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	<title>jivika patna &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>jivika patna &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>पीएम द्वारा चुनी हुई नवाचारों में शामिल हुई जीविका दीदी की रसोई</title>
		<link>https://www.patnanow.com/jeevika-didis-kitchen-included-in-the-innovations-selected-by-the-pm/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 May 2023 01:30:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[Ravindra bharti]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार के 38 जिलो में स्थापित 97 डीकेआर संचालित 40.15 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हर दिन लगभग 15000 भर्ती मरीजों, उनके परिचारकों, छात्रों, कर्मचारियों और आगंतुकों को स्वच्छता पूर्वक खाद्य प्रदान करते हैं- राहुल कुमार ,सीएईओ जीविका दीदी की रसोई (डीकेआर), एक अनूठी पहल है जो राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, बैंक, आवासीय विद्यालय एवं अन्य सरकारी कार्यालयों में उच्च गुणवत्ता और स्वच्छ भोजन प्रदान करती है. इस पहल को सिविल सेवा दिवस 2023 के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा जारी चयनित नवाचारों में शामिल किया गया.  डीकेआर मॉडल एक अद्वितीय उपक्रम का प्रतिनिधित्व करता है जिसने बिहार में महिलाओं को सशक्त बनाते हुए सरकारी अस्पतालों में इनडोर रोगियों एवं SC/ST आवासीय विद्यालयों में छात्रों को स्वच्छ भोजन प्रदान करने के लिए वितरण तंत्र को उल्लेखनीय रूप से बदल दिया है. डीकेआर मॉडल मानकीकृत और एक समान रूप से खाना पकाने और बर्तन परोसने, खरीद और लेखा प्रक्रियाओं, प्रशिक्षित कर्मचारियों और डिजिटल भुगतान विकल्पों के साथ प्रबंधित कैंटीन की श्रृंखला स्थापित करने पर जोर देता है. कार्यक्रम ने न केवल एक मजबूत उद्यमशीलता मंच स्थापित किया है, बल्कि बिहार के गरीब क्षेत्रों की ग्रामीण महिलाओं को आवश्यक कौशल और ज्ञान के साथ खाद्य सेवा उद्यम को पेशेवर रूप से चलाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान किया है, जो मानकीकृत प्रणालियों और सेवाओं के साथ पूर्ण है. डीकेआर कार्यक्रम में तेजी लाने के लिए, एक डिजिटल रूप से सक्षम भुगतान प्रणाली स्थापित की गई है, जो तेजी से सेवा वितरण सुनिश्चित करने और बिक्री प्राप्ति की निगरानी के लिए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बिहार के 38 जिलो में स्थापित 97 डीकेआर संचालित</strong></p>



<p><strong>40.15 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार</strong></p>



<p class="has-vivid-purple-color has-text-color"><strong>हर दिन लगभग 15000 भर्ती मरीजों, उनके परिचारकों, छात्रों, कर्मचारियों और आगंतुकों को स्वच्छता पूर्वक खाद्य प्रदान करते हैं- राहुल कुमार</strong> ,सीएईओ </p>



<p>जीविका दीदी की रसोई (डीकेआर), एक अनूठी पहल है जो राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, बैंक, आवासीय विद्यालय एवं अन्य सरकारी कार्यालयों में उच्च गुणवत्ता और स्वच्छ भोजन प्रदान करती है. इस पहल को सिविल सेवा दिवस 2023 के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा जारी चयनित नवाचारों में शामिल किया गया.  डीकेआर मॉडल एक अद्वितीय उपक्रम का प्रतिनिधित्व करता है जिसने बिहार में महिलाओं को सशक्त बनाते हुए सरकारी अस्पतालों में इनडोर रोगियों एवं SC/ST आवासीय विद्यालयों में छात्रों को स्वच्छ भोजन प्रदान करने के लिए वितरण तंत्र को उल्लेखनीय रूप से बदल दिया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/4620242b-1fca-4b67-9cb2-01f4a12ba7dd.jpg" alt="" class="wp-image-74431" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/4620242b-1fca-4b67-9cb2-01f4a12ba7dd.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/4620242b-1fca-4b67-9cb2-01f4a12ba7dd-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>डीकेआर मॉडल मानकीकृत और एक समान रूप से खाना पकाने और बर्तन परोसने, खरीद और लेखा प्रक्रियाओं, प्रशिक्षित कर्मचारियों और डिजिटल भुगतान विकल्पों के साथ प्रबंधित कैंटीन की श्रृंखला स्थापित करने पर जोर देता है. कार्यक्रम ने न केवल एक मजबूत उद्यमशीलता मंच स्थापित किया है, बल्कि बिहार के गरीब क्षेत्रों की ग्रामीण महिलाओं को आवश्यक कौशल और ज्ञान के साथ खाद्य सेवा उद्यम को पेशेवर रूप से चलाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान किया है, जो मानकीकृत प्रणालियों और सेवाओं के साथ पूर्ण है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="514" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/91af052b-7a1b-4566-8399-571dc26ec643.jpg" alt="" class="wp-image-74432" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/91af052b-7a1b-4566-8399-571dc26ec643.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/91af052b-7a1b-4566-8399-571dc26ec643-350x277.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>डीकेआर कार्यक्रम में तेजी लाने के लिए, एक डिजिटल रूप से सक्षम भुगतान प्रणाली स्थापित की गई है, जो तेजी से सेवा वितरण सुनिश्चित करने और बिक्री प्राप्ति की निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत प्रक्रिया प्रबंधन प्रणाली को लागू कर रही है. जीविका ने एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को सावधानीपूर्वक विकसित और औपचारिक रूप दिया है जो डीकेआर की स्थापना और प्रबंधन के लिए व्यापक रूप से प्रक्रिया को चित्रित करता है. दस्तावेज़ सावधानीपूर्वक खाद्य सेवा, सफाई, मानव संसाधन योजना, आईएसओ प्रमाणन और गवर्नेंस से संबंधित प्रक्रियाओं को स्पष्ट करता है.</p>



<p>अप्रैल 2023 तक, कुल 97 डीकेआर, बिहार के 38 जिलो में स्थापित है जिनमे राज्य के विभिन्न अस्पताल, आवासीय विद्यालय, सार्वजनिक कार्यालय, आरबीआई, एसबीआई, एवं निबंधन कार्यालय शामिल है. ये डीकेआर हर दिन लगभग 15000 भर्ती मरीजों, उनके परिचारकों, छात्रों, कर्मचारियों और आगंतुकों को स्वस्वच्छता पूर्वक खाद्य प्रदान करते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/d4ef3da1-3167-4442-baf8-b6f896f072e6.jpg" alt="" class="wp-image-74433" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/d4ef3da1-3167-4442-baf8-b6f896f072e6.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/d4ef3da1-3167-4442-baf8-b6f896f072e6-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>डीकेआर कार्यक्रम ने 1200 से अधिक ग्रामीण महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया है, उन्हें अपनी आय में सुधार करने, आत्मविश्वास हासिल करने, पेशेवर कौशल हासिल करने और रोल मॉडल बनने का अवसर प्रदान किया है. डीकेआर नेटवर्क ने ग्रामीण महिला उद्यमियों का सफलतापूर्वक समर्थन किया है, प्रत्येक व्यक्ति को 1.20 लाख रुपये की वार्षिक आय में औसत वृद्धि का अनुभव हुआ है और 40.15 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार का प्रबंधन किया गया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/e409a739-8837-475d-bfc1-7f18fb0169e1.jpg" alt="" class="wp-image-74435" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/e409a739-8837-475d-bfc1-7f18fb0169e1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/e409a739-8837-475d-bfc1-7f18fb0169e1-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जीविका दीदी की रसोई मॉडल की सफलता समाज में समावेशिता और समानता को बढ़ावा देने में उद्यमिता की परिवर्तनकारी शक्ति का एक मिसाल है. इस कार्यक्रम ने न केवल उन लोगों को स्वच्छ भोजन प्रदान किया है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है बल्कि ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए एक मंच भी तैयार किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="373" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/e9916d61-ebd7-45b6-93e6-06f714a52e81.jpg" alt="" class="wp-image-74434" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/e9916d61-ebd7-45b6-93e6-06f714a52e81.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/e9916d61-ebd7-45b6-93e6-06f714a52e81-350x201.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जीविका दीदी की रसोई न केवल बिहार में महिलाओं को सशक्त बना रही है, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी इसे दोहराया जा रहा है, जो इसे देश भर के सार्वजनिक अस्पतालों और आवासीय विद्यालयों में इनडोर रोगियों और छात्रों को स्वच्छ भोजन प्रदान करने के लिए वितरण तंत्र को बदलने के लिए एक मॉडल बना रहा है.</p>
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		<item>
		<title>ये हैं बिहार की कुशल उद्यमी महिलाएं</title>
		<link>https://www.patnanow.com/these-are-the-business-women/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Mar 2023 03:10:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[बाढ़ अपडेट]]></category>
		<category><![CDATA[Jivika CEO]]></category>
		<category><![CDATA[Jivika CEO Rahul Kumar]]></category>
		<category><![CDATA[jivika patna]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[महिला सशक्तिकरण एवम स्वावलंबनसे जीविका दीदियां गढ़ रही हैं इतिहास कुशल उद्यमी के रूप में जीविका दीदियां गांधी मैदान में पटना,24 मार्च. स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलायें स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण की ओर अग्रसर हैं. इसकी बानगी बिहार दिवस के अवसर पर मुख्य कार्य्रकम स्थल गाँधी मैदान में एस जीविका पवेलियन में ग्रामीण महिलाएं एक कुशल उद्धमी के रूप में ग्रामीण, शिल्प, हुनर, कला एवं व्यंजन के साथ उपस्थित दिखीं. जीविका पवेलियन में विभिन्न विधाओं के अंतर्गत संस्था निर्माण एवम क्षमतावर्धन, वित्तीय समावेशन, दिव्यांगता समावेशन, समामाजिक विकास, जे. वायर्स,सतत जीविकोपार्जन योजना, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, कृषि, नीरा, जीविका स्किल्स, मधुग्राम महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, शिल्पग्राम महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, शिल्प उत्पादक समूह, पशुधन, कौशिकी महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, स्वास्थ्य-पोषण एवम स्वच्छता, जल-जीवन- हरियाली के स्टॉल लगे हुए थे. इन स्टॉल्स पर जीविका दीदियों द्वारा निर्मित उत्पाद प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए भी उपलब्ध थी. साथ ही वैसे युवक &#8211; युवतियां भी रोजगार स्टॉल पर अपने अनुभव साझा कर रहे थे जिन्होंने जीविका के माध्यम से नौकरी पाकर अपने सपनो को साकार किया है. इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य-पोषण एवम स्वच्छता के स्टॉल पर जीविका दीदियों द्वारा निर्मित पौध आधारित मायरा सैनेट्री पैड भी उपलब्ध है. यह पैड पर्यावरण के अनुकूल है जो स्वत: मिट्टी में मिलकर नष्ट हो जाता है. इसके साथ ही जीविका स्वास्थ्य सहायता केंद्र (हेल्प डेस्क) पर आगंतुक अपने स्वास्थ्य की भी जांच निः शुल्क करा रहे थे. वही व्यंजन मेला परिसर में जीविका दीदियों द्वारा संचालित जीविका दीदी की रसोई के छह स्टॉल पर देशी एवम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>महिला सशक्तिकरण एवम स्वावलंबन<br>से जीविका दीदियां गढ़ रही हैं इतिहास</strong></p>



<p><strong>कुशल उद्यमी के रूप में जीविका दीदियां गांधी मैदान में</strong></p>



<p>पटना,24 मार्च. स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलायें स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण की ओर अग्रसर हैं. इसकी बानगी बिहार दिवस के अवसर पर मुख्य कार्य्रकम स्थल गाँधी मैदान में एस जीविका पवेलियन में ग्रामीण महिलाएं एक कुशल उद्धमी के रूप में ग्रामीण, शिल्प, हुनर, कला एवं व्यंजन के साथ उपस्थित दिखीं.</p>



<p>जीविका पवेलियन में विभिन्न विधाओं के अंतर्गत संस्था निर्माण एवम क्षमतावर्धन, वित्तीय समावेशन, दिव्यांगता समावेशन, समामाजिक विकास, जे. वायर्स,सतत जीविकोपार्जन योजना, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, कृषि, नीरा, जीविका स्किल्स, मधुग्राम महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, शिल्पग्राम महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, शिल्प उत्पादक समूह, पशुधन, कौशिकी महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, स्वास्थ्य-पोषण एवम स्वच्छता, जल-जीवन- हरियाली के स्टॉल लगे हुए थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="338" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-1.jpg" alt="" class="wp-image-72682" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-1-350x182.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इन स्टॉल्स पर जीविका दीदियों द्वारा निर्मित उत्पाद प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए भी उपलब्ध थी. साथ ही वैसे युवक &#8211; युवतियां भी रोजगार स्टॉल पर अपने अनुभव साझा कर रहे थे जिन्होंने जीविका के माध्यम से नौकरी पाकर अपने सपनो को साकार किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas.jpg" alt="" class="wp-image-72683" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य-पोषण एवम स्वच्छता के स्टॉल पर जीविका दीदियों द्वारा निर्मित पौध आधारित मायरा सैनेट्री पैड भी उपलब्ध है. यह पैड पर्यावरण के अनुकूल है जो स्वत: मिट्टी में मिलकर नष्ट हो जाता है. इसके साथ ही जीविका स्वास्थ्य सहायता केंद्र (हेल्प डेस्क) पर आगंतुक अपने स्वास्थ्य की भी जांच निः शुल्क करा रहे थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-3.jpg" alt="" class="wp-image-72684" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-3.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-3-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>वही व्यंजन मेला परिसर में जीविका दीदियों द्वारा संचालित जीविका दीदी की रसोई के छह स्टॉल पर देशी एवम पौष्टिक व्यंजनों का स्वाद आगंतुक चख रहे हैं. बिहार दिवस के शुभारंभ के अवसर पर जीविका पवेलियन के मुख्य मंच से विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली जीविका दीदियों, रोजगार प्राप्त युवक-युवतियों एवम जीविकेस संबद्ध संगठनों को प्रशस्ति पत्र देकर जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी,राहुल कुमार, राम निरंजन सिंह, निदेशक, जीविका, राजेश कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी, जीविका एवम महुआ रॉय चौधरी ने सम्मानित किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-2.jpg" alt="" class="wp-image-72685" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-2.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-2-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>तत्पश्चात स्वरांगन के कलाकारों द्वारा लोक गीत एवम नया सवेरा लघु नाटक की प्रस्तुति की गई. नाटक नया सवेरा में जीविका द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे गतिविधियों को दर्शाया गया. संध्या काल में जीविका स्किल्स के अभ्यर्थियों द्वारा शराबबंदी समेत विभिन्न सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से लागू नाटक प्रस्तुत किया गया. इस नाटक को देखने के लिए दर्शक भी भारी संख्या में मौजूद थी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="344" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-4.jpg" alt="" class="wp-image-72686" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-4.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Jivika-bihar-divas-4-350x185.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जीविका पवेलियन और जीविका दीदियों द्वारा बनाए गए उत्पादों के अवलोकन के लिए श्रीमती कृष्णा बरुआ, राज्य मिशन निदेशक, आसाम का विशेष तौर पर बिहार आगमन हुआ था जिन्होंने जीविका पवेलियन में जीविका दीदियों से मुलाकात किया.</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अगर आप सरस मेला नहीं गए तो खो देंगे बढ़िया मौका</title>
		<link>https://www.patnanow.com/if-you-dont-go-to-saras-mela-you-will-miss-a-great-opportunity/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Sep 2022 04:16:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[jivika patna]]></category>
		<category><![CDATA[sars mela 2022 patna]]></category>
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					<description><![CDATA[दीदी की रसोई के स्वाद लेने को आतुर दिखे लोग तसर सिल्क की साड़ी और मधुबनी पेंटिंग से उकेरे गए उत्पादों की बिक्री महिला उद्यमियों की लगन और मेहनत दिख रही है सरस मेला में सरस मेला अब पुरे परवान पर है. मेला का समापन 11 सितम्बर को होना है, लिहाजा लोग जरूरत के अनुसार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा उत्पादित अचार, पापड़, सत्तू, लीची–आम जूस, कतरनी और सोनाचुर चावल, गुड़ई मिठाई, सीप से बने श्रृंगार के सामान, कालीन-पायदान, परिधान एवं हैंडी क्राफ्ट की खरीदारी कर रहे हैं. साथ ही प्राकृतिक वस्तुओं से निर्मित कलाकृतियाँ भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं. यानी सबकुछ एक ही छत के नीचे लोगों को मिल रही है. लिहाजा आगंतुक खरीदारी का मौका गवाना नहीं चाहते हैं. बिहार समेत 17 राज्यों से आई ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा बनाये गए ग्रामीण शिल्प और उत्पाद को हर उम्र के आगंतुक अपने जरुरत के हिसाब से खरीद रहे हैं . सरस मेला में आई ग्रामीण महिला उद्यमी महिला सशक्तिकरण की एक बानगी है .मेला के पांचवे दिन मंगलवार को भी आगंतुक आये और अपने मनपसंद उत्पादों की खरीददारी की और स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ उठाया. जीविका द्वारा सरस मेला पटना के ज्ञान भवन में ग्रामीण शिल्प और उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के उदेश्य से 2सितम्बर से 11 सितंबर तक आयोजित है . बिहार समेत 17 राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पाद और कलाकृतियों की खरीद- बिक्री सह प्रदर्शनी 135 स्टॉल से हो रही है. सरस मेला में बिहार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>दीदी की रसोई के स्वाद लेने को आतुर दिखे लोग</strong></p>



<p><strong>तसर सिल्क की साड़ी और मधुबनी पेंटिंग से उकेरे गए उत्पादों की बिक्री</strong></p>



<p><strong>महिला उद्यमियों की लगन और मेहनत दिख रही है सरस मेला में</strong></p>



<p>सरस मेला अब पुरे परवान पर है. मेला का समापन 11 सितम्बर को होना है, लिहाजा लोग जरूरत के अनुसार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा उत्पादित अचार, पापड़, सत्तू, लीची–आम जूस, कतरनी और सोनाचुर चावल, गुड़ई मिठाई, सीप से बने श्रृंगार के सामान, कालीन-पायदान, परिधान एवं हैंडी क्राफ्ट की खरीदारी कर रहे हैं. साथ ही प्राकृतिक वस्तुओं से निर्मित कलाकृतियाँ भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं. यानी सबकुछ एक ही छत के नीचे लोगों को मिल रही है. लिहाजा आगंतुक खरीदारी का मौका गवाना नहीं चाहते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Croud-4.jpg" alt="" class="wp-image-66234" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Croud-4.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Croud-4-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार समेत 17 राज्यों से आई ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा बनाये गए ग्रामीण शिल्प और उत्पाद को हर उम्र के आगंतुक अपने जरुरत के हिसाब से खरीद रहे हैं . सरस मेला में आई ग्रामीण महिला उद्यमी महिला सशक्तिकरण की एक बानगी है .मेला के पांचवे दिन मंगलवार को भी आगंतुक आये और अपने मनपसंद उत्पादों की खरीददारी की और स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ उठाया. जीविका द्वारा सरस मेला पटना के ज्ञान भवन में ग्रामीण शिल्प और उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के उदेश्य से 2सितम्बर से 11 सितंबर तक आयोजित है .</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Saras-1.jpg" alt="" class="wp-image-66235" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Saras-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Saras-1-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> बिहार समेत 17 राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पाद और कलाकृतियों की खरीद- बिक्री सह प्रदर्शनी 135 स्टॉल से हो रही है. सरस मेला में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा, गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, आसाम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान,सिक्किम एवं पच्छिम बंगाल से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण शिल्प कार अपने यहाँ की शिल्प , संस्कृति, परंपरा एवं व्यंजन को लेकर उपस्थित हैं. 2 सितंबर से जारी सरस मेला में चार दिन में लगभग 84 लाख रूपये के उत्पादों और देशी खाद्य- व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है . मेला के आयोजन के चौथे दिन सोमवार को बड़ी संख्या में लोग आये और खरीददारी की . सोमवार को लगभग 23 हजार लोग आये और लगभग 18 लाख रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद बिक्री हुई . उत्तर प्रदेश से आई उवेश स्वयं सहायता समूह के स्टॉल से सर्वाधिक 60 हजार रुपये के खादी के खरीद बिक्री हुई . जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई से लगभग 35 हजार रुपये के व्यंजनों का स्वाद लोगों ने चखा . खरीद-बिक्री का आंकड़ा मेला में आये ग्रामीण उधमियों से लिए गए बिक्री रिपोर्ट पर आधारित होती है .</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/saras-3-1.jpg" alt="" class="wp-image-66236" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/saras-3-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/saras-3-1-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>स्वच्छता एवं बेहतर साज-सज्जा एवं बेहतर बिक्री को बढ़ावा देने के उदेश्य से जीविका द्वारा प्रतिदिन स्टॉल धारकों को सम्मानित भी किया जा रहा है . सोमवार को स्वच्छता के लिए अफरोज जहाँ, महावीर जीविका महिला स्वयं सहायता समूह , बिहार , साज-सज्जा के लिए उर्मिला देवी, चमेली जीविका स्वयं सहायता समूह, बिहार एवं सबसे ज्यादा उत्पाद की बिक्री के लिए उत्तर प्रदेश की उवेश स्वयं सहायता समूह के स्टॉल को सम्मानित किया गया .</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="403" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Narmada-Devi.jpg" alt="" class="wp-image-66237" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Narmada-Devi.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Narmada-Devi-350x217.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>नर्मदा देवी अपने स्टाल पर </strong></figcaption></figure>



<p>सरस मेला में आई महिला उद्यमियों में से एक नर्मदा देवी बिहार राज्य की महिला शख्सियतों में से एक हैं . वर्ष 2008 में जीविका से जुड़कर उन्होंने मधुबनी पेंटिंग को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है . मधुबनी के रांटी गाँव की रहनेवाली नर्मदा देवी ने वर्ष 2009 में शिल्प संघ उत्पादक समूह की स्थापना की. मधुबनी पेंटिंग को बड़ा आकार एवं बाज़ार देने के उद्देश्य से इन्होने सैकड़ो ग्रामीण महिलाओं को अपने साथ जोड़ा. कारवां बढ़ता गया. बर्ष 2018 शिल्प ग्राम महिला उत्पादक कंपनी लिमिटेड की स्थापना की. कंपनी का मुख्यालय दरभंगा, बिहार में है. पुरे राज्य से ग्रामीण महिला शिल्पकारों के उत्पाद को विभिन्न माध्यमों से बिक्री की जाने लगी. चार साल से भी कम समय में शिल्प ग्राम में 450 शेयर होल्डर हैं. एक हजार से ज्यादा शिल्पकार जुड़ी हुई हैं. महज चार साल में कंपनी ने लगभग नौ करोड़ रुपये का व्यवसाय किया है. नर्मदा देवी कंपनी की निदेशक हैं. एक ग्रामीण महिला होने के नाते यह उनकी बड़ी उपलब्धि है. नर्मदा देवी अब राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में बतौर अतिथि शिरकत करती हैं और महिलों को सफल उद्यमी बनने के गुर बताती हैं. शिल्प ग्राम महिला उत्पादक कंपनी लिमिटेड से जुड़ी महिलाएं आर्थिक एवं सामाजिक तौर पर सशक्त हुई हैं. सरस मेला में आई नर्मदा देवी और उनके शिल्प ग्राम महिला उत्पादक कंपनी लिमिटेड का स्टॉल और उस पर सजे उत्पाद आगंतुकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इस स्टॉल से डेढ़ सौ रुपये से लेकर 18 हजार की तसर सिल्क की साड़ी और मधुबनी पेंटिंग से उकेरे गए उत्पादों की बिक्री खूब हो रही है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>जीविका की ओर से आयोजित सरस मेले में हस्तशिल्प की पटना में धूम</title>
		<link>https://www.patnanow.com/handicrafts-flourished-in-patna-in-saras-fair-organized-by-jeevika/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Sep 2022 06:25:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[महिला सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन की दिशा में हुई अभूतपूर्व प्रगति कलाकृतियों की खरीद-बिक्री सह प्रदर्शनी 135 स्टॉल लगाये गए ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के बीच आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आये आये बदलाव की लहर इन दिनों सरस मेला में भी देखने को मिल रहा है. कल तक जो महिलाएं घर की चाहरदीवारी में कैद थीं,उन्होंने कुशल उधमी के रूप में अपनी पहचान बना ली है. कुछ वर्ष पहले तक वो किसी के यहाँ मजदूरी करती थी, आज कई लोगों को रोजगार दे रखा है. सरस मेला में बिहार समेत देश के कोने-कोने से आई महिला उधमियों के स्टॉल्स इसकी बानगी पेश कर रहे हैं. मेले में आई ग्रामीण महिला उधमियों को देखकर यही लगता है कि महिला सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन की दिशा में हुई अभूतपूर्व प्रगति हुई है. आरा से आई रीता अपने पति की मौत के बाद टूट गई थी. अत्यधिक शराब के सेवन से इनके पति की मौत हो गई थी. सात वर्ष पूर्व रीता तारा जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुडी. समूह उनके लिए संबल बना. आज वो न सिर्फ क्रोशिया आर्ट को बढ़ावा दे रही हैं बल्कि इसके माध्यम से दो दर्जन से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दे रखा है. इनके द्वारा क्रोशिया आर्ट के तहत उत्पादित श्रृंगार के सामानों की सिर्फ देश ही नहीं विदेशों में भी मांग है. इसके अलावा कृत्रिम आभूषण एवं आर्टिफिशियल ज्वेलरी का भी उनका व्यवसाय अब बड़ा आकार ले चूका है. रीता बताती हैं कि सरस मेला एक बड़ा बाज़ार है जहाँ वो अपने द्वारा निर्मित उत्पादों को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>महिला सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन की दिशा में हुई अभूतपूर्व प्रगति</strong></p>



<p><strong>कलाकृतियों की खरीद-बिक्री सह प्रदर्शनी 135 स्टॉल लगाये गए</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="326" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Cerificate-Saras.jpg" alt="" class="wp-image-66174" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Cerificate-Saras.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Cerificate-Saras-350x176.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के बीच आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आये आये बदलाव की लहर इन दिनों सरस मेला में भी देखने को मिल रहा है. कल तक जो महिलाएं घर की चाहरदीवारी में कैद थीं,उन्होंने कुशल उधमी के रूप में अपनी पहचान बना ली है. कुछ वर्ष पहले तक वो किसी के यहाँ मजदूरी करती थी, आज कई लोगों को रोजगार दे रखा है. </p>



<p></p>



<p>सरस मेला में बिहार समेत देश के कोने-कोने से आई महिला उधमियों के स्टॉल्स इसकी बानगी पेश कर रहे हैं. मेले में आई ग्रामीण महिला उधमियों को देखकर यही लगता है कि महिला सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन की दिशा में हुई अभूतपूर्व प्रगति हुई है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Rita-Saras.jpg" alt="" class="wp-image-66179" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Rita-Saras.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Rita-Saras-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आरा से आई रीता अपने पति की मौत के बाद टूट गई थी. अत्यधिक शराब के सेवन से इनके पति की मौत हो गई थी. सात वर्ष पूर्व रीता तारा जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुडी. समूह उनके लिए संबल बना. आज वो न सिर्फ क्रोशिया आर्ट को बढ़ावा दे रही हैं बल्कि इसके माध्यम से दो दर्जन से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दे रखा है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="348" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Star-Saras.jpg" alt="" class="wp-image-66175" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Star-Saras.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Star-Saras-350x187.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इनके द्वारा क्रोशिया आर्ट के तहत उत्पादित श्रृंगार के सामानों की सिर्फ देश ही नहीं विदेशों में भी मांग है. इसके अलावा कृत्रिम आभूषण एवं आर्टिफिशियल ज्वेलरी का भी उनका व्यवसाय अब बड़ा आकार ले चूका है. रीता बताती हैं कि सरस मेला एक बड़ा बाज़ार है जहाँ वो अपने द्वारा निर्मित उत्पादों को लेकर आती हैं. रीता सिर्फ एक ही उदहारण नहीं है बल्कि इनकी तरह की कई महिलाएं महिला सशक्तिकरण की एक झलक है. जो सरस मेला में मौजूद हैं. मेला के चौथे दिन सोमवार को भी आगंतुक आये और अपने मनपसंद उत्पादों की खरीददारी की और स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ उठाया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Terakota-Saras.jpg" alt="" class="wp-image-66176" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Terakota-Saras.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Terakota-Saras-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>जीविका द्वारा सरस मेला पटना के ज्ञान भवन में ग्रामीण शिल्प और उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के उदेश्य से 2 सितम्बर से 11 सितंबर तक आयोजित है. बिहार समेत 17 राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पाद और कलाकृतियों की खरीद- बिक्री सह प्रदर्शनी 135 स्टॉल से हो रही है . सरस मेला में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा, गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, आसाम, मध्य प्रदेश, महारष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान,सिक्किम एवं पच्छिम बंगाल से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण शिल्प कार अपने यहाँ की शिल्प, संस्कृति, परंपरा एवं व्यंजन को लेकर उपस्थित हैं. 2 सितंबर से जारी सरस मेला में तीन दिन में लगभग 67 लाख रूपये के उत्पादों और देशी खाद्य- व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है . मेला के आयोजन के तीसरे दिन रविवार को बड़ी संख्या में लोग आये और खरीददारी की. 56 हजार लोग आये और लगभग 45 लाख रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद बिक्री हुई . </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Visitors-Saras.jpg" alt="" class="wp-image-66177" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Visitors-Saras.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Visitors-Saras-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>छत्तीसगढ़ से आई सहेली स्वयं सहायता समूह के स्टॉल से सर्वाधिक सवा लाख रुपये के परिधानों की खरीद बिक्री हुई. जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई से लगभग 68 हजार रुपये के व्यंजनों का स्वाद लोगों ने चखा. खरीद-बिक्री का आंकड़ा मेला में आये ग्रामीण उधमियों से लिए गए बिक्री रिपोर्ट पर आधारित होती है. स्वच्छता एवं बेहतर साज-सज्जा एवं बेहतर बिक्री को बढ़ावा देने के उदेश्य से जीविका द्वारा प्रतिदिन स्टॉल धारकों को सम्मानित भी किया जा रहा है. रविवार को स्वच्छता के लिए हिन्द महिला स्वयं सहायता समूह, उत्तर प्रदेश, साज-सज्जा के लिए ओम जीविका स्वयं सहायता समूह, बिहार एवं सबसे ज्यादा उत्पाद की बिक्री के लिए छत्तीसगढ़ से आई सहेली स्वयं सहायता समूह के स्टॉल को सम्मानित किया गया.</p>



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