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		<title>भारंगम के लिए आरा से टीम रवाना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Feb 2024 07:07:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[9 फ़रवरी को होगी डिब्रूगढ़ में प्रस्तुति आरा,7 फरवरी(ओ पी पांडेय). राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (National School of Drama) नई दिल्ली द्वारा आयोजित 1 फरवरी से शुरू हुए भारत रंग महोत्सव में भाग लेने प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी,भोजपुर की टीम युवा निर्देशक मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में मंगलवार को आरा से रवाना हुई. आरा के ये कलाकार 9 फरवरी को असम के डिब्रुगढ़ में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर लिखित &#8220;गंगा स्नान&#8221; की प्रस्तुति देंगे. नाटक युवा निर्देशक मनोज कुमार सिंह द्वारा निर्देशित किया गया है, जिसकी अबतक दर्जन भर प्रस्तुति बिहार और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हो चुकी है. इस मौके पर शहर के प्रसिद्ध समाजसेवी विष्णु सिंह, युवा नेता अभय विश्वास भट्ट, रंगकर्मी अनिल कुमार तिवारी &#8216;दीपू&#8217; संगीतज्ञ लक्ष्मण दुबे व रंगकर्मी व शिक्षक सुधीर शर्मा ने आरा रेलवे स्टेशन पर कलाकारों को फुल माला पहना व मिठाई खिला कर रवाना किया. बताते चलें कि भारत रंग महोत्सव इस वर्ष अपना रजत जयंती समारोह मना रहा है. जिसमें अपनी प्रस्तुतियों के लिए देश-विदेश से कुल मिलाकर लगभग 850 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमें 62 नाटकों का चयन भारत रंग महोत्सव में प्रदर्शन के लिए किया गया है,जिसमें एक नाटक भोजपुर से भी है जो जिले के लिए सौभाग्य का बात है. इस चयन से न सिर्फ रंगकर्मियों व रंग दर्शकों के बीच एक खुशी की लहर है बल्कि छात्र-छात्राओं, युवाओं और बुद्धिजीवियों से लेकर हर ओर इसकी चर्चा है और लोग इसके लिए आरा के कलाकारों को साधुवाद देते देखे जा रहे हैं. चाय की दुकानों से लेकर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>9 फ़रवरी को होगी डिब्रूगढ़ में प्रस्तुति</strong></p>



<p>आरा,7 फरवरी(<strong>ओ पी पांडेय</strong>). राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (<strong>N</strong>ational <strong>S</strong>chool of <strong>D</strong>rama) नई दिल्ली द्वारा आयोजित 1 फरवरी से शुरू हुए भारत रंग महोत्सव में भाग लेने प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी,भोजपुर की टीम युवा निर्देशक मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में मंगलवार को आरा से रवाना हुई.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468163-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-82468" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468163.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468163-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468163-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



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<p>आरा के ये कलाकार 9 फरवरी को असम के डिब्रुगढ़ में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर लिखित &#8220;गंगा स्नान&#8221; की प्रस्तुति देंगे. नाटक युवा निर्देशक मनोज कुमार सिंह द्वारा निर्देशित किया गया है, जिसकी अबतक दर्जन भर प्रस्तुति बिहार और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हो चुकी है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468158-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-82469" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468158.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468158-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468158-768x346.jpg 768w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इस मौके पर शहर के प्रसिद्ध समाजसेवी विष्णु सिंह, युवा नेता अभय विश्वास भट्ट, रंगकर्मी अनिल कुमार तिवारी &#8216;दीपू&#8217; संगीतज्ञ लक्ष्मण दुबे व रंगकर्मी व शिक्षक सुधीर शर्मा ने आरा रेलवे स्टेशन पर कलाकारों को फुल माला पहना व मिठाई खिला कर रवाना किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468148-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-82471" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468148.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468148-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468148-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468148-1536x864.jpg 1536w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बताते चलें कि भारत रंग महोत्सव इस वर्ष अपना रजत जयंती समारोह मना रहा है. जिसमें अपनी प्रस्तुतियों के लिए देश-विदेश से कुल मिलाकर लगभग 850 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमें 62 नाटकों का चयन भारत रंग महोत्सव में प्रदर्शन के लिए किया गया है,जिसमें एक नाटक भोजपुर से भी है जो जिले के लिए सौभाग्य का बात है. इस चयन से न सिर्फ रंगकर्मियों व रंग दर्शकों के बीच एक खुशी की लहर है बल्कि छात्र-छात्राओं, युवाओं और बुद्धिजीवियों से लेकर हर ओर इसकी चर्चा है और लोग इसके लिए आरा के कलाकारों को साधुवाद देते देखे जा रहे हैं. चाय की दुकानों से लेकर साहित्यिक जगहों और खेल के मैदान तक इसकी चर्चा कुछ दिनों से खास और लोगों को इसकी प्रस्तुति के बाद रंग-महोत्सव के दर्शकों की प्रतिक्रिया का इंतजार है.</p>



<p><strong>पंकज त्रिपाठी हैं ब्रांड अम्बेसडर</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="328" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468177.jpg" alt="" class="wp-image-82473" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468177.jpg 600w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468177-350x191.jpg 350w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="480" height="360" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468178.jpg" alt="" class="wp-image-82472" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468178.jpg 480w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468178-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 480px) 100vw, 480px" /></figure>



<p>राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित भारत रंग महोत्सव के इस वर्ष रजत जयंती के ब्रांड अम्बेसडर व रंगदूत एन एस डी के पूर्व छात्र, रंगमंच व हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता पंकज त्रिपाठी बने है. इस वर्ष महोत्सव की थीम &#8221; वसुधैव कुटुंबकम, वन्दे भारंगम है. यह महोत्सव दिल्ली, मुंबई, डिब्रुगढ़, पुणे, पटना, श्रीनगर, भुवनेश्वर, कटक आदि सहित देश के 16 नगरों में आयोजित हो रहा है. जहाँ रूस, इटली, श्रीलंका सहित 8 विदेशी नाटकों के साथ आमंत्रित नाटकों सहित 150 नाटकों का मंचन होगा. महोत्सव का समापन 21 फरवरी को दिल्ली में होगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="379" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468179-650x379.jpg" alt="" class="wp-image-82474" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468179.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468179-350x204.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी के सचिव कमलेश कुंदन ने बताया कि भोजपुर जिले से यह पहला नाट्य दल है जो भारत रंग महोत्सव में अपने कला का प्रदर्शन करेगा. दल नायक तिरुपति नाथ ने कहा कि पूरी टीम इस महोत्सव में प्रदर्शन के लिए बहुत उत्साहित है. पिछले 25 दिनों से लगातार नाटक का अभ्यास कर रही है. टीम के कलाकारों ने भारंगम के लिए जम कर पसीना बहाया है. इस नाटक का संगीत निर्देशन कर रहें लोक संगीतकार श्याम शमीर्ला ने कहा कि इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के माध्यम से हमारे लोकनाट्य, लोक संस्कृति व लोक संगीत को अंतर्राष्ट्रीय मंच मिलना भोजपुर और भोजपुरी के लिए गौरव की बात है. नाटक में विभिन्न भूमिकाओं में साहेब लाल यादव, जीतेन्द्र प्रसाद, राजा, सुंदरम राज, मुकेश मुस्कान, दीपू पाण्डेय आदि है.</p>



<p class="has-white-color has-midnight-gradient-background has-text-color has-background has-link-color wp-elements-9ad3b74a1709f27533fd14300a2ad9e5"><strong>प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी से भारंगम के लिए जाने वाले ये हैं भोजपुर के गौरव :</strong></p>



<ul class="has-vivid-purple-color has-pale-ocean-gradient-background has-text-color has-background has-link-color wp-block-list wp-elements-c995568cda6dd43897d24397c4e7b768">
<li>मनोज कुमार सिंह</li>



<li>श्याम बाबु कुमार</li>



<li>पंकज कुमार राॅय</li>



<li>राजा बसंत</li>



<li>साहेब लाल यादव</li>



<li>जितेन्द्र कुमार (लड्डू)</li>



<li>लवकुश सिंह</li>



<li>मुकेश कुमार</li>



<li>राज कुमार</li>



<li>दीपु कुमार</li>



<li>सुन्दरम राज</li>



<li>अभय कुमार ओझा (कुली बाबा)</li>



<li>सुरज कान्त पाण्डेय</li>



<li>हरिशंकर पासवान (निराला जी)</li>



<li>शशिकान्त निराला</li>



<li>रौशन कुमार</li>



<li>मो. जाफर आलम</li>



<li>कमलेश कुन्दन</li>



<li>साधना श्रीवास्तव</li>



<li>रितु पाण्डेय</li>



<li>आशा पाण्डेय</li>



<li>रंजीता कुमारी मिश्रा</li>



<li>मेहन्दी राज</li>



<li>उर्मिला कुमारी</li>



<li>तिरुपति नाथ (मनोज श्रीवास्तव)</li>
</ul>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468145-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-82475" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468145.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468145-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468145-768x346.jpg 768w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आरा की नाट्य दल की इस सफलता पर नाटक के निर्देशक मनोज कुमार सिंह व पुरे नाट्य दल को वेद (संस्कार भारती बिहार अमित रौशन (बेगूसराय), अभय सिन्हा (पटना), रोहित त्रिपाठी (भिलाई छत्तीसगढ़) अशोक दास (असम्), तनवीर अख्तर (पटना इप्टा), अनिल कुमार तिवारी&#8217; दीपू&#8217; संयोजक आरा रंगमंच, श्रीधर शर्मा (भूमिका), मनोज कुमार सिंह (समाजसेवी), नागेंद्र पाण्डेय (संगीतकार,आरा) राकेश ठाकुर (प्रपौत्र भिखारी ठाकुर, कुतुबपुर), राम दास राही (लेखक), संजय राय (समाजसेवी), लक्ष्मण दुबे (शिक्षक), सुधीर शर्मा (लेखक व रंगकर्मी), चन्द्रभूषण पांडेय(रंग-गुरु/निर्देशक, अभिनव व ACT, आरा), रविंद्र भारती (वरिष्ठ रंगकर्मी व पत्रकार), अम्बुज आकाश (वरिष्ठ रंगकर्मी व लेखक) और ओ पी कश्यप (लेखक, युवा रंगकर्मी व सिने अभिनेता) सहित कई प्रबुद्धजनों ने सफल मंचन की शुभकामनाएँ दी हैं.</p>



<p></p>
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		<title>बालिका वधू की दादी सा ने कहा अलविदा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/balika-vadhu-ki-dadi-sa-ne-kiya-alvida/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Jul 2021 05:28:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[मुंबई,16 जुलाई. अपने अभिनय के बदौलत सपोर्टिंग कैरेक्टर के लिए 3 बार नेशनल अवार्ड जीतने वाली टेलीविजन और फ़िल्म अभिनेत्री सुरेखा सीकरी का मुंबई में निधन शुक्रवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से हो गया. वे काफी समय से बीमार चल रही थीं. 2020 में सुरेखा, ब्रेन स्ट्रोक की शिकार हो गई थीं. वे दूसरे ब्रेन स्ट्रोक की वजह से हुए कॉम्पलीकेशन्स से जूझ रही थीं. बालिका वधू सीरियल की दादी सा(कल्याणी देवी) के रूप में अपने अभिनय से उन्होंने लोगों के दिलो पर राज किया था. उनका अभिनय आने वाले समय तक लोगों के लिए अविष्मरणीय रहेगा. सुरेखा ने 1971 में नेशनल स्कूल और ड्रामा से अभिनय में ग्रेजुएशन किया था और संगीत नाटक अकादमी से 1989 का अवार्ड भी जीता. PNCB]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>मुंबई,16 जुलाई. अपने अभिनय के बदौलत सपोर्टिंग कैरेक्टर के लिए 3 बार नेशनल अवार्ड जीतने वाली टेलीविजन और फ़िल्म अभिनेत्री सुरेखा सीकरी का मुंबई में निधन शुक्रवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से हो गया. वे काफी समय से बीमार चल रही थीं. </p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Surekha-Sikri.jpg" alt="" class="wp-image-54238" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Surekha-Sikri.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Surekha-Sikri-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>2020 में सुरेखा, ब्रेन स्ट्रोक की शिकार हो गई थीं. वे दूसरे ब्रेन स्ट्रोक की वजह से हुए कॉम्पलीकेशन्स से जूझ रही थीं. बालिका वधू सीरियल की दादी सा(कल्याणी देवी) के रूप में अपने अभिनय से उन्होंने लोगों के दिलो पर राज किया था. उनका अभिनय आने वाले समय तक लोगों के लिए अविष्मरणीय रहेगा. सुरेखा ने 1971 में नेशनल स्कूल और ड्रामा से अभिनय में ग्रेजुएशन किया था और संगीत नाटक अकादमी से 1989 का अवार्ड भी जीता.</p>



<p>PNCB</p>
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			</item>
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		<title>रंग छतिसा के संस्थापक का निधन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/nahi-rehe-rang-chhattisagadh-ke-sansthapak/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 11 Apr 2021 10:04:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[चला गया कलाकार छोड़ गया सवाल हमारे चेहरों पर : दीपक तिवारी स्मृति शेष वह विस्तर पर रोज मरता रहा और उसका परिवार भी रोज तिल-तिल मरता रहा, पटना. रंग छत्तीसा के संस्थापक व शानदार अभिनेता, गायक,और नर्तक दीपक तिवारी का शनिवार को निधन हो गया. उनसा रंगकर्मी सदियों में एक होता है. वे भारत लोक रंगकर्म के ईश्वरीय देन थे जिन्हें रंगधुनी हबीब तनवीर ने ढूँढा था. 19 अक्टूबर 1959 को जन्में दीपक ने सितारा बिलासपुर के मंगला गांव से अपनी रंग यात्रा की शुरुआत की और दुनिया में अपने रंग का चमक बिखेर राजनांदगांव से शनिवार को विदा हो गया. सबको अपने अभिनय से अविभूत करने वाले दीपक ने बेहद कष्ट, और अभाव में आखिरी साँसे ली. दीपक तिवारी को बेहद करीब से जानने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय में कार्यरत सहायक प्रोफेसर एम के पांडेय ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. दीपक तिवारी को आइये जानते है उनकी जुबानी…. Patna now special उस रोज 2017 का संगीत नाटक अकादमी अवार्ड कलाकारों को हमेशा की तरह राष्ट्रपति भवन में मिलना था. मैं जैनेंद्र के साथ भिखारी ठाकुर के संगी कलाकार रामचंद्र मांझी के लिए गया हुआ था. पुरस्कारों के बाद भोजन के समय व्हील चेयर पर बैठे दीपक तिवारी पत्नी और नया थियेटर की कमाल कलाकार पूनम तिवारी (बाई) और उनकी बेटी से मुलाकात हुई. फिर थोड़ी बतकुच्चन हुई पर अफसोस हुआ कि दीपक न ठीक से बोल पा रहे थे, न ही अधिक हिलडुल रहे थे. पूनम उनको संभाल-संभाल कर सामने वाले की बात बता रहीं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>चला गया कलाकार छोड़ गया सवाल हमारे चेहरों पर : दीपक तिवारी स्मृति शेष</strong></p>



<p><strong>वह विस्तर पर रोज मरता रहा और उसका परिवार भी रोज तिल-तिल मरता रहा, </strong></p>



<p>पटना. रंग छत्तीसा के संस्थापक व शानदार अभिनेता, गायक,और नर्तक दीपक तिवारी का शनिवार को निधन हो गया. उनसा रंगकर्मी सदियों में एक होता है. वे भारत लोक रंगकर्म के ईश्वरीय देन थे जिन्हें रंगधुनी हबीब तनवीर ने ढूँढा था. 19 अक्टूबर 1959 को जन्में दीपक ने सितारा बिलासपुर के मंगला गांव से अपनी रंग यात्रा की शुरुआत की और दुनिया में अपने रंग का चमक बिखेर राजनांदगांव से शनिवार को विदा हो गया. सबको अपने अभिनय से अविभूत करने वाले दीपक ने बेहद कष्ट, और अभाव में आखिरी साँसे ली. दीपक तिवारी को बेहद करीब से जानने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय में कार्यरत सहायक प्रोफेसर <strong><em>एम के पांडेय</em></strong> ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. दीपक तिवारी को आइये जानते है उनकी जुबानी….</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-rounded"><img loading="lazy" decoding="async" width="597" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618135038242.jpg" alt="" class="wp-image-51644" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618135038242.jpg 597w, https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618135038242-348x350.jpg 348w, https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618135038242-250x250.jpg 250w" sizes="(max-width: 597px) 100vw, 597px" /><figcaption>प्रो. एम के पांडेय</figcaption></figure>



<p><em><strong>Patna now special</strong></em></p>



<p>उस रोज 2017 का संगीत नाटक अकादमी अवार्ड कलाकारों को हमेशा की तरह राष्ट्रपति भवन में मिलना था. मैं जैनेंद्र के साथ भिखारी ठाकुर के संगी कलाकार रामचंद्र मांझी के लिए गया हुआ था. पुरस्कारों के बाद भोजन के समय व्हील चेयर पर बैठे दीपक तिवारी पत्नी और नया थियेटर की कमाल कलाकार पूनम तिवारी (बाई) और उनकी बेटी से मुलाकात हुई. फिर थोड़ी बतकुच्चन हुई पर अफसोस हुआ कि दीपक न ठीक से बोल पा रहे थे, न ही अधिक हिलडुल रहे थे. पूनम उनको संभाल-संभाल कर सामने वाले की बात बता रहीं थी और साथिन की बात को समझ कर उनकी आँखों की चमक अभी भी मैं महसूस कर और देख सकता हूँ. उन्होंने उनके इलाज में साथियों के सहयोग के बावजूद कमी की बात कितने दर्द से बताया और सजल नेत्रों को छुपा ले गयी थी.<br>दीपक तिवारी जैसा रंगकर्मी सदियों में होता है. वह भारत लोक रंगकर्म को ईश्वरीय देन थे जिन्हें रंगधुनी हबीब तनवीर ने ढूँढा था. वह नया थियेटर के दूसरे कलाकारों की तरह नाचा से नहीं आये थे बल्कि उनकी यात्रा शहराती रंगकर्म और बरास्ते आर्केस्ट्रा आये थे. दीपक तिवारी टोटल रंगकर्मी थे. शानदार अभिनेता, गायक, नर्तक दीपक ने हबीब साहब कर लगभग सभी प्रमुख नाटकों में अभिनय किया और अपने समय में अपनी प्रतिभा से उन्होंने देश-विदेश में दर्शकों ही नही, बल्कि रंग समीक्षकों में भी अपनी पहचान बनाई.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="366" height="496" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618131801243.jpg" alt="" class="wp-image-51643" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618131801243.jpg 366w, https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618131801243-258x350.jpg 258w" sizes="(max-width: 366px) 100vw, 366px" /><figcaption>दीपक तिवारी(फ़ाइल फ़ोटो)</figcaption></figure>



<p>नया थियेटर पर गहरी जानकारी रखने वाले शोधार्थी, रंगकर्मी और शिक्षक आनंद पांडेय ने बताया कि &#8216;दीपक तिवारी वर्ष 1984 में हबीब तनवीर के ‘नया थियेटर’ से सम्बद्ध हुए. इस दौरान उन्होंने अनेक नाटकों में अभिनेता, गायक और नर्तक के रूप में अपनी विशिष्ट सहभागिता दी. आधुनिक रंगमंच और लोक रंगमंच के बीच तारतम्य स्थापित करते हुए दीपक तिवारी ने देह का प्रयोग करते हुए अभिनय के नये प्रतिमानों की स्थापना की.उनके द्वारा किये गये नाटकों में- चरणदास चोर, मिट्टी की गाड़ी, गांव के नाम ससुरार मोर नांव दमाद, आगरा बाज़ार, हिरमा की अमर कहानी, बहादुर कलारिन, लाल सोहरत राॅय, सोनसागर, सूत्रधार, जिस लाहौर नई देख्या…, देख रहे हैं नैन, कामदेव का अपना…, मुद्राराक्षस, सड़क, शाजापुर की शांतिबाई, जमादारिन आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे हैं.</p>



<p>दीपक तिवारी 2005 तक ‘नया थियेटर’ व हबीब तनवीर के साथ कार्य करने के पश्चात् छत्तीसगढ़ लौट आये. यहाँ आकर उन्होंने ‘रंग छत्तीसा’ नामक समूह की स्थापना की. इस नवीन समूह के माध्यम से दीपक ने मुन्शी प्रेमचन्द की प्रसिद्ध कहानी ‘लाटरी’ का नाट्य रूपांतरण कर उसका निर्देशन स्वयं किया. हालांकि इसके बाद भी वे ‘नया थियेटर’ व हबीब तनवीर से जुड़े हुए थे तथा हबीब साहब द्वारा बुलाये जाने पर दीपक तिवारी नया थियेटर की प्रस्तुतियों में भी प्रस्तुतियाँ देते रहे.&#8221;</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">इसी बीते मार्च में आज़मगढ़ इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के ड्रामा विभाग के अध्यक्ष और रानावि एलुमनी डॉ. योगेंद्र चौबे (Yogendra Choubey ) से उनकी फिल्म &#8216; गाँजे की कली&#8217; पर बात करते हुए हम दोनों ने नया थियेटर पर थोड़ी बात की लेकिन मैं व्यक्तिगत तौर पर दीपक तिवारी को नायिका के पिता के रोल में (शारीरिक अक्षमता के बावजूद )देखकर खुश हुआ. दीपक के लिए अभिनय क्या था आप उस फिल्म में उनके किरदार को निभाने की क्षमता से देख सकते हैं. हमने थोड़ी बात दीपक तिवारी के बारे में भी की. मंच पर भी और उनकी हालिया स्थिति पर. उनके युवा बेटे सूरज की असमय मृत्यु से परिवार निकला भी नहीं था कि लंबे समय से बीमार चल रहे दीपक तिवारी ने सांसारिक मंच से विदा ले ली. अब परिवार में बेटी और उनकी कलाकार पत्नी पूनम तिवारी रह गए है. दीपक तिवारी का जाना कोई आम मौत नहीं है, यह एक प्रवृति के पनपने और उसके हमारे आसपास दिनों-दिन गहरे होते जाने की भी सूचना है. एक रंगकर्मी जिसने &#8216;भारत के प्रायः सभी प्रमुख नगरों व महानगरों के साथ-साथ लंदन, पेरिस, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, रूस, मिस्र, शिकागो आदि देशों में भी प्रस्तुतियाँ दी.&#8217; वह अपने स्वास्थ्य के गिरने पर किसी भी तरह के सरकारी मदद से महरूम रहा. जो मदद भी आई वह ऊंट के मुँह में जीरा हुई! दीपक तिवारी की तबियत लंबे समय से खराब थी, उनका जवान रंगकर्मी बेटा भी इलाज के अभाव में गया और अब पिता, यह मृत्यु हमारे सांस्कृतिक नीतियों और रंगकर्म के नीति- नियंताओ और उनके बनाए खोखले नियमों की उपज है, जहाँ एक कलाकार सरकार से उन सांस्थानिक सहयोग के अभाव में इस तरह से इस संसार से विदा लेता है. वे कोई और हैं जिनको रंगकर्म ने दुनियावी ऊँचाईयाँ दी है वहाँ लोक उपस्थित नहीं वहां एक मंचीय अभिनेता किस तरह से सर्वाइव करता है किस तरह से जीवन जीने ओर मजबूर होता है, उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं.</p>



<p>इस लॉकडाउन में रंगकर्मियों और प्रदर्शनकारी कलाओं के कलाकारो की जो हालात हुई उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है. कईयों को तो क्या-क्या काम करके जिंदा रहने को लड़ाई लड़नी पड़ी वह कल्पनातीत है. सरकारें या हमारी बनाई व्यवस्था में दीपक तिवारी जैसे कलाकार लंबे समय से जूझकर बिस्तर पर पड़े-पड़े एक रचनात्मक छटपटाहट लिए चले गए है कुछ लाइन में है अपनी बारी के. &#x1f622; पूनम तिवारी को याद करता हूँ जब वह अपने जवान बेटे की मौत पर हबीब तनवीर के बहादुर कलारिन का वह विदा गीत गाती दिखीं &#8211; &#8216;चोला माटी के है राम, एकर का भरोसा चोला माटी के&#8217;- कैसे कहा जाए कि वह किस मिट्टी की बनी हैं, क्योंकि महमूद फारूकी के नया थियेटर पर बनाये डॉक्यूमेंट्री में उनका आगमन हुलसाता है जब वह पर्दे पर मुस्कुराकर चहकते हुए कहती है &#8211; पूनम जब मरिहै तब नाचे गावे बर छोड़िहे<br>-(मुझे छतीसगढ़ी नहीं आती, यह संवाद यादाश्त आधारित है) पूनम की वह चहक नीति नियंताओं ने छीनी है क़ुछ हमारी यथास्थितिवादी मानसिकता ने.</p>



<p>दीपक जैसे कलाकार जाते रहेंगे और हम एक सतत अफसोस के साथ यह कहकर आगे बढ़ जाएंगे कि &#8216;शो मस्ट गो ऑन&#8217;- पर हम भी यह जानते हैं कि इस शब्द के भीतर की पीड़ा क्या है! जोकर को देखा है न आपने! जिसके रंगे चेहरे पर मसखरी थी और पार्श्व में उसकी माँ का शव. यही विरोधाभासी स्थिति में आज के कस्बाई रंगकर्मी और बाकी भी जूझ रहे हैं. 19 अक्टूबर 1959 का यह सितारा बिलासपुर के मंगला गांव से निकला और दुनिया जहान में चमक, राजनांदगांव से कल विदा हो गया, बेहद कष्ट में, अभाव में. मरते समाज को जीवन देने वाली बात कलाकारों के लिए कही जाती है पर यहाँ एक कलाकार वर्षों से बिस्तर पर रोज मर रहा था साथ मे उसके घर वाले तिल-तिल मर रहे थे और हम… हमने उनके हिस्से केवल तालियाँ दी उनके प्रदर्शन पर. यह हमारी नैतिकता की मौत, हमारी संवेदनाओं की मौत है. सवाल तो है कि आखिर इस तरह के कलाकार इस तरह से तड़पते जूझते कैसे विदा हो जाते हैं? जाओ दीपक तिवारी जाओ विराट, जाओ छछान, जाओ जाओ जाओ ढल जाओ अब तुम्हरा रोल खत्म हुआ. पर्दा गिरता है.<br>श्रद्धांजलि &#x1f490;&#x1f490;&#x1f490;<br>&#8220;चोला माटी के है राम एकर का भरोसा चोला माटी के है राम&#8221;</p>



<p><strong>साभार : एम के पांडेय<br>प्रस्तुति : ओ पी पांडेय</strong></p>
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