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	<title>manoj singh ganga snan ara &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>भारंगम के लिए आरा से टीम रवाना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Feb 2024 07:07:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[9 फ़रवरी को होगी डिब्रूगढ़ में प्रस्तुति आरा,7 फरवरी(ओ पी पांडेय). राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (National School of Drama) नई दिल्ली द्वारा आयोजित 1 फरवरी से शुरू हुए भारत रंग महोत्सव में भाग लेने प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी,भोजपुर की टीम युवा निर्देशक मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में मंगलवार को आरा से रवाना हुई. आरा के ये कलाकार 9 फरवरी को असम के डिब्रुगढ़ में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर लिखित &#8220;गंगा स्नान&#8221; की प्रस्तुति देंगे. नाटक युवा निर्देशक मनोज कुमार सिंह द्वारा निर्देशित किया गया है, जिसकी अबतक दर्जन भर प्रस्तुति बिहार और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हो चुकी है. इस मौके पर शहर के प्रसिद्ध समाजसेवी विष्णु सिंह, युवा नेता अभय विश्वास भट्ट, रंगकर्मी अनिल कुमार तिवारी &#8216;दीपू&#8217; संगीतज्ञ लक्ष्मण दुबे व रंगकर्मी व शिक्षक सुधीर शर्मा ने आरा रेलवे स्टेशन पर कलाकारों को फुल माला पहना व मिठाई खिला कर रवाना किया. बताते चलें कि भारत रंग महोत्सव इस वर्ष अपना रजत जयंती समारोह मना रहा है. जिसमें अपनी प्रस्तुतियों के लिए देश-विदेश से कुल मिलाकर लगभग 850 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमें 62 नाटकों का चयन भारत रंग महोत्सव में प्रदर्शन के लिए किया गया है,जिसमें एक नाटक भोजपुर से भी है जो जिले के लिए सौभाग्य का बात है. इस चयन से न सिर्फ रंगकर्मियों व रंग दर्शकों के बीच एक खुशी की लहर है बल्कि छात्र-छात्राओं, युवाओं और बुद्धिजीवियों से लेकर हर ओर इसकी चर्चा है और लोग इसके लिए आरा के कलाकारों को साधुवाद देते देखे जा रहे हैं. चाय की दुकानों से लेकर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>9 फ़रवरी को होगी डिब्रूगढ़ में प्रस्तुति</strong></p>



<p>आरा,7 फरवरी(<strong>ओ पी पांडेय</strong>). राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (<strong>N</strong>ational <strong>S</strong>chool of <strong>D</strong>rama) नई दिल्ली द्वारा आयोजित 1 फरवरी से शुरू हुए भारत रंग महोत्सव में भाग लेने प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी,भोजपुर की टीम युवा निर्देशक मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में मंगलवार को आरा से रवाना हुई.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468163-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-82468" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468163.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468163-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468163-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



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<p>आरा के ये कलाकार 9 फरवरी को असम के डिब्रुगढ़ में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर लिखित &#8220;गंगा स्नान&#8221; की प्रस्तुति देंगे. नाटक युवा निर्देशक मनोज कुमार सिंह द्वारा निर्देशित किया गया है, जिसकी अबतक दर्जन भर प्रस्तुति बिहार और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हो चुकी है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468158-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-82469" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468158.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468158-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468158-768x346.jpg 768w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इस मौके पर शहर के प्रसिद्ध समाजसेवी विष्णु सिंह, युवा नेता अभय विश्वास भट्ट, रंगकर्मी अनिल कुमार तिवारी &#8216;दीपू&#8217; संगीतज्ञ लक्ष्मण दुबे व रंगकर्मी व शिक्षक सुधीर शर्मा ने आरा रेलवे स्टेशन पर कलाकारों को फुल माला पहना व मिठाई खिला कर रवाना किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468148-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-82471" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468148.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468148-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468148-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468148-1536x864.jpg 1536w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बताते चलें कि भारत रंग महोत्सव इस वर्ष अपना रजत जयंती समारोह मना रहा है. जिसमें अपनी प्रस्तुतियों के लिए देश-विदेश से कुल मिलाकर लगभग 850 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमें 62 नाटकों का चयन भारत रंग महोत्सव में प्रदर्शन के लिए किया गया है,जिसमें एक नाटक भोजपुर से भी है जो जिले के लिए सौभाग्य का बात है. इस चयन से न सिर्फ रंगकर्मियों व रंग दर्शकों के बीच एक खुशी की लहर है बल्कि छात्र-छात्राओं, युवाओं और बुद्धिजीवियों से लेकर हर ओर इसकी चर्चा है और लोग इसके लिए आरा के कलाकारों को साधुवाद देते देखे जा रहे हैं. चाय की दुकानों से लेकर साहित्यिक जगहों और खेल के मैदान तक इसकी चर्चा कुछ दिनों से खास और लोगों को इसकी प्रस्तुति के बाद रंग-महोत्सव के दर्शकों की प्रतिक्रिया का इंतजार है.</p>



<p><strong>पंकज त्रिपाठी हैं ब्रांड अम्बेसडर</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="328" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468177.jpg" alt="" class="wp-image-82473" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468177.jpg 600w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468177-350x191.jpg 350w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="480" height="360" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468178.jpg" alt="" class="wp-image-82472" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468178.jpg 480w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468178-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 480px) 100vw, 480px" /></figure>



<p>राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित भारत रंग महोत्सव के इस वर्ष रजत जयंती के ब्रांड अम्बेसडर व रंगदूत एन एस डी के पूर्व छात्र, रंगमंच व हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता पंकज त्रिपाठी बने है. इस वर्ष महोत्सव की थीम &#8221; वसुधैव कुटुंबकम, वन्दे भारंगम है. यह महोत्सव दिल्ली, मुंबई, डिब्रुगढ़, पुणे, पटना, श्रीनगर, भुवनेश्वर, कटक आदि सहित देश के 16 नगरों में आयोजित हो रहा है. जहाँ रूस, इटली, श्रीलंका सहित 8 विदेशी नाटकों के साथ आमंत्रित नाटकों सहित 150 नाटकों का मंचन होगा. महोत्सव का समापन 21 फरवरी को दिल्ली में होगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="379" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468179-650x379.jpg" alt="" class="wp-image-82474" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468179.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468179-350x204.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी के सचिव कमलेश कुंदन ने बताया कि भोजपुर जिले से यह पहला नाट्य दल है जो भारत रंग महोत्सव में अपने कला का प्रदर्शन करेगा. दल नायक तिरुपति नाथ ने कहा कि पूरी टीम इस महोत्सव में प्रदर्शन के लिए बहुत उत्साहित है. पिछले 25 दिनों से लगातार नाटक का अभ्यास कर रही है. टीम के कलाकारों ने भारंगम के लिए जम कर पसीना बहाया है. इस नाटक का संगीत निर्देशन कर रहें लोक संगीतकार श्याम शमीर्ला ने कहा कि इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के माध्यम से हमारे लोकनाट्य, लोक संस्कृति व लोक संगीत को अंतर्राष्ट्रीय मंच मिलना भोजपुर और भोजपुरी के लिए गौरव की बात है. नाटक में विभिन्न भूमिकाओं में साहेब लाल यादव, जीतेन्द्र प्रसाद, राजा, सुंदरम राज, मुकेश मुस्कान, दीपू पाण्डेय आदि है.</p>



<p class="has-white-color has-midnight-gradient-background has-text-color has-background has-link-color wp-elements-9ad3b74a1709f27533fd14300a2ad9e5"><strong>प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी से भारंगम के लिए जाने वाले ये हैं भोजपुर के गौरव :</strong></p>



<ul class="has-vivid-purple-color has-pale-ocean-gradient-background has-text-color has-background has-link-color wp-block-list wp-elements-c995568cda6dd43897d24397c4e7b768">
<li>मनोज कुमार सिंह</li>



<li>श्याम बाबु कुमार</li>



<li>पंकज कुमार राॅय</li>



<li>राजा बसंत</li>



<li>साहेब लाल यादव</li>



<li>जितेन्द्र कुमार (लड्डू)</li>



<li>लवकुश सिंह</li>



<li>मुकेश कुमार</li>



<li>राज कुमार</li>



<li>दीपु कुमार</li>



<li>सुन्दरम राज</li>



<li>अभय कुमार ओझा (कुली बाबा)</li>



<li>सुरज कान्त पाण्डेय</li>



<li>हरिशंकर पासवान (निराला जी)</li>



<li>शशिकान्त निराला</li>



<li>रौशन कुमार</li>



<li>मो. जाफर आलम</li>



<li>कमलेश कुन्दन</li>



<li>साधना श्रीवास्तव</li>



<li>रितु पाण्डेय</li>



<li>आशा पाण्डेय</li>



<li>रंजीता कुमारी मिश्रा</li>



<li>मेहन्दी राज</li>



<li>उर्मिला कुमारी</li>



<li>तिरुपति नाथ (मनोज श्रीवास्तव)</li>
</ul>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468145-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-82475" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468145.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468145-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000468145-768x346.jpg 768w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आरा की नाट्य दल की इस सफलता पर नाटक के निर्देशक मनोज कुमार सिंह व पुरे नाट्य दल को वेद (संस्कार भारती बिहार अमित रौशन (बेगूसराय), अभय सिन्हा (पटना), रोहित त्रिपाठी (भिलाई छत्तीसगढ़) अशोक दास (असम्), तनवीर अख्तर (पटना इप्टा), अनिल कुमार तिवारी&#8217; दीपू&#8217; संयोजक आरा रंगमंच, श्रीधर शर्मा (भूमिका), मनोज कुमार सिंह (समाजसेवी), नागेंद्र पाण्डेय (संगीतकार,आरा) राकेश ठाकुर (प्रपौत्र भिखारी ठाकुर, कुतुबपुर), राम दास राही (लेखक), संजय राय (समाजसेवी), लक्ष्मण दुबे (शिक्षक), सुधीर शर्मा (लेखक व रंगकर्मी), चन्द्रभूषण पांडेय(रंग-गुरु/निर्देशक, अभिनव व ACT, आरा), रविंद्र भारती (वरिष्ठ रंगकर्मी व पत्रकार), अम्बुज आकाश (वरिष्ठ रंगकर्मी व लेखक) और ओ पी कश्यप (लेखक, युवा रंगकर्मी व सिने अभिनेता) सहित कई प्रबुद्धजनों ने सफल मंचन की शुभकामनाएँ दी हैं.</p>



<p></p>
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			</item>
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		<title>रंग सुगंध नाट्य समारोह में &#8220;कठकरेज&#8221; और &#8220;गंगा स्नान&#8221;का मंचन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/staging-of-kathkarej-and-ganga-snan-in-rang-sugandha-natya-samaroh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Jul 2023 08:20:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8220;कठकरेज&#8221; में मध्यमवर्गीय परिवार में रिश्तों के ताने -बाने को प्रस्तुत करता है गंगा स्नान में &#8221; वृद्धजनों &#8221; की उपेक्षा को मार्मिक ढंग से उकेरा गया रंग सुगंध आंचलिक भाषाओं का नाट्य समारोह के पहले दिन 19 जुलाई 2023 को पटना के प्रेमचंद रंगशाला में दो नाटकों का मंचन हुआ &#8220;कठकरेज&#8221; और &#8220;गंगा स्नान&#8221;का मंचन किया गया.अमित रोशन द्वारा निर्देशित पहली प्रस्तुति कठकरेज में दिखाया गया है कि आज के भाग दौड़ वाली जिंदगी में लोग मतलबी होते जा रहे हैं. आधुनिकता में इंसान रिश्तों की कदर करना भूलकर भौतिकतावादी जिंदगी अपना रहा है. पैसे कमाने की होड़ में खून के रिश्ते झुठकर साबित हो रहे हैं. श्रवणकुमार गोस्वामी द्वारा लिखित कहानी कठकरेज एक मध्यमवर्गीय परिवार में रिश्तों के ताने -बाने को प्रस्तुत करता है जहाँ अपने पराये हो जाते हैं और पराये अपने हो जाते हैं. गंगा बाबू ने तीनो बेटों की अच्छी परवरिश की उसे पढ़ाया लिखाया काबिल बनाकर अच्छे मुकाम पर पहुँचाया. पर इनमें से दो बेटों ने ख़ून के रिश्तों को दरकिनार कर चका चौध की ओर रुख कर लिया. वहीं तीसरा बेटा जो सगा बेटा ना होकर भी बेटे का फर्ज़ अदा करता है. यह कहानी आपकी भी हो सकती है. नहीं तो एक बार सोचने पर ज़रुर विवश करेगी. बाकी नाटक आप देखें और तय करें कि मैं आपको कहाँ तक झकझोर पाया. गंगा बाबू:- मोहित मोहन,कांति:- कविता कुमारी,सुत्रधार:- सचिन कुमार/ अरुण कुमार, भारती रज्जन की पत्नी:&#160; कृष्णा कुमारी,ग्रामीण:- सचिन कुमार, मनोज महतो, नंदकिशार मालाकार, बिटटू कुमार&#160; ने अपने अभिनय से दर्शकों को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p class="has-white-color has-vivid-cyan-blue-background-color has-text-color has-background"><strong>&#8220;कठकरेज&#8221; में मध्यमवर्गीय परिवार में रिश्तों के ताने -बाने को प्रस्तुत करता है </strong></p>



<p class="has-white-color has-vivid-purple-background-color has-text-color has-background"><strong>गंगा स्नान में &#8221; वृद्धजनों &#8221; की उपेक्षा को मार्मिक ढंग से उकेरा गया</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="632" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/0ed21c8c-17f9-4d10-818e-48555a7511e4-632x650.jpg" alt="" class="wp-image-76547" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/0ed21c8c-17f9-4d10-818e-48555a7511e4-632x650.jpg 632w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/0ed21c8c-17f9-4d10-818e-48555a7511e4-340x350.jpg 340w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/0ed21c8c-17f9-4d10-818e-48555a7511e4.jpg 714w" sizes="(max-width: 632px) 100vw, 632px" /></figure>



<p>रंग सुगंध आंचलिक भाषाओं का नाट्य समारोह के पहले दिन 19 जुलाई 2023 को पटना के प्रेमचंद रंगशाला में दो नाटकों का मंचन हुआ &#8220;कठकरेज&#8221; और &#8220;गंगा स्नान&#8221;का मंचन किया गया.अमित रोशन द्वारा निर्देशित पहली प्रस्तुति कठकरेज में दिखाया गया है कि आज के भाग दौड़ वाली जिंदगी में लोग मतलबी होते जा रहे हैं. आधुनिकता में इंसान रिश्तों की कदर करना भूलकर भौतिकतावादी जिंदगी अपना रहा है. पैसे कमाने की होड़ में खून के रिश्ते झुठकर साबित हो रहे हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="537" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/12a15423-8a47-4004-839b-38b2212c9a3b-650x537.jpg" alt="" class="wp-image-76548" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/12a15423-8a47-4004-839b-38b2212c9a3b-650x537.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/12a15423-8a47-4004-839b-38b2212c9a3b-350x289.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/12a15423-8a47-4004-839b-38b2212c9a3b.jpg 666w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>श्रवणकुमार गोस्वामी द्वारा लिखित कहानी कठकरेज एक मध्यमवर्गीय परिवार में रिश्तों के ताने -बाने को प्रस्तुत करता है जहाँ अपने पराये हो जाते हैं और पराये अपने हो जाते हैं. गंगा बाबू ने तीनो बेटों की अच्छी परवरिश की उसे पढ़ाया लिखाया काबिल बनाकर अच्छे मुकाम पर पहुँचाया. पर इनमें से दो बेटों ने ख़ून के रिश्तों को दरकिनार कर चका चौध की ओर रुख कर लिया. वहीं तीसरा बेटा जो सगा बेटा ना होकर भी बेटे का फर्ज़ अदा करता है. यह कहानी आपकी भी हो सकती है. नहीं तो एक बार सोचने पर ज़रुर विवश करेगी. बाकी नाटक आप देखें और तय करें कि मैं आपको कहाँ तक झकझोर पाया.</p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color">गंगा बाबू:- मोहित मोहन,कांति:- कविता कुमारी,सुत्रधार:- सचिन कुमार/ अरुण कुमार, भारती रज्जन की पत्नी:&nbsp; कृष्णा कुमारी,ग्रामीण:- सचिन कुमार, मनोज महतो, नंदकिशार मालाकार, बिटटू कुमार&nbsp; ने अपने अभिनय से दर्शकों को मन्त्र मुग्ध कर दिया. नाटक में संगीत:- सूरज कुमार, वादन:- नंदकिशोर मालाकार,प्रकाश :- रोशन कुमार,कॉस्ट्यूम :- सचिन कुमार,सेट:- कुणाल भारती,प्रोपॅटी:- मोहित मोहन,मेकअप:- सचिन कुमार,सहयोग:- बिटटू एवं बिष्णु कुमार का था वहीं इस नाटक के लेखक है &nbsp;श्रवण गोस्वामी और निर्देशक है अमित रौशन और प्रस्तुति थी समूहः- आशीर्वाद- रंगमंडल, बेगूसराय (बिहार)</p>



<p><strong>दूसरी प्रस्तुति :</strong> गंगा स्नान </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="456" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/GANGA-SNANA-650x456.png" alt="" class="wp-image-76549" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/GANGA-SNANA-650x456.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/GANGA-SNANA-350x246.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/GANGA-SNANA-768x539.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/GANGA-SNANA-1536x1078.png 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/GANGA-SNANA-130x90.png 130w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/GANGA-SNANA.png 1779w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>भिखारी ठाकुर लिखित और मनोज कुमार सिंह निर्देशित नाटक गंगा स्नान दूसरी प्रस्तुति थी इस नाटक के माध्यम से वृद्धजनों की उपेक्षा को मार्मिक ढंग से उकेरा गया है ,गंगा पूजनीय तो वृद्ध भी पूजनीय बनें , उन्हें वृद्धाश्रम मत पहुंचाओ जैसे सन्देश देता नाटक को दर्शकों ने सराहा. नाटक गंगा स्नान की कहानी में मलेछु की शादी को सात साल हो गए हैं पर वह अबतक निःसंतन है. वह गांव के लोगों के साथ सपरिवार गंगा स्नान करने जाना चाहता है. उसके साथ बूढ़ी मां भी जाना चाहती है जिसके लिए मलेछु की पत्नी तैयार नहीं है. वह इस शर्त पर तैयार होती है की मां उसकी भी गठरी ढोएगी. भीड़ भाड़ और मेला के कारण गठरी उससे गिर जाती है, उसमे रखा कपड़ा और सामान खराब हो जाता है. गुस्से में पति &#8211; पत्नी मिलकर मां को मार &#8211; पीटकर भगा देते हैं. मेला में उसे एक ठग मिलता है जो साधु के भेष में है. साधु  मलेछू बहु का सारा सामान गहना आदि छीन लेता है . उन दोनो को पछतावा होता है. वे मां को मेला में ढूंढकर लाते हैं और उसे &#8220;गंगा स्नान&#8221; करा घर लौटते हैं.  इस नाटक में गंगा और उसके घाटों के आस &#8211; पास की संस्कृति तो है ही , आज के समय की सबसे बड़ी समस्या  &#8221; वृद्धजनों &#8221; की उपेक्षा को मार्मिक ढंग से उकेरा गया है , &#8220;गंगा पूजनीय तो वृद्ध भी पूजनीय बनें , उन्हें वृद्धाश्रम मत पहुंचाओ.&#8221;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="291" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/GANGA.png" alt="" class="wp-image-76550" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/GANGA.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/GANGA-350x157.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color">साहेब लाल यादव,लड्डू भोपाली,कृष्णा प्रजापति,गोकुल गुलशन,राजा,सुंदरम ने अपने अभिनय से प्रस्तुति को जीवंत बनाए रखा अन्य भूमिकाओं में तांत्रिक &#8211; लव कुश सिंह,माँ &#8211; आशा पांडेय,अटपट &#8211; मनोज कुमार सिंह,अटपट बहु &#8211; ऋतु पांडेय,मलेछु &#8211; पंकज भट्ट,मलेछु बहु &#8211; साधना श्रीवास्तव,संगीत &#8211; श्याम बाबू कुमार ,गायन &#8211; राजा बसंत , मेहंदी राज,झाल  &#8211; शशिकांत निराला, वादन &#8211;  अभय ओझा (तबला) , हरिशंकर निराला  (ढोलक)  दल संयोजक सह रूप सज्जा एवं वस्त्र विन्यास – तिरुपतिनाथ परिकल्पना व निर्देशन &#8211; मनोज कुमार सिंह</p>



<p>इस अवसर पर  प्रमोद पवार, अखिल भारतीय नाट्य विधा संयोजक,संस्कार भारती,पदमश्री श्याम शर्मा, अध्यक्ष, संस्कार भारती बिहार प्रदेश,संजय उपाध्याय, वरिष्ठ नाट्य निर्देशक रोशन , कार्यकारी अध्यक्ष, संस्कार भारती बिहार, रोहित त्रिपाठी, रंग निर्देशक,नई दिल्ली,वेद प्रकाश जी, संगठन मंत्री , संस्कार भारती बिहार प्रदेश उपस्थित थे .मंच संचालन राजीव रंजन श्रीवास्तव ने किया, मीडिया प्रभारी थे  मनीष महिवाल.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>37 वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 में जुटे देश के कलाकार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/artists-of-the-country-gathered-in-37th-pataliputra-natya-mahotsav-2022-23/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Feb 2023 04:36:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[37 th patliputra natya mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[abhay sinha]]></category>
		<category><![CDATA[manoj singh ganga snan ara]]></category>
		<category><![CDATA[suman kumar]]></category>
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					<description><![CDATA[राजधानी के लोगों को देखने मिल रहे हैं अच्छे नाटक तीसरे दिन दो मंचीय नाटक ‘खोया हुआ आदमी’ और आरा के कलाकारों ने ‘गंगा स्नान’ नाटक की प्रस्तुति रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता है : सुमन कुमार प्रांगण द्वारा आयोजित 37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन दो मंचीय 2 नुक्कड़ प्रस्तुतियों के साथ-साथ सुमन कुमार जी एवं स्थानीय कलाकार और दर्शकों के बीच खुली बातचीत हुई. केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के उप सचिव और वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने कहा है कि रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता हैं. वे 37वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के दौरान कालिदास रंगालय में &#8221; नाटक पर चर्चा &#8221; सत्र के दौरान पटना शहर के रंगकर्मियों से मुखातिब थे उन्होंने कहा कि बिहार सहित हिंदी पट्टी में रंगकर्मियों के लिए संभावनाओं के अनेक द्वार खुल रहे हैं . इसका लाभ बिहार के रंगकर्मियों को मिलने लगा है . कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी उषा वर्मा डॉ ध्रुव कुमार, नीलेश्वर मिश्रा, अभय सिन्हा, आशीष कुमार मिश्र, अभिषेक कुमार, सोमा चक्रवर्ती और मनीष महिवाल उपस्थित थे . काइट एक्टर स्टूडियो (कर्मयोगी क्रियेटिव ग्रुप), मुंबई नाटककार : रिशीष दुबे, खोया हुआ आदमी,निर्देशक : साहेब नितीश आज के दौर में पूरी इंसानियत तकनीक, महत्वाकांक्षाओं और पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर झूठा और दिखावटी जीवन व्यतीत करते हुए खुद को खुशियों से कोसों दूर करता जा रहा है. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>राजधानी के लोगों को देखने मिल रहे हैं अच्छे नाटक </strong></p>



<p><strong>तीसरे दिन दो मंचीय नाटक ‘खोया हुआ आदमी’ और आरा के कलाकारों ने ‘गंगा स्नान’ नाटक की प्रस्तुति</strong></p>



<p><strong>रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता है : सुमन कुमार</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="409" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387.jpg" alt="" class="wp-image-71273" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387-350x220.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्रांगण द्वारा आयोजित 37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन दो मंचीय 2 नुक्कड़ प्रस्तुतियों के साथ-साथ सुमन कुमार जी एवं स्थानीय कलाकार और दर्शकों के बीच खुली बातचीत हुई. केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के उप सचिव और वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने कहा है कि रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता हैं. वे 37वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के दौरान कालिदास रंगालय में &#8221; नाटक पर चर्चा &#8221; सत्र के दौरान पटना शहर के रंगकर्मियों से मुखातिब थे उन्होंने कहा कि बिहार सहित हिंदी पट्टी में रंगकर्मियों के लिए संभावनाओं के अनेक द्वार खुल रहे हैं . इसका लाभ बिहार के रंगकर्मियों को मिलने लगा है . कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी उषा वर्मा डॉ ध्रुव कुमार, नीलेश्वर मिश्रा, अभय सिन्हा, आशीष कुमार मिश्र, अभिषेक कुमार, सोमा चक्रवर्ती और मनीष महिवाल उपस्थित थे .</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited.jpg" alt="" class="wp-image-71277" width="549" height="309" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited.jpg 400w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 549px) 100vw, 549px" /></figure>



<p><strong>काइट एक्टर स्टूडियो (कर्मयोगी क्रियेटिव ग्रुप), मुंबई नाटककार : रिशीष दुबे, खोया हुआ आदमी,निर्देशक : साहेब नितीश</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="301" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233.jpg" alt="" class="wp-image-71271" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233-350x162.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आज के दौर में पूरी इंसानियत तकनीक, महत्वाकांक्षाओं और पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर झूठा और दिखावटी जीवन व्यतीत करते हुए खुद को खुशियों से कोसों दूर करता जा रहा है. समस्त मानवता से झूठी और खोखली अपेक्षाओं के चलते जीवन के वास्तविक उद्देश्य को ही भुला बैठा है,सफलता के पीछे भागते हुए व्यक्तिगत भावनाओं, रिश्तो और अहसासों को भुला बैठा है. सफलता के पीछे रात-दिन भागने की इसी कोशिश में सही-गलत की भी परवाह नहीं जिसके कारण अंततः गलत दिशा और संगत में फंसकर अपने अस्तित्व को ही खो देता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="301" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1.jpg" alt="" class="wp-image-71278" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1-350x162.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> खोया हुआ आदमी&#8221; इसी मनोदशा मे जी रहे और मेट्रो शहर में रह रहे एक दंपति की कहानी है जिसके पास एक दूसरे के लिए न भावनाएं है न संवेदनाएँ. छोटी बातों को भी बड़ा समझने की मानिसकता और बेवजह की चिंता में डूबे रहने का अंततः परिणाम होता क्या है. यही इस नाटक का मूल उत्स है.</p>



<p>मंच पर-अमर रंधावा : साहेब नितीश, सीमा रंधावा : अंकिता दुबे, कुलजीत रंधावा / चोर : अनिल शर्मा ,डॉक्टर सिंह/चोर : चिरंजीवी जोशी</p>



<p>नेपथ्य-संगीत संचालन : शुभम जोशी, प्रकाश संचालन : अर्जुन ठाकुर,संयोजन : समर मेहदी.</p>



<p><strong>दुसरी प्रस्तुति मनोज कुमार सिंह निर्देशित और भिखारी ठाकुर लिखित गंगा स्नान की हुई</strong></p>



<p><strong> &#8220;गंगा पूजनीय तो वृद्ध भी पूजनीय बनें, उन्हें वृद्धाश्रम मत पहुँचाओ.</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f.jpg" alt="" class="wp-image-71298" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>नाटक में मलछु की शादी को सात साल हो गए है पर वह अबतक निःसंतान है. वह गाँव के लोगों के साथ सपरिवार गंगा स्नान के लिए जाना चाहता है. उसके साथ बूढ़ी माँ भी जाना चाहती है, जिसके लिए मलेछु की पत्नी तैयार नहीं है. वह इस पर तैयार होती है कि माँ उसकी भी गठरी ढोएगी. भीड-भाड़ और मेला के कारण माँ से गठरी गिर जाती है. उसमें रखा कपड़ा और सामान खराब हो जाता है. गुस्से में पति-पत्नी मिलकर माँ  को मारपीट कर भगा देते हैं. मेला में उसे ठग मिलता है ठग  साधु के भेष में है. ठग उसका सारा सामान, गहना आदि छीन लेता है. उसे पछतावा होता है. वह माँ को मेला में खोज कर निकालता है और गंगा स्नान कराकर घर लौट आता है. इस नाटक में गंगा और उसके घाटों के आसपास की संस्कृति तो है ही, साथ ही आज के समय की सबसे बड़ी समस्या &#8216;वृद्धजनों की उपेक्षा&#8217; को मार्मिक ढंग से उकेरा गया है. नाटक कहती है, &#8220;गंगा पूजनीय तो वृद्ध भी पूजनीय बनें, उन्हें वृद्धाश्रम मत पहुँचाओ.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee.jpg" alt="" class="wp-image-71299" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मंच पर-मलेछु : पंकज भट्ट, मलेछु बहू : रागिनी कश्यप ने अपने अभिनय की अमिट छाप छोडी.वहीँ अटपट : नीतीश पाण्डेय, माई : आशा पाण्डेय अटपट बहू : ऋतु पाण्डेय, ठग साधु : लवकुश सिंह, कोरस 1 साहेब लाल यादव कोरस-2 &#8211; मुकेश कुमार, कोरस-3 लड्डू भोपाली कोरस-4 रोहन पाठक, कोरस-5: राजा कोर्स, ओमजी पाठक, सखी-1 मीनाक्षी पाण्डेय, रात्री- 2 पम्मी कुमारी, गायन श्याम बाबू कुमार, संतोष तिवारी, हरिशंकर जी निराला, अंकिता, जागृति, ढोलक अभय ओझा भूमिकाओं में थे. तबला : सूरज कान्त पाण्डेय,संगीत: श्याम बाबू कुमार, रूपसज्जा व वस्त्र सज्जा : तिरुपति नाथ का था</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/d5b39a46-177b-49b1-b7c3-bb8de567b201.jpg" alt="" class="wp-image-71300" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/d5b39a46-177b-49b1-b7c3-bb8de567b201.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/d5b39a46-177b-49b1-b7c3-bb8de567b201-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f5a5de6c-b98b-4b96-a6b6-fdbd44c18b16.jpg" alt="" class="wp-image-71301" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f5a5de6c-b98b-4b96-a6b6-fdbd44c18b16.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f5a5de6c-b98b-4b96-a6b6-fdbd44c18b16-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>नुक्कड़ नाटक </strong></p>



<p>नुक्कड़ नाटकों की श्रृंखला में क्रिएशन, पटना की प्रस्तुति कोमिता व जयंती लिखित और गौतम गुलाल निर्देशित ये दौड़ है किसकी की प्रस्तुति की गई.यह नाटक आज के युवाओं की भागदौड़ की जिंदगी, शिक्षा, रोजगार, महंगाई से जूझती जनता की परिस्थितियों को दर्शाता निजीकरण पर सवाल खड़ा करता है साथ ही मेहनतकश मजदूरों की समस्या को यह नाटक उजागर करता है.</p>



<p>पात्र परिचयहर्ष विजेता, दीपक सोनी, नैतिक केशरी, सोमेन मुखर्जी, रोहित कुमार, शिवम कुमार, जानवी सोनी, ऋषिकेश, सौरभ, अशरफ अली एवं राजन .</p>



<p>वहीँ नाद, पटना ने परिकल्पना एवं निर्देशन- मो. जानी व लेखक-:- विवेक कुमार की जनतागिरी नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति हुई. भौतिकवाद दौड़ में अपनी महत्वाकांक्षी इच्छाओं और पारिवारिक स्थिति को अपने में पूरा करने में, उसे यहाँ तक भी पता नही कि मनुष्य योनि में जन्म सभी प्राणी से श्रेष्ठ विवेकी क्यों माना गया है. कैसे अपने ही कुकर्मों द्वारा इस स्वर्ग सी सुंदर एवं सर्वव्यापी अद्भुत सृष्टि को विनाश की और ढकेलता जा रहा है. ऐसे ही इन्ही कुछ अनेक चरण बिन्दुओं को चिंहित करते हुए वास्तविक चेहरे को समाज में पर्दाफाश करता है. इस नाटक में धर्मराज द्वारा एक मनुष्य योनि को धरती लोक पर भेजा जाता है जिसका नाम है, आम आदमी, उसको जन्म सिर्फ इसलिए ही दी जाती है की वो इस पर हो रहे भ्रष्टाचार को देखे, महसूस कर सके, और समाज के प्रत्येक जनता को इन वास्तविक परिस्थितयों से भली भाँति अवगत कराए. एक ओर से ये नाटक जितना मनोरंजक एवं आकर्षक है तो दूसरी ओर से उतना ही समाज में व्यंगात्मक कटाक्ष</p>



<p>पात्र-परिचय-धर्मराज-रवि कश्यप, चित्रगुप्त-मो0 आसिफ, आम आदमी- नंद किशोर कुमार, व्यक्ति-अविनाश मिश्रा, प्रेमी-उज्जवल कुमार गुप्ता, प्रेमिका-आरती सिंह राजपूत, बाप-नितीश कुमार, रिपोर्टर- पूजा राज ढोलक मो0 इमरान, गायक एवं खंजरी-राजीव रॉय.</p>
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