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	<title>Patna highcourt &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>सरप्लस टीचर्स को राहत, हाइकोर्ट ने लगाया &#8216;स्टेटस को&#8217;, खटाई में पड़ सकती है पूरी प्रक्रिया</title>
		<link>https://www.patnanow.com/surplus-teachers-update/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 17:33:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
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		<category><![CDATA[Patna highcourt]]></category>
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					<description><![CDATA[सरप्लस शिक्षक मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश, अगली सुनवाई 21 सितंबर को पटना। बिहार के हजारों सरप्लस करार दिए गए टीचर्स को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. विशेष रूप से ऐसे सीनियर और सबसे जूनियर टीचर्स, जिन्हें शिक्षा विभाग के नए प्रावधान के तहत सरप्लस की श्रेणी में डाल दिया गया था और उन्हें इस बात का अंदेशा था कि सरकार आज नहीं तो कल जबरन उनका ट्रांसफर करेगी. हाईकोर्ट ने सोमवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए सरकार से जवाबी हलफनामा मांगा है. इस मामले में चार हफ्ते बाद अगली सुनवाई होगी. तब तक कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है. इस आदेश के बाद अब जो शिक्षक जिस स्थान पर कार्यरत हैं, वे फिलहाल वहीं बने रहेंगे. ये आदेश जस्टिस जीत कुमार की एकल पीठ ने याचिका संख्या CWJC 12326/2026 पर सुनवाई करते हुए पारित किया. सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मामले की अगली स्थिति स्पष्ट होने तक &#8220;जो शिक्षक जहां हैं, वहीं रहेंगे.&#8221; कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता ललित किशोर और अधिवक्ता मृत्युंजय कुमार सिंह ने रखा. अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि सरप्लस के नाम पर किए जा रहे स्थानांतरण की प्रक्रिया में कई विसंगतियां हैं, जिससे शिक्षकों को काफी मानसिक और व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने शिक्षकों के हित को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाने के समतुल्य &#8216;स्टेटस को&#8217; का निर्देश जारी किया. हालांकि इस मामले में ऐसे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सरप्लस शिक्षक मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश, अगली सुनवाई 21 सितंबर को </strong></p>



<p><strong>पटना।</strong> बिहार के हजारों सरप्लस करार दिए गए टीचर्स को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. विशेष रूप से ऐसे सीनियर और सबसे जूनियर टीचर्स, जिन्हें शिक्षा विभाग के नए प्रावधान के तहत सरप्लस की श्रेणी में डाल दिया गया था और उन्हें इस बात का अंदेशा था कि सरकार आज नहीं तो कल जबरन उनका ट्रांसफर करेगी. हाईकोर्ट ने सोमवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए सरकार से जवाबी हलफनामा मांगा है. इस मामले में चार हफ्ते बाद अगली सुनवाई होगी. तब तक कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है. इस आदेश के बाद अब जो शिक्षक जिस स्थान पर कार्यरत हैं, वे फिलहाल वहीं बने रहेंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/08/pnc-highcourt-stay-on-surplus-teacher-case-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-98566" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/08/pnc-highcourt-stay-on-surplus-teacher-case-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/08/pnc-highcourt-stay-on-surplus-teacher-case-650x488.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>ये आदेश जस्टिस जीत कुमार की एकल पीठ ने याचिका संख्या CWJC 12326/2026 पर सुनवाई करते हुए पारित किया. सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मामले की अगली स्थिति स्पष्ट होने तक &#8220;जो शिक्षक जहां हैं, वहीं रहेंगे.&#8221;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="922" height="614" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/08/pnc-highcourt-status-quo-on-surplus-teacher.png" alt="" class="wp-image-98585" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/08/pnc-highcourt-status-quo-on-surplus-teacher.png 922w, https://www.patnanow.com/assets/2026/08/pnc-highcourt-status-quo-on-surplus-teacher-650x433.png 650w" sizes="(max-width: 922px) 100vw, 922px" /></figure>



<p>कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता ललित किशोर और अधिवक्ता मृत्युंजय कुमार सिंह ने रखा. अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि सरप्लस के नाम पर किए जा रहे स्थानांतरण की प्रक्रिया में कई विसंगतियां हैं, जिससे शिक्षकों को काफी मानसिक और व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने शिक्षकों के हित को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाने के समतुल्य &#8216;स्टेटस को&#8217; का निर्देश जारी किया. हालांकि इस मामले में ऐसे शिक्षकों की मुश्किल बढ़ गई है जो वर्षों से ट्रांसफर का इंतजार कर रहे थे. सरप्लस टीचर्स ऐच्छिक होने के बावजूद 71000 से अधिक शिक्षकों ने अप्लाई किया है. लेकिन विवाद की जड़ विभाग की वो शर्तें हैं जिनके आधार पर उन्हें सरप्लस घोषित कर दिया गया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="455" height="403" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/08/pnc-advocate-Mrityunjay-Kumar.jpg" alt="" class="wp-image-98602"/></figure>



<p>Adv. Mrityunjay Kumar <br>पटना हाईकोर्ट के इस फैसले से राज्यभर के उन हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है, जो सरप्लस सूची और संभावित जबरन तबादलों को लेकर तनाव में थे. आशंका है कि इस आदेश के बाद 17 सितंबर से शुरू होने वाली सामान्य ट्रांसफर प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है. दरअसल शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी शुरू से यह कहते आ रहे हैं कि पहले सरप्लस टीचर्स का तबादला करेंगे उसके बाद ही सामान्य ट्रांसफर की प्रक्रिया होगी. हर स्कूल में जब सरप्लस टीचर्स हैं तो फिर सामान्य टीचर्स कहां जाएंगे. और यही वजह है कि अगर सरप्लस टीचर्स का मामला लटका तो फिर सामान्य तबादले की प्रक्रिया कैसे पूरी होगी, इस पर शिक्षा विभाग को फिर से सोंचना पड़ सकता है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>सरकार के अड़ियल रवैए से लटकी शिक्षकों की ट्रांसफर- पोस्टिंग</title>
		<link>https://www.patnanow.com/stay-on-teacher-transfer/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Nov 2024 17:19:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[जॉब/करियर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Patna highcourt]]></category>
		<category><![CDATA[Teacher transfer]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना हाइकोर्ट ने ट्रांसफर प्रक्रिया पर रोक लगाई सरकार ने ट्रांसफर प्रक्रिया स्थगित की पटना।। शिक्षा विभाग के अड़ियल रवैए की वजह से शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रक्रिया लटक गई है. पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को ट्रांसफर पोस्टिंग पर रोक लगा दी है. इधर हाईकोर्ट के स्टे के बाद अब बिहार सरकार ने आनन फानन में ट्रांसफर प्रक्रिया को स्थगित करने की घोषणा की. शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा- &#8216;ट्रांसफर पॉलिसी को फिलहाल स्थगित किया गया है. उन्होंने कहा कि अब पांच बार सक्षमता परीक्षा लेने के बाद ही ट्रांसफर शुरू होगा. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रांसफर पॉलिसी में संशोधन किया जाएगा. नए सिरे से ट्रांसफर नीति बनाई जाएगी. बता दें कि औरंगाबाद के शिक्षक नीरज पांडेय सहित कुल 13 शिक्षकों की ओर से पॉलिसी का विरोध करते हुए 18 नवंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिस पर आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फिलहाल स्टे लगाते हुए सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2025 को होगी. याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा है कि &#8216;राज्य सरकार मनमाने ढंग से चॉइस ऑप्शन दे रही है. सरकार शिक्षकों को गुमराह कर रही है. नियम के तहत आवेदन नहीं लिया जा रहा है.&#8217; दरअसल, महिला शिक्षकों के लिए पंचायत चॉइस का ऑप्शन दिया गया है, जबकि पुरुषों के लिए अनुमंडल का, जिसका विरोध हो रहा है. शिक्षक संघों ने सरकार से पॉलिसी में बदलाव की मांग की थी लेकिन सरकार अपने जिद पर अड़ी रही, इसके [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>पटना हाइकोर्ट ने ट्रांसफर प्रक्रिया पर रोक लगाई </strong></p>



<p><strong>सरकार ने ट्रांसफर प्रक्रिया स्थगित की</strong></p>



<p>पटना।। शिक्षा विभाग के अड़ियल रवैए की वजह से शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रक्रिया लटक गई है. पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को ट्रांसफर पोस्टिंग पर रोक लगा दी है. इधर हाईकोर्ट के स्टे के बाद अब बिहार सरकार ने आनन फानन में ट्रांसफर प्रक्रिया को स्थगित करने की घोषणा की. शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा- &#8216;ट्रांसफर पॉलिसी को फिलहाल स्थगित किया गया है. उन्होंने कहा कि अब पांच बार सक्षमता परीक्षा लेने के बाद ही ट्रांसफर शुरू होगा. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रांसफर पॉलिसी में संशोधन किया जाएगा. नए सिरे से ट्रांसफर नीति बनाई जाएगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="704" height="428" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/11/1000196204.jpg" alt="" class="wp-image-87830" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/11/1000196204.jpg 704w, https://www.patnanow.com/assets/2024/11/1000196204-650x395.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 704px) 100vw, 704px" /></figure>



<p>बता दें कि औरंगाबाद के शिक्षक नीरज पांडेय सहित कुल 13 शिक्षकों की ओर से पॉलिसी का विरोध करते हुए 18 नवंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिस पर आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फिलहाल स्टे लगाते हुए सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2025 को होगी.</p>



<p>याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा है कि &#8216;राज्य सरकार मनमाने ढंग से चॉइस ऑप्शन दे रही है. सरकार शिक्षकों को गुमराह कर रही है. नियम के तहत आवेदन नहीं लिया जा रहा है.&#8217; दरअसल, महिला शिक्षकों के लिए पंचायत चॉइस का ऑप्शन दिया गया है, जबकि पुरुषों के लिए अनुमंडल का, जिसका विरोध हो रहा है. शिक्षक संघों ने सरकार से पॉलिसी में बदलाव की मांग की थी लेकिन सरकार अपने जिद पर अड़ी रही, इसके बाद शिक्षक कोर्ट चले गए. जब हाई कोर्ट ने पॉलिसी पर स्टे लगा दिया तो मजबूरी में सरकार को ट्रांसफर प्रक्रिया पर रोक लगानी पड़ी.</p>



<p><strong>राजद ने सरकार पर बोला हमला</strong></p>



<p>राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि राज्य सरकार को शिक्षा और शिक्षक से भारी नफरत और घृणा है. यही वजह है कि चाहे वह शिक्षक बहाली का मामला हो, उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा देने का मामला हो या उनके स्थानांतरण और पदस्थापन का मामला हो, सरकार उसे फंसाये और लटकाए रखने की मंशा से हीं नियमावली बनाती है. जबसे बिहार में एनडीए सरकार बनी तबसे यही होता आ रहा है. यदि तेजस्वी यादव को सत्रह महिने उपमुख्यमंत्री रहने का मौका नहीं मिला रहता तो अबतक शिक्षक बहाली को लेकर शिक्षक अभ्यर्थी आन्दोलन हीं करते रहते. हालांकि उस समय भी बहाली में बाधा उत्पन्न करने के लिए हीं मुख्यमंत्री के स्तर से डोमिसाइल हटाने का निर्णय लिया गया. बीपीएससी के चेयरमैन और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव तत्कालीन शिक्षा मंत्री के निर्देशों को नजरंदाज करते हुए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सचिवालय से निर्देशित होते रहे और बहाली को फंसाने का प्रयास होता रहा पर तेजस्वी जी के दृढ़ संकल्प ने शिक्षकों की बहाली करने के लिए मुख्यमंत्री जी को मजबूर कर दिया. अब सरकार के सामने बाध्यता है कि बचे हुए पदों पर भी जल्द से जल्द शिक्षकों की बहाली करें. पिछले बहाली में जो अनियमितता की शिकायत आ रही है एसआईटी के द्वारा उसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.</p>



<p>राजद नेता ने कहा कि वर्तमान सरकार ने नियोजित शिक्षकों के समक्ष स्थानांतरण नीति लाकर एकबार फिर नियोजित शिक्षकों को प्रताड़ित करने का काम कर रही है. पुरूष शिक्षकों को 10 अनुमंडलों का विकल्प दिया है जो अव्यवहारिक और अमानवीय है.नियोजित शिक्षक लगभग 20 वर्षों से कार्यरत हैं अब उनमें से अधिकांश शिक्षकों की सेवा 08-10 बची है उनके माँ बाप बुढ़े हो चुके हैं जिन्हें सहारा की अवश्यकता है. 10 अनुमंडलों के विकल्प से बुढ़े माँ बाप का सहारा छिना जा रहा है जो निंदनीय है.<br>राजद की यह मांग है कि पुरूष शिक्षकों को अपने गृह पंचायत को छोड़कर अगल बगल के पंचायत और महिला शिक्षकों को अपने गृह पंचायत के विधालयों में पदस्थापित किया जाए ताकि महिला शिक्षक अपने नैहर या ससुराल में शिक्षण कार्य कर सकें और अपने बच्चों का भरण पोषण कर सके.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>पटना हाईकोर्ट ने रद्द किया बिहार का जाति आधारित आरक्षण</title>
		<link>https://www.patnanow.com/patna-highcourt-big-decision/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Jun 2024 17:07:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Arakshan]]></category>
		<category><![CDATA[Caste based reservation]]></category>
		<category><![CDATA[Patna highcourt]]></category>
		<category><![CDATA[Reservation]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। पटना हाईकोर्ट ने बिहार में 65 प्रतिशत जाति आधारित आरक्षण को रद्द कर दिया है. इसके तहत राज्य सरकार द्वारा शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 65 फीसदी आरक्षण देने का कानून लाया गया था. बता दें कि 9 नवंबर 2023 को बिहार विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पारित हुआ था. इसमें जातिगत आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 65% कर दिया गया. अगर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के 10% कोटे को मिला लिया जाए तो बिहार में कुल रिजर्वेशन 75% हो गया. ये आरक्षण के लिए तय अधिकतम सीमा, यानी 50% से काफी ज्यादा था. इसे चुनौती देने वाली याचिकायों को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार के द्वारा लाये गये कानून को रद्द करते हुए बड़ा झटका दिया गया है. इस मामलें में गौरव कुमार व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर फैसला 11मार्च, 2024 को सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया,चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ गौरव कुमार व अन्य याचिकाओं पर लंबी सुनवाई की थी. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। पटना हाईकोर्ट ने बिहार में 65 प्रतिशत जाति आधारित आरक्षण को रद्द कर दिया है. इसके तहत राज्य सरकार द्वारा शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 65 फीसदी आरक्षण देने का कानून लाया गया था. बता दें कि 9 नवंबर 2023 को बिहार विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पारित हुआ था. इसमें जातिगत आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 65% कर दिया गया. अगर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के 10% कोटे को मिला लिया जाए तो बिहार में कुल रिजर्वेशन 75% हो गया. ये आरक्षण के लिए तय अधिकतम सीमा, यानी 50% से काफी ज्यादा था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT.png" alt="" class="wp-image-38512" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT-350x197.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इसे चुनौती देने वाली याचिकायों को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार के द्वारा लाये गये कानून को रद्द करते हुए बड़ा झटका दिया गया है. इस मामलें में गौरव कुमार व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर फैसला 11मार्च, 2024 को सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया,चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ गौरव कुमार व अन्य याचिकाओं पर लंबी सुनवाई की थी.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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