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	<title>kavita pankaj bhath &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>कई सवाल  सबसे &#8230;.</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 Oct 2021 13:18:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[आरा के रंगकर्मी पंकज भट्ट के संकलित कुछ प्रश्न जो आम लोगों के संस्कृति से जुड़े होने पर आधारित हैं आप भी इन सवालों का जवाब दे सकते हैं &#8230;&#8230;. यदि आपने :बखरी की कोठरी के ताखा में जलती ढेबरी देखी हैदलान को समझा हैओसारा जानते हैंदुवारे पर कचहरी (पंचायत) देखी हैराम राम के बेरा दूसरे के दुवारे पहुंच के चाय पानी किये हैंदतुअन किये हैंदिन में दाल-भात-तरकारीखाये हैंसंझा माई की किरिया का मतलब समझते हैंरात में दिया और लालटेम जलाये हैंबरहम बाबा का स्थान आपको मालूम हैडीह बाबा के स्थान पर गोड़ धरे हैंतलाव (ताल) के किनारे और बगइचा के बगल वाले पीपर और स्कूल के रस्ता वाले बरगद के भूत का किस्सा (कहानी) सुने हैंबसुला समझते हैंफरूहा जानते हैंकुदार देखे हैंदुपहरिया मे घूम-घूम कर आम, जामुन, अमरूद खाये हैंबारी बगइचा की जिंदगी जिए हैंचिलचिलाती धूप के साथ लूक के थपेड़ों में बारी बगइचा में खेले हैंपोखरा-गड़ही किनारे बैठकर लंठई किये हैंपोखरा-गड़ही किनारे खेत में बैठकर 5-10 यारों की टोली के साथ कुल्ला मैदान हुए हैंगोहूं, अरहर, मटरिया का मजा लिये हैंअगर आपने जेठ के महीने की तीजहरिया में तीसौरी भात खाये हैं,अगर आपने सतुआ का घोरुआ पिआ है,अगर आपने बचपन में बकइयां घींचा हैअगर आपने गाय को पगुराते हुए देखा हैअगर आपने बचपने में आइस-पाइस खेला हैअगर आपने जानवर को लेहना और सानी खिलाते किसी को देखा हैअगर आपने ओक्का बोक्का तीन तलोक्का नामक खेल खेला हैअगर आपने घर लीपते हुए देखा हैअगर आपने गुर सतुआ, मटर और गन्ना का रस के अलावा कुदारी से खेत का कोन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> </strong></p>



<p><strong>आरा के रंगकर्मी  पंकज भट्ट  के संकलित कुछ प्रश्न जो आम लोगों के संस्कृति से जुड़े होने पर आधारित हैं आप भी इन सवालों का जवाब दे सकते हैं &#8230;&#8230;.</strong></p>



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<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/10/caa0320a-63e5-4a47-ad2c-13fea2818118.jpg" alt="" class="wp-image-56545" width="456" height="386" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/10/caa0320a-63e5-4a47-ad2c-13fea2818118.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/10/caa0320a-63e5-4a47-ad2c-13fea2818118-350x296.jpg 350w" sizes="(max-width: 456px) 100vw, 456px" /><figcaption><strong>पंकज भट्ट,रंगकर्मी</strong></figcaption></figure>
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<p></p>



<p>यदि आपने :<br>बखरी की कोठरी के ताखा में जलती ढेबरी देखी है<br>दलान को समझा है<br>ओसारा जानते हैं<br>दुवारे पर कचहरी (पंचायत) देखी है<br>राम राम के बेरा दूसरे के दुवारे पहुंच के चाय पानी किये हैं<br>दतुअन किये हैं<br>दिन में दाल-भात-तरकारी<br>खाये हैं<br>संझा माई की किरिया का मतलब समझते हैं<br>रात में दिया और लालटेम जलाये हैं<br>बरहम बाबा का स्थान आपको मालूम है<br>डीह बाबा के स्थान पर गोड़ धरे हैं<br>तलाव (ताल) के किनारे और बगइचा के बगल वाले पीपर और स्कूल के रस्ता वाले बरगद के भूत का किस्सा (कहानी) सुने हैं<br>बसुला समझते हैं<br>फरूहा जानते हैं<br>कुदार देखे हैं<br>दुपहरिया मे घूम-घूम कर आम, जामुन, अमरूद खाये हैं<br>बारी बगइचा की जिंदगी जिए  हैं<br>चिलचिलाती धूप के साथ लूक के थपेड़ों में बारी बगइचा में खेले हैं<br>पोखरा-गड़ही किनारे बैठकर लंठई किये हैं<br>पोखरा-गड़ही किनारे खेत में बैठकर 5-10 यारों की टोली के साथ कुल्ला मैदान हुए हैं<br>गोहूं, अरहर, मटरिया का मजा लिये हैं<br>अगर आपने जेठ के महीने की तीजहरिया में तीसौरी भात खाये हैं,<br>अगर आपने सतुआ का घोरुआ पिआ है,<br>अगर आपने बचपन में बकइयां घींचा है<br>अगर आपने गाय को पगुराते हुए देखा है<br>अगर आपने बचपने में आइस-पाइस खेला है<br>अगर आपने जानवर को लेहना और सानी खिलाते किसी को देखा है<br>अगर आपने ओक्का बोक्का तीन तलोक्का नामक खेल खेला है<br>अगर आपने घर लीपते हुए देखा है<br>अगर आपने गुर सतुआ, मटर और गन्ना का रस के अलावा कुदारी से खेत का कोन गोड़ने का मजा लिया है<br>अगर आपने पोतनहर से चूल्हा पोतते हुए देखा है<br>अगर आपने कउड़ा/कुंडा/ सिगड़ी/ कंडा/ बोड़सी तापा है<br>अगर आप ने दीवाली के बाद दलिद्दर खेदते देखा है</p>



<p><strong>तो समझिये की आपने एक अद्भुत ज़िंदगी जी है, और इस युग में ये अलौकिक ज़िंदगी ना अब आपको मिलेगी ना आने वाली पीढ़ी को क्योंकि आज उपरोक्त चीजें विलुप्त प्राय होती जा रही हैं या हो चुकी हैं।</strong></p>
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