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		<title>‘वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा’ युवा वर्गों के बीच बना आकर्षण का केंद्र</title>
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		<pubDate>Thu, 07 Dec 2023 03:18:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पटना पुस्तक मेला में युवाओं को पढ़ने को मिला है नया विषय हर पीढ़ी को जानना बहुत जरुरी है : मुरली मनोहर श्रीवास्तव पटनाः 1857 गदर के संघर्ष, गंगा-जमनी तहजीब पर आधारित मुरली मनोहर श्रीवास्तव की पुस्तक ‘वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा’ पटना पुस्तक मेले में छाया हुआ है. इस पुस्तक को प्रभात प्रकाशन, दिल्ली ने प्रकाशित किया है. सभी इस बात से खासे उत्साहित हैं कि ‘वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा’ पुस्तक में मूल रुप से क्या है. लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने बताते हैं कि यह पुस्तक पूरी तरह से वीर कुंवर सिंह के देशप्रेम पर आधारित है. ये बात और है कि जमाने की मशहूर नर्तकी ने उनके जीवन के आखिरी प्रहर में उनकी प्रेयसी बनकर युद्धभूमि तक साथ निभाया. जैसे अनेक तथ्यों को इस पुस्तक में केंद्रित किया गया है. वैसे तो रण बांकुरे वीर कुंवर सिंह पर पहली बार लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने “वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा” पुस्तक की रचना की. इस पुस्तक के आने से पहले ही इसकी मांग बढ़ गई है. पटना पुस्तक मेला में “वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा” पुस्तक की मांग युवाओं के बीच देखी जा रही है. इस पुस्तक का मूल मक्सद लेखक का रहा है कि बाबू साहब की वीरता और अपने वतन, मिट्टी से जो प्रेम था उसी को प्रेमकथा के रुप में प्रस्तुत तो किया ही गया है ऊपर से आरा की मशहूर नर्तकी धरमन बीबी जिससे वीर कुंवर सिंह जी को गहरा लगाव था उसको इस पुस्तक में केंद्रित किया गया है. उसी नर्तकी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पटना पुस्तक मेला में युवाओं को पढ़ने को मिला है नया विषय</strong></p>



<p><strong>हर पीढ़ी को जानना बहुत जरुरी है : मुरली मनोहर श्रीवास्तव </strong></p>



<p>पटनाः 1857 गदर के संघर्ष, गंगा-जमनी तहजीब पर आधारित मुरली मनोहर श्रीवास्तव की पुस्तक ‘वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा’ पटना पुस्तक मेले में छाया हुआ है. इस पुस्तक को प्रभात प्रकाशन, दिल्ली ने प्रकाशित किया है. सभी इस बात से खासे उत्साहित हैं कि ‘वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा’ पुस्तक में मूल रुप से क्या है. लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने बताते हैं कि यह पुस्तक पूरी तरह से वीर कुंवर सिंह के देशप्रेम पर आधारित है. ये बात और है कि जमाने की मशहूर नर्तकी ने उनके जीवन के आखिरी प्रहर में उनकी प्रेयसी बनकर युद्धभूमि तक साथ निभाया. जैसे अनेक तथ्यों को इस पुस्तक में केंद्रित किया गया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="601" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/dac76d2d-c848-4086-822b-3673b608828a-601x650.jpg" alt="" class="wp-image-80806" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/dac76d2d-c848-4086-822b-3673b608828a-601x650.jpg 601w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/dac76d2d-c848-4086-822b-3673b608828a-324x350.jpg 324w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/dac76d2d-c848-4086-822b-3673b608828a-768x831.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/dac76d2d-c848-4086-822b-3673b608828a-1420x1536.jpg 1420w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/dac76d2d-c848-4086-822b-3673b608828a.jpg 1479w" sizes="(max-width: 601px) 100vw, 601px" /></figure>



<p>वैसे तो रण बांकुरे वीर कुंवर सिंह पर पहली बार लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने “वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा” पुस्तक की रचना की. इस पुस्तक के आने से पहले ही इसकी मांग बढ़ गई है. पटना पुस्तक मेला में “वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा” पुस्तक की मांग युवाओं के बीच देखी जा रही है. इस पुस्तक का मूल मक्सद लेखक का रहा है कि बाबू साहब की वीरता और अपने वतन, मिट्टी से जो प्रेम था उसी को प्रेमकथा के रुप में प्रस्तुत तो किया ही गया है ऊपर से आरा की मशहूर नर्तकी धरमन बीबी जिससे वीर कुंवर सिंह जी को गहरा लगाव था उसको इस पुस्तक में केंद्रित किया गया है. उसी नर्तकी ने बाबू साहब को प्रेरित करने के साथ-साथ नौ माह के युद्ध में लगभग सभी युद्धों में सेनापति बनकर साथ निभाते हुए वीरगति को प्राप्त हुई थीं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/10669272_690356594384632_3484911522178592903_o-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-80807" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/10669272_690356594384632_3484911522178592903_o-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/10669272_690356594384632_3484911522178592903_o-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/10669272_690356594384632_3484911522178592903_o-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/10669272_690356594384632_3484911522178592903_o.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मुरली ने इस पुस्तक की रचना कर एक बेहतर कार्य किया है. इनके पुस्तक लेखन के दौरान ही मुंबई से प्रो.संजना मिश्रा शोध करने के लिए बिहार आयी थीं. उन्होंने कहा था कि जिस प्रकार कुंवर सिंह जी और धरमन बीबी पर आपने काम किया है अबतक काम ही नहीं किया गया है. इस पूरे किताब में हर पहलू को दर्शाने की पूरी कोशिश की गई है, जिसे हर पीढ़ी को जानना बहुत जरुरी है कि वीर कुंवर सिंह 1857 गदर की एक प्रमुख कड़ी थे.</p>



<p>प्रभात प्रकाशन, दिल्ली ने मुरली मनोहर श्रीवास्तव की यह दूसरी पुस्तक प्रकाशित की है. इससे पहले उन्होंने मशहूर पुस्तक शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को लिखा था, इसके लिए इनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड 2023 में दर्ज हो चुका है. मुरली हमेशा से चुनिंदा विषयों पर काम करते हैं.</p>



<p><strong>रवींद्र भारती </strong></p>
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