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		<title>आरा-बक्सर उपचुनाव के बाजीगर बने सोनू राय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 16:19:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बागियों ने बिगाड़ा खेल, MLC उपचुनाव में NDA की नैया डूबी MLA चुनाव के बाद अब विधान परिषद चुनाव में भी नाराज़ नेताओं ने बदल दिया पूरा समीकरण आरा, 14 मई। बक्सर-भोजपुर MLC उपचुनाव में राजद प्रत्याशी सोनू राय ने चुनावी बाजीगर बन शानदार जीत दर्ज कर राजनीतिक गलियारों के तमाम कयासों पर विराम लगा दिया। कांटे की टक्कर वाले इस त्रिकोणीय मुकाबले में सत्ता पक्ष, विपक्ष और एक बागी निर्दलीय उम्मीदवार के बीच सियासी संघर्ष चरम पर था। चुनाव के दौरान आंकड़ों की हेराफेरी, धनबल और मैनेजमेंट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। राजनीतिक दिग्गजों से लेकर आम जनता तक यही चर्चा थी कि MLC चुनाव धनकुबेरों का खेल होता है, जहां पैसों की ताकत ही जीत तय करती है। आरोप-प्रत्यारोप और शब्दों के वार के बीच जब मतगणना का परिणाम सामने आया तो सारे अनुमान ध्वस्त हो गए और सोनू राय ने मैदान फतह कर यह साबित कर दिया कि हर चुनाव सिर्फ धनबल से नहीं, जनसमर्थन और रणनीति से भी जीता जाता है। बक्सर-भोजपुर विधान परिषद उपचुनाव का परिणाम एक बार फिर यह साबित कर गया कि राजनीति में सबसे बड़ा खतरा विपक्ष नहीं, बल्कि अपने ही “बागी” होते हैं। गुरुवार को राजकीय कन्या प्लस टू विद्यालय में हुई मतगणना में राजद उम्मीदवार सोनू कुमार राय ने NDA प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद को शिकस्त देते हुए जीत दर्ज कर ली। शुरुआती रुझानों में कन्हैया प्रसाद आगे जरूर दिखे, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, समीकरण पूरी तरह बदलता चला गया। 12 मई 2026 को हुए मतदान में कुल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बागियों ने बिगाड़ा खेल, MLC उपचुनाव में NDA की नैया डूबी</strong><br><br><strong>MLA चुनाव के बाद अब विधान परिषद चुनाव में भी नाराज़ नेताओं ने बदल दिया पूरा समीकरण</strong><br><br>आरा, 14 मई। बक्सर-भोजपुर MLC उपचुनाव में राजद प्रत्याशी सोनू राय ने चुनावी बाजीगर बन शानदार जीत दर्ज कर राजनीतिक गलियारों के तमाम कयासों पर विराम लगा दिया। कांटे की टक्कर वाले इस त्रिकोणीय मुकाबले में सत्ता पक्ष, विपक्ष और एक बागी निर्दलीय उम्मीदवार के बीच सियासी संघर्ष चरम पर था। चुनाव के दौरान आंकड़ों की हेराफेरी, धनबल और मैनेजमेंट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। राजनीतिक दिग्गजों से लेकर आम जनता तक यही चर्चा थी कि MLC चुनाव धनकुबेरों का खेल होता है, जहां पैसों की ताकत ही जीत तय करती है। आरोप-प्रत्यारोप और शब्दों के वार के बीच जब मतगणना का परिणाम सामने आया तो सारे अनुमान ध्वस्त हो गए और सोनू राय ने मैदान फतह कर यह साबित कर दिया कि हर चुनाव सिर्फ धनबल से नहीं, जनसमर्थन और रणनीति से भी जीता जाता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="573" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306456-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96739" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306456-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306456-650x364.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>बक्सर-भोजपुर विधान परिषद उपचुनाव का परिणाम एक बार फिर यह साबित कर गया कि राजनीति में सबसे बड़ा खतरा विपक्ष नहीं, बल्कि अपने ही “बागी” होते हैं। गुरुवार को राजकीय कन्या प्लस टू विद्यालय में हुई मतगणना में राजद उम्मीदवार सोनू कुमार राय ने NDA प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद को शिकस्त देते हुए जीत दर्ज कर ली। शुरुआती रुझानों में कन्हैया प्रसाद आगे जरूर दिखे, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, समीकरण पूरी तरह बदलता चला गया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="783" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306474-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96740" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306474-scaled.jpg 783w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306474-497x650.jpg 497w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306474-1175x1536.jpg 1175w" sizes="(max-width: 783px) 100vw, 783px" /></figure>



<p>12 मई 2026 को हुए मतदान में कुल 97.96 प्रतिशत वोट पड़े थे। कुल 5,335 वैध मतों में जीत के लिए 2,668 वोटों की आवश्यकता थी। प्रथम वरीयता मतों की गिनती में ही राजद प्रत्याशी सोनू कुमार राय ने 2,486 वोट हासिल कर बढ़त बना ली, जबकि कुल मत 2507 मिले, वही NDA समर्थित उम्मीदवार कन्हैया प्रसाद को 2153 मत मिले। दोनों के बीच 354 वोटों का अंतर रहा। वही अन्य उम्मीदवारों में मनोज उपाध्याय 636, लालू प्रसाद यादव को 30, कन्हैया प्रसाद 25 और निरंजन कुमार राय को 12 मत मिले।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="577" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306589-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96745" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306589-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306589-650x367.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306589-1536x866.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br><br>लेकिन इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी “बागी फैक्टर” बनकर उभरी। जदयू के नाराज़ नेता मनोज कुमार उपाध्याय ने निर्दलीय मैदान में उतरकर 636 वोट हासिल कर लिए। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="735" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001295990-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96686" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001295990-scaled.jpg 735w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001295990-467x650.jpg 467w" sizes="auto, (max-width: 735px) 100vw, 735px" /></figure>



<p>राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि इन वोटों का बड़ा हिस्सा NDA उम्मीदवार के खाते में जाता तो परिणाम पूरी तरह पलट सकता था। यही वजह रही कि सत्ता पक्ष की उम्मीदें धीरे-धीरे ध्वस्त होती चली गईं।<br><br>दरअसल यह पहली बार नहीं है जब बागियों ने सत्ता समीकरण बिगाड़ा हो। हाल ही में सम्पन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भी कई सीटों पर ऐसे ही हालात देखने को मिले थे। पार्टी के लिए तीन-तीन दशक तक एक साधारण कार्यकर्ता की तरह जमीन पर मेहनत करने वाले नेताओं को जब टिकट वितरण में नजरअंदाज कर दिया गया, तो कई नेता निर्दलीय ही चुनावी अखाड़े में उतर पड़े। परिणाम यह हुआ कि कई जगहों पर आधिकारिक प्रत्याशियों के वोट कट गए और खेल पूरी तरह बिगड़ गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजद को भी कई तय मानी जा रही सीटों पर इसी अंदरूनी नाराजगी का नुकसान उठाना पड़ा था।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="847" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306588-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96747" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306588-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306588-650x538.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306588-1536x1270.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306588-2048x1694.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="864" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306603-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96746" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306603-scaled.jpg 864w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306603-548x650.jpg 548w" sizes="auto, (max-width: 864px) 100vw, 864px" /></figure>



<p><br>ठीक वैसा ही दृश्य अब MLC उपचुनाव में भी देखने को मिला। जिस चुनाव को अक्सर धनबल, जोड़तोड़ और खरीद-फरोख्त का अखाड़ा माना जाता रहा है, वहां इस बार “नाराज़ कार्यकर्ता” सबसे बड़ा फैक्टर बन गया। सत्ता पक्ष का संगठनात्मक गणित और चुनावी प्रबंधन उस समय धराशायी हो गया जब अपने ही लोग मैदान में उतरकर वोटों का बंटवारा कर गए।<br><br>मतगणना को लेकर जिला प्रशासन ने भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। पूरे काउंटिंग सेंटर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। स्कूल के मुख्य द्वार से लेकर मतगणना हॉल तक 33 मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई थी। जिला निर्वाची पदाधिकारी सह डीएम के नेतृत्व में डीडीसी गुंजन सिंह समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं, जबकि विधि-व्यवस्था की कमान ADM डॉ. शशि शेखर के पास थी।</p>



<p>जीत के बाद राजद के कार्यकारी अध्यक्ष और प्रतिपक्ष नेता तेजस्वी यादव ने सोनू राय को बधाई देते अपने सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा &#8211; भोजपुर-बक्सर MLC उपचुनाव में राजद प्रत्याशी श्री सोनू राय ने NDA उम्मीदवार को करारी शिकस्त दी है। राजद प्रत्याशी के जीतने पर सभी कार्यकर्ताओं, मतदाताओं और नेताओं को हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद।</p>



<p>हम शुरू से कह रहे है अगर आज देश-प्रदेश में Machine की बजाय बैलेट पेपर यानि मतपत्र से चुनाव हो तो BJP-NDA कहीं भी नहीं टिकेगी। बिहार चुनाव में पोस्टल बैलेट पेपर में हम लोगों ने 150 से अधिक सीटें जीती थी लेकिन तंत्र-यंत्र-षड्यंत्र और छल-कपट से हरा दिया गया था।</p>



<p>आजकल मतगणना के दिन भी देर रात 1-2 बजे तक चुनाव परिणाम घोषित किए जाते है। पूर्व में मतपत्रों की गिनती में भी इतना ही समय लगता था। तो क्यों नहीं लोकतांत्रिक पारदर्शिता और जनतंत्र में जनविश्वास कायम रखने के लिए अब EVM की बजाय बैलेट पेपर से ही चुनाव कराया जाए। और हाँ, हम हमेशा जीतने के बाद भी EVM से मतदान कराने के पक्षधर नहीं रहे है।</p>



<p>पुन: फिर जीत की बधाई। #TejashwiYadav #RJD</p>



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<p>इधर जीत के बाद राजद के चर्चित नेता व पूर्व MLA प्रत्याशी रामबाबू सिंह ने कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनाव ने लोकतंत्र की असली ताकत दिखा दी। उन्होंने जीत के लिए बधाई देते हुए सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। वही राजद के युवा नेता दीपू राणावत ने जीत का सेहरा लोक के माथे मढ़ दिया। उन्होंने कहा कि जनता जिसे चाहती है उसे ही जीत मिलता है। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="460" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306586-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96749" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306586-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306586-650x292.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1001306586-1536x689.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>बधाईयों का तांता लगातार मिलता रहा जिसमें प्रदेश महासचिव मनोज सिंह, भाजपा माले नेता व अधिवक्ता अमित कुमार गुप्ता ने सोनू राय को जीत की बधाई देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है।</p>



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<p>जीत के बाद सोनू राय ने नगर का भ्रमर कर जनता का आभार व्यक्त किया। उनके साथ राजद नेता और गाड़ियों का काफिला काफी देर तक भ्रमर करता रहा।<br><br><br></p>
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		<title>कश्मीर की नींव भी बिहार के सम्राट ने रखी थी !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bold-words-by-kshama-kaul-from-the-stage-of-rajgir/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 05:19:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजगीर के मंच से क्षमा कौल का इतिहास और वर्तमान पर बेबाक बयान संवाद और लोकतंत्र पर बोलते हुए मंच से छलका कश्मीरी लेखिका का दर्द कश्मीर से विस्थापन का दर्द भी साझा किया, बोलीं &#8211; मातृभूमि छिन जाए तो संवाद खोखला लगता है राजगीर, 16 मार्च (ओ पी पांडेय)। राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के एक सत्र में कश्मीरी लेखिका क्षमा कौल ने कश्मीर के इतिहास, लोकतंत्र और विस्थापन के दर्द पर बेहद बेबाक तरीके से अपनी बात रखी। “संवाद और लोकतंत्र” विषय पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक ऐतिहासिक तथ्य की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कश्मीर के श्रीनगर शहर की स्थापना सम्राट अशोक ने की थी, जिनकी राजधानी पाटलिपुत्र यानी आज का पटना था। उन्होंने कहा कि कश्मीर और बिहार का रिश्ता हजारों वर्ष पुराना है। सम्राट अशोक ने अपने पुत्र जालोक को कश्मीर का शासन सौंपा था, जिसने वहां शैव और बौद्ध दोनों परंपराओं को समान सम्मान दिया। उनके अनुसार यह इतिहास में धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक भावना का एक अद्भुत उदाहरण था, जिसे आज की पीढ़ी लगभग भूल चुकी है। लेखिका ने आदि शंकराचार्य, अभिनवगुप्त और जयंत भट्ट जैसे विद्वानों का उल्लेख करते हुए कश्मीर की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कभी ज्ञान और दर्शन की भूमि रहा कश्मीर आज विस्थापन और पीड़ा की कहानी बन गया है। लोकतंत्र और संवाद की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए क्षमा कौल का दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति से उसकी मातृभूमि और पहचान छिन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>राजगीर के मंच से क्षमा कौल का इतिहास और वर्तमान पर बेबाक बयान</strong></p>



<p><strong>संवाद और लोकतंत्र पर बोलते हुए मंच से छलका कश्मीरी लेखिका का दर्द</strong></p>



<p><strong>कश्मीर से विस्थापन का दर्द भी साझा किया, बोलीं &#8211; मातृभूमि छिन जाए तो संवाद खोखला लगता है</strong></p>



<p>राजगीर, 16 मार्च <strong>(ओ पी पांडेय</strong>)। राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के एक सत्र में कश्मीरी लेखिका क्षमा कौल ने कश्मीर के इतिहास, लोकतंत्र और विस्थापन के दर्द पर बेहद बेबाक तरीके से अपनी बात रखी। “संवाद और लोकतंत्र” विषय पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक ऐतिहासिक तथ्य की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कश्मीर के श्रीनगर शहर की स्थापना सम्राट अशोक ने की थी, जिनकी राजधानी पाटलिपुत्र यानी आज का पटना था।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1020" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-scaled.png" alt="" class="wp-image-95733" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-scaled.png 1020w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-647x650.png 647w" sizes="auto, (max-width: 1020px) 100vw, 1020px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि कश्मीर और बिहार का रिश्ता हजारों वर्ष पुराना है। सम्राट अशोक ने अपने पुत्र जालोक को कश्मीर का शासन सौंपा था, जिसने वहां शैव और बौद्ध दोनों परंपराओं को समान सम्मान दिया। उनके अनुसार यह इतिहास में धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक भावना का एक अद्भुत उदाहरण था, जिसे आज की पीढ़ी लगभग भूल चुकी है।</p>



<p>लेखिका ने आदि शंकराचार्य, अभिनवगुप्त और जयंत भट्ट जैसे विद्वानों का उल्लेख करते हुए कश्मीर की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कभी ज्ञान और दर्शन की भूमि रहा कश्मीर आज विस्थापन और पीड़ा की कहानी बन गया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95734" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p><br>लोकतंत्र और संवाद की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए क्षमा कौल का दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति से उसकी मातृभूमि और पहचान छिन जाती है तो केवल कागजी संवाद से न्याय नहीं मिलता। कश्मीर में हुए नरसंहार और विस्थापन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज कई कश्मीरी अपने ही देश में शरणार्थी की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं और उनके दर्द पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस तक नहीं हुई।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95735" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>इस दौरान उन्होंने बिहार की धरती को नमन करते हुए कहा कि यह भूमि ज्ञान, चिंतन और विमर्श की अनमोल धरोहर रही है। उनके अनुसार बिहारियों में बौद्धिक क्षमता और श्रम दोनों का अद्भुत संगम है।</p>



<p><br>इतिहास के संदर्भ में बताया गया कि सम्राट अशोक (268–232 ईसा पूर्व) के समय मगध साम्राज्य का केंद्र आज का बिहार था। उनकी राजधानी पाटलिपुत्र से संचालित यह विशाल साम्राज्य उत्तर में हिमालय की तराई, पूर्व में बंगाल क्षेत्र, पश्चिम में सोन नदी और दक्षिण में विंध्य पर्वतमाला तक फैला हुआ था। मौर्य काल में चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक के शासन में मगध का विस्तार उत्तर-पश्चिम में हिंदुकुश पर्वतों तक था, जिसमें आज के अफगानिस्तान के काबुल, कंधार और हेरात जैसे क्षेत्र भी शामिल थे।</p>



<p>इतिहासकारों के अनुसार कभी इतना विशाल और प्रभावशाली रहा मगध साम्राज्य आज कई प्रशासनिक हिस्सों में बंट चुका है। समय के साथ बिहार के भूभाग से अलग होकर कई नए राज्य और क्षेत्र बने।</p>



<p><br>मंच से यह भी संदेश दिया गया कि इतिहास के वैभव को केवल खंडहरों में बदलने देना किसी भी समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। आज भी प्राचीन विश्वविद्यालयों और सभ्यताओं के अवशेष मानो अपने गौरव की कहानी सुना रहे हैं, लेकिन उनके पुनरुद्धार और संरक्षण के बजाय अक्सर उन्हें केवल राजनीतिक बहस का विषय बना दिया जाता है।</p>



<p>वक्ताओं ने कहा कि जब तक साहित्य और चिंतन की परंपरा मजबूत नहीं होगी, तब तक इतिहास के गौरव को पुनर्जीवित करना कठिन है। साहित्य में समाज की सोच को बदलने और नई दिशा देने की ताकत होती है, इसलिए इतिहास और संस्कृति को पुनर्स्मरण कराने में साहित्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।</p>
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		<title>बॉक्स ऑफिस पर क्या कह गए अमोल पालेकर !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 03:51:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में अमोल पालेकर का सिनेमा पर बेबाक संवाद सिनेमा की असली सफलता दर्शकों के दिल में होती है, बॉक्स ऑफिस में नहीं : अमोल पालेकर नालंदा, 16 मार्च (ओ पी पाण्डेय)। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक विशेष सत्र में हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर केंद्र में रहे। इस अवसर पर उन्होंने सिनेमा, फिल्म आलोचना और अपने रचनात्मक अनुभवों पर खुलकर विचार साझा किए। सत्र में उनकी धर्मपत्नी और लेखिका संध्या गोखले तथा वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज भी उनके साथ संवाद में शामिल रहे। बातचीत के दौरान अमोल पालेकर ने अपने लंबे फिल्मी अनुभव और अपनी लिखी पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी फिल्म की सफलता या असफलता का आकलन केवल उसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी फिल्म का वास्तविक मूल्य उसके विषय, संवेदनशीलता, सामाजिक प्रभाव और दर्शकों के मन पर पड़ने वाले स्थायी असर से तय होता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक फिल्म समीक्षक की भूमिका सिर्फ यह बताने तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि फिल्म हिट है या फ्लॉप। बल्कि उसका काम यह समझना और समझाना भी है कि कोई फिल्म अपने समय और समाज से किस तरह संवाद स्थापित करती है। इस दौरान अमोल पालेकर ने अपनी फिल्मों और अभिनय यात्रा से जुड़े कई रोचक अनुभव भी साझा किए। उनकी सहज और आत्मीय बातचीत ने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा और पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम के अंत में पटना कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में अमोल पालेकर का सिनेमा पर बेबाक संवाद</strong></p>



<p><strong>सिनेमा की असली सफलता दर्शकों के दिल में होती है, बॉक्स ऑफिस में नहीं : अमोल पालेकर</strong></p>



<p>नालंदा, 16 मार्च <strong>(ओ पी पाण्डेय</strong>)। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक विशेष सत्र में हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर केंद्र में रहे। इस अवसर पर उन्होंने सिनेमा, फिल्म आलोचना और अपने रचनात्मक अनुभवों पर खुलकर विचार साझा किए। सत्र में उनकी धर्मपत्नी और लेखिका संध्या गोखले तथा वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज भी उनके साथ संवाद में शामिल रहे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110404-scaled.png" alt="" class="wp-image-95730" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110404-scaled.png 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110404-650x434.png 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p><br>बातचीत के दौरान अमोल पालेकर ने अपने लंबे फिल्मी अनुभव और अपनी लिखी पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी फिल्म की सफलता या असफलता का आकलन केवल उसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी फिल्म का वास्तविक मूल्य उसके विषय, संवेदनशीलता, सामाजिक प्रभाव और दर्शकों के मन पर पड़ने वाले स्थायी असर से तय होता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95716" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने यह भी कहा कि एक फिल्म समीक्षक की भूमिका सिर्फ यह बताने तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि फिल्म हिट है या फ्लॉप। बल्कि उसका काम यह समझना और समझाना भी है कि कोई फिल्म अपने समय और समाज से किस तरह संवाद स्थापित करती है।</p>



<p>इस दौरान अमोल पालेकर ने अपनी फिल्मों और अभिनय यात्रा से जुड़े कई रोचक अनुभव भी साझा किए। उनकी सहज और आत्मीय बातचीत ने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा और पूरे माहौल को जीवंत बना दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95717" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के अंत में पटना कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित लाइव पेंटिंग सत्र में बनाई गई एक विशेष कलाकृति अमोल पालेकर को भेंट की गई। इसके साथ ही उन्हें पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और नालंदा की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती स्थानीय कलाकारों द्वारा मिट्टी से निर्मित एक प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया।</p>



<p>यह सत्र सिनेमा, कला और समाज के गहरे संबंधों को रेखांकित करते हुए नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल को और भी सार्थक बना गया।</p>



<p></p>
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		<title>राजगीर में साहित्य का महाकुंभ: राष्ट्रवाद से क्षेत्रीय भाषाओं तक गूंजे विचार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/rajgir-me-sahitya-ka-mahakumb/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 05:01:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय साहित्य और संकट के समय लेखन पर गहन मंथन राजगीर में तीसरे दिन कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित, देशभर के लेखकों और विचारकों ने साहित्य, समाज और समकालीन चुनौतियों पर रखे विचार राजगीर, 15 मार्च। राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के तीसरे दिन साहित्य, राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय भाषाओं और संकट के समय लेखन की भूमिका जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लेखकों, विचारकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए समकालीन समाज और साहित्य के संबंधों पर महत्वपूर्ण विमर्श प्रस्तुत किया। राष्ट्रवाद पर गंभीर बहसदिन का पहला सत्र “क्या राष्ट्र को राष्ट्रवाद की आवश्यकता है या राष्ट्रवाद ही राष्ट्र को कमजोर बनाता है?” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें लेखक-चिंतक उदय माहूरकर और लेखिका लिपिका भूषण ने राष्ट्रवाद की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और सामूहिक चेतना से जुड़ा व्यापक विषय है। चर्चा के दौरान महात्मा गांधी के सेवा मॉडल, अहिंसा और सामाजिक समरसता जैसे सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वस्थ बहस की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव और अश्लील सामग्री के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की बात कही गई। कहानी केवल मनोरंजन नहीं, समाज का आईनादूसरे सत्र में “पर्दे पर कहानी कहने की कला: सिनेमा, डिजिटल मंच और साहित्य के माध्यम से बिहार की नई कल्पना” विषय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय साहित्य और संकट के समय लेखन पर गहन मंथन</strong></p>



<p><strong><em>राजगीर में तीसरे दिन कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित, देशभर के लेखकों और विचारकों ने साहित्य, समाज और समकालीन चुनौतियों पर रखे विचार</em></strong></p>



<p>राजगीर, 15 मार्च। राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के तीसरे दिन साहित्य, राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय भाषाओं और संकट के समय लेखन की भूमिका जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लेखकों, विचारकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए समकालीन समाज और साहित्य के संबंधों पर महत्वपूर्ण विमर्श प्रस्तुत किया।</p>



<p><strong>राष्ट्रवाद पर गंभीर बहस</strong><br>दिन का पहला सत्र “क्या राष्ट्र को राष्ट्रवाद की आवश्यकता है या राष्ट्रवाद ही राष्ट्र को कमजोर बनाता है?” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें लेखक-चिंतक उदय माहूरकर और लेखिका लिपिका भूषण ने राष्ट्रवाद की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95687" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और सामूहिक चेतना से जुड़ा व्यापक विषय है। चर्चा के दौरान महात्मा गांधी के सेवा मॉडल, अहिंसा और सामाजिक समरसता जैसे सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वस्थ बहस की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव और अश्लील सामग्री के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की बात कही गई।</p>



<p><strong>कहानी केवल मनोरंजन नहीं, समाज का आईना</strong><br>दूसरे सत्र में “पर्दे पर कहानी कहने की कला: सिनेमा, डिजिटल मंच और साहित्य के माध्यम से बिहार की नई कल्पना” विषय पर चर्चा हुई। इसमें अभिनेत्री और रंगमंच निर्देशक भाषा सुंभली तथा पटकथा लेखिका संध्या गोखले ने कहानी कहने की कला और उसकी सामाजिक जिम्मेदारी पर अपने विचार रखे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95688" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि कहानी कहना केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की वास्तविकताओं, विचारों और सच्चाइयों को सामने लाने का सशक्त साधन भी है। आज के दौर में चलचित्रों और डिजिटल मंचों का प्रभाव पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है, इसलिए रचनाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी हो जाती है।</p>



<p><strong>साहित्य समाज को देता है दिशा</strong><br>तीसरे सत्र “साहित्य समाज को कैसे आकार देता है” में लेखक शांतनु गुप्ता और लेखिका अमी गणात्रा ने साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच, मूल्यों और चेतना को दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। भारतीय ग्रंथों और परंपरागत ज्ञान में समाज को मार्गदर्शन देने की क्षमता निहित है, इसलिए नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना आवश्यक है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95690" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95689" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>क्षेत्रीय साहित्य का बढ़ता विस्तार</strong><br>दोपहर के बाद आयोजित सत्र “समकालीन लेखन और क्षेत्रीय कथाओं का भविष्य” में ओड़िया लेखक, आलोचक और कवि मनोरंजन दास, लेखिका-इतिहासकार सुमेधा वर्मा और लेखक-कवि नीलोत्त्पल मृणाल ने अपने विचार साझा किए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95683" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि प्रगतिशील होने का अर्थ अपनी जड़ों और स्थानीय अनुभवों से दूरी बनाना नहीं है। क्षेत्रीय साहित्य समाज की वास्तविकताओं, संस्कृति और लोक जीवन को सामने लाने का सशक्त माध्यम है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95693" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>चर्चा में यह भी कहा गया कि समय के साथ साहित्य की विषयवस्तु, पाठक वर्ग और उसे पढ़ने-समझने के तरीके बदल रहे हैं। अनुवाद और डिजिटल माध्यमों के कारण क्षेत्रीय साहित्य अब व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँच रहा है। नीलोत्पल मृणाल, जो अपने चर्चित उपन्यास डार्क हॉर्स, औघड़ और युवा जादूगर के लिए जाने जाते हैं, को साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।</p>



<p><strong>संकट के समय लेखन बना प्रतिरोध की आवाज</strong><br>अंतिम सत्र “संकट के समय लेखन: प्रतिरोध के रूप में साहित्य” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नितेश्वर कुमार, लेखक मृत्युंजय शर्मा और लेखक-शिक्षाविद जितेंद्र कुमार शर्मा ने अपने विचार रखे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95686" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में लेखन केवल व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज के सामूहिक संघर्ष, पीड़ा और आकांक्षाओं की आवाज बन जाता है। साहित्य कई बार सामाजिक चेतना जगाने और परिवर्तन की दिशा देने का माध्यम बनता है।</p>



<p><strong>कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक संध्या ने बांधा समां</strong><br>दिन के अंत में आयोजित कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक संध्या ने पूरे वातावरण को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया। कवि संजीव कुमार मुकेश, नीलोत्त्पल मृणाल, श्रीपति गुप्ता और कवयित्री तिश्या श्री ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95691" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-650x488.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रैपर स्लो चीता की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी। उनकी प्रस्तुति ने विशेष रूप से युवाओं को आकर्षित किया और साहित्य तथा संगीत के इस अनूठे संगम ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में ट्रांसजेंडर अधिकारों पर हुई खुली बहस</title>
		<link>https://www.patnanow.com/the-pain-comes-out-of-transgender-on-international-stage/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 05:18:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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					<description><![CDATA[ज्ञान की धरती नालंदा में समाज के हाशिये से सिनेमा तक की चर्चा राजगीर, 14 मार्च। नालंदा की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में ज्ञान, साहित्य, समाज और सिनेमा से जुड़े विविध विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। पूरे दिन चले विभिन्न सत्रों में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य में संवेदनाओं की अभिव्यक्ति, बिहार की ब्रांडिंग में मीडिया की भूमिका, फिल्म और समाज के संबंध तथा ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें ट्रांसजेंडर समुदाय की सामाजिक स्थिति और अधिकारों पर हुआ विमर्श कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ विचार-मंथन फेस्टिवल के प्रथम सत्र में “प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, पूर्व राष्ट्रपति के प्रेस सचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह, चिंतक मनुदास तथा विदुषी डॉ. कविता शर्मा ने अपने विचार रखे। डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा शास्त्रार्थ, तर्क और संवाद की समृद्ध परंपरा से विकसित हुई है। उन्होंने बताया कि हजारों वर्षों तक यह ज्ञान मौखिक परंपरा के माध्यम से संरक्षित रहा और गुरु-शिष्य परंपरा ने इसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया। अजय सिंह ने कहा कि भारत की पहचान एक संवाद प्रधान समाज के रूप में रही है। उन्होंने कहा कि केवल अतीत के गौरव में जीना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नालंदा की मूल ज्ञान-परंपरा और संवाद की भावना को वर्तमान समय में पुनर्जीवित करना जरूरी है। वहीं डॉ. कविता शर्मा ने महाभारत के प्रसंगों के माध्यम से जीवन की नैतिक शिक्षाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>ज्ञान की धरती नालंदा में समाज के हाशिये से सिनेमा तक की चर्चा</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="572" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103787-scaled.png" alt="" class="wp-image-95670" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103787-scaled.png 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103787-650x363.png 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>राजगीर, 14 मार्च। नालंदा की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में ज्ञान, साहित्य, समाज और सिनेमा से जुड़े विविध विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। पूरे दिन चले विभिन्न सत्रों में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य में संवेदनाओं की अभिव्यक्ति, बिहार की ब्रांडिंग में मीडिया की भूमिका, फिल्म और समाज के संबंध तथा ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें ट्रांसजेंडर समुदाय की सामाजिक स्थिति और अधिकारों पर हुआ विमर्श कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100849-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95651" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100849-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100849-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100849-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100849-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95650" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ विचार-मंथन</strong></p>



<p>फेस्टिवल के प्रथम सत्र में “प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, पूर्व राष्ट्रपति के प्रेस सचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह, चिंतक मनुदास तथा विदुषी डॉ. कविता शर्मा ने अपने विचार रखे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100008-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95654" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100008-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100008-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100008-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100008-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p>डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा शास्त्रार्थ, तर्क और संवाद की समृद्ध परंपरा से विकसित हुई है। उन्होंने बताया कि हजारों वर्षों तक यह ज्ञान मौखिक परंपरा के माध्यम से संरक्षित रहा और गुरु-शिष्य परंपरा ने इसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100106-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95656" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100106-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100106-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100106-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100106-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अजय सिंह ने कहा कि भारत की पहचान एक संवाद प्रधान समाज के रूप में रही है। उन्होंने कहा कि केवल अतीत के गौरव में जीना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नालंदा की मूल ज्ञान-परंपरा और संवाद की भावना को वर्तमान समय में पुनर्जीवित करना जरूरी है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100101-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95655" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100101-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100101-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100101-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100101-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वहीं डॉ. कविता शर्मा ने महाभारत के प्रसंगों के माध्यम से जीवन की नैतिक शिक्षाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि यह महाकाव्य मानव स्वभाव और कर्तव्य के गहरे प्रश्नों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।</p>



<p><strong>कला के माध्यम से नालंदा की विरासत को उकेरा</strong></p>



<p>कार्यक्रम के दूसरे सत्र में लाइव पेंटिंग का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन किन्नर समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहीं डॉ. भारती और सलमा चौधरी ने किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100227-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95658" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100227-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100227-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100227-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100227-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102319-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95657" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102319-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102319-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102319-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस सत्र में कलाकारों ने अपनी चित्रकला के माध्यम से आर्यभट्ट और आचार्य चाणक्य जैसे महान व्यक्तित्वों को कैनवास पर उकेरा। पटना कॉलेज ऑफ आर्ट्स के छात्र अमन अयाज, प्रियांशु कुमार, सुमित कुमार, ज्योति चौरसिया और टीना यादव ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम की प्रस्तुति परिधि आर्ट ग्रुप द्वारा की गई।</p>



<p><strong>शोक से सृजन तक की यात्रा पर चर्चा</strong></p>



<p>तीसरे सत्र “पेनिंग ग्रीफ: अनुभव से अभिव्यक्ति तक” में चर्चित कवयित्री डॉ. नीना वर्मा और प्रख्यात लेखिका गगन गिल ने साहित्य में संवेदना और शोक की भूमिका पर चर्चा की।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95659" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-1-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-1-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>डॉ. नीना वर्मा ने कहा कि शोक केवल पीड़ा नहीं, बल्कि आत्मिक समझ और संवेदनशीलता की यात्रा भी है। वहीं गगन गिल ने कहा कि जीवन में बिछड़ने की पीड़ा कई बार रचनात्मक अभिव्यक्ति का आधार बन जाती है।</p>



<p><strong>बिहार की ब्रांडिंग में मीडिया की भूमिका</strong><br>चौथे सत्र में “ब्रांडिंग ऑफ रीजन, स्पेशली बिहार में मीडिया की भूमिका” विषय पर ओम थानवी और टीवी9 भारतवर्ष के डिजिटल एग्जीक्यूटिव एडिटर पंकज कुमार ने चर्चा की।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="672" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102337-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95661" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102337-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102337-650x427.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="428" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100651-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95660" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100651-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100651-650x272.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100651-1536x642.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100651-2048x856.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस दौरान कहा गया कि मीडिया में अक्सर बिहार को नकारात्मक संदर्भों से जोड़ा जाता है, जबकि राज्य की बौद्धिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों को पर्याप्त स्थान नहीं मिलता। वक्ताओं ने कहा कि बिहार की प्रतिभाओं और उपलब्धियों को सकारात्मक रूप में सामने लाने की आवश्यकता है।</p>



<p><strong>सिनेमा और समाज पर भी हुई चर्चा</strong></p>



<p>फेस्टिवल के एक सत्र में सिनेमा और उसकी आलोचना पर भी विचार-विमर्श हुआ, जिसमें प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक भावना सोमाया और अजय ब्रह्मात्मज शामिल हुए। दोनों अतिथि फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड के सदस्य हैं, जिसके लगभ 56 देशों में सदस्य हैं और वे लंबे समय तक पत्रिका स्क्रीन की संपादक भी रह चुकी हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="779" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103660-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95663" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103660-scaled.jpg 779w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103660-494x650.jpg 494w" sizes="auto, (max-width: 779px) 100vw, 779px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100853-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95662" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100853-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100853-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100853-1536x864.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस अवसर पर अजय जय ब्रह्मात्मज ने बिहार की ओर से उनका स्वागत किया। भावना सोमाया ने कहा कि बिहार आने का यह उनका पहला अवसर है और पटना से इतनी दूर आना उनके लिए नया अनुभव रहा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यहाँ उन्हें “लिट्टी-चोखा और लिटरेचर” दोनों का स्वाद मिला।</p>



<p>उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग में अक्सर दो फिल्में फ्लॉप होते ही किसी कलाकार को असफल मान लिया जाता है, लेकिन कई कलाकार फिर मजबूत वापसी करते हैं। उन्होंने रणवीर सिंह और अक्षय कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि एक अच्छी फिल्म कलाकार के करियर को फिर से नई दिशा दे सकती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="564" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103661-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95664" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103661-scaled.jpg 564w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103661-358x650.jpg 358w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103661-846x1536.jpg 846w" sizes="auto, (max-width: 564px) 100vw, 564px" /></figure>



<p>भावना सोमैया ने कहा कि हर फिल्म दर्शकों के बीच दो हिस्सों में बंट जाती है- कुछ लोगों को पसंद आती है और कुछ को नहीं। उनके अनुसार वे उसी फिल्म के बारे में सकारात्मक लिखती हैं जिसमें उन्हें सच्चा कंटेंट और संदेश दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आजकल फिल्मों में साहित्य आधारित कहानियाँ बहुत कम बन रही हैं क्योंकि फिल्म उद्योग में अधिकांश लोग केवल मनी-मेकिंग पर ध्यान दे रहे हैं। उनके अनुसार सौ फिल्मों में मुश्किल से दो ही फिल्में साहित्य पर आधारित बनती हैं। अतिथियों ने दर्शकों के कई सवालों का बड़े ही सहजता से जवाब भी दिया।</p>



<p>&#8220;बिफोर एंड आफ्टर धुरंधर&#8217; सत्र में सिनेमा के बदलते स्वरूप पर गंभीर चर्चा&#8221;</p>



<p>राजगीर में आयोजित साहित्यिक सत्र &#8220;बिफोर एंड आफ्टर धुरंधर&#8221; में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार एवं आलोचक अजय ब्रह्मात्मज और प्रसिद्ध फिल्म पत्रकार-लेखिका पद्मश्री भावना सोमाया ने हिंदी सिनेमा की बदलती प्रवृत्तियों पर विस्तार से चर्चा की। सत्र के दौरान दोनों वक्ताओं ने फिल्मों की सामग्री, सामाजिक प्रभाव और बदलते फिल्मी परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए।</p>



<p>फिल्म धुरंधर के संदर्भ में चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि तकनीकी दृष्टि से फिल्म का ग्राफिक्स, संदेश और प्रस्तुति प्रभावशाली है, लेकिन आज के सिनेमा में बढ़ती हिंसा एक चिंताजनक प्रवृत्ति बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में फिल्म उद्योग में दक्षिण भारतीय फिल्मों की शैली से प्रेरित होकर अत्यधिक हिंसा को सामान्य बनाने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है, जिससे फिल्मों का मूल उद्देश्य कहीं न कहीं कमजोर पड़ता दिख रहा है।</p>



<p>उन्होंने ने यह भी कहा कि कभी भारतीय सिनेमा का उद्देश्य समाज को जोड़ना और सकारात्मक संदेश देना होता था, लेकिन आज कई फिल्मों में &#8220;डिवाइड एंड रूल&#8221; की मानसिकता झलकने लगी है। तथ्य और कल्पना के मिश्रण के कारण दर्शकों के सामने भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न होती है।</p>



<p>चर्चा के दौरान सामाजिक-राजनीतिक संदर्भों पर भी बात हुई। अजय जी ने कहा कि फिल्मों में कई बार कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जाता है और जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को भी एकतरफा दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाता है। पहले की फिल्मों में विभिन्न समुदायों के बीच समरसता का संदेश प्रमुख होता था, जबकि आज कई फिल्मों में विभाजन की प्रवृत्ति अधिक दिखाई देती है।</p>



<p>सत्र के दौरान भावना सोमाया ने साहित्य और लेखन की कठिन साधना पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एक लेखक अपनी रचना के लिए दिन-रात परिश्रम करता है और अनेक व्यक्तिगत संघर्षों से गुजरता है। अपने पुस्तक कराची से भारत के संदर्भ में उन्होंने भारत-पाक विभाजन के समय अपने परिवार और लाखों लोगों के विस्थापन के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने संयुक्त परिवार की परंपरा की सुंदरता का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे परिवारों में बच्चों को माता-पिता के अतिरिक्त कई और संरक्षक मिलते हैं।</p>



<p>गंभीर और विचारोत्तेजक चर्चा के साथ यह सत्र संपन्न हुआ, जिसमें सिनेमा, साहित्य और समाज के संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए।</p>



<p><strong>ट्रांसजेंडर समुदाय के मुद्दे बने चर्चा का केंद्र</strong></p>



<p>फेस्टिवल के छठे सत्र “भाषा, क्षेत्र और ट्रांसजेंडर” में किन्नर समुदाय की सामाजिक स्थिति और उनके अधिकारों पर गंभीर विमर्श हुआ।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="428" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100846-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95666" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100846-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100846-650x272.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100846-1536x642.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100846-2048x856.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p>डॉ. भारती ने कहा कि समाज अक्सर किन्नर समुदाय को हाशिये पर धकेल देता है और फिर उनकी ओर मुड़कर देखने की भी जरूरत नहीं समझता। उन्होंने कहा कि सम्मान और अवसर की कमी के कारण कई बार उन्हें मजबूरी में भीख मांगने जैसे कार्य करने पड़ते हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103682-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95668" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103682-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103682-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103682-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p>वहीं सलमा चौधरी ने बताया कि उनके प्रयासों से उत्तर प्रदेश में ऐसा शौचालय बनाया गया है जिसका उपयोग पुरुष, महिलाएँ और ट्रांसजेंडर तीनों कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए आश्रय स्थल स्थापित करना है।</p>



<p>उन्होंने सरकार से अपील की कि ट्रांसजेंडर समुदाय को शिक्षा, रोजगार और राजनीति में समान अवसर दिए जाएँ ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।</p>



<p><strong>समावेशी समाज का संदेश</strong><br>वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब उसके सभी वर्गों को समान सम्मान और अवसर मिलें। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल के इन सत्रों ने ज्ञान, कला, सिनेमा और सामाजिक न्याय के विभिन्न पहलुओं पर विचार करते हुए एक समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण का संदेश दिया।</p>



<p>नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल से <strong>ओ पी पाण्डेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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			</item>
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		<title>नालंदा की धरती पर लौटा ज्ञान का उत्सव, राजगीर में सजा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल 2026</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sahitya-se-saja-nalanda-ki-dharti/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 13:23:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[नालंदा की विरासत के संग सजा ‘लिट भी और लिट्टी भी’, राजगीर में शुरू हुआ इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल देशभर के साहित्यकारों ने जलाया ज्ञान का दीप, 12 से 15 मार्च तक इतिहास, साहित्य और संस्कृति पर होंगे सत्र राजगीर, 12 मार्च। नालंदा की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल 2026 का उद्घाटन राजगीर स्थित कन्वेंशन सेंटर के ओपन मंच पर भव्य तरीके से किया गया। 12-15 मार्च तक चलने वाले इस लिटरेचर कार्यक्रम का शुभारंभ देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों और विद्वानों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर अजय सिंह(राष्ट्रपति के पूर्व प्रेस सलाहकार), ओम थानवी(जनसत्ता के पूर्व एडिटर), अजय ब्रह्मात्मज(सिनेमा साहित्य के दिग्गज लेखक ), डॉ. कविता शर्मा (पूर्व प्राचार्य, हिंदू कॉलेज), आकाश पसरीचा, डॉ. आनंद सिंह (सीनियर प्रोफेसर), संजीव मुकेश, पंकज कुमार, गगन, निर्मल वैद्य, वैशाली सत्ता, अदिति नंदन और शैलेश कुमार समेत कई साहित्यिक हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में ज्ञान निकेतन की छात्राओं ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि डॉ. कविता शर्मा, आकाश पसरीचा और डॉ. आनंद सिंह जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों ने नालंदा पर महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखकर इस ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया है। वहीं नालंदा कॉलेज के प्राचार्य सत्र के पहले पैनल में पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए। मंच संचालन बिहार के चर्चित उद्घोषक शैलेश कुमार ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा,“इस बिहार की पावन धरती, इस नालंदा की धरा पर आप सभी का हार्दिक स्वागत है। मुझे मंच संचालन की जिम्मेदारी मिली है, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नालंदा की विरासत के संग सजा ‘लिट भी और लिट्टी भी’, राजगीर में शुरू हुआ इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल</strong><br><br><strong>देशभर के साहित्यकारों ने जलाया ज्ञान का दीप, 12 से 15 मार्च तक इतिहास, साहित्य और संस्कृति पर होंगे सत्र</strong></p>



<p>राजगीर, 12 मार्च। नालंदा की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल 2026 का उद्घाटन राजगीर स्थित कन्वेंशन सेंटर के ओपन मंच पर भव्य तरीके से किया गया। 12-15 मार्च तक चलने वाले इस लिटरेचर कार्यक्रम का शुभारंभ देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों और विद्वानों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="462" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097273-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95623" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097273-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097273-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097273-1536x694.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097273-2048x925.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p>इस अवसर पर अजय सिंह(राष्ट्रपति के पूर्व प्रेस सलाहकार), ओम थानवी(जनसत्ता के पूर्व एडिटर), अजय ब्रह्मात्मज(सिनेमा साहित्य के दिग्गज लेखक ), डॉ. कविता शर्मा (पूर्व प्राचार्य, हिंदू कॉलेज), आकाश पसरीचा, डॉ. आनंद सिंह (सीनियर प्रोफेसर), संजीव मुकेश, पंकज कुमार, गगन, निर्मल वैद्य, वैशाली सत्ता, अदिति नंदन और शैलेश कुमार समेत कई साहित्यिक हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में ज्ञान निकेतन की छात्राओं ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="462" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097299-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95616" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097299-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097299-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097299-1536x694.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097299-2048x925.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि डॉ. कविता शर्मा, आकाश पसरीचा और डॉ. आनंद सिंह जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों ने नालंदा पर महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखकर इस ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया है। वहीं नालंदा कॉलेज के प्राचार्य सत्र के पहले पैनल में पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="462" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097300-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95617" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097300-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097300-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097300-1536x694.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097300-2048x925.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>मंच संचालन बिहार के चर्चित उद्घोषक शैलेश कुमार ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा,“इस बिहार की पावन धरती, इस नालंदा की धरा पर आप सभी का हार्दिक स्वागत है। मुझे मंच संचालन की जिम्मेदारी मिली है, लेकिन मेरे सामने बैठे लोग मुझसे कहीं अधिक विद्वान और अपने आप में प्रकाश स्तंभ हैं। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल 2026, जिसे अमात्य फाउंडेशन ने आपके बीच समर्पित किया है, हमें धीरे-धीरे उस काल की ओर ले जाने का प्रयास कर रहा है, जब पाँचवीं शताब्दी में नालंदा में जमीन पर इसी तरह बैठकर ज्ञान की चर्चा और अध्ययन हुआ करता था। आज हम उसी परंपरा को फिर से जीवंत करने का प्रयास कर रहे हैं।”</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097272-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95624" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097272-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097272-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097272-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="744" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097309-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95618" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097309-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097309-650x473.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने अमात्य फाउंडेशन की टीम की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह किसी उजड़े हुए गांव को कुछ उत्साही लोग फिर से संवारने का प्रयास करते हैं, उसी तरह वैशाली सत्ता, अदिति नंदन और दिव्या भारद्वाज की टीम ने इस फेस्टिवल की परिकल्पना को साकार किया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="752" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097310-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95619" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097310-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097310-650x477.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के दौरान बिहार की साहित्यिक परंपरा का भी उल्लेख हुआ। उन्होंने पुराने दिनों की बात को याद करते हुए कहा कि एक बार नेहरू जी जब सीढी चढ़ते हुए लड़खड़ाए तो राष्ट्रकवि दिनकर ने उन्हें संभालते हुए कहा कि जब राजनीति लड़खड़ाती है तो साहित्य समाज को संभालने का काम करता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="881" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097314-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95625" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097314-scaled.jpg 881w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097314-559x650.jpg 559w" sizes="auto, (max-width: 881px) 100vw, 881px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="764" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097311-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95620" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097311-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097311-650x485.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इसी धरती ने वीर कुंवर सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानी और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे महान व्यक्तित्व दिए हैं। फेस्टिवल का टैगलाइन “Lit भी और Litti भी” खास आकर्षण का केंद्र रहा, जो बिहार की साहित्यिक समृद्धि के साथ-साथ यहां के प्रसिद्ध व्यंजन लिट्टी-चोखा की पहचान को भी दर्शाता है। इस फेस्टिवल में आने वाले सारे अतिथियों को बिहार की खास व्यंजनों को खास बिहारी शेफ़ो द्वारा परोसा भी जाएगा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="578" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097312-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95621" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097312-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097312-650x367.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097312-1536x868.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस मौके पर लेखिका वैशाली सेता ने अपने नाम से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि मुंबई में जन्मी और गुजरात से जुड़ी होने के कारण बचपन में उन्हें अपने नाम “वैशाली” से चिढ़ होती थी, क्योंकि महाराष्ट्र में कई कैफे का नाम भी वैशाली होता है। लेकिन 2007 में अदिति नंदन के संपर्क में आने और बिहार आने के बाद उन्हें पता चला कि विश्व के पहले गणराज्य का नाम वैशाली था। ये जानने के बाद उन्हें अपने नाम प्यार हो गया और इसके बाद इस गौरवशाली गणराज्य के पन्नो को उन्होंने बिहार के कोने कोने से खोजना शुरू किया। उनके दोस्त अदिति नंदन और कई लोगों ने मिलकर काम करना शुरू किया ताकि बिहार के उस गौरव को फिर से दुनिया में फैले सारे बिहार एक मंच पर आकर सार्थक के सकें। तब से लगातार वे बिहार में हीं हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="577" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097313-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95622" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097313-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097313-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097313-1536x866.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि आज जिस परिसर में यह लिटरेचर फेस्टिवल हो रहा है, वहां कार्यक्रम होते देखना उनके लिए भावुक क्षण है। उन्होंने बताया कि बिहार ज्ञान और इतिहास की धरती है, जहां करीब 400 स्थानों पर आदि मानवों द्वारा बनाए गए शैलचित्र मौजूद हैं, जिन्हें उन्होंने बिहार सरकार को सौंपकर धरोहर के रूप में संरक्षित करने की पहल की है। फेस्टिवल के पहले दिन साहित्य, इतिहास और संस्कृति से जुड़े कई सत्रों में देशभर से आए विद्वानों ने अपने विचार साझा किए.</p>



<p><strong><em>ओपी पांडे </em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>8 अरब 69 करोड़ का बजट पास… लेकिन वीकेएसयू के छात्रों की नौकरी कहाँ?</title>
		<link>https://www.patnanow.com/8-69-billion-approved-yet-students-ask-where-is-the-benefit/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 07:11:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACADEMIC]]></category>
		<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[गांव -शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
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		<category><![CDATA[Sinet meeting]]></category>
		<category><![CDATA[VKSU ARA]]></category>
		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[सीनेट बैठक के बीच आइसा का घेराव, छात्रों ने पूछा &#8211; अरबों खर्च के बाद भी सुविधाएँ क्यों नहीं? आरा,12 मार्च (ओ पी पाण्डेय ). वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में एक तरफ वर्ष 2026–27 के लिए 8 अरब 69 करोड़ रुपये से अधिक का बजट पास हुआ, वहीं दूसरी ओर छात्रों ने इस बजट की उपयोगिता पर सवाल खड़ा कर दिया. सीनेट की बैठक जहां विकास योजनाओं और शैक्षणिक सुधारों के दावों के साथ संपन्न हुई, वहीं परिसर के बाहर छात्र संगठन आइसा ने 21 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन और सीनेट का घेराव किया. छात्र नेताओं का कहना है कि हर साल विश्वविद्यालय का बजट करोड़ों-अरबों में बनता है, लेकिन जमीनी स्तर पर छात्रों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।बजट अरबों का, लेकिन छात्रों को नहीं मिल रहा लाभ. आइसा के बिहार राज्य सचिव सब्बीर कुमार ने कहा किहर साल विश्वविद्यालय का बजट करोड़ों-अरबों में पास होता है, लेकिन छात्रों को बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं मिलतीं। कई सत्रों की फेलोशिप लंबित है, प्रयोगशालाएँ जर्जर हैं और कई कॉलेजों में छात्राओं के लिए सेनेटरी पैड तक की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र-विरोधी बजट का आइसा विरोध करता है और इसे छात्रों के हित में सुधारने की जरूरत है। सीनेट का घेराव, नारों से गूंजा कैंपसबुधवार को आइसा के नेतृत्व में जीरो माइल से विरोध मार्च निकाला गया, जो विश्वविद्यालय कैंपस पहुंचकर सीनेट बैठक स्थल तक गया। इस दौरान छात्र “नई शिक्षा नीति वापस लो”, “सीबीसीएस नहीं चलेगा”, “छात्र संघ चुनाव कराओ” [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>सीनेट बैठक के बीच आइसा का घेराव, छात्रों ने पूछा &#8211; अरबों खर्च के बाद भी सुविधाएँ क्यों नहीं?</strong></p>



<p>आरा,12 मार्च (<strong>ओ पी पाण्डेय</strong> ). वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में एक तरफ वर्ष 2026–27 के लिए 8 अरब 69 करोड़ रुपये से अधिक का बजट पास हुआ, वहीं दूसरी ओर छात्रों ने इस बजट की उपयोगिता पर सवाल खड़ा कर दिया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="598" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096319-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95602" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096319-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096319-650x380.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096319-1536x898.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="566" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096320-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95600" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096320-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096320-650x359.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096320-1536x849.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>सीनेट की बैठक जहां विकास योजनाओं और शैक्षणिक सुधारों के दावों के साथ संपन्न हुई, वहीं परिसर के बाहर छात्र संगठन आइसा ने 21 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन और सीनेट का घेराव किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="566" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096321-scaled.png" alt="" class="wp-image-95604" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096321-scaled.png 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096321-650x359.png 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="606" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096317-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95601" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096317-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096317-650x385.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096317-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>छात्र नेताओं का कहना है कि हर साल विश्वविद्यालय का बजट करोड़ों-अरबों में बनता है, लेकिन जमीनी स्तर पर छात्रों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।<br>बजट अरबों का, लेकिन छात्रों को नहीं मिल रहा लाभ. आइसा के बिहार राज्य सचिव सब्बीर कुमार ने कहा कि<br>हर साल विश्वविद्यालय का बजट करोड़ों-अरबों में पास होता है, लेकिन छात्रों को बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं मिलतीं। कई सत्रों की फेलोशिप लंबित है, प्रयोगशालाएँ जर्जर हैं और कई कॉलेजों में छात्राओं के लिए सेनेटरी पैड तक की व्यवस्था नहीं है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096271-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95598" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096271-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096271-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096271-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096271-2048x1152.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि छात्र-विरोधी बजट का आइसा विरोध करता है और इसे छात्रों के हित में सुधारने की जरूरत है।</p>



<p><strong>सीनेट का घेराव, नारों से गूंजा कैंपस</strong><br>बुधवार को आइसा के नेतृत्व में जीरो माइल से विरोध मार्च निकाला गया, जो विश्वविद्यालय कैंपस पहुंचकर सीनेट बैठक स्थल तक गया। इस दौरान छात्र “नई शिक्षा नीति वापस लो”, “सीबीसीएस नहीं चलेगा”, “छात्र संघ चुनाव कराओ” और “एकेडमिक कैलेंडर लागू करो” जैसे नारों के साथ प्रदर्शन करते रहे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096267-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95599" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096267-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096267-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096267-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096267-2048x1152.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>सीनेट प्रतिनिधियों और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिसके बाद आइसा प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों का ज्ञापन परीक्षा नियंत्रक को सौंपा. विश्वविद्यालय प्रशासन ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096272-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95597" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096272-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096272-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096272-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001096272-2048x1152.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>21 मांगों को लेकर आंदोलन</strong><br>आइसा जिला सचिव विकास कुमार ने कहा कि घेराव विश्वविद्यालय की 21 सूत्री मांगों को लेकर किया गया.<br>इनमें प्रमुख मांगें हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>विश्वविद्यालय में सरकारी डेटा बैंक की स्थापना</li>



<li>छात्रों के लिए परिवहन सुविधा</li>



<li>छात्राओं के लिए कॉमन रूम</li>



<li>सभी कॉलेजों में छात्रावास</li>



<li>मूल प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन व डाक से भेजने की व्यवस्था</li>



<li>त्रुटिपूर्ण अंक पत्र सुधार के लिए तय तिथि</li>



<li>उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।</li>
</ul>



<p><strong>बड़ा सवाल</strong><br>सीनेट बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन ने विकास, तकनीकी सुधार और नए कोर्स शुरू करने की योजनाओं की बात कही. लेकिन छात्रों के प्रदर्शन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब बजट 8 अरब से ज्यादा है, तो क्या विश्वविद्यालय से पढ़ने वाले युवाओं को बेहतर शिक्षा, सुविधाएँ और रोजगार के अवसर मिल पा रहे हैं?</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भय बनी परीक्षा ने ली एक छात्रा की जान</title>
		<link>https://www.patnanow.com/exam-fear-tragic-sucide-in-ara/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:36:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACADEMIC]]></category>
		<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Crime]]></category>
		<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[CBSE]]></category>
		<category><![CDATA[DAV Jagdishpur]]></category>
		<category><![CDATA[Exam]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
		<category><![CDATA[MDJ College Sonevarsha]]></category>
		<category><![CDATA[O P Kashyap]]></category>
		<category><![CDATA[oppandeyreport]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[Sucide]]></category>
		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[डर, दबाव और सन्नाटा… एक छात्रा की आखिरी रात क्या परीक्षा अब बच्चों के लिए भय का नाम बन गई है? आरा, 20 फरवरी। बिहार के आरा शहर से आई एक दर्दनाक घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। परीक्षा की तैयारी में जुटी एक इंटर की छात्रा ने उस मानसिक दबाव से हार मान ली, जिसे अक्सर हम “सामान्य तनाव” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं… बल्कि उस बढ़ते परीक्षा-दबाव का आईना है, जो आज हजारों छात्रों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है। एक होनहार छात्रा… अधूरी रह गई कहानीक्लब रोड निवासी Indian Railways में कार्यरत पिता सतीश पाण्डेय और गृहिणी माता पिंकी पाण्डेय की दूसरी बेटी अनन्या, जिसे घर में प्यार से “गौरी” कहा जाता था, पढ़ाई में लगी थी. अनन्या DAV जगदीशपुर की इंटर की छात्रा थी जिसका एक्जाम सेंटर सोनवर्षा के MDJ कॉलेज में पड़ा था. 18 फरवरी को वह मोरल साइंस का पेपर दे चुकी थी और पेपर अच्छा भी गया था। लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था… वह बीमार थी, जॉन्डिस से परेशान थी… और शुक्रवार 20 फरवरी को फिजिक्स का पेपर था. रात को पढ़ाई करते-करते उसने जीवन से ही हार मान ली. जब मां रात करीब 1 बजे देखने गईं तो कमरे से कोई जवाब नहीं आया… दरवाजा तोड़ा गया… और सामने ऐसा दृश्य था जिसे कोई भी परिवार कभी देखना नहीं चाहेगा. स्टडी रूम में अनन्या पंखे से दुपट्टे में झूलती एक अतीत बन चुकी थी. टेबल पर रखा था [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>डर, दबाव और सन्नाटा… एक छात्रा की आखिरी रात</strong></p>



<p><strong>क्या परीक्षा अब बच्चों के लिए भय का नाम बन गई है?</strong></p>



<p>आरा, 20 फरवरी। बिहार के आरा शहर से आई एक दर्दनाक घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। परीक्षा की तैयारी में जुटी एक इंटर की छात्रा ने उस मानसिक दबाव से हार मान ली, जिसे अक्सर हम “सामान्य तनाव” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं… बल्कि उस बढ़ते परीक्षा-दबाव का आईना है, जो आज हजारों छात्रों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है।</p>



<p><strong>एक होनहार छात्रा… अधूरी रह गई कहानी</strong><br>क्लब रोड निवासी Indian Railways में कार्यरत पिता सतीश पाण्डेय और गृहिणी माता पिंकी पाण्डेय की दूसरी बेटी अनन्या, जिसे घर में प्यार से “गौरी” कहा जाता था, पढ़ाई में लगी थी. अनन्या DAV जगदीशपुर की इंटर की छात्रा थी जिसका एक्जाम सेंटर सोनवर्षा के MDJ कॉलेज में पड़ा था.</p>



<p>18 फरवरी को वह मोरल साइंस का पेपर दे चुकी थी और पेपर अच्छा भी गया था। लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था… वह बीमार थी, जॉन्डिस से परेशान थी… और शुक्रवार 20 फरवरी को फिजिक्स का पेपर था. रात को पढ़ाई करते-करते उसने जीवन से ही हार मान ली. जब मां रात करीब 1 बजे देखने गईं तो कमरे से कोई जवाब नहीं आया… दरवाजा तोड़ा गया… और सामने ऐसा दृश्य था जिसे कोई भी परिवार कभी देखना नहीं चाहेगा. स्टडी रूम में अनन्या पंखे से दुपट्टे में झूलती एक अतीत बन चुकी थी. टेबल पर रखा था एक छोटा सा सुसाइड नोट, जिसमें परीक्षा, बीमारी और खुद को बोझ समझने की पीड़ा साफ झलक रही थी.</p>



<p><strong>सुसाइड नोट में क्या लिखा</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="859" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015800-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95107" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015800-scaled.jpg 859w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015800-545x650.jpg 545w" sizes="auto, (max-width: 859px) 100vw, 859px" /></figure>



<p>मेरे से नहीं होश है अब। मैं एग्जाम नहीं दे पाऊंगी मेरा बोर्ड्स है मेरी तबीयत ही खराब रहती है हमेशा। सब मेरी गलती है। मेरे चलते मेरे पेरेंट्स परेशान है बट हो गया… अब और नहीं… मैं जा रही हूं और किसी के चलते नहीं खुद से जा रही हूं। मम्मी डैडी अपना ध्यान रखिएगा। दीदी बाबू तुम भी…</p>



<p>बाय<br>अनन्या/ गौरी</p>



<p><strong>एक सुसाइड नोट… और हजार सवाल</strong><br>अपने छोड़े सुसाइड नोट में उसने लिखा था कि वह बीमार रहती है… परीक्षा नहीं दे पाएगी… माता-पिता परेशान हैं… और वह किसी के कारण नहीं, खुद से यह कदम उठा रही है।</p>



<p>यह शब्द सिर्फ एक छात्रा की निराशा नहीं… बल्कि उस अदृश्य डर की आवाज हैं। फेल होने का डर… पीछे छूट जाने का डर… और उम्मीदों पर खरा न उतर पाने का डर।</p>



<p><strong>क्या परीक्षा अब डर का दूसरा नाम बन गई है?</strong><br>आज परीक्षा सिर्फ ज्ञान की नहीं… मानसिक सहनशीलता की भी परीक्षा बनती जा रही है। देर से पहुंचने पर केंद्र में प्रवेश नहीं, ट्रैफिक जाम या स्वास्थ्य समस्या की कोई राहत नहीं,“एक मौका चूक गए… तो साल बर्बाद” की मानसिकता इन परिस्थितियों में छात्र परीक्षा को अवसर नहीं… अंतिम निर्णय की तरह देखने लगते हैं।</p>



<p>हाल ही में मसौढ़ी में भी परीक्षा से जुड़ी निराशा के कारण एक बच्ची ने ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी। दो अलग घटनाएं… लेकिन कारण एक परीक्षा का असहनीय दबाव।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="593" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95108" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-650x377.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-1536x890.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अनन्या के पिता रोते हुए सिर्फ इतना कह पाए -“हमने कभी उस पर पढ़ाई का दबाव नहीं बनाया… समझ ही नहीं पाए कि उसने ऐसा क्यों किया…”यही सबसे बड़ा सवाल है &#8211; बच्चे कब चुपचाप टूट जाते हैं… हमें पता ही नहीं चलता।</p>



<p><strong>विशेषज्ञ क्या कहते हैं?</strong><br>मनोवैज्ञानिकों के अनुसार परीक्षा तनाव के प्रमुख कारण:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>असफलता का भय</li>



<li>स्वास्थ्य समस्याओं के साथ पढ़ाई का दबाव</li>



<li>“परफेक्ट होना ही पड़ेगा” की सोच</li>



<li>तुलना और सामाजिक अपेक्षाएं</li>



<li>एक ही परीक्षा को जीवन का फैसला मान लेना<br>जब इन सबके साथ कठोर परीक्षा नियम जुड़ते हैं, तो संवेदनशील बच्चे इसे जीवन-मरण का प्रश्न मान लेते हैं।</li>
</ul>



<p>“फेल होना जीवन की हार नहीं” यह संदेश सभी को देना चाहिए। क्या हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं… या उन्हें डरना सिखा रहे हैं? एक छात्रा चली गई… लेकिन पीछे छोड़ गई चेतावनी । परीक्षा से ज्यादा जरूरी है जीवन। यदि आपके घर में भी परीक्षार्थी है तो ध्यान रखें</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>उनसे रोज खुलकर बात करें</li>



<li>सिर्फ रिजल्ट नहीं, उनकी भावनाएं पूछें</li>



<li>बीमारी या थकान को हल्के में न लें</li>



<li>तुलना बिल्कुल न करें</li>



<li>जरूरत हो तो काउंसलिंग लें</li>
</ul>



<p>जरूरत क्या है ..सख्ती या संवेदनशीलता?<br>परीक्षा अनुशासन जरूरी है… लेकिन क्या मानवीय परिस्थितियों के लिए लचीलापन नहीं होना चाहिए?<br>बीमारी या आकस्मिक स्थिति में वैकल्पिक परीक्षा,<br>देर से आने पर सीमित समय के साथ प्रवेश और<br>स्कूल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग जैसे कार्य किए जा सकते हैं।</p>



<p>अनन्या की कहानी सिर्फ एक खबर नहीं…यह एक समाज की जिम्मेदारी है। जब परीक्षा डर बन जाए<br>तो किताबें नहीं… व्यवस्था बदलने की जरूरत होती है।</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>PPL फुटबॉल टूर्नामेंट के पुरस्कार वितरण में पहुँचे अशोक कुमार सिंह उर्फ ‘रामबाबू’</title>
		<link>https://www.patnanow.com/ppl-rambabu-reach-in-pol-prize-distribution/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 May 2025 20:23:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Sports]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[गांव -शहर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[ARA]]></category>
		<category><![CDATA[Ashok Kumar Singh alies Rambabu Singh]]></category>
		<category><![CDATA[BHOJPUR]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
		<category><![CDATA[oppandeyreport]]></category>
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		<category><![CDATA[Rambabu Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Rambabu Singh Barahara]]></category>
		<category><![CDATA[rjd]]></category>
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		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[राज्य-स्तरीय खेल नीति का खाका भी किया साझा बड़हरा, 17 मई. बड़हरा प्रखंड के पड़रिया स्टेडियम में आयोजित एक दिवसीय पड़रिया प्रीमियर लीग (PPL) फुटबॉल टूर्नामेंट का मुख्य आकर्षण रहे राजद के युवा नेता एवं समाजसेवी अशोक कुमार सिंह उर्फ रामबाबू सिंह. बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने न केवल टूर्नामेंट का उद्घाटन किया, बल्कि मैदान में उतरकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए भावी खेल रणनीति के संकेत भी दिए. खिलाड़ियों से संवाद और उत्साहवर्धन उद्घाटन से पहले श्री सिंह ने दोनों टीमों—बड़हरा इलेवन तथा पड़रिया इलेवन—के प्रत्येक खिलाड़ी से हाथ मिलाकर उनका परिचय जाना. उन्होंने कहा- “कोई भी खेल स्वस्थ शरीर के साथ-साथ संयमित मन का निर्माण करता है. बिहार के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं, जरूरत है संसाधन व प्रोत्साहन की.” भावी खेल-नीति के संकेत मुख्य अतिथि ने मंच से घोषणा की कि राजद सरकार बनने पर— उन्होंने भरोसा जताया कि “हमारे गांव-कस्बों के खिलाड़ी भी जल्द ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार का परचम लहराएंगे.” विजेता और उपविजेता के बीच पुरस्कार वितरण रोमांचक टाई-ब्रेकर में पड़रिया इलेवन की 4-3 से जीत के बाद अशोक कुमार सिंह ने विजेता टीम को चमचमाती ट्रॉफी का पुरस्कार सौंपा. साथ ही उप-विजेता बड़हरा इलेवन को भी प्रोत्साहन पुरस्कार देकर उन्होंने खेल भावना की मिसाल पेश की. टूर्नामेंट को देखने के लिए दर्जनों गांवों के साथ-साथ आरा से आए सैकड़ों दर्शकों ने मुख्य अतिथि के वक्तव्य का तालियों से स्वागत किया. मंच पर सुभाष सिंह, पूर्व मुखिया संजय सिंह, पप्पू सिंह, लल्लू सिंह, रणधीर सिंह, शिवा सिंह सहित कई गणमान्य उपस्थित थे. बड़हरा से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>राज्य-स्तरीय खेल नीति का खाका भी किया साझा</strong></p>



<p>बड़हरा, 17 मई. बड़हरा प्रखंड के पड़रिया स्टेडियम में आयोजित एक दिवसीय पड़रिया प्रीमियर लीग (PPL) फुटबॉल टूर्नामेंट का मुख्य आकर्षण रहे राजद के युवा नेता एवं समाजसेवी अशोक कुमार सिंह उर्फ रामबाबू सिंह. बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने न केवल टूर्नामेंट का उद्घाटन किया, बल्कि मैदान में उतरकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए भावी खेल रणनीति के संकेत भी दिए.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="680" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392184-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-90271" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392184-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392184-650x432.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392184-1536x1020.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392184-2048x1360.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p><strong>खिलाड़ियों से संवाद और उत्साहवर्धन</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392192-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-90267" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392192-1-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392192-1-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392192-1-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>उद्घाटन से पहले श्री सिंह ने दोनों टीमों—बड़हरा इलेवन तथा पड़रिया इलेवन—के प्रत्येक खिलाड़ी से हाथ मिलाकर उनका परिचय जाना. उन्होंने कहा- “कोई भी खेल स्वस्थ शरीर के साथ-साथ संयमित मन का निर्माण करता है. बिहार के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं, जरूरत है संसाधन व प्रोत्साहन की.”</p>



<p><strong>भावी खेल-नीति के संकेत</strong></p>



<p>मुख्य अतिथि ने मंच से घोषणा की कि राजद सरकार बनने पर—</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>ग्राम-स्तरीय स्पोर्ट्स अकादमी स्थापित की जाएगी,</li>



<li>राजकीय खेल छात्रवृत्ति का दायरा बढ़ेगा,</li>



<li>ओलंपिक और एशियन गेम्स की तैयारियों के लिए स्पेशल ट्रेनिंग कैंप चलेगा.</li>
</ul>



<p>उन्होंने भरोसा जताया कि “हमारे गांव-कस्बों के खिलाड़ी भी जल्द ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार का परचम लहराएंगे.”</p>



<p><strong>विजेता और उपविजेता के बीच पुरस्कार वितरण</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="919" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392602-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-90268" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392602-scaled.jpg 919w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392602-583x650.jpg 583w" sizes="auto, (max-width: 919px) 100vw, 919px" /></figure>



<p>रोमांचक टाई-ब्रेकर में पड़रिया इलेवन की 4-3 से जीत के बाद अशोक कुमार सिंह ने विजेता टीम को चमचमाती ट्रॉफी का पुरस्कार सौंपा. साथ ही उप-विजेता बड़हरा इलेवन को भी प्रोत्साहन पुरस्कार देकर उन्होंने खेल भावना की मिसाल पेश की.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392190-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-90269" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392190-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392190-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001392190-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>टूर्नामेंट को देखने के लिए दर्जनों गांवों के साथ-साथ आरा से आए सैकड़ों दर्शकों ने मुख्य अतिथि के वक्तव्य का तालियों से स्वागत किया. मंच पर सुभाष सिंह, पूर्व मुखिया संजय सिंह, पप्पू सिंह, लल्लू सिंह, रणधीर सिंह, शिवा सिंह सहित कई गणमान्य उपस्थित थे.</p>



<p>बड़हरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अपराध मनोविज्ञान की इस पुस्तक में ऐसा क्या !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/is-pustak-me-aisa-kya/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Dec 2024 23:06:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACADEMIC]]></category>
		<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[bhagalpur]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
		<category><![CDATA[Law College Bhagalpur]]></category>
		<category><![CDATA[oppandeyreport]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[SSV college Kahalgaon]]></category>
		<category><![CDATA[VC Bhagalpur]]></category>
		<category><![CDATA[VC Bhagalpur University]]></category>
		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[विभाग के छात्रों से हो हर हफ्ते एक विषय पर समीक्षा व असाइनमेंट : VC कुलपति ने कहा अपराध से बचाव के लिए सजगता जरूरी भागलपुर,19 दिसम्बर. पुस्तक ज्ञान का केंद्र है. शब्दों की रचना के बाद से ही हमने अपने ज्ञान को संचित करने का काम ताम्र पत्रों से लेकर पुस्तकों तक किया है. हमने अपने समस्त ज्ञानों को इन्ही पुस्तकों में समेटने की शुरू से ही कोशिश की है जो विभिन्न कालों से अबतक जारी है. हम अपने एकत्रित ज्ञान को इन्ही पुस्तकों से ग्रहण करते हैं और इसी को समर्पित भी करते हैं. ज्ञान को ग्रहण और संचित करने की इसी कड़ी में कभी इन पुस्तकों का संग्रह अनुभवों और लगातार रिसर्च से निकले रचनाओं के कारण पाठकों के लिए इतना प्रगाढ़ हो जाता है कि वह पुस्तक सर्वप्रिय बन जाती है. पिछले दिनों मनोविज्ञान पर आधारित एक ऐसे ही एक पुस्तक का लोकार्पण हुआ जिसके लोकार्पण में ही कुलपति ने विभाग के छात्रों के बीच उक्त पुस्तक के किसी एक विषय को हर हफ्ते समीक्षा व असाइनमेंट कराने के लिए सुझाव तक दे दिया. यही नही उन्होंने ऐसे पुस्तक की कई कड़ियों में लिखने की बात तक कह डाली. &#8220;राजेश कुमार तिवारी &#8216;अपराध मनोविज्ञान: एक परिचय &#8216; के लेखन के लिए बधाई के पात्र हैं&#8221;. इसकी और कड़ियां लिखे जाने की जरूरत है जिससे लोगों में और जागरूकता फैले और साथ ही साथ विभाग के छात्रों को हर सप्ताह पुस्तक से संबंधित किसी एक विषय पर समीक्षा और असाइनमेंट कराने की जरूरत है जिससे उनमें अभी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>विभाग के छात्रों से हो हर हफ्ते एक विषय पर समीक्षा व असाइनमेंट : VC</strong></p>



<p><strong>कुलपति ने कहा अपराध से बचाव के लिए सजगता जरूरी</strong></p>



<p>भागलपुर,19 दिसम्बर. पुस्तक ज्ञान का केंद्र है. शब्दों की रचना के बाद से ही हमने अपने ज्ञान को संचित करने का काम ताम्र पत्रों से लेकर पुस्तकों तक किया है. हमने अपने समस्त ज्ञानों को इन्ही पुस्तकों में समेटने की शुरू से ही कोशिश की है जो विभिन्न कालों से अबतक जारी है. हम अपने एकत्रित ज्ञान को इन्ही पुस्तकों से ग्रहण करते हैं और इसी को समर्पित भी करते हैं. ज्ञान को ग्रहण और संचित करने की इसी कड़ी में कभी इन पुस्तकों का संग्रह अनुभवों और लगातार रिसर्च से निकले रचनाओं के कारण पाठकों के लिए इतना प्रगाढ़ हो जाता है कि वह पुस्तक सर्वप्रिय बन जाती है. पिछले दिनों मनोविज्ञान पर आधारित एक ऐसे ही एक पुस्तक का लोकार्पण हुआ जिसके लोकार्पण में ही कुलपति ने विभाग के छात्रों के बीच उक्त पुस्तक के किसी एक विषय को हर हफ्ते समीक्षा व असाइनमेंट कराने के लिए सुझाव तक दे दिया. यही नही उन्होंने ऐसे पुस्तक की कई कड़ियों में लिखने की बात तक कह डाली.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072778-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88199" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072778-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072778-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>&#8220;राजेश कुमार तिवारी &#8216;अपराध मनोविज्ञान: एक परिचय &#8216; के लेखन के लिए बधाई के पात्र हैं&#8221;. इसकी और कड़ियां लिखे जाने की जरूरत है जिससे लोगों में और जागरूकता फैले और साथ ही साथ विभाग के छात्रों को हर सप्ताह पुस्तक से संबंधित किसी एक विषय पर समीक्षा और असाइनमेंट कराने की जरूरत है जिससे उनमें अभी से सजगता और ज्ञान बना रहे. ये उद्गार ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ संजय कुमार चौधरी ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में व्यक्त किये. वे शहर के एक स्थानीय होटल में बीते दिन आयोजित सीनेटर तथा टीएनबी कालेज के मनोविज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ राजेश कुमार तिवारी की पुस्तक के लोकार्पण समारोह को सम्बोधित कर रहे थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072776-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88200" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072776-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072776-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम की शुरुआत दरभंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ चौधरी, उप मेयर डॉ सलाउद्दीन, लेखक डॉ राजेश तिवारी की मां मीना तिवारी,एसएसभी कॉलेज कहलगांव के प्राचार्य डॉ मिहिर मोहन मिश्रा, साहित्यकार डॉ शिव शंकर सिंह पारिजात और पुस्तक के लेखक डॉ राजेश कुमार तिवारी के द्वारा संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलन से हुई. संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन श्वेता पाठक ने तथा इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय रेलवे रेल यात्री संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु खेतान ने किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="578" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072774-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88201" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072774-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072774-650x367.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस मौके पर डॉ तिवारी की मां व साहित्यकार मीना तिवारी ने कहा कि आज एक प्यारा सपना पूरा हुआ और पुस्तक में राजेश ने अपने कानून और मनोविज्ञान के ज्ञान को एकीकृत करके बहुत ही सुंदर तरीके से पुस्तक को रूप दिया है. इस मौके पर स्वागत भाषण में डॉ तिवारी ने कहा कि उनके लिए यह लोकार्पण नहीं सामूहिक आशीर्वचन की आकांक्षा का कार्यक्रम है.</p>



<p>इस मौके पर विधि महाविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉ धीरज, अधिवक्ता राजेश राय, सबौर कॉलेज के शिक्षक डॉ मनोज कुमार, बड़ी बहन और अधिवक्ता रूपम, एस एम कॉलेज के डॉ मिथिलेश कुमार तिवारी, ताडर कॉलेज के डॉ भगत, हर्षवर्धन दीक्षित, प्रकाश पाठक, दीपक कुमार सिंह, डॉ वीरेंद्र कुमार मिश्रा, पीयूष झा,जयंत,अनुराधा खेतान,जिया और मिष्टी,प्रदीप भास्कर, अजीत चौबे, नंदकिशोर भारती, अभिषेक आदि शामिल थे.</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>



<p></p>
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