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	<title>KALASH STHAPNA &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<item>
		<title>इस बार नवरात्र और कलश स्थापना कब और कैसे करें</title>
		<link>https://www.patnanow.com/navratri-me-kaise-aur-kub-hogi-pooja/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Sep 2024 07:17:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शारदीय नवरात्र की शुरुआत जल्द ही होने वाली है. नवरात्र में इस बार कैसे और कब होगा कलश स्थापन और मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान कैसा होगा. इन सारे सवालों के जवाब दे रहे हैं पंडित उमेश कुमार मिश्रा. सौजन्य- पंडित उमेश कुमार मिश्रा]]></description>
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<p>शारदीय नवरात्र की शुरुआत जल्द ही होने वाली है. नवरात्र में इस बार कैसे और कब होगा कलश स्थापन और मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान कैसा होगा. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ma-durga-navratra-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-23916" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ma-durga-navratra.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ma-durga-navratra-225x150.jpg 225w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ma-durga-navratra-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इन सारे सवालों के जवाब दे रहे हैं पंडित उमेश कुमार मिश्रा.</p>



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</div><figcaption class="wp-element-caption">मां का आगमन कैसा रहेगा </figcaption></figure>



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<iframe loading="lazy" title="मुर्गे पर सवार होकर जायेंगी मां l नवरात्र 2024 मे मां किस वाहन से गमन करेंगी l maa gaman 2024 l मां" width="640" height="360" src="https://www.youtube.com/embed/emw83HJ-dRo?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe>
</div><figcaption class="wp-element-caption">मां का प्रस्थान कैसा रहेगा </figcaption></figure>



<p><strong><em>सौजन्य- पंडित उमेश कुमार मिश्रा </em></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>आज से आषाढीय गुप्त नवरात्रि शुरू</title>
		<link>https://www.patnanow.com/ashadh-gupt-navratri-aaj-se/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jul 2024 05:21:50 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
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		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[साधकों और भक्तों के लिए है ज्यादा असरदार, 10 दिवसीय अनुष्ठान में 10 महाविद्याओं की भी होती है पूजा पटना,6 जुलाई(ओ पी पांडेय). आज से आषाढीय गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है. हिंदू पंचांग के अनुसार यह गुप्त नवरात्रि शनिवार (6 जुलाई, 2024) से शुरू हो रही है जो 15 जुलाई, 2024, सोमवार को समाप्त होगी. तृतीया तिथि दो दिनों की होने के कारण यह गुप्त नवरात्रि इस वर्ष 9 दिनों की जगह 10 दिनों की होगी. 10 दिनों तक चलने वाली इस नवरात्रि के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग, त्रिपुष्कर और रवि योग जैसे योग भी लग रहे हैं जिसका विशेष महत्व माना जाता है जो भक्तों को विशेष फल भी देंगे. वर्ष में चार बार मनाए जाने वाले नवरात्रि के पीछे जहाँ धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है वही इसका वैज्ञानिक महत्व भी है. आषाढ़ में गर्मी और वर्षा का ऐसा समिश्रण रहता है जो कभी विशेष गर्मी तो कभी ठंडे का एहसास दिलाता है. वर्षा की बूंदों का लुत्फ उठाते हम अधिकाशतः चटपटे, नमकीन, मसालेदार और तीखे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं जिससे हमारा पित्त का स्तर बढ़ जाता है.यह पित्त मानसिक तनाव और गुस्से को जन्म देता है जो कई बीमारियों को जन्म देता है. ऐसे में गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ, ध्यान और फलहार व नियमित संयमित भोजन शरीर में पित्त के स्तर को नियंत्रित कर हमें स्वथ्यय बनाता है. चूंकि सिर्फ चैत्र और कार्तिक नवरात्रि में अधिकाश लोग पूजा करते हैं इसलिए अन्य दो को बहुत कम लोग जानते हैं. यह थोड़ा कठिन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>साधकों और भक्तों के लिए है ज्यादा असरदार,</strong></p>



<p><strong>10 दिवसीय अनुष्ठान में 10 महाविद्याओं की भी होती है पूजा</strong></p>



<p>पटना,6 जुलाई(<strong>ओ पी पांडेय</strong>). आज से आषाढीय गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है. हिंदू पंचांग के अनुसार यह गुप्त नवरात्रि शनिवार (6 जुलाई, 2024) से शुरू हो रही है जो 15 जुलाई, 2024, सोमवार को समाप्त होगी. तृतीया तिथि दो दिनों की होने के कारण यह गुप्त नवरात्रि इस वर्ष 9 दिनों की जगह 10 दिनों की होगी. 10 दिनों तक चलने वाली इस नवरात्रि के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग, त्रिपुष्कर और रवि योग जैसे योग भी लग रहे हैं जिसका विशेष महत्व माना जाता है जो भक्तों को विशेष फल भी देंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="399" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana-650x399.jpeg" alt="" class="wp-image-23524" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana-350x215.jpeg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>वर्ष में चार बार मनाए जाने वाले नवरात्रि के पीछे जहाँ धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है वही इसका वैज्ञानिक महत्व भी है. आषाढ़ में गर्मी और वर्षा का ऐसा समिश्रण रहता है जो कभी विशेष गर्मी तो कभी ठंडे का एहसास दिलाता है. वर्षा की बूंदों का लुत्फ उठाते हम अधिकाशतः चटपटे, नमकीन, मसालेदार और तीखे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं जिससे हमारा पित्त का स्तर बढ़ जाता है.यह पित्त मानसिक तनाव और गुस्से को जन्म देता है जो कई बीमारियों को जन्म देता है. ऐसे में गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ, ध्यान और फलहार व नियमित संयमित भोजन शरीर में पित्त के स्तर को नियंत्रित कर हमें स्वथ्यय बनाता है. चूंकि सिर्फ चैत्र और कार्तिक नवरात्रि में अधिकाश लोग पूजा करते हैं इसलिए अन्य दो को बहुत कम लोग जानते हैं. यह थोड़ा कठिन है इसलिए फलदायी भी अधिक होता है इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं.</p>



<p><strong>ये हैं आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2024 तिथियां :</strong></p>



<p>6 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि प्रतिपदा तिथि, घटस्थापना मुहूर्त<br>7 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि द्वितीया तिथि<br>8 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि तृतीया तिथि<br>9 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि तृतीया तिथि<br>10 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि चतुर्थी तिथि<br>11 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पंचमी तिथि<br>12 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि षष्ठी तिथि<br>13 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि सप्तमी तिथि<br>14 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि महाष्टमी<br>15 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि महानवमी</p>



<p>कलश स्थापना मुहूर्त (Ashadh Gupt Navratri 2024 )<br>इस वर्ष पंचांग के अनुसार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 06 जुलाई को सुबह 05 बजकर 11 मिनट से लेकर 07 बजकर 26 मिनट के बीच का है. इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजे से 12 बजे तक है.</p>



<p><strong>गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि :</strong></p>



<p>गुप्त नवरात्रि की पूजा से पूर्व अहले सुबह उठकर स्नानादि करने के बाद स्वच्छ या नवीन वस्त्र धारण कर लें. इसके बाद पूजा आरंभ करें. सबसे पहले एक चौकी पर या मंदिर में लाल रंग का कपड़े बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर रखें और फिर जमीन में थोड़ी सी मिट्टी डालकर या फिर मिट्टी के बर्तन में मिट्टी डालकर जौ बोल लें. इसके बाद नवमी तिथि तक रोजाना जल अर्पित करें. इसके साथ ही एक कलश स्थापना करें. कलश के अंदर गंगाजल,जल,एक सुपारी के साथ एक सिक्का डालकर ऊपर आम के 5 पत्तों के साथ अनाज भरकर कटोरी रख दें. इसके ऊपर एक नारियल में कलावा लपेट कर रख दें.</p>



<p>कलश स्थापना के बाद कलश के साथ-साथ मां दुर्गा को फूल, माला, सिंदूर, अक्षत आदि चढ़ाने के साथ भोग लगाएं. इसके बाद एक पान के पत्ते में लौंग, इलायची, बताशा और एक रूपए का सिक्का रखकर चढ़ा दें. इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाकर मां दुर्गा चालीसा, मंत्र , सप्तशती का पाठ और फिर अंत में आरती करें.</p>



<p><strong>10 महाविद्याओं की भी होती है गुप्त नवरात्रि में पूजा</strong></p>



<p>गुप्त नवरात्रि तंत्र-मंत्र की साधना के लिए उत्तम मानी जाती है. गुप्त नवरात्रि के दौरान 10 महाविद्याओं की पूजा करने का विधान है जिसमें मां काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला माता शामिल है.</p>



<p><strong>इस मंत्र से करें मां दुर्गा ध्यान</strong>  :<br>ॐ जटा जूट समायुक्तमर्धेंन्दु कृत लक्षणाम|<br>लोचनत्रय संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम॥</p>



<p><strong>दुर्गा मंत्र</strong> :<br>सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके<br>शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥</p>



<p><strong>दुर्गा आरती</strong> :<br>जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति ।<br>तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥<br>मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को ।<br>उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥जय॥<br>कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।<br>रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥जय॥<br>केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी ।<br>सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥जय॥<br>कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती ।<br>कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥जय॥<br>शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती ।<br>धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥जय॥<br>चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू।<br>बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥जय॥<br>भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी।<br>मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥जय॥<br>कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।<br>श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥जय॥<br>श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै ।<br>कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ॥जय॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पूरे दिन है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त</title>
		<link>https://www.patnanow.com/pure-din-hai-kalash-sthapna-ka-muhurt/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Mar 2023 00:40:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[सुख समृद्धि]]></category>
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		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
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		<category><![CDATA[O P Pandey Report]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना, 22 मार्च. नवरात्र मातृशक्ति की आराधना का सबसे महत्त्पूर्ण अनुष्ठान होता है. जिसमें माँ जगदम्बे के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा की जाती है. नौ दिनों की अवधि को नवरात्र कहा जाता है और नवरात्र में भक्त जगत जननी की भक्ति में लीन रहते हैं. सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार वर्ष भर में 4 नवरात्र होते हैं. जिनमें दो उदय नवरात्र जबकि दो गुप्त नवरात्र होते हैं. उदय नवरात्र में से एक चैत्र नवरात्र के साथ नव संवत्सर की शुरुआत होती है. 22 मार्च, दिन बुधवार से मातृशक्ति की आराधना का महान पर्व चैत्र नवरात्र शुरू हो रहा है. नवरात्र के दौरान शक्ति के 9 स्वरूपों की उपासना की जाती है. प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणीतृतीयं चंद्रघंटेति कूष्मांडेति चतुर्थकम्पंचमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनीति चसप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमंनवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः यानि शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाताकात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माँ के इन नौ स्वरूपों की पूजा-आराधना होती है तो चलिए जान लेते हैं कि इस बार शारदीय नवरात्र का अनुष्ठान कैसे करें : ब्रह्मपुर के बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी उमलेश पाण्डेय बताते हैं कि नवरात्र के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करनी चाहिए. श्री संवत 2080 राजा बुध, मंत्री शुक्र है और कलश स्थापना सुबह से रात्रि तक एकम में नल नाम संवत्सर है. कलश स्थापना से पहले गणेश और गौरी की षोडशोपचार पूजा करें. फिर कलश-स्थापना कर वरुण आदि देवताओं सहित सभी तीर्थों और पवित्र नदियों का आवाहन करें. कलश के पूजन के बाद षोडशमातृका और नवग्रह पूजन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना, 22 मार्च. नवरात्र मातृशक्ति की आराधना का सबसे महत्त्पूर्ण अनुष्ठान होता है. जिसमें माँ जगदम्बे के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा की जाती है. नौ दिनों की अवधि को नवरात्र कहा जाता है और नवरात्र में भक्त जगत जननी की भक्ति में लीन रहते हैं.<br></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-buxar-maa-durga-murti.jpg" alt="" class="wp-image-23875" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-buxar-maa-durga-murti.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-buxar-maa-durga-murti-263x350.jpg 263w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p>सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार वर्ष भर में 4 नवरात्र होते हैं. जिनमें दो उदय नवरात्र जबकि दो गुप्त नवरात्र होते हैं. उदय नवरात्र में से एक चैत्र नवरात्र के साथ नव संवत्सर की शुरुआत होती है. 22 मार्च, दिन बुधवार से मातृशक्ति की आराधना का महान पर्व चैत्र नवरात्र शुरू हो रहा है. नवरात्र के दौरान शक्ति के 9 स्वरूपों की उपासना की जाती है.<br></p>



<p>प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी<br>तृतीयं चंद्रघंटेति कूष्मांडेति चतुर्थकम्<br>पंचमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनीति च<br>सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमं<br>नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः<br></p>



<p>यानि शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता<br>कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माँ के इन नौ स्वरूपों की पूजा-आराधना होती है<br></p>



<p>तो चलिए जान लेते हैं कि इस बार शारदीय नवरात्र का अनुष्ठान कैसे करें :</p>



<p>ब्रह्मपुर के बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी उमलेश पाण्डेय बताते हैं कि नवरात्र के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करनी चाहिए. श्री संवत 2080 राजा बुध, मंत्री शुक्र है और कलश स्थापना सुबह से रात्रि तक एकम में नल नाम संवत्सर है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="581" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Umlesh-Pandey-Brahmpur-Pujari.jpg" alt="" class="wp-image-72618" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Umlesh-Pandey-Brahmpur-Pujari.jpg 581w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Umlesh-Pandey-Brahmpur-Pujari-339x350.jpg 339w" sizes="(max-width: 581px) 100vw, 581px" /><figcaption>मुख्य पुजारी(बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मन्दिर, ब्रह्मपुर)</figcaption></figure>



<p></p>



<p>कलश स्थापना से पहले गणेश और गौरी की षोडशोपचार पूजा करें. फिर कलश-स्थापना कर वरुण आदि देवताओं सहित सभी तीर्थों और पवित्र नदियों का आवाहन करें. कलश के पूजन के बाद षोडशमातृका और नवग्रह पूजन करें और फिर माँ जगदम्बा की पूजा-आराधना कर नवरात्र का अनुष्ठान प्रारंभ करें.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana-650x399.jpeg" alt="" class="wp-image-23524" width="376" height="231" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana-350x215.jpeg 350w" sizes="(max-width: 376px) 100vw, 376px" /></figure>



<p><br>22 मार्च, बुधवार को विधिवत कलश-स्थापना कर नौ दिनों तक माँ की पूजा-आराधना करें और नवरात्र के अंतिम दिन हवन के बाद कन्याओं और ब्राह्मणों को भोजन कराकर अनुष्ठान का समापन करें.</p>



<p><br>इस बार 29 मार्च, दिन बुधवार को महाष्टमी है जबकि 30 मार्च को महानवमी है, उस दिन ही हवन संपन्न होगा और नवरात्र का अनुष्ठान संपन्न होगा.<br></p>



<p>नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के पाठ का विशेष महत्त्व बतलाया गया है.तो आप भी इस चैत्र नवरात्र में आस्था और श्रद्धा के साथ माँ की आराधना करें और माँ की कृपा प्राप्त करें.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title></title>
		<link>https://www.patnanow.com/aise-kare-kalash-sthapna/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Amit Verma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Sep 2017 14:16:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
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		<category><![CDATA[SHARDIYA NAVRATRA]]></category>
		<category><![CDATA[कलश स्थापना]]></category>
		<category><![CDATA[शारदीय नवरात्र]]></category>
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					<description><![CDATA[अगर आप भी मां दुर्गा की उपासना कर रहे हैं और अपने घर में कलश स्थापना कर रहे हैं तो ये लेख आपके काम का है. आइये जानते हैं 21 सितंबर से शुरू हो रहे नवरात्र में कलश स्थापन और पूजा का उचित समय और विधि. शारदीय नवरात्रि 2017 कलश स्थापना का मुहुर्त:- 21 सितम्बर 2017 गुरूवार को प्रात: 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक शुभ का चौघड़िया है इसमें घट स्थापना कर सकते हैं क्यों कि कुछ साधक प्रातः काल घट स्थापना होने तक कुछ भी खाते पीते नहीं है उनको प्रात काल के इस महुर्त में घट स्थापना कर लेनी चाहिये. कुछ साधक अभिजीत महूर्त में घट स्थापना करना चाहते हैं उनको दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 24 मिनट के बीच में घट स्थापना करनी होगी क्यों कि इस दिन 12 बजे से लेकर 1 बजकर 30 मिनट तक लाभ का चौघड़िया है जो लोग दुकानों व व्यापारिक प्रतिष्ठानों में घट स्थापना करना चाहते हैं उनके लिये भी लाभ के चौघड़िया में घट स्थापना करना उतम है। यहा स्पष्ट रहे कि अभिजित महुर्त 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक है व लाभ का चौघड़िया 12 बजे से लेकर 1 बजकर 30 मिनट तक माना गया है इसलिये 12 बजे से 12 बजकर 24 मिनट का समय ऐसा है कि उसमें लाभ का चौघड़िया एवम अभिजित मर्हुत दोनो ही है. प्रतिपदा तिथि – घटस्थापना , श्री शैलपुत्री पूजा द्वितीया तिथि – श्री ब्रह्मचारिणी पूजा तृतीय तिथि – श्री चंद्रघंटा पूजा चतुर्थी तिथि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अगर आप भी मां दुर्गा की उपासना कर रहे हैं और अपने घर में कलश स्थापना कर रहे हैं तो ये लेख आपके काम का है. आइये जानते हैं 21 सितंबर से शुरू हो रहे नवरात्र में कलश स्थापन और पूजा का उचित समय और विधि.</p>
<p><a href="https://goo.gl/PLbEfk"><strong>शारदीय नवरात्रि 2017 कलश स्थापना का मुहुर्त:-</strong></a></p>
<p><a href="https://goo.gl/PLbEfk"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-23524" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana-650x399.jpeg" alt="" width="650" height="399" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana-350x215.jpeg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></a></p>
<p>21 सितम्बर 2017 गुरूवार को प्रात: 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक शुभ का चौघड़िया है इसमें घट स्थापना कर सकते हैं क्यों कि कुछ साधक प्रातः काल घट स्थापना होने तक कुछ भी खाते पीते नहीं है उनको प्रात काल के इस महुर्त में घट स्थापना कर लेनी चाहिये.</p>
<p>कुछ साधक अभिजीत महूर्त में घट स्थापना करना चाहते हैं उनको दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 24 मिनट के बीच में घट स्थापना करनी होगी क्यों कि इस दिन 12 बजे से लेकर 1 बजकर 30 मिनट तक लाभ का चौघड़िया है जो लोग दुकानों व व्यापारिक प्रतिष्ठानों में घट स्थापना करना चाहते हैं उनके लिये भी लाभ के चौघड़िया में घट स्थापना करना उतम है।<br />
यहा स्पष्ट रहे कि अभिजित महुर्त 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक है व लाभ का चौघड़िया 12 बजे से लेकर 1 बजकर 30 मिनट तक माना गया है इसलिये 12 बजे से 12 बजकर 24 मिनट का समय ऐसा है कि उसमें लाभ का चौघड़िया एवम अभिजित मर्हुत दोनो ही है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-23486" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-navaratri-ke-nau-avatars-650x390.jpg" alt="" width="650" height="390" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-navaratri-ke-nau-avatars.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-navaratri-ke-nau-avatars-350x210.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><br />
<strong>प्रतिपदा तिथि – घटस्थापना , श्री शैलपुत्री पूजा</strong></p>
<p><strong>द्वितीया तिथि – श्री ब्रह्मचारिणी पूजा</strong></p>
<p><strong>तृतीय तिथि – श्री चंद्रघंटा पूजा</strong></p>
<p><strong>चतुर्थी तिथि – श्री कुष्मांडा पूजा</strong></p>
<p><strong>पंचमी तिथि – श्री स्कन्दमाता पूजा</strong></p>
<p><strong>षष्ठी तिथि – श्री कात्यायनि पूजा</strong></p>
<p><strong>सप्तमी तिथि – श्री कालरात्रि पूजा</strong></p>
<p><strong>अष्टमी तिथि –</strong> श्री महागौरी पूजा , महा अष्टमी पूजा , सरस्वती पूजा नवमी तिथि – चैत्र नवरात्रा – राम नवमी , शारदीय नवरात्रा – श्री सिद्धिदात्री पूजा , महानवमी पूजा , आयुध पूजानवरात्री में घट स्थापना का बहुत महत्त्व होता है। नवरात्री की शुरुआत घट स्थापना से की जाती है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित किया जाता है।</p>
<p><a href="https://goo.gl/PLbEfk">घट स्थापना</a> प्रतिपदा तिथि के पहले एक तिहाई हिस्से में कर लेनी चाहिए। इसे कलश स्थापना भी कहते है। कलश को सुख समृद्धि , ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु , गले में रूद्र , मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्री के समय ब्रह्माण्ड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-23320" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ad-big-amba-navratra-650x433.jpg" alt="" width="650" height="433" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ad-big-amba-navratra.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ad-big-amba-navratra-225x150.jpg 225w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ad-big-amba-navratra-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ad-big-amba-navratra-768x512.jpg 768w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>इससे घर की सभी विपदा दायक तरंगें नष्ट हो जाती है तथा घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।<br />
<a href="https://goo.gl/PLbEfk">घट स्थापना की सामग्री</a> –</p>
<p>— जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र। यह वेदी कहलाती है।</p>
<p>— जौ बोने के लिए शुद्ध साफ़ की हुई मिटटी जिसमे कंकर आदि ना हो।</p>
<p>— पात्र में बोने के लिए जौ ( गेहूं भी ले सकते है )</p>
<p>— घट स्थापना के लिए मिट्टी का कलश ( सोने, चांदी या तांबे का कलश भी ले सकते है )</p>
<p>— कलश में भरने के लिए शुद्ध जल</p>
<p>— गंगाजल</p>
<p>— रोली , मौली</p>
<p>— इत्र</p>
<p>— पूजा में काम आने वाली साबुत सुपारी</p>
<p>— दूर्वा</p>
<p>— कलश में रखने के लिए सिक्का ( किसी भी प्रकार का कुछ लोग चांदी या सोने का सिक्का भी रखते है )</p>
<p>— पंचरत्न ( हीरा , नीलम , पन्ना , माणक और मोती )</p>
<p>— पीपल , बरगद , जामुन , अशोक और आम के पत्ते ( सभी ना मिल पायें तो कोई भी दो प्रकार के पत्ते ले सकते है )</p>
<p>— कलश ढकने के लिए ढक्कन ( मिट्टी का या तांबे का )</p>
<p>— ढक्कन में रखने के लिए साबुत चावल</p>
<p>— नारियल</p>
<p>— लाल कपडा</p>
<p>— फूल माला</p>
<p>— फल तथा मिठाई</p>
<p>— दीपक , धूप , अगरबत्ती</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23485" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ma-durga.jpg" alt="" width="647" height="404" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ma-durga.jpg 647w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-ma-durga-350x219.jpg 350w" sizes="(max-width: 647px) 100vw, 647px" /></p>
<p><strong><a href="https://goo.gl/PLbEfk">घट स्थापना की विधि </a>–.</strong><br />
सबसे पहले जौ बोने के लिए एक ऐसा पात्र लें जिसमे कलश रखने के बाद भी आस पास जगह रहे। यह पात्र मिट्टी की थाली जैसा कुछ हो तो श्रेष्ठ होता है। इस पात्र में जौ उगाने के लिए मिट्टी की एक परत बिछा दें। मिट्टी शुद्ध होनी चाहिए । पात्र के बीच में कलश रखने की जगह छोड़कर बीज डाल दें। फिर एक परत मिटटी की बिछा दें। एक बार फिर जौ डालें। फिर से मिट्टी की परत बिछाएं। अब इस पर जल का छिड़काव करें.<br />
कलश तैयार करें, कलश पर स्वस्तिक बनायें, कलश के गले में मौली बांधें. अब कलश को थोड़े गंगा जल और शुद्ध जल से पूरा भर दें.</p>
<p>कलश में साबुत सुपारी , फूल और दूर्वा डालें। कलश में इत्र , पंचरत्न तथा सिक्का डालें। अब कलश में पांचों प्रकार के पत्ते डालें। कुछ पत्ते थोड़े बाहर दिखाई दें इस प्रकार लगाएँ। चारों तरफ पत्ते लगाकर ढ़क्कन लगा दें। इस ढ़क्कन में अक्षत यानि साबुत चावल भर दें.<br />
नारियल तैयार करें. नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर मौली बांध दें। इस नारियल को कलश पर रखें। नारियल का मुँह आपकी तरफ होना चाहिए। यदि नारियल का मुँह ऊपर की तरफ हो तो उसे रोग बढ़ाने वाला माना जाता है। नीचे की तरफ हो तो शत्रु बढ़ाने वाला मानते है , पूर्व की और हो तो धन को नष्ट करने वाला मानते है। नारियल का मुंह वह होता है जहाँ से वह पेड़ से जुड़ा होता है.</p>
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<p>अब यह कलश जौ उगाने के लिए तैयार किये गये पात्र के बीच में रख दें। अब देवी देवताओं का आह्वान करते हुए प्रार्थना करें कि</p>
<p>” हे समस्त देवी देवता आप सभी नौ दिन के लिए कृपया कलश में विराजमान हों “।<br />
आह्वान करने के बाद ये मानते हुए कि सभी देवता गण कलश में विराजमान है। कलश की पूजा करें। कलश को टीका करें , अक्षत चढ़ाएं , फूल माला अर्पित करें , इत्र अर्पित करें , नैवेद्य यानि फल मिठाई आदि अर्पित करें।<br />
घट स्थापना या कलश स्थापना के बाद देवी माँ की चौकी स्थापित करें।</p>
<p><strong><a href="https://goo.gl/PLbEfk">देवी माँ की चौकी की स्थापना और पूजा विधि </a>–</strong></p>
<p>लकड़ी की एक चौकी को गंगाजल और शुद्ध जल से धोकर पवित्र करें। साफ कपड़े से पोंछ कर उस पर लाल कपड़ा बिछा दें।</p>
<p>इसे कलश के दायी तरफ रखें.  चौकी पर माँ दुर्गा की मूर्ति अथवा फ्रेम युक्त फोटो रखें. माँ को चुनरी ओढ़ाएँ. धूप , दीपक आदि जलाएँ. नौ दिन तक जलने वाली माता की अखंड ज्योत जलाएँ. देवी मां को तिलक लगाएं. माँ दुर्गा को वस्त्र, चंदन, सुहाग के सामान यानि हलदी, कुमकुम, सिंदूर, अष्टगंध आदि अर्पित करें काजल लगाएँ . मंगलसूत्र, हरी चूडियां , फूल माला , इत्र , फल , मिठाई आदि अर्पित करें. श्रद्धानुसार दुर्गा सप्तशती के पाठ , देवी माँ के स्रोत , सहस्रनाम आदि का पाठ करें. देवी माँ की आरती करें. पूजन के उपरांत वेदी पर बोए अनाज पर जल छिड़कें.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-22136" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-AIM-CIVIL-SERVICE-RAHMAN-SIR-MUNNA-SIR-AD-2-650x280.jpg" alt="" width="650" height="280" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-AIM-CIVIL-SERVICE-RAHMAN-SIR-MUNNA-SIR-AD-2.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-AIM-CIVIL-SERVICE-RAHMAN-SIR-MUNNA-SIR-AD-2-350x151.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>रोजाना देवी माँ का पूजन करें तथा जौ वाले पात्र में जल का हल्का छिड़काव करें। जल बहुत अधिक या कम ना छिड़के । जल इतना हो कि जौ अंकुरित हो सके। ये अंकुरित जौ शुभ माने जाते है। । यदि इनमे से किसी अंकुर का रंग सफ़ेद हो तो उसे बहुत अच्छा माना जाता है. यह दुर्लभ होता है.</p>
<p><strong><a href="https://goo.gl/PLbEfk">नवरात्री के व्रत उपवास</a> –</strong></p>
<p>नवरात्री में लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी माँ की भक्ति करते है। कुछ लोग पलंग के ऊपर नहीं सोते। कुछ लोग शेव नहीं करते , कुछ नाखुन नहीं काटते। इस समय नौ दिन तक व्रत , उपवास रखने का बहुत महत्त्व है। अपनी श्रद्धानुसार एक समय भोजन और एक समय फलाहार करके या दोनों समय फलाहार करके उपवास किया जाता है। इससे सिर्फ आध्यात्मिक बल ही प्राप्त नहीं होता , पाचन तंत्र भी मजबूत होता है तथा मेटाबोलिज्म में जबरदस्त सुधार आता है।</p>
<p>व्रत के समय अंडा , मांस , शराब , प्याज , लहसुन , मसूर दाल , हींग , राई , मेथी दाना आदि वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा सादा नमक के बजाय सेंधा नमक काम में लाना चाहिए. !!</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>NKD वर्मा</strong></p>
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