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	<title>ISRO &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>ISRO ने फिर रचा इतिहास, गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल की सफल लॉन्चिंग</title>
		<link>https://www.patnanow.com/isro-again-creates-history-successful-launch-of-crew-module-of-gaganyaan-mission/</link>
		
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		<pubDate>Sat, 21 Oct 2023 05:29:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गगनयान मिशन को 2025 में लॉन्च किया जाएगा.वहीं इससे पहले 21 अक्टूबर को टेस्ट फ्लाइट (TV-D1) को लॉन्च किया गया. हालांकि इसके लॉन्चिंग को फिर से शेड्यूल करके लॉन्च किया गया. इसरो की ओर से इसे लॉन्च किया गया। यह पहला मानवयुक्त मिशन होगा.जब पहली बार काउंटडाउन चल रहा था, उसी दौरान ये होल्ड पर चला गया. 5 सेकंड बचे थे जब काउंटडाउन रुका. इसके बाद इसके लॉन्च को री शेड्यूल किया गया. इसरो चीफ ने पहले ही बताया था कि मिशन गगनयान के फाइनल लॉन्च से पहले हर महीने कम से कम एक उड़ान लॉन्च होती रहेगी.उन्होंने कहा कि हर महीने हम कम से कम एक प्रक्षेपण करेंगे. इसरो चीफ ने दी बधाई इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि टीवी-डीवी 1 (क्रू मॉड्यूल) मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया है. उन्होंने इस सफलता पर इसरो की पूरी टीम को बधाई दी है.गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल की सफल लॉन्चिंग पूरी हो गई है. पहले इसे साढ़े 8 बजे लॉन्च होना था, लेकिन 5 सेकंड पहले ये होल्ड पर चला गया.फिर 10 बजे इसकी लॉन्चिंग हुई.]]></description>
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<p><br>गगनयान मिशन को 2025 में लॉन्च किया जाएगा.वहीं इससे पहले 21 अक्टूबर को टेस्ट फ्लाइट (TV-D1) को लॉन्च किया गया. हालांकि इसके लॉन्चिंग को फिर से शेड्यूल करके लॉन्च किया गया. इसरो की ओर से इसे लॉन्च किया गया। यह पहला मानवयुक्त मिशन होगा.जब पहली बार काउंटडाउन चल रहा था, उसी दौरान ये होल्ड पर चला गया. 5 सेकंड बचे थे जब काउंटडाउन रुका. इसके बाद इसके लॉन्च को री शेड्यूल किया गया. इसरो चीफ ने पहले ही बताया था कि मिशन गगनयान के फाइनल लॉन्च से पहले हर महीने कम से कम एक उड़ान लॉन्च होती रहेगी.उन्होंने कहा कि हर महीने हम कम से कम एक प्रक्षेपण करेंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/isro-gaganyan-650x366.png" alt="" class="wp-image-79625" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/isro-gaganyan-650x366.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/isro-gaganyan-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/isro-gaganyan-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/isro-gaganyan.png 1024w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>इसरो चीफ ने दी बधाई <br></strong>इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि टीवी-डीवी 1 (क्रू मॉड्यूल) मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया है. उन्होंने इस सफलता पर इसरो की पूरी टीम को बधाई दी है.गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल की सफल लॉन्चिंग पूरी हो गई है. पहले इसे साढ़े 8 बजे लॉन्च होना था, लेकिन 5 सेकंड पहले ये होल्ड पर चला गया.फिर 10 बजे इसकी लॉन्चिंग हुई.</p>
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		<title>&#8216;मिशन गगनयान&#8217; की लॉन्चिंग 21 अक्टूबर को</title>
		<link>https://www.patnanow.com/launch-of-mission-gaganyaan-on-october-21/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Oct 2023 02:36:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[अंतरिक्ष में एक बार फिर इतिहास रचेगा भारतइसरो अंतरिक्ष मिशन- ‘गगनयान’ को 21 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच लॉन्च करेगा.टीवी-डी 1 को श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा लॉन्चभारत के अंतरिक्ष पर्यटन के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगाअंतरिक्ष पर्यटन के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम नई दिल्ली, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन &#8211; ‘गगनयान’ को 21 अक्टूबर 2023 को सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच लॉन्च करेगा. इसरो की तरफ से ट्वीट कर कहा गया है कि गगनयान मिशन के टेस्ट व्हीकल डेवलपमेंट फ्लाइट (टीवी-डी 1) को 21 अक्टूबर को सुबह लॉन्च किया जाएगा. टीवी-डी 1 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लांच किया जाएगा. इस मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की 400 किमी की कक्षा में ले जाने से लेकर, भारतीय समुद्री सतह पर उतारकर पृथ्वी पर सुरक्षित रुप से वापस लाने की यान की क्षमता का आकलन किया जाना है. यह भारत के अंतरिक्ष पर्यटन के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा. टेस्ट व्हीकल एक सिंगल स्टेज लिक्विड रॉकेट है, जिसे इस अबॉर्ट मिशन के लिए तैयार किया गया है. पेलोड में क्रू मॉड्यूल (सीएम) और क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) सहित अन्य शामिल हैं.इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने शनिवार को कहा था कि आने वाले दिनों में इसी प्रकृति के कम से कम तीन और परीक्षण होंगे. गगनयान परियोजना में 3 दिनों के मिशन के लिए 3 सदस्यों के एक दल को [&#8230;]]]></description>
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<p class="has-vivid-purple-color has-text-color"><strong>अंतरिक्ष में एक बार फिर इतिहास रचेगा भारत<br>इसरो अंतरिक्ष मिशन- ‘गगनयान’ को 21 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच लॉन्च करेगा.<br>टीवी-डी 1 को श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा लॉन्च<br>भारत के अंतरिक्ष पर्यटन के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा<br>अंतरिक्ष पर्यटन के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम</strong></p>



<p><br>नई दिल्ली, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन &#8211; ‘गगनयान’ को 21 अक्टूबर 2023 को सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच लॉन्च करेगा. इसरो की तरफ से ट्वीट कर कहा गया है कि गगनयान मिशन के टेस्ट व्हीकल डेवलपमेंट फ्लाइट (टीवी-डी 1) को 21 अक्टूबर को सुबह लॉन्च किया जाएगा. टीवी-डी 1 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लांच किया जाएगा. इस मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की 400 किमी की कक्षा में ले जाने से लेकर, भारतीय समुद्री सतह पर उतारकर पृथ्वी पर सुरक्षित रुप से वापस लाने की यान की क्षमता का आकलन किया जाना है. यह भारत के अंतरिक्ष पर्यटन के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="453" height="252" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/isro-1.png" alt="" class="wp-image-79462" style="aspect-ratio:1.7976190476190477;width:737px;height:auto" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/isro-1.png 453w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/isro-1-350x195.png 350w" sizes="(max-width: 453px) 100vw, 453px" /></figure>



<p><br>टेस्ट व्हीकल एक सिंगल स्टेज लिक्विड रॉकेट है, जिसे इस अबॉर्ट मिशन के लिए तैयार किया गया है. पेलोड में क्रू मॉड्यूल (सीएम) और क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) सहित अन्य शामिल हैं.इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने शनिवार को कहा था कि आने वाले दिनों में इसी प्रकृति के कम से कम तीन और परीक्षण होंगे. गगनयान परियोजना में 3 दिनों के मिशन के लिए 3 सदस्यों के एक दल को 400 किमी की कक्षा में लॉन्च करके और भारतीय समुद्री जल में उतरकर उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाकर मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन करने की परिकल्पना की गई है.</p>



<p>यह कार्यक्रम भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान मिशन शुरू करने वाला चौथा देश बना देगा. गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष तक सुरक्षित ले जाना और वापस लाना शामिल है. इस मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक ड्रग पैराशूट की तैनाती है, जो क्रू मॉड्यूल को स्थिर करने और पुन: प्रवेश के दौरान इसके वेग को सुरक्षित स्तर तक कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.इसरो भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ को 2024 में लॉन्च करेगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="505" height="285" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/isro.png" alt="" class="wp-image-79464" style="aspect-ratio:1.7719298245614035;width:839px;height:auto" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/isro.png 505w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/isro-350x198.png 350w" sizes="(max-width: 505px) 100vw, 505px" /></figure>



<p>इसमें 3 चरण हैं &#8211; अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की 400 किमी की कक्षा में ले जाना, भारतीय समुद्री सतह पर उतारना और फिर सुरक्षित रूप से वापसी.गगनयान मिशन के पहले 2024 में एक महिला रोबोट अंतरिक्ष यात्री, व्योममित्र, को परीक्षण के तौर पर भेजा जाएगा.गगनयान मिशन के टेस्ट व्हीकल डेवलपमेंट फ्लाइट को 21 अक्टूबर 2023 को लॉन्च किया जाएगा.प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में किया जाएगा. यही क्रू-मॉड्यूल गगनयान मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को बाहरी अंतरिक्ष में ले जाएगा.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>अब अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने की तैयारी पूरी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/now-preparations-to-send-human-mission-into-space-complete/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Oct 2023 04:06:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[human mission]]></category>
		<category><![CDATA[ISRO]]></category>
		<category><![CDATA[jitendra singh]]></category>
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					<description><![CDATA[मानव से पहले अंतरिक्ष में भेजा जाएगा व्योममित्र रोबोट 21 अक्टूबर को गगनयान मिशन के लिए पहला परीक्षण उड़ान होगा लॉन्च मंगल के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग कर कीर्तिमान रचने वाले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कर ली है. केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष मंत्री जितेंद्र सिंह ने को बताया है कि इसरो आगामी 21 अक्टूबर को गगनयान मिशन के लिए पहला परीक्षण उड़ान लॉन्च करने जा रहा है.सिंह ने चंद्रयान-3 और आदित्य एल-1 मिशन में शामिल इसरो के इंजीनियरों के अभिनंदन कार्यक्रम में कहा कि अंतरिक्ष में जाने के बाद वापस गगनयान समुद्र में उतरेगा. क्रू मेंबर्स की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए नौसेना ने मॉड्यूल को पुन:प्राप्त करने का मॉक ऑपरेशन पहले ही शुरू कर दिया है. सिंह ने बताया कि अगले साल के अंत में इसरो अंतरिक्ष में मानव युक्त मिशन करेगा. उसके पहले यह टेस्ट परीक्षण होने वाला है. जिस क्रू मॉड्यूल मैं बैठा कर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा उसका नाम परीक्षण वाहन विकास उड़ान (टीवी-डी-1) है. इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में लॉन्च किया जाएगा. उन्होंने बताया कि क्रू मेंबर्स को इस मॉड्यूल में बैठाकर अंतरिक्ष में 400 किलोमीटर दूर भेजना, उसके बाद इसे वापस पृथ्वी पर लाना तथा बंगाल की खाड़ी के समुद्र में उतारने की टेस्टिंग की जाएगी. जितेंद्र सिंह ने बताया कि परीक्षण की सफलता पहले मानवरहित ‘गगनयान’ मिशन और उसके बाद पृथ्वी की कक्षा से बाहरी अंतरिक्ष में मानव युक्त मिशन का रास्ता सुनिश्चित करेगी. उन्होंने यह भी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>मानव से पहले अंतरिक्ष में भेजा जाएगा व्योममित्र रोबोट</strong></p>



<p><strong>21 अक्टूबर को गगनयान मिशन के लिए पहला परीक्षण उड़ान होगा लॉन्च</strong></p>



<p>मंगल के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग कर कीर्तिमान रचने वाले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कर ली है. केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष मंत्री जितेंद्र सिंह ने को बताया है कि इसरो आगामी 21 अक्टूबर को गगनयान मिशन के लिए पहला परीक्षण उड़ान लॉन्च करने जा रहा है.सिंह ने चंद्रयान-3 और आदित्य एल-1 मिशन में शामिल इसरो के इंजीनियरों के अभिनंदन कार्यक्रम में कहा कि अंतरिक्ष में जाने के बाद वापस गगनयान समुद्र में उतरेगा. क्रू मेंबर्स की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए नौसेना ने मॉड्यूल को पुन:प्राप्त करने का मॉक ऑपरेशन पहले ही शुरू कर दिया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="573" height="375" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/antiksh.png" alt="" class="wp-image-79143" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/antiksh.png 573w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/antiksh-350x229.png 350w" sizes="(max-width: 573px) 100vw, 573px" /></figure>



<p>सिंह ने बताया कि अगले साल के अंत में इसरो अंतरिक्ष में मानव युक्त मिशन करेगा. उसके पहले यह टेस्ट परीक्षण होने वाला है. जिस क्रू मॉड्यूल मैं बैठा कर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा उसका नाम परीक्षण वाहन विकास उड़ान (टीवी-डी-1) है. इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में लॉन्च किया जाएगा. उन्होंने बताया कि क्रू मेंबर्स को इस मॉड्यूल में बैठाकर अंतरिक्ष में 400 किलोमीटर दूर भेजना, उसके बाद इसे वापस पृथ्वी पर लाना तथा बंगाल की खाड़ी के समुद्र में उतारने की टेस्टिंग की जाएगी.</p>



<p>जितेंद्र सिंह ने बताया कि परीक्षण की सफलता पहले मानवरहित ‘गगनयान’ मिशन और उसके बाद पृथ्वी की कक्षा से बाहरी अंतरिक्ष में मानव युक्त मिशन का रास्ता सुनिश्चित करेगी. उन्होंने यह भी बताया कि अगले साल के अंत में होने वाले मानव युक्त मिशन से पहले एक और परीक्षण उड़ान होगी. यह अगले साल होगी, जिसमें एक महिला रोबोट अंतरिक्ष यात्री ‘व्योममित्र को भेजा जाएगा. व्योम का अर्थ होता है आकाश.</p>



<p>सुदूर अंतरिक्ष के अनंत रहस्यों को जानने की स्पेस रेस में इसरो तेजी से आगे बढ़ रहा है. गत 23 अगस्त को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग से पहले धरती से परे दूसरे खगोलीय पिंड मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेजकर सफलता का परचम लहराया था. फिलहाल इसरो का सूर्य के बाहरी परत के अध्ययन का एक और महत्वाकांक्षी मिशन आदित्य एल-1 अपने सफ़र पर है. उसे धरती से 15 लाख किलोमीटर दूर एल-1 पॉइंट पर स्थापित कर सूरज का अध्ययन किया जाना है. इसरो ने बताया था कि मिशन सफलतापूर्वक अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सतह में गंधक और ऑक्सीजन     होने की पुष्टि : इसरो</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sulfur-and-oxygen-in-the-surface-on-the-south-pole-of-the-moon-confirmed-isro/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Aug 2023 04:40:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[rover]]></category>
		<category><![CDATA[SULFER AND oxygen at moon]]></category>
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					<description><![CDATA[एल्युमीनियम, कैल्शियम, लौह, क्रोमियम, टाइटेनियम, मैंगनीज, सिलिकॉन और ऑक्सीजन मौजूद हाइड्रोजन की तलाश जारी इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके बताया कि चंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान पर लगे एक उपकरण ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सतह में गंधक होने की स्पष्ट रूप से पुष्टि की है. इसरो ने पोस्ट में कहा कि वैज्ञानिक प्रयोग जारी हैं. रोवर पर लगे लेजर संचालित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS) उपकरण ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सतह में गंधक होने की स्पष्ट रूप से पुष्टि की है. उम्मीद के मुताबिक एल्युमीनियम, कैल्शियम, लौह, क्रोमियम, टाइटेनियम, मैंगनीज, सिलिकॉन और ऑक्सीजन का भी पता चला है. हाइड्रोजन की तलाश जारी है. PNCDESK]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>एल्युमीनियम, कैल्शियम, लौह, क्रोमियम, टाइटेनियम, मैंगनीज, सिलिकॉन और ऑक्सीजन मौजूद </strong></p>



<p><strong>हाइड्रोजन की तलाश जारी</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/CHANDRYAN-2-650x488.png" alt="" class="wp-image-77683" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/CHANDRYAN-2-650x488.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/CHANDRYAN-2-350x263.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/CHANDRYAN-2-768x576.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/CHANDRYAN-2.png 1200w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके बताया कि चंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान पर लगे एक उपकरण ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सतह में गंधक होने की स्पष्ट रूप से पुष्टि की है. इसरो ने पोस्ट में कहा कि वैज्ञानिक प्रयोग जारी हैं. रोवर पर लगे लेजर संचालित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS) उपकरण ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सतह में गंधक होने की स्पष्ट रूप से पुष्टि की है. उम्मीद के मुताबिक एल्युमीनियम, कैल्शियम, लौह, क्रोमियम, टाइटेनियम, मैंगनीज, सिलिकॉन और ऑक्सीजन का भी पता चला है. हाइड्रोजन की तलाश जारी है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="460" height="310" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/ISRO.png" alt="" class="wp-image-77682" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/ISRO.png 460w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/ISRO-350x236.png 350w" sizes="(max-width: 460px) 100vw, 460px" /></figure>



<p><strong>PNCDESK </strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चांद पर जरूर होगी चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग: इसरो</title>
		<link>https://www.patnanow.com/chandrayaan-3-will-definitely-have-a-successful-landing-on-the-moon-isro/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Aug 2023 04:26:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACADEMIC]]></category>
		<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[chandryan 3 shoft landing live .]]></category>
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		<category><![CDATA[isro chief s somnath]]></category>
		<category><![CDATA[shoft landing of chandryan 3]]></category>
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					<description><![CDATA[मिशन मून की कामयाबी का फूलप्रूफ है &#160;प्लान वैज्ञानिकों ने बनाया बैकअप का भी बैकअप प्लान देश भर चंद्रयान की लैंडिग के लिए हो रही है पूजा अर्चना आज शाम भारत रचेगा इतिहास live यहाँ देखें https://youtu.be/DLA_64yz8Ss https://youtu.be/DLA_64yz8Ss आज बुधवार 23 अगस्त के दिन भारत इतिहास रचने के बेहद करीब है. भारत के मून मिशन चंद्रयान-3 की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने की उम्मीद है और इस उम्मीद को भरोसा दिया है इसरो के वैज्ञानिकों ने, जो 2019 में चंद्रयान-2 की हार्डलैंडिंग के बाद से ही मिशन को सफल बनाने में लगे हैं. इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा है कि हमें विश्वास है कि यह एक सफल मिशन होगा. उन्होंने कहा, हम तैयार हैं.इसरो चीफ ने बताया कि ये एक सफल मिशन होगा और ये अतिआत्मविश्वास नहीं है. ये आत्मविश्वास उस काम से आ रहा है जो हमारी (इसरो) टीमों ने चंद्रयान-2 की हार्ड लैंडिंग के बाद मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए किया है. इसरो चीफ ने कहा, चार साल एक छोटा समय नहीं है. हमने इसका हर हिस्सा अपने मिशन को बेहतर बनाने और बैकअप प्लान तैयार करने में लगाया है. उन्होंने कहा कि हमने बैकअप प्लान का भी बैकअप तैयार किया है. इस मिशन में अब तक, सब कुछ हमारी योजना के अनुसार ही हुआ है. हमने सिस्टम का कई स्तर पर सत्यापन कर लैंडिंग की तैयारी कर ली है और लैंडर की सेहत बिल्कुल ठीक है.उन्होंने बताया कि हमने कुछ कमियां पता कर ली थीं जिनका [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मिशन मून की कामयाबी का फूलप्रूफ है &nbsp;प्लान</strong></p>



<p><strong>वैज्ञानिकों ने बनाया बैकअप का भी बैकअप प्लान</strong></p>



<p><strong>देश भर चंद्रयान की लैंडिग के लिए हो रही है पूजा अर्चना</strong></p>



<p><strong>आज शाम भारत रचेगा इतिहास </strong></p>



<p><strong>live यहाँ देखें</strong>    <a rel="noreferrer noopener" href="https://youtu.be/DLA_64yz8Ss" target="_blank">https://youtu.be/DLA_64yz8Ss</a>  </p>



<p><a href="https://youtu.be/DLA_64yz8Ss        ">https://youtu.be/DLA_64yz8Ss        </a>     </p>



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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandryan-3.png" alt="" class="wp-image-77472" width="720" height="399" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandryan-3.png 595w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandryan-3-350x194.png 350w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /></figure>



<p>आज बुधवार 23 अगस्त के दिन भारत इतिहास रचने के बेहद करीब है. भारत के मून मिशन चंद्रयान-3 की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने की उम्मीद है और इस उम्मीद को भरोसा दिया है इसरो के वैज्ञानिकों ने, जो 2019 में चंद्रयान-2 की हार्डलैंडिंग के बाद से ही मिशन को सफल बनाने में लगे हैं. इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा है कि हमें विश्वास है कि यह एक सफल मिशन होगा. उन्होंने कहा, हम तैयार हैं.इसरो चीफ ने बताया कि ये एक सफल मिशन होगा और ये अतिआत्मविश्वास नहीं है. ये आत्मविश्वास उस काम से आ रहा है जो हमारी (इसरो) टीमों ने चंद्रयान-2 की हार्ड लैंडिंग के बाद मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandryan-31.png" alt="" class="wp-image-77473" width="765" height="424" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandryan-31.png 595w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandryan-31-350x194.png 350w" sizes="(max-width: 765px) 100vw, 765px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/isro-s-somnath-650x488.png" alt="" class="wp-image-77474" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/isro-s-somnath-650x488.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/isro-s-somnath-350x263.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/isro-s-somnath.png 720w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>इसरो चीफ</strong> ने कहा, चार साल एक छोटा समय नहीं है. हमने इसका हर हिस्सा अपने मिशन को बेहतर बनाने और बैकअप प्लान तैयार करने में लगाया है. उन्होंने कहा कि हमने बैकअप प्लान का भी बैकअप तैयार किया है. इस मिशन में अब तक, सब कुछ हमारी योजना के अनुसार ही हुआ है. हमने सिस्टम का कई स्तर पर सत्यापन कर लैंडिंग की तैयारी कर ली है और लैंडर की सेहत बिल्कुल ठीक है.उन्होंने बताया कि हमने कुछ कमियां पता कर ली थीं जिनका सामना यान को करना पड़ रहा था और जब ऐसा हो रहा था तब हमने उसका समाधान नहीं किया. इससे उतरते समय लैंडर मॉड्यूल नियंत्रण से बाहर हो गया. इस बार हम बेहतर तरीके से तैयार हैं. हमने अपनी पिछली गलतियों से सीखा है और उन गलतियों को सुधार लिया है. इसरो चीफ ने कहा, हम तैयार हैं.लैंडिंग के दौरान गड़बड़ी के सवाल पर उन्होंने कहा, हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिए. यदि ऐसा होना है, तो सब कुछ गलत हो सकता है और यदि चीजों को हमारे अनुसार चलना है, तो कुछ भी गलत नहीं होगा.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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			</item>
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		<title>बुधवार शाम 6:04 बजे लैंडिंग, कंडीशन ठीक नहीं तो 27 को उतरेगा लैंडर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/landing-at-604-pm-on-wednesday-if-the-condition-is-not-good-the-lander-will-land-on-27/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Aug 2023 04:10:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[23 august chandryan landing &#039;]]></category>
		<category><![CDATA[27 august chandrayan]]></category>
		<category><![CDATA[chandrayan 3 live landing]]></category>
		<category><![CDATA[chandrayan-3]]></category>
		<category><![CDATA[ISRO]]></category>
		<category><![CDATA[landing live]]></category>
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					<description><![CDATA[‘15 मिनिट्स ऑफ टेरर’ चंद्रयान-3 के अंतिम 15 मिनट्स बेहद अहम चंद्रयान-3 के लैंडर को कल यानी 23 अगस्त को शाम 6:04 बजे 25 किमी  की ऊंचाई से लैंड कराने की कोशिश की जाएगी। इसमें 15 से17 मिनट लगेंगे। इस ड्यूरेशन को &#8217;15 मिनिट्स ऑफ टेरर&#8217; यानी &#8216;खौफ के 15 मिनट्स&#8217; कहा जाता है. अगर भारत का चंद्रयान-3 मिशन सक्सेसफुल होता है तो वो चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरने वाला पहला देश बन जाएगा. चंद्रमा पर उतरने से दो घंटे पहले, लैंडर मॉड्यूल की स्थिति और चंद्रमा पर स्थितियों के आधार पर यह तय करेंगे कि उस समय इसे उतारना उचित होगा या नहीं. अगर कोई भी फैक्टर तय पैमाने पर नहीं रहा तो लैंडिंग 27 अगस्त को कराई जाएगी. चंद्रयान का दूसरा और फाइनल डीबूस्टिंग ऑपरेशन रविवार रात 1 बजकर 50 मिनट पर पूरा हुआ था. इसके बाद लैंडर की चंद्रमा से न्यूनतम दूरी 25 किमी और अधिकतम दूरी 134 किलोमीटर रह गई है. डीबूस्टिंग में स्पेसक्राफ्ट की स्पीड को धीमा किया जाता है. 23 अगस्त को लैंडिंग इतिहास रचने को तैयार चंद्रयान-3, देशभर में हो रही प्रार्थना शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा लैंडर विक्रम लैंडर विक्रम के चांद की सतह पर उतरने के साथ ही इतिहास रचेगा भारत 14 जुलाई को इसरो ने चंद्रयान-3 को किया था लॉन्च मिशन से भारत को काफी उम्मीदें चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने के लिए विक्रम लैंडर पूरी तरह तैयार है. चंद्रयान के चंद्रमा की सतह पर लैंड होने में अब केवल 3 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>‘15 मिनिट्स ऑफ टेरर’ चंद्रयान-3 के अंतिम 15 मिनट्स बेहद अहम</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandryan-650x366.png" alt="" class="wp-image-77422" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandryan-650x366.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandryan-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandryan-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandryan.png 1200w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>चंद्रयान-3 के लैंडर को कल यानी 23 अगस्त को शाम 6:04 बजे 25 किमी  की ऊंचाई से लैंड कराने की कोशिश की जाएगी। इसमें 15 से17 मिनट लगेंगे। इस ड्यूरेशन को &#8217;15 मिनिट्स ऑफ टेरर&#8217; यानी &#8216;खौफ के 15 मिनट्स&#8217; कहा जाता है. अगर भारत का चंद्रयान-3 मिशन सक्सेसफुल होता है तो वो चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरने वाला पहला देश बन जाएगा. चंद्रमा पर उतरने से दो घंटे पहले, लैंडर मॉड्यूल की स्थिति और चंद्रमा पर स्थितियों के आधार पर यह तय करेंगे कि उस समय इसे उतारना उचित होगा या नहीं. अगर कोई भी फैक्टर तय पैमाने पर नहीं रहा तो लैंडिंग 27 अगस्त को कराई जाएगी. चंद्रयान का दूसरा और फाइनल डीबूस्टिंग ऑपरेशन रविवार रात 1 बजकर 50 मिनट पर पूरा हुआ था. इसके बाद लैंडर की चंद्रमा से न्यूनतम दूरी 25 किमी और अधिकतम दूरी 134 किलोमीटर रह गई है. डीबूस्टिंग में स्पेसक्राफ्ट की स्पीड को धीमा किया जाता है.</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">23 अगस्त को लैंडिंग इतिहास रचने को तैयार चंद्रयान-3, देशभर में हो रही प्रार्थना</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा लैंडर विक्रम</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">लैंडर विक्रम के चांद की सतह पर उतरने के साथ ही इतिहास रचेगा भारत</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">14 जुलाई को इसरो ने चंद्रयान-3 को किया था लॉन्च</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">मिशन से भारत को काफी उम्मीदें</p>



<p>चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने के लिए विक्रम लैंडर पूरी तरह तैयार है. चंद्रयान के चंद्रमा की सतह पर लैंड होने में अब केवल 3 दिन बाकी हैं. इस बीच आज यान के विक्रम लैंडर ने दूसरी बार सफलतापूर्ण डिबूस्टिंग को पूरा कर लिया है. अब लैंडर की चांद से दूरी केवल 25 किमी की रह गई है.चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर की सुरक्षित लैंडिंग के लिए पवित्र यमुना नदी का आशीर्वाद लेने के लिए देश &nbsp;में विशेष प्रार्थनाएं और अनुष्ठान किए गए. चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के लिए विशेष हवन पूजा भी की गई. चांद की सतह पर उतरने के बाद रोवर कुल 14 दिनों तक खोज और जानकारी जुटाएगा. रोवर प्रज्ञान की आयु चांद के एक दिन के बराबर यानी 14 दिनों तक का है.रोवर चंद्रमा पर एल्यूमीनियम, सिलिकॉन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, टाइटेनियम, कैल्शियम और आयरन से जुड़ी जानकारी को जुटाएगा.</p>



<p>भारत का सबसे महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान-3 चंद्रमा के बेहद करीब पहुंच गया है. चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल ने आज अपने दूसरे और अंतिम डी-ऑर्बिटिंग को पूरा कर लिया. इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह जानकारी दी . चंद्रयान का विक्रम लैंडर चंद्रयान-3 मिशन में अहम पड़ाव को पार कर लिया है. यह चंद्रयान से अलग होकर चांद की सतह की ओर अकेले ही बढ़ रहा है. इसके चांद की सतह पर 23 अगस्त को पहुंचने की संभावना है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया, 23 अगस्त, 2023 को चंद्रयान-3 भारतीय समय अनुसार शाम 6:04 बजे चंद्रमा पर उतरने के लिए तैयार है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="512" height="384" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandrayan.png" alt="" class="wp-image-77423" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandrayan.png 512w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chandrayan-350x263.png 350w" sizes="(max-width: 512px) 100vw, 512px" /></figure>



<p>चंद्रयान-3 से भारत को काफी उम्मीदें हैं. विशेषज्ञों की मानें तो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की काफी कम जानकारी दुनिया के पास मौजूद है. इस मिशन के जिए इस दक्षिणी ध्रुव की कई अहम जानकारी भारत को हाथ लग सकती है. चंद्रयान ने लॉन्चिंग से अब तक कई बड़े पड़ावों को पूरा किया है. यान ने पहले 5 अगस्त को चांद की कक्षा में प्रवेश कर बड़ा पड़ाव पूरा किया था. इसके बाद उसने 5 नई कक्षाओं में प्रवेश किया. इसके बाद 17 अगस्त को लैंडर और रोवर प्रोपल्शन मोड्यूल से अलग हो गए.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को लॉन्च किया था. 15 जुलाई को इसरो ने अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की ओर बढ़ाने वाली पहली प्रक्रिया (अर्थबाउंड फायरिंग-1) पूरी की. भारतीय अंतरिक्ष यान चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चांद की सतह के करीब पहुंच गया है और सॉफ्ट लैंडिंग करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. चंद्रयान 3 का लैंडर चांद पर 23 अगस्त, 2023 को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>भारत का चंद्रयान-3 लगातार भेज रहा चांद की तस्वीर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/indias-chandrayaan-3-continuously-sending-pictures-of-the-moon/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Aug 2023 07:51:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[chandrayan 3 sending emage of moon]]></category>
		<category><![CDATA[ISRO]]></category>
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					<description><![CDATA[चंद्रमा पर करीब 14 लाख गड्ढे हैं. 9137 से ज्यादा क्रेटर की पहचान की गई है चांद पर न तो पानी है. न ही वायुमंडल. न ही धरती की तरह टेक्टोनिक प्लेट पृथ्वी और चंद्रमा की कहानी लगभग एकसाथ शुरू होती है. ये बात है करीब 450 करोड़ साल पुरानी. तब से लेकर अब तक दोनों पर लगातार अंतरिक्ष से आने वाले पत्थर, उल्कापिंड गिरते रहते हैं. इनके गिरने से गड्ढे बनते हैं. इन्हें इम्पैक्ट क्रेटर भी कहते हैं. धरती पर अभी तक ऐसे 180 इम्पैक्ट क्रेटर खोजे गए हैं. चंद्रमा पर करीब 14 लाख गड्ढे हैं. 9137 से ज्यादा क्रेटर की पहचान की गई है. 1675 की तो उम्र भी पता की गई है. लेकिन वहां हजारों गड्ढे हैं. जिन्हें इंसान देख भी नहीं पाया है. क्योंकि उसके अंधेरे वाले हिस्से में देखना मुश्किल है. ऐसा नहीं है कि चांद की सतह पर मौजूद गड्ढे सिर्फ इम्पैक्ट क्रेटर हैं. कुछ ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से भी बने हैं. करोड़ों साल पहले. नासा ने चंद्रमा पर सबसे बड़ा गड्ढा 17 मार्च 2013 को देखा था. जब एक 40 किलोग्राम का पत्थर चांद की सतह से 90 हजार किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से टकराया था. इस टक्कर से जो गड्डा बना वो बेहद बड़ा है. उसे आप जमीन से भी देख सकते हैं. अगर टेलिस्कोप लगाकर देखेंगे तो आपको बेहद शानदार नजारा देखने को मिलेगा. चांद पर न तो पानी है. न ही वायुमंडल. न ही धरती की तरह टेक्टोनिक प्लेट. इसलिए वहां पर मिट्टी कटती नहीं. इरोशन नहीं होता. कम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चंद्रमा पर करीब 14 लाख गड्ढे हैं. 9137 से ज्यादा क्रेटर की पहचान की गई है</strong></p>



<p><strong>चांद पर न तो पानी है. न ही वायुमंडल. न ही धरती की तरह टेक्टोनिक प्लेट</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chand-650x650.png" alt="" class="wp-image-77030" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chand-650x650.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chand-350x350.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chand-250x250.png 250w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chand-768x768.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/chand.png 1200w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पृथ्वी और चंद्रमा की कहानी लगभग एकसाथ शुरू होती है. ये बात है करीब 450 करोड़ साल पुरानी. तब से लेकर अब तक दोनों पर लगातार अंतरिक्ष से आने वाले पत्थर, उल्कापिंड गिरते रहते हैं. इनके गिरने से गड्ढे बनते हैं. इन्हें इम्पैक्ट क्रेटर भी कहते हैं. धरती पर अभी तक ऐसे 180 इम्पैक्ट क्रेटर खोजे गए हैं. चंद्रमा पर करीब 14 लाख गड्ढे हैं. 9137 से ज्यादा क्रेटर की पहचान की गई है. 1675 की तो उम्र भी पता की गई है. लेकिन वहां हजारों गड्ढे हैं. जिन्हें इंसान देख भी नहीं पाया है. क्योंकि उसके अंधेरे वाले हिस्से में देखना मुश्किल है. ऐसा नहीं है कि चांद की सतह पर मौजूद गड्ढे सिर्फ इम्पैक्ट क्रेटर हैं. कुछ ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से भी बने हैं. करोड़ों साल पहले. नासा ने चंद्रमा पर सबसे बड़ा गड्ढा 17 मार्च 2013 को देखा था. जब एक 40 किलोग्राम का पत्थर चांद की सतह से 90 हजार किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से टकराया था. इस टक्कर से जो गड्डा बना वो बेहद बड़ा है. उसे आप जमीन से भी देख सकते हैं. अगर टेलिस्कोप लगाकर देखेंगे तो आपको बेहद शानदार नजारा देखने को मिलेगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/moon-650x366.png" alt="" class="wp-image-77031" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/moon-650x366.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/moon-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/moon-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/moon.png 1200w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>चांद पर न तो पानी है. न ही वायुमंडल. न ही धरती की तरह टेक्टोनिक प्लेट. इसलिए वहां पर मिट्टी कटती नहीं. इरोशन नहीं होता. कम होता है. इसलिए ये क्रेटर पटते नहीं हैं. बने रहते हैं. जबकि धरती पर ऐसे गड्ढों पर मिट्टी जम जाती है. पानी भर जाता है. पेड़-पौधे उग जाते हैं. जिसकी वजह से गड्ढे पट जाते हैं. चंद्रमा पर बने ज्यादातर गड्ढों की उम्र 200 करोड़ साल है. यानी चांद जब बना तब उसपर इतने गड्ढे नहीं थे. बनने के करीब 250 साल बाद गड्ढे बनने शुरू हुए. चंद्रमा पर सबसे बड़ा गड्ढा दक्षिणी ध्रुव के पास है. इसे पार करने के लिए आपको इसके अंदर करीब 290 किलोमीटर चलना पड़ेगा. चांद पर मौजूद 13 लाख गड्ढों का व्यास यानी डायामीटर 1 किलोमीटर है. 83 हजार गड्ढों का व्यास 5 किलोमीटर है. 6972 गड्ढे ऐसे हैं, जिनका व्यास 20 किलोमीटर से ज्यादा है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/moon2-650x366.png" alt="" class="wp-image-77032" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/moon2-650x366.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/moon2-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/moon2-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/moon2.png 1200w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इस समय चांद के चारों तरफ 170किमी x 4313किमी वाली अंडाकार ऑर्बिट में घूम रहा है. इसरो वैज्ञानिक चंद्रयान-3 को लेकर तय तारीखों से आगे चल रहे हैं. वह अभी जिस कक्षा में है, उसे वह 9 अगस्त 2023 को हासिल करना था. लेकिन वह पहले ही इस ऑर्बिट में घूम रहा है. अब देखना ये है कि इसरो वैज्ञानिक इस अब कितनी दूरी वाले ऑर्बिट में डालते हैं. 9 अगस्त के बाद 14 तारीख की दोपहर 12.04 बजे इसका ऑर्बिट बदला जाएगा. फिर 16 अगस्त को यही काम किया जाएगा. हर बार इसकी दूरी को घटाया जाएगा. 17 अगस्त को प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अलग होंगे. 18 और 20 अगस्त को डीऑर्बिटिंग होगी. यानी चांद के ऑर्बिट की दूरी को कम किया जाएगा. लैंडर मॉड्यूल 100 x 35 किमी के ऑर्बिट में जाएगा. इसके बाद 23 की शाम पांच बजकर 47 मिनट पर चंद्रयान की लैंडिंग कराई जाएगी.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ISRO ने सिंगापुर के 7 सैटेलाइट लॉन्च किए</title>
		<link>https://www.patnanow.com/isro-launched-7-satellites-of-singapore/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Jul 2023 06:43:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[DS-SAR LAUNCH]]></category>
		<category><![CDATA[ISRO]]></category>
		<category><![CDATA[PSLV-C56]]></category>
		<category><![CDATA[SRIHARIKOTA]]></category>
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					<description><![CDATA[इसमें 360 किलो वजन वाला DS-SAR जो हर मौसम में दिन-रात हाई रेजोल्यूशन तस्वीरें लेगा श्रीहरिकोटा,भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से सिंगापुर की सात सैटेलाइट को आज सुबह 6.30 बजे लॉन्च किया गया. यह लॉन्चिंग 44.4 मीटर लंबे PSLV-C56 रॉकेट से की गई है.PSLV की यह 58वीं उड़ान है. भेजे गए सात सैटेलाइटों में सबसे अहम 360 किलो का DS-SAR सैटेलाइट है. DS-SAR सैटेलाइट को सिंगापुर की रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एजेंसी (DSTA) और सिंगापुर के ही ST इंजीनियरिंग के बीच साझेदारी के तहत डेवलप किया गया है. सिंगापुर सरकार की विभिन्न एजेंसियों की उपग्रह से प्राप्त होने वाली तस्वीरों संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए इस उपग्रह का उपयोग किया जाएगा. DS-SAR में ‘इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज’ (IAI) के डेवलप किए गए ‘सिंथेटिक अपर्चर रडार’ (SAR) पेलोड हैं.]]></description>
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<p><strong>इसमें 360 किलो वजन वाला DS-SAR</strong></p>



<p><strong> जो हर मौसम में दिन-रात हाई रेजोल्यूशन तस्वीरें लेगा</strong></p>



<p>श्रीहरिकोटा,भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से सिंगापुर की सात सैटेलाइट को आज सुबह 6.30 बजे लॉन्च किया गया. यह लॉन्चिंग 44.4 मीटर लंबे PSLV-C56 रॉकेट से की गई है.PSLV की यह 58वीं उड़ान है. भेजे गए सात सैटेलाइटों में सबसे अहम 360 किलो का DS-SAR सैटेलाइट है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/isro.png" alt="" class="wp-image-76798" width="680" height="381" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/isro.png 517w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/isro-350x196.png 350w" sizes="(max-width: 680px) 100vw, 680px" /></figure>



<p>DS-SAR सैटेलाइट को सिंगापुर की रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एजेंसी (DSTA) और सिंगापुर के ही ST इंजीनियरिंग के बीच साझेदारी के तहत डेवलप किया गया है. सिंगापुर सरकार की विभिन्न एजेंसियों की उपग्रह से प्राप्त होने वाली तस्वीरों संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए इस उपग्रह का उपयोग किया जाएगा. DS-SAR में ‘इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज’ (IAI) के डेवलप किए गए ‘सिंथेटिक अपर्चर रडार’ (SAR) पेलोड हैं.</p>
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		<title>चंद्रयान -3 LIVE श्रीकोटा से</title>
		<link>https://www.patnanow.com/chandrayaan-3-live-from-srikota/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Jul 2023 08:39:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[chndrayan 3]]></category>
		<category><![CDATA[ISRO]]></category>
		<category><![CDATA[sri haricota]]></category>
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					<description><![CDATA[चांद की उड़ान के लिए तैयार चंद्रयान-3, पूर्व इसरो चीफ बोले- नहीं फेल होगा मून मिशन पूर्व इसरो चीफ बोले- नहीं फेल होगा मून मिशन इसरो के पूर्व चीफ माधवन नायर ने कहा, इंसानी रूप से जो कुछ भी संभव था, वो किया जा चुका है. मुझे ऐसा कोई कारण नहीं नजर आता कि मिशन चंद्रयान-3 फेल हो. चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण (लॉन्च) को देखने के लिए 200 से अधिक स्कूली छात्र आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पहुंचे हैं. एक छात्रा ने कहा, मैं बहुत उत्साहित हूं. मैं कल्पना चावला की तरह अंतरिक्ष यात्री बनना चाहती हूं. यहाँ देखें लाइव]]></description>
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<p><strong>चांद की उड़ान के लिए तैयार चंद्रयान-3, पूर्व इसरो चीफ बोले- नहीं फेल होगा मून मिशन</strong></p>



<p><strong>पूर्व इसरो चीफ बोले- नहीं फेल होगा मून मिशन</strong></p>



<p>इसरो के पूर्व चीफ माधवन नायर ने कहा, इंसानी रूप से जो कुछ भी संभव था, वो किया जा चुका है. मुझे ऐसा कोई कारण नहीं नजर आता कि मिशन चंद्रयान-3 फेल हो. चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण (लॉन्च) को देखने के लिए 200 से अधिक स्कूली छात्र आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पहुंचे हैं. एक छात्रा ने कहा, मैं बहुत उत्साहित हूं. मैं कल्पना चावला की तरह अंतरिक्ष यात्री बनना चाहती हूं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="361" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/chandryan-650x361.png" alt="" class="wp-image-76409" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/chandryan-650x361.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/chandryan-350x194.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/chandryan.png 753w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



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<p>यहाँ देखें लाइव </p>



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		<title>पटना का हर्ष इसरो अटल यान के एयर ब्रिदिंग सिस्टम रिसर्च में शामिल</title>
		<link>https://www.patnanow.com/patnas-harsh-involved-in-air-breathing-system-research-of-isro-atal-yan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Aug 2022 07:05:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[harsh rajput]]></category>
		<category><![CDATA[ISRO]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
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					<description><![CDATA[इसरो  के रॉकेट रिसर्च कार्यकम का हिस्सा बना बिहार का लाल सिर्फ 16 साल की उम्र में पाई बड़ी कामयाबी साढ़े तीन हजार में रिसर्चर में सबसे कम उम्र का है हर्ष अटल यान एक पुन: प्रयोज्य दो चरणों वाला राकेट बिहार की प्रतिभा ने पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रखा है दुनिया जानती और परख चुकी है बिहार का टैलेंट है. खेल के मैदान की बात हो या फिर पढ़ाई या फिर जमीन से आसमान तक सबमे बिहारी प्रतिभा ने अपनी छाप छोड़ी है. बिहार की धरती से ऐसी ही एक प्रतिभा ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. पटना में ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार को चलानेवाले शंभू सिंह के 16 साल के बेटे हर्ष राजपूत का चयन इसरो के भारत के पहले आरएलवी (री-यूजेबल लांच व्हीकल) राकेट &#8220;अटल यान&#8221; परियोजना के लिए किया गया है. यहां वह रॉकेट रिसर्च प्रोग्राम के लिए काम करेगा. भारत के पहले आरएलवी (री-यूजेबल लांच व्हीकल) राकेट &#8220;अटल यान&#8221; परियोजना के लिए पूरे भारत से साढ़े तीन हजार शोधकर्ताओं का चयन किया गया है. जिसमें हर्ष सबसे छोटा है. बिहार बाल भवन किलकारी के विज्ञान के छात्र हर्ष राजपूत फिलहाल 11वीं में है. डीआरडीओ और इसरो ने अटल यान आर्बिटएक्स इंडिया एरोस्पेस कंपनी को राकेट बनाने का काम दिया है. अटल यान एक पुन: प्रयोज्य दो चरणों वाला राकेट बनेगा. इसे आर्बिटएक्स द्वारा डिजाइन और निर्मित किया जाना है. यह कंपनी इसरो और डीआरडीओ से जुड़ी है. हर्ष को अटल यान के एयर ब्रिदिंग सिस्टम रिसर्च बोर्ड में काम करने का मौका [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इसरो  के रॉकेट रिसर्च कार्यकम का हिस्सा बना बिहार का लाल</strong></p>



<p><strong>सिर्फ 16 साल की उम्र में पाई बड़ी कामयाबी</strong></p>



<p><strong>साढ़े तीन हजार में रिसर्चर में सबसे कम उम्र का है हर्ष</strong></p>



<p><strong>अटल यान एक पुन: प्रयोज्य दो चरणों वाला राकेट</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="338" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/harsh-isro.png" alt="" class="wp-image-65613" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/harsh-isro.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/08/harsh-isro-350x182.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार की प्रतिभा ने पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रखा है दुनिया जानती और परख चुकी है बिहार का टैलेंट है. खेल के मैदान की बात हो या फिर पढ़ाई या फिर जमीन से आसमान तक सबमे बिहारी प्रतिभा ने अपनी छाप छोड़ी है. बिहार की धरती से ऐसी ही एक प्रतिभा ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. पटना में ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार को चलानेवाले शंभू सिंह के 16 साल के बेटे हर्ष राजपूत का चयन इसरो के भारत के पहले आरएलवी (री-यूजेबल लांच व्हीकल) राकेट &#8220;अटल यान&#8221; परियोजना के लिए किया गया है. यहां वह रॉकेट रिसर्च प्रोग्राम के लिए काम करेगा.</p>



<p>भारत के पहले आरएलवी (री-यूजेबल लांच व्हीकल) राकेट &#8220;अटल यान&#8221; परियोजना के लिए पूरे भारत से साढ़े तीन हजार शोधकर्ताओं का चयन किया गया है. जिसमें हर्ष सबसे छोटा है. बिहार बाल भवन किलकारी के विज्ञान के छात्र हर्ष राजपूत फिलहाल 11वीं में है. डीआरडीओ और इसरो ने अटल यान आर्बिटएक्स इंडिया एरोस्पेस कंपनी को राकेट बनाने का काम दिया है.</p>



<p>अटल यान एक पुन: प्रयोज्य दो चरणों वाला राकेट बनेगा. इसे आर्बिटएक्स द्वारा डिजाइन और निर्मित किया जाना है. यह कंपनी इसरो और डीआरडीओ से जुड़ी है. हर्ष को अटल यान के एयर ब्रिदिंग सिस्टम रिसर्च बोर्ड में काम करने का मौका मिलेगा. हर्ष ने बताया कि यह वायु श्वास प्रणाली है. एक वायु-श्वास राकेट इंजन लगभग आधी उड़ान के लिए हवा से आक्सीजन लेता है. अटल यान परियोजना छह बोर्डों में विभाजित है. प्रत्येक बोर्ड के लिए, एक मेंटर शोधकर्ता और एक सहायक निदेशक रखे गए हैं, जो शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="365" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/isro.png" alt="" class="wp-image-65614" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/isro.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/08/isro-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>हर्ष बिहार बाल भवन के संचालक के जरिए शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों की नजर में आए और इन्हें इसरो में इंटर्नशिप के लिए भेजा गया. बिहार बाल भवन किलकारी राज्य सरकार द्वारा संचालित है. यहां साधनविहीन वैसे छात्रों को अवसर प्रदान किया जाता है, जो नवाचार में रुचि रखते हैं. हर्ष राजपूत अटल यान के एयर ब्रिदिंग सिस्टम रिसर्च बोर्ड में तीन महीने की इंटर्नशिप कर चुके हैं. इन्हें आर्बिटएक्स से इंटर्नशिप का प्रमाणपत्र और शोधकर्ता का प्रमाणपत्र भी मिला है. उसी दौरान इनकी प्रतिभा को इसरो के विज्ञानियों ने पहचाना. हर्ष बताते हैं कि उनका परिवार बहुत कठिनाई में जीवन यापन करते हैं ,उनके पिता शंभु सिंह ई-रिक्शा चलाते हैं. पिता ही घर का सारा खर्च उठाते हैं. हर्ष की एक छोटी बहन है, जो आठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही है. हर्ष की मां गृहिणी हैं.लेकिन हर्ष में कामयाबी के शिखर पर पहुँचने का जूनून है और उसे पूरा विश्वास है कि वो अपने देश राज्य का नाम पूरी दुनिया में जरुर रौशन करेगा.</p>



<p><strong>ओम प्रकाश</strong></p>
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