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	<title>kiss &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>&#8220;किस&#8221; को यूनेस्को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार 2022</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Sep 2022 18:09:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[Literary award]]></category>
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					<description><![CDATA[भुवनेश्वर, 9 सितंबर।। कलिंग सामाजिक विज्ञान संस्थान (किस) को साक्षरता यूनेस्को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार 2022 पर सर्वोच्च वैश्विक मान्यता से सम्मानित किया गया है. इस पुरस्कार में 20,000 अमेरिकी डॉलर, एक पदक और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है. इसे 8 सितंबर 2022 को कोटे डी आइवर में यूनेस्को द्वारा आयोजित एक वैश्विक पुरस्कार समारोह में प्रदान किया गया. राष्ट्र-निर्माण के उद्देश्य से एक जमीनी स्तर के संगठन के रूप में, KISS को भारत से पाँचवाँ प्राप्तकर्ता होने के लिए प्रतिष्ठित मान्यता प्राप्त है और यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने वाला ओडिशा का पहला और एकमात्र संस्थान है. यह भारतीय गैर-लाभकारी गैर सरकारी संगठनों में तीसरा और इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाला पहला भारतीय आदिवासी-आधारित संगठन है, जो भारत के लिए गर्व की बात है. किस के लिए यूनेस्को पुरस्कार की घोषणा किस के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत ने किस परिसर में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के उत्सव के दौरान की थी. इस घोषणा को 30,000 किस छात्रों द्वारा स्वतःस्फूर्त उत्सव के साथ पूरा किया गया. किस पूरी तरह से निःशुल्क आवासीय शिक्षा संस्थान है। इसकी स्थापना प्रसिद्ध शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ सामंत ने की थी. यह 70,000 आदिवासी बच्चों (परिसर में शिक्षा प्राप्त करने वाले 30,000 बच्चे और 40,000 पूर्व छात्र) के लिए व्यापक विकास, व्यावसायिक और खेल सशक्तिकरण की गुंजाइश प्रदान करता है. 1993 में 125 छात्रों के साथ स्थापित, यह आदिवासी बच्चों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा शैक्षणिक संस्थान बन गया है. किस का संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न निकायों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p>भुवनेश्वर, 9 सितंबर।। कलिंग सामाजिक विज्ञान संस्थान (किस) को साक्षरता यूनेस्को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार 2022 पर सर्वोच्च वैश्विक मान्यता से सम्मानित किया गया है. इस पुरस्कार में 20,000 अमेरिकी डॉलर, एक पदक और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है. इसे 8 सितंबर 2022 को कोटे डी आइवर में यूनेस्को द्वारा आयोजित एक वैश्विक पुरस्कार समारोह में प्रदान किया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220909-WA0046.jpg" alt="" class="wp-image-66432" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220909-WA0046.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220909-WA0046-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>राष्ट्र-निर्माण के उद्देश्य से एक जमीनी स्तर के संगठन के रूप में, KISS को भारत से पाँचवाँ प्राप्तकर्ता होने के लिए प्रतिष्ठित मान्यता प्राप्त है और यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने वाला ओडिशा का पहला और एकमात्र संस्थान है. यह भारतीय गैर-लाभकारी गैर सरकारी संगठनों में तीसरा और इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाला पहला भारतीय आदिवासी-आधारित संगठन है, जो भारत के लिए गर्व की बात है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220909-WA0044.jpg" alt="" class="wp-image-66434" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220909-WA0044.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220909-WA0044-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>किस के लिए यूनेस्को पुरस्कार की घोषणा किस के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत ने किस परिसर में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के उत्सव के दौरान की थी. इस घोषणा को 30,000 किस छात्रों द्वारा स्वतःस्फूर्त उत्सव के साथ पूरा किया गया.</p>



<p>किस पूरी तरह से निःशुल्क आवासीय शिक्षा संस्थान है। इसकी स्थापना प्रसिद्ध शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ सामंत ने की थी. यह 70,000 आदिवासी बच्चों (परिसर में शिक्षा प्राप्त करने वाले 30,000 बच्चे और 40,000 पूर्व छात्र) के लिए व्यापक विकास, व्यावसायिक और खेल सशक्तिकरण की गुंजाइश प्रदान करता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220909-WA0049.jpg" alt="" class="wp-image-66435" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220909-WA0049.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/IMG-20220909-WA0049-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>1993 में 125 छात्रों के साथ स्थापित, यह आदिवासी बच्चों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा शैक्षणिक संस्थान बन गया है. किस का संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न निकायों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग है. यह 2015 से ईसीओएसओसी के साथ विशेष परामर्शदात्री स्थिति में रहा है, जो जनजातीय सशक्तिकरण और शिक्षा में अपनी पहल के लिए संयुक्त राष्ट्र के जन सूचना विभाग से संबद्ध होने के अलावा कई प्रशंसाओं और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है. किस &#8211; कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (किट) की एक घटक इकाई है, जो डॉ सामंत द्वारा स्थापित तकनीकी विश्वविद्यालय है.</p>
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		<title>टॉप इंडियन यूनिवर्सिटीज में के.आई.आई.टी. का  स्थान बरकरार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/kiit-tops-again/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Jun 2021 17:52:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
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					<description><![CDATA[टाइम्स हायर एजुकेशन एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2021 जारी टाइम्स हायर एजुकेशन: एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग, देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में कीट का जलवा बरकरार भुवनेश्वर : कीट विश्वविद्यालय ने द टाइम्स हायर एजुकेशन एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2021 में इस साल भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है. हर साल की तरह इस साल भी टाइम्स हायर एजुकेशन की ओर से वर्ल्ड एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग का परिणाम जारी किया गया है. इसमें उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ एशिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सूची में 251+ श्रेणी में KIIT देश के सर्वश्रेष्ठ सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के बीच 30वें स्थान पर है. इसी तरह, जनरल इंजीनियरिंग की ओवरल श्रेणी में, देश के पूर्वांचल में श्रेष्ठ सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में कीट 15वें स्थान पर है. टाइम्स हायर एजुकेशन की ओर से शिक्षण, अनुसंधान, ज्ञान का आदान प्रदान, अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण आदि विभिन्न मानदंडों पर विश्वविद्यालयों की रैंकिंग की गई है. कीट के व्यापक कार्यक्रमों सहित 200 से अधिक पाठ्यक्रम हैं. इनपर विचार करने पर देशभर के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के बीच कीट ने अच्छा प्रदर्शन किया है. टाइम्स हायर एजुकेशन की ओर से पिछले 50 वर्षों में एशिया सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को इस चयन प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है.गौरतलब है कि कीट 24 साल पुराना संस्थान है, लेकिन सिर्फ 17 साल में विश्वविद्यालय के रूप में कीट ने उपरोक्त सभी मानदंडों को पूरा कर 251+ रैंक, देश में 30वें और जनरल इंजीनियरिंग की ओवरल श्रेणी में 15वें स्थान पर रहकर ओडिशा का गौरव बढ़ाया है. टाइम्स हायर एजुकेशन की ओर से इस साल [&#8230;]]]></description>
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<p>टाइम्स हायर एजुकेशन एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2021 जारी</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="620" height="413" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-university-ranking.jpg" alt="" class="wp-image-53243" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-university-ranking.jpg 620w, https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-university-ranking-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 620px) 100vw, 620px" /></figure>



<p>टाइम्स हायर एजुकेशन: एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग, देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में कीट का जलवा बरकरार</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-kiit-rank-in-top-universities.jpg" alt="" class="wp-image-53246" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-kiit-rank-in-top-universities.jpg 600w, https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-kiit-rank-in-top-universities-350x350.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-kiit-rank-in-top-universities-250x250.jpg 250w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<p>भुवनेश्वर : कीट विश्वविद्यालय ने द टाइम्स हायर एजुकेशन एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2021 में इस साल भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है. हर साल की तरह इस साल भी टाइम्स हायर एजुकेशन की ओर से वर्ल्ड एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग का परिणाम जारी किया गया है. इसमें उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ एशिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सूची में 251+ श्रेणी में KIIT देश के सर्वश्रेष्ठ सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के बीच 30वें स्थान पर है. इसी तरह, जनरल इंजीनियरिंग की ओवरल श्रेणी में, देश के पूर्वांचल में श्रेष्ठ सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में कीट 15वें स्थान पर है. टाइम्स हायर एजुकेशन की ओर से शिक्षण, अनुसंधान, ज्ञान का आदान प्रदान, अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण आदि विभिन्न मानदंडों पर विश्वविद्यालयों की रैंकिंग की गई है. कीट के व्यापक कार्यक्रमों सहित 200 से अधिक पाठ्यक्रम हैं. इनपर विचार करने पर देशभर के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के बीच कीट ने अच्छा प्रदर्शन किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-kiit-ranking.jpg" alt="" class="wp-image-53241" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-kiit-ranking.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-kiit-ranking-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>टाइम्स हायर एजुकेशन की ओर से पिछले 50 वर्षों में एशिया सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को इस चयन प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है.<br>गौरतलब है कि कीट 24 साल पुराना संस्थान है, लेकिन सिर्फ 17 साल में विश्वविद्यालय के रूप में कीट ने उपरोक्त सभी मानदंडों को पूरा कर 251+ रैंक, देश में 30वें और जनरल इंजीनियरिंग की ओवरल श्रेणी में 15वें स्थान पर रहकर ओडिशा का गौरव बढ़ाया है. टाइम्स हायर एजुकेशन की ओर से इस साल की एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग एक विश्व स्तरीय प्रदर्शन सूची है.  इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में लगातार हर साल कीट का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="354" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-kiit-overview.jpg" alt="" class="wp-image-53244" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-kiit-overview.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/06/pnc-kiit-overview-350x191.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इस सफलता के लिए कीट और कीस के संस्थापक ने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, अध्यापक-अध्यापिकाओं, कर्मचारियों को उनके उत्तम दूरदृष्टि और प्रयासों के लिए धन्यवाद और शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने कहा कि हर साल, देश के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी विश्वविद्यालय, जैसे कि IIT और NIT आदि सरकारी विश्वविद्यालयों व प्रतिष्ठित निजी विश्वविद्यालयों के समान कीट ने बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखा हैं। यह ही किट की सफलता है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>मुश्किल वक्त में ओडिशा का KIIT मोर्चे पर सबसे आगे</title>
		<link>https://www.patnanow.com/kiit-and-kiss-helping-the-needy-in-covid-times/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Oct 2020 16:38:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[covid19]]></category>
		<category><![CDATA[kiit]]></category>
		<category><![CDATA[kiss]]></category>
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					<description><![CDATA[कोरोना के विरुद्ध जंग में किट विश्वविद्यालय मोर्चे पर सबसे आगे प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न जन समुदाय की पीड़ा को दूर करने या उस पर काबू पाने के लिए कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, (केआईआईटी) भुवनेश्वर और उसकी सहयोगी संस्थान कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने अपने संस्थापक प्रोफेसर अच्युता सामंत के अथक प्रयास के बदौलत इस बार भी कोविड-19 महामारी के प्रकोप से बुरी तरह प्रभावित लोगों तक पहुंचने और सही उपचार का हर संभव प्रयास किया जा रहा है साथ ही उस पर अनवरत काम भी चल रहा है.यह जगजाहिर है कि किट डीम्ड विश्वविद्यालय एक प्रख्यात संस्थान है और यह भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त भी है. इसमें देश के कई राज्य साथ ही 50 के आसपास देशों से लगभग 30000 छात्र और छात्राएं यहां अध्ययन करते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि किट के ही भी सहयोगी संस्थान किश जो देश का पहला और एकलौता आदिवासी विश्वविद्यालय में तीस हजार के आसपास असहाय और विशेषकर आदिवासी बच्चे पढ़ते हैं. यह सारे बच्चे केवल ओडिशा के ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, झारखंड और नॉर्थ ईस्ट के बच्चे हैं. किश की खासियत या है कि यहां पर बच्चे निशुल्क पढ़ते हैं और यह आवासीय विश्वविद्यालय है. कोरोना के चलते जैसे ही संपूर्ण लॉक डाउन की भनक संस्थान की संस्थापक को लगी उन्होंने सभी बच्चों को सुरक्षित अपने-अपने घरों पर वापस भेज दिया था. पूरे लॉकडाउन के दौरान इन सारे बच्चों को किसी भी तरह का शैक्षणिक नुकसान का सामना नहीं करना पड़ा, क्योंकि किट देश का पहला [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कोरोना के विरुद्ध जंग में किट विश्वविद्यालय मोर्चे पर सबसे आगे</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="294" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era3.jpg" alt="" class="wp-image-50257" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era3.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era3-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न जन समुदाय की पीड़ा को दूर करने या उस पर काबू पाने के लिए कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, (केआईआईटी) भुवनेश्वर और उसकी सहयोगी संस्थान कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने अपने संस्थापक प्रोफेसर अच्युता सामंत के अथक प्रयास के बदौलत इस बार भी कोविड-19 महामारी के प्रकोप से बुरी तरह प्रभावित लोगों तक पहुंचने और सही उपचार का हर संभव प्रयास किया जा रहा है साथ ही उस पर अनवरत काम भी चल रहा है.<br>यह जगजाहिर है कि किट डीम्ड विश्वविद्यालय एक प्रख्यात संस्थान है और यह भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त भी है. इसमें देश के कई राज्य साथ ही 50 के आसपास देशों से लगभग 30000 छात्र और छात्राएं यहां अध्ययन करते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि किट के ही भी सहयोगी संस्थान किश जो देश का पहला और एकलौता आदिवासी विश्वविद्यालय में तीस हजार के आसपास असहाय और विशेषकर आदिवासी बच्चे पढ़ते हैं. यह सारे बच्चे केवल ओडिशा के ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, झारखंड और नॉर्थ ईस्ट के बच्चे हैं. किश की खासियत या है कि यहां पर बच्चे निशुल्क पढ़ते हैं और यह आवासीय विश्वविद्यालय है. कोरोना के चलते जैसे ही संपूर्ण लॉक डाउन की भनक संस्थान की संस्थापक को लगी उन्होंने सभी बच्चों को सुरक्षित अपने-अपने घरों पर वापस भेज दिया था. पूरे लॉकडाउन के दौरान इन सारे बच्चों को किसी भी तरह का शैक्षणिक नुकसान का सामना नहीं करना पड़ा, क्योंकि किट देश का पहला ऐसा संस्थान है जो अपने सारे बच्चों को ऑनलाइन के जरिए ही बच्चों को घर बैठे ही पढ़ाना शुरू किया और अब तक बिना रुके चल रहा है. कुछ इसी तरह ही किश के सारे बच्चों को भी कलिंग टेलीविजन के माध्यम से ई-लर्निंग की क्लास हर रोज संचालित की जा रही है, साथ ही बचे व्हाट्सएप के माध्यम से भी शिक्षकों के साथ निरंतर संपर्क में है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="435" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era4.jpg" alt="" class="wp-image-50258" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era4.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era4-350x234.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इन दिनों किश, अपने &#8216;प्रोजेक्ट उदय&#8217; के तहत ओडिशा के 6 सबसे पिछड़े जिले से रायगड़ा, मलकानगिरी, कंधमाल, बलान्ग्गिर, कोरापुट और गजपति जिलों के लोगों में कोरोना महामारी से निजात पाने के उपाय जैसे 2 गज की दूरी बनाए रखना, मास्क का हमेशा उपयोग करना, हमेशा हाथ धोना और अपने आसपास हर हमेशा स्वच्छता बनाए रखने को लेकर बड़े पैमाने पर एक जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया है. इस परियोजना में 500 से अधिक स्वयंसेवक इन सभी जिलों के 220 गांव में स्वच्छता अभियान चला रहे हैं.</p>



<p>ओडिशा की अगर बात की जाए तो कोविड-19 के विरुद्ध इस मुहिम की अगुवाई किट के ही एक महत्वपूर्ण सहयोगी संस्थान किम्स &#8216;कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस&#8217; जो एक मेडिकल कॉलेज है, ने ओडिशा सरकार के सहयोग से कोरोना मरीजों के लिए 50 &#8216;क्रिटिकल केयर बेड्स&#8217; सहित 500 बिस्तर वाला भारत का पहला अत्याधुनिक स्वचालित सुविधा केंद्र स्थापित किया है. इसके अतिरिक्त किट विश्वविद्यालय ने ओडिशा के कंधमाल, बलांगगिर और मयूरभंज जिलों में 200 बिस्तर विशिष्ट तीन और अस्पताल स्थापित किए. कोरोना महामारी के इस विषम परिस्थिति के बावजूद इतने कम समय में समर्पित अस्पतालों के निर्माण से इन्हें राज्य और केंद्र सरकार द्वारा काफी प्रशंसा भी मिली है. भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों समेत भारत के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ किट स्कूल ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी के अंतर्गत कीट के और एक घटक किट टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (KIIT-TBI) को कोविड-19 संकट के साथ युद्ध विस्तार केंद्र (CAWACH) &#8216;कवच&#8217; के रूप में मान्यता दी गई है. पूर्व और पूर्वोत्तर में इस कार्यक्रम के लागू करने के लिए &#8216;के आईआई टी- टी बी आई&#8217; (KIIT-TBI) स्वयं उत्तरदायी है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="621" height="362" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era1.jpg" alt="" class="wp-image-50256" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era1.jpg 621w, https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era1-350x204.jpg 350w" sizes="(max-width: 621px) 100vw, 621px" /></figure>



<p>कोविड-19 महामारी न केवल एक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल है अपितु लंबे समय तक लॉकडाउन और लाखों लोगों की आजीविका के कारण यह एक गंभीर मानवीय संकट का जन्मदाता भी है. मानवता की दृष्टि से किट द्वारा इस कोरोना काल में कोरोना से मृत्यु हो चुके परिजनों के बच्चों को किट और किश में मुफ्त शिक्षा दी जाएगी. यह सुविधा दो शैक्षणिक वर्षो 2020 &#8211; 2021 एवं 2021 &#8211; 22 के लिए उपलब्ध होगी.</p>



<p>एक सहायता की ओर हाथ बढ़ाते हुए इन दिनों की विश्वविद्यालय उन लोगों के पास पहुंच रही है जो बार-बार लॉकडाउन बढ़ाए जाने के कारण मुश्किल दौर से गुजर रहे थे. कोरोना महामारी के कारण झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले वंचित लोगों, फंसे हुए प्रवासी मजदूरों एवं कंटेनमेंट जोन में रहने वाले लगभग तीन लाख से ज्यादा लोगों को खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं का वितरण करने के साथ-साथ उन्हें अस्थाई आश्रय भी प्रदान कराया गया है. लॉकडाउन के दौरान अपने मेहनत और तत्परता के कारण किट विश्वविद्यालय राजधानी भुवनेश्वर, पूरी और कटक जिले में ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों को पका हुआ भोजन पहुंचाने की भी पहल की. ओडिशा और आसपास के राज्यों में फंसे हुए सैकड़ों मजदूरों और कर्मियों की निकासी में किश विश्वविद्यालय ने अमेरिकी दूतावास के साथ मिलकर अत्यंत सराहनीय कार्य किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era.jpg" alt="" class="wp-image-50253" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अन्य सामुदायिक गतिविधियों के तहत ओडिशा के चंद्रगिरी इलाके में तिब्बती आबादी और जिरांग में पद्यसंभव मठ में 1 महीने की खाद्य आपूर्ति की गई थी, साथ ही चंद्रगिरी में दो वृद्धाश्रम को गोद लिए जाने का प्रावधान किया गया है. इन दिनों किश विश्वविद्यालय जिरांग में एक अस्पताल को सहयोग कर रहा है और स्वास्थ्य कर्मियों को पि पि इ किट उपलब्ध करा रहा है. इसके अतिरिक्त किट और किश विश्व विद्यालय कंधमाल जिले के 40 से अधिक अनाथालय, वृद्ध आश्रम और कुष्ठ सेवा आश्रम को खर्च के लिए नगदी एवं किराने का सामान मुहैया करा रहा है.</p>



<p>राजधानी भुवनेश्वर के दूरदराज इलाकों में कीट और किस विश्वविद्यालय ने जरूरतमंदों के लिए सहायता का हाथ बढ़ाया है, उन्हें किराने के सामान के अलावा अन्य जरूरी चीजें मुहैया कराया गया है. किट और किस विश्वविद्यालय साथ ही देश के जाने माने उद्योगपति अजीम प्रेमजी के सहायता से ओडिशा के भुवनेश्वर और रायगढ़ा जिलों में किन्नर समुदाय के लिए राशन और आवश्यक सामानों का वितरण करने के लिए आगे आए.</p>



<p>किट और किश विश्वविद्यालय परिसर के आसपास के इलाकों में बंदरों, मवेशियों और कुत्तों जैसे जानवरों को बिस्किट, फल, सब्जी और अन्य खाद्य सामग्री बांटने के लिए एक टीम का भी गठन किया गया था, जो हर रोज इन जानवरों को खाना खिलाता था. यह टीम परिसर के आस पास के जंगल झाड़ियों में बसने वाले 140 के आसपास मोर पक्षियों की भी देखभाल कर रहे हैं. और तो और पूरी, भुवनेश्वर और कटक जिले के 10 गौशालाओं में आर्थिक सहायता प्रदान कर रहे हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="294" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era3.jpg" alt="" class="wp-image-50257" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era3.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-kiit-helping-the-needy-in-covid-era3-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कोविड-19 महामारी वर्तमान पीढ़ी में समय का सबसे गंभीर विश्वस्तरीय स्वास्थ्य संकट है, और यह कठिन चुनौतियों से भरा हुआ है. महामारी ने अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका देते हुए विश्व के लगभग सभी देशों में आर्थिक संकट पैदा कर दिया है. महामारी एक प्रकार से मानव कर (Human Toll) वसूल कर रहा है. किट और किश के संस्थापक डॉ अच्युता सामंत का कहना है &#8216;कोरोना काल में हमारा यह छोटा सा प्रयास अथाह सागर की एक बूंद के समान है जबकि हमारा लक्ष्य और उद्देश्य उन सभी के चेहरों पर मुस्कान लाना है जहां तक हम पहुंच सकते हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि हम एकजुट होकर इस गंभीर महामारी संकट को दूर कर सकेंगे.&#8217;</p>



<p> <strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कोरोना महामारी में असहायों की सेवा में कीट और किस</title>
		<link>https://www.patnanow.com/odisha-kiit-and-kiss-helping-hand/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2020 05:38:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Corona mahamari]]></category>
		<category><![CDATA[kiit]]></category>
		<category><![CDATA[kiss]]></category>
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					<description><![CDATA[कोविड-19 सर्वव्यापी महामारी ने संपूर्ण विश्व के व्यक्तियों का सामान्य जीवन एवं रोजी-रोटी में व्यवधान उत्पन्न कर उनका जीवन तहस-नहस कर दिया है. ओडिशा भी इस सर्वव्यापी महामारी से बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. इस आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सरकार के सहायक बनने में बहुत से संगठनों एवं व्यक्तियों ने पहल की है. कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, भुवनेश्वर एवं सहयोगी संस्थान कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, इन संस्थाओं ने संस्थापक प्रोफेसर अच्युत सामंथा के नेतृत्व में इस महामारी के प्रकोप से बचाव हेतु सिलसिलेवार पहल की है एवं कोरोना वायरस के विरुद्ध ओडिशा इस संग्राम में आगे आया है. केआईआईटी एवं केआईएसएस ने राज्य की स्वास्थ्य सतर्कता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, तथा वंचित एवं उपेक्षित जीवन जी रहे व्यक्तियों की पीड़ा में अत्यधिक कमी लाए हैं. कोविड-19 के विरुद्ध ओडिशा में महत्वपूर्ण आयामों में से एक,केआईआईटी डीम्ड विश्वविद्यालय के एक संगठन कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज ओडिशा ने तीन जनजाति बाहुल्य जिलों एवं भुवनेश्वर में स्थित, ओडिशा सरकार की सहायता से, 4 अत्याधुनिक कोविड चिकित्सा की स्थापना की है. इन चिकित्सालयों में 12 सौ मरीजों के उपचार की संयुक्त क्षमता है. केआईएसएस कोविड चिकित्सालय, भुवनेश्वर में जो भारत में प्रथम कोविड चिकित्सालय है, इसमें अत्याधुनिक सुविधाओं सहित 500 बेड हैं साथ ही 500 संकटकालीन देखभाल बेड है. कोविड चिकित्सालयों द्वारा तुरंत देखभाल से हजारों जीवन बच गए हैं. कोविड-19 सर्वव्यापी महामारी ना केवल एक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकालीन संकट है वरन लंबे लॉकडाउन एवं रोजी-रोटी के नुकसान के कारण इसने गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिए हैं. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-odisha-Kiit-and-Kiss-helping-hand.jpg" alt="" class="wp-image-50085" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-odisha-Kiit-and-Kiss-helping-hand.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-odisha-Kiit-and-Kiss-helping-hand-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कोविड-19 सर्वव्यापी महामारी ने संपूर्ण विश्व के व्यक्तियों का सामान्य जीवन एवं रोजी-रोटी में व्यवधान उत्पन्न कर उनका जीवन तहस-नहस कर दिया है. ओडिशा भी इस सर्वव्यापी महामारी से बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. इस आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सरकार के सहायक बनने में बहुत से संगठनों एवं व्यक्तियों ने पहल की है. कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, भुवनेश्वर एवं सहयोगी संस्थान कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, इन संस्थाओं ने संस्थापक प्रोफेसर अच्युत सामंथा के नेतृत्व में इस महामारी के प्रकोप से बचाव हेतु सिलसिलेवार पहल की है एवं कोरोना वायरस के विरुद्ध ओडिशा इस संग्राम में आगे आया है. केआईआईटी एवं केआईएसएस ने राज्य की स्वास्थ्य सतर्कता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, तथा वंचित एवं उपेक्षित जीवन जी रहे व्यक्तियों की पीड़ा में अत्यधिक कमी लाए हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-odisha-Kiit-and-Kiss-helping-hand-in-covid19.jpg" alt="" class="wp-image-50086" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-odisha-Kiit-and-Kiss-helping-hand-in-covid19.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-odisha-Kiit-and-Kiss-helping-hand-in-covid19-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कोविड-19 के विरुद्ध ओडिशा में महत्वपूर्ण आयामों में से एक,केआईआईटी डीम्ड विश्वविद्यालय के एक संगठन कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज ओडिशा ने तीन जनजाति बाहुल्य जिलों एवं भुवनेश्वर में स्थित, ओडिशा सरकार की सहायता से, 4 अत्याधुनिक कोविड चिकित्सा की स्थापना की है. इन चिकित्सालयों में 12 सौ मरीजों के उपचार की संयुक्त क्षमता है. केआईएसएस कोविड चिकित्सालय, भुवनेश्वर में जो भारत में प्रथम कोविड चिकित्सालय है, इसमें अत्याधुनिक सुविधाओं सहित 500 बेड हैं साथ ही 500 संकटकालीन देखभाल बेड है. कोविड चिकित्सालयों द्वारा तुरंत देखभाल से हजारों जीवन बच गए हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="603" height="450" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-poor-children.jpg" alt="" class="wp-image-50087" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-poor-children.jpg 603w, https://www.patnanow.com/assets/2020/10/pnc-poor-children-350x261.jpg 350w" sizes="(max-width: 603px) 100vw, 603px" /></figure>



<p>कोविड-19 सर्वव्यापी महामारी ना केवल एक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकालीन संकट है वरन लंबे लॉकडाउन एवं रोजी-रोटी के नुकसान के कारण इसने गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिए हैं. इस भयंकर संकट के समय केआईआईटी एवं केआईएसएस ने बढ़ाए गए लॉकडाउन से जूझते हुए विभिन्न समूहों तक पहुंच बनाई है. जिसमें इस महामारी से पीड़ित 300000 व्यक्तियों से अधिक लोगों को खाद्य सामग्रियों एवं अन्य आवश्यकताओं के वितरण शामिल हैं. इसने मलिन बस्तियों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों को अस्थाई पनाह प्रदान किया है.</p>



<p>केआईआईटी एवं केआईएसएस ने सर्वाधिक पीड़ित एवं सर्वहारा वर्ग के व्यक्तियों- विषम लिंगी, स्पोर्ट्स पर्सन, शारीरिक विकलांग, सेक्स वर्कर आदि तक पहुंच बनाई है. इन्हें भत्ते प्रदान कर लॉकडाउन के दौरान सहायता की है. भुवनेश्वर, कटक, पूरी एवं पास के शहरों में अनेक अध्यात्मिक केंद्रों के अन्य कर्मचारियों एवं पुजारियों को 3 माह हेतु खाद्य सामग्रियों एवं अन्य खर्चों हेतु नकदी भी प्रदान की है. इन 2 संस्थानों ने कंधमाल जिले में 40 अनाथालयों, वृद्ध आश्रमों एवं कुष्ठ केंद्रों में फुटकर खर्चों हेतु किराना एवं नगद राशि उपलब्ध कराई है. कोविड-19 सर्वव्यापी महामारी से सर्वाधिक त्रस्त छात्रों के समुदाय को जिनमें प्राथमिक स्तर से पीजी/पीएचडी स्तर तक के छात्रों को उनके अध्ययन में मदद करना शामिल है. इन्होंने ओडिशा के विभिन्न जिलों से आए छात्रों को उनके घरों तक पहुंचाने में न केवल मदद कि वरन अप्रैल से ही अध्ययन सामग्रियों, कपड़े एवं ड्राई फ्रूट भी उपलब्ध कराएं. किशोरियों को सेनेटरी नैपकिन भी उपलब्ध कराएं जोकि केआईएसएस के पुनः खुलने तक जारी रहेगा. प्रोफेसर सामंथा ने नवीन अकादमिक वर्ष तक इन समस्त सुविधाओं को जारी रखने का निर्णय लिया है, जो कि छात्रों की मदद को सर्वोपरि मानते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="509" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/05/pnc-corona-ad-by-health-1.jpg" alt="" class="wp-image-46170" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/05/pnc-corona-ad-by-health-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/05/pnc-corona-ad-by-health-1-350x274.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्रधानमंत्री के आमंत्रण &#8216;आत्मनिर्भर भारत&#8217; से प्रेरित केआईएसएस में कोविड-19 सर्वव्यापी महामारी के दौरान वोकेशनल स्किल सेंटर का विवेचन किया है जो कि एक मध्यम आकार के उद्योग के स्तर समान है. इसमें व्यवसाय की 25 प्रकार के विभिन्न उत्पाद बनाए जा रहे हैं. इन उत्पादों को केआईआईटी की इनहाउस आवश्यकताओं को पूर्ण करने के साथ ही डिस्ट्रीब्यूटर चैनल द्वारा भी विपणन किया जा रहा है. केंद्र से बिक्री के बढ़ने के साथ ही आने वाले वर्षों में केआईआईटी एवं केआईएसएस के आत्मनिर्भर होने की आशा की जा सकती है. एक अद्वितीय मानवीय पहल के अंतर्गत डीम्ड विश्वविद्यालय केआईआईटी ने ओडिशा में कोविड मृतकों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराए जाने का निर्णय किया है. यह सुविधा अकादमिक सत्र 2020-21 एवं 2021-22 दो वर्षों हेतु उपलब्ध कराई जाएगी.</p>



<p>सर्वव्यापी महामारी के चलते प्रथम 6 माहो में बहुत से बच्चे अनाथ हो गए हैं. गरीब वर्ग के बच्चे यौन शोषण एवं देह व्यापार के शिकार हो सकते हैं. केआईआईटी एवं केआईएसएस लगभग 100 ऐसे अनाथ को गोद लेकर इनकी देखभाल कर रहा है एवं परिवार के आकार अनुसार प्रति माह ₹5000 से ₹20000 तक भत्ता उपलब्ध करा रहा है. जब भी अकादमिक संस्थान पुनः खुलेगा इन्हें निशुल्क शिक्षा एवं तदन्तर उच्च अध्ययन पूर्ण करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी.</p>



<p>कोविड के मृतकों के बच्चों को एवं अनाथों को सहायता प्रदान करने का कारण इस संस्थान के संस्थापक प्रोफेसर सामंथा के स्वयं के बचपन के अनुभव से प्रेरित है, जिन्होंने 4 वर्ष की छोटी आयु में पिता को खो दिया था और भूख एवं गरीबी में बचपन बिताया था. इनका सदैव यह प्रयास रहता है कि ऐसा कोई भी बच्चा माता-पिता की असमय मौत या गरीबी के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित ना रह जाए.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>“प्लांट फॉर प्लेनेट” पर जोर है सांसद का । बिहार में भी लगाएंगे पौधे</title>
		<link>https://www.patnanow.com/dr-achyut-samant-at-hotel-maurya-patna-press-meeting/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nikhil]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Dec 2019 14:12:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[वीडियो]]></category>
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		<category><![CDATA[hotel maurya]]></category>
		<category><![CDATA[kiit]]></category>
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		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ अच्युत सामंत]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना (पटना नाउ ब्यूरो रिपोर्ट) &#124; “बिहार के साथ में मेरा पुराना और विशेष लगाव है. यहाँ के करीब 10 हजार छात्रों का समूह मेरे इंस्टिट्यूट में है. – ऐसा कहना है बीजद सांसद डॉ अच्युत सामंत का, जो कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी ( केआईआईटी) तथा कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस ( केआईएसएस) के संस्थापक भी हैं. वे शुक्रवार को पटना के एक होटल में मीडिया वालों के साथ मीटिंग के दौरान कही. डॉ. अच्युत सामंत ने कहा कि वे हर साल बिहार आकर मीडिया के माध्यम से बिहारवासियों को आभार व्यक्त करता रहता हूँ कि उन्होंने KIIT पर भरोसा किया तथा यहाँ से पास करके दुनिया के हरेक कोने में नौकरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे है. उनके अनुसार आज भी उनके इंस्टिट्यूट में लगभग 6 हजार बिहारी बच्चे पढ़ रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि यदि बिहार सरकार जमीन दे, तो वे यहां 1000 गरीब बच्चों के लिए स्कूल भी खोलेंगे. “प्लांट फॉर प्लेनेट” के तहत पौधे लगाएंगेपटना नाउ से बात करते हुए डॉ सामंत ने बताया कि उनका एक प्लेटफॉर्म है, ‘आर्ट ऑफ गीविंग’ जो प्रत्येक वर्ष अलग-अलग थीम पर सामाजिक कार्य करता है. इस साल का थीम है, गो ग्रीन &#8211; “प्लांट फॉर प्लेनेट”. इसके अंतर्गत 120 देशों में करोड़ों की संख्या में पेड़ लगाया जाना है. “प्लांट फॉर प्लेनेट” के अंतर्गत पूरे भारतवर्ष में 12 करोड़ से लेकर 18 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें बिहार में 2 करोड़ पेड़ लगाए जाएंगे. इस कार्य में इंस्टिट्यूट के अलुमिनी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="285" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/12/patna-now-kiit-dr-achyut-samant.png" alt="" class="wp-image-42483" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2019/12/patna-now-kiit-dr-achyut-samant.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2019/12/patna-now-kiit-dr-achyut-samant-350x153.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>Dr Achyut Samant at Press Meet</strong></figcaption></figure>



<p><strong>पटना (पटना नाउ ब्यूरो रिपोर्ट)</strong> | “बिहार के साथ में मेरा पुराना और विशेष लगाव है. यहाँ के करीब 10 हजार छात्रों का समूह मेरे इंस्टिट्यूट में है. – ऐसा कहना है बीजद सांसद डॉ अच्युत सामंत का, जो कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी ( केआईआईटी) तथा कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस ( केआईएसएस) के संस्थापक भी हैं. वे शुक्रवार को पटना के एक होटल में मीडिया वालों के साथ मीटिंग के दौरान कही. डॉ. अच्युत सामंत ने कहा कि वे हर साल बिहार आकर मीडिया के माध्यम से बिहारवासियों को आभार व्यक्त करता रहता हूँ कि उन्होंने KIIT पर भरोसा किया तथा यहाँ से पास करके दुनिया के हरेक कोने में नौकरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे है.  उनके अनुसार आज भी उनके इंस्टिट्यूट में लगभग 6 हजार बिहारी बच्चे पढ़ रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि यदि बिहार सरकार जमीन दे, तो वे यहां 1000 गरीब बच्चों के लिए स्कूल भी खोलेंगे.</p>



<figure class="wp-block-embed-youtube wp-block-embed is-type-video is-provider-youtube wp-embed-aspect-16-9 wp-has-aspect-ratio"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<iframe loading="lazy" title="KIIT संस्थापक डॉ सामंत से पटना नाउ की बातचीत" width="640" height="360" src="https://www.youtube.com/embed/B56SekmXgr4?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe>
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<p><strong>“प्लांट फॉर प्लेनेट” के तहत पौधे लगाएंगे</strong><br>पटना नाउ से बात करते हुए डॉ सामंत ने बताया कि उनका एक प्लेटफॉर्म है, ‘आर्ट ऑफ गीविंग’ जो प्रत्येक वर्ष अलग-अलग थीम पर सामाजिक कार्य करता है. इस साल का थीम है, गो ग्रीन &#8211; “प्लांट फॉर प्लेनेट”. इसके अंतर्गत 120 देशों में करोड़ों की संख्या में पेड़ लगाया जाना है. “प्लांट फॉर प्लेनेट” के अंतर्गत पूरे भारतवर्ष में 12 करोड़ से लेकर 18 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें बिहार में 2 करोड़ पेड़ लगाए जाएंगे. इस कार्य में इंस्टिट्यूट के अलुमिनी छात्र व उनके पेरेंट्स आदि सहयोग करेंगे. 17 मई 2020 को ‘आर्ट ऑफ गीविंग’ के फाउंडेशन डे पर यह आकलन किया जाएगा कि कितने करोड़ पौधे लगाए गए. <br><strong>10 गरीब बच्चों को नि:शुल्क इंजीनियरिंग</strong><br>डॉ सामंत ने कहा कि हर साल बिहार के 10 गरीब बच्चों को कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी में नि:शुल्क इंजीनियरिंग पढ़ाया जाएगा जिसमें उनके आवासीय व्यवस्था भी शामिल रहेगी. इसके लिए बीपीएल कैटेगरी के छात्र आवेदन कर सकते हैं. स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा स्क्रीनिंग के पश्चात इस 10 छात्रों का चयन किया जाएगा. उन्होंने आगे बताया कि देश के सभी राज्यों में गरीब बच्चों के लिए ‘कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस’ (KISS) द्वारा नि:शुल्क आवासीय स्कूल खोलने की योजना भी है. अभी ये स्कूल उड़ीसा और दिल्ली में चल रहे हैं. <br>ज्ञातव्य है, कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी ( केआईआईटी), पहले केआईआईटी यूनिवर्सिटी,, एक निजी संस्थान है जो ओडिसा के भुवनेश्वर में स्थित एक डीम्ड यूनिवर्सिटी है. कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस (KISS) उड़ीसा के अतिग्रामीण इलाके के करीब 50 हजार से अधिक गरीब आदिवासी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दे रहा है.<br>बताते चलें कि डॉ अच्युत सामंत देश के सबसे गरीब लोकसभा सांसद हैं जिनके पास कोई भी जायदाद नहीं है. अपने इंस्टिट्यूट के परिसर में वे साइकिल या पैदल घूमते हैं. सबसे आश्चर्य यह है कि वे अपना ऑफिस पेड़ के नीचे बनाए गए चबूतरे पर चलाते हैं और उनके न्यूनतम जरूरतों का खर्च यूनिवर्सिटी उठाता है.  4 साल की उम्र में ही इनके पिता की मृत्यु हो गई जिसके बाद वे सब्जी बेचकर अपना जीवन यापन करते थे. उनका आरंभिक जीवन अत्यंत गरीबी और अभाव में बीता था. इस कारण शुरू से उनके मन में समाज से गरीबी और अशिक्षा को हटाने की ललक थी. मात्र 5000 की लागत और 12 छात्रों से इन्होंने 1997 में भुवनेश्वर में कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (KIIT) कि स्थापना कि थी. आज डॉ सामंत की पूंजी करींब 800 के आसपास है. </p>
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