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	<title>pollution &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>pollution &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>जैव विविधता दिवस पर प्रदूषण के कारकों पर हुई चर्चा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 May 2024 18:49:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पटना ।। बुधवार को जैव-विविधता का अन्तर्राष्ट्रीय दिवस मनाया गया. जैव-विविधता से परिपूर्ण इस राज्य में जैव-विविधता की रक्षा करना सभी का दायित्व है. इस अवसर पर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा प्रत्येक माह आयोजित किये जाने वाले वैज्ञानिक व्याख्यान सह-परस्पर संवादात्मक श्रृंखला की 23 वीं कड़ी में डॉ. डी.के. शुक्ला, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा &#8220;जैव-विविधता और पर्यावरणीय प्रदूषण नियंत्रण बिहार में अनिवार्यता और संभावनाएँ&#8221; (Biodiversity and Control &#38; Mitigation of Environmental Pollution &#8211; Scope &#38; Opportunities in Bihar) विषय पर अपना सारगर्भित व्याख्यान दिया गया. डॉ. शुक्ला ने अपने सम्बोधन में बताया कि हमारे वनों में जैव विविधता का खजाना भरा पड़ा है.वैश्विक तापमान में वृद्धि से जंगलों में आग लगने की घटना में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है. बिहार राज्य में भी जैव-विविधता से परिपूर्ण कई वन हैं जिन्हें तापमान में वृद्धि के कारण आग से रक्षा हेतु एक रणनीति बनाने की आवश्यकता है. अग्नि प्रभावित वनों में जल व मृदा संरक्षण हेतु अग्नि शमन योजना बनाकर इस पर अमल किया जाना चाहिए. इस हेतु ड्रोन की सहायता से वायुमंडलीय आद्रता के सेंसरों से, नासा से प्राप्त सेटेलाईट डाटा से ऐसे अग्नि की घटनाओं का ब्यौरा प्राप्त कर इसके व्यवस्थित व स-समय शमन उपायों की योजना बनाये जाने की तत्काल आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि संयुक्त वन प्रबंधन समिति तथा इको डेवलपमेंट समिति के सहयोग से वनों की अग्नि पर काबू पाया जा सकता है. उन्होंने बिहार राज्य को वन-अग्नि मुक्त राज्य बनाने हेतु प्रयास किये जाने की आवश्यकता बताई. उन्होंने अपने [&#8230;]]]></description>
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<p>पटना ।। बुधवार को जैव-विविधता का अन्तर्राष्ट्रीय दिवस मनाया गया. जैव-विविधता से परिपूर्ण इस राज्य में जैव-विविधता की रक्षा करना सभी का दायित्व है.</p>



<p>इस अवसर पर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा प्रत्येक माह आयोजित किये जाने वाले वैज्ञानिक व्याख्यान सह-परस्पर संवादात्मक श्रृंखला की 23 वीं कड़ी में डॉ. डी.के. शुक्ला, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा &#8220;जैव-विविधता और पर्यावरणीय प्रदूषण नियंत्रण बिहार में अनिवार्यता और संभावनाएँ&#8221; (Biodiversity and Control &amp; Mitigation of Environmental Pollution &#8211; Scope &amp; Opportunities in Bihar) विषय पर अपना सारगर्भित व्याख्यान दिया गया. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-bspcb-pollution-meeting-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84333" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-bspcb-pollution-meeting-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-bspcb-pollution-meeting-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-bspcb-pollution-meeting-1536x1152.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>डॉ. शुक्ला ने अपने सम्बोधन में बताया कि हमारे वनों में जैव विविधता का खजाना भरा पड़ा है.वैश्विक तापमान में वृद्धि से जंगलों में आग लगने की घटना में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है. बिहार राज्य में भी जैव-विविधता से परिपूर्ण कई वन हैं जिन्हें तापमान में वृद्धि के कारण आग से रक्षा हेतु एक रणनीति बनाने की आवश्यकता है. अग्नि प्रभावित वनों में जल व मृदा संरक्षण हेतु अग्नि शमन योजना बनाकर इस पर अमल किया जाना चाहिए. इस हेतु ड्रोन की सहायता से वायुमंडलीय आद्रता के सेंसरों से, नासा से प्राप्त सेटेलाईट डाटा से ऐसे अग्नि की घटनाओं का ब्यौरा प्राप्त कर इसके व्यवस्थित व स-समय शमन उपायों की योजना बनाये जाने की तत्काल आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि संयुक्त वन प्रबंधन समिति तथा इको डेवलपमेंट समिति के सहयोग से वनों की अग्नि पर काबू पाया जा सकता है. उन्होंने बिहार राज्य को वन-अग्नि मुक्त राज्य बनाने हेतु प्रयास किये जाने की आवश्यकता बताई.</p>



<p>उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि जैव-विविधता, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. जलवायु परिवर्तन और प्राकृतवास के नुकसान के कारण जैव-विविधता पर आ रहा खतरा आज एक वैश्विक समस्या है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="864" height="688" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-bspcb-pollution-control-meeting.jpg" alt="" class="wp-image-84332" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-bspcb-pollution-control-meeting.jpg 864w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-bspcb-pollution-control-meeting-650x518.jpg 650w" sizes="(max-width: 864px) 100vw, 864px" /></figure>



<p>पर्यावरणीय प्रदूषण के कारकों में कार्बन डाईऑक्साइड, अमोनिया, ओजोन PM2.5 एवं PM10 के अतिरिक्त सल्फर डायक्साइड एवं जलवाष्प भी शामिल हैं. हलांकि सल्फर डायऑक्साइड एक ग्रीन हाउस गैस नहीं है, पर एक खास एयरोसोल से जुड़कर यह भी ग्रीन हाउस गैस का प्रभाव डालते हैं. पृथ्वी को गर्म करने में जलवाष्प की भी भूमिका है. राज्य में नदियों एवं अन्य जल स्रोतों के प्रमुख प्रदूषकों में फीकल कॉलीफार्म की सांद्रता प्रमुख है. जल स्रोतों में नाइट्रोजन एवं फास्फोरस की बढ़ती मात्रा एक गंभीर समस्या है जिसके कारण कुल इलाकों में कुल जल समिति (Water bodies) विलुप्त होने की कगार पर है, आज माइक्रोप्लास्टिक की गिनती एक प्रबल प्रदूषकों में की जा रही है. यह हमारे भोजन श्रृंखला में शामिल होकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का प्रमुख कारक बन सकता है.</p>



<p>राज्य पर्षद की पहल पर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पर्यावरण में माइक्रो प्लास्टिक पर अध्ययन कराने व भोजन श्रृंखला में इसकी मात्रा निर्धारित कराने हेतु राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षदों को इसकी जिम्मेवारी देने हेतु सहमति प्रदान की गई है.</p>



<p>इसके अतिरिक्त अर्सेनिक लेड, कैडमियम जैसी भारी धातुएं भी हमारे भोजन श्रंखला में आ रही हैं जो एक गंभीर समस्या का विषय है. मृदा प्रदूषण भी एक समस्या के रूप में सामने आ रहा है इसके माध्यम से भी हमारे भोजन श्रृंखला में रासायनिक खाद, कीटनाशक, थैलेट्स आदि शामिल हो रहे है. डॉ. शुक्ला ने राज्य में आम, जामुन, पीपल, शीशम की प्रजातियों पर राज्य की मृदा के संदर्भ में चर्चा करते हुए बताया कि इनकी कई प्रजातियां के संरक्षण पर सरकार संवेदनशील एवं क्रियाशील है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>क्लाइमेट रेजिलियेंट और लो कार्बन पथवे पर आप भी दे सकते हैं सुझाव</title>
		<link>https://www.patnanow.com/climate-resilient-meeting/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Apr 2024 01:03:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Low carbon emission]]></category>
		<category><![CDATA[pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार के लिए क्लाइमेट रेजिलियेंट एंड लो कार्बन पथवे पर फीडबैक हेतु पटना में बैठक पटना: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी की अध्यक्षता में मंगलवार को &#8216;क्लाइमेट रेजिलियेंट एंड लो कार्बन पथवे&#8217; पर एक फीडबैक बैठक आयोजित की गई। विगत 4 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बिहार के लिए निम्न कार्बन मार्ग पर एक मसौदा रिपोर्ट जारी करने के मद्देनजर आयोजित बैठक में हितधारकों को अपनी अंतर्दृष्टि प्रदान करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया. बैठक को संबोधित करते हुए सचिव द्वारा बैठक के उद्देश्य को स्पष्ट किया गया और मसौदा रिपोर्ट के संबंध में विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगने में अपनी भूमिका पर जोर दिया गया. उन्होंने कहा कि “विभिन्न क्षेत्रों में कम कार्बन उत्सर्जन की दिशा में एक मार्ग प्रशस्त करने के प्रयास में बिहार देश में एक अग्रणी राज्य के रूप में खड़ा है. मसौदा रिपोर्ट बनाने में बहुत मेहनत, व्यापक अध्ययन और डेटा विश्लेषण किया गया है. इसका उद्देश्य राज्य सरकार का एक नीति दस्तावेज बनना है, जिसका उद्देश्य विभिन्न विभागों द्वारा अपनाना और कार्यान्वयन करना है, और उच्चतम स्तर पर निगरानी के अधीन है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) के सदस्य सचिव एस.चंद्रशेखर ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और बीएसपीसीबी के बीच सहयोगात्मक प्रयासों को रेखांकित किया, जिसे फरवरी 2021 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) में शामिल किया गया था, जिसका उद्देश्य &#8216;बिहार के लिए जलवायु लचीला और कम कार्बन विकास मार्ग&#8217; के लिए रणनीतियाँ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बिहार के लिए क्लाइमेट रेजिलियेंट एंड लो कार्बन पथवे पर फीडबैक हेतु पटना में बैठक</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/04/pnc-low-carbon-emissions-meeting.jpg" alt="" class="wp-image-83471"/></figure>



<p>पटना: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी की अध्यक्षता में मंगलवार को &#8216;क्लाइमेट रेजिलियेंट एंड लो कार्बन पथवे&#8217; पर एक फीडबैक बैठक आयोजित की गई। विगत 4 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बिहार के लिए निम्न कार्बन मार्ग पर एक मसौदा रिपोर्ट जारी करने के मद्देनजर आयोजित बैठक में हितधारकों को अपनी अंतर्दृष्टि प्रदान करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया.</p>



<p>बैठक को संबोधित करते हुए सचिव द्वारा बैठक के उद्देश्य को स्पष्ट किया गया और मसौदा रिपोर्ट के संबंध में विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगने में अपनी भूमिका पर जोर दिया गया. उन्होंने कहा कि “विभिन्न क्षेत्रों में कम कार्बन उत्सर्जन की दिशा में एक मार्ग प्रशस्त करने के प्रयास में बिहार देश में एक अग्रणी राज्य के रूप में खड़ा है. मसौदा रिपोर्ट बनाने में बहुत मेहनत, व्यापक अध्ययन और डेटा विश्लेषण किया गया है. इसका उद्देश्य राज्य सरकार का एक नीति दस्तावेज बनना है, जिसका उद्देश्य विभिन्न विभागों द्वारा अपनाना और कार्यान्वयन करना है, और उच्चतम स्तर पर निगरानी के अधीन है.</p>



<p>बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) के सदस्य सचिव एस.चंद्रशेखर ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और बीएसपीसीबी के बीच सहयोगात्मक प्रयासों को रेखांकित किया, जिसे फरवरी 2021 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) में शामिल किया गया था, जिसका उद्देश्य &#8216;बिहार के लिए जलवायु लचीला और कम कार्बन विकास मार्ग&#8217; के लिए रणनीतियाँ तैयार करना था. उन्होंने बताया कि अध्ययन के परिणामस्वरूप एक मसौदा रणनीति रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे जनता और सभी हितधारकों से प्रतिक्रिया और सुझावों के लिए खोल दिया गया है. यह बैठक उस ठोस प्रयास की निरंतरता के रूप में कार्य करती है.</p>



<p>बिहार के लिए जलवायु-लचीला और कम कार्बन मार्ग के भीतर उल्लिखित सिफारिशों पर चर्चा करते हुए, यूएनईपी इंडिया की उप देश प्रमुख दिव्या दत्त ने कहा कि “रणनीति ने संक्षिप्त के तहत मौजूदा नीतियों में सिफारिशों के निर्बाध एकीकरण को सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा पहल और योजनाओं का आकलन किया है. इसके अलावा, यह मध्यम (2050 तक) और दीर्घकालिक (2070 तक) सिफारिशें प्रस्तुत करता है, जिसमें संरचनात्मक और संस्थागत स्तर पर आवश्यक पहल शामिल हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/04/pnc-forest-meeting-on-low-carbon-emissions.jpg" alt="" class="wp-image-83470"/></figure>



<p>जलवायु-लचीला और कम कार्बन रणनीति पर एक प्रस्तुति देते हुए, डब्ल्यूआरआई इंडिया के वरिष्ठ कार्यक्रम सहयोगी मणि भूषण झा ने कहा कि रिपोर्ट में बिजली, परिवहन, अपशिष्ट, भवन, उद्योग, कृषि, वन सहित क्षेत्रों में शमन और अनुकूलन रणनीतियां निर्धारित की गई हैं. डेटा के वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद आपदा प्रबंधन, जल और मानव स्वास्थ्य और 35,000 से अधिक लोगों के प्राथमिक सर्वेक्षण के साथ-साथ सभी 38 जिलों का दौरा किया गया.</p>



<p>बैठक में एनआईटी पटना, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार, नालंदा यूनिवर्सिटी, टाटा-कॉर्नेल इंस्टीट्यूट, चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट पटना, शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन और पीरामल फाउंडेशन सहित विभिन्न संस्थानों और संगठनों के विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने बैठक में प्रतिक्रिया साझा की. </p>



<p>Bihar.<strong>CRLCDP@gmail .com या बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय में 12 अप्रैल तक</strong> <strong>सुझाव आमंत्रित </strong><br>सत्र का समापन करते हुए, बीएसपीसीबी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार ने आभार व्यक्त किया और बिहार के लिए जलवायु लचीले और कम कार्बन विकास पथ की मसौदा रिपोर्ट पर आगे की प्रतिक्रिया या सुझाव आमंत्रित किए, जिन्हें ईमेल के माध्यम से बिहार को निर्देशित किया जा सकता है.<br>CRLCDP@gmail .com या बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय में 12 अप्रैल तक जमा करें.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भागलपुर बिहार का सर्वाधिक प्रदूषित शहर, पटना और आरा की हालत खराब</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bhagalpur-is-the-most-polluted-city-of-bihar-condition-of-patna-and-arrah-is-bad/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Jan 2024 06:58:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
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		<category><![CDATA[pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार के भागलपुर में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर प्रदूषण के मामले में भागलपुर ने बेगूसराय को पीछे छोड़ा कई शहरों में वायु प्रदूषण की मात्रा 300 एक्यूआइ के पार रिकार्ड पटना. प्रदेश में वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ती जा रही है. भागलपुर शनिवार को राज्य का सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा. यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 410 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया. वहीं, पटना की हवा 307 एक्यूआइ के साथ अत्यंत खराब स्तर पर रही.राजगीर, छपरा, आरा, सहरसा, पूर्णिया, अररिया, मुंगेर में वायु प्रदूषण की मात्रा 300 एक्यूआइ के पार रिकार्ड की गई. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के विशेषज्ञों का कहना है वातावरण में कोहरे का प्रभाव बढ़ने के कारण वायु प्रदूषण की स्थिति खराब हो गई है. राजधानी में इको पार्क की स्थिति शनिवार को बेहद खराब रही. वहां पर एक्यूआइ की मात्रा 362 रिकार्ड की गई. राजधानी में सबसे कम वायु प्रदूषण पटना सिटी में था. विशेषज्ञों का कहना है कि पटना में निर्माण कार्य ही प्रदूषण का मुख्य कारण है. अगर उसके मानकों का पालन नहीं किया गया तो भविष्य में स्थिति और खराब हो सकती है. राजधानी में प्रदूषण की स्थिति स्थान : एक्यूआइ इको पार्क : 362 गांधी मैदान : 360 प्रमुख शहर : एक्यूआइ भागलपुर : 410 सहरसा : 378 राजगीर : 358 अररिया : 338 छपरा : 335 आरा : 326 पूर्णिया : 320 मुंगेर : 301 pncdesk]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>बिहार के भागलपुर में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर</strong></p>



<p><strong>प्रदूषण के मामले में भागलपुर ने बेगूसराय को पीछे छोड़ा</strong></p>



<p><strong>कई शहरों में वायु प्रदूषण की मात्रा 300 एक्यूआइ के पार रिकार्ड</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/01/BHAGALPUR-650x488.png" alt="" class="wp-image-81486" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/01/BHAGALPUR-650x488.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/01/BHAGALPUR-350x263.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/01/BHAGALPUR.png 670w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पटना. प्रदेश में वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ती जा रही है. भागलपुर शनिवार को राज्य का सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा. यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 410 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया. वहीं, पटना की हवा 307 एक्यूआइ के साथ अत्यंत खराब स्तर पर रही.राजगीर, छपरा, आरा, सहरसा, पूर्णिया, अररिया, मुंगेर में वायु प्रदूषण की मात्रा 300 एक्यूआइ के पार रिकार्ड की गई. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के विशेषज्ञों का कहना है वातावरण में कोहरे का प्रभाव बढ़ने के कारण वायु प्रदूषण की स्थिति खराब हो गई है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="258" height="195" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/01/images.jpeg" alt="" class="wp-image-81487" style="aspect-ratio:1.323076923076923;width:548px;height:auto"/></figure>



<p>राजधानी में इको पार्क की स्थिति शनिवार को बेहद खराब रही. वहां पर एक्यूआइ की मात्रा 362 रिकार्ड की गई. राजधानी में सबसे कम वायु प्रदूषण पटना सिटी में था. विशेषज्ञों का कहना है कि पटना में निर्माण कार्य ही प्रदूषण का मुख्य कारण है. अगर उसके मानकों का पालन नहीं किया गया तो भविष्य में स्थिति और खराब हो सकती है.</p>



<p><strong>राजधानी में प्रदूषण की स्थिति</strong></p>



<p><strong>स्थान : एक्यूआइ</strong></p>



<p>इको पार्क : 362</p>



<p>गांधी मैदान : 360</p>



<p><strong>प्रमुख शहर : एक्यूआइ</strong></p>



<p>भागलपुर : 410</p>



<p>सहरसा   : 378</p>



<p>राजगीर   : 358</p>



<p>अररिया   : 338</p>



<p>छपरा     : 335</p>



<p>आरा      : 326</p>



<p>पूर्णिया    : 320</p>



<p>मुंगेर       : 301</p>



<p>pncdesk</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पटना समेत तीन शहरों में एक अक्टूबर से नहीं चलेंगी डीजल बसें</title>
		<link>https://www.patnanow.com/diesel-buses-will-not-run-in-patna-from-october-1/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 Sep 2023 03:03:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[deasel bus]]></category>
		<category><![CDATA[pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[सरकार ने जारी किया आदेश समय-सीमा बढ़ाए जाने से जुड़ा कोई नया आदेश नहीं पटना. आज आधी रात के बाद से पटना शहरी क्षेत्र में डीजल से चलने वाली सिटी बसों पर रोक लगनी है. परिवहन विभाग की अधिसूचना के अनुसार, 30 सितंबर की आधी रात के बाद पटना नगर निगम के साथ दानापुर, खगौल और फुलवारीशरीफ में डीजल चालित सिटी बसें नहीं चलाई जाएंगी. विभागीय निर्देश को देखते हुए जिला परिवहन कार्यालय ने भी डीजल बसों के परिचालन पर रोक की तैयारी शुरू कर दी है. पटना के डीटीओ श्रीप्रकाश ने बताया कि विभाग की ओर से समय-सीमा बढ़ाए जाने से जुड़ा कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है. पटना के अलावा गया और मुजफ्फरपुर में भी डीजल बसों के परिचालन पर रोक लग जाएगी. एक अक्टूबर से नए नियमों का अनुपालन कराया जाएगा. पटना और आसपास के शहरी इलाकों में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए परिवहन विभाग ने मार्च में ही इसकी अधिसूचना जारी की थी. इसमें कहा गया है कि डीजल से चलने वाली सिटी बसों से तुलनात्मक रूप से अधिक प्रदूषित गैस का उत्सर्जन होता है, जो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. इस कारण सार्वजनिक सुरक्षा एवं सुविधा के दृष्टिकोण से ऐसे वाहनों का परिचालन चरणबद्ध ढंग से प्रतिबंधित किया जाएगा. डीजल चालित बसों पर रोक का आदेश 30 सितंबर की मध्य रात्रि से लागू हो जाएगा. अगले दो दिन अवकाश है, ऐसे में विभाग के स्तर से समय-सीमा बढ़ाए जाने की संभावना कम है. विभाग ने डीजल सिटी बसों की जगह सीएनजी बसों को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>सरकार ने जारी किया आदेश</strong></p>



<p><strong>समय-सीमा बढ़ाए जाने से जुड़ा कोई नया आदेश नहीं</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="487" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/bus-650x487.png" alt="" class="wp-image-78694" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/bus-650x487.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/bus-350x262.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/bus.png 754w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पटना. आज आधी रात के बाद से पटना शहरी क्षेत्र में डीजल से चलने वाली सिटी बसों पर रोक लगनी है. परिवहन विभाग की अधिसूचना के अनुसार, 30 सितंबर की आधी रात के बाद पटना नगर निगम के साथ दानापुर, खगौल और फुलवारीशरीफ में डीजल चालित सिटी बसें नहीं चलाई जाएंगी. विभागीय निर्देश को देखते हुए जिला परिवहन कार्यालय ने भी डीजल बसों के परिचालन पर रोक की तैयारी शुरू कर दी है. पटना के डीटीओ श्रीप्रकाश ने बताया कि विभाग की ओर से समय-सीमा बढ़ाए जाने से जुड़ा कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है. पटना के अलावा गया और मुजफ्फरपुर में भी डीजल बसों के परिचालन पर रोक लग जाएगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="484" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/deasel-bus-650x484.png" alt="" class="wp-image-78695" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/deasel-bus-650x484.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/deasel-bus-350x261.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/deasel-bus.png 752w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>एक अक्टूबर से नए नियमों का अनुपालन कराया जाएगा. पटना और आसपास के शहरी इलाकों में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए परिवहन विभाग ने मार्च में ही इसकी अधिसूचना जारी की थी. इसमें कहा गया है कि डीजल से चलने वाली सिटी बसों से तुलनात्मक रूप से अधिक प्रदूषित गैस का उत्सर्जन होता है, जो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. इस कारण सार्वजनिक सुरक्षा एवं सुविधा के दृष्टिकोण से ऐसे वाहनों का परिचालन चरणबद्ध ढंग से प्रतिबंधित किया जाएगा. डीजल चालित बसों पर रोक का आदेश 30 सितंबर की मध्य रात्रि से लागू हो जाएगा.</p>



<p>अगले दो दिन अवकाश है, ऐसे में विभाग के स्तर से समय-सीमा बढ़ाए जाने की संभावना कम है. विभाग ने डीजल सिटी बसों की जगह सीएनजी बसों को बढ़ावा देने की योजना बनाई है. सिटी बस प्रोत्साहन योजना के तहत सिर्फ पटना जिले में 121 लाभुकों का चयन कर सीएनजी बसों के लिए 30 प्रतिशत एवं अधिकतम साढ़े सात लाख रुपये तक अनुदान भी दिया जाना था. इसके लिए आवेदन भी मांगे गए थे.</p>



<p>मगर लक्ष्य के अनुरूप नई सीएनजी बसों का परिचालन शुरू नहीं हो सका. प्रदूषण को देखते हुए परिवहन विभाग ने पहले ही पटना शहरी क्षेत्र में डीजल चालित आटो पर रोक लगा रखी है. पटना, फुलवारीशरीफ, दानापुर और खगौल में डीजल से चलने वाले आटो पर पूर्णत: प्रतिबंध है. इसकी जगह सीएनजी और बैट्री चालित आटो को बढ़ावा दिया जा रहा है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>निजी विद्यालय वाहनों में प्रदूषण नियंत्रण मानकों का अनुपालन करें: डीएम</title>
		<link>https://www.patnanow.com/follow-pollution-control-standards-in-private-school-vehicles-district-magistrate/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Nov 2022 05:12:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
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					<description><![CDATA[15 वर्ष से अधिक पुराने व्यावसायिक वाहनों का प्रयोग प्रतिबंधित निर्देश ण मानने वालों पर विभाग करेगा कड़ी कारवाई विद्यार्थियों को भी प्रदूषण से बचाव के लिए विभिन्न उपायों के बारे में बताएं पटना के जिलाधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह द्वारा प्रदूषण-नियंत्रण के मद्देनजर पटना शहर के निजी विद्यालयों के प्राचार्यों/प्रबंधकों के साथ ज़ूम के माध्यम से बैठक की गई. इसमें शहरी क्षेत्र के 50 से अधिक निजी विद्यालयों के प्राचार्य-प्रबंधक उपस्थित थे. जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला परिवहन पदाधिकारी भी उपस्थित थे. डीएम डॉ सिंह द्वारा निजी विद्यालयों द्वारा चलाए जाने वाले वाहनों में प्रदूषण नियंत्रण संबंधित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने कहा कि मानदंडों के अनुसार समय-समय पर वाहनों से गैसों के उत्सर्जन की जांच करा कर प्रदूषण अंडरकंट्रोल सर्टिफिकेट विधिवत ढंग से संधारित करें. 15 वर्ष से अधिक पुराने व्यावसायिक वाहनों का प्रयोग प्रतिबंधित है. इसका अनुपालन सुनिश्चित करें. डीएम डॉ सिंह द्वारा प्राचार्यों से अपील की गई कि विद्यार्थियों को भी प्रदूषण से बचाव के लिए विभिन्न उपायों के बारे में बताएं जिससे कि उनके स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव ना पड़े. PNCDESK]]></description>
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<p><strong>15 वर्ष से अधिक पुराने व्यावसायिक वाहनों का प्रयोग प्रतिबंधित</strong></p>



<p><strong>निर्देश ण मानने वालों पर विभाग करेगा कड़ी कारवाई</strong></p>



<p><strong>विद्यार्थियों को भी प्रदूषण से बचाव के लिए विभिन्न उपायों के बारे में बताएं</strong></p>



<p>पटना के जिलाधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह द्वारा प्रदूषण-नियंत्रण के मद्देनजर पटना शहर के निजी विद्यालयों के प्राचार्यों/प्रबंधकों के साथ ज़ूम के माध्यम से बैठक की गई. इसमें शहरी क्षेत्र के 50 से अधिक निजी विद्यालयों के प्राचार्य-प्रबंधक उपस्थित थे. जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला परिवहन पदाधिकारी भी उपस्थित थे. डीएम डॉ सिंह द्वारा निजी विद्यालयों द्वारा चलाए जाने वाले वाहनों में प्रदूषण नियंत्रण संबंधित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="500" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/7d45b2c0-f3a7-47db-a2b5-499e5ad94c5c.jpg" alt="" class="wp-image-69199" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/7d45b2c0-f3a7-47db-a2b5-499e5ad94c5c.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/7d45b2c0-f3a7-47db-a2b5-499e5ad94c5c-350x269.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि मानदंडों के अनुसार समय-समय पर वाहनों से गैसों के उत्सर्जन की जांच करा कर प्रदूषण अंडरकंट्रोल सर्टिफिकेट विधिवत ढंग से संधारित करें. 15 वर्ष से अधिक पुराने व्यावसायिक वाहनों का प्रयोग प्रतिबंधित है. इसका अनुपालन सुनिश्चित करें. डीएम डॉ सिंह द्वारा प्राचार्यों से अपील की गई कि विद्यार्थियों को भी प्रदूषण से बचाव के लिए विभिन्न उपायों के बारे में बताएं जिससे कि उनके स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव ना पड़े.</p>



<p>PNCDESK</p>
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