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	<title>Pravin bagi &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>Pravin bagi &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>आप बहुत याद आएंगे रामोजी राव गारू</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Jun 2024 12:08:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[क्षेत्रीय न्यूज चैनलों के भीष्म पितामह रामोजी राव का जाना प्रवीण बागीदेश को क्षेत्रीय टीवी न्यूज चैनल के माध्यम से एक नए तरह की पत्रकारिता से परिचित करानेवाले रामोजी राव नहीं रहे. हैदराबाद में शनिवार की अहले सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली. पूरे देश में उनके चाहनेवालों में शोक की लहर है. वे एक अद्भुत शख्स थे. मेरा सौभाग्य है कि मैंने उनके सानिध्य में टीवी पत्रकारिता की एबीसी सीखी. वे एक निडर पत्रकार, ईमानदार उद्योगपति और राष्ट्रीय सोच रखनेवाले बेहतरीन टीम लीडर थे. दिल्ली में एक विज्ञापन एजेंसी से अपने कॅरियर की शुरुआत करनेवाले रामोजी ने अपनी दूरदर्शिता और परिश्रम के बल पर रामोजी ग्रुप की स्थापना की. वे अपने पीछे फिल्म, मीडिया, होटल, चिट फंड समेत करीब आधे दर्जन संस्थाओं का एक बड़ा साम्राज्य छोड़ गए हैं. उनके द्वारा हैदराबाद में स्थापित रामोजी फिल्म सिटी दुनिया की  सबसे बड़ी फिल्म सिटी है. रामोजी फिल्म सिटी  की स्थापना उन्होंने 1996 में की थी. फिल्म सिटी 1666 एकड़ में फैला हुआ है. यहां 25 फिल्मों की शूटिंग एक साथ की जा सकती है. कुल 50 शूटिंग फ्लोर हैं. अब तक इस फिल्म सिटी में 25000 फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है. इनमें साउथ की ब्लॉकबस्टर फिल्म &#8216;बाहुबली&#8217; के अलावा बॉलीवुड की &#8216;चेन्नई एक्सप्रेस&#8217;, &#8216;सूर्यवंशम&#8217;, &#8216;दिलवाले&#8217;, &#8216;नायक&#8217;, &#8216;गोलमाल&#8217; जैसी फिल्मों की भी शूटिंग हुई. इसके अलावा यहां कई सीरियल्स की भी शूटिंग हुई है. दिल्ली से लौटने के बाद उन्होंने विशाखापट्टनम से 1974 में ईनाडु अखबार शुरू किया. आज यह अखबार तेलंगाना का नंबर वन अखबार है दक्षिण भारत के विभिन्न [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>क्षेत्रीय न्यूज चैनलों के भीष्म पितामह रामोजी राव का जाना</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000200833-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84744" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000200833-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000200833-650x488.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>प्रवीण बागी</strong><br>देश को क्षेत्रीय टीवी न्यूज चैनल के माध्यम से एक नए तरह की पत्रकारिता से परिचित करानेवाले रामोजी राव नहीं रहे. हैदराबाद में शनिवार की अहले सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली. पूरे देश में उनके चाहनेवालों में शोक की लहर है. वे एक अद्भुत शख्स थे. मेरा सौभाग्य है कि मैंने उनके सानिध्य में टीवी पत्रकारिता की एबीसी सीखी. वे एक निडर पत्रकार, ईमानदार उद्योगपति और राष्ट्रीय सोच रखनेवाले बेहतरीन टीम लीडर थे. दिल्ली में एक विज्ञापन एजेंसी से अपने कॅरियर की शुरुआत करनेवाले रामोजी ने अपनी दूरदर्शिता और परिश्रम के बल पर रामोजी ग्रुप की स्थापना की. वे अपने पीछे फिल्म, मीडिया, होटल, चिट फंड समेत करीब आधे दर्जन संस्थाओं का एक बड़ा साम्राज्य छोड़ गए हैं. उनके द्वारा हैदराबाद में स्थापित रामोजी फिल्म सिटी दुनिया की  सबसे बड़ी फिल्म सिटी है. रामोजी फिल्म सिटी  की स्थापना उन्होंने 1996 में की थी. फिल्म सिटी 1666 एकड़ में फैला हुआ है. यहां 25 फिल्मों की शूटिंग एक साथ की जा सकती है. कुल 50 शूटिंग फ्लोर हैं. अब तक इस फिल्म सिटी में 25000 फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है. इनमें साउथ की ब्लॉकबस्टर फिल्म &#8216;बाहुबली&#8217; के अलावा बॉलीवुड की &#8216;चेन्नई एक्सप्रेस&#8217;, &#8216;सूर्यवंशम&#8217;, &#8216;दिलवाले&#8217;, &#8216;नायक&#8217;, &#8216;गोलमाल&#8217; जैसी फिल्मों की भी शूटिंग हुई. इसके अलावा यहां कई सीरियल्स की भी शूटिंग हुई है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/pnc-ramoji-film-City-RFC-gate-Hyderabad.jpg" alt="" class="wp-image-64806" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/pnc-ramoji-film-City-RFC-gate-Hyderabad.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/pnc-ramoji-film-City-RFC-gate-Hyderabad-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>दिल्ली से लौटने के बाद उन्होंने विशाखापट्टनम से 1974 में ईनाडु अखबार शुरू किया. आज यह अखबार तेलंगाना का नंबर वन अखबार है  दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों से इसके 3 दर्जन से अधिक संस्करण निकलते हैं. 1995 में उन्होंने तेलगु में ईटीवी चैनल शुरू किया फिर धीरे धीरे अलग -अलग राज्यों के लिए वहां की स्थानीय भाषा में एक दर्जन से अधिक न्यूज चैनल शुरू किया जो आज भी अलग-अलग नामों से चल रहे हैं. कुछ वर्ष पूर्व उन्होंने ईटीवी भारत के नाम से विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म शुरू किया था. अंतिम समय तक वे उसके विस्तार में लगे रहे.  </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="820" height="647" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000200036.jpg" alt="" class="wp-image-84748" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000200036.jpg 820w, https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000200036-650x513.jpg 650w" sizes="(max-width: 820px) 100vw, 820px" /></figure>



<p>रामोजी राव का जन्म 16 नवंबर 1936 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पेडापरुपुडी गांव में चेरुकुरी वेंकट सुबामा और चेरुकुरी वेंकट सुब्बैया के घर हुआ था. उनके पिता किसान थे. उनके एक पुत्र  सुमन प्रभाकर का निधन हो चुका है दूसरे पुत्र किरण प्रभाकर तथा उनके और उनके स्वर्गवासी भाई की पत्नी एवं बच्चे मिलकर उनका पूरा कारोबार सम्हालते हैं.<br>उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे सिर्फ कारोबार से नहीं मन से एक निर्भीक पत्रकार थे. वे कभी किसी प्रधानमंत्री, मंत्री या मुख्यमंत्री से मिलने नहीं जाते थे. आंध्र या उसके बाद बना तेलंगाना में जब भी कोई नया मुख्यमंत्री बनता तो वह रामोजी से मिलने फिल्म सिटी आता था. यह उनका रसूख था. वाईएसआर रेड्डी सरकार में हुए भूमि घोटाले का जब ईनाडु अखबार ने भंडाफोड़ किया तो सरकार उनके पीछे पड़ गई. उनके मार्गदर्शी चिट फंड समेत अनेक कंपनियों पर छापे मारे गए. उनपर मुक़दमे ठोक दिए गए लेकिन रामोजी झुके नहीं. घाटा उठाकर भी वे डटे रहे और न सिर्फ सरकार की विदाई सुनिश्चित कराई बल्कि मुकदमों से भी बेदाग़ निकले. मार्गदर्शी चिटफंड के बारे में रेड्डी सरकार ने विज्ञापन निकलकर जनता से आवेदन मांगा जिनके पैसे नहीं लौटाने का आरोप था, लेकिन एक भी आवेदन नहीं आया. लोगों का उनपर यह भरोसा था. उनकी एक और विशिष्टता यह थी कि वे अपने किसी भी नए वेंचर के उद्घाटन या वार्षिक समारोहों में नेताओं को नहीं बुलाते थे. खुद ही उद्घाटन करते थे. वे न खुद नेताओं के आगे -पीछे करते थे न संवाददाताओं को ऐसा करने देते थे. खबर सही है तो वह जरूर चलेगी, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, यह उनका मिशन था<br>सफ़ेद रंग से उन्हें विशेष लगाव था. सफ़ेद पैंट -शर्ट और सफ़ेद जूता सालो भर उनका पहनावा रहता था. ईटीवी में हर तीन महीने पर वे हैदराबाद मुख्यालय में संवाददाताओं के साथ मीटिंग करते थे. हर मीटिंग में स्ट्रिंगरों को भी बुलाया जाता था और उनसे वे सीधे बात करते थे. ऐसा दूसरा कोई उदहारण मीडिया जगत में नहीं मिलेगा. स्ट्रिंगरों के आने -जाने और रहने का सारा खर्च कंपनी वहन करती थी. श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन करने पर उनका जोर रहता था. रामोजी ग्रुप में बेवजह कोई आपकी नौकरी नहीं ले सकता. कंपनी छोड़ने पर एक एक पैसा जोड़ कर भुगतान किया जाता था. उनके जैसा सहृदय और सरल मालिक मिलना मुश्किल है. ईटीवी टीवी पत्रकारिता का प्रशिक्षण हाउस बन कर उभरा था. वह पहला ऐसा टीवी संस्थान था जो सीधे कालेज से निकले छात्रों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण देकर टीवी पत्रकार बनाता था. देश का कोई ऐसा चैनल नहीं होगा जहां ईटीवी के सीखे पत्रकार काम न कर रहे हों. वहां नियुक्ति के लिए किसी पैरवी की जरुरत नहीं थी। आपमें थोड़ी भी योग्यता है तो आपकी नियुक्ति होगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="400" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000200727.jpg" alt="" class="wp-image-84746"/></figure>



<p>मीटिंगों में जब कोई सीनियर अपने जूनियर की शिकायत करता तो रामोजी कहा करते थे कोई टीम खराब नहीं होती बल्कि टीम लीडर अच्छा या बुरा होता है. अच्छा टीम लीडर बुरी टीम से से भी अच्छा रिजल्ट देगा और बुरा टीम लीडर अच्छे टीम से भी अच्छा रिजल्ट नहीं दे पायेगा. पत्रकारों से वे विज्ञापन की बात सुनना पसंद नहीं करते थे. मीटिंग में जब कोई संवाददाता विज्ञापन की बात करता था तो वे उसे डांट देते थे. कहते थे मैंने तुम्हें न्यूज के लिए रखा है, विज्ञापन के लिए नहीं. विज्ञापन की चिंता करना तुम्हारा काम नहीं है. आज तो बड़े -बड़े मीडिया हाउस के संपादक विज्ञापन के लिए परेशान रहते हैं. मैंने नामी गिरामी मीडिया मालिकों को मंत्रियों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए बैचैन होते देखा है. रामोजी राव अपनी तरह के अकेले इंसान थे। लगातार घाटे के बाद भी उन्होंने ईटीवी को न बंद किया न कभी छंटनी की. न्यूज 18 ग्रुप को ईटीवी बेचा भी तो इस शर्त के साथ की एक भी कर्मचारी की छंटनी नहीं होगी. </p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">With the demise of Shri Ramoji Rao, India has lost a titan of the media and entertainment sector. An innovative entrepreneur, he pioneered a number of ventures, including the Eenadu newspaper, ETV news network and Ramoji Film City. Honoured with Padma Vibhushan, he succeeded as…</p>&mdash; President of India (@rashtrapatibhvn) <a href="https://twitter.com/rashtrapatibhvn/status/1799299245520122204?ref_src=twsrc%5Etfw">June 8, 2024</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div><figcaption class="wp-element-caption"><strong>राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया शोक</strong></figcaption></figure>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">The passing away of Shri Ramoji Rao Garu is extremely saddening. He was a visionary who revolutionized Indian media. His rich contributions have left an indelible mark on journalism and the world of films. Through his noteworthy efforts, he set new standards for innovation and… <a href="https://t.co/siC7aSHUxK">pic.twitter.com/siC7aSHUxK</a></p>&mdash; Narendra Modi (@narendramodi) <a href="https://twitter.com/narendramodi/status/1799271251082608841?ref_src=twsrc%5Etfw">June 8, 2024</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>उत्तर भारत से उनका कोई लेना देना नहीं था. फिर भी उन्होंने हर प्रदेश में वहां की भाषा में न्यूज चैनल चलाया. यह उनकी राष्ट्रीय सोच थी. एक समय था जब आंध्र प्रदेश में सरकार के बाद रामोजी ग्रुप सबसे बड़ा इम्प्लायर था. 60 हज़ार से अधिक कर्मचारी वहां शिफ्टों में काम करते थे.<br>रामोजी राव ने एक आदर्श जीवन जीया. वे एक गौरवशाली परंपरा छोड़ कर गए हैं. उनका जाना न सिर्फ पत्रकारिता जगत के लिए अपितु फिल्म जगत के लिए भी एक बड़ी क्षति है. उनकी जगह भर पाना असंभव सा है. सचमुच आप बहुत याद आएंगे रामोजी राव गारु. ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे और परिजनों को हौसला दे. शत -शत नम</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>&#8216;पलटीमार राजनीति के चैम्पियन हैं नीतीश कुमार&#8217;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/paltimar-nitish-kumar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Jan 2024 01:44:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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		<category><![CDATA[Pravin bagi]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण बागी की कलम से &#8216;कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे,तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे,तब तुम मेरे पास आना प्रिये&#8217;,भाजपा के नेता आजकल नीतीश कुमार के लिए यही गाना गुनगुनाते होंगे. भाजपा का शीर्ष नेतृत्व नीतीश कुमार को अपने निकट पाकर भले ही खुश हो लेकिन बिहार के पार्टी कार्यकर्ता हतप्रभ हैं. कल तक जिसके खिलाफ वे झंडा उठाए घूम रहे थे, अब उसकी जयकार करने की मज़बूरी है. पार्टी कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. लेकिन इसकी परवाह किसे है? यह ठीक है कि सत्ता हासिल करना राजनीतिक दलों का मूलभूत उद्देश्य होता है, लेकिन उसका भी कुछ प्रोटोकॉल होता है, एक तहजीब होती है, नीति होती है. जनता का विश्वास हासिल कर सत्ता में आना और जनता के कल्याण के लिए सत्ता का इस्तेमाल करना ही लोकतंत्र है. लेकिन बिहार में जो राजनीतिक घटनाक्रम हुआ वह इन सबसे परे है. यह राजनीतिक अवसरवाद का निकृष्टम उदहारण है. बिहार में जो हो रहा है वह लोकतंत्र नहीं धतकर्म है. नीतीश इस धतकर्म के माहिर खिलाड़ी हैं. अपनी कुर्सी बचाने के लिए बारंबार नट की तरह सत्ता की डोर पर कलाबाजी दिखाना और गुलाटी मारना उनका स्वभाव बन गया है. यहां यह याद दिलाना जरुरी है कि नीतीश इंडि गठबंधन के संस्थापक थे. उन्होंने ही घूम -घूम कर सभी विपक्षी नेताओं से बात की थी और साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया था. विपक्ष की पहली बैठक उन्हीं की पहल और आमंत्रण पर पटना में हुई थी. बेशक इसके पीछे कांग्रेस [&#8230;]]]></description>
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<h2 class="wp-block-heading">प्रवीण बागी की कलम से </h2>



<p>&#8216;कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे,<br>तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे,<br>तब तुम मेरे पास आना प्रिये&#8217;,<br>भाजपा के नेता आजकल नीतीश कुमार के लिए यही गाना गुनगुनाते होंगे. भाजपा का शीर्ष नेतृत्व नीतीश कुमार को अपने निकट पाकर भले ही खुश हो लेकिन बिहार के पार्टी कार्यकर्ता हतप्रभ हैं. कल तक जिसके खिलाफ वे झंडा उठाए घूम रहे थे, अब उसकी जयकार करने की मज़बूरी है. पार्टी कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. लेकिन इसकी परवाह किसे है?</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="511" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-with-JP-nadda-650x511.jpg" alt="" class="wp-image-82273" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-with-JP-nadda.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-with-JP-nadda-350x275.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-with-JP-nadda-768x603.jpg 768w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>यह ठीक है कि सत्ता हासिल करना राजनीतिक दलों का मूलभूत उद्देश्य होता है, लेकिन उसका भी कुछ प्रोटोकॉल होता है, एक तहजीब होती है, नीति होती है. जनता का विश्वास हासिल कर सत्ता में आना और जनता के कल्याण के लिए सत्ता का इस्तेमाल करना ही लोकतंत्र है. लेकिन बिहार में जो राजनीतिक घटनाक्रम हुआ वह इन सबसे परे है. यह राजनीतिक अवसरवाद का निकृष्टम उदहारण है. बिहार में जो हो रहा है वह लोकतंत्र नहीं धतकर्म है. नीतीश इस धतकर्म के माहिर खिलाड़ी हैं. अपनी कुर्सी बचाने के लिए बारंबार नट की तरह सत्ता की डोर पर कलाबाजी दिखाना और गुलाटी मारना उनका स्वभाव बन गया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="432" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-with-supporters-650x432.jpg" alt="" class="wp-image-82271" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-with-supporters.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-with-supporters-350x232.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-with-supporters-768x510.jpg 768w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>यहां यह याद दिलाना जरुरी है कि नीतीश इंडि गठबंधन के संस्थापक थे. उन्होंने ही घूम -घूम कर सभी विपक्षी नेताओं से बात की थी और साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया था. विपक्ष की पहली बैठक उन्हीं की पहल और आमंत्रण पर पटना में हुई थी. बेशक इसके पीछे कांग्रेस की सहमति थी लेकिन पहल नीतीश की ही थी. तब उन्होंने कहा था कि वे विपक्ष को एकजुट करने के लिए काम करना चाहते हैं ताकि भाजपा को केंद्र की सत्ता से हटाया जा सके. तब नीतीश के मन में प्रधानमंत्री की कुर्सी थी। लेकिन यह इच्छा उन्होंने खुद कभी जाहिर नहीं की लेकिन उनकी पार्टी के नेताओं ने इसके लिए माहौल बनाने की पुरजोर कोशिश की. पर पीएम की कुर्सी उनसे दूर होती गई. &#8216;इंडिया&#8217; पर कांग्रेस ने कब्ज़ा कर लिया और नीतीश को हासिए पर ठेल दिया गया. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="359" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC-cm-nitish-on-India-650x359.jpg" alt="" class="wp-image-81136" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC-cm-nitish-on-India-650x359.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC-cm-nitish-on-India-350x193.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC-cm-nitish-on-India-768x424.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/PNC-cm-nitish-on-India.jpg 1080w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इसके बाद उनके मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भी खतरा पैदा हो गया. लालू प्रसाद की तरफ से तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था. यहाँ तक कि जदयू को तोड़ कर तेजस्वी को सीएम बनाने का तानाबाना बुना जाने लगा. इसमें ललन सिंह के भी सहयोग की चर्चा जब आम हुई तो आनन फानन में उन्हें अध्यक्ष पद से हटाकर खुद उस कुर्सी पर बैठ गए. फिर भी सीएम पद छोड़ने का दबाव कम नहीं हुआ. उधर भाजपा पर लोकसभा की 40 में से 39 सीटों पर जीत को दोहराने का दबाव था. यह नीतीश के साथ से ही हो सकता था। उधर नीतीश सीएम की कुर्सी बचाए रखना चाहते थे. दोनों को एक दूसरे की जरुरत थी. इसी जरुरत ने भाजपा -जदयू को फिर से साथ लाया. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="338" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-chirag-JP-nadda-at-rajbhawan-650x338.jpg" alt="" class="wp-image-82265" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-chirag-JP-nadda-at-rajbhawan.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-chirag-JP-nadda-at-rajbhawan-350x182.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/01/PNC-nitish-chirag-JP-nadda-at-rajbhawan-768x399.jpg 768w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>यह तो हुई अंदर की बात. नीतीश कुमार को यह बताना चाहिए कि भाजपा में अचानक ऐसी क्या बुराई आ गई थी कि उसे छोड़ कर राजद के साथ चले गए थे ? फिर अचानक भाजपा में उन्हें क्या अच्छा दिखा कि फिर उसके साथ आ गए ? भाजपा तो जो कल थी वही आज भी है! फिर पलटने की वजह क्या रही? इसी तरह राजद में उन्हें कौन का सतगुण दिखा कि भाजपा से नाता तोड़ वे उसके संगी हो गए, फिर अचानक क्या दुर्गुण दिखा की कन्नी काट लिए ? यह कौन सा खेल है नीतीश जी?<br>कल तक नीतीश कुमार में दुनिया का हर दुर्गुण देखनेवाली, उन्हें बीमार और मानसिक रोगी बतानेवाली भाजपा को भी यह बताना चाहिए कि रातोरात नीतीश जी में उन्हें क्या सुधार दिखा कि पुनः उनके आज्ञाकारी सहयोगी बन गए हैं? यह कैसी पॉलिटिक्स है ? जहानाबाद के उस कार्यकर्ता की आत्मा को भाजपा नेता क्या मुंह दिखाएंगे जिसकी मौत पटना में भाजपा के प्रदर्शन में पुलिस की पिटाई से हुई थी? उस लाठी चार्ज को जदयू और राजद जायज ठहरा रहे थे. भाजपा अब किस मुंह से उसकी आलोचना करेगी? भाजपा नेता कार्यकर्ताओं को अपना मुख्यमंत्री और अपनी सरकार का जो सपना दिखाते आ रहे थे, उस सपने का क्या होगा?<br>क्या यह माना जाए की कार्यकर्ताओं को गुमराह किया जा रहा था ?<br>सत्ता लोलुपता के सन्दर्भ में भाजपा, जदयू या राजद में कोई अंतर दिखता है क्या ? पाला बदल कर नीतीश कुमार 9 वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं. यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है. सर्वाधिक लम्बे काल तक बिहार का मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड नीतीश कुमार के नाम जरूर दर्ज हो गया है. लेकिन इस बाजीगरी से बिहार की प्रतिष्ठा गिरी है. नेताओं की विश्वसनीयता पेंदे में चली गई है. ऐसी पलटीमार राजनीति से बिहार का कोई भला होनेवाला नहीं है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="567" height="407" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/samrat.png" alt="" class="wp-image-72664" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/samrat.png 567w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/samrat-350x251.png 350w" sizes="(max-width: 567px) 100vw, 567px" /></figure>



<p>सबसे बड़ा संकट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी के सामने आ खड़ा हुआ है. भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने केसरिया पगड़ी बांधनी शुरू कर दी थी. उन्होंने कहा था कि यह पगड़ी नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने के बाद ही खोलेंगे. नीतीश ने ऐसी कलाबाजी दिखाई कि सम्राट ने जिसको हटाने का संकल्प लेकर पगड़ी बंधी थी उसी के नेतृत्व में वे उप मुख्यमंत्री बन गए हैं. सूत्रों के मुताबिक भाजपा कोर टीम की बैठक में उन्होंने अपनी पीड़ा खुलकर रखी. उन्होंने पूछा कि अब वे क्या करेंगे ? बताते हैं की वे इस समझौते के पक्ष में नहीं थे। लेकिन उन्हें पार्टी के फैसले को मानना पड़ा.<br>भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्णिया की जनसभा में घोषणा की थी कि नीतीश कुमार के लिए भाजपा के दरवाजे सदा के लिए बंद हो गए हैं. यह बात उन्होंने तीन बार दोहराई थी. लेकिन नीतीश तो बाजीगर हैं। उनके पास हर दरवाजे की चाभी रहती है. जब चाहते हैं अपनी सुविधानुसार दरवाजे खोल लेते हैं. उनके लिए कभी कोई दरवाजा बंद नहीं होता. अमित शाह को बिहार की जनता को बताना चाहिए कि ऐसा क्या हो गया की नीतीश के लिए सदा के लिए बंद दरवाजा खोलना पड़ा ? अब कौन उनकी बात पर भरोसा करेगा ?</p>



<p>नीतीश पत्रकारों से बारबार कहा करते थे कि -आप पर दिल्लीवालों का कब्ज़ा है. आप वही दिखाएंगे और लिखेंगे जो आपको दिल्लीवाला कहेगा. अब वे खुद उसी दिल्लीवाले के कब्जे में चले गए. अब उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी यह देखना दिलचस्प होगा. एनडीए के सहयोगी दल रालोसपा और लोजपा (रामविलास) भी भाजपा के इस फैसले से हतप्रभ हैं. नाखुश हैं. उन्हें मनाने में भाजपा को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. यह कहने में कोई गुरेज नहीं की नीतीश कुमार राजनीति के वे दूल्हे हैं जिनकी पालकी उठाने के लिए हर पार्टी तैयार रहती है. वे बिहार की अवसरवादी राजनीति के चैम्पियन बन चुके हैं.</p>



<h1 class="wp-block-heading">Nitishkumar #BJP #BiharPolitics</h1>



<p>प्रवीण बागी देश के वरिष्ठ पत्रकार हैं.</p>
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