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	<title>Mithilanchal &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>कोसी और मिथिलांचल के बीच की दूरियां हुईं कम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 May 2022 17:24:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[करीब नौ दशक के बाद एक बार फिर कोसी और मिथिलांचल एक हो रहे हैं. रेलवे के नवनिर्मित झंझारपुर-निर्मली आमान परिवर्तित रेलखंड (32 किमी) एवं निर्मली-आसनपुर कुपहा नई रेल लाईन (06 किमी) का रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव शनिवार को उद्घाटन कर रहे हैं. पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ वीरेंद्र कुमार ने बताया कि अश्विनी वैष्णव, रेल, संचार, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, भारत सरकार दिनांक 07.05.2022 को नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से झंझारपुर-निर्मली नव आमान परिवर्तित रेलखंड (32 किमी) तथा निर्मली-आसनपुर कुपहा नई रेल लाईन (06 किमी) का उद्घाटन तथा नए रेलखंड पर हरी झंडी दिखाकर ट्रेन सेवाओं के परिचालन का शुभारंभ करेंगे. इस अवसर पर झंझारपुर स्टेशन पर एक समारोह का आयोजन किया जायेगा जिसमें कई गणमान्य अतिथिगण उपस्थित रहेंगे. वीरेंद्र कुमार ने बताया कि दिनांक 07.05.2022 को रेल मंत्री द्वारा 14.00 बजे गाड़ी संख्या 05553 झंझारपुर-सहरसा डेमू पैसेंजर स्पेशल को उद्घाटन स्पेशल के रूप में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जायेगा तथा इस ट्रेन का परिचालन ओपन टाइम के अनुसार किया जायेगा. बता दें कि यह परियोजना 206 किलोमीटर लंबे सकरी-लौकहा बाजार-निर्मली एवं सहरसा-फॉरबिसगंज आमान परिवर्तन परियोजना का भाग है. इस परियोजना की कुल स्वीकृत लागत 1584 करोड़ रूपए है. इसके साथ ही 491 करोड़ रूपए की लागत से कोसी मेगाब्रिज का निर्माण किया गया है जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर-कमलों द्वारा 18 सितंबर, 2020 को देश को समर्पित किया गया था. झंझारपुर से आसनपुर कुपहा तक 38 किलोमीटर का कार्य 456 करोड़ रूपए की लागत से पूरी कर ली गई है. इस रेलखंड के चालू [&#8230;]]]></description>
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<p>करीब नौ दशक के बाद एक बार फिर कोसी और मिथिलांचल एक हो रहे हैं. रेलवे के नवनिर्मित झंझारपुर-निर्मली आमान परिवर्तित रेलखंड (32 किमी) एवं निर्मली-आसनपुर कुपहा नई रेल लाईन (06 किमी) का रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव शनिवार को उद्घाटन कर रहे हैं.</p>



<p>पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ वीरेंद्र कुमार ने बताया कि अश्विनी वैष्णव,  रेल, संचार, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, भारत सरकार दिनांक 07.05.2022 को नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से झंझारपुर-निर्मली नव आमान परिवर्तित रेलखंड (32 किमी) तथा निर्मली-आसनपुर कुपहा नई रेल लाईन (06 किमी) का उद्घाटन तथा नए रेलखंड पर हरी झंडी दिखाकर ट्रेन सेवाओं के परिचालन का शुभारंभ करेंगे. इस अवसर पर झंझारपुर स्टेशन पर एक समारोह का आयोजन किया जायेगा जिसमें कई गणमान्य अतिथिगण उपस्थित रहेंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="222" height="227" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220506-WA0017.jpg" alt="" class="wp-image-61713"/></figure>



<p>वीरेंद्र कुमार ने बताया कि दिनांक 07.05.2022 को  रेल मंत्री  द्वारा 14.00 बजे गाड़ी संख्या 05553 झंझारपुर-सहरसा डेमू पैसेंजर स्पेशल को उद्घाटन स्पेशल के रूप में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जायेगा तथा इस ट्रेन का परिचालन ओपन टाइम के अनुसार किया जायेगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="480" height="360" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220506-WA0018.jpg" alt="" class="wp-image-61714" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220506-WA0018.jpg 480w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220506-WA0018-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 480px) 100vw, 480px" /></figure>



<p>बता दें कि यह परियोजना 206 किलोमीटर लंबे सकरी-लौकहा बाजार-निर्मली एवं सहरसा-फॉरबिसगंज आमान परिवर्तन परियोजना का भाग है. इस परियोजना की कुल स्वीकृत लागत 1584 करोड़ रूपए है. इसके साथ ही 491 करोड़ रूपए की लागत से कोसी मेगाब्रिज का निर्माण किया गया है जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर-कमलों द्वारा 18 सितंबर, 2020 को देश को समर्पित किया गया था. झंझारपुर से आसनपुर कुपहा तक 38 किलोमीटर का कार्य 456 करोड़ रूपए की लागत से पूरी कर ली गई है. इस रेलखंड के चालू हो जाने से 88 वर्षों के बाद दो भागों में विभाजित मिथिलांचल के बीच रेल संपर्क पुनः स्थापित हो जाएगा. इससे इस क्षेत्र के लोग रेलवे के विशाल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे जो लोगों के लिए आर्थिक समृद्धि का द्वार खोलेगा.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>मिथिलांचल में महागठबंधन : क्यों हाशिये पर हैं ब्राह्मण</title>
		<link>https://www.patnanow.com/why-bramhins-not-being-given-importance-in-mithilanchal-by-mahagathbandhan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nikhil]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 Mar 2019 12:59:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना (निखिल के डी वर्मा की रिपोर्ट) &#124; बात शुरू करता हूं जेपी आन्दोलन की. यह आन्दोलन देश में हावी हो रही कथित कानूनी अराजकता और संवैधानिक संकट के विरोध में हुआ था. नतीजा भी बेहतर रहा. केन्द्र से लेकर राज्यों तक सत्ता बदल गई. नई मानसिकता के साथ शासन की शुरुआत हुई. नब्बे के दशक के शुरुआती दिनों तक सब ठीक रहा. बाद के दिनों में राजनीतिक सोच जाति और धर्म के इर्द-गिर्द घूमने लगा. बिहार में लालू को सत्ता मिली. सामाजिक ताना बाना बदलने लगा. पिछड़ों को पहचान मिली लेकिन समाज में जातीय तनाव फन उठाना शुरू किया. नतीजे के तौर पर सूबे में कई नरसंहार हुए. जातियों को आधार बना कर वोटों का ध्रुवीकरण शुरू हुआ, बल्कि कुछ पार्टियां जाति विशेष के तौर पर पहचान बनाने में कामयाब रही. इन पार्टियों के नेता राज्यहित को दरकिनार करते हुए खुद के लिए जाति के नाम पर गोलबंदी किया. यह दौर भी लम्बा चला, कई अहित हुए, कई जातीय समीकरण बदले. लेकिन एक-दो जातियों के प्रति राजनीतिक पार्टियों का एप्रोच आज भी नहीं बदला है. यहां बात की जा रही है महागठबंधन में लीड रोल में शामिल राजद की. राजद के शुरुआती दौर में वरीय ब्राह्मण नेताओं के तौर पर शिवानंद तिवारी (जो खुद भी जाति के नेता के तौर पर अपनी पहचान नहीं मानते) और रघुनाथ झा का उल्लेख किया जा सकता है. रघुनाथ झा अब नहीं रहे और शिवानंद बाबा कभी भी जातीय हित की बात करना मुनासिब नहीं समझा. आज समय बदल गया है. लालू और [&#8230;]]]></description>
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<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/03/pnc-mithilanchal-650x366.png" alt="" class="wp-image-38864" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2019/03/pnc-mithilanchal.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2019/03/pnc-mithilanchal-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>पटना (निखिल के डी वर्मा की रिपोर्ट)</strong> | बात शुरू करता हूं जेपी आन्दोलन की. यह आन्दोलन देश में हावी हो रही कथित कानूनी अराजकता और संवैधानिक संकट के विरोध में हुआ था. नतीजा भी बेहतर रहा. केन्द्र से लेकर राज्यों तक सत्ता बदल गई. नई मानसिकता के साथ शासन की शुरुआत हुई. नब्बे के दशक के शुरुआती दिनों तक सब ठीक रहा. बाद के दिनों में राजनीतिक सोच जाति और धर्म के इर्द-गिर्द घूमने लगा. बिहार में लालू को सत्ता मिली. सामाजिक ताना बाना बदलने लगा. पिछड़ों को पहचान मिली लेकिन समाज में जातीय तनाव फन उठाना शुरू किया. नतीजे के तौर पर सूबे में कई नरसंहार हुए. जातियों को आधार बना कर वोटों का ध्रुवीकरण शुरू हुआ, बल्कि कुछ पार्टियां जाति विशेष के तौर पर पहचान बनाने में कामयाब रही. इन पार्टियों के नेता राज्यहित को दरकिनार करते हुए खुद के लिए जाति के नाम पर गोलबंदी किया. यह दौर भी लम्बा चला, कई अहित हुए, कई जातीय समीकरण बदले. लेकिन एक-दो जातियों के प्रति राजनीतिक पार्टियों का एप्रोच आज भी नहीं बदला है. यहां बात की जा रही है महागठबंधन में लीड रोल में शामिल राजद की.<br> राजद के शुरुआती दौर में वरीय ब्राह्मण नेताओं के तौर पर शिवानंद तिवारी (जो खुद भी जाति के नेता के तौर पर अपनी पहचान नहीं मानते) और रघुनाथ झा का उल्लेख किया जा सकता है. रघुनाथ झा अब नहीं रहे और शिवानंद बाबा कभी भी जातीय हित की बात करना मुनासिब नहीं समझा. आज समय बदल गया है. लालू और उनकी जातीय दबदबे का जमाना नहीं रहा. समय की मांग है कि नए समीकरण पर राजद काम करे और तेजस्वी के लिए यह एक सुनहरा मौका है. तेजस्वी नए युग के नेता हैं, परवरिश भी खुले विचारों के बीच हुई है और जमाने को भी देखा है. तेजस्वी को आगे आकर राजद के लिए नए परिभाषा गढ़ने की जरूरत है.<br> शेष बिहार की बात छोड़ भी दें तो मिथिलांचल में ब्राह्मण एक बड़ी ताकत हैं, संख्या बल के साथ-साथ हर मोर्चे पर किसी भी राजनीतिक पार्टी को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं. लेकिन अभी तक का ट्रेंड बता रहा कि राजद इस मुद्दे को लेकर बहुत उत्साहित नहीं है. पिछले साल राज्यसभा के लिए जब मनोज झा राजद की तरफ से निर्वाचित हुए तो ब्राह्मणों में एक अच्छा संदेश गया. उम्मीद की जा रही थी कि लोकसभा में राजद ब्राह्मणों को बेहतर तवज्जो देगा. ब्राह्मणों की तरफ से भी हाथ बढ़ाए जाने जैसी शुरुआती रूझान भी मिलने लगे. अब सबों की निगाह मिथिलांचल औऱ चंपारण के सीटों पर है. लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है. राजद हिस्से की बात छोड़ भी दें, कीर्ति झा आजाद को भी कांग्रेस का हाथ नहीं मिला.<br> चर्चा है कि मिथिला के मशहूर मिश्रा परिवार के सदस्य और देश के नामचीन पत्रकार राजीव मिश्र भी इस बार लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमाने के इच्छुक हैं. राजद उन्हें अपना प्रत्याशी बनाए, इसके लिए पिछले साल से कोशिश भी चल रही है. बताया तो जा रहा है कि राजीव मिश्र की मुलाकात सुप्रीमो लालू और युवराज तेजस्वी से हो चुकी है और संकेत भी मिले हैं. खुले तौर पर अस्वीकार करते हुए राजीव मिश्र इशारों इशारे में कहने से नहीं चूकते कि राजद को इसका फायद विधानसभा में मिलेगा. बकौल राजीव मिश्र ‘राजद का बड़ा स्टेक बिहार विधानसभा चुनाव है और लालू जी चाहते हैं कि तेजस्वी अगला मुख्यमंत्री बने. जाहिर है इसके लिए राजद को अपने जातीय दायरे को रीडिफाइन करना होगा. पुरानी बातों को भूलना होगा और नए सिरे से अगर नए बिहार का निर्माण करना है तो मिथिलांचल की बड़ी ताकत, ब्राह्मणों को तवज्जो देना होगा. अभी भी देर नहीं हुई है‘. दबी जुबान राजीव मिश्र यह गणित बताने से भी नहीं चूके कि झंझारपुर तो हर हिसाब से जीत के लिए ब्राह्मण प्रत्याशी की बाट जोह रहा है. उनकी मानें तो उस इलाके में लोगों का स्नेह उनके परिवार के प्रति अकल्पनीय है. जाहिर है गेंद राजद के पाले में है. कुल मिलाकर बदले राजनीतिक परिवेश और जरूरत इस बात की है कि महागठबंधन को इस मुद्दे का ध्यान रखते हुए उसे नए समीकरण गढ़ने की जरूरत है.</p>
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