<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Kalidas rangalay &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
	<atom:link href="https://www.patnanow.com/tag/kalidas-rangalay/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.patnanow.com</link>
	<description>Patna News Portal - हर ख़बर पर नज़र</description>
	<lastBuildDate>Thu, 31 Aug 2023 05:06:17 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.6.1</generator>

<image>
	<url>https://www.patnanow.com/assets/2022/08/cropped-PatnaNow_Logo_2022-32x32.png</url>
	<title>Kalidas rangalay &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
	<link>https://www.patnanow.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>सतीश डे लिखित एवं डॉ ओम कपूर निर्देशित नाटक घरवाली का मंचन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/staging-of-the-play-gharwali-written-by-satish-dey-and-directed-by-dr-om-kapoor/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 31 Aug 2023 05:06:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[kala kunj rang mahotasv 2023]]></category>
		<category><![CDATA[kalidas me natak]]></category>
		<category><![CDATA[Kalidas rangalay]]></category>
		<category><![CDATA[om kapoor]]></category>
		<category><![CDATA[patan]]></category>
		<category><![CDATA[patna me natak]]></category>
		<category><![CDATA[satish dey]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=77697</guid>

					<description><![CDATA[कालिदास रक्षागृह में कला कुंज रंग महोत्सव &#8211; 2023 का आयोजन पटना के स्थानीय कालिदास रंगालय के पेक्षागृह में कला कुंज रंग महोत्सव &#8211; 2023 के अर्न्तगत 30 अगस्त की संध्या कला-कुंज पटना द्वारा हास्य एवं वयंग से भरपूर नाटक सतीश डे लिखित एवं डॉ ओम कपूर निर्देशित घरवाली का मंचन किया गया। जिसका उद्घाटन प्रसिद्ध चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ० दीवाकर तेजस्वी, पूर्व केन्द्र निदेशक, आकाशवाणी पटना के डॉ० किशोर सिन्हा एवं सचिव सर्वोच्च मानवाधिकार संरक्षण बिहार के डॉ० जितेन्द्र कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कथावस्तु में इस महगाई की मार से त्रस्त एक मध्यम वर्गीय परिवार के दर्द और व्यथा को दर्शाया गया है। साथ ही साथ ये नाटक लागातार बढ़ती हुई जनसंख्या के दुष्प्रभाव और इन से जनित सामाजिक विद्रुपताओं पर भी करारा चोट करता है। हास्य एवं व्यंग के संवादों से लवरेज इस नाटक के माध्यम से समाज में फैली जनसंख्या विस्फोट को रोक सकने में सफल रहा है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोगों ने विकास का जैसा सपना देखा वो पूरा नही हो पाया। बढ़ती आवादी ने विकास के पहिए का जाम कर दिया, बढ़ती जनसंख्या के कारण कई और समस्याए देश के सामने आई। नाटक में इसी पहलू को हास्य और व्यंग की चटनी में लपेट कर पेस किया गया जो काफी सराहनीय रहा। डॉ० ओम कपूर का यह प्रयास सार्थकता प्रदान करती है और समाज को एक सुखद संदेश देकर अपनी प्रस्तुति को सफल बनाया है। नाटक में अभिनय करने वाले कलाकारों में सूरज की भूमिका में राहुल पाठक, दीपक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>कालिदास रक्षागृह में कला कुंज रंग महोत्सव</strong> <strong>&#8211; 2023 का आयोजन </strong></p>



<p>पटना के स्थानीय कालिदास रंगालय के पेक्षागृह में कला कुंज रंग महोत्सव &#8211; 2023 के अर्न्तगत 30 अगस्त की संध्या कला-कुंज पटना द्वारा हास्य एवं वयंग से भरपूर नाटक सतीश डे लिखित एवं डॉ ओम कपूर निर्देशित घरवाली का मंचन किया गया। जिसका उद्घाटन प्रसिद्ध चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ० दीवाकर तेजस्वी, पूर्व केन्द्र निदेशक, आकाशवाणी पटना के डॉ० किशोर सिन्हा एवं सचिव सर्वोच्च मानवाधिकार संरक्षण बिहार के डॉ० जितेन्द्र कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कथावस्तु में इस महगाई की मार से त्रस्त एक मध्यम वर्गीय परिवार के दर्द और व्यथा को दर्शाया गया है। साथ ही साथ ये नाटक लागातार बढ़ती हुई जनसंख्या के दुष्प्रभाव और इन से जनित सामाजिक विद्रुपताओं पर भी करारा चोट करता है। हास्य एवं व्यंग के संवादों से लवरेज इस नाटक के माध्यम से समाज में फैली जनसंख्या विस्फोट को रोक सकने में सफल रहा है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोगों ने विकास का जैसा सपना देखा वो पूरा नही हो पाया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="529" height="517" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/828a6c56-493c-49a6-b07e-f467f0aa6073.jpg" alt="" class="wp-image-77698" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/828a6c56-493c-49a6-b07e-f467f0aa6073.jpg 529w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/828a6c56-493c-49a6-b07e-f467f0aa6073-350x342.jpg 350w" sizes="(max-width: 529px) 100vw, 529px" /></figure>



<p>बढ़ती आवादी ने विकास के पहिए का जाम कर दिया, बढ़ती जनसंख्या के कारण कई और समस्याए देश के सामने आई। नाटक में इसी पहलू को हास्य और व्यंग की चटनी में लपेट कर पेस किया गया जो काफी सराहनीय रहा। डॉ० ओम कपूर का यह प्रयास सार्थकता प्रदान करती है और समाज को एक सुखद संदेश देकर अपनी प्रस्तुति को सफल बनाया है। नाटक में अभिनय करने वाले कलाकारों में सूरज की भूमिका में राहुल पाठक, दीपक की भूमिका में डॉ० ओम कपूर, चांद मोहन, राम लखन सिंह, रौशन लाल, लक्ष्मण राम, करामात अलि, आशिष दीक्षित, फकरुद्दीन, कौशल चन्द्र, गंगाधर, प्रदुमन कुमार ने अपने अभिनय से दर्शकों को बाधे रखा जबकि प्रकाश परिकल्पना राजवीर गुंजन एवं संगीत संयोजन राहुल पाठक का था कुल मिलाकर कला-कुज पटना की यह प्रस्तुति सफल रही।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="310" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/cee41b39-193c-4de2-bee4-dd584315936e-650x310.jpg" alt="" class="wp-image-77699" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/cee41b39-193c-4de2-bee4-dd584315936e-650x310.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/cee41b39-193c-4de2-bee4-dd584315936e-350x167.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/cee41b39-193c-4de2-bee4-dd584315936e-768x366.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/cee41b39-193c-4de2-bee4-dd584315936e.jpg 803w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज से तीन दिवसीय रंग आयोजन पटना में</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aaj-se-3-divasiy-natak-ka-aarambh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Feb 2023 02:39:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Chaturbhuj]]></category>
		<category><![CDATA[Drama]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
		<category><![CDATA[Kala jagran]]></category>
		<category><![CDATA[Kalidas rangalay]]></category>
		<category><![CDATA[O P Lila Pandey]]></category>
		<category><![CDATA[O P Pandey]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[suman kumar]]></category>
		<category><![CDATA[Theatre]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=71790</guid>

					<description><![CDATA[रावण के मंचन के साथ 14वां डा.चतुर्भुज स्मृति अखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्य महोत्सव -2023 का होगा आगाज पटना,24 फरवरी (ओ पी पांडेय).बिहार की राजधानी पटना में आज से शुरू हो रहा है तीन दिवसीय रंग आयोजन जसमें पटना के रंग दर्शक तीन दिनों तक ऐतिहासिक रंग में नजर आएंगे. डा.चतुर्भुज की स्मृति में 24 से 26 फरवरी तक पटना के कालिदास रंगालय में आयोजित हो रहे 14वां अखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्य महोत्सव का शुभारंभ 24 फरवरी को &#8216;रावण&#8217; के नाट्य मंचन से होगा. कला जागरण और मगध कलाकार द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन में हर दिन एक ऐतिहासिक नाटक का मंचन किया जाने वाला है. इस अवसर पर डा.चतुर्भुज स्मृति नाट्य पत्रकारिता सम्मान चर्चित पत्रकार प्रीति सिंह को को प्रदान किया जाएगा. कला जागरण के कलाकारों द्वारा सुसज्जित इस नाटक का निर्देशन जहां वरिष्ठ नाट्य निर्देशक सुमन कुमार ने किया है वही इस नाटक को लिखा है डा.चतुर्भुज ने. 25 फरवरी को नाटक कर्ण और 26 को आजादी नाटक की प्रस्तुति होगी. PNCB]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>रावण के मंचन के साथ 14वां डा.चतुर्भुज स्मृति अखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्य महोत्सव -2023 का होगा आगाज</strong></p>



<p>पटना,24 फरवरी (ओ पी पांडेय).बिहार की राजधानी पटना में आज से शुरू हो रहा है तीन दिवसीय रंग आयोजन जसमें पटना के रंग दर्शक तीन दिनों तक ऐतिहासिक रंग में नजर आएंगे. डा.चतुर्भुज की स्मृति में 24 से 26 फरवरी तक पटना के कालिदास रंगालय में आयोजित हो रहे 14वां अखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्य महोत्सव का शुभारंभ 24 फरवरी को &#8216;रावण&#8217; के नाट्य मंचन से होगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="267" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_kala-jagaran-2023.jpg" alt="" class="wp-image-71791" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_kala-jagaran-2023.jpg 267w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_kala-jagaran-2023-156x350.jpg 156w" sizes="(max-width: 267px) 100vw, 267px" /></figure>



<p>कला जागरण और मगध कलाकार द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन में हर दिन एक ऐतिहासिक नाटक का मंचन किया जाने वाला है. इस अवसर पर डा.चतुर्भुज स्मृति नाट्य पत्रकारिता सम्मान चर्चित पत्रकार प्रीति सिंह को को प्रदान किया जाएगा. कला जागरण के कलाकारों द्वारा सुसज्जित इस नाटक का निर्देशन जहां वरिष्ठ नाट्य निर्देशक सुमन कुमार ने किया है वही इस नाटक को लिखा है डा.चतुर्भुज ने. 25 फरवरी को नाटक कर्ण और 26 को आजादी नाटक की प्रस्तुति होगी.</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8216;उस धत्त में&#8217; दिखी बाजारवाद की हकीकत</title>
		<link>https://www.patnanow.com/play-us-dhatt-main/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Sep 2021 16:26:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Art and culture dept gov india]]></category>
		<category><![CDATA[Kalidas rangalay]]></category>
		<category><![CDATA[Manoj manav]]></category>
		<category><![CDATA[Us dhatt main]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=55559</guid>

					<description><![CDATA[मनोज मानव के अभिनय ने अमिट छाप छोड़ी पटना: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से बयार की नाट्य प्रस्तुति मनोज मानव द्वारा लिखित निर्देशित &#8216;उस धत्त में&#8217;का मंचन किया गया. कालिदास रंगालय में नाटक &#8216;उस धत में &#8216; में का मंचन पटना वासियों के लिए गम्भीर और विचारोत्तेजक नाटक रहा .जिसमें निर्देशक ने इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ियों को जोड़ते हुए कई सवाल किया है जिनका जवाब सरलनहीं है लेकिन विचार के रूप लोगों के जेहन में हमेशा याद रहेगा .निर्देशक ने प्रायोगिक शिल्प के जरिये कई बिंदुओं पर दर्शकों का ध्यान खींचने में कामयाब दिखते हैं । इंसान और भगवान के बीच की कड़ी को तलाशने में इंसान खुद वैसा क्यों नहीं कर पाते जैसा भगवान ने सोच कर इंसान को बनाया, क्यों उन मूल्यों का अनुसरण नहीं कर पाते . हमारे लिए कितना आसान होता है उसे भगवान, खुदा या गॉड बना देना। भगवान इंसान बनाने का दावा करता है तो इंसान खुद भी वैसा क्यों नहीं बन सकता? बयार द्वारा प्रस्तुत नाटक &#8216;उस धत् में !&#8217; भारतीय वैदिक संस्कृति और विभिन्न उपनिवेश द्वारा इसे खंडित करने की दास्ताँ ही नहीं बल्कि विदेशी आक्रांता द्वारा फैलाये गये साम्राज्यवाद की पड़ताल है। साम्राज्यवाद की आड़ में हमारा धर्म, संस्कृति पर योजनाबद्ध हमला और उसकी परिणती धर्मान्तरण भी इस नाटक की केन्द्र बिंदु . किस तरह एक साजिश के तहत हमारी सर्वसम्पन्न संस्कृति को बैकवर्ड कहकर हमारी संस्कृति और संसाधनों को ही परिष्कृत कर हमें बाजार में तब्दील कर दिया गया। आज हमारी भारतीय वैदिक संस्कृति को राजनीति के केन्द्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><br><strong>मनोज मानव के अभिनय ने अमिट छाप छोड़ी</strong></p>



<p>पटना: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से बयार की नाट्य प्रस्तुति मनोज मानव द्वारा लिखित निर्देशित &#8216;उस धत्त में&#8217;का मंचन किया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="545" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0923_214730.jpg" alt="" class="wp-image-55560" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0923_214730.jpg 545w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0923_214730-318x350.jpg 318w" sizes="(max-width: 545px) 100vw, 545px" /></figure>



<p><br>कालिदास रंगालय में नाटक &#8216;उस धत में &#8216; में का मंचन पटना वासियों के लिए गम्भीर और विचारोत्तेजक नाटक रहा .जिसमें निर्देशक ने इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ियों को जोड़ते हुए कई सवाल किया है जिनका जवाब सरलनहीं है लेकिन विचार के रूप लोगों के जेहन में हमेशा याद रहेगा .निर्देशक ने प्रायोगिक शिल्प के जरिये कई बिंदुओं पर दर्शकों का ध्यान खींचने में कामयाब दिखते हैं । इंसान और भगवान के बीच की कड़ी को तलाशने में इंसान खुद वैसा क्यों नहीं कर पाते जैसा भगवान ने सोच कर इंसान को बनाया, क्यों उन मूल्यों का अनुसरण नहीं कर पाते . हमारे लिए कितना आसान होता है उसे भगवान, खुदा या गॉड बना देना। भगवान इंसान बनाने का दावा करता है तो इंसान खुद भी वैसा क्यों नहीं बन सकता? बयार द्वारा प्रस्तुत नाटक &#8216;उस धत् में !&#8217; </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="405" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0923_214618.jpg" alt="" class="wp-image-55561" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0923_214618.jpg 405w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0923_214618-236x350.jpg 236w" sizes="(max-width: 405px) 100vw, 405px" /><figcaption><strong>नाटक &#8216;उस धत्त में&#8217; अभिनेता मनोज मानव </strong></figcaption></figure>



<p>भारतीय वैदिक संस्कृति और विभिन्न उपनिवेश द्वारा इसे खंडित करने की दास्ताँ ही नहीं बल्कि विदेशी आक्रांता द्वारा फैलाये गये साम्राज्यवाद की पड़ताल है। साम्राज्यवाद की आड़ में हमारा धर्म, संस्कृति पर योजनाबद्ध हमला और उसकी परिणती धर्मान्तरण भी इस नाटक की केन्द्र बिंदु . किस तरह एक साजिश के तहत हमारी सर्वसम्पन्न संस्कृति को बैकवर्ड कहकर हमारी संस्कृति और संसाधनों को ही परिष्कृत कर हमें बाजार में तब्दील कर दिया गया।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="270" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210923_193407.jpg" alt="" class="wp-image-55571" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210923_193407.jpg 270w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210923_193407-158x350.jpg 158w" sizes="(max-width: 270px) 100vw, 270px" /></figure>



<p> आज हमारी भारतीय वैदिक संस्कृति को राजनीति के केन्द्र में लाकर उसकी अच्छाईयों को भी धूमिल कर दिया गया है। कुछ आक्रामक, जंगली वहशी, लूट की संस्कृति के पोषकों द्वारा भारत के आविष्कार और इसके निर्माण का दावा कितना हास्यास्पद है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210923_202601.jpg" alt="" class="wp-image-55565" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210923_202601.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210923_202601-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>नाटक उस धत्त में मनोज मानव </strong></figcaption></figure>



<p><br>निर्देशक ने गुलेरी जी ,ललित सिंह पोखरिया एवं राजीव नयन की कविताओं को भी नाट्य प्रस्तुति में बड़े ही रोचक तरीके से रखने की कोशिश की है।कट्टर होने की दिशा में लोग मनुष्य और मानवता को भूल गए हैं धर्म के नाम पर लूट की खुली छूट है दुनिया इसी में पिस रही है मैं ही महान हूँ इसी में सब आगे बढ़ रहे है ।ईश्वर को जीतने के अभियान पर । क्लेश उग्र और समय तीन पात्रों की बीच के सम्वाद में पूरे विश्व की ताजा हालातों पर धर्म के आतंक पर करारा प्रहार किया गया है । अनैतिक राजनीति को बढ़ावा देने वाले लोग ,राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के कारण लोगों की हत्याएं हो रही है संस्कृति से सब खत्म हो रहा है ।निर्देशक और लेखक मनोज मानव ने एक अभिनेता के तौर पर भी नाटक के केंद्र में थे जिन्होंने अपने से अभिनय से दर्शकों के अंत तक बाँधने में सफल रहे।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="412" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0923_214836.jpg" alt="" class="wp-image-55564" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0923_214836.jpg 412w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0923_214836-240x350.jpg 240w" sizes="(max-width: 412px) 100vw, 412px" /></figure>



<p>सह निर्देशक राजीव नयन,प्रकाश परिकल्पना एवं रूप सज्जा उपेंद्र कुमार और संगीत परिकल्पना जीशान साबिर की थी.वस्त्र विन्यास माधुरी सिंह,मंच निर्माण जिशान साबिर एवं सुनील शर्मा ,मंच प्रबंधन अजित गुज्जर एवं राजेश्वर पाण्डेय का था। प्रस्तुति में पार्श्व ध्वनि अनामिका कुमारी और मनोज मानव की थी। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि भी दी ।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210923_202315.jpg" alt="" class="wp-image-55566" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210923_202315.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/IMG_20210923_202315-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>नाटक उस धत्त की में क्लेश की भूमिका में मनोज मानव ,उग्र की भूमिका में निशांत खरवार और समय की भूमिका में नवोदित कलाकार सूरज मेहता के अभिनय को दर्शकों की तालियां बटोरी। कुल मिलाकर इस वैचारिक प्रस्तुति में पटनावासियों को एक प्रायोगिक नाटक की प्रस्तुति लंबे समय तक याद रखी जाने वाली प्रस्तुति बन गई। नाटक के अंत में दर्शकों से सम्वाद भी किया गया जिसमें दर्शकों ने प्रस्तुति को सराहा।</p>



<p><strong>रवींद्र भरती </strong></p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पढ़ते समय कहानियों के पात्र मेरे आगे खड़े हो जाते थे- रेणु</title>
		<link>https://www.patnanow.com/renu-sinha-acttress-patna/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Sep 2021 05:52:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Actress patna]]></category>
		<category><![CDATA[Kalidas rangalay]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[Poet]]></category>
		<category><![CDATA[Renu sinha]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=55479</guid>

					<description><![CDATA[एक अभिनेत्री की कहानी रेणु सिन्हा की कलम से .. पढ़ते समय कहानियों के पात्र मेरे आगे खड़े हो जाते थे, उनकी दुनिया मेरे आसपास बस जाती थी शायद उसी समय अभिनय और थियेटर के प्रति मेरे रुझान के बीज पड़ गए.. यह कहते हुए मुझे अजीब तो लगता है लेकिन यह सच है कि बचपन में अक्षर &#8211; ज्ञान मिलते ही मैं हिंदी साहित्य का अध्ययन करने लगी थीं साथ ही कविताएँ, कहानियाँ लिखने की भी कोशिश करती थी । दस वर्ष की अवस्था तक पहुँचते &#8211; पहुँचते मैंने भी अमृत लाल नागर, भगवती चरण वर्मा, धर्मवीर भारती, श्रीलाल शुक्ल और आचार्य चतुर सेन जैसे तकरीबन सभी नामचीन साहित्यकारों की पुस्तकों का अध्ययन कर लिया और बाद में अंग्रेजी साहित्यकारों को भी पढ़ा। अभी के उपन्यासकारों में अंग्रेजी के अभिताव घोष मुझे बेहद पसंद हैं । पढ़ते समय कहानियों के पात्र मेरे आगे खड़े हो जाते थे, उनकी दुनिया मेरे आसपास बस जाती थी । शायद उसी समय अभिनय और थियेटर के प्रति मेरे रुझान के बीज पड़ गए, लेकिन उन सपनों को मूर्त रूप देने में परिस्थितियों की सहयोग नहीं मिल सका । अन्य महिलाओं की तरह मैंने भी घर-परिवार की जिम्मेदारियों में ही अपने वजूद को कहीं खो सा दिया था। लेकिन कहते &#8220;Its better late than never&#8221;. यूँ कहें कि &#8220;देर आए, दुरुस्त आएँ&#8221; तो 2017 में मेरी कविताओं का संग्रह पुस्तक रूप में &#8220;स्वयंत&#8221; नाम से प्रकाशित हुआ । इसने मुझे खुशी तो दी लेकिन पूरा संतोष नहीं मिला &#124; जब भी नाटक था थियेटर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>एक अभिनेत्री की कहानी  </strong></p>



<p><strong>रेणु सिन्हा की कलम से ..</strong></p>



<p><strong>पढ़ते समय कहानियों के पात्र मेरे आगे खड़े हो जाते थे, उनकी दुनिया मेरे आसपास बस जाती थी शायद उसी समय अभिनय और थियेटर के प्रति मेरे रुझान के बीज पड़ गए..</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="289" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0917_110556.jpg" alt="" class="wp-image-55480" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0917_110556.jpg 289w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0917_110556-169x350.jpg 169w" sizes="(max-width: 289px) 100vw, 289px" /><figcaption><strong><em>रेणु सिन्हा नाटक </em></strong>&#8216;<strong><em>.</em>राइडर्स टू द सी</strong>&#8216; <strong>में</strong></figcaption></figure>



<p>यह कहते हुए मुझे अजीब तो लगता है लेकिन यह सच है कि बचपन में अक्षर &#8211; ज्ञान मिलते ही मैं हिंदी साहित्य का अध्ययन करने लगी थीं साथ ही कविताएँ, कहानियाँ लिखने की भी कोशिश करती थी । दस वर्ष की अवस्था तक पहुँचते &#8211; पहुँचते मैंने भी अमृत लाल नागर, भगवती चरण वर्मा, धर्मवीर भारती, श्रीलाल शुक्ल और आचार्य चतुर सेन जैसे तकरीबन सभी नामचीन साहित्यकारों की पुस्तकों का अध्ययन कर लिया और बाद में अंग्रेजी साहित्यकारों को भी पढ़ा। अभी के उपन्यासकारों में अंग्रेजी के अभिताव घोष मुझे बेहद पसंद हैं । पढ़ते समय कहानियों के पात्र मेरे आगे खड़े हो जाते थे, उनकी दुनिया मेरे आसपास बस जाती थी । शायद उसी समय अभिनय और थियेटर के प्रति मेरे रुझान के बीज पड़ गए, लेकिन उन सपनों को मूर्त रूप देने में परिस्थितियों की सहयोग नहीं मिल सका । अन्य महिलाओं की तरह मैंने भी घर-परिवार की जिम्मेदारियों में ही अपने वजूद को कहीं खो सा दिया था। लेकिन कहते &#8220;Its better late than never&#8221;.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="328" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0917_110746.jpg" alt="" class="wp-image-55481" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0917_110746.jpg 328w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0917_110746-191x350.jpg 191w" sizes="(max-width: 328px) 100vw, 328px" /><figcaption><strong>अभिनेत्री</strong> <strong>रेणु सिन्हा </strong></figcaption></figure>



<p>यूँ कहें कि &#8220;देर आए, दुरुस्त आएँ&#8221; तो 2017 में मेरी कविताओं का संग्रह पुस्तक रूप में &#8220;स्वयंत&#8221; नाम से प्रकाशित हुआ । इसने मुझे खुशी तो दी लेकिन पूरा संतोष नहीं मिला | जब भी नाटक था थियेटर का जिक्र होता तो लगता कि थियेटर मुझे बुला रहा है। इसीलिए एक दिन मैंने कालिदास रंगालय में एक दिन फोन किया और कहा कि मैं नाटकों से जुड़ना चाहती हूँ । तब प्रदीप गांगुली जी ने मुझे बिहार आर्ट थियेटर में कराए जाने वाले अभिनय के सर्टीफिकेट कोर्स के बारे में बताया। इसके बाद मैंने 2018 में वहाँ मेरा नामांकन हुआ । यहाँ मुझे अरुण कुमार सिन्हा, गुप्तेश्वर कुमार जैसे गुरु मिले जिनसे अभिनय की बारीकियों को सीखने का मौका मिला। मेरे साथ पढ़ने वाले कलाकारों ने भी मुझे अपने और उनके बीच के उम्र के अंतराल का एहसास नहीं होने दिया । इस कोर्स को मैंने प्रथम स्थान प्राप्त कर पूरा किया ।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="333" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0917_110538.jpg" alt="" class="wp-image-55482" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0917_110538.jpg 333w, https://www.patnanow.com/assets/2021/09/Screenshot_2021_0917_110538-194x350.jpg 194w" sizes="(max-width: 333px) 100vw, 333px" /><figcaption>&#8216;<strong>राइडर्स टू द सी&#8217; नाटक में रेणु सिन्हा </strong></figcaption></figure>



<p>मैंने 2018 में &#8220;मैकबेथ&#8221; नाटक से अपने थियेटर यात्रा की शुरुआत की. एक विद्यार्थी की हैसियत से 2019 में &#8221; पंच परमेश्वर&#8221; का नाट्य &#8211; रूपांतरण किया जिसका मंचन कालिदास रंगालय में ही किया गया। इसके बाद मैंने संस्कार, बिन बेटी सब सून, ज़िद, रोमियो जूलियट खून का रिश्ता, जान है तो, बिहाइंड द कैमरा, राइडर्स टू द सी जैसे नाटकों में अभिनय किया। साथ हीं मैं डिजिटल मीडिया में भी सक्रिय रही । कुछ सरकारी विज्ञापन फिल्मों, शॉर्ट फिल्मों और एक वेब सीरिज (अंडर प्रोडक्शन) में भी मुझे काम करने का मौका मिला। ये सच है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती । हर दिन् हमें कुछ-न-कुछ सीखने का मौका मिलता है और मेरी कोशिश रहती हैं कि मैं उस मौके को न गवाऊं ।</p>



<p>जब मैंने <em>अपने पहले नाटक &#8220;मैकबेथ &#8221; में काम किया था तो मेरे किरदार &#8220;लेडी मैकडफ&#8221; की हत्या कर दी जाती है । उस समय मेरी बड़ी बहन दर्शक दीर्घा में बैठी थीं। वह अपने आँसू नहीं रोक सकीं और रोने लगीं | यह वाकया मेरे लिए किसी एवॉर्ड से कम नहीं है । </em>क्योंकि एक अभिनेता के रूप में हमें दर्शकों से ही तो जुड़ना होता है, उनके दिल को छूना होता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
