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	<title>navami &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>पूरे दिन है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Mar 2023 00:40:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना, 22 मार्च. नवरात्र मातृशक्ति की आराधना का सबसे महत्त्पूर्ण अनुष्ठान होता है. जिसमें माँ जगदम्बे के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा की जाती है. नौ दिनों की अवधि को नवरात्र कहा जाता है और नवरात्र में भक्त जगत जननी की भक्ति में लीन रहते हैं. सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार वर्ष भर में 4 नवरात्र होते हैं. जिनमें दो उदय नवरात्र जबकि दो गुप्त नवरात्र होते हैं. उदय नवरात्र में से एक चैत्र नवरात्र के साथ नव संवत्सर की शुरुआत होती है. 22 मार्च, दिन बुधवार से मातृशक्ति की आराधना का महान पर्व चैत्र नवरात्र शुरू हो रहा है. नवरात्र के दौरान शक्ति के 9 स्वरूपों की उपासना की जाती है. प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणीतृतीयं चंद्रघंटेति कूष्मांडेति चतुर्थकम्पंचमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनीति चसप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमंनवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः यानि शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाताकात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माँ के इन नौ स्वरूपों की पूजा-आराधना होती है तो चलिए जान लेते हैं कि इस बार शारदीय नवरात्र का अनुष्ठान कैसे करें : ब्रह्मपुर के बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी उमलेश पाण्डेय बताते हैं कि नवरात्र के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करनी चाहिए. श्री संवत 2080 राजा बुध, मंत्री शुक्र है और कलश स्थापना सुबह से रात्रि तक एकम में नल नाम संवत्सर है. कलश स्थापना से पहले गणेश और गौरी की षोडशोपचार पूजा करें. फिर कलश-स्थापना कर वरुण आदि देवताओं सहित सभी तीर्थों और पवित्र नदियों का आवाहन करें. कलश के पूजन के बाद षोडशमातृका और नवग्रह पूजन [&#8230;]]]></description>
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<p>पटना, 22 मार्च. नवरात्र मातृशक्ति की आराधना का सबसे महत्त्पूर्ण अनुष्ठान होता है. जिसमें माँ जगदम्बे के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा की जाती है. नौ दिनों की अवधि को नवरात्र कहा जाता है और नवरात्र में भक्त जगत जननी की भक्ति में लीन रहते हैं.<br></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="450" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-buxar-maa-durga-murti.jpg" alt="" class="wp-image-23875" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-buxar-maa-durga-murti.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-buxar-maa-durga-murti-263x350.jpg 263w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p>सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार वर्ष भर में 4 नवरात्र होते हैं. जिनमें दो उदय नवरात्र जबकि दो गुप्त नवरात्र होते हैं. उदय नवरात्र में से एक चैत्र नवरात्र के साथ नव संवत्सर की शुरुआत होती है. 22 मार्च, दिन बुधवार से मातृशक्ति की आराधना का महान पर्व चैत्र नवरात्र शुरू हो रहा है. नवरात्र के दौरान शक्ति के 9 स्वरूपों की उपासना की जाती है.<br></p>



<p>प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी<br>तृतीयं चंद्रघंटेति कूष्मांडेति चतुर्थकम्<br>पंचमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनीति च<br>सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमं<br>नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः<br></p>



<p>यानि शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता<br>कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माँ के इन नौ स्वरूपों की पूजा-आराधना होती है<br></p>



<p>तो चलिए जान लेते हैं कि इस बार शारदीय नवरात्र का अनुष्ठान कैसे करें :</p>



<p>ब्रह्मपुर के बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी उमलेश पाण्डेय बताते हैं कि नवरात्र के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करनी चाहिए. श्री संवत 2080 राजा बुध, मंत्री शुक्र है और कलश स्थापना सुबह से रात्रि तक एकम में नल नाम संवत्सर है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="581" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Umlesh-Pandey-Brahmpur-Pujari.jpg" alt="" class="wp-image-72618" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Umlesh-Pandey-Brahmpur-Pujari.jpg 581w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Umlesh-Pandey-Brahmpur-Pujari-339x350.jpg 339w" sizes="(max-width: 581px) 100vw, 581px" /><figcaption>मुख्य पुजारी(बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मन्दिर, ब्रह्मपुर)</figcaption></figure>



<p></p>



<p>कलश स्थापना से पहले गणेश और गौरी की षोडशोपचार पूजा करें. फिर कलश-स्थापना कर वरुण आदि देवताओं सहित सभी तीर्थों और पवित्र नदियों का आवाहन करें. कलश के पूजन के बाद षोडशमातृका और नवग्रह पूजन करें और फिर माँ जगदम्बा की पूजा-आराधना कर नवरात्र का अनुष्ठान प्रारंभ करें.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana-650x399.jpeg" alt="" class="wp-image-23524" width="376" height="231" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana-350x215.jpeg 350w" sizes="(max-width: 376px) 100vw, 376px" /></figure>



<p><br>22 मार्च, बुधवार को विधिवत कलश-स्थापना कर नौ दिनों तक माँ की पूजा-आराधना करें और नवरात्र के अंतिम दिन हवन के बाद कन्याओं और ब्राह्मणों को भोजन कराकर अनुष्ठान का समापन करें.</p>



<p><br>इस बार 29 मार्च, दिन बुधवार को महाष्टमी है जबकि 30 मार्च को महानवमी है, उस दिन ही हवन संपन्न होगा और नवरात्र का अनुष्ठान संपन्न होगा.<br></p>



<p>नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के पाठ का विशेष महत्त्व बतलाया गया है.तो आप भी इस चैत्र नवरात्र में आस्था और श्रद्धा के साथ माँ की आराधना करें और माँ की कृपा प्राप्त करें.</p>
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		<title>पूर्ण निष्ठा के साथ साधना हो तो होती है सभी सिद्धियों की प्राप्ति</title>
		<link>https://www.patnanow.com/if-you-do-spiritual-practice-with-full-devotion-then-all-the-achievements-are-attained/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 Apr 2022 07:03:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[सुख समृद्धि]]></category>
		<category><![CDATA[navami]]></category>
		<category><![CDATA[ramnavmi]]></category>
		<category><![CDATA[sidhidatri devi durga]]></category>
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					<description><![CDATA[भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया सिद्धिदात्री मां की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की होती है पूर्ति मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं. ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं. नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है. इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है. सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियाँ होती हैं. ब्रह्मवैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है. इनके नाम इस प्रकार हैं.मां सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं. देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था. इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था.भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया इसी कारण वे लोक में &#8216;अर्द्धनारीश्वर&#8217; नाम से प्रसिद्ध हुए. मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं. इनका वाहन सिंह है. ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं. इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है. प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह मां सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया</strong></p>



<p><strong>सिद्धिदात्री मां की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की होती है पूर्ति</strong></p>



<p></p>



<p>मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं. ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं. नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है. इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है. सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="402" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/Siddhidatri-devi-image.jpg" alt="" class="wp-image-60652" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/Siddhidatri-devi-image.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/Siddhidatri-devi-image-350x216.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियाँ होती हैं. ब्रह्मवैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है. इनके नाम इस प्रकार हैं.मां सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं. देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था. इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था.भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया इसी कारण वे लोक में &#8216;अर्द्धनारीश्वर&#8217; नाम से प्रसिद्ध हुए.</p>



<p>मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं. इनका वाहन सिंह है. ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं. इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है. प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह मां सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न करे. उनकी आराधना की ओर अग्रसर हो. इनकी कृपा से अनंत दुख रूप संसार से निर्लिप्त रहकर सारे सुखों का भोग करता हुआ वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="298" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/maasiddhidatri-pnc.jpg" alt="" class="wp-image-60653" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/maasiddhidatri-pnc.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/maasiddhidatri-pnc-350x160.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>नवदुर्गाओं में मां सिद्धिदात्री अंतिम देवी हैं. अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना में प्रवत्त होते हैं.  सिद्धिदात्री मां की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है. सिद्धिदात्री मां के कृपापात्र भक्त के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नहीं है, जिसे वह पूर्ण करना चाहे. वह सभी सांसारिक इच्छाओं, आवश्यकताओं और स्पृहाओं से ऊपर उठकर मानसिक रूप से मां भगवती के दिव्य लोकों में विचरण करता हुआ उनके कृपा-रस-पीयूष का निरंतर पान करता हुआ, विषय-भोग-शून्य हो जाता है. मां भगवती का परम सान्निध्य ही उसका सर्वस्व हो जाता है। इस परम पद को पाने के बाद उसे अन्य किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह जाती. मां के चरणों का यह सान्निध्य प्राप्त करने के लिए भक्त को निरंतर नियमनिष्ठ रहकर उनकी उपासना करने का नियम कहा गया है. ऐसा माना गया है कि मां भगवती का स्मरण, ध्यान, पूजन, हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए वास्तविक परम शांतिदायक अमृत पद की ओर ले जाने वाला है. विश्वास किया जाता है कि इनकी आराधना से भक्त को अणिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसायिता, दूर श्रवण, परकामा प्रवेश, वाकसिद्ध, अमरत्व भावना सिद्धि आदि समस्त सिद्धियों नव निधियों की प्राप्ति होती है.ऐसा कहा गया है कि यदि कोई इतना कठिन तप न कर सके तो अपनी शक्तिनुसार जप, तप, पूजा-अर्चना कर मां की कृपा का पात्र बन सकता ही है. मां की आराधना के लिए इस श्लोक का प्रयोग होता है. मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में नवमी के दिन इसका जाप करने का नियम है.</p>



<p><strong>श्लोक</strong></p>



<p><strong>सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमसुरैरपि ।  सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ।।</strong></p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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