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	<title>O P Kashyap &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>भय बनी परीक्षा ने ली एक छात्रा की जान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:36:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[डर, दबाव और सन्नाटा… एक छात्रा की आखिरी रात क्या परीक्षा अब बच्चों के लिए भय का नाम बन गई है? आरा, 20 फरवरी। बिहार के आरा शहर से आई एक दर्दनाक घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। परीक्षा की तैयारी में जुटी एक इंटर की छात्रा ने उस मानसिक दबाव से हार मान ली, जिसे अक्सर हम “सामान्य तनाव” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं… बल्कि उस बढ़ते परीक्षा-दबाव का आईना है, जो आज हजारों छात्रों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है। एक होनहार छात्रा… अधूरी रह गई कहानीक्लब रोड निवासी Indian Railways में कार्यरत पिता सतीश पाण्डेय और गृहिणी माता पिंकी पाण्डेय की दूसरी बेटी अनन्या, जिसे घर में प्यार से “गौरी” कहा जाता था, पढ़ाई में लगी थी. अनन्या DAV जगदीशपुर की इंटर की छात्रा थी जिसका एक्जाम सेंटर सोनवर्षा के MDJ कॉलेज में पड़ा था. 18 फरवरी को वह मोरल साइंस का पेपर दे चुकी थी और पेपर अच्छा भी गया था। लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था… वह बीमार थी, जॉन्डिस से परेशान थी… और शुक्रवार 20 फरवरी को फिजिक्स का पेपर था. रात को पढ़ाई करते-करते उसने जीवन से ही हार मान ली. जब मां रात करीब 1 बजे देखने गईं तो कमरे से कोई जवाब नहीं आया… दरवाजा तोड़ा गया… और सामने ऐसा दृश्य था जिसे कोई भी परिवार कभी देखना नहीं चाहेगा. स्टडी रूम में अनन्या पंखे से दुपट्टे में झूलती एक अतीत बन चुकी थी. टेबल पर रखा था [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>डर, दबाव और सन्नाटा… एक छात्रा की आखिरी रात</strong></p>



<p><strong>क्या परीक्षा अब बच्चों के लिए भय का नाम बन गई है?</strong></p>



<p>आरा, 20 फरवरी। बिहार के आरा शहर से आई एक दर्दनाक घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। परीक्षा की तैयारी में जुटी एक इंटर की छात्रा ने उस मानसिक दबाव से हार मान ली, जिसे अक्सर हम “सामान्य तनाव” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं… बल्कि उस बढ़ते परीक्षा-दबाव का आईना है, जो आज हजारों छात्रों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है।</p>



<p><strong>एक होनहार छात्रा… अधूरी रह गई कहानी</strong><br>क्लब रोड निवासी Indian Railways में कार्यरत पिता सतीश पाण्डेय और गृहिणी माता पिंकी पाण्डेय की दूसरी बेटी अनन्या, जिसे घर में प्यार से “गौरी” कहा जाता था, पढ़ाई में लगी थी. अनन्या DAV जगदीशपुर की इंटर की छात्रा थी जिसका एक्जाम सेंटर सोनवर्षा के MDJ कॉलेज में पड़ा था.</p>



<p>18 फरवरी को वह मोरल साइंस का पेपर दे चुकी थी और पेपर अच्छा भी गया था। लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था… वह बीमार थी, जॉन्डिस से परेशान थी… और शुक्रवार 20 फरवरी को फिजिक्स का पेपर था. रात को पढ़ाई करते-करते उसने जीवन से ही हार मान ली. जब मां रात करीब 1 बजे देखने गईं तो कमरे से कोई जवाब नहीं आया… दरवाजा तोड़ा गया… और सामने ऐसा दृश्य था जिसे कोई भी परिवार कभी देखना नहीं चाहेगा. स्टडी रूम में अनन्या पंखे से दुपट्टे में झूलती एक अतीत बन चुकी थी. टेबल पर रखा था एक छोटा सा सुसाइड नोट, जिसमें परीक्षा, बीमारी और खुद को बोझ समझने की पीड़ा साफ झलक रही थी.</p>



<p><strong>सुसाइड नोट में क्या लिखा</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="859" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015800-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95107" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015800-scaled.jpg 859w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015800-545x650.jpg 545w" sizes="(max-width: 859px) 100vw, 859px" /></figure>



<p>मेरे से नहीं होश है अब। मैं एग्जाम नहीं दे पाऊंगी मेरा बोर्ड्स है मेरी तबीयत ही खराब रहती है हमेशा। सब मेरी गलती है। मेरे चलते मेरे पेरेंट्स परेशान है बट हो गया… अब और नहीं… मैं जा रही हूं और किसी के चलते नहीं खुद से जा रही हूं। मम्मी डैडी अपना ध्यान रखिएगा। दीदी बाबू तुम भी…</p>



<p>बाय<br>अनन्या/ गौरी</p>



<p><strong>एक सुसाइड नोट… और हजार सवाल</strong><br>अपने छोड़े सुसाइड नोट में उसने लिखा था कि वह बीमार रहती है… परीक्षा नहीं दे पाएगी… माता-पिता परेशान हैं… और वह किसी के कारण नहीं, खुद से यह कदम उठा रही है।</p>



<p>यह शब्द सिर्फ एक छात्रा की निराशा नहीं… बल्कि उस अदृश्य डर की आवाज हैं। फेल होने का डर… पीछे छूट जाने का डर… और उम्मीदों पर खरा न उतर पाने का डर।</p>



<p><strong>क्या परीक्षा अब डर का दूसरा नाम बन गई है?</strong><br>आज परीक्षा सिर्फ ज्ञान की नहीं… मानसिक सहनशीलता की भी परीक्षा बनती जा रही है। देर से पहुंचने पर केंद्र में प्रवेश नहीं, ट्रैफिक जाम या स्वास्थ्य समस्या की कोई राहत नहीं,“एक मौका चूक गए… तो साल बर्बाद” की मानसिकता इन परिस्थितियों में छात्र परीक्षा को अवसर नहीं… अंतिम निर्णय की तरह देखने लगते हैं।</p>



<p>हाल ही में मसौढ़ी में भी परीक्षा से जुड़ी निराशा के कारण एक बच्ची ने ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी। दो अलग घटनाएं… लेकिन कारण एक परीक्षा का असहनीय दबाव।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="593" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95108" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-650x377.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/1001015801-1536x890.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अनन्या के पिता रोते हुए सिर्फ इतना कह पाए -“हमने कभी उस पर पढ़ाई का दबाव नहीं बनाया… समझ ही नहीं पाए कि उसने ऐसा क्यों किया…”यही सबसे बड़ा सवाल है &#8211; बच्चे कब चुपचाप टूट जाते हैं… हमें पता ही नहीं चलता।</p>



<p><strong>विशेषज्ञ क्या कहते हैं?</strong><br>मनोवैज्ञानिकों के अनुसार परीक्षा तनाव के प्रमुख कारण:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>असफलता का भय</li>



<li>स्वास्थ्य समस्याओं के साथ पढ़ाई का दबाव</li>



<li>“परफेक्ट होना ही पड़ेगा” की सोच</li>



<li>तुलना और सामाजिक अपेक्षाएं</li>



<li>एक ही परीक्षा को जीवन का फैसला मान लेना<br>जब इन सबके साथ कठोर परीक्षा नियम जुड़ते हैं, तो संवेदनशील बच्चे इसे जीवन-मरण का प्रश्न मान लेते हैं।</li>
</ul>



<p>“फेल होना जीवन की हार नहीं” यह संदेश सभी को देना चाहिए। क्या हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं… या उन्हें डरना सिखा रहे हैं? एक छात्रा चली गई… लेकिन पीछे छोड़ गई चेतावनी । परीक्षा से ज्यादा जरूरी है जीवन। यदि आपके घर में भी परीक्षार्थी है तो ध्यान रखें</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>उनसे रोज खुलकर बात करें</li>



<li>सिर्फ रिजल्ट नहीं, उनकी भावनाएं पूछें</li>



<li>बीमारी या थकान को हल्के में न लें</li>



<li>तुलना बिल्कुल न करें</li>



<li>जरूरत हो तो काउंसलिंग लें</li>
</ul>



<p>जरूरत क्या है ..सख्ती या संवेदनशीलता?<br>परीक्षा अनुशासन जरूरी है… लेकिन क्या मानवीय परिस्थितियों के लिए लचीलापन नहीं होना चाहिए?<br>बीमारी या आकस्मिक स्थिति में वैकल्पिक परीक्षा,<br>देर से आने पर सीमित समय के साथ प्रवेश और<br>स्कूल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग जैसे कार्य किए जा सकते हैं।</p>



<p>अनन्या की कहानी सिर्फ एक खबर नहीं…यह एक समाज की जिम्मेदारी है। जब परीक्षा डर बन जाए<br>तो किताबें नहीं… व्यवस्था बदलने की जरूरत होती है।</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वोट डालने के लिए मुम्बई से आरा पहुँचे एक्टर, निर्देशक व म्यूजिक डायरेक्टर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/reach-home-from-mumbai-for-voting/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 May 2024 16:11:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आरा, 25 मई. भारत विविधताओं का देश है. यहाँ विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के बाद भी लोगों के जीवन के कई रंग जिस आपसी प्रेम में सराबोर रहते हैं वही इसे औरों से अलग बनाता है. इस देश में जहाँ होली, छठ, ईद, पोंगल, और लोहरी जैसे लोक-पर्वों में लोग अपने जन्म-स्थली पहुँच उस पर्व के लिए आतुर और समर्पित रहते हैं वैसा ही एक और पर्व है भारत का, जिसके लिए भारत के हर प्रदेश के लोग वैसे ही समर्पित रहते हैं क्योंकि यह वह महापर्व है जो विश्व में भारत को सबसे अलग और इकलौता बनाता है. जी हाँ हम बात कर रहे हैं लोकतंत्र के महापर्व मतदान का. इस महापर्व की चर्चा तब और खास हो जाती है जब चुनाव का मौसम आ जाता है क्योंकि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है. ऐसे में इस महापर्व की चर्चा न हो तो बात बेमानी लगती है. लोकतंत्र के इस महा पर्व पर देश की मायानगरी मुंबई में अपने प्रदेश से जा वहां अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता,लेखक व निर्देशक ओम कश्यप(ओ पी कश्यप), संगीत निर्देशक पप्पू श्रीवास्तव के साथ पत्रकार व निर्देशक ओ पी पांडेय शनिवार को अपने होम टाउन आरा पहुँचे. वे लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में होने वाले 1 जून को अपना मतदान करेंगे. यह उनलोगों के लिए एक विशेष खबर है जो लोकतंत्र के ढाँचे वाले सर्वश्रेष्ठ देश में रहने के बाद भी अपने मत का महत्व नही समझते हैं. मतदान ही मजबूत लोकतंत्र का आधार है जितना अधिक मतदान होगा लोगों [&#8230;]]]></description>
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<p>आरा, 25 मई. भारत विविधताओं का देश है. यहाँ विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के बाद भी लोगों के जीवन के कई रंग जिस आपसी प्रेम में सराबोर रहते हैं वही इसे औरों से अलग बनाता है. इस देश में जहाँ होली, छठ, ईद, पोंगल, और लोहरी जैसे लोक-पर्वों में लोग अपने जन्म-स्थली पहुँच उस पर्व के लिए आतुर और समर्पित रहते हैं वैसा ही एक और पर्व है भारत का, जिसके लिए भारत के हर प्रदेश के लोग वैसे ही समर्पित रहते हैं क्योंकि यह वह महापर्व है जो विश्व में भारत को सबसे अलग और इकलौता बनाता है. जी हाँ हम बात कर रहे हैं लोकतंत्र के महापर्व मतदान का. इस महापर्व की चर्चा तब और खास हो जाती है जब चुनाव का मौसम आ जाता है क्योंकि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है. ऐसे में इस महापर्व की चर्चा न हो तो बात बेमानी लगती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="712" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595569-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84417" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595569-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595569-650x452.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595569-1536x1067.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595569-2048x1423.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p>लोकतंत्र के इस महा पर्व पर देश की मायानगरी मुंबई में अपने प्रदेश से जा वहां अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता,लेखक व निर्देशक ओम कश्यप(ओ पी कश्यप), संगीत निर्देशक पप्पू श्रीवास्तव के साथ पत्रकार व निर्देशक ओ पी पांडेय शनिवार को अपने होम टाउन आरा पहुँचे. वे लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में होने वाले 1 जून को अपना मतदान करेंगे. यह उनलोगों के लिए एक विशेष खबर है जो लोकतंत्र के ढाँचे वाले सर्वश्रेष्ठ देश में रहने के बाद भी अपने मत का महत्व नही समझते हैं. मतदान ही मजबूत लोकतंत्र का आधार है जितना अधिक मतदान होगा लोगों की व्यपकता उतनी सटीक होगी जो सरकार चुनने में उन्हें एक दृढ़ता देगी. क्योंकि कमजोर सरकार बनने के बाद सबसे ज्यादा कमजोर लोक ही होगा. इस साल चुनाव में वोट डालने के लिए न सिर्फ देश के विभिन्न हिस्सों से लोग अपने क्षेत्र में पहुँच रहे हैं बल्कि विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय भी अपना मतदान करने के लिए भारत आ रहे हैं. इन सभी का मतदान के लिए आना निश्चय तौर पर उन लोगों और नई पीढ़ी के लिए एक जागरूकता है जो चुनाव में अपने मत के महत्व को नजरअंदाज करते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="583" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595571-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84420" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595571-scaled.jpg 583w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595571-370x650.jpg 370w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595571-874x1536.jpg 874w" sizes="auto, (max-width: 583px) 100vw, 583px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="677" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595570-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84418" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595570-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595570-650x430.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595570-1536x1016.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000595570-2048x1354.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>पहले लोक-पर्वों पर अमूमन बाहर कमाने वाले अपने घरों में वापस लौटते थे ताकि परिवार के साथ लोक-पारम्परिक पर्व को धूमधाम से मना सकें और आगे की पीढ़ी तक वह परम्परा जिंदा रहे लेकिन लोकतंत्र के इस महा पर्व पर भी लोग अपने घरों को लौट रहे ताकि वे वोट देकर इस महापर्व को मजबूती दे सकें और अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्य का निर्वहन कर सकें. लोकतंत्र में लोक जबतक मजबूत नही होगा तंत्र बिखर जाएगा क्योंकि लोक ही अपने लिए सेवक तय करता है क्योंकि लोकतंत्र में लोक राजा होता है और राजा अपने कार्यों के लिए जिसे चुनता है वह उसका सेवक होता है तभी तो देश के प्रधानमंत्री भी अपने आप को प्रधान सेवक कहते हैं. लोकतंत्र को यह मजबूती अब नई पीढ़ी से मिलना शुरू हो गया है और ऐसे ही सजग लोग इसे निरन्तर मजबूती दे रहे हैं.</p>



<p>आरा से <strong>सत्य प्रकाश सिंह</strong> की रिपोर्ट</p>
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		<item>
		<title>हंगामा पर हंगामेदार अराइवल अरावन का</title>
		<link>https://www.patnanow.com/hangame-dar-web-series-on-hangama-arawan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 May 2024 05:45:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लोकल मेकिंग कर दर्शकों को लोकल मेकर ने बनाया अपना मुरीद एक बेहतरीन हॉरर कॉमेडी वेब सीरीज आरा,8 मई. हर इंसान के अंदर एक हीरो होता है और उसे वह पर्दे पर लाने के लिए ताउम्र कई तरह की कोशिशें करता रहता है. लेकिन बहुत कम लोग ही ऐसे में सफल हो पाते हैं. लेकिन कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो ऐसे सपने को अपनी धरती पर ही पूरा करने का सपना न सिर्फ देखते हैं बल्कि सपनों को आंखों तक पालने वालों को इसका हिस्सा भी बना डालते हैं. ऐसे ही टीम की है आज बात कर रहे हैं जिन्होंने अपने सपने को साकार कर लोकल लोगों को वोकल बनाने का काम किया है. भोजपुर की धरती के एक होनहार शख्स ने अपने टैलेंट का परिचय दिया है. पहली बार निर्देशन से अपनी शुरुआत करने वाले आनंद कुमार ने अरावन (Aravan) नाम की वेब-सीरीज बनाई है जिसका कंटेंट लीक से हटकर है. आनन्द कुमार जगदीशपुर के रहने वाले है. वीर बाँकुड़ा बाबू कुंवर सिंह की वीरता वाली धरती के इस लाल के अंदर भी वही जोश है अपने सपने और काम को लेकर, हो भी क्यों न आखिर उस मिट्टी की ही ये विशेषता है जो आपको जुनूनी बना देता है. छोटी सी इस जगह से निकल मुंबई में आनंद कुमार ने डिजनी स्टार नेटवर्क के लिए एडिटिंग सुपरवाइजर का काम किया और वहां से एक दशक का अनुभव लेने के बाद निर्देशन करने का फैसला लिया. फिर कल्पना की उड़ान में कुछ क्रिएटिव दोस्तों का साथ मिला [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>लोकल मेकिंग कर दर्शकों को लोकल मेकर ने बनाया अपना मुरीद</strong></p>



<p><strong>एक बेहतरीन हॉरर कॉमेडी वेब सीरीज</strong></p>



<p>आरा,8 मई. हर इंसान के अंदर एक हीरो होता है और उसे वह पर्दे पर लाने के लिए ताउम्र कई तरह की कोशिशें करता रहता है. लेकिन बहुत कम लोग ही ऐसे में सफल हो पाते हैं. लेकिन कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो ऐसे सपने को अपनी धरती पर ही पूरा करने का सपना न सिर्फ देखते हैं बल्कि सपनों को आंखों तक पालने वालों को इसका हिस्सा भी बना डालते हैं. ऐसे ही टीम की है आज बात कर रहे हैं जिन्होंने अपने सपने को साकार कर लोकल लोगों को वोकल बनाने का काम किया है.</p>



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<p>भोजपुर की धरती के एक होनहार शख्स ने अपने टैलेंट का परिचय दिया है. पहली बार निर्देशन से अपनी शुरुआत करने वाले <em><strong>आनंद कुमार</strong></em> ने अरावन (Aravan) नाम की वेब-सीरीज बनाई है जिसका कंटेंट लीक से हटकर है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556838-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84061" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556838-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556838-488x650.jpg 488w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p> आनन्द कुमार जगदीशपुर के रहने वाले है. वीर बाँकुड़ा बाबू कुंवर सिंह की वीरता वाली धरती के इस लाल के अंदर भी वही जोश है अपने सपने और काम को लेकर, हो भी क्यों न आखिर उस मिट्टी की ही ये विशेषता है जो आपको जुनूनी बना देता है.</p>



<p>छोटी सी इस जगह से निकल मुंबई में आनंद कुमार ने डिजनी स्टार नेटवर्क के लिए एडिटिंग सुपरवाइजर का काम किया और वहां से एक दशक का अनुभव लेने के बाद निर्देशन करने का फैसला लिया. फिर कल्पना की उड़ान में कुछ क्रिएटिव दोस्तों का साथ मिला और कहानी गढ़ &#8216;अरावन&#8217; की शुरुआत हुई. फ़िल्म हो या वेब सिरीज उसको बनाने के लिए सबसे पहले धन की जरूरत होती है और सपने यही धराशायी हो जाते हैं. लेकिन आनंद और उनकी टीम से जुड़े लोग तकनीकी रूप से मजबूत थे इसलिए उन्होंने स्टार कास्ट और मुंबई के भारी खर्चे की जगह अपने क्षेत्र और यहाँ के लोगों को चुना.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="718" height="824" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556818.jpg" alt="" class="wp-image-84067" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556818.jpg 718w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556818-566x650.jpg 566w" sizes="auto, (max-width: 718px) 100vw, 718px" /></figure>



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<p>अरावन की पूरी शूटिंग भोजपुर जिला में हुई है. काबिले तारीफ की बात यह है कि कलाकारों से लेकर तकनीशियन तक सभी स्थानीय ही इसमें जुड़े हैं. आप दूसरे शब्दों में यह कह सकते हैं कि फ़िल्म इंडस्ट्री के समकक्ष अपने जिले, अपनी मिट्टी पर एक इंडस्ट्री गढ़ने की यह छोटी सी कोशिश है.<br>यानि एक निर्देशक द्वारा लोकल को वोकल बनाने की हिम्मत उसके पहले काम में करना किसी चट्टानी दृढ़ इच्छा शक्ति से कम नही है. कहा जाता है कि जब आप किसी कठिन कार्य के लिए कोशिश करते हैं तो पूरी प्राकृतिक शक्तियाँ आपका सहयोग करती हैं. इस कोशिश में साथ मिला निर्माता के रूप में आरा के ही गोढना निवासी प्रवीण कुमार और सदय कुमार का. ये ऐसे सक्रिय समाजसेवी हैं जिन्होंने कई स्थानीय लोगो को रोजगार देकर एक मिसाल कायम किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="719" height="483" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556846.jpg" alt="" class="wp-image-84069" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556846.jpg 719w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556846-650x437.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 719px) 100vw, 719px" /></figure>



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<p>वही इस वेब सीरीज के क्रिएटिव प्रोड्यूसर हैं <em><strong>ओ पी लीला पांडेय</strong></em>, जो किसी परिचय के मोहताज नही हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="674" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000562537-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84060" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000562537-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000562537-1-650x428.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000562537-1-1536x1011.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000562537-1-2048x1348.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p> रंगमंच से मीडिया और फिर फ़िल्म इंडस्ट्री तक का सफर इनके जुझारूपन की किसी फिल्मी कहानी से कम नही. अपने वर्षो के एक्सपीरियंस को ओ.पी. पाण्डेय ने इस वेब सीरिज में लगा दी है. प्री-प्रोडक्शन, प्रोडक्शन और पोस्ट प्रोडक्शन तीनों विभाग में क्रिएटिव स्तर पर ओ पी पांडेय ने टेलिविजन व बॉलीवुड के बड़े-बड़े फिल्म सीरियल कर अपने नाम का लोहा मनवाया है. उनकी क्रिएटिविटी &#8216;अरावन&#8217; वेब सीरीज में दिख रही है.</p>



<p>इस वेब सीरीज को अपने कलम से सजाने वाले रायटर भी आरा के ही रहने वाले <em><strong>ओ पी कश्यप</strong></em> हैं, जिन्होंने अपने लेखन और अभिनय से बॉलीवुड तक अपनी खास पहचान बनाई है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="771" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000563007-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84062" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000563007-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000563007-650x489.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000563007-1536x1156.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने अपनी कलम से इस कदर अरावन के स्क्रिप्ट को सजाया है की लोगो की तारीफ मिल रही है. किन्नरो का रहस्य जो किन्नर खुद नही जानते वैसे रहस्यों को उजागर किया है लेखक ने.</p>



<p>सीरीज की में लीड रोल हैं बिहार की बेटी स्वेता सागर. उनके काम से खुश होकर आरा के लोगों ने उन्हे अब जूनियर ऐश्वर्या के नाम से चर्चित कर दिया है. सुरजीत सिंह राजपूत जो &#8216;एम एस धोनी&#8217; जैसी बड़ी हिट फिल्म में अभिनय कर चुके है और बड़ी-बड़ी फिल्में 2024 में भी उनकी आने वाली है जिसमे पहली वेब सीरीज है अरावन. सुरजीत का अभिनय उच्चस्तरीय है और अरावन के लीड रोल में वो खूब जँच रहे है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="719" height="312" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556821.jpg" alt="" class="wp-image-84064" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556821.jpg 719w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000556821-650x282.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 719px) 100vw, 719px" /></figure>



<p>स्थानीय स्तर पर शूटिंग होने से न सिर्फ लोकल कलाकारों को काम मिला बल्कि आर्ट, लाइट, साउंड,से लेकर हर दिन उपयोग में आने कई तरह के वस्तुओं से जुड़ी संस्थानों या लोगों को इस प्रोजेक्ट से जुड़ने का मौका. चंदन कुमार, अरविंद राजा, शिवा और राकेश पटेल ने प्रोडक्शन को बखूबी संभाले रखा. लोकल को वोकल करने के लिए आनंद और उनकी टीम से जुड़े लोगों ने तो अपना काम बखूबी निभा वेब-सीरीज को हंगामा जैसे प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर अपना काम कर दिया. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि हंगामा पर आए इस वेब सीरीज को लोकल लोगों का कितना प्यार मिलता है. अपने लोकल कलाकारों को लोकल जनता कितना वोकल बनाती है ये तो कुछ दिन बाद पता चलेगा लेकिन लोगों की मिल रही प्रतिक्रिया से ये तो जाहिर हो गया है कि पहली नजर में उन्हें यह खूब भा रहा है.</p>



<p>आरा से <strong>सत्य प्रकाश सिंह</strong> की रिपोर्ट</p>
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