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	<title>POLLUTION CONTROL BOARD &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<description>Patna News Portal - हर ख़बर पर नज़र</description>
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	<title>POLLUTION CONTROL BOARD &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>होलिका दहन पर रखें ध्यान, प्लास्टिक, टायर या रबर आदि जलाना पड़ सकता है भारी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/holika-dahan-restrictions/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 15:35:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी की चेतावनी पटना।। होली पर्व के पूर्व होलिका दहन की परंपरा है. इसे लेकर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी किया है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा है कि होलिका दहन सामग्री में अति-प्रदूषणकारी पदार्थों यथा- पुराने टायर, रबर, प्लास्टिक, जला हुआ मोबिल थर्मोकोल तथा अन्य कचरे आदि जलाने पर हानिकारक प्रदूषकों का उत्सर्जन हो सकता है. ऐसे वायु प्रदूषण के प्रति जन-सामान्य में चेतना अभिवर्धित करने के उद्देश्य से दिनांक 27 फरवरी, 2026 से 01 मार्च 2026 तक राज्य के निम्नांकित जिलों में नुक्कड़-नाटक के प्रदर्शन द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा हैः- पटना, 2. गया, 3. मुजफ्फरपुर, 4. हाजीपुर, 5. भागलपुर, 6. बेगूसराय, 7. सिवान, 8.पूर्णियाँ, 9. बिहारशरीफ, 10. बक्सर एवं 11. मुंगेर इन शहरों में प्रतिदिन 4 भिन्न स्थलों पर नुक्कड़-नाटक का प्रदर्शन कराया जा रहा है जो कुल तीन दिनों तक चलाया जायेगा. इस प्रकार राज्य के 11 जिलों में तीन दिनों में कुल 156 भिन्न स्थलों पर नुक्कड़-नाटक का प्रदर्शन कराया जायेगा.आज राज्य के 11 जिलों में कुल 52 भिन्न स्थलों पर नुक्कड़-नाटक कराया गया. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी की चेतावनी </strong></p>



<p>पटना।। होली पर्व के पूर्व होलिका दहन की परंपरा है. इसे लेकर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी किया है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा है कि होलिका दहन सामग्री में अति-प्रदूषणकारी पदार्थों यथा- पुराने टायर, रबर, प्लास्टिक, जला हुआ मोबिल थर्मोकोल तथा अन्य कचरे आदि जलाने पर हानिकारक प्रदूषकों का उत्सर्जन हो सकता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="325" src="https://www.patnanow.com/assets/2018/03/Holika_Dahan_2015_Holi-810x405-650x325.jpg" alt="" class="wp-image-31031" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2018/03/Holika_Dahan_2015_Holi-810x405.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2018/03/Holika_Dahan_2015_Holi-810x405-350x175.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ऐसे वायु प्रदूषण के प्रति जन-सामान्य में चेतना अभिवर्धित करने के उद्देश्य से दिनांक 27 फरवरी, 2026 से 01 मार्च 2026 तक राज्य के निम्नांकित जिलों में नुक्कड़-नाटक के प्रदर्शन द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा हैः-</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="828" height="572" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-holika-nukkad-natak.jpg" alt="" class="wp-image-95318" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-holika-nukkad-natak.jpg 828w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-holika-nukkad-natak-650x449.jpg 650w" sizes="(max-width: 828px) 100vw, 828px" /></figure>



<p>पटना, 2. गया, 3. मुजफ्फरपुर, 4. हाजीपुर, 5. भागलपुर, 6. बेगूसराय, 7. सिवान, 8.पूर्णियाँ, 9. बिहारशरीफ, 10. बक्सर एवं 11. मुंगेर</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="666" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-nukkad-natak-in-school-on-holika-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95319" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-nukkad-natak-in-school-on-holika-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-nukkad-natak-in-school-on-holika-650x423.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इन शहरों में प्रतिदिन 4 भिन्न स्थलों पर नुक्कड़-नाटक का प्रदर्शन कराया जा रहा है जो कुल तीन दिनों तक चलाया जायेगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-school-awareness-by-bspcb-on-holika-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95320" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-school-awareness-by-bspcb-on-holika-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-school-awareness-by-bspcb-on-holika-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-school-awareness-by-bspcb-on-holika-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस प्रकार राज्य के 11 जिलों में तीन दिनों में कुल 156 भिन्न स्थलों पर नुक्कड़-नाटक का प्रदर्शन कराया जायेगा.<br>आज राज्य के 11 जिलों में कुल 52 भिन्न स्थलों पर नुक्कड़-नाटक कराया गया. </p>



<ol class="wp-block-list"></ol>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>&#8216;सही दिशा में है ओजोन परत की रिकवरी&#8217;, वैश्विक प्रयासों का हो रहा असर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/ozone-day-special/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:31:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[bspcb]]></category>
		<category><![CDATA[Ozone day]]></category>
		<category><![CDATA[Ozone layer]]></category>
		<category><![CDATA[POLLUTION CONTROL BOARD]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। मंगलवार 16 सितंबर को &#8220;आजोन स्तर के परिरक्षण का अन्तर्राष्ट्रीय दिवस&#8221; (International Day for the Preservation of OZONE LAYER) है. पृथ्वी के समतापमंडल (Stratosphere) में स्थित &#8216;आजोन परत&#8217; जो सूर्य से पृथ्वी पर आने वाली घातक पराबैगनी किरणों को रोकती है, के परिरक्षण हेतु विश्व भर में जागरूकता अभियान चलाया जाता है. इस वर्ष ओजोन दिवस के अवसर पर दिया गया थीम है:- &#8220;From Science to Global Action&#8221;. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा इस अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी में डॉ. डी. के. शुक्ला, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षदः सदस्य सचिव नीरज नारायण, भा.व.से. एवं पर्षद के सभी वैज्ञानिक एवं अभियंतागण सहित अन्य लोगों ने भाग लिया. इस संगोष्ठी के माध्यम से ओजोन परत एवं इसके संरक्षण हेतु व्यक्तिगत स्तर पर किये जाने वाले व्यवहारिक बातों से अवगत कराया गया. दिसम्बर, 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में लिए गये निर्णय के आलोक में प्रतिवर्ष 16 सितम्बर को &#8220;International Day for Preservation of Ozone Layer&#8221; के रूप में मनाते हैं. इस दिवस को &#8220;विश्व ओजोन दिवस&#8221; भी कहते हैं. पर्षद के वैज्ञानिक सलाहकार, एस.एन. जायसवाल द्वारा &#8220;विश्व ओजोन दिवस&#8221; पर एक व्याख्यान दिया गया. उन्होंने ओजोन दिवस, 2025 के थीम &#8220;From Science to Global Action&#8221; की पृष्ठभूमि में वैज्ञानिकी शोध, ओजोन परत एवं इसके विघटन करने वाले पदार्थों एवं इसके चरणबद्ध तरीकों से हटाने से संबंधित वैश्विक एवं राष्ट्रीय स्तर पर किये गये प्रयासों के संबंध में जानकारी दी गयी. उन्होंने बताया कि मांट्रियल प्रोटोकाल जो एक अन्तर्राष्ट्रीय संधि है, के आलोक में केन्द्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। मंगलवार 16 सितंबर को &#8220;आजोन स्तर के परिरक्षण का अन्तर्राष्ट्रीय दिवस&#8221; (International Day for the Preservation of OZONE LAYER) है. पृथ्वी के समतापमंडल (Stratosphere) में स्थित &#8216;आजोन परत&#8217; जो सूर्य से पृथ्वी पर आने वाली घातक पराबैगनी किरणों को रोकती है, के परिरक्षण हेतु विश्व भर में जागरूकता अभियान चलाया जाता है. इस वर्ष ओजोन दिवस के अवसर पर दिया गया थीम है:- &#8220;From Science to Global Action&#8221;.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="300" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna.jpg" alt="" class="wp-image-45016" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna-350x162.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा इस अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी में डॉ. डी. के. शुक्ला, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षदः सदस्य सचिव नीरज नारायण, भा.व.से. एवं पर्षद के सभी वैज्ञानिक एवं अभियंतागण सहित अन्य लोगों ने भाग लिया. इस संगोष्ठी के माध्यम से ओजोन परत एवं इसके संरक्षण हेतु व्यक्तिगत स्तर पर किये जाने वाले व्यवहारिक बातों से अवगत कराया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="633" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/09/1000396055-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-92023" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/09/1000396055-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/09/1000396055-650x402.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>दिसम्बर, 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में लिए गये निर्णय के आलोक में प्रतिवर्ष 16 सितम्बर को &#8220;International Day for Preservation of Ozone Layer&#8221; के रूप में मनाते हैं. इस दिवस को &#8220;विश्व ओजोन दिवस&#8221; भी कहते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="682" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/09/pnc-amba-dandiya-ad-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-91987" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/09/pnc-amba-dandiya-ad-scaled.jpg 682w, https://www.patnanow.com/assets/2025/09/pnc-amba-dandiya-ad-433x650.jpg 433w" sizes="auto, (max-width: 682px) 100vw, 682px" /></figure>



<p>पर्षद के वैज्ञानिक सलाहकार, एस.एन. जायसवाल द्वारा &#8220;विश्व ओजोन दिवस&#8221; पर एक व्याख्यान दिया गया. उन्होंने ओजोन दिवस, 2025 के थीम &#8220;From Science to Global Action&#8221; की पृष्ठभूमि में वैज्ञानिकी शोध, ओजोन परत एवं इसके विघटन करने वाले पदार्थों एवं इसके चरणबद्ध तरीकों से हटाने से संबंधित वैश्विक एवं राष्ट्रीय स्तर पर किये गये प्रयासों के संबंध में जानकारी दी गयी. उन्होंने बताया कि मांट्रियल प्रोटोकाल जो एक अन्तर्राष्ट्रीय संधि है, के आलोक में केन्द्र सरकार द्वारा &#8220;The Ozone Depleting Substances (Regulation and Control) Rules, 2000&#8221; अधिसूचित किया गया है. इस नियमावली के द्वारा आजोन क्षयकारी पदार्थों (ODS) का उत्पादन, निर्यात, बिक्रय, आयात आदि को विनियमित किया गया है. मांट्रियल प्रोटोकाल के विभिन्न संशोधन के आलोक में इस अधिसूचना में भी प्रसांगिक संशोधन किये गये हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="337" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/pollu.jpeg" alt="" class="wp-image-68304" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/pollu.jpeg 600w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/pollu-350x197.jpeg 350w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<p>राज्य पर्षद् के वैज्ञानिक सलाहकार एस.एन. जायसवाल ने अपने सम्बोधन में बताया कि पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है, जहाँ जीवन यापन हेतु पर्याप्त वायु, जल एवं भोज्य सामग्रियाँ उपलब्ध है. मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के अविवेकपूर्ण उपयोग के कारण विभिन्न पर्यावरणीय चुनौतियाँ हमारे सामने आ रही है.</p>



<p>उन्होंने वायुमंडल के विभिन्न स्तरों ट्रोपोस्फियर, स्ट्रेटोस्फियर, मेसोस्फियर, थर्मोस्फियर, एक्सोस्फियर आदि की चर्चा करते हुए बताया कि मानवीय गतिविधियों के कारण ट्रोपोस्फियर में भी पराबैगनी किरणों के विकिरण से क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) के विघटन से ओजोन के लाखों अणुओं का क्षय हो जाता है. अतः इसके कारणों को रोकने का प्रयास करना होगा.</p>



<p><strong>सही दिशा में है ओजोन परत की रिकवरी </strong></p>



<p>उन्होंने यह भी बताया कि मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर वैज्ञानिक सामुदायिक पैनल के नवीनतम अपडेट ने पुष्टि की है कि ओजोन परत की रिकवरी सही दिशा में है और अंटार्कटिका में ओजोन का स्तर लगभग 2066 तक 1980 के स्तर पर, आर्कटिक में लगभग 2045 तक और वैश्विक औसत के अनुसार लगभग 2040 तक वापस आने की उम्मीद है.</p>



<p>परिचर्चा में पर्षद के वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार, अरूण कुमार, नलिनी मोहन सिंह एवं डॉ रचना सिंह ने भी भाग लिया.</p>



<p><strong>pncb</strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>एक अपील: हर रविवार अपने वाहन के हॉर्न से बनाएं दूरी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/say-no-to-horn/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Jul 2025 17:16:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[POLLUTION CONTROL BOARD]]></category>
		<category><![CDATA[Sound pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना शहर की बढ़ती आबादी के अनुरूप सड़कों पर सभी प्रकार के पेट्रॉल /डीजल चालित वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण कार्यो में प्रयुक्त निर्माण संयंत्रों, विभिन्न वाणिज्यक एवं औद्योगिक गतिविधियाँ, अन्य यांत्रिक उपकरणों के परिचालन, विभिन्न अवसरों पर लाउडस्पीकर, लोक संबोधन प्रणाली, डी.जे. इत्यादि के अनियंत्रित उपयोग से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण आज चिंता का विषय है. उपर्युक्त गतिविधियों के कारण चिड़चिड़ापन, बहरापन, उच्च रक्त-चाप, हृदय एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ संभावित हैं.इसी परिपेक्ष्य में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् जन-सामान्य से यह अपील करती है कि कम से कम रविवार के दिन वाहन चालक अपने वाहन के हॉर्न का उपयोग नहीं करें (आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर). बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मीडिया कंसल्टेंट वीरेंद्र कुमार ने कहा कि सबों के सहयोग से ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण लाया जा सकता है. तो आइये अगले रविवार से ही अपना सहयोग करें. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना शहर की बढ़ती आबादी के अनुरूप सड़कों पर सभी प्रकार के पेट्रॉल /डीजल चालित वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण कार्यो में प्रयुक्त निर्माण संयंत्रों, विभिन्न वाणिज्यक एवं औद्योगिक गतिविधियाँ, अन्य यांत्रिक उपकरणों के परिचालन, विभिन्न अवसरों पर लाउडस्पीकर, लोक संबोधन प्रणाली, डी.जे. इत्यादि के अनियंत्रित उपयोग से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण आज चिंता का विषय है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/pnc-no-horn-please-650x366.png" alt="" class="wp-image-38295" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/pnc-no-horn-please.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2019/02/pnc-no-horn-please-350x197.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उपर्युक्त गतिविधियों के कारण चिड़चिड़ापन, बहरापन, उच्च रक्त-चाप, हृदय एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ संभावित हैं.<br>इसी परिपेक्ष्य में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् जन-सामान्य से यह अपील करती है कि कम से कम रविवार के दिन वाहन चालक अपने वाहन के हॉर्न का उपयोग नहीं करें (आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर).</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="300" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna.jpg" alt="" class="wp-image-45016" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna-350x162.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मीडिया कंसल्टेंट वीरेंद्र कुमार ने कहा कि सबों के सहयोग से ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण लाया जा सकता है. तो आइये अगले रविवार से ही अपना सहयोग करें.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>



<pre class="wp-block-code"><code>                                                            </code></pre>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8220;हरित बिहार बनाना है- नया बिहार बनाना है&#8221;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/pcb-environment-day/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Jun 2025 15:44:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Environment day]]></category>
		<category><![CDATA[Harjot Kaur]]></category>
		<category><![CDATA[POLLUTION CONTROL BOARD]]></category>
		<category><![CDATA[sunil kumar]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-सामान्य विशेषकर भावी पीढ़ी में इसकी चेतना अभिवर्धित करने के उद्देश्य से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा आज पटना में आयोजित मुख्य कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार डॉ सुनील कुमार द्वारा किया गया. इस अवसर पर मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार डॉ. सुनील कुमार ने अपने संबोधन कहा कि प्लास्टिक के खतरों से अपने जीवन को बचायें, क्योंकि प्लास्टिक उत्पादों का विघटन नहीं होता है. जलाये जाने पर विषाक्त गैसें उत्सर्जित हाती हैं. जब कृषि भूमि, नदी नालों में फेंका जाता है तो जमीन की उर्वरा शक्ति का क्षय होता है. नाले अवरूद्ध होते है, पशुधन द्वारा निगले जाने पर उनका जीवन खतरे में पड़ जाता है. राज्य सरकार द्वारा कार्रवाई करते हुए क्रमशः अधिसूचना दिनांक 24 अक्टूबर, 2018 से राज्य के शहरी तथा दिनांक 11 दिसम्बर, 2018 से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में चिन्हित प्लास्टिक कैरी बैग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया फिर 01 जुलाई, 2022 के प्रभाव से एकल उपयोग वाले उन्नीस चिन्हित उत्पादों को भी प्रतिबंधित किया गया है. ऐसे उत्पादों पर लगे प्रतिबंध के बारे में जन-चेतना फैलाने की जरूरत हैं. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में हरित आवरण बढ़ाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है. वर्तमान में राज्य में 12.55 प्रतिशत वन क्षेत्र है. कृषि रोड मैप के तहत वानिकी किसान योजना&#8217; की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि किसान अपने रैयती भूमि पर पेड़ लगा कर आर्थिक लाभ भी ले सकते है. वृक्ष, इसके [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-सामान्य विशेषकर भावी पीढ़ी में इसकी चेतना अभिवर्धित करने के उद्देश्य से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा आज पटना में आयोजित मुख्य कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार डॉ सुनील कुमार द्वारा किया गया.</p>



<p>इस अवसर पर मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार डॉ. सुनील कुमार ने अपने संबोधन कहा कि प्लास्टिक के खतरों से अपने जीवन को बचायें, क्योंकि प्लास्टिक उत्पादों का विघटन नहीं होता है. जलाये जाने पर विषाक्त गैसें उत्सर्जित हाती हैं. जब कृषि भूमि, नदी नालों में फेंका जाता है तो जमीन की उर्वरा शक्ति का क्षय होता है. नाले अवरूद्ध होते है, पशुधन द्वारा निगले जाने पर उनका जीवन खतरे में पड़ जाता है.</p>



<p>राज्य सरकार द्वारा कार्रवाई करते हुए क्रमशः अधिसूचना दिनांक 24 अक्टूबर, 2018 से राज्य के शहरी तथा दिनांक 11 दिसम्बर, 2018 से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में चिन्हित प्लास्टिक कैरी बैग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया  फिर 01 जुलाई, 2022 के प्रभाव से एकल उपयोग वाले उन्नीस चिन्हित उत्पादों को भी प्रतिबंधित किया गया है. ऐसे उत्पादों पर लगे प्रतिबंध के बारे में जन-चेतना फैलाने की जरूरत हैं.</p>



<p>उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में हरित आवरण बढ़ाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है. वर्तमान में राज्य में 12.55 प्रतिशत वन क्षेत्र है. कृषि रोड मैप के तहत वानिकी किसान योजना&#8217; की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि किसान अपने रैयती भूमि पर पेड़ लगा कर आर्थिक लाभ भी ले सकते है. वृक्ष, इसके फल आदि भी उन्हीं की सम्पति होगी. जल जीवन हरियाली योजना द्वारा भूगर्भीय जल का स्तर सुधरा है. उन्होंने बताया कि प्रधान मंत्री के आ‌ह्वान पर &#8216;एक पेड़ माँ के नाम&#8217; के तहत बिहार राज्य में 4 करोड़ 24 लाख पेड़ लगाये गये हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="540" height="408" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/06/pnc-bspcb-environment-day.jpg" alt="" class="wp-image-90528"/></figure>



<p>इस अवसर पर उन्होंने एक नारा दिया हरित बिहार बनाना है- नया बिहार बनाना है.</p>



<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपर मुख्य सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार डॉ. हरजोत कौर बम्हरा गा.प्र.श्रे., अपने संबोधन में बताया कि पर्यावरण एक वैश्विक विषय है. इसमें ये मेरा पर्यावरण ये तेरा पर्यावरण है, नहीं चल सकता. यह सबका सझाा है. पर्यावरण के मामले में एक की अच्छाई बुराई का प्रभाव सबों पर पड़ता है. पर्यावरण पर मंडरा रहे खतरों से निपटने में सभी सरकारें मिल-जुल कर अपना योगदान दे रहे हैं.</p>



<p>उन्होंने ने बताया कि प्लास्टिक अपने विशेष गुणों के कारण हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा सा बन गया है. पर इनके प्रयोग के बाद ऐसे कचरों का निपटान एक वैश्विक चुनौती बनती जा रही है </p>



<p>उन्होंने ने बताया कि बिहार राज्य में प्लास्टिक कैरी बैग पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है. साथ ही एकल उपयोग वाले चिन्हित प्लास्टिक उत्पादों को भी प्रतिबंधित किया जा चुका है. जब तक हम आप सभी इसका उपयोग बन्द नहीं करेगें ये प्रतिबंध प्रभावी नहीं हो पायेगा.</p>



<p>उन्होंने कुछ वर्षों पूर्व के काल का स्मरण करते हुए बताया कि उपयोग की वस्तु का कई रूपों में उपयोग किया जाता था, पुराने कपड़ा को सुजनी कला से कलात्मक रूप देकर इनके पुनर्प्रयोग किया जाता है. पहले हम रूमाल का प्रयोग किया था, पर अब इसके स्थान टिशू पेपर ने ले लिया है, जिसका उत्पादन पेड़ों को काटकर ही किया जाता है </p>



<p>उन्होंने जन-सामान्य से अपील किया किः</p>



<p>रोजमर्रा के इस्तेमाल में प्रतिबंधित एकल उपयोग प्लास्टिक उत्पादों का इस्तेमाल कम करे, घर से निकले कचरों को वर्गीकृत करके निष्पादन करें.</p>



<p>उन्होंने कोविड काल में पर्यावरण स्थिति की चर्चा करते हुए कहा कि जब दैनिक जीवन की सारी गतिविधियाँ ठप पड़ गई थी, तो प्रदूषण भी कम था, सूदूर पहाड़ जो आम दिनों में नहीं दिखते थे, वे भी दिखने लगे थे। नीला आसमान भी सही में नीला दिखने लगा था। उन्होंने कहा आईये प्रण लें कि एक नई दुनिया बनायेंगे एक नया बिहार बनायेंगे.</p>



<p>कार्यक्रम में आगत अतिथियों को स्वागत करते हुए अध्यक्ष बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद डॉ. डी. के. शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि मानवीय कारणों से प्रदूषण में वृद्धि हुई है. उनके द्वारा जलवायु परिवर्तन, सतही एवं भूगर्भीय जल का क्षरण, वायु प्रदूषण एवं जल प्रदूषण के सुधार के लिए किये जा रहे प्रयासो से सूक्ष्म धूलकणों एवं नदियों में फिकल कॉलीफॉम में दर्ज की जा रही कमी के बारे में जानकारी दी गयी.विश्व पर्यावरण दिवस के थीम के विषय पर बताया गया कि प्लास्टिक एक पॉलीमर है जो अपने अवयवों में टूट कर माइक्रोपॉलीमर में विघटित होते है. ये जब पर्यावरण में आते हैं तो पर्यावरण एवं जीवों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं= इसके निर्माण में विरंजकों (Colourant) में कलर के लिए थैलेट एवं अन्य हानिकारक पदार्थों का उपयोग किया जाता है जो कैंसर जैसी बीमारियां उत्पन्न कर सकती है. अमेरिका, चीन इत्यादि देशों में प्लास्टिक का उपयोग भारत से ज्यादा है. आज जरूरत है कि हम इसके सही निपटान में सहयोग करें एवं प्लास्टिक प्रदूषण की रोकथाम में हाथ बटायें. इस अवसर पर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण की स्थापना के 50 गौरवशाली वर्ष के उपलक्ष्य में विशेष आवरण (Special Cover) का लोकार्पण माननीय मंत्री पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार डॉ०. सुनील कुमार द्वारा किया गया. राज्य पर्षद की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में पर्षद के विगत 50 वर्षों की यात्रा पर प्रकाशित हिन्दी भाषा की &#8216;स्मारिका&#8217; तथा आंग्ल भाषा में वैज्ञानिक आलेखों के संकलन का भी अनावरण मुख्य अतिथि द्वारा किया गया.</p>



<p>राज्य में स्थापित उद्योगों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए की गयी व्यवस्था एवं प्रयासों के लिए मुंगेर जिला के बासुदेवपुर में स्थापित सर्वश्री आई.टी.सी. लिमिटेड को सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र, इकाई के महाप्रबंधक श्री वैभव गुप्ता द्वारा प्राप्त किया गया.</p>



<p>राज्य में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले निम्नांकित 3 व्यक्तियों / संस्था को उनके द्वारा किये गये कार्यों के सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गयाः-</p>



<p>श्री संतोष कुमार सुमन,एल.आई.सी. ऑफिस, कृष्णपट्टी, जिला- जमुई 811307</p>



<p>सर्वश्री मिथिंगा वेस्ट मैनेजमेंट प्रा.लि. द्वारा सुश्री मोनालिसा एवं अतुल गुंजन,देवनंदन इन्कलेव, ज्योतिपुरम कॉलोनी, रूकुनपुरा, पटना 800014</p>



<ol class="wp-block-list">
<li></li>
</ol>



<p>मनोज कुमार, पर्यावरणविद्, वार्ड न०- 26, न्यू डाक बंग्ला रोड, बेतिया, पश्चिम चम्पारण- 845438</p>



<ol start="3" class="wp-block-list">
<li></li>
</ol>



<p>दिनांक 17 मई 2025 को पटना के ज्ञान भवन में आयोजित क्विज प्रतियोगिता, निबंध लेखन प्रतियोगिता एवं स्थल चित्रकारी प्रतियोगिता में पुरस्कार हेतु चयनित प्रतिभागियों का पुरस्कार स्वरूप कप व प्रमाण पत्र मुख्य अतिथि मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग डॉ. सुनील कुमार एवं अपर मुख्य सचिव, हरजोत कौर बम्हरा और अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया.</p>



<p>जो प्रतिभागी इस अवसर पर उपस्थित नहीं हो पाये, वे अपना पुरस्कार राज्य पर्षद मुख्यालय से किसी भी कार्यदिवस को कार्यावधि को प्राप्त कर सकते है.</p>



<p>कार्यक्रम के समापन पर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव नीरज नारायण, भा.व.से, द्वारा सभी सम्मानित अतिथियों, विभागीय पदाधिकारियों, छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकगण एवं प्रेस मीडिया के प्रतिनिधियों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया.</p>



<p>इस कार्यक्रम में एन.टी.पी.सी. कहलगांव, बिहार रेल बिजली निगम, नबीनगर, हरिनगर सुगर मिल, पश्चिम चम्पारणः मगध सुगर मिल एवं एनर्जी लिमिटेड, डिस्टीलरी डिवीजन, गोपालगंज: श्री सीमेंट प्लांट, औरंगाबादः मुजफ्फरपुर डेयरी, मुजफ्फरपुर: एन.टी.पी.सी. बाढ़, आई.टी.सी. लिमिटेड, मुंगेर, हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड, बरौनी; कोका कोला, पाटलिपुत्रा, पटना; आई.ओ.सी.एल. रिफाइनरी, बरौनी; एन.टी.पी.सी. नबीनगरः बरूण वेबरेज (पेप्सी) द्वारा अपने प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था के मॉडलों की प्रदर्शनी लगायी गई.</p>



<p>इस अवसर पर राज्य में एकल उपयोग प्लास्टिक के वैकल्पिक उत्पाद बनाने वाली तीन औद्योगिक इकाईयों सर्वश्री अर्णपूर्णा डिस्पोजेबल, पूर्णियाँ: एम.एस.बी. पॉलीमर, पटना तथा एम. एन.ओ. स्वदेशी, मुजफ्फरपुर द्वारा अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया गया।</p>



<p>एम.एन.ओ. स्वदेशी द्वारा एकल उपयोग प्लास्टिक के वैकल्पिक उत्पाद के रूप में मक्के के छिलके का उपयोग किया गया, जो एक आकर्षक का केन्द्र रहा।</p>



<p>डाक महाध्यक्ष, पटना परिमंडल, पटना श्री एम.यू. अब्दाली की उपस्थिति में राज्य पर्षद् के विशेष आवरण का लोकापर्ण किया गया। इस असवर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) श्री पी. के. गुप्ता भावसे. प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास); श्री अरविन्दर सिंह, मा.व.से. श्री भारत ज्योति, भा.व.से., अध्यक्ष बिहार राज्य जैव-विविधता पर्षद भी उपस्थित रहे.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के बारे में जानेंगे बच्चे, लोगों को करेंगे जागरूक</title>
		<link>https://www.patnanow.com/quiz-and-painting-competition/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 May 2025 13:37:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[bspcb]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Painting competition]]></category>
		<category><![CDATA[POLLUTION CONTROL BOARD]]></category>
		<category><![CDATA[Quiz competition]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा राज्य के विद्यालयों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं में पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के प्रति जागरूकता अभिवर्धित करने के उद्देश्य से 17 मई, 2025 को ज्ञान भवन, पटना में प्रातः 09ः30 बजे से संध्या 06 बजे तक कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं. (क) स्थल चित्रकारी प्रतियोगिता-प्रातः 09ः30 बजे से 10ः30 बजे तक वर्ग 01 से 10 तक के छात्र-छात्राओं के लिए. इस प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु राज्य से 1350 से अधिक छात्र-छात्राओं द्वारा निबंधन कराया गया है.पाँच वर्गों में विभक्त इस प्रतियोगिता में वर्ग 01,02,03,04 एवं 05 के अन्तर्गत क्रमशः कक्षा 01 एवं 02; कक्षा 03 एवं 04; कक्षा 05 एवं 06; कक्षा 07 एवं 08 तथा कक्षा 09 एवं 10 के प्रतिभागी भाग लेंगे.(ख) निबंध लेखन प्रतियोगिता-पूर्वाहनः 11ः30 बजे से मध्याह्न 12ः00 बजे तक वर्ग 09 से 10 तक तथा वर्ग 11 एवं 12 के छात्र-छात्राओं के लिए.प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मीडिया कंसल्टेंट वीरेंद्र कुमार ने बताया कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए राज्य के 500 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपना निबंधन कराया है. लेख का विषय प्रतियोगिता स्थल पर ही घोषित किया जायेगा. 300 शब्दों के लेख को प्रतिभागी छात्र हिन्दी अथवा अंग्रेजी भाषा में लिख सकते हैं.(ग) क्विज प्रतियोगितायह प्रतियोगिता वर्ग 09 से 12 तक के छात्र-छात्राओं के लिए होगी. यह प्रतियोगिता अपराह्न 02ः00 बजे से संध्या 06 बजे तक चलेगी. इस प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु राज्य में करीब 250 प्रतिभागियों ने निबंधन कराया है. क्विज प्रतियोगिता का संचालन मशहूर क्विज मास्टर वेंक्टेश श्रीनिवासन, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा राज्य के विद्यालयों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं में पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के प्रति जागरूकता अभिवर्धित करने के उद्देश्य से 17 मई, 2025 को ज्ञान भवन, पटना में प्रातः 09ः30 बजे से संध्या 06 बजे तक कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="300" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna.jpg" alt="" class="wp-image-45016" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/04/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna-350x162.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>(क) स्थल चित्रकारी प्रतियोगिता-<br>प्रातः 09ः30 बजे से 10ः30 बजे तक वर्ग 01 से 10 तक के छात्र-छात्राओं के लिए. इस प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु राज्य से 1350 से अधिक छात्र-छात्राओं द्वारा निबंधन कराया गया है.<br>पाँच वर्गों में विभक्त इस प्रतियोगिता में वर्ग 01,02,03,04 एवं 05 के अन्तर्गत क्रमशः कक्षा 01 एवं 02; कक्षा 03 एवं 04; कक्षा 05 एवं 06; कक्षा 07 एवं 08 तथा कक्षा 09 एवं 10 के प्रतिभागी भाग लेंगे.<br>(ख) निबंध लेखन प्रतियोगिता-<br>पूर्वाहनः 11ः30 बजे से मध्याह्न 12ः00 बजे तक वर्ग 09 से 10 तक तथा वर्ग 11 एवं 12 के छात्र-छात्राओं के लिए.<br>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मीडिया कंसल्टेंट वीरेंद्र कुमार ने बताया कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए राज्य के 500 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपना निबंधन कराया है. लेख का विषय प्रतियोगिता स्थल पर ही घोषित किया जायेगा. 300 शब्दों के लेख को प्रतिभागी छात्र हिन्दी अथवा अंग्रेजी भाषा में लिख सकते हैं.<br>(ग) क्विज प्रतियोगिता<br>यह प्रतियोगिता वर्ग 09 से 12 तक के छात्र-छात्राओं के लिए होगी. यह प्रतियोगिता अपराह्न 02ः00 बजे से संध्या 06 बजे तक चलेगी. इस प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु राज्य में करीब 250 प्रतिभागियों ने निबंधन कराया है. क्विज प्रतियोगिता का संचालन मशहूर क्विज मास्टर वेंक्टेश श्रीनिवासन, बेगलुरू द्वारा किया जायेगा.  प्रारंभ में 30 प्रश्नों में सर्वाधिक सही उत्तर देने वाले प्रतिभागी ही अगले चरणों की प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे. क्विज प्रतियोगिता में सर्वोत्तम अंक लाने वाले तीन प्रतिभागियों को क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया जायेगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="300" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/PNC-GYAN-BHAWAN-BAPU-SABHAGAR-PATNA.jpg" alt="" class="wp-image-44006" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/04/PNC-GYAN-BHAWAN-BAPU-SABHAGAR-PATNA.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/04/PNC-GYAN-BHAWAN-BAPU-SABHAGAR-PATNA-350x162.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>स्थल चित्रकारी व निबंध लेखन प्रतियोगिता में प्राप्त चित्रांकन तथा लेख के मूल्यांकन के पश्चात प्रत्येक वर्ग से सर्वोत्तम चित्रकारी / निबंध लिखने वाले तीन-तीन प्रतिभागियों को क्रमशः प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया जायेगा. सभी पुरस्कार विश्व पर्यावरण दिवस 05 जून, 2025 के अवसर पर ज्ञान भवन, पटना में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में प्रदान किये जायेंगे.<br>सफल घोषित प्रतिभागियों का नाम राज्य पर्षद् की वेबसाईट-<a href="https://bspcb.bihar.gov.in/">https://bspcb.bihar.gov.in/</a> पर प्रदर्शित किया जायेगा.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पर्यावरण मंत्री ने की प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के कार्यों की समीक्षा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/prem-kumar-review-meeting/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 Nov 2024 17:03:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[bspcb]]></category>
		<category><![CDATA[POLLUTION CONTROL BOARD]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=87933</guid>

					<description><![CDATA[पटना।। पर्यावरण मंत्री प्रेम कुमार ने शनिवार को अरण्य भवन स्थित कार्यालय कक्ष में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से सम्बन्धित विषयों पर समीक्षात्मक बैठक की. बैठक में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किये गये प्रयास की जानकारी दी गई. पेट्रोलियम आउटलेट (पेट्रोल पम्प सीएनजी एवं बायोडीजल को सहमति से मुक्त किया गया है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा गंगा नदी के 34 स्थली इसकी सहायक नदियों/तालाबों के 70 एवं भू-गर्भीय जल के 70 स्थलों का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है. गंगा एवं इसकी सहायक नदियों के जल में जीवाणुओं की संख्या को छोड़कर सभी पारामीटर यथा डी.ओ, बी.ओ.डी. मानक के अधीन पाया गया है. राज्य सरकार की ओर से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के सहयोग से Climate Resilient and Low Carbon Development Pathway विकसित करने हेतु एक अध्ययन किया जा रहा है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा एक विशेष वायु प्रयोगशाला भवन का निर्माण पाटलिपुत्रा औद्योगिक क्षेत्र, पटना में किया जा रहा है. पर्षद द्वारा सहमति / प्राधिकार आवेदनों का निष्पादन जनवरी 2016 से ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से ही किया जा रहा है। इकाइयों द्वारा सूचनाओं का आदान-प्रदान भी ऑनलाइन प्रणाली के माध्यन से ही किया जा रहा है तथा स्वत नवीकरण (Auto-renewal) की व्यवस्था भी बनायी गयी है. बिहार राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (SAPCC) वर्ष 2004-2030 तैयार कर State Level Steering Committee का अनुमोदन प्राप्त किया गया है. मंत्री ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा प्रदूषण नियंत्रण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। पर्यावरण मंत्री प्रेम कुमार ने शनिवार को अरण्य भवन स्थित कार्यालय कक्ष में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से सम्बन्धित विषयों पर समीक्षात्मक बैठक की. बैठक में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किये गये प्रयास की जानकारी दी गई.</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद एक वैधानिक नियामक संस्था है. इसकी स्थापना जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा-4 के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा 07 नवम्बर, 1974 में की गयी।</li>



<li>राज्य में वायु प्रदूषण के अनुश्रवण हेतु &#8220;अनवरत परिवेशीय वायु गुणवत्ता प्रबोधन केन्द्र&#8221; का विस्तार किया गया है। वर्तमान में राज्य के 23 जिलों में कुल 35 अनवरत परिवेशीय वायु गुणवत्ता प्रबोधन केन्द्र स्थापित किये गये हैं.</li>



<li>पटना, मुजफ्फरपुर एवं गया शहरों में वायु प्रदूषण के निवारण एवं नियंत्रण हेतु कार्य-योजना तैयार की गई है एवं इसका क्रियान्वयन एवं अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है.</li>



<li>पूरे राज्य में पुरानी तकनीक पर आधारित सभी ईंट-भ‌ट्ठों को स्वच्छतर तकनीक में परिवर्तित कराया जा रहा है.</li>



<li>बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय के साथ पटना शहर में वायु प्रदूषण के स्रोतों, उत्सर्जन सूची (Emission Inventory) स्रोत विभाजन अध्ययन (Source Apportionment Study) एवं क्षमता अध्ययन (Carrying Capacity) का आधुनिक तकनीकों से अध्ययन करने हेतु एक समझौता किया गया है.</li>



<li>आई.आई.टी. कानपुर द्वारा स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके ग्रामीण क्षेत्रों में बिहार के सभी 38 जिलों के 534 शहरी/अर्द्ध-शहरी/ग्रामीण प्रखंडों में सूक्ष्म वायु गुणवत्ता निगरानी सेंसर के माध्यम से वायु गुणवत्ता मापने के लिए 03 वर्ष के कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है.</li>



<li>राज्य पर्षद द्वारा वैसे क्षेत्र जहां पर तेल कम्पनियों द्वारा स्वच्छतर ईधन यथा-सी.एन.जी/पी. एन. जी. की आपूर्ति नेटवर्क विकसित की जा चुकी है, वहाँ के औद्योगिक इकाइयों में इंधन के रूप में फर्नेस ऑयल, कोयला एवं लकड़ी का उपयोग किसी भी रूप में (भूगी को छोड़कर) प्रतिबंधित कर दिया गया है.</li>
</ul>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="494" height="448" src="https://www.patnanow.com/assets/2016/10/07bhrpollutioncontrol_195858.jpg" alt="" class="wp-image-3889" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2016/10/07bhrpollutioncontrol_195858.jpg 494w, https://www.patnanow.com/assets/2016/10/07bhrpollutioncontrol_195858-350x317.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 494px) 100vw, 494px" /></figure>



<p>पेट्रोलियम आउटलेट (पेट्रोल पम्प सीएनजी एवं बायोडीजल को सहमति से मुक्त किया गया है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा गंगा नदी के 34 स्थली इसकी सहायक नदियों/तालाबों के 70 एवं भू-गर्भीय जल के 70 स्थलों का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है. गंगा एवं इसकी सहायक नदियों के जल में जीवाणुओं की संख्या को छोड़कर सभी पारामीटर यथा डी.ओ, बी.ओ.डी. मानक के अधीन पाया गया है. राज्य सरकार की ओर से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के सहयोग से Climate Resilient and Low Carbon Development Pathway विकसित करने हेतु एक अध्ययन किया जा रहा है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="300" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/05/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna.jpg" alt="" class="wp-image-45079" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/05/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/05/pnc-Bihar-Pollution-control-Board-BPCB-pAtna-350x162.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा एक विशेष वायु प्रयोगशाला भवन का निर्माण पाटलिपुत्रा औद्योगिक क्षेत्र, पटना में किया जा रहा है. पर्षद द्वारा सहमति / प्राधिकार आवेदनों का निष्पादन जनवरी 2016 से ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से ही किया जा रहा है। इकाइयों द्वारा सूचनाओं का आदान-प्रदान भी ऑनलाइन प्रणाली के माध्यन से ही किया जा रहा है तथा स्वत नवीकरण (Auto-renewal) की व्यवस्था भी बनायी गयी है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="418" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/02/pnc-pollution-chart-parivesh-bhawan-air-pollution.jpg" alt="" class="wp-image-50757" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/02/pnc-pollution-chart-parivesh-bhawan-air-pollution.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/02/pnc-pollution-chart-parivesh-bhawan-air-pollution-350x225.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (SAPCC) वर्ष 2004-2030 तैयार कर State Level Steering Committee का अनुमोदन प्राप्त किया गया है.</p>



<p>मंत्री ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किये गये प्रयास की सराहना की एवं लंबित कार्यों को ससमय पूर्ण कराने का निदेश दिया. साथ ही राज्य के मुख्य शहरों यथा-पटना गया एवं मुजफरपुर के वायु गुणवत्ता सूचकांक का लगातार अनुश्रवण कराते हुये मानक अनुरूप रखने हेतु सभी आवश्यक कार्य करने का निदेश दिया गया. मंत्री ने हाजीपुर शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत अधिक पाया जिसके नियंत्रण हेतु यथाशीघ्र कार्रवाई करने का निदेश दिया.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>बायो स्टेप की मदद से नदियों तक पहुंचेगा ट्रीटेड सीवेज वाटर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/pollution-lecture-on-bio-step-formula/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Jun 2024 16:18:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पटना।। पटना में गंगा नदी का जल टोटल कॉलीफार्म तथा फीकल कॉलीफार्म के मानकों के अतिरिक्त सभी पारामीटरों पर खरा उतरता है. इस बारे में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव एस चन्द्रशेखर ने बताया कि राज्य में निर्माणाधीन सिवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण पूरा होने पर शहरों / नगरों से निकलने वाले मल-जल को उपचारित करने के पश्चात ही नदियों में प्रवाहित किया जायेगा, जिससे नदियों के जल की गुणवत्ता में सुधार आयेगा. वे &#8220;DRDO BIO STP (Zero Electricity, Zero Consumable) with the special referece to the removal of Cliform Bacteria) &#8221; व्याख्यान में संबोधन दे रहे थे. अपने व्याख्यान में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए प्रखर बिंदल ने बताया कि BIO-STP भारत सरकार की संस्था डी.आर.डी.ओ. द्वारा विकसित एक ग्रीन तकनीक है. जिससे विभिन्न प्रकार के बैक्टिरिया के समूह का उपयोग कर मल-जल को उपचारित किया जाता है. पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की उर्जा (बिजली) की खपत नहीं होती है. यह केवल गुरूत्वाकर्षण के आधार पर कार्य करता है. ऐसे बॉयो डायजेस्टर में न तो सेटलिंग टैक होता है, न तो एरोबिक टैंक. यह एक एनोरोबिक डायजेस्टर (Anaerobic digester) होता है, जिससे जीवाणुओं के संघ (Consortium of bacteria) का उपयोग कर जल-मल का शोधन किया जाता है इसी टैंक में एक निश्चित मात्रा में बैक्टिरिया के समूहों को एक बार ही डालना पड़ता है जो स्वयं ही अपनी संख्या बढ़ाते है और सतत् अपने काम में लगे रहते हैं. मल-जल (Sewage) को टैंक में तीन दिन तक रखने पर ये बैक्टिरिया मल-जल को विघटित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। पटना में गंगा नदी का जल टोटल कॉलीफार्म तथा फीकल कॉलीफार्म के मानकों के अतिरिक्त सभी पारामीटरों पर खरा उतरता है. इस बारे में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव एस चन्द्रशेखर ने बताया कि राज्य में निर्माणाधीन सिवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण पूरा होने पर शहरों / नगरों से निकलने वाले मल-जल को उपचारित करने के पश्चात ही नदियों में प्रवाहित किया जायेगा, जिससे नदियों के जल की गुणवत्ता में सुधार आयेगा. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="723" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-pollution-lecture-on-bio-step-formula-on-sewage-treatment-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85125" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-pollution-lecture-on-bio-step-formula-on-sewage-treatment-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-pollution-lecture-on-bio-step-formula-on-sewage-treatment-650x459.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वे &#8220;DRDO BIO STP (Zero Electricity, Zero Consumable) with the special referece to the removal of Cliform Bacteria) &#8221; व्याख्यान में संबोधन दे रहे थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="987" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000224135-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85134" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000224135-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000224135-650x627.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अपने व्याख्यान में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए प्रखर बिंदल ने बताया कि BIO-STP भारत सरकार की संस्था डी.आर.डी.ओ. द्वारा विकसित एक ग्रीन तकनीक है. जिससे विभिन्न प्रकार के बैक्टिरिया के समूह का उपयोग कर मल-जल को उपचारित किया जाता है. पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की उर्जा (बिजली) की खपत नहीं होती है. यह केवल गुरूत्वाकर्षण के आधार पर कार्य करता है. ऐसे बॉयो डायजेस्टर में न तो सेटलिंग टैक होता है, न तो एरोबिक टैंक. यह एक एनोरोबिक डायजेस्टर (Anaerobic digester) होता है, जिससे जीवाणुओं के संघ (Consortium of bacteria) का उपयोग कर जल-मल का शोधन किया जाता है  इसी टैंक में एक निश्चित मात्रा में बैक्टिरिया के समूहों को एक बार ही डालना पड़ता है जो स्वयं ही अपनी संख्या बढ़ाते है और सतत् अपने काम में लगे रहते हैं. मल-जल (Sewage) को टैंक में तीन दिन तक रखने पर ये बैक्टिरिया मल-जल को विघटित करते है. यहां से यह शोधित मल-जल पत्थरों के टुकड़ों की एक छन्नी से गुजर कर बाहर आता है एवं एक रीड बेड (Reed bed) में संग्रहित होता है, जहां एक विशिष्ट पौधे की जड़ों में खास प्रकार की बैक्टिरिया की सहायता से पुनः इनका शोधन होता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="864" height="712" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-pollution-lecture-on-bio-step-formula.jpg" alt="" class="wp-image-85124" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-pollution-lecture-on-bio-step-formula.jpg 864w, https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-pollution-lecture-on-bio-step-formula-650x536.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 864px) 100vw, 864px" /></figure>



<p>ऐसे बैक्टिरिया अपनी क्रिया के दौरान साफ जल एवं अल्प मात्रा में मिथेन गैस का जनन करते है, जिसका कोई व्यवसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता है. 10 किलोलीटर प्रतिदिन (KLD) की क्षमता के बहिःस्रावित जल के शोधन के लिए 30 किलोलीटर क्षमता के बॉयोडाजेस्टर टैंक की आवश्यकता होती है. गर्मियों में रिड बेड के पौधे की पत्तियां सूख सकतीं हैं, लेकिन इनकी जड़ें अपना काम करती रहती हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="686" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-pollution-lecture-on-bio-step-formula-on-sewage-treatment-plant-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85123" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-pollution-lecture-on-bio-step-formula-on-sewage-treatment-plant-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-pollution-lecture-on-bio-step-formula-on-sewage-treatment-plant-650x436.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस अवसर पर राज्य पर्षद के अध्यक्ष डॉ. डी.के. शुक्ला ने बताया कि बिहार राज्य के लिए इस प्रकार की तकनीक बेहद सामयिक है. राज्य की मुख्य समस्या नदी जल में टोटल कॉलीफार्म तथा फिकल कॉलीफार्म की अधिक संख्या ही है. सामान्यतः जल प्रदूषण के अन्य पारामीटर निर्धारित मानक के अधीन पाये जाते हैं.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>बिहार में ई वेस्ट मैनेजमेंट का जिम्मा एमएसटीसी को</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bspcb-mou-with-mstc/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Jun 2024 16:46:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। ई. अपशिष्ट (प्रबंधन) नियमावली, 2022 के तहत इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अपशिष्ट / कचरा का पर्यावरणीय दृष्टिकोण से सुदृढ प्रबंधन एवं निपटान हेतु बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन गठित एक केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम एम०. एस०. टी०.सी०. लिमिटेड, पटना के साथ आज दिनांक 20.06.2024 को एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया है. समझौता ज्ञापन पर राज्य पर्षद की ओर से सदस्य सचिव, एस. चन्द्रशेखर, तथा एस.एम.टी.पी. लिमिटेड की ओर से मलय मंडल, उप-महाप्रबंधक द्वारा हस्ताक्षर किया गया. इसके तहत बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् के मुख्यालय, पटना एवं क्षेत्रीय कार्यालयों में भण्डारित ई. अपशिष्टों को एस.एस.टी.सी. के माध्यम से नीलामी एवं इनका उठाव किये जाने की स्वीकृति राज्य पर्षद द्वारा दी गयी है. इस प्रक्रिया के दौरान राज्य पर्षद् में जमा सभी ई. अपशिष्टों का निपटान सुनिश्चित किया गया है. मलय मंडल द्वारा यह सूचित किया गया कि ऐसा ही समझौता वित्त विभाग, बिहार सरकार के साथ भी पूर्व में किया गया है. राज्य में ई. अपशिष्ट के निपटान का यह एक पहला कदम है जिसके तहत सर्वश्री एम. एस.टी.सी. लिमिटेड के सहयोग से विभिन्न सरकारी निजी कार्यालयों में जमा ई. अपशिष्ट का निपटान हो पायेगा. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। ई. अपशिष्ट (प्रबंधन) नियमावली, 2022 के तहत इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अपशिष्ट / कचरा का पर्यावरणीय दृष्टिकोण से सुदृढ प्रबंधन एवं निपटान हेतु बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन गठित एक केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम एम०. एस०. टी०.सी०. लिमिटेड, पटना के साथ आज दिनांक 20.06.2024 को एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="744" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000216903-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84974" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000216903-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/06/1000216903-650x472.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>समझौता ज्ञापन पर राज्य पर्षद की ओर से सदस्य सचिव,  एस. चन्द्रशेखर, तथा एस.एम.टी.पी. लिमिटेड की ओर से मलय मंडल, उप-महाप्रबंधक द्वारा हस्ताक्षर किया गया.</p>



<p>इसके तहत बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् के मुख्यालय, पटना एवं क्षेत्रीय कार्यालयों में भण्डारित ई. अपशिष्टों को एस.एस.टी.सी. के माध्यम से नीलामी एवं इनका उठाव किये जाने की स्वीकृति राज्य पर्षद द्वारा दी गयी है.</p>



<p>इस प्रक्रिया के दौरान राज्य पर्षद् में जमा सभी ई. अपशिष्टों का निपटान सुनिश्चित किया गया है. मलय मंडल द्वारा यह सूचित किया गया कि ऐसा ही समझौता वित्त विभाग, बिहार सरकार के साथ भी पूर्व में किया गया है. राज्य में ई. अपशिष्ट के निपटान का यह एक पहला कदम है जिसके तहत सर्वश्री एम. एस.टी.सी. लिमिटेड के सहयोग से विभिन्न सरकारी निजी कार्यालयों में जमा ई. अपशिष्ट का निपटान हो पायेगा.</p>



<p><em><strong>pncb</strong></em></p>
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			</item>
		<item>
		<title>फ्लाइ ऐश के अधिकतम इस्तेमाल पर सरकार का जोर, निर्बाध आपूर्ति अब भी बड़ा चैलेंज</title>
		<link>https://www.patnanow.com/fly-ash-utilisation-meeting/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 May 2022 18:42:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Carbon neutral]]></category>
		<category><![CDATA[Flyash]]></category>
		<category><![CDATA[POLLUTION CONTROL BOARD]]></category>
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					<description><![CDATA[थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाले फ्लाई ऐश के अधिकतम इस्तेमाल को लेकर सरकार ने सभी संबंधित लोगों से अपील की है क्योंकि इसका सीधा संबंध कार्बन उत्सर्जन में कमी से भी है. पटना में फ्लाई ऐश के इस्तेमाल को लेकर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा एक महत्वपूर्ण वर्कशॉप का आयोजन हुआ जिसमें बिहार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तमाम अधिकारी और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के एक्सपर्ट भी शामिल थे. कार्यशाला के मुख्य अतिथि नीरज कुमार सिंह, मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, बिहार सरकार ने अपने सम्बोधन में बताया कि राज्य के पर्यावरण संरक्षण हेतु उपजाऊ उपरी- मृदा (Fertile Top Soil) के संरक्षण एवं फ्लाई-ऐश ईंट के संबंध में फ्लाई-ऐश ईंट निर्मात्ता संघ के साथ उनकी कई बैठकें हो चुकी हैं. उन्होंने बताया कि राज्य में फ्लाई-ऐश ईंट निर्माण को प्रोत्साहित करने के इस संबंध में केन्द्रीय उर्जा मंत्री के साथ चर्चा भी की गयी है कि एन.टी.पी.सी. द्वारा फ्लाई-ऐश को भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुरूप उपलब्ध कराये जाने के संबंध में कार्रवाई की जाय, जिससे फ्लाई-ऐश इकाईयों को यह सुगमता से उपलब्ध हो सके. उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण हेतु जिस प्रकार राज्य में पेड़ों को बचाने के लिए नई आरा मिलों की स्थापना को पूरी तरह से बंद करा दिया गया है, उसी प्रकार उपजाऊ उपरी &#8211; मृदा के संरक्षण हेतु राज्य में नये ईंट-भट्ठों की स्थापना को सहमति प्रदान नहीं करने पर विचार किया जायेगा. इसके साथ ही उनकी संख्या को भी नियंत्रित किये जाने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाले फ्लाई ऐश के अधिकतम इस्तेमाल को लेकर सरकार ने सभी संबंधित लोगों से अपील की है क्योंकि इसका सीधा संबंध कार्बन उत्सर्जन में कमी से भी है. पटना में फ्लाई ऐश के इस्तेमाल को लेकर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा एक महत्वपूर्ण वर्कशॉप का आयोजन हुआ जिसमें बिहार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तमाम अधिकारी और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के एक्सपर्ट भी शामिल थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="434" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-pollution-seminar-on-flyash.jpg" alt="" class="wp-image-62407" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-pollution-seminar-on-flyash.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-pollution-seminar-on-flyash-350x234.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कार्यशाला के मुख्य अतिथि नीरज कुमार सिंह, मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, बिहार सरकार ने अपने सम्बोधन में बताया कि राज्य के पर्यावरण संरक्षण हेतु उपजाऊ उपरी- मृदा (Fertile Top Soil) के संरक्षण एवं फ्लाई-ऐश ईंट के संबंध में फ्लाई-ऐश ईंट निर्मात्ता संघ के साथ उनकी कई बैठकें हो चुकी हैं.</p>



<p>उन्होंने बताया कि राज्य में फ्लाई-ऐश ईंट निर्माण को प्रोत्साहित करने के इस संबंध में केन्द्रीय उर्जा मंत्री के साथ चर्चा भी की गयी है कि एन.टी.पी.सी. द्वारा फ्लाई-ऐश को भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुरूप उपलब्ध कराये जाने के संबंध में कार्रवाई की जाय, जिससे फ्लाई-ऐश इकाईयों को यह सुगमता से उपलब्ध हो सके.</p>



<p>उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण हेतु जिस प्रकार राज्य में पेड़ों को बचाने के लिए नई आरा मिलों की स्थापना को पूरी तरह से बंद करा दिया गया है, उसी प्रकार उपजाऊ उपरी &#8211; मृदा के संरक्षण हेतु राज्य में नये ईंट-भट्ठों की स्थापना को सहमति प्रदान नहीं करने पर विचार किया जायेगा. इसके साथ ही उनकी संख्या को भी नियंत्रित किये जाने पर विचार किया जायेगा. एक भट्ठे से दूसरे भट्ठे की तय की गयी दूरी हेतु निर्धारित दिशा-निर्देश को पूरी तरह से पालन कराया जायेगा.</p>



<p>कार्यशाला के बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष<div>(प्रो.) अशोक कुमार घोष ने कहा कि पहले थर्मल पावर प्लांटों से उत्सर्जित फ्लाई-ऐश का भंडारण एक समस्या थी. लेकिन, आज यह उत्पाद के कच्चे माल के रूप में जाना जाता है. राज्य में जनित फ्लाई-ऐश के शत-प्रतिशत उपयोग करने पर केन्द्रित यह कार्यशाला राज्य को कार्बन-न्यूट्रल राज्य बनाने में काफी मायने रखता है. </div></p>



<p>डॉ. सौमेन मैती, उपाध्यक्ष, डेवलपमेन्ट अल्टरनेटिव्स, नई दिल्ली ने कार्यशाला में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि एक अनुमान के मुताबिक राज्य में करीब 7500 ईंट निर्माण इकाईयाँ स्थापित हैं. ऐसी ईंट निर्माण इकाईयाँ का परिवेशीय वायुमंडल में कार्बन-डॉयऑक्साइड गैस के उत्सर्जन में परिवहन क्षेत्र तथा थर्मल पावर प्लांट के बाद तीसरा स्थान है. डॉ. मैती ने बताया कि राज्य में फ्लाई-ऐश आधारित करीब 500 इकाईयाँ स्थापित हैं.  यदि राज्य के थर्मल पावर प्लांटों के उत्सर्जित फ्लाई-ऐश तथा ऐश पॉड का ऐश भी मिल जाय तो वर्त्तमान में स्थापित इकाईयों के अतिरिक्त करीब 2000 नई इकाइयाँ स्थापित हो सकती हैं.</p>



<p>डॉ. मैती ने यह भी सुझाव दिया कि राज्य में नई लाल ईंट निर्माण इकाईयों की स्थापना हेतु एन.ओ.सी. नहीं जारी किया जाय. उन्होंने यह भी सूचित किया कि थर्मल पावर प्लांटों द्वारा फ्लाई-ऐश ईंट निर्माण इकाईयों को किसी न किसी कारण से फ्लाई ऐश की शत-प्रतिशत आपूर्ति नहीं हो पा रही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="624" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220517-WA0076.jpg" alt="" class="wp-image-62435" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220517-WA0076.jpg 624w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220517-WA0076-350x337.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 624px) 100vw, 624px" /></figure>



<p>पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन विभाग के  प्रधान सचिव अरविन्द कुमार चौधरी ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए बताया कि आज भले ही हम उपरी- मृदा के संरक्षण को अहमियत न देते हों, परन्तु यह सत्य है कि इसके निर्माण में वर्षों लग जाते हैं. वैसे किसान जो कृषि उत्पाद बढ़ाने हेतु रासायनिक खादों का काफी इस्तेमाल करते हैं, इस तथ्य को जान चुके हैं. फ्लाई-ऐश से बनी ईंटों का उपयोग करने वाले उपभोक्ता अब जानने लगे हैं कि लाल ईंटों की तुलना में इसकी गुणवत्ता अच्छी है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-bspcb-seminar-on-fly-ash-utilisation.jpg" alt="" class="wp-image-62408" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-bspcb-seminar-on-fly-ash-utilisation.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/pnc-bspcb-seminar-on-fly-ash-utilisation-350x263.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि यदि फ्लाई-ऐश निर्मित ईंटों की उपलब्धता पर्याप्त हो तो नई लाल ईंट निर्माण इकाईयों को एन.ओ.सी. नहीं दिये जाने के संबंध में संबंधित विभागों से चर्चा की जा सकती है. राज्य संपोषित निर्माण कार्यों में फ्लाई-ऐश ईंटों से निर्माण कार्य किया जाना संबंधित ठेकेदारों (Contractors) के लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए, इसके लिए भी संबंधित विभागों से चर्चा की जायेगी.</p>



<p>उद्घाटन सत्र के समापन पर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् के सदस्य &#8211; सचिव  एस. चन्द्रशेखर भा.व.से. द्वारा सभी गणमान्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बिहार की इन बड़ी औद्योगिक इकाइयों को नोटिस</title>
		<link>https://www.patnanow.com/pollution-control-board-notice/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Apr 2018 14:21:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
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		<category><![CDATA[POLLUTION CONTROL BOARD]]></category>
		<category><![CDATA[SAHYOG HOSPITAL]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार में बायो मेडिकल वेस्ट का सही ढंग से प्रबंधन नहीं करने के कारण अबतक 2038 HCF (Health Care Facility) को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही पटना के सहयोग अस्पताल को इसी कारण से Proposed Closure Direction जारी किया गया है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्राण पर्षद् द्वारा माह अप्रैल के दौरान अब तक ऐसी 177 इकाईयों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया है। जिसकी सुनवाई प्रक्रिया में है। इसमें ब्रिक क्लिन की 163 इकाई, राइस मिल की 8 के अतिरिक्त टोबैको इकाई,  हॉट मिक्स प्लान्ट एवं तेल मिल की एक-एक इकाई आदि हैं। इसी तरह गत दिनों बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्राण पर्षद् द्वारा कुल 8 इकाईयों को ‘‘Proposed Closure Direction” जारी किया गया है जिनमें 2 चीनी मिलें, 2 बॉयो-फ्यूल इकाइयां, चावल मिल, फूड ऑयल की एक-एक इकाई इत्यादि हैं। चीनी मिलों में रीगा सुगर मिल, रीगा, सीतामढ़ी को मनुष्मारा नदी में बहिःस्राव करने के कारण जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्राणद्ध अधिनियम, 1974 की धरा 33ए के तहत निर्देश जारी करते हुए राज्य पर्षद् द्वारा इस मामले में रू 20 लाख की बैंक गारंटी जमा करायी गयी है ताकि भविष्य में पुनः जल प्रदूषण करते पाये जाने पर उक्त जमा राशि को जब्त की जा सके। मझौलिया चीनी मिल, मझौलिया, पश्चिमी चम्पारण एवं न्यू स्वदेशी चीनी मिल, नरकटियागंज, पश्चिमी चम्पारण को क्रमश: ‘कोहरा’ एवं ‘हरबोरा’ नदी को प्रदूषण करते पाये जाने के कारण उक्त अधिनियम के तहत ‘‘Proposed Closure Direction”  निर्गत करते हुए दोनों इकाईयों को रू 20 लाख की बैंक गारंटी जमा करने हेतु निर्देश जारी किया गया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>बिहार में <strong>बायो मेडिकल वेस्ट</strong> का सही ढंग से प्रबंधन नहीं करने के कारण अबतक 2038 HCF (Health Care Facility) को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही पटना के सहयोग अस्पताल को इसी कारण से Proposed Closure Direction जारी किया गया है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्राण पर्षद् द्वारा माह अप्रैल के दौरान अब तक ऐसी 177 इकाईयों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया है। जिसकी सुनवाई प्रक्रिया में है। इसमें ब्रिक क्लिन की 163 इकाई, राइस मिल की 8 के अतिरिक्त टोबैको इकाई,  हॉट मिक्स प्लान्ट एवं तेल मिल की एक-एक इकाई आदि हैं। इसी तरह गत दिनों बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्राण पर्षद् द्वारा कुल 8 इकाईयों को ‘‘Proposed Closure Direction” जारी किया गया है जिनमें 2 चीनी मिलें, 2 बॉयो-फ्यूल इकाइयां, चावल मिल, फूड ऑयल की एक-एक इकाई इत्यादि हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-3889 alignright" src="http://www.patnanow.com/assets/2016/10/07bhrpollutioncontrol_195858-350x317.jpg" alt="" width="350" height="317" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2016/10/07bhrpollutioncontrol_195858-350x317.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2016/10/07bhrpollutioncontrol_195858.jpg 494w" sizes="auto, (max-width: 350px) 100vw, 350px" /></p>
<p>चीनी मिलों में रीगा सुगर मिल, रीगा, सीतामढ़ी को मनुष्मारा नदी में बहिःस्राव करने के कारण जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्राणद्ध अधिनियम, 1974 की धरा 33ए के तहत निर्देश जारी करते हुए राज्य पर्षद् द्वारा इस मामले में रू 20 लाख की बैंक गारंटी जमा करायी गयी है ताकि भविष्य में पुनः जल प्रदूषण करते पाये जाने पर उक्त जमा राशि को जब्त की जा सके। मझौलिया चीनी मिल, मझौलिया, पश्चिमी चम्पारण एवं न्यू स्वदेशी चीनी मिल, नरकटियागंज, पश्चिमी चम्पारण को क्रमश: ‘कोहरा’ एवं ‘हरबोरा’ नदी को प्रदूषण करते पाये जाने के कारण उक्त अधिनियम के तहत ‘‘Proposed Closure Direction”  निर्गत करते हुए दोनों इकाईयों को रू 20 लाख की बैंक गारंटी जमा करने हेतु निर्देश जारी किया गया है।</p>
<p>इसी प्रकार राज्य की दो बॉयो-फ्यूल इकाईयों क्रमश: HPCL, सुगौली, पूर्वी चम्पारण एवं HPCL लौरिया, पश्चिमी चम्पारण को भी ‘‘Proposed Closure Direction” जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त कुल 6 इकाईयों को बन्द करने करने हेतु निदेश ‘‘Closure Direction” जारी किया गया है। इसमें एक स्टोन क्रशर इकाई पवन स्टोन वर्क्स, टेहटा, जहानाबाद, दो अल्युमिनियम की इकाई क्रमश: अशोक मेटल एवं  लोहानी मेटल स्टोर, पटना सिटी को वायु अधिनियम की धारा 31ए के तहत इकाई को बन्द करने हेतु निदेश जारी किया गया है।</p>
<p>आपको बता दें कि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्राण पर्षद् पर्यावरणीय अधिनियमों/नियमों की अवहेलना कर चलाये जा रहे उद्योगों पर कार्रवाई करता है। ऐसी कार्रवाई राज्य पर्षद् से सहमति प्राप्त किये बिना अवैध् रूप से संचालित इकाईयो पर की जाती है तथा उन इकाईयों पर भी की जाती है जो राज्य पर्षद् से सहमति प्राप्त कर संचालित होने के बावजूद प्रदूषण नियंत्राण के निर्धरित मापदंडो का अनुपालन नहीं करते हैं।</p>
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