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	<title>Limca Book of records &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>एम्स पटना ने सबसे बड़ी स्कल बोन ट्यूमर सर्जरी कर रचा इतिहास, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aiims-in-limca-book-of-records/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 17:06:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[Aiims in limca book of records]]></category>
		<category><![CDATA[Limca Book of records]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA AIIMS]]></category>
		<category><![CDATA[patna news]]></category>
		<category><![CDATA[Skull bone tumor surgery]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना, अजीत ।। एम्स पटना ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए प्रतिष्ठित लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है. संस्थान के न्यूरोसर्जरी विभाग के अतिरिक्त प्राध्यापक डॉ. सरोज कुमार सिंह एवं उनकी टीम ने भारत की अब तक की सबसे बड़ी स्कल बोन ट्यूमर सर्जरी सफलतापूर्वक कर यह गौरव हासिल किया है. यह जटिल सर्जरी एम्स पटना में 29 वर्षीय पुरुष मरीज पर की गई थी, जिसके सिर में 22 सेमी × 16 सेमी × 7 सेमी आकार तथा लगभग 830 ग्राम वजन का विशाल स्कल बोन ट्यूमर था. लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा जारी आधिकारिक प्रमाणन के अनुसार यह सर्जरी 21 फरवरी 2024 को की गई थी. सर्जरी सुबह 9 बजे शुरू हुई और शाम 4:45 बजे तक चली. करीब 7 घंटे 45 मिनट तक चली इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक पूरा किया था. विशेषज्ञों के अनुसार ट्यूमर का असाधारण आकार और वजन इस ऑपरेशन को अत्यंत संवेदनशील एवं तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण बना रहा था. अत्याधुनिक तकनीक, सूक्ष्म योजना और बहु-विषयक चिकित्सकीय विशेषज्ञता के कारण इस दुर्लभ सर्जरी को सफल बनाया जा सका. एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर डॉ. सरोज कुमार सिंह एवं उनकी पूरी टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज यह उपलब्धि न केवल एम्स पटना बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने कहा कि एम्स पटना लगातार उन्नत और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पटना, अजीत </strong>।। एम्स पटना ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए प्रतिष्ठित लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है. संस्थान के न्यूरोसर्जरी विभाग के अतिरिक्त प्राध्यापक डॉ. सरोज कुमार सिंह एवं उनकी टीम ने भारत की अब तक की सबसे बड़ी स्कल बोन ट्यूमर सर्जरी सफलतापूर्वक कर यह गौरव हासिल किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/pnc-patna-aiims-in-limca-book-of-records-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96900" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/pnc-patna-aiims-in-limca-book-of-records-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/pnc-patna-aiims-in-limca-book-of-records-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/pnc-patna-aiims-in-limca-book-of-records-1536x1023.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>यह जटिल सर्जरी एम्स पटना में 29 वर्षीय पुरुष मरीज पर की गई थी, जिसके सिर में 22 सेमी × 16 सेमी × 7 सेमी आकार तथा लगभग 830 ग्राम वजन का विशाल स्कल बोन ट्यूमर था. लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा जारी आधिकारिक प्रमाणन के अनुसार यह सर्जरी 21 फरवरी 2024 को की गई थी. सर्जरी सुबह 9 बजे शुरू हुई और शाम 4:45 बजे तक चली. करीब 7 घंटे 45 मिनट तक चली इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक पूरा किया था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/aiims-1.png" alt="" class="wp-image-65708" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/aiims-1.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/08/aiims-1-350x263.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>विशेषज्ञों के अनुसार ट्यूमर का असाधारण आकार और वजन इस ऑपरेशन को अत्यंत संवेदनशील एवं तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण बना रहा था. अत्याधुनिक तकनीक, सूक्ष्म योजना और बहु-विषयक चिकित्सकीय विशेषज्ञता के कारण इस दुर्लभ सर्जरी को सफल बनाया जा सका.</p>



<p>एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर डॉ. सरोज कुमार सिंह एवं उनकी पूरी टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज यह उपलब्धि न केवल एम्स पटना बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने कहा कि एम्स पटना लगातार उन्नत और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है.</p>



<p>इस उपलब्धि के साथ एम्स पटना ने पूर्वी भारत में उन्नत न्यूरोसर्जरी सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान और मजबूत की है. चिकित्सा जगत में इस सफलता को बिहार के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जो राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा उत्कृष्टता के नए आयाम तक पहुंचाने में सहायक होगी.</p>
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		<title>रीढ़ में धंसे 35 मिमी मछली के कांटे को निकाल डॉक्टरों ने रचा इतिहास.</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aiims-record/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Apr 2026 18:12:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Aiims]]></category>
		<category><![CDATA[Limca Book of records]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA AIIMS]]></category>
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					<description><![CDATA[रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ एम्स के डॉक्टरों का कीर्तिमान फुलवारी शरीफ, अजीत।। खामोशी के बीच जिंदगी और मौत की जंग में आखिरकार जीत इंसानी हौसले की हुई, जब एम्स पटना के डॉक्टरों ने रीढ़ की हड्डी में धंसे 35 मिमी लंबे मछली के कांटे को सफलतापूर्वक निकालकर चिकित्सा जगत में नया इतिहास रच दिया.इस असाधारण सर्जरी को अब लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026 में भी स्थान मिला है, जिससे यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज हो गई है.घटना 9 मार्च 2025 की है, जब 42 वर्षीय एक मरीज की सर्वाइकल स्पाइन में गहराई तक मछली का नुकीला कांटा धंस गया था, जिससे जरा सी चूक स्थायी अपंगता का कारण बन सकती थी. ऐसी जटिल स्थिति में एम्स पटना की न्यूरोसर्जरी टीम ने चुनौती स्वीकार की और सटीक रणनीति के साथ ऑपरेशन की तैयारी की गई.न्यूरोसर्जरी टीम का नेतृत्व डॉ. सरज कुमार सिंह कर रहे थे, जबकि उनके साथ डॉ. क्रांति भावना भी प्रमुख भूमिका में थीं.सुबह करीब 9 बजे ऑपरेशन थिएटर में शुरू हुई सर्जरी लगातार 4 घंटे 5 मिनट तक चली, जिसमें हर पल बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा था. डॉक्टरों की टीम ने रीढ़ की बेहद नाजुक संरचना के बीच मिलीमीटर दर मिलीमीटर आगे बढ़ते हुए बिना नसों को नुकसान पहुंचाए कांटे को बाहर निकालने में सफलता हासिल की.सर्जरी के दौरान सटीकता और संयम का ऐसा प्रदर्शन हुआ कि यह ऑपरेशन चिकित्सा कौशल की एक मिसाल बन गया.डॉ. सरज कुमार सिंह ने बताया कि रीढ़ के इतने करीब सर्जरी करना जीवन की सबसे नाजुक रेखा पर चलने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ एम्स के डॉक्टरों का कीर्तिमान </strong></p>



<p><strong>फुलवारी शरीफ, अजीत।।</strong> खामोशी के बीच जिंदगी और मौत की जंग में आखिरकार जीत इंसानी हौसले की हुई, जब एम्स पटना के डॉक्टरों ने रीढ़ की हड्डी में धंसे 35 मिमी लंबे मछली के कांटे को सफलतापूर्वक निकालकर चिकित्सा जगत में नया इतिहास रच दिया.<br>इस असाधारण सर्जरी को अब लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026 में भी स्थान मिला है, जिससे यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज हो गई है.<br>घटना 9 मार्च 2025 की है, जब 42 वर्षीय एक मरीज की सर्वाइकल स्पाइन में गहराई तक मछली का नुकीला कांटा धंस गया था, जिससे जरा सी चूक स्थायी अपंगता का कारण बन सकती थी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="514" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-aiims-record-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96081" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-aiims-record-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-aiims-record-650x327.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>ऐसी जटिल स्थिति में एम्स पटना की न्यूरोसर्जरी टीम ने चुनौती स्वीकार की और सटीक रणनीति के साथ ऑपरेशन की तैयारी की गई.<br>न्यूरोसर्जरी टीम का नेतृत्व डॉ. सरज कुमार सिंह कर रहे थे, जबकि उनके साथ डॉ. क्रांति भावना भी प्रमुख भूमिका में थीं.<br>सुबह करीब 9 बजे ऑपरेशन थिएटर में शुरू हुई सर्जरी लगातार 4 घंटे 5 मिनट तक चली, जिसमें हर पल बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="964" height="932" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-aiims-doctor-record-in-limca-book-of-records.jpg" alt="" class="wp-image-96080" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-aiims-doctor-record-in-limca-book-of-records.jpg 964w, https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-aiims-doctor-record-in-limca-book-of-records-650x628.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 964px) 100vw, 964px" /></figure>



<p>डॉक्टरों की टीम ने रीढ़ की बेहद नाजुक संरचना के बीच मिलीमीटर दर मिलीमीटर आगे बढ़ते हुए बिना नसों को नुकसान पहुंचाए कांटे को बाहर निकालने में सफलता हासिल की.<br>सर्जरी के दौरान सटीकता और संयम का ऐसा प्रदर्शन हुआ कि यह ऑपरेशन चिकित्सा कौशल की एक मिसाल बन गया.<br>डॉ. सरज कुमार सिंह ने बताया कि रीढ़ के इतने करीब सर्जरी करना जीवन की सबसे नाजुक रेखा पर चलने जैसा था, जहां हर निर्णय अत्यंत सावधानी से लेना पड़ता है.<br>डॉ. क्रांति भावना ने कहा कि यह केवल एक सर्जरी नहीं थी, बल्कि मरीज के विश्वास को बनाए रखने और उसे नई जिंदगी देने की जिम्मेदारी थी.<br>इस उपलब्धि पर एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे संस्थान की उत्कृष्टता और उन्नत चिकित्सा क्षमता का प्रतीक बताया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="705" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-aiims-in-limca-book-of-records-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96082" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-aiims-in-limca-book-of-records-scaled.jpg 705w, https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-aiims-in-limca-book-of-records-447x650.jpg 447w" sizes="auto, (max-width: 705px) 100vw, 705px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि समर्पण, कौशल और आधुनिक तकनीक के बल पर असंभव दिखने वाली चुनौतियों को भी पार किया जा सकता है.<br>यह उपलब्धि न सिर्फ एम्स पटना बल्कि पूरे देश के चिकित्सा जगत के लिए गर्व का विषय बन गई है, जिसने यह साबित कर दिया कि सटीक प्रयास और मजबूत इरादों के आगे मुश्किलें भी रास्ता छोड़ देती हैं.</p>
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