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	<title>Pragati Maidan &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>Pragati Maidan &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>शिक्षा में देश को बदलने की ताकत :पीएम मोदी</title>
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		<pubDate>Sat, 29 Jul 2023 06:50:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पीएम मोदी ने किया भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन अखिल भारतीय शिक्षा समागम 29 और 30 जुलाई, 2023 तक आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली के प्रगति मैदान के भारत मंडपम में अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन किया. इस दौरान पीएम ने कहा कि शिक्षा देश को बदलने की ताकत रखती है, आज का यह अवसर बेहद महत्वपूर्ण है. ‘समागम’ राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 की तीसरी वर्षगांठ के साथ तहत किया जाने वाला एक कदम है.प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम में उद्घाटन भाषण दिया और पीएम श्री योजना के तहत फंड की पहली किस्त भी जारी की. इसका उद्देश्य है कि योजना के तहत आने वाले स्कूल छात्रों को इस तरह से तैयार करेंगे कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति की परिकल्पना के मुताबिक एक समतापूर्ण, समावेशी और बहुलवादी समाज के निर्माण से जुड़ें और बेहतर योगदान देने वाले नागरिक बनें. अखिल भारतीय शिक्षा समागम 29 और 30 जुलाई, 2023 को आयोजित किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन के अवसर पर कहा कि यह शिक्षा ही है जो देश की तकदीर बदलने की ताकत रखती है. देश जिस लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहा है, उसे हासिल करने में शिक्षा की अहम भूमिका है. आप इसके प्रतिनिधि हैं. अखिल भारतीय शिक्षा समागम का हिस्सा बनना मेरे लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है.&#8217; यह समागम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की तीसरी वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया गया. कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री पीएमश्री योजना के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><br></p>



<p></p>



<p><strong>पीएम मोदी ने किया भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन</strong></p>



<p><strong>अखिल भारतीय शिक्षा समागम 29 और 30 जुलाई, 2023 तक आयोजित </strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="461" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/pm-1-650x461.png" alt="" class="wp-image-76783" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/pm-1-650x461.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/pm-1-350x248.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/pm-1-768x545.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/pm-1.png 868w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली के प्रगति मैदान के भारत मंडपम में अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन किया. इस दौरान पीएम ने कहा कि शिक्षा देश को बदलने की ताकत रखती है, आज का यह अवसर बेहद महत्वपूर्ण है. ‘समागम’ राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 की तीसरी वर्षगांठ के साथ तहत किया जाने वाला एक कदम है.प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम में उद्घाटन भाषण दिया और पीएम श्री योजना के तहत फंड की पहली किस्त भी जारी की. </p>



<p>इसका उद्देश्य है कि योजना के तहत आने वाले स्कूल छात्रों को इस तरह से तैयार करेंगे कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति की परिकल्पना के मुताबिक एक समतापूर्ण, समावेशी और बहुलवादी समाज के निर्माण से जुड़ें और बेहतर योगदान देने वाले नागरिक बनें. अखिल भारतीय शिक्षा समागम 29 और 30 जुलाई, 2023 को आयोजित किया जा रहा है. </p>



<p>प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन के अवसर पर कहा कि यह शिक्षा ही है जो देश की तकदीर बदलने की ताकत रखती है. देश जिस लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहा है, उसे हासिल करने में शिक्षा की अहम भूमिका है. आप इसके प्रतिनिधि हैं. अखिल भारतीय शिक्षा समागम का हिस्सा बनना मेरे लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है.&#8217;</p>



<p><br>यह समागम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की तीसरी वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया गया. कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री पीएमश्री योजना के तहत धनराशि की पहली किस्त किया. ये स्कूल छात्रों को इस तरह से शिक्षा प्रदान करेंगे कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की परिकल्पना के अनुरूप एक समतापूर्ण, समावेशी और बहुलवादी समाज के निर्माण में योगदान देने वाले नागरिक बन सकें. प्रधानमंत्री शिक्षा और कौशल पाठ्यक्रम की 12 भारतीय भाषाओं में अनुदित पुस्तकों का विमोचन करेंगे. प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरित होकर, युवाओं को तैयार करने और उन्हें अमृत काल में देश का नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम करने के उद्देश्य से एनईपी 2020 का शुभारंभ किया गया था.<br>इसका उद्देश्य भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए युवाओं को तैयार करना है तथा उन्‍हें बुनियादी मानवीय मूल्यों से जोड़े रखना है. अपने कार्यान्वयन के तीन वर्षों के दौरान इस नीति ने स्कूल, उच्च शिक्षा और कौशल शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं. इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन 29 और 30 जुलाई को किया जाएगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/pm-modi-on-nes.png" alt="" class="wp-image-76784" width="804" height="458" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/pm-modi-on-nes.png 472w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/pm-modi-on-nes-350x199.png 350w" sizes="(max-width: 804px) 100vw, 804px" /></figure>



<p>यह दो दिवसीय कार्यक्रम शिक्षाविदों, क्षेत्र विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, शिक्षकों और स्कूलों, उच्च शिक्षा और कौशल संस्थानों के छात्रों सहित अन्य लोगों को एनईपी 2020 को लागू करने संबंध में अपने सुझाव देने का मंच प्रदान करेगा. अखिल भारतीय शिक्षा समागम में सोलह सत्र शामिल होंगे, जिनमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शासन तक पहुंच, न्यायसंगत और समावेशी शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूह के मुद्दे, राष्ट्रीय संस्थान रैंकिंग फ्रेमवर्क, भारतीय ज्ञान प्रणाली, शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकरण समेत अन्‍य विषयों पर चर्चा होगी.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>देशी मुर्गी विलायती बोल के चक्कर में पिछड़ रही है मगही</title>
		<link>https://www.patnanow.com/uttar-bhartiya-bhasha-boli-aur-sahitya-ek-paricharcha/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nikhil]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Jan 2019 10:40:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[New Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Pragati Maidan]]></category>
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		<category><![CDATA[नई दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[प्रगति मैदान]]></category>
		<category><![CDATA[बोली और साहित्य : एक परिचर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[संजीव कुमार मुकेश]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली / पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) &#124; रविवार 6 जनवरी को विश्व पुस्तक मेला, प्रगति मैदान में कविता कोश द्वारा आयोजित &#8220;उत्तर भारतीय भाषा, बोली और साहित्य : एक परिचर्चा &#8221; में मगही भाषा पर संवाद हेतु आमंत्रित नालंदा के युवा कवि संजीव कुमार मुकेश से जब यह सवाल किया गया कि मगही आज भोजपुरी और मैथिली से क्यों पिछड़ रही है. इस पर मुकेश ने कहा कि देशी मुर्गी विलायती बोल के चक्कर में मगही पिछड़ रही है. आज हम अपने स्टेटस को मेन्टेन करने के लिये घर में भी हिंदी तो छोड़िये अंग्रेजी को बोल चाल की भाषा बना रहे हैं. बच्चों से संवाद की भाषा भी अंग्रेजी बनती जा रही है. जबकि लोकभाषा में संवाद एक अपनापन पैदा करता है. किसी व्यक्ति तक कोई बात लोक भाषा में आसानी से दिल के करीब तक पहुंचाई जा सकती है, क्योंकि लोक भाषाएं दो व्यक्तियों को वैसे ही जोड़ती है जैसे माँ की कोख. यही कारण है कि बड़े बड़े मंचो से भी शुरुआत इस क्षेत्र की लोकभाषा के अभिवादन शब्दों के साथ खूब किया जा रहा है. मुकेश ने मगही के शुरुआती दौर से आज मगही में हो रहे समृद्ध साहित्यिक विकास की चर्चा की. इस अवसर अंगिका से प्रसून लतांत, अवधी से अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, बज्जिका से हरि नारायण हरि, मैथिली से कैलाश मिश्र, ब्रज से श्रुति पुरी व भोजपुरी से विनय भूषण जी ने भाग लिया. कार्यक्रम का संचालन रश्मि भारद्वाज ने किया. इस अवसर पर सभी आमंत्रित कवियों साहित्यकारों को प्रतीक चिन्ह से कविता कोश के निदेशक ललित कुमार, संयुक्त [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><img decoding="async" class="size-full wp-image-37342 aligncenter" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/01/pnc-magahi-1.jpg" alt="" width="650" height="366" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2019/01/pnc-magahi-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2019/01/pnc-magahi-1-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" />नई दिल्ली / पटना (ब्यूरो रिपोर्ट)</strong> | रविवार 6 जनवरी को विश्व पुस्तक मेला, प्रगति मैदान में कविता कोश द्वारा आयोजित &#8220;<em>उत्तर भारतीय भाषा, बोली और साहित्य : एक परिचर्चा</em> &#8221; में मगही भाषा पर संवाद हेतु आमंत्रित नालंदा के युवा कवि संजीव कुमार मुकेश से जब यह सवाल किया गया कि मगही आज भोजपुरी और मैथिली से क्यों पिछड़ रही है. इस पर मुकेश ने कहा कि देशी मुर्गी विलायती बोल के चक्कर में <img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft size-thumbnail wp-image-37341" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/01/pnc-magahi--250x250.jpg" alt="" width="250" height="250" /><img loading="lazy" decoding="async" class="size-thumbnail wp-image-37345 alignright" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/01/pnc-magahi-4-250x250.jpg" alt="" width="250" height="250" />मगही पिछड़ रही है. आज हम अपने स्टेटस को मेन्टेन करने के लिये घर में भी हिंदी तो छोड़िये अंग्रेजी को बोल चाल की भाषा बना रहे हैं. बच्चों से संवाद की भाषा भी अंग्रेजी बनती जा रही है. जबकि लोकभाषा में संवाद एक अपनापन पैदा करता है. किसी व्यक्ति तक कोई बात लोक भाषा में आसानी से दिल के करीब तक पहुंचाई जा सकती है, क्योंकि लोक भाषाएं दो व्यक्तियों को वैसे ही जोड़ती है जैसे माँ की कोख. यही कारण है कि बड़े बड़े मंचो से भी शुरुआत इस क्षेत्र की लोकभाषा के अभिवादन शब्दों के साथ खूब किया जा रहा है. मुकेश ने मगही के शुरुआती दौर से आज मगही में हो रहे समृद्ध साहित्यिक विकास की चर्चा की. इस अवसर अंगिका से प्रसून लतांत, अवधी से अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, बज्जिका से हरि नारायण हरि, मैथिली से कैलाश मिश्र, ब्रज से श्रुति पुरी व भोजपुरी से विनय भूषण जी ने भाग लिया. कार्यक्रम का संचालन रश्मि भारद्वाज <img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft size-thumbnail wp-image-37344" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/01/pnc-magahi-3-250x250.jpg" alt="" width="250" height="250" /><img loading="lazy" decoding="async" class="size-thumbnail wp-image-37343 alignright" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/01/pnc-magahi-2-250x250.jpg" alt="" width="250" height="250" />ने किया. इस अवसर पर सभी आमंत्रित कवियों साहित्यकारों को प्रतीक चिन्ह से कविता कोश के निदेशक ललित कुमार, संयुक्त निदेशक शारदा सुमन व उपनिदेशक राहुल शिवाय ने सम्मानित किया. विदित हो कि कविता कोश अंतरजाल पर उपलब्ध भारतीय काव्य के सबसे बड़े और सुव्यवस्थित स्रोतो में से एक है. विकि तकनीक पर आधारित इस कोश की वेबसाइट पर हिन्दी व उर्दू भाषा के प्रमुख कवियों की कृतियों का संकलन है. इसके अतिरिक्त कविता कोश में अनूदित रचनाओं तथा लोकभाषा और लोकगीतो को भी संग्रहित किया गया है. यूनिकोड आधारित होने की वजह से कविता कोश में उपलब्ध सामग्री को किसी भी कम्प्यूटर पर बिना किसी विशेष सॉफ्टवेयर/फ़ॉन्ट के पढ़ा जा सकता है..<br />
<strong><span style="color: #800000;"><em>मगही में प्रकाशित पत्रिका &#8211;</em></span></strong><br />
<em>मगही</em>&#8211; संपादक, डॉ श्रीकांत शास्त्री (1953)<br />
<em>विहान</em>&#8211; संपादक, डॉ श्रीकांत शास्त्री और रामनंदन (1958)<br />
<em>सारथी</em> &#8211; मथुरा प्रसाद नवीन व मिथलेश (1971)<br />
<em>पाटली</em> &#8211; केशव प्रसाद वर्मा, दिलीप कुमार (1989)<br />
<em>मगही पत्रिका</em> (दिल्ली से), <em>झारखड मागधी</em> रांची से, <em>बंग मागधी</em> कोलकाता से, <em>अलका मागधी</em> पटना से, संपादक, धनंजय श्रोत्रिय (2001) अलका मागधी के 200 अंक निकाले गये.<br />
<em>मगध की आवाज़</em>&#8211; पारस सिंह (कोलकाता)<br />
<span style="color: #800000;"><em><strong>महाकाव्य का मगही में अनुवाद-</strong> </em></span><br />
<em>रामायण</em> &#8211; डॉ योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश<br />
<em>गीता</em> &#8211; उदय शंकर शर्मा<br />
<span style="color: #800000;"><strong><em>अ</em><em>न्य भाषा के पुस्तक का अनुवाद-</em> </strong></span><br />
<em>मेघदूत व गीतांजलि</em> &#8211; डॉ उदय शंकर शर्मा<br />
<em>काला पानी</em> (दस्तवस्की), <em>आज कल से हीरो</em> (लेरमंतव) <em>रशियन उपन्यास का मगही अनुवाद </em>&#8211; अनुवादक- ई नारायण प्रसाद<br />
<em>मोती के कंगन बाली लड़की</em> (कन्नड़) &#8211; अनुवादक- ई नारायण प्रसाद<br />
<em>समता के समर्थक अंबेडकर</em>&#8211; उदय कुमार भारती<br />
<span style="color: #800000;"><strong><em>मगही हाल में रिलीज़ चर्चित फ़िल्म &#8211;</em></strong></span><br />
<em>देबन मिसिर</em> (निर्देशक मिथलेश सिंह)<br />
<em>बिधाता के विधान</em> &#8211; प्रभात वर्मा<br />
<span style="color: #800000;"><em><strong>मगही की पढ़ाई:</strong></em></span><br />
पटना विश्वविद्यालय के प्रवेशिका परीक्षा में पद्य संग्रह में मगही के दू गो कविता चाँद और जगउनी (कृष्णदेव प्रसास) 1943 से पढ़ाई जा रही है. मगध विश्वविद्यालय में बीए और एमए में मगही की पढ़ाई 1965 से शुरू हुई. बिहार इंटरमीडिएट में 11वीं व 12वीं में भी मगही की पढ़ाई चल रही है. नालंदा खुला विश्वविद्यालय में मगही की पढ़ाई 2005 से चल रही है. 100 से अधिक छात्रों ने अब तक पीएचडी की उपाधि मगही में शोध पर प्राप्त किया है.</p>
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