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		<title>बेहद रहस्यमयी है श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर</title>
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		<pubDate>Fri, 13 May 2022 14:06:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सैकड़ों टन सोने के खजाने के ऊपर वि&#x200d;राजमान हैं भगवान वि&#x200d;ष्&#x200d;णु 1 ट्रि&#x200d;लि&#x200d;यन डॉलर का खजाना जि&#x200d;समें सोने चांदी के आभूषण, रत्&#x200d;न और मूर्ति&#x200d;यां श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जिस पर सोने की परत चढ़ी हुई है. पद्मनाभस्वामी मंदिर में भगवान विष्णु शेषनाग पर अनंतशायी मुद्रा में लेट हुए हैं, जि&#x200d;नकी नाभि&#x200d; से पद्म यानी कमल का पुष्&#x200d;प नि&#x200d;कला हुआ है और इस कमल पर वि&#x200d;राजमान हैं सृष्&#x200d;टि&#x200d; के रचयि&#x200d;ता भगवान ब्रह्मा जी. यह दिव्य मंदिर भारत के उन गिने-चुने मंदिरों में से एक है जहाँ केवल हिंदू धर्म के लोग ही प्रवेश कर सकते हैं. इस मंदिर का रहस्य और भव्यता हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है. अगर आप अलौकि&#x200d;क शांति का अनुभव करना चाहते हैं तो आपको इस मंदिर की यात्रा अवश्य करना चाहिए. श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास 8 वीं शताब्दी का है. ये मंदिर भारत में 108 पवित्र विष्णु मंदिरों में से एक है. त्रावणकोर राजाओं के बीच विख्यात मार्तंड वर्मा ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जिसके बाद श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की संरचना हुई. मार्तण्ड वर्मा ने ही इस मंदिर में मुरजपम और भाद्र दीपम त्योहारों की शुरुआत की. मुरजपम का मतलब प्रार्थनाओं का निरंतर जप होता है. आज भी यह त्यौहार मंदिर में हर छह साल में एक बार आयोजित किया जाता है. श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का उल्लेख कई पवित्र ग्रंथों जैसे स्कंद पुराण, पद्म पुराण, ब्रह्म पुराण में मिलता है. इस मंदिर को सात परशुराम क्षेत्रों में से एक माना जाता है. [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सैकड़ों टन सोने के खजाने के ऊपर वि&#x200d;राजमान हैं भगवान वि&#x200d;ष्&#x200d;णु</strong></p>



<p><strong>1 ट्रि&#x200d;लि&#x200d;यन डॉलर का खजाना जि&#x200d;समें सोने चांदी के आभूषण, रत्&#x200d;न और मूर्ति&#x200d;यां</strong></p>



<p>श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जिस पर सोने की परत चढ़ी हुई है. पद्मनाभस्वामी मंदिर में भगवान विष्णु शेषनाग पर अनंतशायी मुद्रा में लेट हुए हैं, जि&#x200d;नकी नाभि&#x200d; से पद्म यानी कमल का पुष्&#x200d;प नि&#x200d;कला हुआ है और इस कमल पर वि&#x200d;राजमान हैं सृष्&#x200d;टि&#x200d; के रचयि&#x200d;ता भगवान ब्रह्मा जी. यह दिव्य मंदिर भारत के उन गिने-चुने मंदिरों में से एक है जहाँ केवल हिंदू धर्म के लोग ही प्रवेश कर सकते हैं. इस मंदिर का रहस्य और भव्यता हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है. अगर आप अलौकि&#x200d;क शांति का अनुभव करना चाहते हैं तो आपको इस मंदिर की यात्रा अवश्य करना चाहिए.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="600" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/sri-padmnaabh-mandir.png" alt="" class="wp-image-62250" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/sri-padmnaabh-mandir.png 600w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/sri-padmnaabh-mandir-350x350.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/sri-padmnaabh-mandir-250x250.png 250w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /><figcaption><strong>श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर</strong></figcaption></figure>



<p>श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास 8 वीं शताब्दी का है. ये मंदिर भारत में 108 पवित्र विष्णु मंदिरों में से एक है. त्रावणकोर राजाओं के बीच विख्यात मार्तंड वर्मा ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जिसके बाद श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की संरचना हुई. मार्तण्ड वर्मा ने ही इस मंदिर में मुरजपम और भाद्र दीपम त्योहारों की शुरुआत की. मुरजपम का मतलब प्रार्थनाओं का निरंतर जप होता है. आज भी यह त्यौहार मंदिर में हर छह साल में एक बार आयोजित किया जाता है. श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का उल्लेख कई पवित्र ग्रंथों जैसे स्कंद पुराण, पद्म पुराण, ब्रह्म पुराण में मिलता है. इस मंदिर को सात परशुराम क्षेत्रों में से एक माना जाता है. मंदिर के पास एक पवित्र तालाब भी स्थित है जिसे पद्म तीर्थम कहा जाता है. श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की वास्तुकला केरल शैली और द्रविड़ियन (कोविल) शैली का मिश्रण है जिसे आसपास के कई मंदिरों में देखा जा सकता है. मंदिर का गर्भगृह एक पत्थर के स्लैब पर स्थित है. मंदिर की मुख्य मूर्ति लगभग 18 फीट लंबी है. मंदिर की पूरी इमारत पत्थर और कांस्य के सुंदर भित्ति चित्रों के साथ सजी हुई है.</p>



<p>श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक होने के साथ साथ काफी रहस्यमयी भी है. जी हाँ आपने बिलकुल सही सुना इस मंदिर से ऐसे कुछ रहस्य भी जुड़े है जिनको आज तक सुलझायां नही जा सका है. माना जाता है कि इस मंदिर के तहखाने में सात दरवाजे है लेकिन इसके सातवे दरवाजे जि&#x200d;सका नाम वॉल्&#x200d;ट बी है, इसको आज तक खोला नही जा सका है. कहा जाता है इस दरवाजे पर एक सांप का बड़ा चित्र बना हुआ है और इसे कि&#x200d;सी प्राचीन मंत्र से लॉक कि&#x200d;या गया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="640" height="360" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/sri-padmnaabh-mandir2.png" alt="" class="wp-image-62251" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/sri-padmnaabh-mandir2.png 640w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/sri-padmnaabh-mandir2-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /><figcaption><strong>रहस्यमयी दरवाजा आज तक नहीं खुला  </strong></figcaption></figure>



<p>सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पद्मनाभ स्&#x200d;वामी मंदि&#x200d;र के सात दरवाजों को खोलने की कवायद हुई मगर रहस्&#x200d;यमयी वॉल्&#x200d;ट बी को खोलने से खुद कोर्ट ने भी मना कर दि&#x200d;या. वॉल्&#x200d;ट बी दरवाजा पद्मनाभ स्&#x200d;वामी भगवान के वि&#x200d;ग्रह के ठीक नीचे स्&#x200d;थि&#x200d;त बताया जाता है. स्&#x200d;थानीय पुजारि&#x200d;यों और राजपरि&#x200d;वार से जुड़े लोगों के अनुसार वॉल्&#x200d;ट बी में कुछ ऐसा है जि&#x200d;से खोलने से पूरी दुनि&#x200d;या में भारी तबाही आ सकती है. वैसे बाकी के 6 दरवाजों भी कम रहस्&#x200d;यमयी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जब इन दरवाजों को खोला गया तो इसमें से अकूत खजाना मि&#x200d;ला. दुनि&#x200d;या की मशहूर फोर्ब्&#x200d;स पत्रि&#x200d;का के अनुसार पद्मनाभ स्&#x200d;वामी मंदि&#x200d;र के अंदर 1 ट्रि&#x200d;लि&#x200d;यन डॉलर का खजाना जि&#x200d;समें सोने चांदी के आभूषण, रत्&#x200d;न और मूर्ति&#x200d;यां रखी गयी हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/download-1.jpg" alt="" class="wp-image-62252" width="610" height="401"/></figure>



<p>श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में पूजा और दर्शन का समय सुबह 3:30 बजे से शाम के 7:30 बजे तक भक्त कर सकते हैं. बीच बीच में कुछ समय के लि&#x200d;ये मंदि&#x200d;र को दर्शनार्थि&#x200d;यों के लि&#x200d;ये बंद भी कि&#x200d;या जाता है. इस मंदिर में भक्तों के लिए ड्रेस कोड की भी व्यवस्था की गयी है जिसमें महिलाएं साड़ी और पुरुषों के लिए धोती अनिवार्य है. बावजूद इसके रोजाना इस मंदिर में भक्तों की भारी संख्या में भीड़ जुटती है. बता दें कि यहां पर मंदिर के प्रवेश द्वार के पास किराए की धोती और साड़ि&#x200d;यां आसानी से उपलब्ध हैं.</p>



<p><strong>PNCARTDESK</strong></p>
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