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	<title>mahagauri &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>नारी, शक्ति, ऐश्वर्य और सौन्दर्य की देवी महागौरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Oct 2022 04:37:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[सुख समृद्धि]]></category>
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					<description><![CDATA[महागौरी देवताओं की प्रार्थना पर हिमालय की श्रृंखला मे शाकंभरी के नाम से प्रकट हुई इनका वर्ण पूर्णतः गौर है. इस गौरता की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है. इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है- &#8216;अष्टवर्षा भवेद् गौरी.&#8217; इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं. महागौरी की चार भुजाएँ हैं. इनका वाहन वृषभ है. इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है. ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं. इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है. यही महागौरी देवताओं की प्रार्थना पर हिमालय की श्रृंखला मे शाकंभरी के नाम से प्रकट हुई थी. माँ महागौरी ने देवी पार्वती रूप में भगवान शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, एक बार भगवान भोलेनाथ ने पार्वती जी को देखकर कुछ कह देते हैं. जिससे देवी के मन का आहत होता है और पार्वती जी तपस्या में लीन हो जाती हैं. इस प्रकार वषों तक कठोर तपस्या करने पर जब पार्वती नहीं आती तो पार्वती को खोजते हुए भगवान शिव उनके पास पहुँचते हैं वहां पहुंचे तो वहां पार्वती को देखकर आश्चर्य चकित रह जाते हैं. पार्वती जी का रंग अत्यंत ओजपूर्ण होता है, उनकी छटा चांदनी के सामन श्वेत और कुन्द के फूल के समान धवल दिखाई पड़ती है, उनके वस्त्र और आभूषण से प्रसन्न होकर देवी उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं. एक कथा अनुसार भगवान शिव को पति रूप में पाने के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> महागौरी देवताओं की प्रार्थना पर हिमालय की श्रृंखला मे शाकंभरी के नाम से प्रकट हुई </strong></p>



<p>इनका वर्ण पूर्णतः गौर है. इस गौरता की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है. इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है- &#8216;अष्टवर्षा भवेद् गौरी.&#8217; इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं. महागौरी की चार भुजाएँ हैं. इनका वाहन वृषभ है. इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है. ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं. इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है. यही महागौरी देवताओं की प्रार्थना पर हिमालय की श्रृंखला मे शाकंभरी के नाम से प्रकट हुई थी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="330" height="486" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/Untitled.png" alt="" class="wp-image-67267" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/Untitled.png 330w, https://www.patnanow.com/assets/2022/10/Untitled-238x350.png 238w" sizes="(max-width: 330px) 100vw, 330px" /></figure>



<p>माँ महागौरी ने देवी पार्वती रूप में भगवान शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, एक बार भगवान भोलेनाथ ने पार्वती जी को देखकर कुछ कह देते हैं. जिससे देवी के मन का आहत होता है और पार्वती जी तपस्या में लीन हो जाती हैं. इस प्रकार वषों तक कठोर तपस्या करने पर जब पार्वती नहीं आती तो पार्वती को खोजते हुए भगवान शिव उनके पास पहुँचते हैं वहां पहुंचे तो वहां पार्वती को देखकर आश्चर्य चकित रह जाते हैं. पार्वती जी का रंग अत्यंत ओजपूर्ण होता है, उनकी छटा चांदनी के सामन श्वेत और कुन्द के फूल के समान धवल दिखाई पड़ती है, उनके वस्त्र और आभूषण से प्रसन्न होकर देवी उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं.</p>



<p>एक कथा अनुसार भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ जाता है. देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान इन्हें स्वीकार करते हैं और शिव जी इनके शरीर को गंगा-जल से धोते हैं तब देवी विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो जाती हैं तथा तभी से इनका नाम गौरी पड़ा. महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं. देवी के इस रूप की प्रार्थना करते हुए देव और ऋषिगण कहते हैं “सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके. शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते..”. महागौरी जी से संबंधित एक अन्य कथा भी प्रचलित है इसके जिसके अनुसार, एक सिंह काफी भूखा था, वह भोजन की तलाश में वहां पहुंचा जहां देवी उमा तपस्या कर रही होती हैं. देवी को देखकर सिंह की भूख बढ़ गयी परंतु वह देवी के तपस्या से उठने का इंतजार करते हुए वहीं बैठ गया. इस इंतजार में वह काफी कमज़ोर हो गया. देवी जब तप से उठी तो सिंह की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आती है और माँ उसे अपना सवारी बना लेती हैं क्योंकि एक प्रकार से उसने भी तपस्या की थी. इसलिए देवी गौरी का वाहन बैल और सिंह दोनों ही हैं. एक अन्य कथा के अनुसार दुर्गम दानव के अत्याचारों से संतप्त जब देवता भगवती शाकंभरी की शरण मे आये तब माता ने त्रिलोकी को मुग्ध करने वाले महागौरी रूप का प्रादुर्भाव किया. यही माता महागौरी आसन लगाकर शिवालिक पर्वत के शिखर पर विराजमान हुई और शाकंभरी देवी के नाम से उक्त पर्वत पर उनका मंदिर बना हुआ है यह वही स्थान है जहां देवी शाकंभरी ने महागौरी का रूप धारण किया था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="540" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/mahagauri.jpg" alt="" class="wp-image-67268" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/mahagauri.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/10/mahagauri-350x291.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>माँ महागौरी का ध्यान, स्मरण, पूजन-आराधना भक्तों के लिए सर्वविध कल्याणकारी है. हमें सदैव इनका ध्यान करना चाहिए. इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है. मन को अनन्य भाव से एकनिष्ठ कर मनुष्य को सदैव इनके ही पादारविन्दों का ध्यान करना चाहिए. मां महागौरी भक्तों का कष्ट अवश्य ही दूर करती है. इसकी उपासना से अर्तजनों के असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं. अतः इसके चरणों की शरण पाने के लिए हमें सर्वविध प्रयत्न करना चाहिए.</p>



<p>श्लोक</p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color">श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः । &nbsp;महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ।</p>
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