया कर दुनिया भर की महिलाओं को सन्देश दिया कि महिलायें ठान लें तो कोई भी काम कर सकती है .अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर लक्ष्मी झा ने भारत का तिरंगा लहरा कर एक कीर्तिमान अपने नाम स्थापित किया. सात मार्च को उन्होंने चढ़ाई शुरू की और आठ मार्च को तिरंगा फहरा कर सफलता हासिल की.उन्होंने यह काम सिर्फ 36 घंटे में पूरा कर दुनिया की पहली महिला बनने का कीर्तिमान अपने नाम किया .</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="339" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/a264c345-7f96-402c-b8ff-2f10dcc13174.jpg" alt="" class="wp-image-72141" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/a264c345-7f96-402c-b8ff-2f10dcc13174.jpg 339w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/a264c345-7f96-402c-b8ff-2f10dcc13174-198x350.jpg 198w" sizes="(max-width: 339px) 100vw, 339px" /></figure>



<p>&nbsp;इस अभियान की शुरुआत में पूर्व सांसद आर के सिन्हा ने फ्लैग ऑन कर उसने &nbsp;अभियान को राष्ट्रीय ध्वज दे कर शुरू किया था. बिहार के सहरसा ज़िले के बनगाँव की रहने वाली लक्ष्मी झा साउथ अफ्रीका के माउंट किलिमंजारो पर्वत की 19341 फीट ऊँची चोटी पर आठ मार्च महिला दिवस के दिन पहुंची.</p>



<p>इस सम्बन्ध में में पूर्व सांसद आरके सिन्हा ने कहा कि लक्ष्मी की यात्रा में होने खर्च और प्रशिक्षण का खर्च वे खुद वहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी जब माउंट एवरेस्ट की बेस कैंप पर पहुंची थी उसके पहले से मैं इनकी प्रतिभा को जानता हूँ। उनको इस उपलब्धि पर हर संभव सहायता करने की घोषणा भी की थी आज के दिन लक्ष्मी झा को इस अभियान के लिए भेज कर मैं खुद भी गौरव की अनुभूति कर रहा हूँ मेरी यह कोशिश रही है कि कोई भी प्रतिभा पैसे के अभाव में कुंठित न हो उन्हें एक सम्मान के साथ जीवन में कुछ करने का अवसर मिलना चाहिए बिहार के लोगों की जिम्मेवारी है सरकार की जिम्मेवारी है पर कोई राह नहीं दिखता तो बच्चे मेरे पास आते है उन्हें मैं हर संभव मदद करता हूँ । पूर्व सांसद आर के सिन्हा ने कहा कि अवसर ट्रस्ट पढ़ाई लिखाई के लिए समर्पित संस्थान है यहाँ से भी बच्चे निशुल्क पढ़ाई कर के आई आई टी और यूपीएसी जैसी परीक्षाओं में जातें है और अपने प्रदेश का नाम रौशन करते हैं। लक्ष्मी झा को माउंट किलिमंजारो पर्वत पर चढ़ाई कर भारतीय झंडा फहराने के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं और बधाई देता हूँ.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="339" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/WhatsApp-Image-2023-03-09-at-00.30.02.jpeg" alt="" class="wp-image-72142" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/WhatsApp-Image-2023-03-09-at-00.30.02.jpeg 339w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/WhatsApp-Image-2023-03-09-at-00.30.02-198x350.jpeg 198w" sizes="(max-width: 339px) 100vw, 339px" /></figure>



<p>माउंट किलिमंजारो पर्वत चौथी सबसे प्रमुख चोटी है। 1889 में शिखर पर पहुंचने वाले पहले लोग हैंस मेयर और लुडविग पर्त्शेलर थे । यह किलिमंजारो नेशनल पार्क का हिस्सा है और एक प्रमुख चढ़ाई ट्रेकिंग है। इसके सिकुड़ते ग्लेशियरों और लुप्त हो रहे बर्फ क्षेत्रों के कारण यह कई वैज्ञानिक अध्ययनों का विषय रहा है। अपने पर्वातारोही अभियान को&nbsp; सच करने निकली बिहार के सहरसा की पर्वतारोही लक्ष्मी झा ने कहा कि पूर्व सांसद आर के सिन्हा जी ने वैसे समय पर हमारी मदद की है जब मेरे इस अभियान के लिए सारे दरवाजे बंद नजर आ रहे थे उन्हें मैं मैं विशेष आभार व्यक्त करती हूँ.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="339" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/f4405168-dbee-4340-8c9d-6dee7019e1c6.jpg" alt="" class="wp-image-72143" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/f4405168-dbee-4340-8c9d-6dee7019e1c6.jpg 339w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/f4405168-dbee-4340-8c9d-6dee7019e1c6-198x350.jpg 198w" sizes="(max-width: 339px) 100vw, 339px" /></figure>



<p>बिहार के सहरसा जिले की रहने वाली लक्ष्मी झा ने एक नया कीर्तिमान स्थापित कर बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रौशन किया है दरअसल, मूल रूप से सहरसा के बनगांव की रहने वाली लक्ष्मी झा ने मात्र 9 दिनों के अंदर नेपाल स्थित माउंट एवरेस्ट बेस कैंप और नेपाल के काला पत्थर पर तिरंगा लहराकर नाम रोशन कियाथा&nbsp; लक्ष्मी झा एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने वाली बिहार की पहली बेटी बनी है उन्हें ये सफलता बहुत संघर्ष के बाद मिली है जिसमें उनकी मां सरिता देवी का काफी सहयोग रहा है लक्ष्मी झा के इस उपलब्धि को लेकर परिवार में खुशी का माहौल है बता दें कि लक्ष्मी झा सहरसा जिले के बनगांव की रहने वाली है और इनके पिता का नाम स्व बिनोद झा है जिनकी 17 वर्ष पहले ही मौत हो चुकी है लक्ष्मी झा 4 भाई बहन में सबसे छोटी है पिता की मौत के बाद रोजी रोटी का कोई सहारा नहीं होने के कारण उनकी मां काफी मेहनत से अपने चार बच्चों का लालन पालन करती रही और सभी बच्चों को पढ़ाया लिखाया. लक्ष्मी ने मैट्रिक और इंटर के बाद बीए पास की,अपनी पढ़ाई जारी रखी और वो एवरेस्ट पर चढ़ने को लेकर तैयारी करने लगी जहां उन्होंने अपना नामांकन उत्तराखंड के पर्वतारोही नेहरू इंस्टीट्यूट में करवाया, सहयोग और मार्गदर्शन से वो आगे बढ़ी.</p>



<p></p>
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		<title>तबला सम्राट पं. किशन महाराज के जन्मशताब्दी पर कार्यक्रम में कलाकारों ने बांधा समां</title>
		<link>https://www.patnanow.com/artists-celebrated-the-birth-centenary-of-tabla-emperor-pt-kishan-maharaj/</link>
		
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		<pubDate>Mon, 23 Jan 2023 05:41:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देश के लब्ध प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से लोगों को किया मंत्रमुग्ध रवीन्द्र भवन पटना में आयोजित हुआ सुरमई सन्ध्या का कार्यक्रम भाजपा के पूर्व सांसद आर के सिन्हा व डॉ डा. अजीत प्रधान की ओर से हुआ कार्यक्रम का आयोजन रवीन्द्र भारती, पटना राजधानी पटना में लम्बे अरसे के बाद शास्त्रीय संगीत का जादू श्रोताओं के सिर चढ़ कर बोला और सुर और ताल से सजी एक शाम गवाह बनी जिसे वर्षों तक याद रखा जाएगा। बनारस घराने के सुप्रसिद्ध तबला सम्राट पदमविभूषण पं० किशन महाराज जिन्हें कला के क्षेत्र में योगदान के लिए 1973 में पद्मश्री और&#160; 2002 में पद्म विभूषण से सम्मानित महान कलाकार के जन्म शताब्दी के अवसर एक सुरमयी शाम का राज्य सभा के पूर्व सांसद रवीन्द्र किशोर सिन्हा , डा. अजीत प्रधान, पदम् श्री गोपाल प्रसाद सिन्हा,मुख्य सूचना आयुक्त त्रिपुरारी शरण ,पूर्व मंत्री जनक राम व डॉ अनिल सुलभ ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। पं. किशन महाराज जन्म शताब्दी के अवसर पर शास्त्रीय संध्या आयोजित की गईं जिसमें देश की लब्ध प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायिका विदुशी इन्द्राणी मुखर्जी का शास्त्रीय गायन(कोलकाता) के साथ मुंबई की ख्यातिप्राप्त वायलिन वादक नन्दनी शंकर ने कार्यक्रम प्रस्तुत किये। कार्यक्रम में कोलकाता के अभिषेक चटर्जी तबला (कोलकाता) पं. द्वैपायन राय, (कोलकाता) हारमोनियम पर संगत किया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में&#160; डा. अजीत प्रधान हार्ट सर्जन,&#160;जीवक हार्ट हॉस्पिटल, पटना ने कहा कि इस पटना की धरती पर अनेकों&#160; कलाकार पैदा हुए है जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत में बिहार का सितारा बुलन्द रखा. कार्यक्रम के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>देश के लब्ध प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से लोगों को किया मंत्रमुग्ध</strong></p>



<p><strong>रवीन्द्र भवन पटना में आयोजित हुआ सुरमई सन्ध्या का कार्यक्रम</strong></p>



<p><strong>भाजपा के पूर्व सांसद आर के सिन्हा व डॉ डा. अजीत प्रधान की ओर से हुआ कार्यक्रम का आयोजन</strong></p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती, पटना</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="431" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/3.jpg" alt="" class="wp-image-70979" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/3.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/3-350x232.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>राजधानी पटना में लम्बे अरसे के बाद शास्त्रीय संगीत का जादू श्रोताओं के सिर चढ़ कर बोला और सुर और ताल से सजी एक शाम गवाह बनी जिसे वर्षों तक याद रखा जाएगा। बनारस घराने के सुप्रसिद्ध तबला सम्राट पदमविभूषण पं० किशन महाराज जिन्हें कला के क्षेत्र में योगदान के लिए 1973 में पद्मश्री और&nbsp; 2002 में पद्म विभूषण से सम्मानित महान कलाकार के जन्म शताब्दी के अवसर एक सुरमयी शाम का राज्य सभा के पूर्व सांसद रवीन्द्र किशोर सिन्हा , डा. अजीत प्रधान, पदम् श्री गोपाल प्रसाद सिन्हा,मुख्य सूचना आयुक्त त्रिपुरारी शरण ,पूर्व मंत्री जनक राम व डॉ अनिल सुलभ ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="490" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/b6b57d6d-9661-46c2-b96e-96aa6ed866f1.jpg" alt="" class="wp-image-70980" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/b6b57d6d-9661-46c2-b96e-96aa6ed866f1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/b6b57d6d-9661-46c2-b96e-96aa6ed866f1-350x264.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पं. किशन महाराज जन्म शताब्दी के अवसर पर शास्त्रीय संध्या आयोजित की गईं जिसमें देश की लब्ध प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायिका विदुशी इन्द्राणी मुखर्जी का शास्त्रीय गायन(कोलकाता) के साथ मुंबई की ख्यातिप्राप्त वायलिन वादक नन्दनी शंकर ने कार्यक्रम प्रस्तुत किये। कार्यक्रम में कोलकाता के अभिषेक चटर्जी तबला (कोलकाता) पं. द्वैपायन राय, (कोलकाता) हारमोनियम पर संगत किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/80cbdbca-26c2-43a0-936d-cead6e2cef51.jpg" alt="" class="wp-image-70982" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/80cbdbca-26c2-43a0-936d-cead6e2cef51.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/80cbdbca-26c2-43a0-936d-cead6e2cef51-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में&nbsp; डा. अजीत प्रधान हार्ट सर्जन,&nbsp;जीवक हार्ट हॉस्पिटल, पटना ने कहा कि इस पटना की धरती पर अनेकों&nbsp; कलाकार पैदा हुए है जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत में बिहार का सितारा बुलन्द रखा. कार्यक्रम के आयोजनकर्ता पूर्व सांसद रवीन्द्र किशोर सिन्हा ने कहा कि आज बड़े पैमाने पर ऐसे महान कलाकारों को याद कर कार्यक्रम आयोजित करना उनके प्रति हमारी श्रद्धांजलि होगी. आज भाग दौड़ की जिन्दगी में नई पीढ़ी तमाम महान कलाकारों के योगदानों को भूलती जा रही है या जानती तक नहीं है। ऐसे में हमारा दायित्व बनता है कि ऐसे आयोजन कर उनके कृतित्व को शास्त्रीय संगीत प्रेमियों और युवाओं तक पहुंचाए जिससे हम उन्हें आने वाली पीढ़ियों को भी अवगत करा सकें. उन्होंने कहा कि पंडित किशन महाराज ख्याल गायन के साथ उनके तबले की संगीत श्रोताओं पर जादू करती थी, उनके ठेके में एक भराव था, और दांये और बांये तबले का संवाद श्रोताओं और दर्शकों पर विशिष्ट प्रभाव डालता था. उन्होंने कहा कि शताब्दी समारोह के कलाकार अपने अपने क्षेत्र के सिध्हस्त कलाकार है जिनको सुन कर राजधानी के लोग गौरवान्वित हुए हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/4.jpg" alt="" class="wp-image-70981" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/4.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/4-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/१२३४५.png" alt="" class="wp-image-70987" width="677" height="351" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/१२३४५.png 599w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/१२३४५-350x182.png 350w" sizes="(max-width: 677px) 100vw, 677px" /></figure>



<p>सुविख्यात गायिका इंद्राणी मुखर्जी ने पूर्व अंग गायन, खमाज में बांके सांवरिया,ठुमरी,होरी ठुमरी,चैती झूला प्रस्तुत किया कर समां बाँध दिया.उन्होंने शास्त्रीय ठुमरी के विभिन्न अंग को सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.तबले पर उनका संगत कर रहे थे शुभ महाराज. उन्होंने कहा कि पहली बार किशन जी महाराज के पुण्यतिथि के कार्यक्रम पर आई थी.आज खत्म हो रहे शास्त्रीय संगीत पर उन्होंने कहा कि घर के ऊपर डिपेंड करता है समाज बाद में आता है. हम कलाकारों को अपना काम करना है और उसे आंख बंद कर काम नहीं शुरू करना है. इन्द्राणी मुखर्जी ने कहा कि उन्हें जो कुछ मिला वह घर से ही मिला,और हर प्रस्तुति से सीख मिलती है.उन्होंने कहा कि पूर्व अंग चमत्कृत नहीं करता इस लिए चमत्कृत नहीं करता क्योकि एक बोल को कैसे आप कहते है सुनाते हैं इस पर निर्भर करता है. इन्द्राणी मुखर्जी के साथ तबले पर अभिषेक चटर्जी व हारमोनियम पर थे द्वैपायन राय.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/2.jpg" alt="" class="wp-image-70983" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/2.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/2-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ख्यातिप्राप्त वायलिन वादिका नन्दनी शंकर ने कहा कि उनके माता पिता ही गुरु रहे हैं. नंदनी ने राग जयजयवंती – मोरे मंदिर,राग बागेश्री &#8211; कैसे जाऊं घरवा में,राग चारुकेशी में मृदंगम बोल को समाहित करते हुए रचना पं. किशन जी महाराज को समर्पित करते हुए सुनाया. उनके वायलिन वादन से उपस्थित के मन के तार झंकृत हो गए, जब नंदनी शंकर मिर्जापुरी कजरी की प्रस्तुति दी तो लोग झूम उठे.उन्होंने कहा कि वायलिन में युवा पीढ़ी आगे आये तो उन्हें समग्र विकास हो पाता है. युवाओं को सन्देश देते हुए उन्होंने कहा कि संगीत को भूले नहीं अपने कल्चर को भूले नहीं तभी वे आगे बढ़ सकते हैं. इस अवसर पर मेयर सीता साहू डिप्टी मेयर रेशमी चन्दवंशी ,पूर्व  मंत्री जनक राम,समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन आकांशा श्रीवास्तव औरमनोज कुमार मनोज ने किया.</p>
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