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		<title>कश्मीर की नींव भी बिहार के सम्राट ने रखी थी !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bold-words-by-kshama-kaul-from-the-stage-of-rajgir/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 05:19:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजगीर के मंच से क्षमा कौल का इतिहास और वर्तमान पर बेबाक बयान संवाद और लोकतंत्र पर बोलते हुए मंच से छलका कश्मीरी लेखिका का दर्द कश्मीर से विस्थापन का दर्द भी साझा किया, बोलीं &#8211; मातृभूमि छिन जाए तो संवाद खोखला लगता है राजगीर, 16 मार्च (ओ पी पांडेय)। राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के एक सत्र में कश्मीरी लेखिका क्षमा कौल ने कश्मीर के इतिहास, लोकतंत्र और विस्थापन के दर्द पर बेहद बेबाक तरीके से अपनी बात रखी। “संवाद और लोकतंत्र” विषय पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक ऐतिहासिक तथ्य की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कश्मीर के श्रीनगर शहर की स्थापना सम्राट अशोक ने की थी, जिनकी राजधानी पाटलिपुत्र यानी आज का पटना था। उन्होंने कहा कि कश्मीर और बिहार का रिश्ता हजारों वर्ष पुराना है। सम्राट अशोक ने अपने पुत्र जालोक को कश्मीर का शासन सौंपा था, जिसने वहां शैव और बौद्ध दोनों परंपराओं को समान सम्मान दिया। उनके अनुसार यह इतिहास में धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक भावना का एक अद्भुत उदाहरण था, जिसे आज की पीढ़ी लगभग भूल चुकी है। लेखिका ने आदि शंकराचार्य, अभिनवगुप्त और जयंत भट्ट जैसे विद्वानों का उल्लेख करते हुए कश्मीर की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कभी ज्ञान और दर्शन की भूमि रहा कश्मीर आज विस्थापन और पीड़ा की कहानी बन गया है। लोकतंत्र और संवाद की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए क्षमा कौल का दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति से उसकी मातृभूमि और पहचान छिन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राजगीर के मंच से क्षमा कौल का इतिहास और वर्तमान पर बेबाक बयान</strong></p>



<p><strong>संवाद और लोकतंत्र पर बोलते हुए मंच से छलका कश्मीरी लेखिका का दर्द</strong></p>



<p><strong>कश्मीर से विस्थापन का दर्द भी साझा किया, बोलीं &#8211; मातृभूमि छिन जाए तो संवाद खोखला लगता है</strong></p>



<p>राजगीर, 16 मार्च <strong>(ओ पी पांडेय</strong>)। राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के एक सत्र में कश्मीरी लेखिका क्षमा कौल ने कश्मीर के इतिहास, लोकतंत्र और विस्थापन के दर्द पर बेहद बेबाक तरीके से अपनी बात रखी। “संवाद और लोकतंत्र” विषय पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक ऐतिहासिक तथ्य की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कश्मीर के श्रीनगर शहर की स्थापना सम्राट अशोक ने की थी, जिनकी राजधानी पाटलिपुत्र यानी आज का पटना था।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1020" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-scaled.png" alt="" class="wp-image-95733" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-scaled.png 1020w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-647x650.png 647w" sizes="(max-width: 1020px) 100vw, 1020px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि कश्मीर और बिहार का रिश्ता हजारों वर्ष पुराना है। सम्राट अशोक ने अपने पुत्र जालोक को कश्मीर का शासन सौंपा था, जिसने वहां शैव और बौद्ध दोनों परंपराओं को समान सम्मान दिया। उनके अनुसार यह इतिहास में धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक भावना का एक अद्भुत उदाहरण था, जिसे आज की पीढ़ी लगभग भूल चुकी है।</p>



<p>लेखिका ने आदि शंकराचार्य, अभिनवगुप्त और जयंत भट्ट जैसे विद्वानों का उल्लेख करते हुए कश्मीर की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कभी ज्ञान और दर्शन की भूमि रहा कश्मीर आज विस्थापन और पीड़ा की कहानी बन गया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95734" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-1152x1536.jpg 1152w" sizes="(max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p><br>लोकतंत्र और संवाद की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए क्षमा कौल का दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति से उसकी मातृभूमि और पहचान छिन जाती है तो केवल कागजी संवाद से न्याय नहीं मिलता। कश्मीर में हुए नरसंहार और विस्थापन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज कई कश्मीरी अपने ही देश में शरणार्थी की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं और उनके दर्द पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस तक नहीं हुई।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95735" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-1152x1536.jpg 1152w" sizes="(max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>इस दौरान उन्होंने बिहार की धरती को नमन करते हुए कहा कि यह भूमि ज्ञान, चिंतन और विमर्श की अनमोल धरोहर रही है। उनके अनुसार बिहारियों में बौद्धिक क्षमता और श्रम दोनों का अद्भुत संगम है।</p>



<p><br>इतिहास के संदर्भ में बताया गया कि सम्राट अशोक (268–232 ईसा पूर्व) के समय मगध साम्राज्य का केंद्र आज का बिहार था। उनकी राजधानी पाटलिपुत्र से संचालित यह विशाल साम्राज्य उत्तर में हिमालय की तराई, पूर्व में बंगाल क्षेत्र, पश्चिम में सोन नदी और दक्षिण में विंध्य पर्वतमाला तक फैला हुआ था। मौर्य काल में चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक के शासन में मगध का विस्तार उत्तर-पश्चिम में हिंदुकुश पर्वतों तक था, जिसमें आज के अफगानिस्तान के काबुल, कंधार और हेरात जैसे क्षेत्र भी शामिल थे।</p>



<p>इतिहासकारों के अनुसार कभी इतना विशाल और प्रभावशाली रहा मगध साम्राज्य आज कई प्रशासनिक हिस्सों में बंट चुका है। समय के साथ बिहार के भूभाग से अलग होकर कई नए राज्य और क्षेत्र बने।</p>



<p><br>मंच से यह भी संदेश दिया गया कि इतिहास के वैभव को केवल खंडहरों में बदलने देना किसी भी समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। आज भी प्राचीन विश्वविद्यालयों और सभ्यताओं के अवशेष मानो अपने गौरव की कहानी सुना रहे हैं, लेकिन उनके पुनरुद्धार और संरक्षण के बजाय अक्सर उन्हें केवल राजनीतिक बहस का विषय बना दिया जाता है।</p>



<p>वक्ताओं ने कहा कि जब तक साहित्य और चिंतन की परंपरा मजबूत नहीं होगी, तब तक इतिहास के गौरव को पुनर्जीवित करना कठिन है। साहित्य में समाज की सोच को बदलने और नई दिशा देने की ताकत होती है, इसलिए इतिहास और संस्कृति को पुनर्स्मरण कराने में साहित्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।</p>
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		<title>साहित्यिक महोत्सव में रैप का रंग, स्लो चीता ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sahitya-ke-manch-per-rap-ka-jalwa/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 04:14:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में स्लो चीता का रैप, संगीत की लय में झूमे दर्शक नालंदा, 16मार्च।(ओ पी पाण्डेय) नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में उस समय माहौल पूरी तरह संगीतमय हो उठा, जब ‘स्लो चीता’ के नाम से मशहूर रैपर चैतन्य शर्मा ने अपनी दमदार प्रस्तुति से मंच पर ऊर्जा की लहर दौड़ा दी। साहित्य के इस प्रतिष्ठित मंच पर रैप संगीत की आधुनिक धुनों ने ऐसा रंग जमाया कि दर्शक देर तक तालियों और उत्साह के साथ झूमते नजर आए। अपनी अनोखी शैली और तेज़ लय वाले रैप के लिए पहचाने जाने वाले चैतन्य शर्मा ने शुरुआत अपने लोकप्रिय गीत “चीता” से की। जैसे ही यह गीत गूंजा, पूरे सभागार में जोश का माहौल बन गया। इसके बाद “ऑल आई नीड” की प्रस्तुति ने दर्शकों को और भी रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने “मिर्जापुर” गीत प्रस्तुत किया, तो पूरा सभागार मानो उनकी लय के साथ थिरकने लगा। दर्शकों ने तालियों और उत्साह के साथ उनका भरपूर स्वागत किया। चैतन्य शर्मा की प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि रैप केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा अभिव्यक्ति का माध्यम बन चुका है जो हर पीढ़ी को जोड़ने की क्षमता रखता है। उनकी ऊर्जावान परफॉर्मेंस ने कुछ समय के लिए पूरे माहौल को संगीत और लय में डुबो दिया। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में यह प्रस्तुति साहित्य और आधुनिक संगीत के अद्भुत मेल का उदाहरण बनकर सामने आई, जिसे दर्शकों ने लंबे समय तक यादगार बताया।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में स्लो चीता का रैप, संगीत की लय में झूमे दर्शक</strong></p>



<p>नालंदा, 16मार्च।(<strong>ओ पी पाण्डेय</strong>) नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में उस समय माहौल पूरी तरह संगीतमय हो उठा, जब ‘स्लो चीता’ के नाम से मशहूर रैपर चैतन्य शर्मा ने अपनी दमदार प्रस्तुति से मंच पर ऊर्जा की लहर दौड़ा दी। साहित्य के इस प्रतिष्ठित मंच पर रैप संगीत की आधुनिक धुनों ने ऐसा रंग जमाया कि दर्शक देर तक तालियों और उत्साह के साथ झूमते नजर आए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="435" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097308-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95615" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097308-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097308-650x276.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097308-1536x652.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097308-2048x870.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अपनी अनोखी शैली और तेज़ लय वाले रैप के लिए पहचाने जाने वाले चैतन्य शर्मा ने शुरुआत अपने लोकप्रिय गीत “चीता” से की। जैसे ही यह गीत गूंजा, पूरे सभागार में जोश का माहौल बन गया। इसके बाद “ऑल आई नीड” की प्रस्तुति ने दर्शकों को और भी रोमांचित कर दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="620" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112698-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95737" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112698-scaled.jpg 620w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112698-393x650.jpg 393w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112698-930x1536.jpg 930w" sizes="auto, (max-width: 620px) 100vw, 620px" /></figure>



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<p>कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने “मिर्जापुर” गीत प्रस्तुत किया, तो पूरा सभागार मानो उनकी लय के साथ थिरकने लगा। दर्शकों ने तालियों और उत्साह के साथ उनका भरपूर स्वागत किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="700" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112700-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95738" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112700-scaled.jpg 700w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112700-444x650.jpg 444w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112700-1050x1536.jpg 1050w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></figure>



<p>चैतन्य शर्मा की प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि रैप केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा अभिव्यक्ति का माध्यम बन चुका है जो हर पीढ़ी को जोड़ने की क्षमता रखता है। उनकी ऊर्जावान परफॉर्मेंस ने कुछ समय के लिए पूरे माहौल को संगीत और लय में डुबो दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="825" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112699-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95739" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112699-scaled.jpg 825w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112699-524x650.jpg 524w" sizes="auto, (max-width: 825px) 100vw, 825px" /></figure>



<p>नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में यह प्रस्तुति साहित्य और आधुनिक संगीत के अद्भुत मेल का उदाहरण बनकर सामने आई, जिसे दर्शकों ने लंबे समय तक यादगार बताया।</p>
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		<title>कविताओं में जीवंत हुआ नालंदा का गौरव, कवि सम्मेलन में गूंजा ‘ज्ञान’ का स्वर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/kavitao-me-jiwant-hua-nalanda/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 04:05:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शब्दों की सरगम में डूबा नालंदा, कवियों की आवाज़ में झलकी मिट्टी की महक कविता, विरासत और भावनाओं का संगम: नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में सजी काव्य संध्या नालंदा,16 मार्च(ओ पी पाण्डेय)। इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन एम्फीथियेटर में सजी काव्य संध्या ने साहित्य और संवेदना का ऐसा वातावरण रचा कि देर शाम तक श्रोता शब्दों की उस मधुर धारा में डूबे रहे। देश के प्रतिष्ठित युवा कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से नालंदा की विरासत, मिट्टी और मानवीय भावनाओं को स्वर दिया। साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित और डार्क हॉर्स, औघड़ तथा विश्वगुरु जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक कवि नीलोत्पल मृणाल ने अपनी संवेदनशील कविता से श्रोताओं को गहराई से छू लिया। उनकी पंक्तियाँ &#8211;“थोड़ा सा नदी का पानी,मुट्ठी भर रेत रख लो,धान-गेहूं-सरसों वालेपीले-हरे खेत रख लो…आने वाली पीढ़ियों कोचल कर दिखाएंगे-दुनिया ऐसी हुआ करती थी।” -ने बदलते समय के बीच स्मृतियों और प्रकृति को बचाए रखने का भाव जगाया। नई दिल्ली में रहकर भी अपनी मिट्टी से जुड़े रहने वाले नालंदा के कवि संजीव कुमार मुकेश ने अपनी कविताओं में राजगीर, मगध और बिहार की गौरवशाली पहचान को स्वर दिया। उनकी पंक्तियाँ-“मगध का, राष्ट्र का, जन-जन का है अभिमान नालंदा,विरासत, संस्कृति, जन-मन का गौरव गान नालंदा…पुनः फैला रहा है विश्व भर में ‘ज्ञान’ नालंदा।” &#8211; सुनते ही सभागार तालियों से गूंज उठा। उन्होंने राजगीर की आध्यात्मिकता को भी शब्द दिए-“जब मोह मनुज के ज्ञान को रुद्ध कर देता है,तब मगध का रज गौतम को बुद्ध कर देता है।” कवि सम्मेलन का संचालन मेरठ के चर्चित हास्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शब्दों की सरगम में डूबा नालंदा, कवियों की आवाज़ में झलकी मिट्टी की महक</strong></p>



<p><strong>कविता, विरासत और भावनाओं का संगम: नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में सजी काव्य संध्या</strong></p>



<p>नालंदा,16 मार्च(ओ पी पाण्डेय)। इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन एम्फीथियेटर में सजी काव्य संध्या ने साहित्य और संवेदना का ऐसा वातावरण रचा कि देर शाम तक श्रोता शब्दों की उस मधुर धारा में डूबे रहे। देश के प्रतिष्ठित युवा कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से नालंदा की विरासत, मिट्टी और मानवीय भावनाओं को स्वर दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107950-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95721" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107950-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107950-650x434.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित और डार्क हॉर्स, औघड़ तथा विश्वगुरु जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक कवि नीलोत्पल मृणाल ने अपनी संवेदनशील कविता से श्रोताओं को गहराई से छू लिया। उनकी पंक्तियाँ &#8211;<br>“थोड़ा सा नदी का पानी,<br>मुट्ठी भर रेत रख लो,<br>धान-गेहूं-सरसों वाले<br>पीले-हरे खेत रख लो…<br>आने वाली पीढ़ियों को<br>चल कर दिखाएंगे-<br>दुनिया ऐसी हुआ करती थी।”</p>



<p>-ने बदलते समय के बीच स्मृतियों और प्रकृति को बचाए रखने का भाव जगाया।</p>



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<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" data-id="95722" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107922-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95722" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107922-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107922-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>
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<p>नई दिल्ली में रहकर भी अपनी मिट्टी से जुड़े रहने वाले नालंदा के कवि संजीव कुमार मुकेश ने अपनी कविताओं में राजगीर, मगध और बिहार की गौरवशाली पहचान को स्वर दिया। उनकी पंक्तियाँ-<br>“मगध का, राष्ट्र का, जन-जन का है अभिमान नालंदा,<br>विरासत, संस्कृति, जन-मन का गौरव गान नालंदा…<br>पुनः फैला रहा है विश्व भर में ‘ज्ञान’ नालंदा।”</p>



<p>&#8211; सुनते ही सभागार तालियों से गूंज उठा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="851" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107942-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95723" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107942-scaled.jpg 851w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107942-540x650.jpg 540w" sizes="auto, (max-width: 851px) 100vw, 851px" /></figure>



<p>उन्होंने राजगीर की आध्यात्मिकता को भी शब्द दिए-<br>“जब मोह मनुज के ज्ञान को रुद्ध कर देता है,<br>तब मगध का रज गौतम को बुद्ध कर देता है।”</p>



<p>कवि सम्मेलन का संचालन मेरठ के चर्चित हास्य कवि डॉ. प्रतीक गुप्ता ने अपने चुटीले अंदाज में किया। उन्होंने श्रोताओं से संवाद करते हुए कहा-<br>“साहित्यिक उत्सव मनाकर खुश हो ना,<br>ऊँची हस्तियाँ यहाँ बुलाकर खुश हो ना,<br>पूछ रहा हूँ राजगीर में मैं-<br>नालंदा की माटी को माथे से लगाकर खुश हो ना।”</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107939-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95724" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107939-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107939-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>दरभंगा से आईं चर्चित कवयित्री डॉ. तिष्या श्री ने अपनी सुरीली आवाज़ और भावपूर्ण प्रस्तुति से काव्य संध्या को और भी मधुर बना दिया। उनकी पंक्तियाँ-<br>“बड़े आसान लफ़्ज़ों में उसे सरेआम लिखती हूँ,<br>सुनो तो गीत लगता है मगर पैग़ाम लिखती हूँ…<br>मुहब्बत जब कहे कोई, उसी का नाम लिखती हूँ।”</p>



<p>&#8211; ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया।</p>



<p>कवियों की रचनाओं, शब्दों की लय और भावनाओं की गर्माहट ने ऐसा समां बाँधा कि देर शाम तक लोग काव्य-रस में डूबे रहे।</p>



<p>कार्यक्रम के अंत में सभी कवियों को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष का प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान आयोजक वैशाली सेता और अदिति नंदन द्वारा प्रदान किया गया।</p>



<p>कुल मिलाकर, यह काव्य संध्या केवल कविताओं का पाठ नहीं थी, बल्कि नालंदा की मिट्टी, उसकी स्मृति और उसके ज्ञान की उस परंपरा का उत्सव थी, जो आज भी शब्दों के माध्यम से दुनिया भर में फैल रही है।</p>
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		<title>बॉक्स ऑफिस पर क्या कह गए अमोल पालेकर !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/what-amol-palekar-said-about-the-box-office/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 03:51:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में अमोल पालेकर का सिनेमा पर बेबाक संवाद सिनेमा की असली सफलता दर्शकों के दिल में होती है, बॉक्स ऑफिस में नहीं : अमोल पालेकर नालंदा, 16 मार्च (ओ पी पाण्डेय)। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक विशेष सत्र में हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर केंद्र में रहे। इस अवसर पर उन्होंने सिनेमा, फिल्म आलोचना और अपने रचनात्मक अनुभवों पर खुलकर विचार साझा किए। सत्र में उनकी धर्मपत्नी और लेखिका संध्या गोखले तथा वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज भी उनके साथ संवाद में शामिल रहे। बातचीत के दौरान अमोल पालेकर ने अपने लंबे फिल्मी अनुभव और अपनी लिखी पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी फिल्म की सफलता या असफलता का आकलन केवल उसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी फिल्म का वास्तविक मूल्य उसके विषय, संवेदनशीलता, सामाजिक प्रभाव और दर्शकों के मन पर पड़ने वाले स्थायी असर से तय होता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक फिल्म समीक्षक की भूमिका सिर्फ यह बताने तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि फिल्म हिट है या फ्लॉप। बल्कि उसका काम यह समझना और समझाना भी है कि कोई फिल्म अपने समय और समाज से किस तरह संवाद स्थापित करती है। इस दौरान अमोल पालेकर ने अपनी फिल्मों और अभिनय यात्रा से जुड़े कई रोचक अनुभव भी साझा किए। उनकी सहज और आत्मीय बातचीत ने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा और पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम के अंत में पटना कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में अमोल पालेकर का सिनेमा पर बेबाक संवाद</strong></p>



<p><strong>सिनेमा की असली सफलता दर्शकों के दिल में होती है, बॉक्स ऑफिस में नहीं : अमोल पालेकर</strong></p>



<p>नालंदा, 16 मार्च <strong>(ओ पी पाण्डेय</strong>)। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक विशेष सत्र में हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर केंद्र में रहे। इस अवसर पर उन्होंने सिनेमा, फिल्म आलोचना और अपने रचनात्मक अनुभवों पर खुलकर विचार साझा किए। सत्र में उनकी धर्मपत्नी और लेखिका संध्या गोखले तथा वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज भी उनके साथ संवाद में शामिल रहे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110404-scaled.png" alt="" class="wp-image-95730" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110404-scaled.png 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110404-650x434.png 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p><br>बातचीत के दौरान अमोल पालेकर ने अपने लंबे फिल्मी अनुभव और अपनी लिखी पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी फिल्म की सफलता या असफलता का आकलन केवल उसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी फिल्म का वास्तविक मूल्य उसके विषय, संवेदनशीलता, सामाजिक प्रभाव और दर्शकों के मन पर पड़ने वाले स्थायी असर से तय होता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95716" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने यह भी कहा कि एक फिल्म समीक्षक की भूमिका सिर्फ यह बताने तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि फिल्म हिट है या फ्लॉप। बल्कि उसका काम यह समझना और समझाना भी है कि कोई फिल्म अपने समय और समाज से किस तरह संवाद स्थापित करती है।</p>



<p>इस दौरान अमोल पालेकर ने अपनी फिल्मों और अभिनय यात्रा से जुड़े कई रोचक अनुभव भी साझा किए। उनकी सहज और आत्मीय बातचीत ने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा और पूरे माहौल को जीवंत बना दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95717" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के अंत में पटना कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित लाइव पेंटिंग सत्र में बनाई गई एक विशेष कलाकृति अमोल पालेकर को भेंट की गई। इसके साथ ही उन्हें पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और नालंदा की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती स्थानीय कलाकारों द्वारा मिट्टी से निर्मित एक प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया।</p>



<p>यह सत्र सिनेमा, कला और समाज के गहरे संबंधों को रेखांकित करते हुए नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल को और भी सार्थक बना गया।</p>



<p></p>
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		<title>राजगीर में साहित्य का महाकुंभ: राष्ट्रवाद से क्षेत्रीय भाषाओं तक गूंजे विचार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/rajgir-me-sahitya-ka-mahakumb/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 05:01:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय साहित्य और संकट के समय लेखन पर गहन मंथन राजगीर में तीसरे दिन कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित, देशभर के लेखकों और विचारकों ने साहित्य, समाज और समकालीन चुनौतियों पर रखे विचार राजगीर, 15 मार्च। राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के तीसरे दिन साहित्य, राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय भाषाओं और संकट के समय लेखन की भूमिका जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लेखकों, विचारकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए समकालीन समाज और साहित्य के संबंधों पर महत्वपूर्ण विमर्श प्रस्तुत किया। राष्ट्रवाद पर गंभीर बहसदिन का पहला सत्र “क्या राष्ट्र को राष्ट्रवाद की आवश्यकता है या राष्ट्रवाद ही राष्ट्र को कमजोर बनाता है?” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें लेखक-चिंतक उदय माहूरकर और लेखिका लिपिका भूषण ने राष्ट्रवाद की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और सामूहिक चेतना से जुड़ा व्यापक विषय है। चर्चा के दौरान महात्मा गांधी के सेवा मॉडल, अहिंसा और सामाजिक समरसता जैसे सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वस्थ बहस की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव और अश्लील सामग्री के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की बात कही गई। कहानी केवल मनोरंजन नहीं, समाज का आईनादूसरे सत्र में “पर्दे पर कहानी कहने की कला: सिनेमा, डिजिटल मंच और साहित्य के माध्यम से बिहार की नई कल्पना” विषय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय साहित्य और संकट के समय लेखन पर गहन मंथन</strong></p>



<p><strong><em>राजगीर में तीसरे दिन कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित, देशभर के लेखकों और विचारकों ने साहित्य, समाज और समकालीन चुनौतियों पर रखे विचार</em></strong></p>



<p>राजगीर, 15 मार्च। राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के तीसरे दिन साहित्य, राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय भाषाओं और संकट के समय लेखन की भूमिका जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लेखकों, विचारकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए समकालीन समाज और साहित्य के संबंधों पर महत्वपूर्ण विमर्श प्रस्तुत किया।</p>



<p><strong>राष्ट्रवाद पर गंभीर बहस</strong><br>दिन का पहला सत्र “क्या राष्ट्र को राष्ट्रवाद की आवश्यकता है या राष्ट्रवाद ही राष्ट्र को कमजोर बनाता है?” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें लेखक-चिंतक उदय माहूरकर और लेखिका लिपिका भूषण ने राष्ट्रवाद की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95687" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और सामूहिक चेतना से जुड़ा व्यापक विषय है। चर्चा के दौरान महात्मा गांधी के सेवा मॉडल, अहिंसा और सामाजिक समरसता जैसे सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वस्थ बहस की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव और अश्लील सामग्री के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की बात कही गई।</p>



<p><strong>कहानी केवल मनोरंजन नहीं, समाज का आईना</strong><br>दूसरे सत्र में “पर्दे पर कहानी कहने की कला: सिनेमा, डिजिटल मंच और साहित्य के माध्यम से बिहार की नई कल्पना” विषय पर चर्चा हुई। इसमें अभिनेत्री और रंगमंच निर्देशक भाषा सुंभली तथा पटकथा लेखिका संध्या गोखले ने कहानी कहने की कला और उसकी सामाजिक जिम्मेदारी पर अपने विचार रखे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95688" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि कहानी कहना केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की वास्तविकताओं, विचारों और सच्चाइयों को सामने लाने का सशक्त साधन भी है। आज के दौर में चलचित्रों और डिजिटल मंचों का प्रभाव पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है, इसलिए रचनाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी हो जाती है।</p>



<p><strong>साहित्य समाज को देता है दिशा</strong><br>तीसरे सत्र “साहित्य समाज को कैसे आकार देता है” में लेखक शांतनु गुप्ता और लेखिका अमी गणात्रा ने साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच, मूल्यों और चेतना को दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। भारतीय ग्रंथों और परंपरागत ज्ञान में समाज को मार्गदर्शन देने की क्षमता निहित है, इसलिए नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना आवश्यक है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95690" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95689" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>क्षेत्रीय साहित्य का बढ़ता विस्तार</strong><br>दोपहर के बाद आयोजित सत्र “समकालीन लेखन और क्षेत्रीय कथाओं का भविष्य” में ओड़िया लेखक, आलोचक और कवि मनोरंजन दास, लेखिका-इतिहासकार सुमेधा वर्मा और लेखक-कवि नीलोत्त्पल मृणाल ने अपने विचार साझा किए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95683" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि प्रगतिशील होने का अर्थ अपनी जड़ों और स्थानीय अनुभवों से दूरी बनाना नहीं है। क्षेत्रीय साहित्य समाज की वास्तविकताओं, संस्कृति और लोक जीवन को सामने लाने का सशक्त माध्यम है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95693" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>चर्चा में यह भी कहा गया कि समय के साथ साहित्य की विषयवस्तु, पाठक वर्ग और उसे पढ़ने-समझने के तरीके बदल रहे हैं। अनुवाद और डिजिटल माध्यमों के कारण क्षेत्रीय साहित्य अब व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँच रहा है। नीलोत्पल मृणाल, जो अपने चर्चित उपन्यास डार्क हॉर्स, औघड़ और युवा जादूगर के लिए जाने जाते हैं, को साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।</p>



<p><strong>संकट के समय लेखन बना प्रतिरोध की आवाज</strong><br>अंतिम सत्र “संकट के समय लेखन: प्रतिरोध के रूप में साहित्य” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नितेश्वर कुमार, लेखक मृत्युंजय शर्मा और लेखक-शिक्षाविद जितेंद्र कुमार शर्मा ने अपने विचार रखे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95686" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में लेखन केवल व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज के सामूहिक संघर्ष, पीड़ा और आकांक्षाओं की आवाज बन जाता है। साहित्य कई बार सामाजिक चेतना जगाने और परिवर्तन की दिशा देने का माध्यम बनता है।</p>



<p><strong>कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक संध्या ने बांधा समां</strong><br>दिन के अंत में आयोजित कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक संध्या ने पूरे वातावरण को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया। कवि संजीव कुमार मुकेश, नीलोत्त्पल मृणाल, श्रीपति गुप्ता और कवयित्री तिश्या श्री ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95691" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-650x488.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रैपर स्लो चीता की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी। उनकी प्रस्तुति ने विशेष रूप से युवाओं को आकर्षित किया और साहित्य तथा संगीत के इस अनूठे संगम ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में ट्रांसजेंडर अधिकारों पर हुई खुली बहस</title>
		<link>https://www.patnanow.com/the-pain-comes-out-of-transgender-on-international-stage/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 05:18:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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					<description><![CDATA[ज्ञान की धरती नालंदा में समाज के हाशिये से सिनेमा तक की चर्चा राजगीर, 14 मार्च। नालंदा की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में ज्ञान, साहित्य, समाज और सिनेमा से जुड़े विविध विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। पूरे दिन चले विभिन्न सत्रों में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य में संवेदनाओं की अभिव्यक्ति, बिहार की ब्रांडिंग में मीडिया की भूमिका, फिल्म और समाज के संबंध तथा ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें ट्रांसजेंडर समुदाय की सामाजिक स्थिति और अधिकारों पर हुआ विमर्श कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ विचार-मंथन फेस्टिवल के प्रथम सत्र में “प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, पूर्व राष्ट्रपति के प्रेस सचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह, चिंतक मनुदास तथा विदुषी डॉ. कविता शर्मा ने अपने विचार रखे। डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा शास्त्रार्थ, तर्क और संवाद की समृद्ध परंपरा से विकसित हुई है। उन्होंने बताया कि हजारों वर्षों तक यह ज्ञान मौखिक परंपरा के माध्यम से संरक्षित रहा और गुरु-शिष्य परंपरा ने इसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया। अजय सिंह ने कहा कि भारत की पहचान एक संवाद प्रधान समाज के रूप में रही है। उन्होंने कहा कि केवल अतीत के गौरव में जीना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नालंदा की मूल ज्ञान-परंपरा और संवाद की भावना को वर्तमान समय में पुनर्जीवित करना जरूरी है। वहीं डॉ. कविता शर्मा ने महाभारत के प्रसंगों के माध्यम से जीवन की नैतिक शिक्षाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>ज्ञान की धरती नालंदा में समाज के हाशिये से सिनेमा तक की चर्चा</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="572" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103787-scaled.png" alt="" class="wp-image-95670" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103787-scaled.png 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103787-650x363.png 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>राजगीर, 14 मार्च। नालंदा की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में ज्ञान, साहित्य, समाज और सिनेमा से जुड़े विविध विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। पूरे दिन चले विभिन्न सत्रों में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य में संवेदनाओं की अभिव्यक्ति, बिहार की ब्रांडिंग में मीडिया की भूमिका, फिल्म और समाज के संबंध तथा ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें ट्रांसजेंडर समुदाय की सामाजिक स्थिति और अधिकारों पर हुआ विमर्श कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100849-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95651" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100849-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100849-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100849-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100849-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95650" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ विचार-मंथन</strong></p>



<p>फेस्टिवल के प्रथम सत्र में “प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, पूर्व राष्ट्रपति के प्रेस सचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह, चिंतक मनुदास तथा विदुषी डॉ. कविता शर्मा ने अपने विचार रखे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100008-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95654" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100008-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100008-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100008-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100008-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p>डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा शास्त्रार्थ, तर्क और संवाद की समृद्ध परंपरा से विकसित हुई है। उन्होंने बताया कि हजारों वर्षों तक यह ज्ञान मौखिक परंपरा के माध्यम से संरक्षित रहा और गुरु-शिष्य परंपरा ने इसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100106-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95656" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100106-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100106-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100106-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100106-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अजय सिंह ने कहा कि भारत की पहचान एक संवाद प्रधान समाज के रूप में रही है। उन्होंने कहा कि केवल अतीत के गौरव में जीना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नालंदा की मूल ज्ञान-परंपरा और संवाद की भावना को वर्तमान समय में पुनर्जीवित करना जरूरी है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100101-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95655" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100101-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100101-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100101-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100101-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वहीं डॉ. कविता शर्मा ने महाभारत के प्रसंगों के माध्यम से जीवन की नैतिक शिक्षाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि यह महाकाव्य मानव स्वभाव और कर्तव्य के गहरे प्रश्नों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।</p>



<p><strong>कला के माध्यम से नालंदा की विरासत को उकेरा</strong></p>



<p>कार्यक्रम के दूसरे सत्र में लाइव पेंटिंग का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन किन्नर समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहीं डॉ. भारती और सलमा चौधरी ने किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100227-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95658" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100227-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100227-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100227-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100227-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102319-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95657" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102319-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102319-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102319-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस सत्र में कलाकारों ने अपनी चित्रकला के माध्यम से आर्यभट्ट और आचार्य चाणक्य जैसे महान व्यक्तित्वों को कैनवास पर उकेरा। पटना कॉलेज ऑफ आर्ट्स के छात्र अमन अयाज, प्रियांशु कुमार, सुमित कुमार, ज्योति चौरसिया और टीना यादव ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम की प्रस्तुति परिधि आर्ट ग्रुप द्वारा की गई।</p>



<p><strong>शोक से सृजन तक की यात्रा पर चर्चा</strong></p>



<p>तीसरे सत्र “पेनिंग ग्रीफ: अनुभव से अभिव्यक्ति तक” में चर्चित कवयित्री डॉ. नीना वर्मा और प्रख्यात लेखिका गगन गिल ने साहित्य में संवेदना और शोक की भूमिका पर चर्चा की।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95659" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-1-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102340-1-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>डॉ. नीना वर्मा ने कहा कि शोक केवल पीड़ा नहीं, बल्कि आत्मिक समझ और संवेदनशीलता की यात्रा भी है। वहीं गगन गिल ने कहा कि जीवन में बिछड़ने की पीड़ा कई बार रचनात्मक अभिव्यक्ति का आधार बन जाती है।</p>



<p><strong>बिहार की ब्रांडिंग में मीडिया की भूमिका</strong><br>चौथे सत्र में “ब्रांडिंग ऑफ रीजन, स्पेशली बिहार में मीडिया की भूमिका” विषय पर ओम थानवी और टीवी9 भारतवर्ष के डिजिटल एग्जीक्यूटिव एडिटर पंकज कुमार ने चर्चा की।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="672" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102337-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95661" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102337-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001102337-650x427.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="428" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100651-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95660" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100651-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100651-650x272.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100651-1536x642.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100651-2048x856.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस दौरान कहा गया कि मीडिया में अक्सर बिहार को नकारात्मक संदर्भों से जोड़ा जाता है, जबकि राज्य की बौद्धिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों को पर्याप्त स्थान नहीं मिलता। वक्ताओं ने कहा कि बिहार की प्रतिभाओं और उपलब्धियों को सकारात्मक रूप में सामने लाने की आवश्यकता है।</p>



<p><strong>सिनेमा और समाज पर भी हुई चर्चा</strong></p>



<p>फेस्टिवल के एक सत्र में सिनेमा और उसकी आलोचना पर भी विचार-विमर्श हुआ, जिसमें प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक भावना सोमाया और अजय ब्रह्मात्मज शामिल हुए। दोनों अतिथि फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड के सदस्य हैं, जिसके लगभ 56 देशों में सदस्य हैं और वे लंबे समय तक पत्रिका स्क्रीन की संपादक भी रह चुकी हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="779" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103660-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95663" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103660-scaled.jpg 779w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103660-494x650.jpg 494w" sizes="auto, (max-width: 779px) 100vw, 779px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100853-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95662" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100853-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100853-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100853-1536x864.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस अवसर पर अजय जय ब्रह्मात्मज ने बिहार की ओर से उनका स्वागत किया। भावना सोमाया ने कहा कि बिहार आने का यह उनका पहला अवसर है और पटना से इतनी दूर आना उनके लिए नया अनुभव रहा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यहाँ उन्हें “लिट्टी-चोखा और लिटरेचर” दोनों का स्वाद मिला।</p>



<p>उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग में अक्सर दो फिल्में फ्लॉप होते ही किसी कलाकार को असफल मान लिया जाता है, लेकिन कई कलाकार फिर मजबूत वापसी करते हैं। उन्होंने रणवीर सिंह और अक्षय कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि एक अच्छी फिल्म कलाकार के करियर को फिर से नई दिशा दे सकती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="564" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103661-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95664" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103661-scaled.jpg 564w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103661-358x650.jpg 358w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103661-846x1536.jpg 846w" sizes="auto, (max-width: 564px) 100vw, 564px" /></figure>



<p>भावना सोमैया ने कहा कि हर फिल्म दर्शकों के बीच दो हिस्सों में बंट जाती है- कुछ लोगों को पसंद आती है और कुछ को नहीं। उनके अनुसार वे उसी फिल्म के बारे में सकारात्मक लिखती हैं जिसमें उन्हें सच्चा कंटेंट और संदेश दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आजकल फिल्मों में साहित्य आधारित कहानियाँ बहुत कम बन रही हैं क्योंकि फिल्म उद्योग में अधिकांश लोग केवल मनी-मेकिंग पर ध्यान दे रहे हैं। उनके अनुसार सौ फिल्मों में मुश्किल से दो ही फिल्में साहित्य पर आधारित बनती हैं। अतिथियों ने दर्शकों के कई सवालों का बड़े ही सहजता से जवाब भी दिया।</p>



<p>&#8220;बिफोर एंड आफ्टर धुरंधर&#8217; सत्र में सिनेमा के बदलते स्वरूप पर गंभीर चर्चा&#8221;</p>



<p>राजगीर में आयोजित साहित्यिक सत्र &#8220;बिफोर एंड आफ्टर धुरंधर&#8221; में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार एवं आलोचक अजय ब्रह्मात्मज और प्रसिद्ध फिल्म पत्रकार-लेखिका पद्मश्री भावना सोमाया ने हिंदी सिनेमा की बदलती प्रवृत्तियों पर विस्तार से चर्चा की। सत्र के दौरान दोनों वक्ताओं ने फिल्मों की सामग्री, सामाजिक प्रभाव और बदलते फिल्मी परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए।</p>



<p>फिल्म धुरंधर के संदर्भ में चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि तकनीकी दृष्टि से फिल्म का ग्राफिक्स, संदेश और प्रस्तुति प्रभावशाली है, लेकिन आज के सिनेमा में बढ़ती हिंसा एक चिंताजनक प्रवृत्ति बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में फिल्म उद्योग में दक्षिण भारतीय फिल्मों की शैली से प्रेरित होकर अत्यधिक हिंसा को सामान्य बनाने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है, जिससे फिल्मों का मूल उद्देश्य कहीं न कहीं कमजोर पड़ता दिख रहा है।</p>



<p>उन्होंने ने यह भी कहा कि कभी भारतीय सिनेमा का उद्देश्य समाज को जोड़ना और सकारात्मक संदेश देना होता था, लेकिन आज कई फिल्मों में &#8220;डिवाइड एंड रूल&#8221; की मानसिकता झलकने लगी है। तथ्य और कल्पना के मिश्रण के कारण दर्शकों के सामने भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न होती है।</p>



<p>चर्चा के दौरान सामाजिक-राजनीतिक संदर्भों पर भी बात हुई। अजय जी ने कहा कि फिल्मों में कई बार कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जाता है और जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को भी एकतरफा दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाता है। पहले की फिल्मों में विभिन्न समुदायों के बीच समरसता का संदेश प्रमुख होता था, जबकि आज कई फिल्मों में विभाजन की प्रवृत्ति अधिक दिखाई देती है।</p>



<p>सत्र के दौरान भावना सोमाया ने साहित्य और लेखन की कठिन साधना पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एक लेखक अपनी रचना के लिए दिन-रात परिश्रम करता है और अनेक व्यक्तिगत संघर्षों से गुजरता है। अपने पुस्तक कराची से भारत के संदर्भ में उन्होंने भारत-पाक विभाजन के समय अपने परिवार और लाखों लोगों के विस्थापन के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने संयुक्त परिवार की परंपरा की सुंदरता का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे परिवारों में बच्चों को माता-पिता के अतिरिक्त कई और संरक्षक मिलते हैं।</p>



<p>गंभीर और विचारोत्तेजक चर्चा के साथ यह सत्र संपन्न हुआ, जिसमें सिनेमा, साहित्य और समाज के संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए।</p>



<p><strong>ट्रांसजेंडर समुदाय के मुद्दे बने चर्चा का केंद्र</strong></p>



<p>फेस्टिवल के छठे सत्र “भाषा, क्षेत्र और ट्रांसजेंडर” में किन्नर समुदाय की सामाजिक स्थिति और उनके अधिकारों पर गंभीर विमर्श हुआ।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="428" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100846-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95666" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100846-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100846-650x272.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100846-1536x642.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001100846-2048x856.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p>डॉ. भारती ने कहा कि समाज अक्सर किन्नर समुदाय को हाशिये पर धकेल देता है और फिर उनकी ओर मुड़कर देखने की भी जरूरत नहीं समझता। उन्होंने कहा कि सम्मान और अवसर की कमी के कारण कई बार उन्हें मजबूरी में भीख मांगने जैसे कार्य करने पड़ते हैं।</p>



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<p>वहीं सलमा चौधरी ने बताया कि उनके प्रयासों से उत्तर प्रदेश में ऐसा शौचालय बनाया गया है जिसका उपयोग पुरुष, महिलाएँ और ट्रांसजेंडर तीनों कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए आश्रय स्थल स्थापित करना है।</p>



<p>उन्होंने सरकार से अपील की कि ट्रांसजेंडर समुदाय को शिक्षा, रोजगार और राजनीति में समान अवसर दिए जाएँ ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।</p>



<p><strong>समावेशी समाज का संदेश</strong><br>वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब उसके सभी वर्गों को समान सम्मान और अवसर मिलें। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल के इन सत्रों ने ज्ञान, कला, सिनेमा और सामाजिक न्याय के विभिन्न पहलुओं पर विचार करते हुए एक समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण का संदेश दिया।</p>



<p>नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल से <strong>ओ पी पाण्डेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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