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	<title>PATNA &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>सोनू राय की जीत का ‘यंग स्ट्रैटेजिस्ट !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/stretegist-of-sonu-rai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 May 2026 15:00:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़े नेताओं के बीच इस युवा चेहरे ने खींचा सबका ध्यानआरा, 16 मई (ओ पी पाण्डेय). बक्सर-भोजपुर विधान परिषद उपचुनाव में राजद प्रत्याशी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब एक युवा चेहरा राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का केंद्र बन गया है। यह चेहरा है राष्ट्रीय जनता दल के भोजपुर जिला प्रवक्ता का, जिन्होंने चुनाव के दौरान हर मोर्चे पर अपनी सक्रियता, रणनीति और मैनेजमेंट क्षमता से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. भोजपुर की राजनीति में आमतौर पर बड़े और अनुभवी नेताओं का दबदबा माना जाता है, लेकिन इस चुनाव में आलोक रंजन ने जिस परिपक्वता और संयम के साथ अपनी भूमिका निभाई, उसने उन्हें युवाओं के बीच ही नहीं बल्कि वरिष्ठ नेताओं के बीच भी खास पहचान दिलाई. शांत स्वभाव, तथ्यों के साथ बात रखने की कला और संगठनात्मक पकड़ के कारण वे लगातार चर्चा में बने हुए हैं. पूर्व में राजद छात्र प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके आलोक रंजन लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय हैं। यही वजह रही कि विधान परिषद चुनाव में बूथ मैनेजमेंट से लेकर जनसंपर्क अभियान, सोशल मीडिया कैंपेन, कंटेंट निर्माण और नेताओं के बीच समन्वय तक, लगभग हर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में उनकी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। चुनाव के दौरान राजद के कई दिग्गज नेताओं- पूर्व विधान पार्षद लालदास राय, पूर्व विधायक विजयेंद्र यादव, रामविशुन सिंह उर्फ लोहिया, अरुण यादव, हाकिम प्रसाद, वीरबल यादव, मुकेश यादव, अदीब रिजवी, लालबिहारी सिंह सहित अन्य कई अनुभवी नेताओं के बीच आलोक रंजन की मौजूदगी लगातार महसूस की गई। राजनीतिक हलकों में चर्चा है [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बड़े नेताओं के बीच इस युवा चेहरे ने खींचा सबका ध्यान</strong><br><strong>आरा, 16 मई (ओ पी पाण्डेय). </strong>बक्सर-भोजपुर विधान परिषद उपचुनाव में राजद प्रत्याशी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब एक युवा चेहरा राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का केंद्र बन गया है। यह चेहरा है राष्ट्रीय जनता दल के भोजपुर जिला प्रवक्ता का, जिन्होंने चुनाव के दौरान हर मोर्चे पर अपनी सक्रियता, रणनीति और मैनेजमेंट क्षमता से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="959" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314473-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96797" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314473-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314473-650x609.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>भोजपुर की राजनीति में आमतौर पर बड़े और अनुभवी नेताओं का दबदबा माना जाता है, लेकिन इस चुनाव में आलोक रंजन ने जिस परिपक्वता और संयम के साथ अपनी भूमिका निभाई, उसने उन्हें युवाओं के बीच ही नहीं बल्कि वरिष्ठ नेताओं के बीच भी खास पहचान दिलाई. शांत स्वभाव, तथ्यों के साथ बात रखने की कला और संगठनात्मक पकड़ के कारण वे लगातार चर्चा में बने हुए हैं.<br><br>पूर्व में राजद छात्र प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके आलोक रंजन लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय हैं। यही वजह रही कि विधान परिषद चुनाव में बूथ मैनेजमेंट से लेकर जनसंपर्क अभियान, सोशल मीडिया कैंपेन, कंटेंट निर्माण और नेताओं के बीच समन्वय तक, लगभग हर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में उनकी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="498" height="496" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314472.jpg" alt="" class="wp-image-96798" /></figure>



<p><br>चुनाव के दौरान राजद के कई दिग्गज नेताओं- पूर्व विधान पार्षद लालदास राय, पूर्व विधायक विजयेंद्र यादव, रामविशुन सिंह उर्फ लोहिया, अरुण यादव, हाकिम प्रसाद, वीरबल यादव, मुकेश यादव, अदीब रिजवी, लालबिहारी सिंह सहित अन्य कई अनुभवी नेताओं के बीच आलोक रंजन की मौजूदगी लगातार महसूस की गई।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="860" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314475-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96799" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314475-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314475-650x546.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नव निर्वाचित MLC सोनू कुमार राय ने भी चुनाव के दौरान आलोक रंजन पर खास भरोसा जताया। सभाओं, बैठकों और जनसंपर्क अभियानों में वे अक्सर सोनू राय के साथ साये की तरह नजर आए। खास बात यह रही कि सोशल मीडिया मैनेजमेंट और डिजिटल कंटेंट की जिम्मेदारी भी मुख्य रूप से उन्हीं के कंधों पर थी.<br>सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक क्षेत्र में भी आलोक रंजन अपनी अलग पहचान रखते हैं. आलोक वर्तमान में रिसर्च स्कॉलर हैं और पीएचडी की पढ़ाई कर रहे हैं। यही अकादमिक दृष्टिकोण उनकी राजनीतिक सोच और कार्यशैली में भी साफ झलकता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="615" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314474-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96800" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314474-scaled.jpg 615w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314474-390x650.jpg 390w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314474-922x1536.jpg 922w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001314474-1229x2048.jpg 1229w" sizes="auto, (max-width: 615px) 100vw, 615px" /></figure>



<p>वहीं युवा MLC की लोकप्रियता का बड़ा आधार युवाओं की मजबूत टीम को भी माना जा रहा है। उनके साथ रंजय यादव &#8216;लालू&#8217;, धनजीत यादव, पीयूष यादव, सुशील राव, अर्पित, पंकज, विनीत सहित कई युवा लगातार सक्रिय भूमिका में दिखे।</p>



<p><br>राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि भोजपुर की राजनीति में उभरती नई युवा टीम और उसके मैनेजमेंट मॉडल की भी बड़ी झलक है। लेकिन राजनीति के बड़े चकाचौंध में जीत के बाद अक्सर ऐसे चेहरे जीत के चेहरों के पीछे दफन हो जाते हैं। प्रतिभा का भरपूर उपयोग ही नहीं दोहन भी हो जाता है इसलिए ऐसे मेहनती और क्रिएटिव युवाओं को जन तक पहुंचाना हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए ताकि कोई प्रतिभा राजनीति की भेंट न चढ़ जाए।</p>
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		<title>आरा-बक्सर उपचुनाव के बाजीगर बने सोनू राय</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bajigar-of-mlc-election-ara-buxar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 16:19:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बागियों ने बिगाड़ा खेल, MLC उपचुनाव में NDA की नैया डूबी MLA चुनाव के बाद अब विधान परिषद चुनाव में भी नाराज़ नेताओं ने बदल दिया पूरा समीकरण आरा, 14 मई। बक्सर-भोजपुर MLC उपचुनाव में राजद प्रत्याशी सोनू राय ने चुनावी बाजीगर बन शानदार जीत दर्ज कर राजनीतिक गलियारों के तमाम कयासों पर विराम लगा दिया। कांटे की टक्कर वाले इस त्रिकोणीय मुकाबले में सत्ता पक्ष, विपक्ष और एक बागी निर्दलीय उम्मीदवार के बीच सियासी संघर्ष चरम पर था। चुनाव के दौरान आंकड़ों की हेराफेरी, धनबल और मैनेजमेंट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। राजनीतिक दिग्गजों से लेकर आम जनता तक यही चर्चा थी कि MLC चुनाव धनकुबेरों का खेल होता है, जहां पैसों की ताकत ही जीत तय करती है। आरोप-प्रत्यारोप और शब्दों के वार के बीच जब मतगणना का परिणाम सामने आया तो सारे अनुमान ध्वस्त हो गए और सोनू राय ने मैदान फतह कर यह साबित कर दिया कि हर चुनाव सिर्फ धनबल से नहीं, जनसमर्थन और रणनीति से भी जीता जाता है। बक्सर-भोजपुर विधान परिषद उपचुनाव का परिणाम एक बार फिर यह साबित कर गया कि राजनीति में सबसे बड़ा खतरा विपक्ष नहीं, बल्कि अपने ही “बागी” होते हैं। गुरुवार को राजकीय कन्या प्लस टू विद्यालय में हुई मतगणना में राजद उम्मीदवार सोनू कुमार राय ने NDA प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद को शिकस्त देते हुए जीत दर्ज कर ली। शुरुआती रुझानों में कन्हैया प्रसाद आगे जरूर दिखे, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, समीकरण पूरी तरह बदलता चला गया। 12 मई 2026 को हुए मतदान में कुल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>बागियों ने बिगाड़ा खेल, MLC उपचुनाव में NDA की नैया डूबी</strong><br><br><strong>MLA चुनाव के बाद अब विधान परिषद चुनाव में भी नाराज़ नेताओं ने बदल दिया पूरा समीकरण</strong><br><br>आरा, 14 मई। बक्सर-भोजपुर MLC उपचुनाव में राजद प्रत्याशी सोनू राय ने चुनावी बाजीगर बन शानदार जीत दर्ज कर राजनीतिक गलियारों के तमाम कयासों पर विराम लगा दिया। कांटे की टक्कर वाले इस त्रिकोणीय मुकाबले में सत्ता पक्ष, विपक्ष और एक बागी निर्दलीय उम्मीदवार के बीच सियासी संघर्ष चरम पर था। चुनाव के दौरान आंकड़ों की हेराफेरी, धनबल और मैनेजमेंट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। राजनीतिक दिग्गजों से लेकर आम जनता तक यही चर्चा थी कि MLC चुनाव धनकुबेरों का खेल होता है, जहां पैसों की ताकत ही जीत तय करती है। आरोप-प्रत्यारोप और शब्दों के वार के बीच जब मतगणना का परिणाम सामने आया तो सारे अनुमान ध्वस्त हो गए और सोनू राय ने मैदान फतह कर यह साबित कर दिया कि हर चुनाव सिर्फ धनबल से नहीं, जनसमर्थन और रणनीति से भी जीता जाता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="573" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306456-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96739" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306456-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306456-650x364.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>बक्सर-भोजपुर विधान परिषद उपचुनाव का परिणाम एक बार फिर यह साबित कर गया कि राजनीति में सबसे बड़ा खतरा विपक्ष नहीं, बल्कि अपने ही “बागी” होते हैं। गुरुवार को राजकीय कन्या प्लस टू विद्यालय में हुई मतगणना में राजद उम्मीदवार सोनू कुमार राय ने NDA प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद को शिकस्त देते हुए जीत दर्ज कर ली। शुरुआती रुझानों में कन्हैया प्रसाद आगे जरूर दिखे, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, समीकरण पूरी तरह बदलता चला गया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="783" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306474-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96740" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306474-scaled.jpg 783w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306474-497x650.jpg 497w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306474-1175x1536.jpg 1175w" sizes="auto, (max-width: 783px) 100vw, 783px" /></figure>



<p>12 मई 2026 को हुए मतदान में कुल 97.96 प्रतिशत वोट पड़े थे। कुल 5,335 वैध मतों में जीत के लिए 2,668 वोटों की आवश्यकता थी। प्रथम वरीयता मतों की गिनती में ही राजद प्रत्याशी सोनू कुमार राय ने 2,486 वोट हासिल कर बढ़त बना ली, जबकि कुल मत 2507 मिले, वही NDA समर्थित उम्मीदवार कन्हैया प्रसाद को 2153 मत मिले। दोनों के बीच 354 वोटों का अंतर रहा। वही अन्य उम्मीदवारों में मनोज उपाध्याय 636, लालू प्रसाद यादव को 30, कन्हैया प्रसाद 25 और निरंजन कुमार राय को 12 मत मिले।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="577" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306589-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96745" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306589-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306589-650x367.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306589-1536x866.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br><br>लेकिन इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी “बागी फैक्टर” बनकर उभरी। जदयू के नाराज़ नेता मनोज कुमार उपाध्याय ने निर्दलीय मैदान में उतरकर 636 वोट हासिल कर लिए। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="735" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001295990-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96686" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001295990-scaled.jpg 735w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001295990-467x650.jpg 467w" sizes="auto, (max-width: 735px) 100vw, 735px" /></figure>



<p>राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि इन वोटों का बड़ा हिस्सा NDA उम्मीदवार के खाते में जाता तो परिणाम पूरी तरह पलट सकता था। यही वजह रही कि सत्ता पक्ष की उम्मीदें धीरे-धीरे ध्वस्त होती चली गईं।<br><br>दरअसल यह पहली बार नहीं है जब बागियों ने सत्ता समीकरण बिगाड़ा हो। हाल ही में सम्पन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भी कई सीटों पर ऐसे ही हालात देखने को मिले थे। पार्टी के लिए तीन-तीन दशक तक एक साधारण कार्यकर्ता की तरह जमीन पर मेहनत करने वाले नेताओं को जब टिकट वितरण में नजरअंदाज कर दिया गया, तो कई नेता निर्दलीय ही चुनावी अखाड़े में उतर पड़े। परिणाम यह हुआ कि कई जगहों पर आधिकारिक प्रत्याशियों के वोट कट गए और खेल पूरी तरह बिगड़ गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजद को भी कई तय मानी जा रही सीटों पर इसी अंदरूनी नाराजगी का नुकसान उठाना पड़ा था।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="847" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306588-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96747" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306588-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306588-650x538.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306588-1536x1270.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306588-2048x1694.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="864" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306603-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96746" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306603-scaled.jpg 864w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306603-548x650.jpg 548w" sizes="auto, (max-width: 864px) 100vw, 864px" /></figure>



<p><br>ठीक वैसा ही दृश्य अब MLC उपचुनाव में भी देखने को मिला। जिस चुनाव को अक्सर धनबल, जोड़तोड़ और खरीद-फरोख्त का अखाड़ा माना जाता रहा है, वहां इस बार “नाराज़ कार्यकर्ता” सबसे बड़ा फैक्टर बन गया। सत्ता पक्ष का संगठनात्मक गणित और चुनावी प्रबंधन उस समय धराशायी हो गया जब अपने ही लोग मैदान में उतरकर वोटों का बंटवारा कर गए।<br><br>मतगणना को लेकर जिला प्रशासन ने भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। पूरे काउंटिंग सेंटर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। स्कूल के मुख्य द्वार से लेकर मतगणना हॉल तक 33 मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई थी। जिला निर्वाची पदाधिकारी सह डीएम के नेतृत्व में डीडीसी गुंजन सिंह समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं, जबकि विधि-व्यवस्था की कमान ADM डॉ. शशि शेखर के पास थी।</p>



<p>जीत के बाद राजद के कार्यकारी अध्यक्ष और प्रतिपक्ष नेता तेजस्वी यादव ने सोनू राय को बधाई देते अपने सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा &#8211; भोजपुर-बक्सर MLC उपचुनाव में राजद प्रत्याशी श्री सोनू राय ने NDA उम्मीदवार को करारी शिकस्त दी है। राजद प्रत्याशी के जीतने पर सभी कार्यकर्ताओं, मतदाताओं और नेताओं को हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद।</p>



<p>हम शुरू से कह रहे है अगर आज देश-प्रदेश में Machine की बजाय बैलेट पेपर यानि मतपत्र से चुनाव हो तो BJP-NDA कहीं भी नहीं टिकेगी। बिहार चुनाव में पोस्टल बैलेट पेपर में हम लोगों ने 150 से अधिक सीटें जीती थी लेकिन तंत्र-यंत्र-षड्यंत्र और छल-कपट से हरा दिया गया था।</p>



<p>आजकल मतगणना के दिन भी देर रात 1-2 बजे तक चुनाव परिणाम घोषित किए जाते है। पूर्व में मतपत्रों की गिनती में भी इतना ही समय लगता था। तो क्यों नहीं लोकतांत्रिक पारदर्शिता और जनतंत्र में जनविश्वास कायम रखने के लिए अब EVM की बजाय बैलेट पेपर से ही चुनाव कराया जाए। और हाँ, हम हमेशा जीतने के बाद भी EVM से मतदान कराने के पक्षधर नहीं रहे है।</p>



<p>पुन: फिर जीत की बधाई। #TejashwiYadav #RJD</p>



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<p>इधर जीत के बाद राजद के चर्चित नेता व पूर्व MLA प्रत्याशी रामबाबू सिंह ने कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनाव ने लोकतंत्र की असली ताकत दिखा दी। उन्होंने जीत के लिए बधाई देते हुए सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। वही राजद के युवा नेता दीपू राणावत ने जीत का सेहरा लोक के माथे मढ़ दिया। उन्होंने कहा कि जनता जिसे चाहती है उसे ही जीत मिलता है। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="460" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306586-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96749" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306586-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306586-650x292.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306586-1536x689.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>बधाईयों का तांता लगातार मिलता रहा जिसमें प्रदेश महासचिव मनोज सिंह, भाजपा माले नेता व अधिवक्ता अमित कुमार गुप्ता ने सोनू राय को जीत की बधाई देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है।</p>



<figure class="wp-block-gallery has-nested-images columns-default is-cropped wp-block-gallery-2 is-layout-flex wp-block-gallery-is-layout-flex"></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="568" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306436-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96744" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306436-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306436-650x361.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306436-1536x852.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="565" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306451-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96743" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306451-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306451-650x359.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>जीत के बाद सोनू राय ने नगर का भ्रमर कर जनता का आभार व्यक्त किया। उनके साथ राजद नेता और गाड़ियों का काफिला काफी देर तक भ्रमर करता रहा।<br><br><br></p>
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			</item>
		<item>
		<title>क्या बाप-बेटे की जोड़ी रचेगी राजनीतिक इतिहास !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/will-father-son-duo-create-history/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 03:45:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[नमक, नाता और नाराज़गी!आरा-बक्सर MLC चुनाव में अपनों ने ही खोला मोर्चा आरा, 12 मई। कल तक जो एक-दूसरे का हाथ थाम वोट मांगते थे, आज वही मंच से एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं। सवाल अब सिर्फ चुनाव का नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व और परिवारवाद बनाम जनाधार की लड़ाई का बन चुका है। भोजपुर की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल गूंज रहा है कि“क्या बाप-बेटे की जोड़ी एक साथ विधान परिषद और विधानसभा पहुंचेगी?” एक तरफ जदयू ने संदेश विधायक और पूर्व MLC राधाचरण साह उर्फ सेठ जी के बेटे कन्हैया कुमार पर दांव लगाया है, तो दूसरी तरफ राजद ने पूर्व MLC लालदास राय के बेटे और विजेंद्र यादव के दामाद सोनू राय को मैदान में उतार दिया है। यानी लड़ाई अब दलों से ज्यादा दो राजनीतिक घरानों की प्रतिष्ठा पर आकर टिक गई है। लेकिन इस चुनाव का सबसे विस्फोटक पहलू बना है अपनों का विद्रोह! जदयू के पुराने और जमीन से जुड़े नेता मनोज उपाध्याय टिकट कटने के बाद जब निर्दलीय अपने जनप्रतिनिधियों के भरोसे चुनावी मैदान में उतरे तो पार्टी ने उन्हें बागी घोषित कर 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। 35 वर्षों तक पार्टी का झंडा ढोने वाले मनोज ने खुलकर आरोप लगाया कि जदयू अब कार्यकर्ताओं की नहीं, “धनकुबेरों और भाई-भतीजावाद” की पार्टी बन गई है। उधर राजद खेमे में भी हालात कम विस्फोटक नहीं हैं।जो राधाचरण साह कभी अरुण यादव और विजेंद्र यादव के साथ एक परिवार की तरह राजनीति करते थे, वही आज उनके सबसे बड़े [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नमक, नाता और नाराज़गी!</strong><br><strong>आरा-बक्सर MLC चुनाव में अपनों ने ही खोला मोर्चा</strong></p>



<p>आरा, 12 मई। कल तक जो एक-दूसरे का हाथ थाम वोट मांगते थे, आज वही मंच से एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं। सवाल अब सिर्फ चुनाव का नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व और परिवारवाद बनाम जनाधार की लड़ाई का बन चुका है।</p>



<p>भोजपुर की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल गूंज रहा है कि“क्या बाप-बेटे की जोड़ी एक साथ विधान परिषद और विधानसभा पहुंचेगी?”</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="800" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001297134-scaled.png" alt="" class="wp-image-96697" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001297134-scaled.png 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001297134-650x508.png 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>एक तरफ जदयू ने संदेश विधायक और पूर्व MLC राधाचरण साह उर्फ सेठ जी के बेटे कन्हैया कुमार पर दांव लगाया है, तो दूसरी तरफ राजद ने पूर्व MLC लालदास राय के बेटे और विजेंद्र यादव के दामाद सोनू राय को मैदान में उतार दिया है। यानी लड़ाई अब दलों से ज्यादा दो राजनीतिक घरानों की प्रतिष्ठा पर आकर टिक गई है।</p>



<p><strong>लेकिन इस चुनाव का सबसे विस्फोटक पहलू बना है अपनों का विद्रोह!</strong></p>



<p>जदयू के पुराने और जमीन से जुड़े नेता मनोज उपाध्याय टिकट कटने के बाद जब निर्दलीय अपने जनप्रतिनिधियों के भरोसे चुनावी मैदान में उतरे तो पार्टी ने उन्हें बागी घोषित कर 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। 35 वर्षों तक पार्टी का झंडा ढोने वाले मनोज ने खुलकर आरोप लगाया कि जदयू अब कार्यकर्ताओं की नहीं, “धनकुबेरों और भाई-भतीजावाद” की पार्टी बन गई है।</p>



<p>उधर राजद खेमे में भी हालात कम विस्फोटक नहीं हैं।<br>जो राधाचरण साह कभी अरुण यादव और विजेंद्र यादव के साथ एक परिवार की तरह राजनीति करते थे, वही आज उनके सबसे बड़े राजनीतिक दुश्मन बन चुके हैं। वजह भी साफ है ,संदेश विधानसभा में राधाचरण साह ने यादव परिवार के राजनीतिक किले को ध्वस्त कर दिया। पिता, मां और बेटे को विधायक बनाने का सपना अधूरा रह गया और तभी से रिश्तों में दरार की दीवार खड़ी हो गई।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="755" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001297062-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96695" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001297062-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001297062-650x479.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अब उसी लड़ाई का बदला MLC चुनाव में लेने की तैयारी दिख रही है। विजेंद्र यादव ने तो हमला बोलते हुए राधाचरण साह पर भाई-भतीजावाद, कारोबार की राजनीति और यहां तक कि पुराने विवादों तक को उछाल दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग सालभर बालू और होटल का धंधा करते हैं, चुनाव आते ही नेता बन जाते हैं।</p>



<p>हालांकि राधाचरण साह ने पलटवार में ज्यादा शब्द खर्च नहीं किए, लेकिन मुस्कुराते हुए ऐसा तीर छोड़ दिया जिसने सियासी तापमान और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि“भोजपुर की जनता सब देख रही है कि कौन काम कर रहा है और कौन सिर्फ परिवारवाद की राजनीति।”</p>



<p>जब उनसे पूछा गया कि जो लोग कभी उनका नमक खाते थे, वही आज विरोध में क्यों खड़े हैं, क्या आपके अन्न में दोष है?<br>तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि “अब यही मान लीजिए… लेकिन मुझे किसी से गिला-शिकवा नहीं। वक्त और मिट्टी का हर कण सब जानता है।”</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="952" height="744" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001297063.jpg" alt="" class="wp-image-96696" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001297063.jpg 952w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001297063-650x508.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 952px) 100vw, 952px" /></figure>



<p>वहीं <strong>कन्हैया प्रसाद </strong>ने खुद को सोशल मीडिया की राजनीति से अलग बताते हुए कहा कि सेवा दिखाने के लिए नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि बाढ़, आगलगी कोरोना और संकट के समय उन्होंने लोगों के बीच जाकर मदद की, लेकिन फोटो खिंचवाने में विश्वास नहीं रखा। उनका दावा है कि जनता और जनप्रतिनिधियों का आशीर्वाद इस चुनाव में उनके साथ है।</p>



<p>अब चुनावी शोर थम चुका है। प्रचार का अंतिम अध्याय खत्म हो गया है और अब फैसला उन जनप्रतिनिधियों के हाथ में है जिनकी एक-एक वोट आरा-बक्सर की सियासत का भविष्य तय करेगी। पंचायत से लेकर वार्ड तक, हर वोट अब किसी उम्मीदवार की किस्मत नहीं बल्कि दो राजनीतिक विचारधाराओं और दो परिवारों की प्रतिष्ठा का फैसला करेगा।</p>



<p>अब सवाल यही है कि क्या जन प्रतिनिधी“काम” पर वोट ददेंगे या “खानदान” पर?<br>क्या राधाचरण साह अपने बेटे को विधान परिषद पहुंचाकर आरा-बक्सर की राजनीति में नया इतिहास लिखेंगे?<br>या फिर राजद का दामाद फैक्टर इस बार सेठ परिवार की सियासी चाल को मात देगा?</p>



<p>फिलहाल आरा-बक्सर की राजनीति में जुबानी जंग एक चर्चा का विषय बना हुआ है और अब जनता नहीं, जनप्रतिनिधियों की खामोश वोट इतिहास लिखने वाली है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>CBSE 10वीं रिजल्ट में बेटियों का दबदबा, संभावना स्कूल में लड़कियों ने मारी बाज़ी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/cbse-10th-result-most-toppers-are-girls/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 03:59:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACADEMIC]]></category>
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					<description><![CDATA[⁷uu seआरा,16 अप्रैल(ओ पी पाण्डेय).सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा-2026 के परिणाम में आरा के शांति स्मृति संभावना आवासीय उच्च विद्यालय के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन इस बार खास बात यह रही कि बेटियों ने बेटों को पीछे छोड़ते हुए पूरी तरह दबदबा कायम किया। विद्यालय की छात्रा ज्योति गुप्ता ने 97% अंक हासिल कर स्कूल टॉपर बनते हुए न सिर्फ विद्यालय, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया। खास बात यह रही कि ज्योति ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में 100 में 100 अंक लाकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया। टॉप पोजीशन पर भी लड़कियों का ही कब्जा रहा।स्वर्णिका सिद्धे (93%) ने दूसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि कौशिकी कुमारी, आराध्या और अन्य छात्राओं ने भी 92% अंक के साथ शीर्ष सूची में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। कुल मिलाकर, टॉपर्स की सूची में लड़कियों की संख्या ज्यादा रही, जिससे यह साफ हो गया कि इस बार “बेटियां पढ़ाई में आगे, लड़के पीछे” का ट्रेंड देखने को मिला। विद्यालय का रिजल्ट शत-प्रतिशत रहा। कुल 285 परीक्षार्थियों में * 21 छात्रों ने 90% से अधिक अंक हासिल किए * 32 छात्रों ने 80-90% के बीच अंक प्राप्त किए * 95 छात्रों ने 70-80% अंक लाए विद्यालय की प्राचार्या डॉ. अर्चना सिंह ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि यह छात्रों की मेहनत, शिक्षकों की लगन और अनुशासन का परिणाम है। वहीं प्रबंध निदेशक डॉ. कुमार द्विजेंद्र ने कहा कि यह परिणाम स्कूल की गुणवत्ता शिक्षा का प्रमाण है। इस मौके पर सफल छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया और मिठाई खिलाकर उनका [&#8230;]]]></description>
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<p>⁷uu se<br>आरा,16 अप्रैल(<strong>ओ पी पाण्डेय</strong>).सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा-2026 के परिणाम में आरा के शांति स्मृति संभावना आवासीय उच्च विद्यालय के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन इस बार खास बात यह रही कि बेटियों ने बेटों को पीछे छोड़ते हुए पूरी तरह दबदबा कायम किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="853" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/1001225412-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96285" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/1001225412-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/04/1001225412-650x542.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/04/1001225412-1536x1280.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>विद्यालय की छात्रा ज्योति गुप्ता ने 97% अंक हासिल कर स्कूल टॉपर बनते हुए न सिर्फ विद्यालय, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया। खास बात यह रही कि ज्योति ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में 100 में 100 अंक लाकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="461" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/1001225581-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96286" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/1001225581-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/04/1001225581-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/04/1001225581-1536x691.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>टॉप पोजीशन पर भी लड़कियों का ही कब्जा रहा।<br>स्वर्णिका सिद्धे (93%) ने दूसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि कौशिकी कुमारी, आराध्या और अन्य छात्राओं ने भी 92% अंक के साथ शीर्ष सूची में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="847" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/1001222923-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96288" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/1001222923-scaled.jpg 847w, https://www.patnanow.com/assets/2026/04/1001222923-538x650.jpg 538w" sizes="auto, (max-width: 847px) 100vw, 847px" /></figure>



<p><br>कुल मिलाकर, टॉपर्स की सूची में लड़कियों की संख्या ज्यादा रही, जिससे यह साफ हो गया कि इस बार “बेटियां पढ़ाई में आगे, लड़के पीछे” का ट्रेंड देखने को मिला। विद्यालय का रिजल्ट शत-प्रतिशत रहा। कुल 285 परीक्षार्थियों में<br>  * 21 छात्रों ने 90% से अधिक अंक हासिल किए<br>  * 32 छात्रों ने 80-90% के बीच अंक प्राप्त किए<br>  * 95 छात्रों ने 70-80% अंक लाए<br></p>



<p>विद्यालय की प्राचार्या डॉ. अर्चना सिंह ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि यह छात्रों की मेहनत, शिक्षकों की लगन और अनुशासन का परिणाम है। वहीं प्रबंध निदेशक डॉ. कुमार द्विजेंद्र ने कहा कि यह परिणाम स्कूल की गुणवत्ता शिक्षा का प्रमाण है। इस मौके पर सफल छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया और मिठाई खिलाकर उनका उत्साह बढ़ाया गया।<br></p>



<p><strong>बड़ी घोषणा</strong>:<br>विद्यालय प्रबंधन ने ऐलान किया कि जिले में 90% या उससे अधिक अंक लाने वाले छात्रों को कक्षा 11वीं में नामांकन पर 50% फीस छूट दी जाएगी। कुल मिलाकर, इस बार के रिजल्ट ने साफ कर दिया कि संभावना स्कूल में बेटियों का जलवा कायम है और उन्होंने एक नई मिसाल पेश की है।</p>
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		<title>कश्मीर की नींव भी बिहार के सम्राट ने रखी थी !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bold-words-by-kshama-kaul-from-the-stage-of-rajgir/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 05:19:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजगीर के मंच से क्षमा कौल का इतिहास और वर्तमान पर बेबाक बयान संवाद और लोकतंत्र पर बोलते हुए मंच से छलका कश्मीरी लेखिका का दर्द कश्मीर से विस्थापन का दर्द भी साझा किया, बोलीं &#8211; मातृभूमि छिन जाए तो संवाद खोखला लगता है राजगीर, 16 मार्च (ओ पी पांडेय)। राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के एक सत्र में कश्मीरी लेखिका क्षमा कौल ने कश्मीर के इतिहास, लोकतंत्र और विस्थापन के दर्द पर बेहद बेबाक तरीके से अपनी बात रखी। “संवाद और लोकतंत्र” विषय पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक ऐतिहासिक तथ्य की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कश्मीर के श्रीनगर शहर की स्थापना सम्राट अशोक ने की थी, जिनकी राजधानी पाटलिपुत्र यानी आज का पटना था। उन्होंने कहा कि कश्मीर और बिहार का रिश्ता हजारों वर्ष पुराना है। सम्राट अशोक ने अपने पुत्र जालोक को कश्मीर का शासन सौंपा था, जिसने वहां शैव और बौद्ध दोनों परंपराओं को समान सम्मान दिया। उनके अनुसार यह इतिहास में धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक भावना का एक अद्भुत उदाहरण था, जिसे आज की पीढ़ी लगभग भूल चुकी है। लेखिका ने आदि शंकराचार्य, अभिनवगुप्त और जयंत भट्ट जैसे विद्वानों का उल्लेख करते हुए कश्मीर की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कभी ज्ञान और दर्शन की भूमि रहा कश्मीर आज विस्थापन और पीड़ा की कहानी बन गया है। लोकतंत्र और संवाद की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए क्षमा कौल का दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति से उसकी मातृभूमि और पहचान छिन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>राजगीर के मंच से क्षमा कौल का इतिहास और वर्तमान पर बेबाक बयान</strong></p>



<p><strong>संवाद और लोकतंत्र पर बोलते हुए मंच से छलका कश्मीरी लेखिका का दर्द</strong></p>



<p><strong>कश्मीर से विस्थापन का दर्द भी साझा किया, बोलीं &#8211; मातृभूमि छिन जाए तो संवाद खोखला लगता है</strong></p>



<p>राजगीर, 16 मार्च <strong>(ओ पी पांडेय</strong>)। राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के एक सत्र में कश्मीरी लेखिका क्षमा कौल ने कश्मीर के इतिहास, लोकतंत्र और विस्थापन के दर्द पर बेहद बेबाक तरीके से अपनी बात रखी। “संवाद और लोकतंत्र” विषय पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक ऐतिहासिक तथ्य की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कश्मीर के श्रीनगर शहर की स्थापना सम्राट अशोक ने की थी, जिनकी राजधानी पाटलिपुत्र यानी आज का पटना था।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1020" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-scaled.png" alt="" class="wp-image-95733" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-scaled.png 1020w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-647x650.png 647w" sizes="auto, (max-width: 1020px) 100vw, 1020px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि कश्मीर और बिहार का रिश्ता हजारों वर्ष पुराना है। सम्राट अशोक ने अपने पुत्र जालोक को कश्मीर का शासन सौंपा था, जिसने वहां शैव और बौद्ध दोनों परंपराओं को समान सम्मान दिया। उनके अनुसार यह इतिहास में धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक भावना का एक अद्भुत उदाहरण था, जिसे आज की पीढ़ी लगभग भूल चुकी है।</p>



<p>लेखिका ने आदि शंकराचार्य, अभिनवगुप्त और जयंत भट्ट जैसे विद्वानों का उल्लेख करते हुए कश्मीर की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कभी ज्ञान और दर्शन की भूमि रहा कश्मीर आज विस्थापन और पीड़ा की कहानी बन गया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95734" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p><br>लोकतंत्र और संवाद की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए क्षमा कौल का दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति से उसकी मातृभूमि और पहचान छिन जाती है तो केवल कागजी संवाद से न्याय नहीं मिलता। कश्मीर में हुए नरसंहार और विस्थापन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज कई कश्मीरी अपने ही देश में शरणार्थी की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं और उनके दर्द पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस तक नहीं हुई।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95735" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>इस दौरान उन्होंने बिहार की धरती को नमन करते हुए कहा कि यह भूमि ज्ञान, चिंतन और विमर्श की अनमोल धरोहर रही है। उनके अनुसार बिहारियों में बौद्धिक क्षमता और श्रम दोनों का अद्भुत संगम है।</p>



<p><br>इतिहास के संदर्भ में बताया गया कि सम्राट अशोक (268–232 ईसा पूर्व) के समय मगध साम्राज्य का केंद्र आज का बिहार था। उनकी राजधानी पाटलिपुत्र से संचालित यह विशाल साम्राज्य उत्तर में हिमालय की तराई, पूर्व में बंगाल क्षेत्र, पश्चिम में सोन नदी और दक्षिण में विंध्य पर्वतमाला तक फैला हुआ था। मौर्य काल में चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक के शासन में मगध का विस्तार उत्तर-पश्चिम में हिंदुकुश पर्वतों तक था, जिसमें आज के अफगानिस्तान के काबुल, कंधार और हेरात जैसे क्षेत्र भी शामिल थे।</p>



<p>इतिहासकारों के अनुसार कभी इतना विशाल और प्रभावशाली रहा मगध साम्राज्य आज कई प्रशासनिक हिस्सों में बंट चुका है। समय के साथ बिहार के भूभाग से अलग होकर कई नए राज्य और क्षेत्र बने।</p>



<p><br>मंच से यह भी संदेश दिया गया कि इतिहास के वैभव को केवल खंडहरों में बदलने देना किसी भी समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। आज भी प्राचीन विश्वविद्यालयों और सभ्यताओं के अवशेष मानो अपने गौरव की कहानी सुना रहे हैं, लेकिन उनके पुनरुद्धार और संरक्षण के बजाय अक्सर उन्हें केवल राजनीतिक बहस का विषय बना दिया जाता है।</p>



<p>वक्ताओं ने कहा कि जब तक साहित्य और चिंतन की परंपरा मजबूत नहीं होगी, तब तक इतिहास के गौरव को पुनर्जीवित करना कठिन है। साहित्य में समाज की सोच को बदलने और नई दिशा देने की ताकत होती है, इसलिए इतिहास और संस्कृति को पुनर्स्मरण कराने में साहित्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राजगीर में साहित्य का महाकुंभ: राष्ट्रवाद से क्षेत्रीय भाषाओं तक गूंजे विचार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/rajgir-me-sahitya-ka-mahakumb/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 05:01:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
		<category><![CDATA[Nalanda Intenational Litereture Festival]]></category>
		<category><![CDATA[NILF]]></category>
		<category><![CDATA[NILF2026]]></category>
		<category><![CDATA[oppandeyreport]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय साहित्य और संकट के समय लेखन पर गहन मंथन राजगीर में तीसरे दिन कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित, देशभर के लेखकों और विचारकों ने साहित्य, समाज और समकालीन चुनौतियों पर रखे विचार राजगीर, 15 मार्च। राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के तीसरे दिन साहित्य, राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय भाषाओं और संकट के समय लेखन की भूमिका जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लेखकों, विचारकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए समकालीन समाज और साहित्य के संबंधों पर महत्वपूर्ण विमर्श प्रस्तुत किया। राष्ट्रवाद पर गंभीर बहसदिन का पहला सत्र “क्या राष्ट्र को राष्ट्रवाद की आवश्यकता है या राष्ट्रवाद ही राष्ट्र को कमजोर बनाता है?” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें लेखक-चिंतक उदय माहूरकर और लेखिका लिपिका भूषण ने राष्ट्रवाद की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और सामूहिक चेतना से जुड़ा व्यापक विषय है। चर्चा के दौरान महात्मा गांधी के सेवा मॉडल, अहिंसा और सामाजिक समरसता जैसे सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वस्थ बहस की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव और अश्लील सामग्री के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की बात कही गई। कहानी केवल मनोरंजन नहीं, समाज का आईनादूसरे सत्र में “पर्दे पर कहानी कहने की कला: सिनेमा, डिजिटल मंच और साहित्य के माध्यम से बिहार की नई कल्पना” विषय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय साहित्य और संकट के समय लेखन पर गहन मंथन</strong></p>



<p><strong><em>राजगीर में तीसरे दिन कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित, देशभर के लेखकों और विचारकों ने साहित्य, समाज और समकालीन चुनौतियों पर रखे विचार</em></strong></p>



<p>राजगीर, 15 मार्च। राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के तीसरे दिन साहित्य, राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय भाषाओं और संकट के समय लेखन की भूमिका जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लेखकों, विचारकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए समकालीन समाज और साहित्य के संबंधों पर महत्वपूर्ण विमर्श प्रस्तुत किया।</p>



<p><strong>राष्ट्रवाद पर गंभीर बहस</strong><br>दिन का पहला सत्र “क्या राष्ट्र को राष्ट्रवाद की आवश्यकता है या राष्ट्रवाद ही राष्ट्र को कमजोर बनाता है?” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें लेखक-चिंतक उदय माहूरकर और लेखिका लिपिका भूषण ने राष्ट्रवाद की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95687" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और सामूहिक चेतना से जुड़ा व्यापक विषय है। चर्चा के दौरान महात्मा गांधी के सेवा मॉडल, अहिंसा और सामाजिक समरसता जैसे सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वस्थ बहस की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव और अश्लील सामग्री के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की बात कही गई।</p>



<p><strong>कहानी केवल मनोरंजन नहीं, समाज का आईना</strong><br>दूसरे सत्र में “पर्दे पर कहानी कहने की कला: सिनेमा, डिजिटल मंच और साहित्य के माध्यम से बिहार की नई कल्पना” विषय पर चर्चा हुई। इसमें अभिनेत्री और रंगमंच निर्देशक भाषा सुंभली तथा पटकथा लेखिका संध्या गोखले ने कहानी कहने की कला और उसकी सामाजिक जिम्मेदारी पर अपने विचार रखे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95688" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि कहानी कहना केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की वास्तविकताओं, विचारों और सच्चाइयों को सामने लाने का सशक्त साधन भी है। आज के दौर में चलचित्रों और डिजिटल मंचों का प्रभाव पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है, इसलिए रचनाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी हो जाती है।</p>



<p><strong>साहित्य समाज को देता है दिशा</strong><br>तीसरे सत्र “साहित्य समाज को कैसे आकार देता है” में लेखक शांतनु गुप्ता और लेखिका अमी गणात्रा ने साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच, मूल्यों और चेतना को दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। भारतीय ग्रंथों और परंपरागत ज्ञान में समाज को मार्गदर्शन देने की क्षमता निहित है, इसलिए नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना आवश्यक है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95690" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95689" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>क्षेत्रीय साहित्य का बढ़ता विस्तार</strong><br>दोपहर के बाद आयोजित सत्र “समकालीन लेखन और क्षेत्रीय कथाओं का भविष्य” में ओड़िया लेखक, आलोचक और कवि मनोरंजन दास, लेखिका-इतिहासकार सुमेधा वर्मा और लेखक-कवि नीलोत्त्पल मृणाल ने अपने विचार साझा किए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95683" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि प्रगतिशील होने का अर्थ अपनी जड़ों और स्थानीय अनुभवों से दूरी बनाना नहीं है। क्षेत्रीय साहित्य समाज की वास्तविकताओं, संस्कृति और लोक जीवन को सामने लाने का सशक्त माध्यम है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95693" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>चर्चा में यह भी कहा गया कि समय के साथ साहित्य की विषयवस्तु, पाठक वर्ग और उसे पढ़ने-समझने के तरीके बदल रहे हैं। अनुवाद और डिजिटल माध्यमों के कारण क्षेत्रीय साहित्य अब व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँच रहा है। नीलोत्पल मृणाल, जो अपने चर्चित उपन्यास डार्क हॉर्स, औघड़ और युवा जादूगर के लिए जाने जाते हैं, को साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।</p>



<p><strong>संकट के समय लेखन बना प्रतिरोध की आवाज</strong><br>अंतिम सत्र “संकट के समय लेखन: प्रतिरोध के रूप में साहित्य” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नितेश्वर कुमार, लेखक मृत्युंजय शर्मा और लेखक-शिक्षाविद जितेंद्र कुमार शर्मा ने अपने विचार रखे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95686" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में लेखन केवल व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज के सामूहिक संघर्ष, पीड़ा और आकांक्षाओं की आवाज बन जाता है। साहित्य कई बार सामाजिक चेतना जगाने और परिवर्तन की दिशा देने का माध्यम बनता है।</p>



<p><strong>कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक संध्या ने बांधा समां</strong><br>दिन के अंत में आयोजित कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक संध्या ने पूरे वातावरण को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया। कवि संजीव कुमार मुकेश, नीलोत्त्पल मृणाल, श्रीपति गुप्ता और कवयित्री तिश्या श्री ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95691" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-650x488.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रैपर स्लो चीता की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी। उनकी प्रस्तुति ने विशेष रूप से युवाओं को आकर्षित किया और साहित्य तथा संगीत के इस अनूठे संगम ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नालंदा की धरती पर लौटा ज्ञान का उत्सव, राजगीर में सजा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल 2026</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sahitya-se-saja-nalanda-ki-dharti/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 13:23:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
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		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[नालंदा की विरासत के संग सजा ‘लिट भी और लिट्टी भी’, राजगीर में शुरू हुआ इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल देशभर के साहित्यकारों ने जलाया ज्ञान का दीप, 12 से 15 मार्च तक इतिहास, साहित्य और संस्कृति पर होंगे सत्र राजगीर, 12 मार्च। नालंदा की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल 2026 का उद्घाटन राजगीर स्थित कन्वेंशन सेंटर के ओपन मंच पर भव्य तरीके से किया गया। 12-15 मार्च तक चलने वाले इस लिटरेचर कार्यक्रम का शुभारंभ देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों और विद्वानों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर अजय सिंह(राष्ट्रपति के पूर्व प्रेस सलाहकार), ओम थानवी(जनसत्ता के पूर्व एडिटर), अजय ब्रह्मात्मज(सिनेमा साहित्य के दिग्गज लेखक ), डॉ. कविता शर्मा (पूर्व प्राचार्य, हिंदू कॉलेज), आकाश पसरीचा, डॉ. आनंद सिंह (सीनियर प्रोफेसर), संजीव मुकेश, पंकज कुमार, गगन, निर्मल वैद्य, वैशाली सत्ता, अदिति नंदन और शैलेश कुमार समेत कई साहित्यिक हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में ज्ञान निकेतन की छात्राओं ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि डॉ. कविता शर्मा, आकाश पसरीचा और डॉ. आनंद सिंह जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों ने नालंदा पर महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखकर इस ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया है। वहीं नालंदा कॉलेज के प्राचार्य सत्र के पहले पैनल में पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए। मंच संचालन बिहार के चर्चित उद्घोषक शैलेश कुमार ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा,“इस बिहार की पावन धरती, इस नालंदा की धरा पर आप सभी का हार्दिक स्वागत है। मुझे मंच संचालन की जिम्मेदारी मिली है, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नालंदा की विरासत के संग सजा ‘लिट भी और लिट्टी भी’, राजगीर में शुरू हुआ इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल</strong><br><br><strong>देशभर के साहित्यकारों ने जलाया ज्ञान का दीप, 12 से 15 मार्च तक इतिहास, साहित्य और संस्कृति पर होंगे सत्र</strong></p>



<p>राजगीर, 12 मार्च। नालंदा की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल 2026 का उद्घाटन राजगीर स्थित कन्वेंशन सेंटर के ओपन मंच पर भव्य तरीके से किया गया। 12-15 मार्च तक चलने वाले इस लिटरेचर कार्यक्रम का शुभारंभ देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों और विद्वानों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="462" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097273-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95623" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097273-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097273-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097273-1536x694.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097273-2048x925.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p>इस अवसर पर अजय सिंह(राष्ट्रपति के पूर्व प्रेस सलाहकार), ओम थानवी(जनसत्ता के पूर्व एडिटर), अजय ब्रह्मात्मज(सिनेमा साहित्य के दिग्गज लेखक ), डॉ. कविता शर्मा (पूर्व प्राचार्य, हिंदू कॉलेज), आकाश पसरीचा, डॉ. आनंद सिंह (सीनियर प्रोफेसर), संजीव मुकेश, पंकज कुमार, गगन, निर्मल वैद्य, वैशाली सत्ता, अदिति नंदन और शैलेश कुमार समेत कई साहित्यिक हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में ज्ञान निकेतन की छात्राओं ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="462" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097299-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95616" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097299-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097299-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097299-1536x694.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097299-2048x925.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि डॉ. कविता शर्मा, आकाश पसरीचा और डॉ. आनंद सिंह जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों ने नालंदा पर महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखकर इस ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया है। वहीं नालंदा कॉलेज के प्राचार्य सत्र के पहले पैनल में पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="462" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097300-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95617" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097300-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097300-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097300-1536x694.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097300-2048x925.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>मंच संचालन बिहार के चर्चित उद्घोषक शैलेश कुमार ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा,“इस बिहार की पावन धरती, इस नालंदा की धरा पर आप सभी का हार्दिक स्वागत है। मुझे मंच संचालन की जिम्मेदारी मिली है, लेकिन मेरे सामने बैठे लोग मुझसे कहीं अधिक विद्वान और अपने आप में प्रकाश स्तंभ हैं। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल 2026, जिसे अमात्य फाउंडेशन ने आपके बीच समर्पित किया है, हमें धीरे-धीरे उस काल की ओर ले जाने का प्रयास कर रहा है, जब पाँचवीं शताब्दी में नालंदा में जमीन पर इसी तरह बैठकर ज्ञान की चर्चा और अध्ययन हुआ करता था। आज हम उसी परंपरा को फिर से जीवंत करने का प्रयास कर रहे हैं।”</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097272-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95624" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097272-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097272-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097272-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="744" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097309-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95618" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097309-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097309-650x473.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने अमात्य फाउंडेशन की टीम की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह किसी उजड़े हुए गांव को कुछ उत्साही लोग फिर से संवारने का प्रयास करते हैं, उसी तरह वैशाली सत्ता, अदिति नंदन और दिव्या भारद्वाज की टीम ने इस फेस्टिवल की परिकल्पना को साकार किया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="752" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097310-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95619" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097310-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097310-650x477.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के दौरान बिहार की साहित्यिक परंपरा का भी उल्लेख हुआ। उन्होंने पुराने दिनों की बात को याद करते हुए कहा कि एक बार नेहरू जी जब सीढी चढ़ते हुए लड़खड़ाए तो राष्ट्रकवि दिनकर ने उन्हें संभालते हुए कहा कि जब राजनीति लड़खड़ाती है तो साहित्य समाज को संभालने का काम करता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="881" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097314-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95625" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097314-scaled.jpg 881w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097314-559x650.jpg 559w" sizes="auto, (max-width: 881px) 100vw, 881px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="764" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097311-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95620" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097311-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097311-650x485.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इसी धरती ने वीर कुंवर सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानी और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे महान व्यक्तित्व दिए हैं। फेस्टिवल का टैगलाइन “Lit भी और Litti भी” खास आकर्षण का केंद्र रहा, जो बिहार की साहित्यिक समृद्धि के साथ-साथ यहां के प्रसिद्ध व्यंजन लिट्टी-चोखा की पहचान को भी दर्शाता है। इस फेस्टिवल में आने वाले सारे अतिथियों को बिहार की खास व्यंजनों को खास बिहारी शेफ़ो द्वारा परोसा भी जाएगा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="578" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097312-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95621" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097312-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097312-650x367.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097312-1536x868.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस मौके पर लेखिका वैशाली सेता ने अपने नाम से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि मुंबई में जन्मी और गुजरात से जुड़ी होने के कारण बचपन में उन्हें अपने नाम “वैशाली” से चिढ़ होती थी, क्योंकि महाराष्ट्र में कई कैफे का नाम भी वैशाली होता है। लेकिन 2007 में अदिति नंदन के संपर्क में आने और बिहार आने के बाद उन्हें पता चला कि विश्व के पहले गणराज्य का नाम वैशाली था। ये जानने के बाद उन्हें अपने नाम प्यार हो गया और इसके बाद इस गौरवशाली गणराज्य के पन्नो को उन्होंने बिहार के कोने कोने से खोजना शुरू किया। उनके दोस्त अदिति नंदन और कई लोगों ने मिलकर काम करना शुरू किया ताकि बिहार के उस गौरव को फिर से दुनिया में फैले सारे बिहार एक मंच पर आकर सार्थक के सकें। तब से लगातार वे बिहार में हीं हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="577" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097313-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95622" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097313-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097313-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097313-1536x866.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि आज जिस परिसर में यह लिटरेचर फेस्टिवल हो रहा है, वहां कार्यक्रम होते देखना उनके लिए भावुक क्षण है। उन्होंने बताया कि बिहार ज्ञान और इतिहास की धरती है, जहां करीब 400 स्थानों पर आदि मानवों द्वारा बनाए गए शैलचित्र मौजूद हैं, जिन्हें उन्होंने बिहार सरकार को सौंपकर धरोहर के रूप में संरक्षित करने की पहल की है। फेस्टिवल के पहले दिन साहित्य, इतिहास और संस्कृति से जुड़े कई सत्रों में देशभर से आए विद्वानों ने अपने विचार साझा किए.</p>



<p><strong><em>ओपी पांडे </em></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>8 अरब 69 करोड़ का बजट पास… लेकिन वीकेएसयू के छात्रों की नौकरी कहाँ?</title>
		<link>https://www.patnanow.com/8-69-billion-approved-yet-students-ask-where-is-the-benefit/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 07:11:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACADEMIC]]></category>
		<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[सीनेट बैठक के बीच आइसा का घेराव, छात्रों ने पूछा &#8211; अरबों खर्च के बाद भी सुविधाएँ क्यों नहीं? आरा,12 मार्च (ओ पी पाण्डेय ). वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में एक तरफ वर्ष 2026–27 के लिए 8 अरब 69 करोड़ रुपये से अधिक का बजट पास हुआ, वहीं दूसरी ओर छात्रों ने इस बजट की उपयोगिता पर सवाल खड़ा कर दिया. सीनेट की बैठक जहां विकास योजनाओं और शैक्षणिक सुधारों के दावों के साथ संपन्न हुई, वहीं परिसर के बाहर छात्र संगठन आइसा ने 21 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन और सीनेट का घेराव किया. छात्र नेताओं का कहना है कि हर साल विश्वविद्यालय का बजट करोड़ों-अरबों में बनता है, लेकिन जमीनी स्तर पर छात्रों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।बजट अरबों का, लेकिन छात्रों को नहीं मिल रहा लाभ. आइसा के बिहार राज्य सचिव सब्बीर कुमार ने कहा किहर साल विश्वविद्यालय का बजट करोड़ों-अरबों में पास होता है, लेकिन छात्रों को बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं मिलतीं। कई सत्रों की फेलोशिप लंबित है, प्रयोगशालाएँ जर्जर हैं और कई कॉलेजों में छात्राओं के लिए सेनेटरी पैड तक की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र-विरोधी बजट का आइसा विरोध करता है और इसे छात्रों के हित में सुधारने की जरूरत है। सीनेट का घेराव, नारों से गूंजा कैंपसबुधवार को आइसा के नेतृत्व में जीरो माइल से विरोध मार्च निकाला गया, जो विश्वविद्यालय कैंपस पहुंचकर सीनेट बैठक स्थल तक गया। इस दौरान छात्र “नई शिक्षा नीति वापस लो”, “सीबीसीएस नहीं चलेगा”, “छात्र संघ चुनाव कराओ” [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>सीनेट बैठक के बीच आइसा का घेराव, छात्रों ने पूछा &#8211; अरबों खर्च के बाद भी सुविधाएँ क्यों नहीं?</strong></p>



<p>आरा,12 मार्च (<strong>ओ पी पाण्डेय</strong> ). वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में एक तरफ वर्ष 2026–27 के लिए 8 अरब 69 करोड़ रुपये से अधिक का बजट पास हुआ, वहीं दूसरी ओर छात्रों ने इस बजट की उपयोगिता पर सवाल खड़ा कर दिया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="598" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096319-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95602" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096319-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096319-650x380.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096319-1536x898.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p>सीनेट की बैठक जहां विकास योजनाओं और शैक्षणिक सुधारों के दावों के साथ संपन्न हुई, वहीं परिसर के बाहर छात्र संगठन आइसा ने 21 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन और सीनेट का घेराव किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="566" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096321-scaled.png" alt="" class="wp-image-95604" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096321-scaled.png 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096321-650x359.png 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p>छात्र नेताओं का कहना है कि हर साल विश्वविद्यालय का बजट करोड़ों-अरबों में बनता है, लेकिन जमीनी स्तर पर छात्रों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।<br>बजट अरबों का, लेकिन छात्रों को नहीं मिल रहा लाभ. आइसा के बिहार राज्य सचिव सब्बीर कुमार ने कहा कि<br>हर साल विश्वविद्यालय का बजट करोड़ों-अरबों में पास होता है, लेकिन छात्रों को बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं मिलतीं। कई सत्रों की फेलोशिप लंबित है, प्रयोगशालाएँ जर्जर हैं और कई कॉलेजों में छात्राओं के लिए सेनेटरी पैड तक की व्यवस्था नहीं है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096271-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95598" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096271-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096271-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096271-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096271-2048x1152.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि छात्र-विरोधी बजट का आइसा विरोध करता है और इसे छात्रों के हित में सुधारने की जरूरत है।</p>



<p><strong>सीनेट का घेराव, नारों से गूंजा कैंपस</strong><br>बुधवार को आइसा के नेतृत्व में जीरो माइल से विरोध मार्च निकाला गया, जो विश्वविद्यालय कैंपस पहुंचकर सीनेट बैठक स्थल तक गया। इस दौरान छात्र “नई शिक्षा नीति वापस लो”, “सीबीसीएस नहीं चलेगा”, “छात्र संघ चुनाव कराओ” और “एकेडमिक कैलेंडर लागू करो” जैसे नारों के साथ प्रदर्शन करते रहे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096267-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95599" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096267-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096267-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096267-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096267-2048x1152.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>सीनेट प्रतिनिधियों और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिसके बाद आइसा प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों का ज्ञापन परीक्षा नियंत्रक को सौंपा. विश्वविद्यालय प्रशासन ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096272-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95597" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096272-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096272-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096272-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096272-2048x1152.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>21 मांगों को लेकर आंदोलन</strong><br>आइसा जिला सचिव विकास कुमार ने कहा कि घेराव विश्वविद्यालय की 21 सूत्री मांगों को लेकर किया गया.<br>इनमें प्रमुख मांगें हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>विश्वविद्यालय में सरकारी डेटा बैंक की स्थापना</li>



<li>छात्रों के लिए परिवहन सुविधा</li>



<li>छात्राओं के लिए कॉमन रूम</li>



<li>सभी कॉलेजों में छात्रावास</li>



<li>मूल प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन व डाक से भेजने की व्यवस्था</li>



<li>त्रुटिपूर्ण अंक पत्र सुधार के लिए तय तिथि</li>



<li>उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।</li>
</ul>



<p><strong>बड़ा सवाल</strong><br>सीनेट बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन ने विकास, तकनीकी सुधार और नए कोर्स शुरू करने की योजनाओं की बात कही. लेकिन छात्रों के प्रदर्शन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब बजट 8 अरब से ज्यादा है, तो क्या विश्वविद्यालय से पढ़ने वाले युवाओं को बेहतर शिक्षा, सुविधाएँ और रोजगार के अवसर मिल पा रहे हैं?</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>लोक परंपराओं के रंग में रंगा होली मिलन, एक परिवार की तरह जुटे सदस्य</title>
		<link>https://www.patnanow.com/holi-milan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 10:15:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
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					<description><![CDATA[आरा, 28 फरवरी। शहर के लोगों को स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन प्रेरित करने वाले सनातन योग संस्थान आरा द्वारा शुक्रवार देर रात मिश्र टोला में भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पारंपरिक फगुआ गीतों की मधुर प्रस्तुति ने पूरे माहौल को उत्सवी रंगों से सराबोर कर दिया। होली मिलन के इस कार्यक्रम में आने वाले सभी लोगों को भोजपुर की शान गमछा से सम्मानित किया गया। समारोह में गायक विशेश्वर लाल सिन्हा ने अपनी मधुर आवाज में पारंपरिक होली गीत प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग-अबीर के साथ संस्थान की ओर से होली के पारंपरिक मिष्ठान मालपुआ और ठंडई की भी विशेष व्यवस्था की गई थी। बताया गया कि संस्थान के सदस्य पूरे वर्ष रमना मैदान में नियमित योगाभ्यास करते हैं। मौसम चाहे जाड़ा हो, गर्मी या बरसात, सभी सदस्य एक परिवार की तरह मिलकर हर छोटे-बड़े त्योहार और लोक परंपरा को उत्साह के साथ मनाते हैं। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और बच्चियों ने भी “रंग बरसे चुनरिया अंगना में”, “पीछे ली हरदिया ब्रिज में होली खेले रंग रसिया” सहित कई पारंपरिक और लोक गीत प्रस्तुत कर सबका दिल जीत लिया। अंत में सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर आशीर्वाद और शुभकामनाएं दीं। संस्थान लोक परंपराओं के संरक्षण और उन्हें जीवित रखने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। खास बात यह है कि इसमें अधिकांश सदस्य सेवानिवृत्त लोग हैं, जिनके साथ उनकी पूरी पारिवारिक भागीदारी भी देखने को मिलती है। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे इस अवसर पर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आरा, 28 फरवरी। शहर के लोगों को स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन प्रेरित करने वाले सनातन योग संस्थान आरा द्वारा शुक्रवार देर रात मिश्र टोला में भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पारंपरिक फगुआ गीतों की मधुर प्रस्तुति ने पूरे माहौल को उत्सवी रंगों से सराबोर कर दिया। होली मिलन के इस कार्यक्रम में आने वाले सभी लोगों को भोजपुर की शान गमछा से सम्मानित किया गया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="771" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045456-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95366" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045456-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045456-650x489.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045456-1536x1157.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045456-2048x1542.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>समारोह में गायक विशेश्वर लाल सिन्हा ने अपनी मधुर आवाज में पारंपरिक होली गीत प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग-अबीर के साथ संस्थान की ओर से होली के पारंपरिक मिष्ठान मालपुआ और ठंडई की भी विशेष व्यवस्था की गई थी।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045454-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95367" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045454-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045454-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045454-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045454-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>बताया गया कि संस्थान के सदस्य पूरे वर्ष रमना मैदान में नियमित योगाभ्यास करते हैं। मौसम चाहे जाड़ा हो, गर्मी या बरसात, सभी सदस्य एक परिवार की तरह मिलकर हर छोटे-बड़े त्योहार और लोक परंपरा को उत्साह के साथ मनाते हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045451-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95368" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045451-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045451-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045451-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045451-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और बच्चियों ने भी “रंग बरसे चुनरिया अंगना में”, “पीछे ली हरदिया ब्रिज में होली खेले रंग रसिया” सहित कई पारंपरिक और लोक गीत प्रस्तुत कर सबका दिल जीत लिया। अंत में सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर आशीर्वाद और शुभकामनाएं दीं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045452-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95369" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045452-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045452-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045452-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001045452-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>संस्थान लोक परंपराओं के संरक्षण और उन्हें जीवित रखने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। खास बात यह है कि इसमें अधिकांश सदस्य सेवानिवृत्त लोग हैं, जिनके साथ उनकी पूरी पारिवारिक भागीदारी भी देखने को मिलती है।</p>



<p><strong>कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे</strong></p>



<p>इस अवसर पर अध्यक्ष विनय ओझा, सचिव विशेश्वर लाल सिन्हा, कोषाध्यक्ष जीतन पाण्डेय, अजय कुमार, अशोक सिंह, लाल सिंह, सुमेश्वर लाल, विजय सिंह, राधामोहन मिश्रा, अनिल सिंह, प्रीति, विभा, मनीषा, रूपा, जया, पलक, साधुआईन, पुष्पा, बेबी और कंचन वर्मा सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।</p>



<p>इस अवसर पर आरा में पारंपरिक होली की खुशबू, लोकगीतों की मधुरता और सामूहिक उत्साह का सुंदर संगम देखने को मिला।</p>



<p><strong>PNCB</strong> </p>
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			</item>
		<item>
		<title>भय बनी परीक्षा ने ली एक छात्रा की जान</title>
		<link>https://www.patnanow.com/exam-fear-tragic-sucide-in-ara/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:36:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACADEMIC]]></category>
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					<description><![CDATA[डर, दबाव और सन्नाटा… एक छात्रा की आखिरी रात क्या परीक्षा अब बच्चों के लिए भय का नाम बन गई है? आरा, 20 फरवरी। बिहार के आरा शहर से आई एक दर्दनाक घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। परीक्षा की तैयारी में जुटी एक इंटर की छात्रा ने उस मानसिक दबाव से हार मान ली, जिसे अक्सर हम “सामान्य तनाव” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं… बल्कि उस बढ़ते परीक्षा-दबाव का आईना है, जो आज हजारों छात्रों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है। एक होनहार छात्रा… अधूरी रह गई कहानीक्लब रोड निवासी Indian Railways में कार्यरत पिता सतीश पाण्डेय और गृहिणी माता पिंकी पाण्डेय की दूसरी बेटी अनन्या, जिसे घर में प्यार से “गौरी” कहा जाता था, पढ़ाई में लगी थी. अनन्या DAV जगदीशपुर की इंटर की छात्रा थी जिसका एक्जाम सेंटर सोनवर्षा के MDJ कॉलेज में पड़ा था. 18 फरवरी को वह मोरल साइंस का पेपर दे चुकी थी और पेपर अच्छा भी गया था। लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था… वह बीमार थी, जॉन्डिस से परेशान थी… और शुक्रवार 20 फरवरी को फिजिक्स का पेपर था. रात को पढ़ाई करते-करते उसने जीवन से ही हार मान ली. जब मां रात करीब 1 बजे देखने गईं तो कमरे से कोई जवाब नहीं आया… दरवाजा तोड़ा गया… और सामने ऐसा दृश्य था जिसे कोई भी परिवार कभी देखना नहीं चाहेगा. स्टडी रूम में अनन्या पंखे से दुपट्टे में झूलती एक अतीत बन चुकी थी. टेबल पर रखा था [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>डर, दबाव और सन्नाटा… एक छात्रा की आखिरी रात</strong></p>



<p><strong>क्या परीक्षा अब बच्चों के लिए भय का नाम बन गई है?</strong></p>



<p>आरा, 20 फरवरी। बिहार के आरा शहर से आई एक दर्दनाक घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। परीक्षा की तैयारी में जुटी एक इंटर की छात्रा ने उस मानसिक दबाव से हार मान ली, जिसे अक्सर हम “सामान्य तनाव” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं… बल्कि उस बढ़ते परीक्षा-दबाव का आईना है, जो आज हजारों छात्रों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है।</p>



<p><strong>एक होनहार छात्रा… अधूरी रह गई कहानी</strong><br>क्लब रोड निवासी Indian Railways में कार्यरत पिता सतीश पाण्डेय और गृहिणी माता पिंकी पाण्डेय की दूसरी बेटी अनन्या, जिसे घर में प्यार से “गौरी” कहा जाता था, पढ़ाई में लगी थी. अनन्या DAV जगदीशपुर की इंटर की छात्रा थी जिसका एक्जाम सेंटर सोनवर्षा के MDJ कॉलेज में पड़ा था.</p>



<p>18 फरवरी को वह मोरल साइंस का पेपर दे चुकी थी और पेपर अच्छा भी गया था। लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था… वह बीमार थी, जॉन्डिस से परेशान थी… और शुक्रवार 20 फरवरी को फिजिक्स का पेपर था. रात को पढ़ाई करते-करते उसने जीवन से ही हार मान ली. जब मां रात करीब 1 बजे देखने गईं तो कमरे से कोई जवाब नहीं आया… दरवाजा तोड़ा गया… और सामने ऐसा दृश्य था जिसे कोई भी परिवार कभी देखना नहीं चाहेगा. स्टडी रूम में अनन्या पंखे से दुपट्टे में झूलती एक अतीत बन चुकी थी. टेबल पर रखा था एक छोटा सा सुसाइड नोट, जिसमें परीक्षा, बीमारी और खुद को बोझ समझने की पीड़ा साफ झलक रही थी.</p>



<p><strong>सुसाइड नोट में क्या लिखा</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="859" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015800-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95107" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015800-scaled.jpg 859w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015800-545x650.jpg 545w" sizes="auto, (max-width: 859px) 100vw, 859px" /></figure>



<p>मेरे से नहीं होश है अब। मैं एग्जाम नहीं दे पाऊंगी मेरा बोर्ड्स है मेरी तबीयत ही खराब रहती है हमेशा। सब मेरी गलती है। मेरे चलते मेरे पेरेंट्स परेशान है बट हो गया… अब और नहीं… मैं जा रही हूं और किसी के चलते नहीं खुद से जा रही हूं। मम्मी डैडी अपना ध्यान रखिएगा। दीदी बाबू तुम भी…</p>



<p>बाय<br>अनन्या/ गौरी</p>



<p><strong>एक सुसाइड नोट… और हजार सवाल</strong><br>अपने छोड़े सुसाइड नोट में उसने लिखा था कि वह बीमार रहती है… परीक्षा नहीं दे पाएगी… माता-पिता परेशान हैं… और वह किसी के कारण नहीं, खुद से यह कदम उठा रही है।</p>



<p>यह शब्द सिर्फ एक छात्रा की निराशा नहीं… बल्कि उस अदृश्य डर की आवाज हैं। फेल होने का डर… पीछे छूट जाने का डर… और उम्मीदों पर खरा न उतर पाने का डर।</p>



<p><strong>क्या परीक्षा अब डर का दूसरा नाम बन गई है?</strong><br>आज परीक्षा सिर्फ ज्ञान की नहीं… मानसिक सहनशीलता की भी परीक्षा बनती जा रही है। देर से पहुंचने पर केंद्र में प्रवेश नहीं, ट्रैफिक जाम या स्वास्थ्य समस्या की कोई राहत नहीं,“एक मौका चूक गए… तो साल बर्बाद” की मानसिकता इन परिस्थितियों में छात्र परीक्षा को अवसर नहीं… अंतिम निर्णय की तरह देखने लगते हैं।</p>



<p>हाल ही में मसौढ़ी में भी परीक्षा से जुड़ी निराशा के कारण एक बच्ची ने ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी। दो अलग घटनाएं… लेकिन कारण एक परीक्षा का असहनीय दबाव।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="593" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95108" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-650x377.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-1536x890.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अनन्या के पिता रोते हुए सिर्फ इतना कह पाए -“हमने कभी उस पर पढ़ाई का दबाव नहीं बनाया… समझ ही नहीं पाए कि उसने ऐसा क्यों किया…”यही सबसे बड़ा सवाल है &#8211; बच्चे कब चुपचाप टूट जाते हैं… हमें पता ही नहीं चलता।</p>



<p><strong>विशेषज्ञ क्या कहते हैं?</strong><br>मनोवैज्ञानिकों के अनुसार परीक्षा तनाव के प्रमुख कारण:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>असफलता का भय</li>



<li>स्वास्थ्य समस्याओं के साथ पढ़ाई का दबाव</li>



<li>“परफेक्ट होना ही पड़ेगा” की सोच</li>



<li>तुलना और सामाजिक अपेक्षाएं</li>



<li>एक ही परीक्षा को जीवन का फैसला मान लेना<br>जब इन सबके साथ कठोर परीक्षा नियम जुड़ते हैं, तो संवेदनशील बच्चे इसे जीवन-मरण का प्रश्न मान लेते हैं।</li>
</ul>



<p>“फेल होना जीवन की हार नहीं” यह संदेश सभी को देना चाहिए। क्या हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं… या उन्हें डरना सिखा रहे हैं? एक छात्रा चली गई… लेकिन पीछे छोड़ गई चेतावनी । परीक्षा से ज्यादा जरूरी है जीवन। यदि आपके घर में भी परीक्षार्थी है तो ध्यान रखें</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>उनसे रोज खुलकर बात करें</li>



<li>सिर्फ रिजल्ट नहीं, उनकी भावनाएं पूछें</li>



<li>बीमारी या थकान को हल्के में न लें</li>



<li>तुलना बिल्कुल न करें</li>



<li>जरूरत हो तो काउंसलिंग लें</li>
</ul>



<p>जरूरत क्या है ..सख्ती या संवेदनशीलता?<br>परीक्षा अनुशासन जरूरी है… लेकिन क्या मानवीय परिस्थितियों के लिए लचीलापन नहीं होना चाहिए?<br>बीमारी या आकस्मिक स्थिति में वैकल्पिक परीक्षा,<br>देर से आने पर सीमित समय के साथ प्रवेश और<br>स्कूल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग जैसे कार्य किए जा सकते हैं।</p>



<p>अनन्या की कहानी सिर्फ एक खबर नहीं…यह एक समाज की जिम्मेदारी है। जब परीक्षा डर बन जाए<br>तो किताबें नहीं… व्यवस्था बदलने की जरूरत होती है।</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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	</channel>
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