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	<title>ipta &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>कबीर की निडरता और गांधी के सत्याग्रह का संदेश देती है &#8216;ढाई आखर प्रेम पदयात्रा&#8217;</title>
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		<pubDate>Mon, 16 Oct 2023 03:40:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ढाई आखर प्रेम राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था की शुरुआत भगत सिंह के जन्मदिवस 28 सितम्बर से शुरू हुई देश के 22 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में चल रहा है अभियान युवाओं के अंदर घृणा भड़कानेवाला और हिंसक होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा रवीन्द्र भारती पटना:ढाई आखर प्रेम राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था के बिहार पड़ाव &#8216;बापू के पदचिह्न&#8217; का समापन हो गया. प्रेम, बंधुत्व, समानता, न्याय और मानवता के राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत बिहार की पदयात्रा 7 अक्टूबर से शुरू हुई और लगातार आठ दिनों तक गली, मुहल्ले, गांव, शहर में पदयात्रा चलती रही. हाथों में लाठी, गले में खादी का सफ़ेद गमछा और कंधे से कमर तक लटका हुआ झोला पदयात्रियों की पहचान बना. अनवरत चलता हुआ जत्था &#8216;ढाई आखर प्रेम&#8217;, &#8216;तू खुद को बदल तो ये सारा ज़माना बदलेगा&#8217;, हम भारत से नफ़रत का हर दाग मिटाने आए हैं&#8217; गीत गा रहा था. पदयात्रा में सबसे आगे युवा लड़कियां खादी का बना बैनर हाथ में लिए थीं. ढाई आखर प्रेम का प्रतीक चिह्न, महात्मा गांधी की मुस्कुराती तस्वीर और बापू के पदचिह्न से मधुबनी पेंटिंग से सजा बैनर बरबस ही आकर्षित करता है. लगभग 45- 50 पदयात्री समूह चल रहे हैं. इस समूह में युवा, युवती और प्रौढ़ सभी शामिल थें. ऐसा जैसे एक पूरा परिवार चल रहा हो. उस राह पर जो देश दुनिया और समाज के दुःख से दुःखी हैं. अपनी नहीं, अपने देश की चिंता है. नफ़रत, घृणा और हिंसा के सामने प्रेम, सत्य और अहिंसा खड़ी है. ये युवा, प्रौढ़ कलाकार &#8211; अभिनेता- गायक- [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p><strong>ढाई आखर प्रेम राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था की शुरुआत भगत सिंह के जन्मदिवस 28 सितम्बर से शुरू हुई</strong></p>



<p><strong> देश के 22 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में चल रहा है अभियान</strong></p>



<p><strong>युवाओं के अंदर घृणा भड़कानेवाला और हिंसक होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा</strong></p>



<p class="has-vivid-purple-color has-text-color"><strong>रवीन्द्र भारती </strong></p>



<p>पटना:ढाई आखर प्रेम राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था के बिहार पड़ाव &#8216;बापू के पदचिह्न&#8217; का समापन हो गया. प्रेम, बंधुत्व, समानता, न्याय और मानवता के राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत बिहार की पदयात्रा 7 अक्टूबर से शुरू हुई और लगातार आठ दिनों तक गली, मुहल्ले, गांव, शहर में पदयात्रा चलती रही. हाथों में लाठी, गले में खादी का सफ़ेद गमछा और कंधे से कमर तक लटका हुआ झोला पदयात्रियों की पहचान बना. अनवरत चलता हुआ जत्था &#8216;ढाई आखर प्रेम&#8217;, &#8216;तू खुद को बदल तो ये सारा ज़माना बदलेगा&#8217;, हम भारत से नफ़रत का हर दाग मिटाने आए हैं&#8217; गीत गा रहा था.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/fcbed810-60aa-47c2-8ee4-ffead0bdf2d1-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-79414" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/fcbed810-60aa-47c2-8ee4-ffead0bdf2d1-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/fcbed810-60aa-47c2-8ee4-ffead0bdf2d1-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/fcbed810-60aa-47c2-8ee4-ffead0bdf2d1-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/fcbed810-60aa-47c2-8ee4-ffead0bdf2d1.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पदयात्रा में सबसे आगे युवा लड़कियां खादी का बना बैनर हाथ में लिए थीं. ढाई आखर प्रेम का प्रतीक चिह्न, महात्मा गांधी की मुस्कुराती तस्वीर और बापू के पदचिह्न से मधुबनी पेंटिंग से सजा बैनर बरबस ही आकर्षित करता है. लगभग 45- 50 पदयात्री समूह चल रहे हैं. इस समूह में युवा, युवती और प्रौढ़ सभी शामिल थें. ऐसा जैसे एक पूरा परिवार चल रहा हो. उस राह पर जो देश दुनिया और समाज के दुःख से दुःखी हैं. अपनी नहीं, अपने देश की चिंता है. नफ़रत, घृणा और हिंसा के सामने प्रेम, सत्य और अहिंसा खड़ी है. ये युवा, प्रौढ़ कलाकार &#8211; अभिनेता- गायक- संगीतकार हैं, लेखक- कव &#8211; नाटककार हैं, सामाजिक कार्यकर्ता हैं. इन्होंने असंख्य राष्ट्रीय मंचों पर देश और राज्य का गौरव बढ़ाया है. वे सभी सड़को-गलियों पर पैदल चलते हुए प्रेम, मोहब्बत के संदेश दे रहे हैं.</p>



<p>ढाई आखर प्रेम राष्ट्रीय सांस्कृतिक पदयात्रा की चर्चा करते हुए इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव तनवीर अख़्तर बताते हैं कि यह साथ- साथ रहने, खेलने, पढ़ने और अपने जीवन को सबसे अच्छे ढंग से जीने के लिए सामाजिक महत्व का राष्ट्रीय अभियान है. देश के 22 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में यह अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान से राष्ट्रीय स्तर पर इप्टा, प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, दलित लेखक संघ जैसे संगठन जुड़े हैं और राज्य स्तर पर कई और संगठन जुड़े हुए हैं. यह संख्या 200 से अधिक हो जाती है और लगातार बढ़ती ही जा रही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a63eb4cb-6b51-4e21-b8ed-58c78b662847-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-79415" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a63eb4cb-6b51-4e21-b8ed-58c78b662847-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a63eb4cb-6b51-4e21-b8ed-58c78b662847-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a63eb4cb-6b51-4e21-b8ed-58c78b662847-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a63eb4cb-6b51-4e21-b8ed-58c78b662847.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ढाई आखर प्रेम राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था की शुरुआत भगत सिंह के जन्मदिवस 28 सितम्बर से शुरू हुई और जत्था महात्मा गांधी के शहादत दिवस के अवसर पर अगले साल 30 जनवरी को समाप्त होगा. भगत सिंह और महात्मा गांधी के इस अभियान से जुड़ाव के महत्व को रेखांकित करते हुए इप्टा के राष्ट्रीय सचिव शैलेन्द्र कहते हैं कि यह अभियान सत्य, अहिंसा से अपने देश और देशवासियों से प्रेम का संदेश है. भगत सिंह ने बहरी ब्रितानी सरकार को सुनाने के लिए और गांधी ने कभी भी न झुकने वाली सरकार को नतमस्तक करने के लिए सत्याग्रह और जन भागीदारी का रास्ता चुना. आज जब देश में एक अजीब तरह की नफ़रत को बढ़ाया जा रहा है. युवाओं के अंदर घृणा भड़कानेवाला और हिंसक होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. महिलाओं के साथ अमानवीय हिंसा हो रही है. दलितों, मुसलमानों को जाति -धर्म के नाम पर सताया जा रहा है, हिंसा की जा रही है. ऐसे में महात्मा गांधी और भगत सिंह एक बार फिर प्रसांगिक हो जाते हैं. युवाओं में भगत सिंह रवानी और महात्मा गांधी की समग्रता इस देश की ज़रूरत हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a9430415-222f-4664-85f5-e08f90d14e7b-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-79416" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a9430415-222f-4664-85f5-e08f90d14e7b-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a9430415-222f-4664-85f5-e08f90d14e7b-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a9430415-222f-4664-85f5-e08f90d14e7b-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/a9430415-222f-4664-85f5-e08f90d14e7b.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color"><strong>बापू के पदचिह्न: बिहार पड़ाव</strong></p>



<p>राष्ट्रीय स्तर पर ढाई आखर प्रेम पदयात्रा की शुरुआत 28 सितम्बर को अलवर, राजस्थान से हुई. बिहार में इस यात्रा का उप नामकरण &#8216;बापू के पदचिह्न&#8217; रखा गया. इस संबंध में बिहार इप्टा के महासचिव फीरोज अशरफ खां जानकारी देते हैं कि बिहार ने महसूस किया कि झूठ और प्रोपेगेंडा के इस समय में पूरी दुनिया को एक चम्पारण और गांधी की तलाश है. नील के रूप में की जा रही झूठ, प्रोपेगेंडा की खेती के खिलाफ ढाई आखर प्रेम की पदयात्रा एक सत्याग्रह के रूप में चलाई जाए. ढाई आखर प्रेम की पदयात्रा को बिहार में इस सोच के साथ कनेक्ट किया गया. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चम्पारण सत्याग्रह ने तीन कठिया नील खेती के खिलाफ़ अंग्रेजी हुकूमत की नाफरमानी की उसी प्रकार ढाई आखर प्रेम की पदयात्रा झूठ, नफ़रत और घृणा के खिलाफ़ नाफरमानी को सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है. हम नाटक, गीत, नृत्य और सांस्कृतिक संवाद से सच बोलने, प्रेम करने और साथ मिलकर रहने का आह्वान करते हैं.</p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color"><strong>बिहार पड़ाव की शुरुआत</strong></p>



<p>ढाई आखर प्रेम पदयात्रा का बिहार पड़ाव बांकीपुर जंक्शन (वर्तमान में पटना जंक्शन) पर 7 अक्टूबर को प्रारंभ हुआ. प्लेटफॉर्म नंबर एक पर बापू के बिहार आगमन की याद में लगाए गए शिलापट्ट पर इप्टा के कार्यकारी अध्यक्ष राकेश वेदा, बिहार प्रगतिशील लेखक संघ महासचिव रविन्द्र नाथ राय और बिहार इप्टा के अध्यक्ष मंडल सदस्य समी अहमद के नेतृत्व में माल्यार्पण किया गया. जंक्शन परिसर में पदयात्रियों ने गीत गाए और ढाई आखर प्रेम का संदेश दिया. कलाकारों ने रहीम, कबीर के पदों से प्रेम का ताना बाना बुना.पटना यूथ हॉस्टल से पदयात्रा प्रारंभ हुई और महात्मा गांधी और भगत सिंह को प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर भिखारी ठाकुर रंगभूमि, दक्षिणी गांधी मैदान पहुंची.अस्थाई रूप से तैयार इस रंगभूमि पर पदयात्री कलाकारों ने जनगीत गाएं. कबीर की पदावली पर आधारित भाव नृत्य प्रस्तुत किया और नाटक का मंचन किया.</p>



<p>उपस्थित दर्शक समूह को संबोधित करते हुए इप्टा के कारी अध्यक्ष राकेश वेदा ने कहा कि ढाई आखर प्रेम की पदयात्रा एक ओर कबीर, रैदास, रहीम, मीरा, रसखान के पद्यों के बहाने इस राह को पहचानने की कोशिश है जो प्रेम करना सिखाता है. आदमी से आदमी को जोड़ता है. वहीं दूसरी ओर गांधी के सत्याग्रह को झूठ बोलने, नफ़रत करने की राजनीति के खिलाफ़ निडरता के खड़े होने आग्रह है. प्रख्यात चिकित्सक डॉ सत्यजीत ने कहा कि पदयात्रा शहर से गांव को कनेक्ट करने और साझे सांस्कृतिक विरासत को मज़बूत बनाने के लिए है. सामाजिक कार्यकर्ता रूपेश ने कहा कि कलाकारों, साहित्यकारों ने हर दौर में अपनी भूमिका सुनिश्चित की है. चाहे बंगाल का अकाल हो या आज़ादी की लड़ाई, आपातकाल के खिलाफ़ जन संघर्ष हो या नफ़रत के खिलाफ़ मोहब्बत का कारवां कलम और संगीत ने जनता के पक्ष को चुना है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/f8d64fa6-2066-45cd-983a-8f3dfcb29c5e-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-79417" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/f8d64fa6-2066-45cd-983a-8f3dfcb29c5e-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/f8d64fa6-2066-45cd-983a-8f3dfcb29c5e-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/f8d64fa6-2066-45cd-983a-8f3dfcb29c5e-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/f8d64fa6-2066-45cd-983a-8f3dfcb29c5e.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color"><strong>मुजफ्फरपुर पहुंची यात्रा, बापू कूप पर हुआ साहित्य संस्कृति का संगम</strong></p>



<p>ढाई आखर प्रेम की पदयात्रा 8 अक्टूबर के अहले सुबह मुज़फ्फरपुर पहुंची और छाता चौक पर जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पदयात्रा लंगट सिंह कॉलेज परिसर में स्थित बापू कूप पहुंची. अप्रैल 1917 में बापू ने यहाँ स्नान किया था और मोतिहारी के लिए रवाना हुए. बापू कूप के समीप पदयात्रियों ने &#8216;प्रेम का बंधन&#8217; और &#8216;गंगा की कसम जमुना की कसम&#8217; वाले गीत गाएं. कविताओं का पाठ हुआ और यात्रा के उद्देश्यों पर नागरिक चर्चा हुई.पदयात्रियों का जत्था जमालाबाद आश्रम (मूसहरी प्रखण्ड) पहुँचा, जहां जय प्रकाश-प्रभावती मुसहरी प्रवास स्वर्ण जयंती संवाद पदयात्रा का समापन हो रहा था. वहाँ जत्थे के साथियों ने उनसे मिलकर आपसी बातचीत के माध्यम से अपने-अपने उद्देश्यों का आदान-प्रदान किया और फिर पूर्वी चंपारण के लिए रवाना हो गए.</p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color"><strong>जसौली पट्टी और तीन कठिया के खिलाफ संघर्ष</strong></p>



<p>पदयात्रा अपने सात दिनों के प्रवास के लिए सूरज ढलते ही पूर्वी चम्पारण में प्रवेश कर तुरकौलिया प्रखण्ड के जसौली पट्टी गांव में प्रवेश कर गया. जसौली पट्टी ही चंपारण सत्याग्रह की पौधशाला है. गांधी जी के आदेश पर अंग्रेज नीलहों के खिलाफ जसौली पट्टी में ही आंदोलनकारी किसानों के बयान लिखे गये थे. चम्पारण सत्याग्रह के एक नायक लोमराज सिंह की कर्मभूमि में पदयात्रियों ने संध्या फेरी लगाई और देश से नफ़रत के हर दाग को मिटाने के गीत गए. शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में बड़ी संख्या महिलाओं, युवती और ग्रामीणों ने शिरकत की. रात्रि विश्राम के बाद पदयात्रियों का जत्था प्रभात फेरी करते हुए बनवीरवा, कोइरगावां, कंझिया, कोटवा बाज़ार, नागर चौक, हेमन्त छपरा, चिहुटाउन, गैर, अमवा, माधोपुर कमिटी चौक, सेवरिया, तुरकौलिया चौक, तुरकौलिया नीम पेड़, कोरईया, मटवा, बिशुनपुरवा, सपही जटवा, सपही आदर्श चौक, हादमरव, वृतिया, सपही बाज़ार, कोडरवां, चौलान्हा चौक, चौलान्हा बाज़ार चौक, अजगरी, पकड़िया, बत्तख मियां का मजार, इमदाद सिसवा पूर्वी की पदयात्रा 12 सितम्बर तक पूरी की गई.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/f4718d10-4cdf-44d6-95fc-85b8f6961b76-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-79418" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/f4718d10-4cdf-44d6-95fc-85b8f6961b76-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/f4718d10-4cdf-44d6-95fc-85b8f6961b76-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/f4718d10-4cdf-44d6-95fc-85b8f6961b76-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/f4718d10-4cdf-44d6-95fc-85b8f6961b76.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color"><strong>मोतिहारी शहर पहुंची यात्रा</strong></p>



<p>13 सितम्बर के दोपहर बाद ढाई आखर प्रेम पदयात्रा ने मोतिहारी शहर में प्रवेश किया. शहर के बलुआ बाजार, और एनसीसी कैंप के समीप के गली मुहल्लो में अभियान चलाया गया. रात्रि विश्राम के बाद बिहार पड़ाव के अंतिम दिन सुबह प्रभात फेरी निकाली गई. टाउन थाना चौक, अस्पताल रोड, महात्मा गांधी रोड, बंजारिया की पैदल यात्रा को गई और ढाई आखर प्रेम के संदेश साझा किया गए. इस दौरान बिहार इप्टा के महासचिव फीरोज अशरफ खां भी आज की पदयात्रा में शामिल हुए और उन्होंने कहा कि &#8220;ढाई आखर प्रेम का राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था बापू के पदचिह्न पर पदयात्रा करते हुए आज मोतिहारी शहर पहुंच गया. प्रेम, बंधुत्व, समानता, न्याय और मानवता के गीत गाते कलाकारों ने आमजन को जीवन से प्रेम करने और सबके लिए सुन्दर दुनिया बनाने का संदेश दिया. बापू के पदचिह्नों पर प्रेम के ढाई आखर की बात करने हम कलाकार, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता जनता के बीच हैं. हम समाज के तौर पर जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे हैं, वैसे- वैसे हममें दूरियाँ भी बढ़ती जा रही हैं. दूरियाँ बढ़ाई भी जा रही हैं. हम जो एक ताना-बाना में बुने हुए थे, उसे ख़त्म करने की कोशिश हो रही है. नफ़रत बढ़ाने वाले लोग बढ़ रहे हैं. हमारे टेलीविज़न चैनलों और मोबाइल पर दूरी पैदा करने वाले झूठ, नफ़रती कार्यक्रम, वीडियो और संदेश दिन-रात आ रहे हैं. वे हमें साथ रहना नहीं सिखाते. वे लड़ाना सिखाते हैं. हम यहाँ लड़ने या लड़ाने की बात करने नहीं आए हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/e26bf5bf-2e11-40fc-8451-dd15b3c74318-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-79425" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/e26bf5bf-2e11-40fc-8451-dd15b3c74318-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/e26bf5bf-2e11-40fc-8451-dd15b3c74318-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/e26bf5bf-2e11-40fc-8451-dd15b3c74318-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/e26bf5bf-2e11-40fc-8451-dd15b3c74318.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार और जेंडर कार्यकर्ता नसीरुद्दीन ने कहा कि हम बापू के पदचिह्नों पर चलने की कोशिश कर रहे हैं. बापू के पदचिह्न यानी बापू के बताए रास्तों को खोजने और उन पर चलने की कोशिश कर रहे हैं.बापू के पदचिह्न पर चलने का मतलब, सत्य, अहिंसा, प्रेम, सद्भाव की राह पर चलना.</p>



<p>महात्मा गांधी को याद करते हुए झारखण्ड से पदयात्रा में शामिल हुए इप्टा के राष्ट्रीय सचिव शैलेन्द्र ने कहा कि बापू अपने को हिन्दू मानते और खुलकर कहते थे. वे बार-बार कहते थे, ‘मैं अपने आपको केवल हिन्दू ही नहीं, बल्कि ईसाई, मुसलमान, यहूदी, सिख, पारसी, जैन या किसी भी अन्य सम्प्रदाय का अनुयायी बताता हूँ. इसका मतलब यह है कि मैंने अन्य सभी धर्मों और सम्प्रदायों की अच्छाइयों को ग्रहण कर लिया है. इस प्रकार मैं हर प्रकार के झगड़े से बचता हूँ और धर्म की कल्पना का विस्तार करता हूँ.’ यह बात उन्होंने 10 जनवरी 1947 को कही थी.  यानी एक धर्म मानने का मतलब यह नहीं होता कि हम दूसरे धर्मों के ख़िलाफ़ हो जाएँ. हमें साथ- साथ रहना है तो साथ-साथ प्रेम से जीना ही होगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/c8a1f999-67d2-4609-86ce-9eb8a4bfbb76-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-79420" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/c8a1f999-67d2-4609-86ce-9eb8a4bfbb76-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/c8a1f999-67d2-4609-86ce-9eb8a4bfbb76-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/c8a1f999-67d2-4609-86ce-9eb8a4bfbb76-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/c8a1f999-67d2-4609-86ce-9eb8a4bfbb76.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कार्यक्रम संयोजक अमर ने कहा कि हम बापू के ऐसे ही संदेश लेकर आए हैं. बापू ने इसी कोशिश में अपनी जान दे दी. उन लोगों ने उनकी जान ले ली जो हमें एकसाथ मिलकर रहते हुए देखना नहीं चाहते थे. बापू के पदचिह्न पर चलने का मतलब है, दूसरों के लिए जान देना. किसी की जान लेना नहीं. आइए हम सब अपनी ज़िंदगी में प्रेम के ढाई आखर को याद रखें. अहिंसा, नम्रता और सत्य को याद रखें. क्योंकि बापू मानना था, ‘सत्य ही परमेश्वर है…’.</p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color"><strong>समापन समारोह का गवाह बना गांधी संग्रहालय</strong></p>



<p>14 अक्टूबर को दोपहर बाद गांधी स्मृति संग्रहालय परिसर में ढाई आखर प्रेम बिहार पड़ाव का समापन समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम का आगाज &#8216;हम है इसके मालिक हिन्दुस्तान हमारा&#8217; के गायन से किया गया. समापन समारोह को संबोधित करते हुए लखनऊ से आए वरिष्ठ पत्रकार नासीरुद्दीन ने उक्त बातें कहीं. उन्होंने कहा कि आज हर देश को गांधी की ज़रूरत है. चाहे वो हमारा देश हो या फिलीस्तीन, इस्राइल, कनाडा. सबको गांधी के सत्याग्रह की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि आज देश दुनिया को एक बार फिर से एक चम्पारण और गांधी की ज़रूरत है. वो गांधी जो निडर होकर सच बोलने और प्रेम करना सिखाए. हिंसा, नफ़रत और युद्ध की कोई जरूरत नहीं है. बच्चे पढ़ना चाहते हैं. युवा को रोजगार की गारंटी चाहिए और सबको सत्ता, समाज और विकास में समानुपातिक हिस्सेदारी चाहिए. इसलिए आदमी से आदमी का प्रेम करना और सच को निर्भीकता से कहना ही सत्याग्रह है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/241edfa9-8258-4419-8857-0af35f716363-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-79421" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/241edfa9-8258-4419-8857-0af35f716363-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/241edfa9-8258-4419-8857-0af35f716363-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/241edfa9-8258-4419-8857-0af35f716363-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/241edfa9-8258-4419-8857-0af35f716363.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इप्टा के राष्ट्रीय सचिव शैलेन्द्र ने कहा कि प्रेम, बंधुत्व, समानता, न्याय और मानवता के संदेश लेकर पूरे देश में कलाकार, साहित्यकार, कवि, लेखक, नाटक करने वाले, गीत गाने वाले, हंसने और हंसाने वाले, सबकी भागीदारी में विश्वास रखने वाले इसी प्रकार से पदयात्रा कर रहे हैं. ढाई आखर प्रेम राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था 28 सितम्बर से अलवर, राजस्थान से शुरू हुआ और 30 जनवरी 2021 को दिल्ली में समाप्त होगा. 22 राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों में सांस्कृतिक सामाजिक महत्व के इलाके में पदयात्रा की जा रही है. इस यात्रा का बिहार पड़ाव 7 अक्टूबर से प्रारंभ होकर आज यहां समाप्त हो रहा है तो कल से पदयात्रा पंजाब में शुरू होगी. महात्मा गांधी के शहादत दिवस 30 जनवरी तक निरंतर यह यात्रा चलती रहेगी. प्रेम का संदेश पूरे देश में फैलता रहेगा.सामाजिक कार्यकर्ता शरद कुमारी ने कहा कि प्रेम और बंधुता की सबसे बढ़ी वाहक हैं. हम प्रेम करती हैं और प्रेम बढ़ती हैं. लेकिन जो कुछ मणिपुर में हो रहा है और हुआ उससे विचलित हैं. आईए अपने घर, परिवार और समाज की महिलाओं से प्रेम करें.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/650b14be-738a-4bfe-bcad-b9b0c4b29f4e-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-79422" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/650b14be-738a-4bfe-bcad-b9b0c4b29f4e-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/650b14be-738a-4bfe-bcad-b9b0c4b29f4e-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/650b14be-738a-4bfe-bcad-b9b0c4b29f4e-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/650b14be-738a-4bfe-bcad-b9b0c4b29f4e.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार इप्टा के कार्यवाहक महासचिव फीरोज अशरफ खां ने कहा कि ढाई आखर प्रेम राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था का बिहार पड़ाव महात्मा गांधी के पदचिह्न पर चलकर प्रेम का संदेश देने का प्रयास है. चम्पारण सत्याग्रह ने देश को अंग्रेजी गुलामी से मुक्ति की राह खोली थी और हम इस ढाई आखर प्रेम पदयात्रा से नफ़रत, हिंसा और घृणा से मुक्ति का आह्वान करते हैं. इस पदयात्रा में हम बांकीपुर जंक्शन (पटना जंक्शन) से मुजफ्फरपुर में बापू कूप (लंगट सिंह कॉलेज) पहुंचे और उसके बाद सात दिनों तक पूर्वी चम्पारण के गांव गांव में पदयात्रा घूमी. प्रेम के संदेश को जनगीत, नाटक और नृत्य में प्रस्तुत किया.</p>



<p>ढाई आखर प्रेम पदयात्रा के स्थानीय संयोजक अमर भाई से स्वागत करते हुए कहा कि यह पदयात्रा आदमी से आदमी को जोड़ने की यात्रा है. हर पड़ाव, हर चौराहे पर समुदाय के पदयात्रियों ने खाना खाया, पानी पिया और आराम की. गांव की महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने पदयात्रियों के मिलाकर इसको सफल बनाया. यही इस पदयात्रा की सफलता का सूत्र है कि सारे रास्तों में हम बापू के जन बनाते गए और लोगों को जोड़ते गए हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ac457a2b-50f3-4052-b37f-615f53049580-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-79423" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ac457a2b-50f3-4052-b37f-615f53049580-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ac457a2b-50f3-4052-b37f-615f53049580-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ac457a2b-50f3-4052-b37f-615f53049580-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/ac457a2b-50f3-4052-b37f-615f53049580.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इस मौके पर ब्रजकिशोर सिंह (सचिव, गांधी संग्रहालय), डा० परवेज (अध्यक्ष, जिला शांति समिति), श्रीमती शशिकला (पूर्व प्राचार्य, जिला स्कूल), ई० गप्पू राय, बरकत खां, मुमताज़ आलम, गुलरेज शहजाद (पूर्व पार्षद), पारसनाथ (अवकाश प्राप्त शिक्षक), विनय कुमार सिंह (सह संयोजक, आयोजन समिति, ढाई आखर प्रेम), कपिलेश्वर राम, विनोद कुमार, इंद्रभूषण रमन बमबम, चांदना झा आदि ने भी भागीदारी की.धन्यवाद ज्ञापन आयोजन समिति के सह संयोजक मंकेश्वर पाण्डेय के किया और गांधी स्मृति संग्रहालय और मोतिहारी के आवाम को आभार व्यक्त किया.</p>



<p>ढाई आखर प्रेम राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था ने पीयूष सिंह के नेतृत्व में &#8216;रघुपति राघव राजा राम&#8217; की प्रस्तुति हुई. एस एस हिमांशु ने &#8216;तू खुद को बदल&#8217;, राजेंद्र प्रसाद राय ने &#8216;खदिया पहेन के ना&#8217; और लक्ष्मी यादव ने &#8216;बढ़े चलो नौजवान&#8217; एवं &#8216;कैसे जइबे है सजानिया&#8217; का गायन किया. मधुबनी, सिवान और भागलपुर इप्टा के कलाकारों ने नृत्य की प्रस्तुति की.रायपुर (छत्तीसगढ़) से आए निसार और देवराज की जोड़ी ने गम्मत शैली में नाटक की प्रस्तुति की. राजन ने भगत सिंह के अंतिम पत्र का नाटकीय पाठ किया.सांस्कृतिक कार्यक्रम का समापन शंकर शैलेंद्र के कालजयी गीत &#8216;तू ज़िंदा है तू ज़िन्दगी के जीत में यकीन कर&#8217; के गायन से हुई.</p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color"><strong>स्थानीय आयोजन समिति की अथक प्रयास ने ग्रामीणों को जोड़ा</strong></p>



<p>चम्पारण के स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को जोड़कर एक आयोजन समिति का गठन किया. इस समिति संयोजक अमर भाई और सह संयोजक विनय कुमार सिंह एवं मंकेश्वर पाण्डेय बनाए गए. समिति के अन्य सदस्य हमीद रजा, अजहर हुसैन अंसारी, दिग्विजय कुमार और उमा शंकर प्रसाद बनाए गए. इस समिति पूरी पदयात्रा को नागरिक कार्यक्रम रूप में बनाने की कोशिश की. पदयात्रियों के स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं ने भी कदम से कदम मिला कर पदयात्रा की. घर घर से खाना बटोरकर पदयात्रियों के भोजन और जलपान की व्यवस्था की. अपने घर से पुआल, चादर लाकर रात्रि विश्राम का प्रबंध किया. जिससे जो बन पड़ा, जो बना सके वह सब खिलाया और ढाई आखर प्रेम से जुड़े.</p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color"><strong>सांस्कृतिक कार्यक्रम ने जोड़े दिल</strong></p>



<p>रितेश रंजन, एस एस हिमांशु और पीयूष सिंह के संयोजकत्व पदयात्रियों का जत्था लगातार आठ दिनों तक चलता रहा. 35 स्थायी पदयात्री और रोजाना 15-20 की संख्या में जुड़ने वाले सह सहयात्रियों को इंद्र भूषण रमण बमबम ने संयोजित किया. जनगीत, नृत्य और नाटक आकर्षण के केन्द्र रहें. रायपुर छत्तीसगढ़ से आए निसार और देवराज की जोड़ी ने गम्मत शैली में नाटक प्रस्तुत कर हर जगह अपनी अलग पहचान बनाई. मधुबनी, सिवान और भागलपुर के दल ने नृत्य की प्रस्तुति कर ग्रामीणों को मुग्ध कर दिया तो वहीं राजन द्वारा भगत सिंह के अंतिम पत्र के पाठ ने दर्शकों को रोमांचित किया.</p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color"><strong>ढाई आखर प्रेम राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम पंजाब में</strong></p>



<p>बिहार पड़ाव के खत्म होते पदयात्रा पंजाब, उत्तराखंड, उड़ीसा, जम्मू, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में एक एक करके शुरू होने को तैयार है.</p>



<p></p>
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		<title>बिहार पहुँची &#8216;ढाई आखर प्रेम&#8217; पदयात्रा</title>
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		<pubDate>Fri, 06 Oct 2023 14:12:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रेम, बंधुत्व, न्याय, समानता और मानवता के संदेश के साथ पहुंची है यात्रा पदयात्रा का शुभारंभ 7 अक्टूबर 2023 को भिखारी ठाकुर रंगभूमि, गांधी मैदान में होगा देश के सांस्कृतिक और साहित्यिक संगठनों की राष्ट्रीय सांस्कृतिक पदयात्रा 7 अक्टूबर 2023 से बिहार में होगी &#8216;ढाई आखर प्रेम&#8217;राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था&#8221; के अंतर्गत बिहार के  नाट्यकर्मी, लेखक, कवि, अभिनेता, गायक और सामजिक कार्यकर्ता पटना, मुजफ्फरपुर और मोतिहारी की पदयात्रा करेंगे. पदयात्रा के अंतर्गत नाटक, गीत, नृत्य और लोकप्रिय संवाद प्रस्तुत किये जायेंगे. उल्लेखनीय है कि इप्टा ने पिछले साल आजादी के 75वें वर्ष के अवसर पर ‘ढाई आखर प्रेम’ सांस्कृतिक यात्रा’ की शुरुआत 9 अप्रैल 2022 को रायपुर छत्तीसगढ़ से की थी. इस यात्रा में इप्टा ने अपने नाटकों, गीतों, नृत्य एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के 300 से अधिक गांवों, कस्बों, शहरों में आत्मीय संबंध स्थापित करते हुए प्रेम, समन्वय, सौहार्द और एकजुटता का संदेश दिया गया. यात्रा का समापन 22 मई 2022 को इंदौर में हुआ.डाल्टनगंज (झारखंड) में हुए इप्टा के राष्ट्रीय अधिवेशन ने फैसला लिया कि भगत सिंह के जन्मदिन 28 सिंतबर 2023 से पूरे देश में ‘ढाई आखर प्रेम&#8217; राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था’ पदयात्रा की जाएगी, जिसका समापन महात्मा गांधी के शहादत दिवस 30 जनवरी 2024 को दिल्ली में होगा. देश के सांस्कृतिक और साहित्यिक संगठनों की राष्ट्रीय सांस्कृतिक पदयात्रा 7 अक्टूबर 2023 से बिहार में होगी. &#8220;ढाई आखर प्रेम: राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था&#8221; के अंतर्गत बिहार का नाट्यकर्मी, लेखक, कवि, अभिनेता, गायक और सामजिक कार्यकर्ता पटना, मुजफ्फरपुर और मोतिहारी की पदयात्रा करेंगे. पदयात्रा के अंतर्गत नाटक, गीत, नृत्य और लोकप्रिय संवाद प्रस्तुत किये जायेंगे. उल्लेखनीय है कि इप्टा ने पिछले साल आजादी के 75वें वर्ष के अवसर पर ‘ढाई आखर प्रेमः सांस्कृतिक यात्रा’ की शुरुआत 9 अप्रैल 2022 को रायपुर छत्तीसगढ़ से की थी. इस [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p></p>



<p><strong>प्रेम, बंधुत्व, न्याय, समानता और मानवता के संदेश के साथ पहुंची है यात्रा</strong></p>



<p><strong>पदयात्रा का शुभारंभ 7 अक्टूबर 2023 को भिखारी ठाकुर रंगभूमि, गांधी मैदान में होगा</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/46172bb9-f1b1-429c-a197-fc77ef35bac4-650x650.jpeg" alt="" class="wp-image-78960" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/46172bb9-f1b1-429c-a197-fc77ef35bac4-650x650.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/46172bb9-f1b1-429c-a197-fc77ef35bac4-350x350.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/46172bb9-f1b1-429c-a197-fc77ef35bac4-250x250.jpeg 250w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/46172bb9-f1b1-429c-a197-fc77ef35bac4-768x768.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/46172bb9-f1b1-429c-a197-fc77ef35bac4.jpeg 1080w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>देश के सांस्कृतिक और साहित्यिक संगठनों की राष्ट्रीय सांस्कृतिक पदयात्रा 7 अक्टूबर 2023 से बिहार में होगी &#8216;ढाई आखर प्रेम&#8217;राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था&#8221; के अंतर्गत बिहार के  नाट्यकर्मी, लेखक, कवि, अभिनेता, गायक और सामजिक कार्यकर्ता पटना, मुजफ्फरपुर और मोतिहारी की पदयात्रा करेंगे. पदयात्रा के अंतर्गत नाटक, गीत, नृत्य और लोकप्रिय संवाद प्रस्तुत किये जायेंगे. उल्लेखनीय है कि इप्टा ने पिछले साल आजादी के 75वें वर्ष के अवसर पर ‘ढाई आखर प्रेम’ सांस्कृतिक यात्रा’ की शुरुआत 9 अप्रैल 2022 को रायपुर छत्तीसगढ़ से की थी. </p>



<p>इस यात्रा में इप्टा ने अपने नाटकों, गीतों, नृत्य एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के 300 से अधिक गांवों, कस्बों, शहरों में आत्मीय संबंध स्थापित करते हुए प्रेम, समन्वय, सौहार्द और एकजुटता का संदेश दिया गया. यात्रा का समापन 22 मई 2022 को इंदौर में हुआ.डाल्टनगंज (झारखंड) में हुए इप्टा के राष्ट्रीय अधिवेशन ने फैसला लिया कि भगत सिंह के जन्मदिन 28 सिंतबर 2023 से पूरे देश में ‘ढाई आखर प्रेम&#8217; राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था’ पदयात्रा की जाएगी, जिसका समापन महात्मा गांधी के शहादत दिवस 30 जनवरी 2024 को दिल्ली में होगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/cc5ebecb-6efd-4871-8285-5c381483fbfa-650x488.jpeg" alt="" class="wp-image-78958" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/cc5ebecb-6efd-4871-8285-5c381483fbfa-650x488.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/cc5ebecb-6efd-4871-8285-5c381483fbfa-350x263.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/cc5ebecb-6efd-4871-8285-5c381483fbfa-768x576.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/cc5ebecb-6efd-4871-8285-5c381483fbfa.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>देश के सांस्कृतिक और साहित्यिक संगठनों की राष्ट्रीय सांस्कृतिक पदयात्रा 7 अक्टूबर 2023 से बिहार में होगी. &#8220;ढाई आखर प्रेम: राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था&#8221; के अंतर्गत बिहार का नाट्यकर्मी, लेखक, कवि, अभिनेता, गायक और सामजिक कार्यकर्ता पटना, मुजफ्फरपुर और मोतिहारी की पदयात्रा करेंगे. पदयात्रा के अंतर्गत नाटक, गीत, नृत्य और लोकप्रिय संवाद प्रस्तुत किये जायेंगे. उल्लेखनीय है कि इप्टा ने पिछले साल आजादी के 75वें वर्ष के अवसर पर ‘ढाई आखर प्रेमः सांस्कृतिक यात्रा’ की शुरुआत 9 अप्रैल 2022 को रायपुर छत्तीसगढ़ से की थी. इस यात्रा में इप्टा ने अपने नाटकों, गीतों, नृत्य एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के 300 से अधिक गांवों, कस्बों, शहरों में आत्मीय संबंध स्थापित करते हुए प्रेम, समन्वय, सौहार्द और एकजुटता का संदेश दिया गया. यात्रा का समापन 22 मई 2022 को इंदौर में हुआ.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="333" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/73681f30-2bc0-454e-a7d1-90895ce05fa6-650x333.jpeg" alt="" class="wp-image-78959" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/73681f30-2bc0-454e-a7d1-90895ce05fa6-650x333.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/73681f30-2bc0-454e-a7d1-90895ce05fa6-350x179.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/73681f30-2bc0-454e-a7d1-90895ce05fa6-768x394.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/73681f30-2bc0-454e-a7d1-90895ce05fa6.jpeg 1141w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>डाल्टनगंज (झारखंड) में हुए इप्टा के राष्ट्रीय अधिवेशन ने फैसला लिया कि भगत सिंह के जन्मदिन 28 सिंतबर 2023 से पूरे देश में ‘ढाई आखर प्रेमः राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था’ पदयात्रा की जाएगी, जिसका समापन महात्मा गांधी के शहादत दिवस 30 जनवरी 2024 को दिल्ली में होगा. जत्था का बिहार पड़ाव 7 से 14 अक्टूबर 2023 तक पटना, मुजफ्फरपुर और मोतिहारी (पूर्वी चम्पारण) में निर्धारित है. 7 अक्टूबर को बाँकीपुर जंक्शन (वर्तमान में पटना जंक्शन), जहाँ 1917 महात्मा गाँधी पहली बार बिहार आए और चम्पारण सत्याग्रह का नेतृत्व किया, से पदयात्रा की शुरुआत होगी. गाँधी मैदान के समीप भगत सिंह और महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के उपरांत भिखारी ठाकुर रंगभूमि, दक्षिणी गाँधी मैदान में सांस्कृतिक प्रस्तुति की जायेगी. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="459" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/bbe5e913-e592-4278-8e3c-015b0010b898-459x650.jpeg" alt="" class="wp-image-78961" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/bbe5e913-e592-4278-8e3c-015b0010b898-459x650.jpeg 459w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/bbe5e913-e592-4278-8e3c-015b0010b898-247x350.jpeg 247w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/bbe5e913-e592-4278-8e3c-015b0010b898-768x1086.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/bbe5e913-e592-4278-8e3c-015b0010b898-1086x1536.jpeg 1086w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/bbe5e913-e592-4278-8e3c-015b0010b898.jpeg 1131w" sizes="(max-width: 459px) 100vw, 459px" /></figure>



<p>8 अक्टूबर को महात्मा गांधी के मुजफ्फरपुर पड़ाव और निलहे आन्दोलन की कर्मभूमि चम्पारण के जसौली पट्टी से ढाई आखर प्रेम की पदयात्रा की जायेगी. प्यार, मोहब्बत और इन्सानियत का संवाद करते, गीत गाते, उनकी सुनते, अपनी सुनाते, बतख मियां की बात बताते हुए 8 से 14 अक्टूबर 2023 की शाम को गाँधी स्मारक संग्रहालय (मोतिहारी) समाप्त होगी. पदयात्रा का शुभारंभ 7 अक्टूबर 2023 को भिखारी ठाकुर रंगभूमि, गांधी मैदान में होगा और 8 अक्टूबर 2023 को जसौलीपट्टी (मोतिहारी) में सांस्कृतिक संध्या होगी. पदयात्रा के शुभारम्भ के अवसर पर गाँधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में नाटक और जनगीत प्रस्तुत होंगे. संस्कृतिकर्मी, साहित्यकार और सामजिक कार्यकर्ता सहित दर्जन भर सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्थाओं का जुटान होगा. कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छआया नाचा लोक नाट्यशैली की प्रस्तुति होगी. सीताराम सिंह के नेतृत्व में जनगीतों की प्रस्तुति होगी. </p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>चंद्रेश्वर : जैसा मैंने समझा : पवन बख़्शी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/chandreshwar-as-i-understand-pawan-bakshi/</link>
		
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		<pubDate>Tue, 19 Sep 2023 15:10:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[balram pur]]></category>
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					<description><![CDATA[ उन्होंने सुख-दुख, सपनों, चिंताओं, संघर्षों और आकांक्षाओं को रेखांकित किया चंद्रेश्वर महारानी लाल कुँवरि स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलरामपुर में  प्रोफ़ेसर, हिन्दी रह चुके हैं . एम. एल.के,पी.जी. कालेज के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो दिनांक 1 नवम्बर 2021 को हिन्दी के  एसोसिएट प्रोफ़ेसर से प्रोफ़ेसर बने तथा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश के कुलपति प्रोफ़ेसर सुरेन्द्र दुबे के आदेश पर आपको 11 जनवरी 2019 को विभागाध्यक्ष, हिन्दी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ .  यहाँ से आपने 30 जून 2022 को अवकाश ग्रहण किया है . हिन्दी की लगभग सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में सन् 1982-83 से कविताओं और आलोचनात्मक लेखों का लगातार प्रकाशन जारी है. आपकी अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं . आपके तीन कविता संग्रह -&#8216;अब भी'( 2010 ), &#8216;सामने से मेरे&#8217;  (2017) एवं &#8216;डुमराँव नज़र आयेगा&#8217; ( 2021) प्रकाशित हो चुके हैं . एक शोधालोचना की पुस्तक &#8216;भारत में जन नाट्य आंदोलन&#8217; (1994 में) प्रकाशित  होकर बहुचर्चित-प्रशंसित ; एक साक्षात्कार की पुस्तिका &#8216;इप्टा-आंदोलनःकुछ साक्षात्कार&#8217; (1998) का भी प्रकाशन हो चुका है . अभी जल्दी ही उन की दो पुस्तकें  &#8216;मेरा बलरामपुर&#8217; (स्मृति आख्यान), (2021) तथा भोजपुरी गद्य की पुस्तक&#8211;&#8216;हमार गाँव&#8217; (स्मृति आख्यान) (2020) प्रकाशित हुई हैं . चंद्रेश्वर जी ने बलरामपुर के प्रसिद्ध महारानी लाल कुँवरि डिग्री कॉलेज में वर्षों तक अध्यापन किया है . वहाँ रहते हुए, पढ़ाते हुए, जीते हुए, लोगों से मिलते हुए उन्होंने जो महसूस किया, जो घटनाएं उनके साथ घटीं, उन्होंने जो देखा, उसे साहस व ईमानदारी के साथ लिखा है. इस कृति (मेरा बलरामपुर) से गुज़रना एक शहर को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> उन्होंने सुख-दुख, सपनों, चिंताओं, संघर्षों और आकांक्षाओं को रेखांकित किया</strong></p>



<p>चंद्रेश्वर महारानी लाल कुँवरि स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलरामपुर में  प्रोफ़ेसर, हिन्दी रह चुके हैं . एम. एल.के,पी.जी. कालेज के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो दिनांक 1 नवम्बर 2021 को हिन्दी के  एसोसिएट प्रोफ़ेसर से प्रोफ़ेसर बने तथा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश के कुलपति प्रोफ़ेसर सुरेन्द्र दुबे के आदेश पर आपको 11 जनवरी 2019 को विभागाध्यक्ष, हिन्दी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ .  यहाँ से आपने 30 जून 2022 को अवकाश ग्रहण किया है . हिन्दी की लगभग सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में सन् 1982-83 से कविताओं और आलोचनात्मक लेखों का लगातार प्रकाशन जारी है. आपकी अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं . आपके तीन कविता संग्रह -&#8216;अब भी'( 2010 ), &#8216;सामने से मेरे&#8217;  (2017) एवं &#8216;डुमराँव नज़र आयेगा&#8217; ( 2021) प्रकाशित हो चुके हैं .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="352" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/1b4a0aa0-8aa5-4dc5-ba9b-02f1511c435a-650x352.jpeg" alt="" class="wp-image-78287" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/1b4a0aa0-8aa5-4dc5-ba9b-02f1511c435a-650x352.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/1b4a0aa0-8aa5-4dc5-ba9b-02f1511c435a-350x190.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/1b4a0aa0-8aa5-4dc5-ba9b-02f1511c435a.jpeg 720w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>एक शोधालोचना की पुस्तक &#8216;भारत में जन नाट्य आंदोलन&#8217; (1994 में) प्रकाशित  होकर बहुचर्चित-प्रशंसित ; एक साक्षात्कार की पुस्तिका &#8216;इप्टा-आंदोलनःकुछ साक्षात्कार&#8217; (1998) का भी प्रकाशन हो चुका है . अभी जल्दी ही उन की दो पुस्तकें  &#8216;मेरा बलरामपुर&#8217; (स्मृति आख्यान), (2021) तथा भोजपुरी गद्य की पुस्तक&#8211;&#8216;हमार गाँव&#8217; (स्मृति आख्यान) (2020) प्रकाशित हुई हैं . चंद्रेश्वर जी ने बलरामपुर के प्रसिद्ध महारानी लाल कुँवरि डिग्री कॉलेज में वर्षों तक अध्यापन किया है . वहाँ रहते हुए, पढ़ाते हुए, जीते हुए, लोगों से मिलते हुए उन्होंने जो महसूस किया, जो घटनाएं उनके साथ घटीं, उन्होंने जो देखा, उसे साहस व ईमानदारी के साथ लिखा है. इस कृति (मेरा बलरामपुर) से गुज़रना एक शहर को जानना भर नहीं है ; बल्कि बीती सदी के अंतिम दो दशकों से लेकर नई सदी के शुरुआती दो दशकों में कस्बाई शहरों की संस्कृति व समाज में जो परिवर्तन घटित हुए हैं, जो ठहराव रूढ़ि बनकर रह गए हैं, उनसे रू-ब-रू होना भी है. इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने हर वर्ग को टटोला है. उनके सुख-दुख, सपनों, चिंताओं, संघर्षों और आकांक्षाओं को रेखांकित किया है .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="345" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/53a509c4-2927-424c-85ab-869b9ced1094-650x345.jpeg" alt="" class="wp-image-78288" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/53a509c4-2927-424c-85ab-869b9ced1094-650x345.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/53a509c4-2927-424c-85ab-869b9ced1094-350x186.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/53a509c4-2927-424c-85ab-869b9ced1094.jpeg 720w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>एक संस्मरण याद आता है &#8211;</strong></p>



<p>मेरा बलरामपुर जाना बहुत कम रहता है . ज्यादातर मैं लखनऊ और हिमाचल में रहता हूं . एक बार की बात है, मैं लखनऊ में था और मुझे कुछ घंटों के लिए बलरामपुर जाना था . लखनऊ से मैंने अपने परिचित की कार मांगी और बलरामपुर गया . यह सोच कर कि अगले दिन दोपहर तक वापिस लखनऊ पहुँच जाऊंगा . जब मैं बलरामपुर पहुंचा तो उसी दिन अपने मिलने मिलाने वालों से मिल चुका था. अगले दिन मैंने बलरामपुर से लखनऊ चलने के पहले सोचा कि चंद्रेश्वर जी से मिल लूं . मैंने उनको फोन किया तो पता चला कि वह कॉलेज में हैं और आज ही लखनऊ जाने वाले हैं . मैंने उनसे कहा यदि जल्दी चलना हो मेरे साथ ही चलें, मुझे भी लखनऊ जाना है और मेरे पास मेरे एक मित्र की कार है .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="473" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/769e3e27-eaa8-4cd0-b123-f52862297524-473x650.jpeg" alt="" class="wp-image-78289" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/769e3e27-eaa8-4cd0-b123-f52862297524-473x650.jpeg 473w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/769e3e27-eaa8-4cd0-b123-f52862297524-254x350.jpeg 254w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/769e3e27-eaa8-4cd0-b123-f52862297524.jpeg 698w" sizes="(max-width: 473px) 100vw, 473px" /></figure>



<p>मैंने अपने मित्र से कहा था कि मैं दो बजे तक वापस आ जाऊंगा लखनऊ पहुंच जाऊंगा. चंद्रेश्वर जी मिलने जब मैं कॉलेज पहुंचा तो देखा कॉलेज में परीक्षाएं चल रही हैं और चंद्रेश्वर जी परीक्षा वाले कमरे के बाहर बैठे हुए थे . उनके साथ दो-तीन प्रोफेसर और भी बैठे हुए थे . मैं वहीं चला गया . चंद्रेश्वर जी बड़ी आत्मीयता से मिले उन्होंने अन्य लोगों से मेरा परिचय करवाया . उनमें से एक दो लोग मुझे पहले से ही से जानते हुए थे . मुझे पता चला कि चंद्रेश्वर जी परीक्षा समाप्त होने के बाद ही चल सकेंगे . मैं बड़ा असमंजस में था कि क्या करूं ? वहीँ  पर उन्होंने मुझे अपनी लिखी एक काव्य पुस्तक ‘सामने से मेरे’ भेंट की और तुरंत अपने मोबाइल से पुस्तक भेंट करते हुए चित्र लिया और उसी क्षण फेसबुक पर पोस्ट कर दिया  .</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="346" height="480" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/743e5c2d-77f8-4a28-81b8-5fcf432fdc08.jpeg" alt="" class="wp-image-78290" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/743e5c2d-77f8-4a28-81b8-5fcf432fdc08.jpeg 346w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/743e5c2d-77f8-4a28-81b8-5fcf432fdc08-252x350.jpeg 252w" sizes="(max-width: 346px) 100vw, 346px" /></figure>



<p></p>



<p>दो बजे तक लखनऊ पहुंचने के लिए मैंने वायदा किया हुआ था . दूसरी ओर अभी एक घंटे बाद परीक्षाएं खत्म होंगी, तब यहां से चलेंगे तो हम लोग 5-6 बजे से पहले नहीं पहुंच पाएंगे . फिर कभी चंद्रेश्वर से कब मुलाकात होगी, इसका कोई अनुमान ना था . मैं यह मुलाकात छोड़ना भी नहीं चाहता था कि कई घंटे एक साथ रहेंगे और बातें होंगी . मैंने लखनऊ अपने परिचित को फोन कर दिया कि किसी कारणवश मैं शाम को 6-7 बजे से पहले नहीं पहुंच पाऊँगा . उन्होंने कहा कोई बात नहीं आप आराम से आइए . मैं निश्चिंत हो गया क्योंकि मैं चंद्रेश्वर जी को छोड़कर जाना नहीं चाहता था . खैर .   परीक्षा के बाद चंद्रेश्वर जी अपने कमरे में ले गए, अपना सामान बांधा और हम लोग लखनऊ की ओर चल दिए . रास्ते में कुछ साहित्यिक कुछ गैर साहित्यिक बातें होती रहीं .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="516" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/ac689097-9c79-4890-a5ef-e1a289210914-650x516.jpeg" alt="" class="wp-image-78291" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/ac689097-9c79-4890-a5ef-e1a289210914-650x516.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/ac689097-9c79-4890-a5ef-e1a289210914-350x278.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/ac689097-9c79-4890-a5ef-e1a289210914.jpeg 720w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उसके बाद मेरी उनसे मुलाकात नहीं हो पाई . हां ! फोन पर कभी-कभी मेरी बात होती रहती है . लेकिन उनसे मेरा जो संबंध है उसे मैं कोई नाम नहीं दे सकता हूं . मन की गहराई में उनके प्रति काफी सम्मान है . लेकिन ऐसी मित्रता भी नहीं है कि मैं या वह हम दोनों आपस में कुछ मन की बातें किया करें . बढ़िया है, जो संबंध बने हैं, वह निभते रहे, ऐसा ही चलता रहे, यह भी एक बढ़िया संबंध है . इसी वर्ष (मार्च 2023) लखनऊ पुस्तक मेले में उनसे पुन: भेंट का अवसर प्राप्त हुआ . </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="416" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/babeee6b-04e5-42f7-b8c7-0a8e03a74156-416x650.jpeg" alt="" class="wp-image-78292" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/babeee6b-04e5-42f7-b8c7-0a8e03a74156-416x650.jpeg 416w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/babeee6b-04e5-42f7-b8c7-0a8e03a74156-224x350.jpeg 224w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/babeee6b-04e5-42f7-b8c7-0a8e03a74156.jpeg 614w" sizes="(max-width: 416px) 100vw, 416px" /></figure>



<p><strong>चंद्रेश्वर को सुनना – पढ़ना</strong></p>



<p>चंद्रेश्वर जी के बारे में नाटककार राजेश कुमार ने लिखा है  कि चंद्रेश्वर की साहित्यिक जगत में पहचान एक कवि और गंभीर आलोचक के रूप में है.लोगों ने इन्हें साहित्य के आलोचना पक्ष पर निरंतर बोलते सुना है. और एक कवि के रूप में भी लोग काफी निकटता से रूबरू हुए हैं. आजकल साहित्य में एक परंपरा चल गई है, चाहे वो धारा प्रगतिशील &#8211; जनवादी ही क्यों न हो, लोग आते हैं और दुनिया का कोई भी विषय हो, उस पर एक बार बोलना शुरू करते हैं तो रुकने का नाम नहीं लेते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="455" height="592" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/aa3fec99-080a-4b45-bd52-c2bc801bf921.jpeg" alt="" class="wp-image-78293" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/aa3fec99-080a-4b45-bd52-c2bc801bf921.jpeg 455w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/aa3fec99-080a-4b45-bd52-c2bc801bf921-269x350.jpeg 269w" sizes="(max-width: 455px) 100vw, 455px" /></figure>



<p>क्या बोलना है, क्या विषय है, उनके लिए मायने नहीं रखता है. उस पर पहले से कुछ तैयारी करना तो जैसे अपनी बेइज्जती समझते हैं. बिना किसी तारतम्य के बोलते रहते हैं. लेकिन चंद्रेश्वर के साथ ऐसा नहीं है. भले जरा धीमी आवाज में बोलते हैं लेकिन जो बोलते हैं, उसको सुनकर लगता है कि इन्होंने इस पर काफी गहराई से कार्य किया है. चंद्रेश्वर जब बोलते हैं तो इनका जोर कंटेंट पर अधिक होता है. बोलने के क्रम में कभी नाटकीयता का सहारा नहीं लेते हैं . जो बोलते हैं, सरल, सीधे अंदाज में बोलते हैं. भले बोलने की शैली कभी -कभी सपाट हो जाती हो, लेकिन ये उस विषय की तह तक जाते हैं. गहन विश्लेषण करते हैं, जिससे तार- तार साफ हो जाता है.&#8221;</p>



<p class="has-vivid-green-cyan-color has-text-color">वर्तमान में आप &#8216;सुयश&#8217;, 631/58, ज्ञान विहार कालोनी, कमता -226028 लखनऊ में रह कर साहित्य साधना में व्यस्त रहते हैं .</p>



<p class="has-vivid-green-cyan-color has-text-color">मोबाइल नंबर – 735544658 /9236183787</p>



<p class="has-vivid-green-cyan-color has-text-color">ई-मेल &#8211;cpandey227@gmail.com</p>
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		<title>नेहा राठौड़ को नोटिस जारी करना अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला:  इप्टा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/issuance-of-notice-to-neha-rathod-an-attack-on-freedom-of-expression-ipta/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Feb 2023 05:39:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[सरकार यह नोटिस वापस ले और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बंद करे इप्टा ने नेहा सिंह राठौर के साथ एकजुटता व्यक्त की उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा नेहा सिंह राठौर को उनके गाने यूपी में का बा सीजन-2 के लिए नोटिस जारी करने का इप्टा कड़ा विरोध करती है. नेहा सिंह राठौर अपने गीतों के जरिए जन मुद्दों को उठाती रही हैं और सरकार की गलत नीतियों का विरोध करती रही हैं. इस गीत में कानपुर में बुलडोज़र से घर गिराने और मां-बेटी की मौत पर सवाल उठाया गया है जो वाजिब सवाल है और सिर्फ कानपुर ही नहीं पूरे देश की महिलाओं का भी सवाल है. एक कलाकार होने के नाते अपने गीतों के जरिए पुलिस दमन का विरोध करने का लोकगायिका नेहा को अधिकार है. योगी सरकार दमनकारी बुलडोजर राज बंद करे और लोकगायिका पर नहीं बल्कि कानपुर जिले के  पुलिस और जिला प्रशासन के विरुद्ध हत्या का मुक़दमा दर्ज कराना चाहिए. तनवीर अख्तर ने कहा कि इप्टा मांग करती है की सरकार यह नोटिस वापस ले और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बंद करे. पुलिस द्वारा प्रख्यात लोक गायिका नेहा सिंह राठौर के &#8220;यूपी में का बा 2&#8221; गीत पर समाज मे वैमनस्य और तनाव का अनर्गल आरोप लगाए जाने और नेहा से स्पष्टीकरण की कार्यवाही को अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया है. इप्टा की राष्ट्रीय समिति ने नेहा सिंह राठौर के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से इस अनर्गल और असंवैधानिक कार्यवाही को तत्काल वापस लेने की मांग की है और [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सरकार यह नोटिस वापस ले और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बंद करे</strong></p>



<p><strong>इप्टा ने नेहा सिंह राठौर के साथ एकजुटता व्यक्त की</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="480" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/39d4a581-b78d-4af1-aada-67cf9b3b9f56.jpg" alt="" class="wp-image-71753" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/39d4a581-b78d-4af1-aada-67cf9b3b9f56.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/39d4a581-b78d-4af1-aada-67cf9b3b9f56-350x258.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा नेहा सिंह राठौर को उनके गाने यूपी में का बा सीजन-2 के लिए नोटिस जारी करने का इप्टा कड़ा विरोध करती है. नेहा सिंह राठौर अपने गीतों के जरिए जन मुद्दों को उठाती रही हैं और सरकार की गलत नीतियों का विरोध करती रही हैं. इस गीत में कानपुर में बुलडोज़र से घर गिराने और मां-बेटी की मौत पर सवाल उठाया गया है जो वाजिब सवाल है और सिर्फ कानपुर ही नहीं पूरे देश की महिलाओं का भी सवाल है. एक कलाकार होने के नाते अपने गीतों के जरिए पुलिस दमन का विरोध करने का लोकगायिका नेहा को अधिकार है. योगी सरकार दमनकारी बुलडोजर राज बंद करे और लोकगायिका पर नहीं बल्कि कानपुर जिले के  पुलिस और जिला प्रशासन के विरुद्ध हत्या का मुक़दमा दर्ज कराना चाहिए. तनवीर अख्तर ने कहा कि इप्टा मांग करती है की सरकार यह नोटिस वापस ले और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बंद करे.</p>



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<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="640" data-id="71754" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/160638871_775127569877932_6362772442286868716_n.jpg" alt="" class="wp-image-71754" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/160638871_775127569877932_6362772442286868716_n.jpg 640w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/160638871_775127569877932_6362772442286868716_n-350x350.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/160638871_775127569877932_6362772442286868716_n-250x250.jpg 250w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>
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<p>पुलिस द्वारा प्रख्यात लोक गायिका नेहा सिंह राठौर के &#8220;यूपी में का बा 2&#8221; गीत पर समाज मे वैमनस्य और तनाव का अनर्गल आरोप लगाए जाने और नेहा से स्पष्टीकरण की कार्यवाही को अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया है. इप्टा की राष्ट्रीय समिति ने नेहा सिंह राठौर के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से इस अनर्गल और असंवैधानिक कार्यवाही को तत्काल वापस लेने की मांग की है और इप्टा की सभी इकाइयों का आह्वान किया है कि वे अपने स्तर पर अन्य सभी सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों के साथ मिल कर बोलने की आज़ादी के पक्ष में सांस्कृतिक प्रतिरोध की कार्यवाही सुनिश्चित करें और उत्तर प्रदेश सरकार को असंवैधानिक नोटिस वापस करने के लिए ज्ञापन भेजें. इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश ने बताया है कि नेहा सिंह राठौर डाल्टनगंज (झारखंड) में 17 से 19 मार्च तक इप्टा के राष्ट्रीय सम्मेलन और सांस्कृतिक उत्सव में एक विशिष्ट अतिथि कलाकार के रूप में भागीदारी करेंगी.</p>



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