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	<title>Pregnent women &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>गर्भावस्था में एनीमिया से बचने के लिए नियमित कराइए ANC जांच</title>
		<link>https://www.patnanow.com/anc-check-is-necessary-for-pregnant-women/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jun 2022 04:55:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गर्भावस्था में एनीमिया प्रबंधन के लिये नियमित ANC जांच बेहद जरूरी प्रत्येक माह की 9वीं तिथि को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में होती है गर्भवती महिलाओं की जांच प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरूकता एनीमिया रोकथाम में सहायकआरा, 04 जून. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को खानपान का विशेष ध्यान रखना होता है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह रहती है कि इस दौरान गर्भवती महिलाएं किसी गंभीर रोग की चपेट में न आ जाएं. इन्हीं बीमारियों में से एक है एनीमिया. जिसके कारण न केवल गर्भवती महिलाओं को बल्कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं, कई मामलों में एनीमिया के कारण प्रसव के दौरान जटिलतायें भी बढ़ जाती है, जिसके कारण अधिक रक्त स्राव से गर्भवतियों की मौत की भी संभावना होती है. इसलिए गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाली रक्त स्राव प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है. एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरूकता ना सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है. पूर्व जांच नहीं कराना एनीमिया का प्रमुख कारण : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 15 से 49 वर्ष के मध्य आयु की 68.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं. गर्भावस्था में 4 प्रसव पूर्व जांच नहीं कराना एनीमिया का प्रमुख कारण है. आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 33.5 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं ही 4 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गर्भावस्था में एनीमिया प्रबंधन के लिये नियमित ANC जांच बेहद जरूरी</strong></p>



<p><strong>प्रत्येक माह की 9वीं तिथि को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में होती है गर्भवती महिलाओं की जांच</strong></p>



<p><strong>प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरूकता एनीमिया रोकथाम में सहायक</strong><br>आरा, 04 जून. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को खानपान का विशेष ध्यान रखना होता है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह रहती है कि इस दौरान गर्भवती महिलाएं किसी गंभीर रोग की चपेट में न आ जाएं. इन्हीं बीमारियों में से एक है एनीमिया. जिसके कारण न केवल गर्भवती महिलाओं को बल्कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं, कई मामलों में एनीमिया के कारण प्रसव के दौरान जटिलतायें भी बढ़ जाती है, जिसके कारण अधिक रक्त स्राव से गर्भवतियों की मौत की भी संभावना होती है. इसलिए गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाली रक्त स्राव प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है. एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरूकता ना सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="608" height="505" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0020.jpg" alt="" class="wp-image-63088" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0020.jpg 608w, https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0020-350x291.jpg 350w" sizes="(max-width: 608px) 100vw, 608px" /></figure>



<p><strong>पूर्व जांच नहीं कराना एनीमिया का प्रमुख कारण :</strong></p>





<p>राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 15 से 49 वर्ष के मध्य आयु की 68.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं. गर्भावस्था में 4 प्रसव पूर्व जांच नहीं कराना एनीमिया का प्रमुख कारण है. आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 33.5 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं ही 4 प्रसव पूर्व जांच कराती हैं। जो वर्ष 2015-16 में 16.1 प्रतिशत थी. विभागीय प्रयासों और लोगों में जागरूकता के कारण प्रसव पूर्व चार एएनसी जांच में 17.4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.</p>



<p><strong>हर माह सरकारी अस्पतालों में होती गर्भवतियों की जांच :</strong></p>



<p>प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9वीं तिथि को सभी सरकारी अस्पातलों में शिविर का आयोजन किया जाता है. जिसमें गर्भवती महिलाओं में प्रसव पूर्व नियमित रूप से विभिन्न जांच की जाती है. जिसके आधार पर गर्भवतियों को एनेमिक या गंभीर एनेमिक होने की जानकारी भी जाती है. एनेमिक महिलाओं को तीन श्रेणी में रखा जाता है. 10 ग्राम से 10.9 ग्राम खून होने पर माइल्ड एनीमिया, 7 ग्राम से 9.9 ग्राम खून होने पर मॉडरेट एनीमिया एवं 7 ग्राम से कम खून होने पर सीवियर एनीमिया होता है. गंभीर एनेमिक की श्रेणी की गर्भवतियों को प्रथम रेफरल यूनिट में ही प्रसव कराने की सलाह दी जाती है ताकि, प्रसव की जटिलताओं से आसानी से निपटारा पाया जा सके.</p>



<p><strong>जागरूकता से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी संभव:</strong></p>



<pre class="wp-block-preformatted"></pre>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="585" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0023.jpg" alt="" class="wp-image-63089" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0023.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0023-350x315.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>गर्भवती महिलाओं को सामान्य से अधिक आयरन की जरूरत होती है ताकि बढ़ते शिशु के लिए शरीर में खून बनता रहे. इसलिये आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं और आशा दीदियों के द्वारा सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान की जानकारी दी जाती है. ताकि, एनीमिया के विषय में संपूर्ण जानकारी से प्रसव के दौरान होने वाली मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जा सके. गर्भवती महिलाओं को अपने आहार में आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के अलावा, मौसमी फल, स्किनलेश चिकन, मछली, अच्छी तरह से पके अंडे, दाल, हरे पत्तीदार सब्जियां, फलियां, मेवा और अनाज का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है.</p>



<p></p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>ऐसे दूर होगी प्रसव के दौरान की कठिनाइयां</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aise-dur-hogi-prasav-ke-dauran-kathinaiya/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 May 2022 12:29:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
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					<description><![CDATA[एएनसी जांच से दूर होती है प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताएं : डॉ. सुधीर • प्रसव के पूर्व कम से कम चार बार गर्भवतियों को करानी चाहिए जांच• प्रसव पीड़ा होने पर तत्काल सरकारी अस्पताल के चिकित्सक से करें मुलाकात• सभी पीएचसी, अर्बन पीएचसी के अलावा अनुमंडल और सदर अस्पताल में है लेबर ओटी बक्सर, 24 मई. जिले में स्वास्थ्य विभाग के स्तर से मातृ व शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए लगातार सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है, लेकिन, जानकारी के अभाव में या अन्य कारणों से लोग सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं उठाते. जिसके बाद उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इन्हीं सेवाओं में से एक है प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) और प्रसव सुविधाएं. जो सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हैं, उसके बावजूद लोग निजी संस्थानों की ओर मुख कर लेते हैं. हालांकि, गर्भधारण के बाद से लेकर प्रसव के बाद कई योजनाएं और सुविधाएं हैं, जिनका लाभ लोग उठा सकते हैं. लेकिन, इसके लिए उन्हें सरकारी सेवाओं और व्यवस्थाओं पर भरोसा करना होगा. आज जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में एएनसी जांच की सेवा नि:शुल्क उपलब्ध है. वहीं, सभी पीएचसी व अर्बन पीएचसी के साथ अनुमंडल और सदर अस्पताल में प्रसव सेवाएं और सुविधाएं सुदृढ़ है, जिसका लाभ गर्भवती महिलाएं और उनके परिजन उठा सकते हैं. प्रसव पूर्व जांच की महत्वपूर्ण है जांच की भूमिका सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने बताया, गर्भावस्था के दौरान प्रसव पूर्व जांच की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान कम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p><strong>एएनसी जांच से दूर होती है प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताएं : डॉ. सुधीर</strong></p>



<p>• <strong>प्रसव के पूर्व कम से कम चार बार गर्भवतियों को करानी चाहिए जांच<br>• प्रसव पीड़ा होने पर तत्काल सरकारी अस्पताल के चिकित्सक से करें मुलाकात<br>• सभी पीएचसी, अर्बन पीएचसी के अलावा अनुमंडल और सदर अस्पताल में है लेबर ओटी</strong></p>



<p>बक्सर, 24 मई. जिले में स्वास्थ्य विभाग के स्तर से मातृ व शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए लगातार सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है, लेकिन, जानकारी के अभाव में या अन्य कारणों से लोग सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं उठाते. जिसके बाद उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इन्हीं सेवाओं में से एक है प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) और प्रसव सुविधाएं. जो सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हैं, उसके बावजूद लोग निजी संस्थानों की ओर मुख कर लेते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="612" height="408" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220524-WA0019.jpg" alt="" class="wp-image-62676" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220524-WA0019.jpg 612w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220524-WA0019-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 612px) 100vw, 612px" /></figure>



<p>हालांकि, गर्भधारण के बाद से लेकर प्रसव के बाद कई योजनाएं और सुविधाएं हैं, जिनका लाभ लोग उठा सकते हैं. लेकिन, इसके लिए उन्हें सरकारी सेवाओं और व्यवस्थाओं पर भरोसा करना होगा. आज जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में एएनसी जांच की सेवा नि:शुल्क उपलब्ध है. वहीं, सभी पीएचसी व अर्बन पीएचसी के साथ अनुमंडल और सदर अस्पताल में प्रसव सेवाएं और सुविधाएं सुदृढ़ है, जिसका लाभ गर्भवती महिलाएं और उनके परिजन उठा सकते हैं.</p>



<p><strong> प्रसव पूर्व जांच की महत्वपूर्ण है जांच की भूमिका</strong></p>



<p>सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने बताया, गर्भावस्था के दौरान प्रसव पूर्व जांच की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार एएनसी जांच करानी चाहिए. इससे प्रसव के पूर्व या प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को बहुत हद तक कम किया जा सकता है. वहीं, कई मामलों में मातृ मृत्यु की संभावनाओं को भी खत्म किया जा सकता है. उन्होंने बताया, गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताएं मातृ मृत्यु के लिए अधिक जिम्मेदार होती हैं. इसके अलावा महिलाओं की मृत्यु के पीछे कई कारण भी हो सकते हैं. महिलाएं अगर मातृ मृत्यु के कारणों के संबंध में सही समय पर जानकारी मिल जाए, तो उसका समुचित उपचार हो जाएगा जिससे मातृ मृत्यु की दर में कमी लाई जा सकती है. मातृ मृत्यु को रोकने के लिए उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की जाती है. इसके लिए हर माह की 9वीं तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं का किया जाता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="466" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220524-WA0020.jpg" alt="" class="wp-image-62675" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220524-WA0020.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220524-WA0020-350x251.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>सरकारी सुविधाओं व सेवाओं पर कीजिए भरोसा</strong></p>



<p>&#8216;सरकारी अस्पतालों में पूर्व की अपेक्षा स्वास्थ्य सेवाएं और सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा चुका है. अब प्रखंड स्तर पर भी प्रसव संबंधी सारी सेवाओं और सुविधाओं को बहाल किया जा चुका है. लेकिन, इसके अलावा लोगों को भी जागरूक होना होगा. प्रसव अपने आप में एक जटिल प्रक्रिया है. लेकिन, समय पर प्रसव होने से जच्चा बच्चा दोनों सुरक्षित रहते हैं. प्रसव की सटीक जानकारी के लिए गर्भवती महिलाएं नियमित एएनसी जांच कराएं. साथ ही, प्रसव पीड़ा शुरू होने की स्थिति में गर्भवतियों को चिकित्सक के पास ले जाया जा सके. ताकि, उनके प्रसव के पूर्व और उसके दौरान जटिलताओं को दूर किया जा सके.&#8217; &#8211; डॉ. अनिल भट्ट, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>गर्भवती महिलायें भी ले सकती हैं कोविड टीका, नहीं है कोई नुकसान</title>
		<link>https://www.patnanow.com/covid-vaccination-is-safe-for-pregnent-women/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 May 2022 05:57:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
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					<description><![CDATA[अब तक हुए टीकाकरण में पुरुषों से महिलाओं की संख्या काफी अधिकजिन महिलाओं का प्रिकॉशनरी डोज लेने का समय हो गया है वो अपना टीका अवश्य लेंबक्सर,14 मई. जिले में कोरोना वायरस से संक्रमण प्रसार व उसके प्रभाव को कम करने के लिए टीकाकरण का कार्य निरंतर चल रहा है. समय-समय पर टीकाकरण की गति को बढ़ाने के लिए स्पेशल ड्राइव भी चलाए जाते हैं, ताकि, निर्धारित उम्र वर्ग के लाभार्थियों को टीका देकर लाभान्वित किया जा सके. क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी टीकाकरण को कोविड संक्रमण से बचाव का एकमात्र रास्ता बताया है. लेकिन, कोविड टीका लेने का यह मतलब कतई नहीं है की लोग टीकाकरण के बाद भी संक्रमण को लेकर बेपरवाह हो जाए. टीकाकरण के बाद भी नियमित रूप से मास्क के इस्तेमाल, हाथों को साबुन पानी से धोने या सैनिटाइजर के इस्तेमाल तथा शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते रहना आवश्यक है. टीकाकरण के प्रति गर्भवतियों को जागरूक करने की पहल ऐसे मामले हैं जिनमें यह देखा जाता है की लाभुक अपरिहार्य कारणों से टीका लेने में कतराते हैं. जिनमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं,जो अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को लेकर काफी चिंतित रहती हैं. ऐसे में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गर्भवतियों को जागरूक करने की पहल की है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसके लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बताया है कि कोविड टीकाकरण गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित है. कोविड 19 के लक्षण जिन गर्भवती महिलाओं में पाये जाते हैं, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p><strong>अब तक हुए टीकाकरण में पुरुषों से महिलाओं की संख्या काफी अधिक<br>जिन महिलाओं का प्रिकॉशनरी डोज लेने का समय हो गया है वो अपना टीका अवश्य लें</strong><br>बक्सर,14 मई. जिले में कोरोना वायरस से संक्रमण प्रसार व उसके प्रभाव को कम करने के लिए टीकाकरण का कार्य निरंतर चल रहा है. समय-समय पर टीकाकरण की गति को बढ़ाने के लिए स्पेशल ड्राइव भी चलाए जाते हैं, ताकि, निर्धारित उम्र वर्ग के लाभार्थियों को टीका देकर लाभान्वित किया जा सके. क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी टीकाकरण को कोविड संक्रमण से बचाव का एकमात्र रास्ता बताया है. लेकिन, कोविड टीका लेने का यह मतलब कतई नहीं है की लोग टीकाकरण के बाद भी संक्रमण को लेकर बेपरवाह हो जाए. टीकाकरण के बाद भी नियमित रूप से मास्क के इस्तेमाल, हाथों को साबुन पानी से धोने या सैनिटाइजर के इस्तेमाल तथा शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते रहना आवश्यक है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0060-1.jpg" alt="" class="wp-image-62258" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0060-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0060-1-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>टीकाकरण के प्रति गर्भवतियों को जागरूक करने की पहल</strong></p>



<p>ऐसे मामले हैं जिनमें यह देखा जाता है की लाभुक अपरिहार्य कारणों से टीका लेने में कतराते हैं. जिनमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं,जो अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को लेकर काफी चिंतित रहती हैं. ऐसे में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गर्भवतियों को जागरूक करने की पहल की है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसके लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बताया है कि कोविड टीकाकरण गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित है. कोविड 19 के लक्षण जिन गर्भवती महिलाओं में पाये जाते हैं, उन्हें गंभीर बीमारी होने की संभावना अधिक होती है. साथ ही, भ्रूण पर भी इसका प्रभाव हो सकता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को कोविड 19 वैक्सीन लगवाने की सलाह दी गई है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0059.jpg" alt="" class="wp-image-62257" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0059.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0059-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>अवश्य करवाएं गर्भवती महिलाएं कोविड वैक्सीनेशन</strong><br>परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक कोविड 19 वैक्सीन गर्भावस्था के दौरान कभी भी लगवाई जा सकती. इसलिए इसे जल्द से जल्द लगवाने की सलाह दी जा रही है. एडवाइजरी के मुताबिक यदि कोई महिला गर्भावस्था के दौरान कोविड 19 संक्रमण से संक्रमित हो जाती है तो उसे प्रसव के तुरंत बाद वैक्सीन लगायी जानी चाहिए. क्योंकि गर्भावस्था में कोविड 19 वैक्सीन सुरक्षित है. हालांकि, हल्का बुखार, इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या एक से तीन दिनों तक अस्वस्थ महसूस करने जैसे मामूली असर हो सकते हैं, लेकिन, इससे घबराने की जरूरत नहीं है</p>



<p>महिलाओं ने टीकाकरण में पुरुषों को पछाड़ा</p>



<p>कोविड टीकाकरण अभियान की दौड़ में महिलाएं पुरुषों से काफी आगे हैं. अब तक बक्सर जिले की महिलाओं ने टीके की 11,13,650 विभिन्न डोज ले ली है। वहीं, पुरुषों को 10,74,586 डोज दिए गए हैं. इनमें टीके की पहली, दूसरी और तीसरी डोज की संख्या शामिल है. हालांकि, शुक्रवार की शाम तक जिलेवासियों को 22,11,584 टीके के डोज दिए जा चुके हैं. जिनमें 11,71,608 लोगों को पहली, 10,17,053 लोगों को दूसरी और 22,923 को टीके की तीसरी यानि प्रिकॉशनरी डोज दिया जा चुका है.</p>



<p>बक्सर से<strong> ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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