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	<title>hindi &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>अनसुलझे सवाल: हिन्दी के लिए 2 क्यों दबायें, गाड़ियों के नंबर प्लेट हिन्दी में क्यों नहीं!</title>
		<link>https://www.patnanow.com/hindi-diwas-special/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Sep 2025 10:35:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
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		<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>
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					<description><![CDATA[किसी स्त्री के माथे पर जैसे सजती बिंदीवैसे ही अच्छी लगती है हमें हमारी हिंदी.. हिन्दी दिवस पर वैशाली से हिन्दी के एक शिक्षक प्रेमराज मातृभाषा की खासियत बतायी है, साथ ही कुछ बेबाक सवाल भी उठाए हैं. प्रेमराज कहते हैं कि अपने मन की बातों, मन के जज्बातों के अभिव्यक्ति के लिए हमें भाषा के किसी ना किसी रूप का सहारा लेना पड़ता है. चाहें वह भाषा लिखित रूप में हो या मौखिक रूप में. अपने सुख, दुख, मनोभाव को बेहतर ढंग से व्यक्त कर पाने के लिए मेरे समझ से हिंदी से बेहतर कोई भाषा नहीं हो सकती. सामाजिक समरसता एवं एकता को प्रदर्शित करने वाली वह भाषा जहां कोई छोटा बड़ा नहीं होता,वह भाषा जहां एक आधे शब्द को सहारा देने के लिए दूजा तैयार होता है ,वह भाषा जो दुनिया के सभी भाषाओं के शब्दों को अपने अंदर ऐसे समाहित कर लेती है कि वह भी शब्द अपने मूल भाषा को छोड़कर हिन्दी का ही हो जाता है. सामाजिक , सांस्कृतिक , आध्यात्मिक रूप से धनी यह भाषा आज समाज में उपेक्षित होती जा रही है. अंग्रेजी के चकाचौंध में हम अपनी मूल भाषा को भूल रहे. आज समाज का एक बड़ा वर्ग संस्कृत को तो पूर्णतः भूल चुका है और वह हिंदी को एकदम साधारण भाषा मानते हुए उसकी भी उपेक्षा कर रहा. विद्यार्थी वर्ग भी हिंदी की किताबों को पढ़ने में उतनी दिलचस्पी नहीं रखते है और वे मानते है कि किसी भी तरह हम तो इसमें पास तो हो ही जाएंगे. एक बहुत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong><em>किसी स्त्री के माथे पर जैसे सजती बिं</em>दी<br><em>वैसे ही अच्छी लगती है हमें हमारी हिंदी</em></strong>..</p>



<p>हिन्दी दिवस पर वैशाली से हिन्दी के एक शिक्षक प्रेमराज मातृभाषा की खासियत बतायी है, साथ ही कुछ बेबाक सवाल भी उठाए हैं. प्रेमराज कहते हैं कि अपने मन की बातों, मन के जज्बातों के अभिव्यक्ति के लिए हमें भाषा के किसी ना किसी रूप का सहारा लेना पड़ता है. चाहें वह भाषा लिखित रूप में हो या मौखिक रूप में. अपने सुख, दुख, मनोभाव को बेहतर ढंग से व्यक्त कर पाने के लिए मेरे समझ से हिंदी से बेहतर कोई भाषा नहीं हो सकती.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="426" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/hindi.png" alt="" class="wp-image-61358" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/hindi.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/hindi-350x229.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सामाजिक समरसता एवं एकता को प्रदर्शित करने वाली वह भाषा जहां कोई छोटा बड़ा नहीं होता,<br>वह भाषा जहां एक आधे शब्द को सहारा देने के लिए दूजा तैयार होता है ,<br>वह भाषा जो दुनिया के सभी भाषाओं के शब्दों को अपने अंदर ऐसे समाहित कर लेती है कि वह भी शब्द अपने मूल भाषा को छोड़कर हिन्दी का ही हो जाता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="747" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/09/1000390968.jpg" alt="" class="wp-image-91973" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/09/1000390968.jpg 747w, https://www.patnanow.com/assets/2025/09/1000390968-474x650.jpg 474w" sizes="(max-width: 747px) 100vw, 747px" /></figure>



<p>सामाजिक , सांस्कृतिक , आध्यात्मिक रूप से धनी यह भाषा आज समाज में उपेक्षित होती जा रही है. अंग्रेजी के चकाचौंध में हम अपनी मूल भाषा को भूल रहे. आज समाज का एक बड़ा वर्ग संस्कृत को तो पूर्णतः भूल चुका है और वह हिंदी को एकदम साधारण भाषा मानते हुए उसकी भी उपेक्षा कर रहा.</p>



<p>विद्यार्थी वर्ग भी हिंदी की किताबों को पढ़ने में उतनी दिलचस्पी नहीं रखते है और वे मानते है कि किसी भी तरह हम तो इसमें पास तो हो ही जाएंगे. एक बहुत बड़ा शिक्षित वर्ग आज भी हिंदी में लिखने में काफी अशुद्धि करते है जो काफी चिंताजनक है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="540" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/10_01_2021-hindi_diwas_10_01_21257207.jpg" alt="" class="wp-image-61357" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/10_01_2021-hindi_diwas_10_01_21257207.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/10_01_2021-hindi_diwas_10_01_21257207-350x291.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>हिन्दुस्तान में हिन्दी के लिए 2 क्यों दबायें!</strong></p>



<p>आज भी हमें कॉल पर हिंदी के लिए 2 दबाना पड़ता है, गाड़ी के नंबर प्लेट पर हिंदी में लिखने पर चालान काट दिया जाता है और हिंदी में मुकदमा दर्ज करने पर कोर्ट से मुकदमा को सुनने से इनकार कर दिया जाता है. इसमें अधिक दोष हमारी सरकार का है और काफी हद तक राजनीति ने हिंदी को गर्त में धकेलने का काम किया है.</p>



<p>अगर हमें वास्तव में देश की प्रगति चाहिए तो हमें हिंदी भाषा में ही अपने दैनिक कार्यों , सरकारी कार्यों का निष्पादन करना चाहिए.</p>



<p><em><strong>pncb</strong></em></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जब हिंदी ही जहाँ जर्जर हो तो सरकारी इमारतें कैसे होंगी मजबूत ?</title>
		<link>https://www.patnanow.com/jab-hindi-hi-jahan-gadbad/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Sep 2022 23:40:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[हिंदी की अशुद्धि पर आसित मिश्रा का व्यंग्यात्मक प्रहार पटना,6 सितंबर. आसित कुमार मिश्रा बलिया के रहने वाले एक शिक्षक हैं और हिंदी के एक जाने माने नाम हैं. व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर शब्दो के रचनात्मक प्रहार से सामने वाले को ऐसा चोटिल करते हैं कि फिर वह लड़ना तो दूर बोलने के काबिल नही रह जाता और कई महीने तक मुँह छुपाते फिरते हैं. सोशल मीडिया पर इनकी लेखनी के लोग मुरीद हैं और इनके वाल पर लोग इन्हें पढ़ने के लिए विजिट ही नही करते बल्कि इनसे लिखने की डिमांड करते हैं. मंगलवार को काफी समय बाद उन्होंने एक पोस्ट आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के नाम पर बने इमारत को लेकर किया. इमारत की जर्जर हालत और उनके जैसे विद्वान के नाम पर बने बनी इमारत पर हिंदी के कार्यान्वयन शब्द की अशुद्दि पर जो लिखा हम उसे ज्यों का त्यों परोष रहे हैं.. कहते हैं शांतिनिकेतन में एक दिन प्रातः काल आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी स्नान के बाद धूप का आनन्द ले रहे थे।अचानक सामने से गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर आते दिखे।सम्मान में हजारीप्रसाद द्विवेदी खड़े होकर नीचे पहनी हुई धोती से ऊपर की नग्न देह ढँकने लगे।गुरुदेव को मौका मिला उन्होंने परिहास करते हुए कहा &#8211; &#8220;बैठो द्विवेदी बैठो! इस देश में संस्कृत पढ़े हुए युवक और अंगरेज़ी पढ़ी हुई युवती को अर्द्धनग्न रहने का अधिकार है&#8221;।पता नहीं आगे द्विवेदी जी ने अपने शरीर को ढँकने की चेष्टा की या नहीं।मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश के उसी बलिया जिले (जहाँ के हजारीप्रसाद द्विवेदी जी थे) [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>हिंदी की अशुद्धि पर आसित मिश्रा का व्यंग्यात्मक प्रहार</strong></p>



<p>पटना,6 सितंबर. आसित कुमार मिश्रा बलिया के रहने वाले एक शिक्षक हैं और हिंदी के एक जाने माने नाम हैं. व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर शब्दो के रचनात्मक प्रहार से सामने वाले को ऐसा चोटिल करते हैं कि फिर वह लड़ना तो दूर बोलने के काबिल नही रह जाता और कई महीने तक मुँह छुपाते फिरते हैं. सोशल मीडिया पर इनकी लेखनी के लोग मुरीद हैं और इनके वाल पर लोग इन्हें पढ़ने के लिए विजिट ही नही करते बल्कि इनसे लिखने की डिमांड करते हैं. मंगलवार को काफी समय बाद उन्होंने एक पोस्ट आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के नाम पर बने इमारत को लेकर किया. इमारत की जर्जर हालत और उनके जैसे विद्वान के नाम पर बने बनी इमारत पर हिंदी के कार्यान्वयन शब्द की अशुद्दि पर जो लिखा हम उसे ज्यों का त्यों परोष रहे हैं..</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="489" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/PNCBaliya-plaformKvrgKLggL.jpg" alt="" class="wp-image-66231" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/PNCBaliya-plaformKvrgKLggL.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/PNCBaliya-plaformKvrgKLggL-350x263.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कहते हैं शांतिनिकेतन में एक दिन प्रातः काल आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी स्नान के बाद धूप का आनन्द ले रहे थे।<br>अचानक सामने से गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर आते दिखे।<br>सम्मान में हजारीप्रसाद द्विवेदी खड़े होकर नीचे पहनी हुई धोती से ऊपर की नग्न देह ढँकने लगे।<br>गुरुदेव को मौका मिला उन्होंने परिहास करते हुए कहा &#8211; &#8220;बैठो द्विवेदी बैठो! इस देश में संस्कृत पढ़े हुए युवक और अंगरेज़ी पढ़ी हुई युवती को अर्द्धनग्न रहने का अधिकार है&#8221;।<br>पता नहीं आगे द्विवेदी जी ने अपने शरीर को ढँकने की चेष्टा की या नहीं।मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश के उसी बलिया जिले (जहाँ के हजारीप्रसाद द्विवेदी जी थे) के प्लेटफार्म संख्या चार पर अवस्थित हजारीप्रसाद द्विवेदी जी के नाम पर बने इस अर्द्धनग्न इमारत को 7गजगजTढ़ँकने का काम स्वयं प्रकृति ने संभाल लिया है। कुछ दिनों बाद गुरुदेव के उस परिहास का प्रतिउत्तर स्वयं प्रकृति दे ही देगी। लेकिन तब भी शायद इस सवाल का जवाब नहीं मिल सकेगा कि &#8211; यहाँ बोर्ड पर लिखा कार्यावन्यन शुद्ध है कि कार्यान्वयन?</p>



<p>साभार : <strong>आसित कुमार मिश्र</strong>,बलियों</p>



<p></p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भाषाओं पर मचा है बवाल, कितने लोग बोलते हैं हिंदी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/there-is-a-ruckus-over-languages-how-many-people-speak-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Apr 2022 05:02:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[hindi]]></category>
		<category><![CDATA[how many people speak Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[देश के करीब 57 फीसदी लोग हिंदी भाषा को समझते हैंभोजपुरी और राजस्थानी को जबरन हिंदी के साथ जोड़ा गया32.2 करोड़ लोगों ने हिंदी को अपनी मातृभाषा बताई,शुरू से ही बड़ी आबादी की मातृभाषा हिंदी रही पिछले कुछ दिनों से हिंदी भाषा को लेकर बवाल मचा हुआ है. इसकी शुरुआत तब हुई जब गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यों से अपील की कि इंग्लिश के बजाए हिंदी में एक-दूसरे के साथ संवाद किया जानिए. हालंकि उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी को स्थानीय भाषाओं का विकल्प नहीं होना चाहिए. देश में हिंदी का क्या गणित है?तो आइए जानते हैं .. 2011 की भाषाई जनगणना में 121 मातृभाषाएं हैं. इन 121 भाषाओं में से संविधान की 8वीं अनुसूची में 22 भाषाएं शामिल हैं. इन 22 भाषाओं में से हिंदी सबसे अधिक बोली जानी वाली भाषा है. 52.8 करोड़ लोगों ने अपनी मातृभाषा हिंदी बताई थी जो कि 43.63 फीसद आबादी थी. इसका मतलब यह है कि 56.4 फीसद लोगों की मातृभाषा हिंदी नहीं थी. हालांकि देश के करीब 57 फीसद लोग हिंदी भाषा को समझते हैं.  हिंदी के बाद बंगाली (8.03%), मराठी (6.86%), तेलुगु (6.7%), तमिल (5.7%), गुजराती (4.58%), उर्दू (4.19%), कन्नड़ (3.61%), ओडिया (3.1%), मलयालम (2.88%), पंजाबी (2.74%), असमिया (1.26%) और मैथिली (1.12%) जैसी संविधान की सूची में शामिल बड़ी भाषाएं हैं.हिंदी दशकों से भारत की प्रमुख भाषाओं में से रही है. 1971 की जनगणना में 37 फीसद लोगों ने अपनी मातृभाषा हिंदी बताई थी जो 1981 में बढ़कर 38.7 फीसद, 1991 में 39.2 फीसद, 2001 में 41 फीसद और 2011 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>देश के करीब 57 फीसदी लोग हिंदी भाषा को समझते हैं<br>भोजपुरी और राजस्थानी को जबरन हिंदी के साथ जोड़ा गया<br>32.2 करोड़ लोगों ने हिंदी को अपनी मातृभाषा बताई,शुरू से ही बड़ी आबादी की मातृभाषा हिंदी रही</strong></p>



<p>पिछले कुछ दिनों से हिंदी भाषा को लेकर बवाल मचा हुआ है. इसकी शुरुआत तब हुई जब गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यों से अपील की कि इंग्लिश के बजाए हिंदी में एक-दूसरे के साथ संवाद किया जानिए. हालंकि उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी को स्थानीय भाषाओं का विकल्प नहीं होना चाहिए.  देश में हिंदी का क्या गणित है?तो आइए जानते हैं ..</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="426" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/hindi.png" alt="" class="wp-image-61358" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/hindi.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/hindi-350x229.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>2011 की भाषाई जनगणना में 121 मातृभाषाएं हैं. इन 121 भाषाओं में से संविधान की 8वीं अनुसूची में 22 भाषाएं शामिल हैं. इन 22 भाषाओं में से हिंदी सबसे अधिक बोली जानी वाली भाषा है. 52.8 करोड़ लोगों ने अपनी मातृभाषा हिंदी बताई थी जो कि 43.63 फीसद आबादी थी. इसका मतलब यह है कि 56.4 फीसद लोगों की मातृभाषा हिंदी नहीं थी. हालांकि देश के करीब 57 फीसद लोग हिंदी भाषा को समझते हैं.  हिंदी के बाद बंगाली (8.03%), मराठी (6.86%), तेलुगु (6.7%), तमिल (5.7%), गुजराती (4.58%), उर्दू (4.19%), कन्नड़ (3.61%), ओडिया (3.1%), मलयालम (2.88%), पंजाबी (2.74%), असमिया (1.26%) और मैथिली (1.12%) जैसी संविधान की सूची में शामिल बड़ी भाषाएं हैं.<br>हिंदी दशकों से भारत की प्रमुख भाषाओं में से रही है. 1971 की जनगणना में 37 फीसद लोगों ने अपनी मातृभाषा हिंदी बताई थी जो 1981 में बढ़कर 38.7 फीसद, 1991 में 39.2 फीसद, 2001 में 41 फीसद और 2011 में 43.6 फीसद तक पहुंच गई. हिंदी की हिस्सेदारी बढ़ी तो बंगाली, मलयालम और उर्दू जैसी भाषाओं में गिरावट आई है. लेकिन अगर आप आबादी के लिहाज से देखें तो 1971 में 20.2 करोड़ लोगों ने अपनी मातृभाषा हिंदी बताई थी जो 2011 में 2.6 गुना बढ़कर 52.8 करोड़ तक पहुंच गई. इसके साथ ही पंजाबी, मैथिली, बंगाली, गुजराती और कन्नड़ जैसी भाषाओं को मातृभाषा बताने वाले लोगों की संख्या भी दोगुनी से अधिक हो गई.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="540" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/10_01_2021-hindi_diwas_10_01_21257207.jpg" alt="" class="wp-image-61357" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/10_01_2021-hindi_diwas_10_01_21257207.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/10_01_2021-hindi_diwas_10_01_21257207-350x291.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>जनगणना 2011 के मुताबिक उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ आदि प्रदेश में बड़े स्तर पर बोली जाती है. भाषाई विशेषज्ञों का मानना है कि कुमाउनी, गढ़वाली, छतीसगढ़ी, राजस्थानी, भोजपुरी, मगही आदि भाषाओं को बोलने वाले लोग लाखों-करोड़ों में हैं लेकिन इन भाषाओं को हिंदी की उपभाषा या बोली बताकर हिंदी में ही जोड़ दिया जाता है.<br>भोजपुरी और राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए लगातार करने की मांग उठती रहती है तो ऐसे में दलील दी जाती है कि भोजपुरी और राजस्थानी भाषाओं को जबरन हिंदी के साथ जोड़ा गया है. 2011 जनगणना की एक रिपोर्ट बताती है कि 26.6 फीसद लोगों ने माने करीब 32.2 करोड़ लोगों ने हिंदी को अपनी मातृभाषा बताई थी और बाकी के लोगों ने अपनी मातृभाषा भोजपुरी, राजस्थानी, छतीसगढ़ी, मगही आदि बताई थी जिसे हिंदी में ही जोड़ा गया.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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