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		<title>संगीत के इस सम्राट के लिए उठी पद्मविभूषण की माँग !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Jul 2022 02:49:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[Demand for padmvibhushan for Babu Lalan ji
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<p><strong>पखावज सम्राट बाबू ललन जी को पद्मविभूषण सम्मान की उठी अनुगूंज</strong></p>



<p>आरा,28 जुलाई. भोजपुर की धरती सदियों से उर्वर रही है. यहाँ के संगीतज्ञों ने देश के कोने-कोने में अपनी खास सांगीतिक माधुर्य की वजह से अपनी छाप छोड़ी है. लेकिन संगीत के समृद्ध विरासत को देने वालों की आजतक किसी सरकार ने सुध नही ली. संगीत के ऐसे विशारद पखावज सम्राट संगीत शिरोमणि शत्रुंजय प्रसाद सिंह की 121वीं जयंती बुधवार को आरा में मनाई गई. जहाँ उनके सम्मान में पद्मविभूषण की माँग उठाई गई.</p>



<p>बाबू ललन जी के नाम से विख्यात पखावज सम्राट संगीत शिरोमणि शत्रुंजय प्रसाद सिंह की 121वीं जयंती का आयोजन भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के तत्वाधान में स्थानीय बस स्टैंड स्थित मंच पर किया गया. इस अवसर पर बाबू ललन जी की प्रतिमा पर कलाकारों ने माल्यार्पण किया. कार्यक्रम में युवा तबला वादक अमन पांडेय ने स्वतंत्र तबला वादन में उठान, गत कायदा, टुकड़ा, परण, बाँट व लरी सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. वही युवा गायक रोहित कुमार ने भैरवी की ठुमरी बाजूबंद खुली-खुली जाय सांवरिया ने जादू डाला, कजरी सजनी छाई घटा घनघोर व दादरा सखियाँ गावे कजरिया झूम-झूम को प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. सांगीतिक प्रस्तुति युवा कथक नर्तक राजा कुमार के कथक प्रस्तुति के साथ संपन्न हुई. राजा ने गणेश वंदना से प्रारंभ करते हुए पारंपरिक कथक में उपज, उठान, टुकड़ा, परण व कथानक मारीच-वध प्रस्तुत कर शास्त्रीय नृत्य कला से उपस्थित लोगों को इसके जादू में बांध दिया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="292" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_121th-birthday-of-Babu-lalan-Ara.jpg" alt="" class="wp-image-64885" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_121th-birthday-of-Babu-lalan-Ara.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_121th-birthday-of-Babu-lalan-Ara-350x157.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>शास्त्रीय संगीत में बाबू ललन जी के योगदान विषय पर परिचर्चा में कमलाक्ष नारायण सिंह ने विषय प्रवेश करवाते हुए कहा कि संगीतज्ञ की कीर्ति कभी मिटती नही है. भोजपुर के जनपद ने बाबू ललन जी की संगीत परंपरा को कायम रखा है. मुख्य वक्ता कथक गुरु बक्शी विकास ने कहा कि सरकार ने बाबू ललन जी के बाद की पीढी को उच्च स्तरीय सम्मान से नवाजा है किंतु बाबू ललन जी को उपेक्षित रखना दुखद है. सरकार को मरणोपरांत बाबू ललन जी के लिए पद्मविभूषण सम्मान की अविलंब घोषणा करनी चाहिए. आरा का नाम शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में राष्ट्रीय क्षितिज पर अंकित करने का श्रेय बाबू ललन जी का है. बतौर संगीत द्वारक व अखिल भारतीय संगीत सम्मेलन के आयोजक बाबू ललन जी की भूमिका से सभी परिचित हैं किंतु बाबू ललन जी की कलात्मकता के ऊपर वर्तमान मौन है. इस चुप्पी को तोड़ते हुए आरा के संगीतज्ञो को बाबू साहब की रचनाओ का एक संग्रह आने वाली पीढी के लिए तैयार करने की आवश्यकता है.</p>



<p>परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए पत्रकार नरेंद्र सिंह ने कहा कि संगीत को सभ्य सामाज से जोड़ने के लिए बाबू साहब समर्पित रहे. बाबू ललन जी की स्मृति में एक संगीत महाविद्यालय की स्थापना का प्रयास होना चाहिए जिससे बाबू साहब की संगीत परंपरा का विकास हो सके. संचालन करते हुए रंगकर्मी सह पत्रकार अरुण प्रसाद ने कहा कि आज की पीढी को प्राचीन संगीतज्ञो की परंपरा से अवगत करवाना हमारा दायित्व है. बाबू ललन जी का जीवन शास्त्रीय संगीत में समर्पित रहा है. बाबू साहब की कीर्ति सामाज में उजागर करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी. पत्रकार की अमरेश कुमार सिंह ने कहा कि जमीरा कोठी भोजपुर के जनपद के लिए ऐतिहासिक धरोहर है जहाँ शास्त्रीय संगीत के शीर्ष के कलाकारों ने वर्षों संगीत साधना की है. बाबू साहब का यह प्रयास अद्वितीय है. बिहार की सांगीतिक पृष्ठभूमि को समृद्ध करने में बाबू ललन की की भूमिका महत्वपूर्ण है. मंच संचालन अरुण प्रसाद व धन्यवाद ज्ञापन नरेंद्र सिंह ने किया. इस अवसर पर अजीत पांडेय, श्रेया पांडेय, स्नेहा पांडेय, जय किशोर रविशंकर व तबला वादक आचार्य चंदन कुमार ठाकुर समेत कई संगीत रसिक उपस्थित थे.</p>



<p>देखना यह होगा कि सैकड़ों वर्षों से उपेक्षित बाबू साहब के लिए जिलेवासी की यह माँग सरकार कब मानती है या यूं ही माँगो की गूँज को सुनने के बाद सरकार कान में तेल डाल सोती ही रहती है.</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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		<item>
		<title>एक फ्रेम में कैद पुरानी तस्वीर ने उड़ाई संगीत के एक छात्र की नींद!</title>
		<link>https://www.patnanow.com/ek-frame-me-kaid-purani-tasvir-ne-udayi-nind/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Jul 2021 02:27:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[क्या आपको पता है आरा की धरती पर कौन-कौन से संगीतज्ञ आया करते थे! आरा, 19 जुलाई. एक फ्रेम में कैद पुरानी तस्वीर ने संगीत के एक छात्र की नींद उड़ा दी. दरअसल छात्र को एक दुर्लभ तस्वीर मिली जिसमें संगीत के कई विभूतियों को उसने एक साथ देखा और चौंक गया. इस तस्वीर में महान पखावज वादक ताल शिरोमणि पंडित शत्रुंजय प्रसाद सिंह उर्फ बाबू लल्लन जी के साथ कई महान लोग थे. आरा से महज 8 किमी की दूरी पर स्थित है जमीरा गाँव. इस गांव को जमीरा इस्टेट के नाम से जाना जाता है. जमींदारों का यह गांव अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए आज भी जाना जाता है. अभी भी यहाँ स्थित हवेली इसके बीते पल के इतिहास को कहते नही थकती. संगीत के महान विभूति पखावज वादक ताल शिरोमणि पंडित शत्रुंजय प्रसाद सिंह उर्फ बाबू लालन जी यहीं के थे. उन्हें पखावज वादक के रूप में हिंदुस्तान भर में जाना जाता था. भोजपुर जो कभी शास्त्रीय संगीत की धरोहर था वह आज भोजपुरी लोकधुन के नाम पर फैले फूहड़ता के कारण विश्व कुख्यात हो गया है. बीते इतिहास के पन्नो में इसके गौरव की बातों को सुनकर यकीन नही होता कि भोजपुर की मिट्टी सचमुच संगीत और कला के लिए इतनी समृद्ध थी! इतिहास के बीते पलों का गवाह एक फ़ोटो फ्रेम है जो आज तबला वादक सुरजकान्त पांडेय को मिला. सूरज इस फोटो के बारे में बताते हैं कि यह दुर्लभ फ़ोटो आरा जमीरा के राजा महान पखावज वादक ताल शिरोमणि पंडित शत्रुंजय प्रसाद सिंह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>क्या आपको पता है आरा की धरती पर कौन-कौन से संगीतज्ञ आया करते थे!</strong></p>



<p>आरा, 19 जुलाई. एक फ्रेम में कैद पुरानी तस्वीर ने संगीत के एक छात्र की नींद उड़ा दी. दरअसल छात्र को एक दुर्लभ तस्वीर मिली जिसमें संगीत के कई विभूतियों को उसने एक साथ देखा और चौंक गया. इस तस्वीर में महान पखावज वादक ताल शिरोमणि पंडित शत्रुंजय प्रसाद सिंह उर्फ बाबू लल्लन जी के साथ कई महान लोग थे.</p>



<p>आरा से महज 8 किमी की दूरी पर स्थित है जमीरा गाँव. इस गांव को जमीरा इस्टेट के नाम से जाना जाता है. जमींदारों का यह गांव अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए आज भी जाना जाता है. अभी भी यहाँ स्थित हवेली इसके बीते पल के इतिहास को कहते नही थकती. संगीत के महान विभूति पखावज वादक ताल शिरोमणि पंडित शत्रुंजय प्रसाद सिंह उर्फ बाबू लालन जी यहीं के थे. उन्हें पखावज वादक के रूप में हिंदुस्तान भर में जाना जाता था. भोजपुर जो कभी शास्त्रीय संगीत की धरोहर था वह आज भोजपुरी लोकधुन के नाम पर फैले फूहड़ता के कारण विश्व कुख्यात हो गया है. बीते इतिहास के पन्नो में इसके गौरव की बातों को सुनकर यकीन नही होता कि भोजपुर की मिट्टी सचमुच संगीत और कला के लिए इतनी समृद्ध थी! इतिहास के बीते पलों का गवाह एक फ़ोटो फ्रेम है जो आज तबला वादक सुरजकान्त पांडेय को मिला. सूरज इस फोटो के बारे में बताते हैं कि यह दुर्लभ फ़ोटो आरा जमीरा के राजा महान पखावज वादक ताल शिरोमणि पंडित शत्रुंजय प्रसाद सिंह उर्फ बाबू लालन जी का है जिसमें उनके साथ बैठे हुए बाये से पंडित अनोखेलाल मिश्रा, उस्ताद अल्लारखा खान साहब,पंडित केशोब बनर्जी, बाबू लालन जी, पंडित गोपाल मिश्रा, उस्ताद करामतउल्ला खान साहब, और पंडित समता प्रसाद उर्फ गुदई महराज. साथ ही खड़े हुए लोगों बाये से–पंडित कन्हाई दत्त जी, पंडित महराज बनर्जी जी,पंडित ज्ञानप्रकाश घोष, पंडित श्यामलाल बोस…!</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img decoding="async" width="650" height="496" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_durlbh-tasvir-of-babu-lallan-650x496.jpg" alt="" class="wp-image-54339" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_durlbh-tasvir-of-babu-lallan-650x496.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_durlbh-tasvir-of-babu-lallan-350x267.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_durlbh-tasvir-of-babu-lallan.jpg 720w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>संगीत के दिग्गजों को एक साथ एक फ्रेम में देखने के बाद सूरज कहते हैं कि बहुत गर्व से सर ऊचा हो गया. ऐसे महान व्यक्ति के जन्म-भूमि और कर्म-भूमि आरा में हमारा जन्म हुआ. धन्य हैं आरा की धरती जो ऐसे महान ताल शिरोमणि को जन्म दिया.</p>



<p>लेकिन अगले ही क्षण दुःखी मन से कहते हैं कि कभी-कभी ये भी बात मन को कचोटती है कि आज हम हर जगह पंडित गुदई महराज, उस्ताद अल्लहरखा खा साहब,पंडित ज्ञानप्रकाश घोष, करामतउल्ला खा साहब और अन्य लोगो के बारे में सुनते हैं देखते हैं और पढ़ते भी हैं मगर शत्रुंजय प्रसाद उर्फ बाबू लल्लन के बारे में कही कुछ भी नही देखने और पढ़ने को नही मिलता हैं.ये बहुत दुःखद है. सुरजकान्त बतलाते कि आज ये फोटो फ्रेम बहुत ही भाग्य से उन्हें प्राप्त हुआ. जिसे देखने बाद तो मन बहुत खुश हुआ है पर इस मिट्टी में जन्मे बाबू लल्लन जी के बारे में उनके इतिहास को नही पढ़ना सुनना मन में कई<br>सवाल भी पैदा कर रहे है. आखिर क्यों नही अभी तक संगीत के इस महान विभूति के बारे में किसी ने कुछ नही लिखा ?</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जॉइन कीजिये थियेटर की 20 दिवसीय मुफ्त कार्यशाला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Jul 2021 18:23:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[&#8220;अभिनव एवं ऐक्ट&#8221; आयोजित करेगा 20 दिवसीय मुफ्त नाट्य कार्यशाला रविवार 18 जुलाई से प्रारंभ होगी 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला आरा, 16 जुलाई. भोजपुर जिले की थियेटर में अग्रणी रँग संस्था अभिनव और ऐक्ट आरा आगामी 18 जुलाई से 6 अगस्त तक एक नाट्य कार्यशाला का आयोजन करने जा रही है. संस्था 20 दिनों तक चलने वाले इस कार्यशाला में 6 साल से 14 साल और 15साल और उससे अधिक दो श्रेणियों के लोगों के लिए नाट्य कार्यशाला का आयोजन करने जा रही है. इस कार्यशाला में देश के नामी कई थियेटर दिग्गजो के शरीक होने की खबर है. थियेटर के दिग्गजों के साथ पेंटिंग, क्राफ्ट,मेकअप,संगीत,नृत्य और कैमरा फेसिंग के भी कई दिग्गज कार्यशाला में आने वाले थियेटर प्रेमियों को अपने हुनर को उनमें भरेंगे. बाहर के वैसे लोग जो फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं वे भी इन बच्चों को ऑनलाइन के जरिये अपना हुनर इनमें भरेंगे. पहले दिन प्रशिक्षण में बतौर प्रशिक्षक जहांगीर खान आएंगे और थियेटर की बारीकियों को बताएंगे. कार्यशाला पूरी तरह से निः शुल्क है जो रेडक्रॉस के बगल में स्थित मंगलम द वेन्यू में आयोजित होगा. आयोजक ने बताया कि कोविड गाइडलाइंस का सभी कार्यशाला में मौजूद लोगों को सख्ती से पालन करना अनिवार्य है. कार्यशाला के निर्देशक वरिष्ठ रंगकर्मी, निर्देशक व पत्रकार रविन्द्र भारती हैं वही कार्यशाला के संयोजक ओ पी पांडेय को बनाया गया है. रविंद्र भारती ने अभिभवकों और स्कूल के शिक्षकों के साथ प्रबन्धकों से आग्रह किया कि कोरोना काल की वजह से मानसिक स्थिति से गुजर रहे सभी लोगों को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>&#8220;अभिनव एवं ऐक्ट&#8221; आयोजित करेगा 20 दिवसीय मुफ्त नाट्य कार्यशाला</strong></p>



<p><strong>रविवार 18 जुलाई से प्रारंभ होगी 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला</strong></p>



<p>आरा, 16 जुलाई. भोजपुर जिले की थियेटर में अग्रणी रँग संस्था अभिनव और ऐक्ट आरा आगामी 18 जुलाई से 6 अगस्त तक एक नाट्य कार्यशाला का आयोजन करने जा रही है. संस्था 20 दिनों तक चलने वाले इस कार्यशाला में 6 साल से 14 साल और 15साल और उससे अधिक दो श्रेणियों के लोगों के लिए नाट्य कार्यशाला का आयोजन करने जा रही है. इस कार्यशाला में देश के नामी कई थियेटर दिग्गजो के शरीक होने की खबर है. थियेटर के दिग्गजों के साथ पेंटिंग, क्राफ्ट,मेकअप,संगीत,नृत्य और कैमरा फेसिंग के भी कई दिग्गज कार्यशाला में आने वाले थियेटर प्रेमियों को अपने हुनर को उनमें भरेंगे. बाहर के वैसे लोग जो फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं वे भी इन बच्चों को ऑनलाइन के जरिये अपना हुनर इनमें भरेंगे. पहले दिन प्रशिक्षण में बतौर प्रशिक्षक जहांगीर खान आएंगे और थियेटर की बारीकियों को बताएंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img decoding="async" width="400" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Abhinav-theatre-workshopAra.jpg" alt="" class="wp-image-54272" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Abhinav-theatre-workshopAra.jpg 400w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_Abhinav-theatre-workshopAra-233x350.jpg 233w" sizes="(max-width: 400px) 100vw, 400px" /></figure>



<p>कार्यशाला पूरी तरह से निः शुल्क है जो रेडक्रॉस के बगल में स्थित मंगलम द वेन्यू में आयोजित होगा. आयोजक ने बताया कि कोविड गाइडलाइंस का सभी कार्यशाला में मौजूद लोगों को सख्ती से पालन करना अनिवार्य है. कार्यशाला के निर्देशक वरिष्ठ रंगकर्मी, निर्देशक व पत्रकार रविन्द्र भारती हैं वही कार्यशाला के संयोजक ओ पी पांडेय को बनाया गया है. रविंद्र भारती ने अभिभवकों और स्कूल के शिक्षकों के साथ प्रबन्धकों से आग्रह किया कि कोरोना काल की वजह से मानसिक स्थिति से गुजर रहे सभी लोगों को अपने बच्चों को ऐसे कार्यशाला में भेजना चाहिए. इससे न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्थिति में भी बदलाव आएगा. साथ ही साथ कुछ सीखने को भी मिलेगा. ऑनलाइन क्लास जहाँ सत्यकाम आनन्द, जितेंद्र सुमन,अनिरुद्ध पाठक, विष्णु शंकर बेलू, और विजय सिंह सहित कई नामी लोग देंगे वही ऑफलाइन क्लास संजय उपाध्याय, शारदा सिंह, चंद्रभूषण पांडेय, जहाँगीर खान,सतीश मुन्ना,कौशलेश कुमार, कमलेश कुंदन,रौशन राय, मनोज श्रीवास्तव जैसे कई फेमस नाम प्रशिक्षण के लिए नाट्य प्रेमियों को प्रशिक्षित करेंगे.</p>



<p><strong>प्रशिक्षण देंगें जहाँगीर खान: एक परिचय</strong><br>छपरा के जहाँगीर खान एक दशक से बिहार रंगमंच में सक्रिय रंगकर्मी हैं, मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय ,भोपाल से रंगमंच के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त अभिनेता व रंगकर्मी हैं. इन्होंने पकवाघर, महानिर्वाण, रामलीला, अटकी हुई आत्मा ,सनेहिया के नाच, कथावाचक की बेटी, जिनिगिया तोहार, राजा निरबंसिया जैसे महत्वपूर्ण नाटकों का सफल निर्देशन किया है. देश के विभिन्न राज्यों में लगभग दर्जन भर अभिनय कार्यशालाओं में प्रशिक्षक के रूप में जुड़े रहे हैं. रंगमंच में मत्त्वपूर्ण योगदान के लिए रंगकर्मी प्रवीण स्मृति सम्मान से 2017 में सम्मानित जहाँगीर खान को जय प्रकाश विश्वविद्यालय ,छपरा में छात्र के रूप में संस्कृतिक योगदान के लिए देश का प्रतिष्ठित पुरस्कार इंदिरा गाँधी एन0 एस0एस0 राष्ट्रीय पुरस्कार से 2008 में भारत सरकार द्वारा भी सम्मानित किया गया है. इन्होंने यूथ आइकॉन के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व 2008 में कॉमनवेल्थ के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में मालद्वीव में किया था. साथ ही भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय द्वारा रंगमंच के क्षेत्र में रिसर्च के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप भी प्रदान किया गया है. रंगमंच के साथ-साथ सिनेमा व टेलीविजन जगत में भी अभिनेता के रुप में जहाँगीर ने अपनी पहचान बनाई है. दूरदर्शन ,आकाशवाणी, zee tv, &amp; tv ,star bharat जैसे राष्ट्रीय चैनलों के साथ एक अभिनेता के रूप में जुड़े रहे हैं. ये बिहार की सक्रिय रंग संस्था आशा रेपरेट्री के संस्थापक व द एक्टर्स स्पेस एन एक्टिंग स्कूल ,पटना के निर्देशक हैं और वर्तमान में एक अभिनेता व निर्देशक के रूप में बिहार में सक्रिय हैं.</p>



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<p>आरा से<strong> सत्य प्रकाश सिंह</strong> की रिपोर्ट</p>
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