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		<title>शिक्षक नियुक्ति में प्राथमिक विद्यालयों में बीएड पास शिक्षकों की नियुक्ति रद्द</title>
		<link>https://www.patnanow.com/appointment-of-b-ed-pass-teachers-in-primary-schools-canceled-in-teacher-appointment/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Dec 2023 01:32:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACADEMIC]]></category>
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		<category><![CDATA[Appointment of B.Ed pass teachers is cancelled]]></category>
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					<description><![CDATA[ हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला बीएड पास अभ्यर्थियों को प्राथमिक स्कूलों में टीचर नहीं बनाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट बीएड पास उम्मीदवारों की नियुक्ति को रद्द करना होगा और उन नियुक्तियों को फिर से भरना होगा. हम संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से बंधे पटना हाईकोर्ट ने छठे चरण की शिक्षक नियुक्ति में क्लास एक से पांच तक के स्कूलों में नियुक्ति किये गये बीएड पास अभ्यर्थियों की बहाली को रद्द करने का आदेश सुनाया है.पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है.जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस राजीव राय की बेंच ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि हम संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से बंधे हैं और राज्य को भी इसका पालन करना होगा. माननीय सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा क्लास एक से पांच तक की शिक्षक नियुक्ति के संबंध में स्पष्ट फैसला सुनाया जा चुका है. ऐसे में बीएड उम्मीदवारों को प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं माना जा सकता है. हाईकोर्ट ने कहा है सरकार ने छठे चरण में क्लास एक से पांच तक के शिक्षकों की नियुक्ति में बीएड पास उम्मीदवारों की जो नियुक्ति की है, उसे रद्द करना होगा और उन नियुक्तियों को फिर से काम भरना होगा. राज्य सरकार को एनसीटीई की साल 2010 की मूल अधिसूचना के अनुसार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p></p>



<p><strong> हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला</strong></p>



<p><strong>बीएड पास अभ्यर्थियों को प्राथमिक स्कूलों में टीचर नहीं बनाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट</strong></p>



<p><strong>बीएड पास उम्मीदवारों की नियुक्ति को रद्द करना होगा और उन नियुक्तियों को फिर से भरना होगा.</strong></p>



<p><strong>हम संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से बंधे</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/high-court-650x488.png" alt="" class="wp-image-80790" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/high-court-650x488.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/high-court-350x263.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/high-court-768x576.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/high-court.png 900w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पटना हाईकोर्ट ने छठे चरण की शिक्षक नियुक्ति में क्लास एक से पांच तक के स्कूलों में नियुक्ति किये गये बीएड पास अभ्यर्थियों की बहाली को रद्द करने का आदेश सुनाया है.पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है.जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस राजीव राय की बेंच ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/bed-650x488.png" alt="" class="wp-image-80789" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/bed-650x488.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/bed-350x263.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/bed-768x576.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/bed.png 885w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> हाईकोर्ट ने कहा है कि  हम संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से बंधे हैं और राज्य को भी इसका पालन करना होगा. माननीय सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा क्लास एक से पांच तक की शिक्षक नियुक्ति के संबंध में स्पष्ट फैसला सुनाया जा चुका है. ऐसे में बीएड उम्मीदवारों को प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं माना जा सकता है. हाईकोर्ट ने कहा है सरकार ने छठे चरण में क्लास एक से पांच तक के शिक्षकों की नियुक्ति में बीएड पास उम्मीदवारों की जो नियुक्ति की है, उसे रद्द करना होगा और उन नियुक्तियों को फिर से काम भरना होगा. राज्य सरकार को एनसीटीई की साल 2010 की मूल अधिसूचना के अनुसार योग्य उम्मीदवारों को ही नियुक्त करना होगा. राज्य सरकार ये भी निर्णय लेगी कि कितने पद रिक्त हो रहे हैं और उन पदों पर रिक्तियों को कैसे भरा जाना है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>बिहार में जाति गणना जारी रहेगी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/high-court-on-caste-census/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Aug 2023 07:58:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। पटना हाईकोर्ट में आज बिहार सरकार को पड़ी राहत मिली है. जाति गणना मामले पर पिछले दिनों को पटना हाईकोर्ट ने लगातार पांच दिन तक सुनवाई की थी और फैसला सुरक्षित रखा था. आज पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए बिहार सरकार को बड़ी राहत दी है. पटना हाईकोर्ट ने बिहार में जाति गणना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. बिहार सरकार ने पटना हाई कोर्ट में कहा था कि जाति गणना का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है और अब हाईकोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि बाकी बचे काम को भी बिहार सरकार जल्द पूरा कराएगी. चीफ जस्टिस के विनोद चन्द्रन ने एक लाइन में फैसला सुनाया जिसमें कहा गया है कि जाति गणना के विरोध वाली सभी याचिका खारिज की जाती है. इधर याचिकाकर्ता अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. बिहार में जाति गणना का काम 2 चरणों में कराया जा रहा है. पहले चरण में 7 जनवरी से 21 जनवरी तक घरों की गणना की गई. उसके बाद 15 अप्रैल से 15 मई के बीच जाति गणना का काम पूरा करना था लेकिन इसी बीच मई के पहले हफ्ते में पटना हाईकोर्ट ने जाति गणना पर रोक लगा दी थी. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। पटना हाईकोर्ट में आज बिहार सरकार को पड़ी राहत मिली है. जाति गणना मामले पर पिछले दिनों को पटना हाईकोर्ट ने लगातार पांच दिन तक सुनवाई की थी और फैसला सुरक्षित रखा था. आज पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए बिहार सरकार को बड़ी राहत दी है. </p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT-650x366.png" alt="" class="wp-image-38512" width="377" height="212" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 377px) 100vw, 377px" /></figure>



<p>पटना हाईकोर्ट ने बिहार में जाति गणना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. बिहार सरकार ने पटना हाई कोर्ट में कहा था कि जाति गणना का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है और अब हाईकोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि बाकी बचे काम को भी बिहार सरकार जल्द पूरा कराएगी. चीफ जस्टिस के विनोद चन्द्रन ने एक लाइन में फैसला सुनाया जिसमें कहा गया है कि जाति गणना के विरोध वाली सभी याचिका खारिज की जाती है. इधर याचिकाकर्ता अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-patna-caste-based-census.jpg" alt="" class="wp-image-70698" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-patna-caste-based-census.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-patna-caste-based-census-263x350.jpg 263w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p>बिहार में जाति गणना का काम 2 चरणों में कराया जा रहा है. पहले चरण में 7 जनवरी से 21 जनवरी तक घरों की गणना की गई.  उसके बाद 15 अप्रैल से 15 मई के बीच जाति गणना का काम पूरा करना था लेकिन इसी बीच मई के पहले हफ्ते में पटना हाईकोर्ट ने जाति गणना पर रोक लगा दी थी.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राजीव नगर के पीड़ितों को मिलेगा  5-5 लाख रुपए मुआवजा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/the-victims-of-rajiv-nagar-will-get-rs-5-lakh-compensation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 May 2023 06:55:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[राजीव नगर के पीड़ितों को हाईकोर्ट​​​ ने दिया 5-5 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश नेपाली नगर में तोड़े गए मकानों का दें मुआवजा 2000 से ज्यादा परिवार वालों को मिली राहत 2018 से पहले बने मकानों का होगा सेटलमेंट हाईकोर्ट ने कहा नेपाली नगर में प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह से गलत है. लोगों को न नोटिस दिया. ना अपील करने का वक्त दिया. जिन घरों पर प्रशासन ने कार्रवाई की है वो अतिक्रमणकारी नहीं हैं. नेपाली नगर के लोगों के लिए ही दीघा स्पेशल सेटलमेंट एक्ट और स्कीम बनी थी. राज्य सरकार ने पालन नहीं किया. अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को हाईकोर्ट ने रद्द किया है. राजीव नगर आवास बोर्ड की जमीन पर बने अवैध अतिक्रमण पर पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया है. आवास बोर्ड और प्रशासन की ओर से लगाई गई याचिका को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. न्यायधीश संदीप कुमार की बेंच ने तोड़े गए मकान के बदले पांच-पांच लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया है. साथ ही 2018 के पहले बने हुए मकानों का सेटलमेंट करने का निर्देश भी जारी किया है. याचिका पर करीब चार महीने पहले न्यायधीश संदीप कुमार की बेंच में सुनवाई पूरी हो गई थी. कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था. लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया. इससे 400 एकड़ में रहे रहे 2000 से ज्यादा परिवार वालों को राहत मिली है.21 जुलाई 2022 को जिला प्रशासन की टीम नेपाली नगर में अतिक्रमण हटाने पहुंची थी. टीम का कहना था कि लोगों को नोटिस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p><strong>राजीव नगर के पीड़ितों को हाईकोर्ट​​​ ने दिया 5-5 लाख रुपए मुआवजा देने का  निर्देश</strong></p>



<p><strong>नेपाली नगर में तोड़े गए मकानों का दें मुआवजा</strong></p>



<p><strong>2000 से ज्यादा परिवार वालों को मिली राहत</strong></p>



<p><strong>2018 से पहले बने मकानों का होगा सेटलमेंट</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="450" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/nepali-nagr-1.png" alt="" class="wp-image-74682" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/nepali-nagr-1.png 600w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/nepali-nagr-1-350x263.png 350w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">हाईकोर्ट ने कहा</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">नेपाली नगर में प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह से गलत है.</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">लोगों को न नोटिस दिया. ना अपील करने का वक्त दिया.</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">जिन घरों पर प्रशासन ने कार्रवाई की है वो अतिक्रमणकारी नहीं हैं.</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">नेपाली नगर के लोगों के लिए ही दीघा स्पेशल सेटलमेंट एक्ट और स्कीम बनी थी. राज्य सरकार ने पालन नहीं किया.</p>



<p class="has-pale-cyan-blue-background-color has-background">अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को हाईकोर्ट ने रद्द किया है.</p>



<p>राजीव नगर आवास बोर्ड की जमीन पर बने अवैध अतिक्रमण पर पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया है. आवास बोर्ड और प्रशासन की ओर से लगाई गई याचिका को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. न्यायधीश संदीप कुमार की बेंच ने तोड़े गए मकान के बदले पांच-पांच लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया है. साथ ही 2018 के पहले बने हुए मकानों का सेटलमेंट करने का निर्देश भी जारी किया है. याचिका पर करीब चार महीने पहले न्यायधीश संदीप कुमार की बेंच में सुनवाई पूरी हो गई थी. कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था. लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="360" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/rajiv-nagar.png" alt="" class="wp-image-74683" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/rajiv-nagar.png 640w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/rajiv-nagar-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>



<p> इससे 400 एकड़ में रहे रहे 2000 से ज्यादा परिवार वालों को राहत मिली है.21 जुलाई 2022 को जिला प्रशासन की टीम नेपाली नगर में अतिक्रमण हटाने पहुंची थी. टीम का कहना था कि लोगों को नोटिस दे दिया गया है. सभी अवैध कब्जा बनाकर रह रहे हैं. वहीं लोगों का कहना था कि हमें कोई नोटिस नहीं दिया गया है. हम यहां कई सालों से रह रहे हैं. इसके बाद भी नेपाली नगर की 40 एकड़ की जमीन को कब्जे में लेने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी. पुलिस की कार्रवाई का लोगों ने विरोध किया था. पुलिस और अतिक्रमणकारियों के बीच झड़प भी हुई थी. कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे. इस पूरे मामले को लेकर राजीव नगर थाने में दो अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जातिगत गणना पर नीतीश सरकार की अपील हाईकोर्ट ने की मंजूर,9 मई को सुनवाई</title>
		<link>https://www.patnanow.com/high-court-approves-nitish-governments-appeal-on-caste-enumeration-hearing-on-may-9/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 May 2023 04:51:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना हाईकोर्ट में 9 मई कोअब होगी &#160;सुनवाई जातिगत गणना पर नीतीश सरकार की अपील हाई कोर्ट ने मंजूर कर ली है .जाति आधारित गणना पर सुनवाई के लिए पटना उच्च न्यायालय तैयार हो गया है. राज्य सरकार की याचिका पर अब 9 मई को सुनवाई होगी. गुरुवार को कोर्ट ने कास्ट सेंसस पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश जारी किया था. बिहार में जातीय जनगणना पर पटना हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा रखी है. कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बताया जा रहा है. कोर्ट से लगी रोक के बाद सरकार ने इस मामले पर तुरंत सुनवाई के लिए अपील की थी, जिसके बाद न्यायालय ने 9 मई की तारीख मुकर्रर की है. गुरुवार को पटना उच्च न्यायालय ने कास्ट सेंसस पर रोक लगाते हुए सुनवाई के लिए अगली तारीख 3 जुलाई तय की थी. जिसके बाद राज्य सरकार ने जातियों की गणना और आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 3 जुलाई से पहले सुनवाई के लिए अपील की थी. जिस पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने 9 मई को तारीख दी है.राज्य सरकार ने कोर्ट से की अपील: बिहार सरकार ने पटना हाईकोर्ट में जो याचिका दी है, उसमें कहा गया है, &#8216;क्योंकि पटना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार के पास जाति आधारित गणना कराने का वैधानिक अधिकार नहीं है. लिहाजा 3 जुलाई को उस पर सुनवाई करने का कोई कारण नहीं है. ऐसे में जनहित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p></p>



<p><strong>पटना हाईकोर्ट में 9 मई कोअब होगी &nbsp;सुनवाई</strong></p>



<p>जातिगत गणना पर नीतीश सरकार की अपील हाई कोर्ट ने मंजूर कर ली है .जाति आधारित गणना पर सुनवाई के लिए पटना उच्च न्यायालय तैयार हो गया है. राज्य सरकार की याचिका पर अब 9 मई को सुनवाई होगी. गुरुवार को कोर्ट ने कास्ट सेंसस पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश जारी किया था. बिहार में जातीय जनगणना पर पटना हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा रखी है. कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बताया जा रहा है. कोर्ट से लगी रोक के बाद सरकार ने इस मामले पर तुरंत सुनवाई के लिए अपील की थी, जिसके बाद न्यायालय ने 9 मई की तारीख मुकर्रर की है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/pnc-jati-ganana-caste-census-second-phase.jpg" alt="" class="wp-image-73543" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/pnc-jati-ganana-caste-census-second-phase.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/pnc-jati-ganana-caste-census-second-phase-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>गुरुवार को पटना उच्च न्यायालय ने कास्ट सेंसस पर रोक लगाते हुए सुनवाई के लिए अगली तारीख 3 जुलाई तय की थी. जिसके बाद राज्य सरकार ने जातियों की गणना और आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 3 जुलाई से पहले सुनवाई के लिए अपील की थी. जिस पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने 9 मई को तारीख दी है.राज्य सरकार ने कोर्ट से की अपील: बिहार सरकार ने पटना हाईकोर्ट में जो याचिका दी है, उसमें कहा गया है, &#8216;क्योंकि पटना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार के पास जाति आधारित गणना कराने का वैधानिक अधिकार नहीं है. लिहाजा 3 जुलाई को उस पर सुनवाई करने का कोई कारण नहीं है. ऐसे में जनहित याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर 3 जुलाई के पहले ही अदालत को निष्पादन कर देना चाहिए.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>एडवोकेट एसोसिएशन के चुनाव में 145 मैदान में</title>
		<link>https://www.patnanow.com/145-are-in-field-of-high-court-advocate-association-election/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Apr 2023 07:14:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
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					<description><![CDATA[चुनावी रंग में रंगा पटना हाई कोर्ट परिसर हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के 11 पदों के कुल 145 प्रत्याशी पटना,4 मार्च(ओ पी पाण्डेय). चुनावी रंगत के चलते न्यायालय परिसर में वकीलों के नए- नए चेहरे दिखने भी प्रारंभ हो गए हैं. परिसर में मुवक्किलों से ज्यादा वकीलों की भीड़ दिखने लगी है. पटना हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गयी हैं. इस बार के चुनावों में कुल 145 पदों के लिए प्रत्याशियों की दौड़-धूप शुरू हो गई है. हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के 11 पदों के कुल 145 प्रत्याशियों में अध्यक्ष पद के 15, उपाध्यक्ष पद के 28,जनरल स्क्रेटरी के 13,कोषाध्यक्ष पद के 6,संयुक्त सचिव के 25,सहायक सचिव के 16, सीनियर कार्यकारी सदस्य के 8, कार्यकारी सदस्य के 21,सदस्य विजिलेंस कमिटी के 8 और सदस्य लाइब्रेरी के 3 दावेदार होने से मुकाबला बेहद ही रोचक हो गया है. प्रत्याशियों ने घर-घर ,चैम्बर-चैम्बर, टेबल-टेबल जाकर कर जनसंपर्क शुरू कर दिया है. इस बार के चुनाव मे चारों तरफ होर्डिंग, फलैक्स से पुरा हाई कोर्ट परिसर पटा हुआ है,चारों ओर प्रचार पम्पलेट का आम्बार लगा हुआ है जिससे प्रतीत होता है की इस बार प्रत्याशियों का खर्चा का रेसियों बढ़ गया है. एडवोकेट एसोसिशन के अधिवक्ता व संयुक्त सचिव के प्रत्याशी रणविजय सिंह ने बताया कि चुनाव 7 अप्रैल को होने हैं जिसके लिए प्रत्याशियों ने दौड़-धूप करना शुरू कर दिया है. चुनाव कोविड काल के बाद चुनावों का होना एक और रोचकता बढ़ने का प्रमुख कारण है. सभी अधिवक्ता चुनावी कार्यक्रमों में ही व्यस्त दिख रहे हैं. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>चुनावी रंग में रंगा पटना हाई कोर्ट परिसर</strong></p>



<p><strong>हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के 11 पदों के कुल 145 प्रत्याशी</strong></p>



<p>पटना,4 मार्च(<strong>ओ पी पाण्डेय</strong>). चुनावी रंगत के चलते न्यायालय परिसर में वकीलों के नए- नए चेहरे दिखने भी प्रारंभ हो गए हैं. परिसर में मुवक्किलों से ज्यादा वकीलों की भीड़ दिखने लगी है. पटना हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गयी हैं. इस बार के चुनावों में कुल 145 पदों के लिए प्रत्याशियों की दौड़-धूप शुरू हो गई है. हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के 11 पदों के कुल 145 प्रत्याशियों में अध्यक्ष पद के 15, उपाध्यक्ष पद के 28,जनरल स्क्रेटरी के 13,कोषाध्यक्ष पद के 6,संयुक्त सचिव के 25,सहायक सचिव के 16, सीनियर कार्यकारी सदस्य के 8, कार्यकारी सदस्य के 21,सदस्य विजिलेंस कमिटी के 8 और सदस्य लाइब्रेरी के 3 दावेदार होने से मुकाबला बेहद ही रोचक हो गया है. प्रत्याशियों ने घर-घर ,चैम्बर-चैम्बर, टेबल-टेबल जाकर कर जनसंपर्क शुरू कर दिया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="433" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-Patna.jpg" alt="" class="wp-image-73030" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-Patna.jpg 433w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-Patna-311x350.jpg 311w" sizes="(max-width: 433px) 100vw, 433px" /></figure>



<p>इस बार के चुनाव मे चारों तरफ होर्डिंग, फलैक्स से पुरा हाई कोर्ट परिसर पटा हुआ है,चारों ओर प्रचार पम्पलेट का आम्बार लगा हुआ है जिससे प्रतीत होता है की इस बार प्रत्याशियों का खर्चा का रेसियों बढ़ गया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-election-Patna.jpg" alt="" class="wp-image-73031" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-election-Patna.jpg 600w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-election-Patna-350x350.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-election-Patna-250x250.jpg 250w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<p>एडवोकेट एसोसिशन के अधिवक्ता व संयुक्त सचिव के प्रत्याशी रणविजय सिंह ने बताया कि चुनाव 7 अप्रैल को होने हैं जिसके लिए प्रत्याशियों ने दौड़-धूप करना शुरू कर दिया है. चुनाव कोविड काल के बाद चुनावों का होना एक और रोचकता बढ़ने का प्रमुख कारण है. सभी अधिवक्ता चुनावी कार्यक्रमों में ही व्यस्त दिख रहे हैं. खास बात और है कि इस चुनाव में बहुत ही कम नॉमिनेशन फी भी है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-Patna-1.jpg" alt="" class="wp-image-73032" width="371" height="279" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-Patna-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-Patna-1-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 371px) 100vw, 371px" /></figure>



<p>जनरल स्क्रेटरी एवं अध्यक्ष का मुकाबला त्रिकोणातमक हो गया है. अध्यक्ष पद के लिए शैलेन्द्र कुमार सिंह,प्रेम कुमार झा,राजीव कुमार वर्मा ,जनरल स्क्रेटरी में जय शंकर सिंह,राम संदेश राय,राकेश कुमार सिन्हा आगे चल रहे है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="539" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-election-Patna-1.jpg" alt="" class="wp-image-73033" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-election-Patna-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-election-Patna-1-350x290.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>संयुक्त सचिव में रणविजय सिंह औरों कि अपेक्षा बहुत ही आगे निकल गये है, इनके पीछे संजीव कुमार मिश्रा,राजीव नयन है. उपाध्यक्ष पद के भी दावेदारों में रामजीवन प्रसाद,शंभु शरण सिंह,मनोज कुमार सिंह मैदान में आगे है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="625" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-election-Patna-2.jpg" alt="" class="wp-image-73034" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-election-Patna-2.jpg 625w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/PNC_High-court-election-Patna-2-350x336.jpg 350w" sizes="(max-width: 625px) 100vw, 625px" /></figure>



<p>इसके अतिरिक्त सहायक सचिव राकेश रंजन,राजनीश चंद्रा,श्यामेशवर कुमार सिंह,शेवता सिंह आगे है. कोषाध्यक्ष पद पर शिखा रॉय,पुष्पा सिन्हा आगे है. महेन्द्र कुमार वर्मा व नन्द कुमार भी अपने पूर्व के अनुभवों के आधार पर सीनियर कार्यकारी सदस्य पद को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रयासरत हैं.</p>



<p>कार्यकारी सदस्यों में दावेदार के रूप में शिवशागर शर्मा ,अनिता कुमारी ,नितु कुमरी भी दौड़ धुप करते दिखाई दे रहे है. विजिलेंस सदस्य के दौर में उपेंद्र प्रसाद सिंह, कामेशवर प्रसाद सिन्हा एवं शशि शेखर तिवारी लड़ाई में बने हुए है. सदस्य लाइब्रेरी कमिटी के दौर में अमरेंद्र कुमार सभी से आगे निकले.</p>



<p>निर्वाचन अधिकारी अंजनी कुमार ने बताया कि एडवोकेट एसोसिएशन के चुनाव चुनाव 7 अप्रैल को करवाने हेतु तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है. उन्होंने बताया कि इस बार होने वाले चुनाव बिल्कुल ही मॉडल रूल गाइडलाईनस के अनुसार करवाए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि वार्षिक चुनाव 2023 के लिए कुल 3904 मतदाता अपने मत का प्रयोग कर सकेंगे।मतदान 7 अप्रैल को प्रातः 9 बजे से प्रारंभ होकर सांय 4 बजे तक होगा तथा मतपत्र की गणना विजयी प्रत्याशियों की घोषणा 8 अप्रैल को कि जाएगी. सभी पद के दावेदार प्रत्याशियों ने प्रचार अभियान में पूरी ताकत झोंक दी है.</p>



<p>चुनावी माहौल से कोर्ट परिसर फिलहाल चुनावी मैदान का अखाड़ा नजर आ रहा है. सब अपनी जीत का दावा कर रहे हैं और अपने समर्थकों के साथ जोश में दिख रहे हैं. ऐसे में किसी भी प्रत्याशी के जीत का दावा करना फिलहाल तो टिकोले के लिए आम के पेड़ पर डंडे फेंकने जैसा है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कोर्ट अवमानना पड़ी भारी, 9 जनवरी को पेशी का आदेश</title>
		<link>https://www.patnanow.com/court-avmanana-pada-bhari-sarkar-ke-peshi-ka-aadesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Jan 2023 03:26:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
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		<category><![CDATA[HIGH COURT ORDER]]></category>
		<category><![CDATA[High court patna]]></category>
		<category><![CDATA[vksu]]></category>
		<category><![CDATA[कोर्ट अवमानना]]></category>
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					<description><![CDATA[वेतन और पेंशन लटकाने पर कोर्ट नाराज सरकार को उपस्थित होने का आदेश विश्वविद्यालयों 6 सालों से अधर में लटका है 7 वें वेतन पेंशन का बकाया आरा, 7 जनवरी. विश्वविद्यालय शिक्षकों के 6 साल से अधर में लटके 7वें वेतन पेंशन के बकाए पर कोर्ट के आदेश के बाद सरकार के कच्छप गति और कान पर जूं न रेंगने पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सरकार को 9 जनवरी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है. आगामी सोमवार को वर्षों से लंबित इस मामले में निजात मिलने की आशंका है. विश्वविद्यालय शिक्षकों को नियमित पेंशन/वेतन भुगतान संबंधी पटना उच्च न्यायालय के 2018 के एक आदेश का अनुपालन नहीं होने के विरूद्ध दायर अवमानना याचिका 341/2021, अमरेश शांडिल्य बनाम बिहार सरकार में पटना उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह को आगामी सोमवार (9 जनवरी ) को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है. बिहार राज्य विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुटाब) ने एक विज्ञप्ति जारी कर इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के के.के. सिन्हा, महासचिव,सेवानिवृत्त शिक्षक संघ द्वारा दायर याचिका CWJC 17619/2016 को एक जनहित याचिका में परिवर्तित करते हुए, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एमआर शाह और न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की एक खंडपीठ द्वारा 8 अक्तूबर 2018 को पारित आदेश में माननीय न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पेंशन आदि का भुगतान प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह तक सुनिश्चित करने हेतु राज्य सरकार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को देय वेतन/पेंशन का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>वेतन और पेंशन लटकाने पर कोर्ट नाराज सरकार को उपस्थित होने का आदेश</strong></p>



<p><strong>विश्वविद्यालयों 6 सालों से अधर में लटका है 7 वें वेतन पेंशन का बकाया</strong></p>



<p>आरा, 7 जनवरी. विश्वविद्यालय शिक्षकों के 6 साल से अधर में लटके 7वें वेतन पेंशन के बकाए पर कोर्ट के आदेश के बाद सरकार के कच्छप गति और कान पर जूं न रेंगने पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सरकार को 9 जनवरी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है. आगामी सोमवार को वर्षों से लंबित इस मामले में निजात मिलने की आशंका है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="598" height="299" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/sambhavana-2.jpg" alt="" class="wp-image-66680" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/sambhavana-2.jpg 598w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/sambhavana-2-350x175.jpg 350w" sizes="(max-width: 598px) 100vw, 598px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT-PIC-650x366.png" alt="" class="wp-image-38510" width="366" height="205" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT-PIC.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT-PIC-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 366px) 100vw, 366px" /></figure>



<p>विश्वविद्यालय शिक्षकों को नियमित पेंशन/वेतन भुगतान संबंधी पटना उच्च न्यायालय के 2018 के एक आदेश का अनुपालन नहीं होने के विरूद्ध दायर अवमानना याचिका 341/2021, अमरेश शांडिल्य बनाम बिहार सरकार में पटना उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह को आगामी सोमवार (9 जनवरी ) को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है.</p>



<p>बिहार राज्य विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुटाब) ने एक विज्ञप्ति जारी कर इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के के.के. सिन्हा, महासचिव,सेवानिवृत्त शिक्षक संघ द्वारा दायर याचिका CWJC 17619/2016 को एक जनहित याचिका में परिवर्तित करते हुए, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एमआर शाह और न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की एक खंडपीठ द्वारा 8 अक्तूबर 2018 को पारित आदेश में माननीय न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पेंशन आदि का भुगतान प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह तक सुनिश्चित करने हेतु राज्य सरकार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को देय वेतन/पेंशन का अनुदान अग्रिम रूप से जारी करे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="325" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/PNC_VKSUAra.jpg" alt="" class="wp-image-53470" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/PNC_VKSUAra.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/06/PNC_VKSUAra-350x175.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा और संजय कुमार सिंह, एमएलसी, महासचिव, फ़ुटाब, ने कहा कि माननीय न्यायालय ने 22 दिसंबर 2022 को अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की और कहा कि जब सरकारी कर्मचारियों को समय पर पेंशन भुगतान हो जाता है तो विश्वविद्यालय कर्मियों को क्यों नहीं किया जाता है? सरकार द्वारा अपना जवाब निर्धारित तिथि को दाखिल नहीं करने पर कोर्ट ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए जुर्माना लगाना चाहा ,लेकिन राज्य के वकील के आग्रह पर इसके लिए समय देने पर सहमति बनी.</p>



<p>इस मामले में 3 जनवरी 2023 को मामले की फिर से सुनवाई हुई. महासंघ ने बताया कि सरकार के हलफनामे से संतुष्ट नहीं होने पर अदालत ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग को आने वाले सोमवार (9/1/23) को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेशी के लिए बुलाया है. फुटाब नेताओं ने मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि 8 अक्टूबर 2018 के अदालत के आदेश के बाद से कुछ भी सुधार नहीं हुआ है. राज्य का बजट जिसमें विश्वविद्यालयों का बजट भी शामिल है, हालांकि हर साल फरवरी/मार्च में पारित किया जाता है लेकिन विश्वविद्यालयों के लिए बजटीय आवंटन को अगस्त/सितंबर से पहले शिक्षा और वित्त विभाग द्वारा मंजूरी नहीं दी जाती है जिससे बड़ी कठिनाई उत्पन्न हो जाती है. ऐसी शिथिलता समक्ष से परे है.</p>



<p>विश्वविद्यालयों के लिए वित्त वर्ष 2022-23 के बजट को अंतिम रूप देने का हवाला देते हुए, उन्होंने बताया कि तीन महीने का एडहॉक अनुदान जून में जारी किया गया था और अगस्त 2022 से फरवरी 2023 के आवंटन को पत्र संख्या 89 दिनांक 22/10/22 के माध्यम से अंतिम रूप दिया गया था.</p>



<p>आश्चर्यजनक रूप से जेपी विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए अगस्त से अक्टूबर तक केवल तीन महीने की पेंशन और बीएन मंडल विश्वविद्यालय के लिए दिसंबर तक आवंटित किया गया, आवंटन आदेश में इसका कोई कारण नहीं बताया गया. दिसंबर के अनुदान में तो जेपी विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय और संस्कृत विश्वविद्यालय में पेंशन मद में शून्य आवंटन था. न तो विश्वविद्यालय और न ही सरकार इसके लिए कोई तर्क देती है. यहां तक कि डी.ए. अप-टू-डेट नहीं है.</p>



<p>1/1/16 से पहले सेवानिवृत्त हो चुके लोगों के लिए 7 वें वेतन पेंशन का बकाया सभी विश्वविद्यालयों को अभी तक जारी नहीं किया गया है और 1/1/16 के बाद सेवानिवृत्त होने वालों के लिए बकाया को आंशिक रूप से जारी किया गया है, जो उन्हें 1/1/16 से अप्रैल 2019 तक के पूर्ण सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित करता है.</p>



<p>उन्होंने आरोप लगाया कि पारंपरिक विश्वविद्यालय सरकार की प्राथमिकता सूची से बाहर हो गए हैं. इस तथ्य के बावजूद कि केवल ये विश्वविद्यालय हीं 2030 तक राष्ट्रीय औसत तक जीईआर तक पहुंचने के सरकार के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं और गरीब और वंचित वर्ग की उच्च शिक्षा की महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर सकते हैं. समाजिक न्याय की अवधारणा की नीति पर चलने का दावा करने वाली सरकार का यह संवैधानिक दायित्व भी है कि वह शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के प्रति भी न्याय करे.</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या बिहार पुलिस कोर्ट से भी ऊपर है : हाईकोर्ट</title>
		<link>https://www.patnanow.com/is-bihar-police-above-the-court-high-court/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Aug 2022 03:22:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Crime]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[DGP BIHAR]]></category>
		<category><![CDATA[high court]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार पुलिस का कारनामा, परिणाम भुगत रहे डीजीपी हाई कोर्ट ने आज कोर्ट में पेश होने को कहा जज के चैम्बर में तान दिया था पिस्तौल जज के साथ मारपीट का आरोप और कर दिया उन्ही पर एफआईआर बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट औऱ हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ा रखी है. एक मामले की सुनवाई के दौरान बेलगाम पुलिस की कार्रवाई पर हाईकोर्ट की बेंच भी हैरान रह गयी. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बिहार पुलिस के खिलाफ बेहद सख्त टिप्पणियां करते हुए कहा कि बिहार के डीजीपी के साथ साथ संबंधित एसपी और आईओ को गुरूवार को कोर्ट में पेश किया जाये. नाराज कोर्ट ने कहा कि हम कल ही फैसला करेंगे कि उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाये या नहीं. आज ढ़ाई बजे कोर्ट ने डीजीपी के साथ साथ संबंधित एसपी और आईओ को भी पेश करें. आज उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा. झंझारपुर कोर्ट में जज के चेंबर में घुसकर पुलिस थानेदार औऱ एक और दरोगा ने एडीजे प्रथम अविनाश कुमार की पिटाई कर दी थी. मधुबनी जिले के झंझारपुर सिविल कोर्ट में घोघरडीहा थाने के थानेदार गोपाल कृष्ण और दरोगा अभिमन्यू कुमार शर्मा ने चेंबर में घुसकर जज के साथ मारपीट की थी. थानेदार ने जज पर पिस्तौल तान दिया था. कोर्ट परिसर में मौजूद वकीलों ने जज को किसी तरह बचाया था. इस वाकये के बाद बिहार पुलिस ने जो किया उस पर पटना हाईकोर्ट बुरी तरह नाराज है. कोर्ट को बताया गया कि बिहार पुलिस ने झंझारपुर के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>बिहार पुलिस का कारनामा, परिणाम भुगत रहे डीजीपी</strong></p>



<p><strong>हाई कोर्ट ने आज कोर्ट में पेश होने को कहा</strong></p>



<p><strong>जज के चैम्बर में तान दिया था पिस्तौल</strong></p>



<p><strong>जज के साथ मारपीट का आरोप और कर दिया उन्ही पर एफआईआर</strong> </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="340" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/08/PNC-Patna-High-Court-1-650x340.png" alt="" class="wp-image-40842" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2019/08/PNC-Patna-High-Court-1.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2019/08/PNC-Patna-High-Court-1-350x183.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट औऱ हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ा रखी है. एक मामले की सुनवाई के दौरान बेलगाम पुलिस की कार्रवाई पर हाईकोर्ट की बेंच भी हैरान रह गयी. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बिहार पुलिस के खिलाफ बेहद सख्त टिप्पणियां करते हुए कहा कि बिहार के डीजीपी के साथ साथ संबंधित एसपी और आईओ को गुरूवार को कोर्ट में पेश किया जाये. नाराज कोर्ट ने कहा कि हम कल ही फैसला करेंगे कि उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाये या नहीं. आज ढ़ाई बजे कोर्ट ने डीजीपी के साथ साथ संबंधित एसपी और आईओ को भी पेश करें. आज उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="502" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/judge.png" alt="" class="wp-image-65104" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/judge.png 450w, https://www.patnanow.com/assets/2022/08/judge-314x350.png 314w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /><figcaption><strong>एडीजे प्रथम अविनाश कुमार</strong></figcaption></figure>



<p>झंझारपुर कोर्ट में जज के चेंबर में घुसकर पुलिस थानेदार औऱ एक और दरोगा ने एडीजे प्रथम अविनाश कुमार की पिटाई कर दी थी. मधुबनी जिले के झंझारपुर सिविल कोर्ट में घोघरडीहा थाने के थानेदार गोपाल कृष्ण और दरोगा अभिमन्यू कुमार शर्मा ने चेंबर में घुसकर जज के साथ मारपीट की थी. थानेदार ने जज पर पिस्तौल तान दिया था. कोर्ट परिसर में मौजूद वकीलों ने जज को किसी तरह बचाया था. इस वाकये के बाद बिहार पुलिस ने जो किया उस पर पटना हाईकोर्ट बुरी तरह नाराज है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="325" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/judge-and-police.png" alt="" class="wp-image-65105" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/judge-and-police.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/08/judge-and-police-350x175.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong>कोर्ट में जज और मारपीट करने वाले पुलिसकर्मी </strong></figcaption></figure>



<p>कोर्ट को बताया गया कि बिहार पुलिस ने झंझारपुर के एडीजे अविनाश कुमार पर ही एफआईआर कर दिया है. जिन पुलिसकर्मियों पर जज की पिटाई का आरोप लगा था उनके बयान पर जज के खिलाफ ही एफआईआर कर दिया गया. पटना हाईकोर्ट इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की बेंच में इस मामले की सुनवाई हो रही थी. कोर्ट ने सरकार के वकील से पूछा कि किस कानून के तहत जज के खिलाफ एफआईआर किया गया है. सरकारी वकील इस सवाल का जवाब नहीं दे पाये.</p>



<p>वकील मृगांक मौली ने बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट समेत देश के कई हाईकोर्ट स्पष्ट तौर पर ये आदेश दे चुके हैं कि किसी न्यायिक पदाधिकारी के खिलाफ तभी कोई एफआईआर दर्ज किया जा सकता है जब उसकी मंजूरी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दें. झंझारपुर मामले में बिहार सरकार या पुलिस ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कोई मंजूरी नहीं ली. बिहार पुलिस का पक्ष रख रहे वकील ने कहा कि एफआईआर करने के लिए चीफ जस्टिस को पत्र लिखा गया था. चीफ जस्टिस संजय करोल सरकारी वकील का जवाब सुनकर हैरान रह गये. उन्होंने कहा-मैंने कोई मंजूरी नहीं दी फिर केस कैसे दर्ज हो गया.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने के लिए आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/advocate-protection-law-ke-liye-pradarshan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Jul 2022 06:10:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना, 28 जुलाई. पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता एवं आरा बार संघ के सदस्य,बिहार युवा अधिवक्ता कल्याण समिति के प्रमण्डलीय मंत्री नीतीश कुमार सिंह ने बिहार स्टेट बार काउंसिल के प्रांगण में क्रांतिकारी अधिवक्ता मंच के बैनर तले एकदिवसीय धरना प्रदर्शन में कहा कि कोरोना काल मे बहुसन्ख्यक अधिवक्ता साथी दवा के अभाव में काल के गाल में समा गये. सरकार ने सभी वर्गो की आर्थिक सहायता की लेकिन अधिवक्ता वर्ग की उपेक्षा की. जिन्हें कोरोना के बाद भी अभी तक सरकार द्वारा कोई वित्तीय सहायता नहीं दी गई है. 20% अधिवक्ता बंधु इस पेशे को छोड़ चुके है. इस कारण सरकार को डेथ क्लेम, मेडी क्लेम बढाने के आलावा अविलंब वित्तीय सहायता देनी चाहिए. नीतीश कुमार सिंह ने वादकारियों के लिए सस्ते दर पर नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराने, नए अधिवक्ताओं को दस हजार रुपये मासिक धनराशि देने, अधिवक्ताओं की आकस्मिक मृत्यु पर उनके परिजनों को 50 लाख रुपये देने एवं बीमार होने पर नि:शुल्क चिकत्सा देने की मांग रखी. कार्यक्रम की अध्यक्षता विंध्यकेशरी सिंह और मंच का संचालन रणविजय सिंह ने किया. अध्यक्षीय भाषण में डेथ क्लेम को 5 लाख से 15 लाख करने, मेडीक्लेम को 1 लाख से 2 लाख करने, वेलफेयर ट्रस्टी कमिटी फण्ड घोषित करने, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने जैसे बहुप्रतीक्षित मांगों को लेकर हुये आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन को संबोधित करते हुये विंध्यकेशरी सिंह ने कहा की अगर डेथ क्लेम मेडी क्लेम को सरकार नहीं बढ़ाती है तो हमलोग एडवोकेट जेनरल का घेराव करेंगे. अधिवक्ता रणविजय सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना, 28 जुलाई. पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता एवं आरा बार संघ के सदस्य,बिहार युवा अधिवक्ता कल्याण समिति के प्रमण्डलीय मंत्री नीतीश कुमार सिंह ने बिहार स्टेट बार काउंसिल के प्रांगण में क्रांतिकारी अधिवक्ता मंच के बैनर तले एकदिवसीय धरना प्रदर्शन में कहा कि कोरोना काल मे बहुसन्ख्यक अधिवक्ता साथी दवा के अभाव में काल के गाल में समा गये. सरकार ने सभी वर्गो की आर्थिक सहायता की लेकिन अधिवक्ता वर्ग की उपेक्षा की. जिन्हें कोरोना के बाद भी अभी तक सरकार द्वारा कोई वित्तीय सहायता नहीं दी गई है. 20% अधिवक्ता बंधु इस पेशे को छोड़ चुके है. इस कारण सरकार को डेथ क्लेम, मेडी क्लेम बढाने के आलावा अविलंब वित्तीय सहायता देनी चाहिए. नीतीश कुमार सिंह ने वादकारियों के लिए सस्ते दर पर नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराने, नए अधिवक्ताओं को दस हजार रुपये मासिक धनराशि देने, अधिवक्ताओं की आकस्मिक मृत्यु पर उनके परिजनों को 50 लाख रुपये देने एवं बीमार होने पर नि:शुल्क चिकत्सा देने की मांग रखी.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-3.jpg" alt="" class="wp-image-64889" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-3.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-3-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता विंध्यकेशरी सिंह और मंच का संचालन रणविजय सिंह ने किया. अध्यक्षीय भाषण में डेथ क्लेम को 5 लाख से 15 लाख करने, मेडीक्लेम को 1 लाख से 2 लाख करने, वेलफेयर ट्रस्टी कमिटी फण्ड घोषित करने, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने जैसे बहुप्रतीक्षित मांगों को लेकर हुये आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन को संबोधित करते हुये विंध्यकेशरी सिंह ने कहा की अगर डेथ क्लेम मेडी क्लेम को सरकार नहीं बढ़ाती है तो हमलोग एडवोकेट जेनरल का घेराव करेंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="509" height="311" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-2.jpg" alt="" class="wp-image-64890" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-2.jpg 509w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-2-350x214.jpg 350w" sizes="(max-width: 509px) 100vw, 509px" /></figure>



<p>अधिवक्ता रणविजय सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाला अधिवक्ता समाज आजादी के बाद से ही उपेक्षित रहा है. आज देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है लेकिन अधिवक्ता वर्ग हाशिये पर है. आज अधिवक्ताओं को पुनः एकजुट होकर अपने हक की आवाज बुलंद करने की जरूरत है. रामसन्देश राय अधिवक्ता ने कहा कि अधिवक्ताओं की अपनी संस्था बार काउंसिल द्वारा अधिवक्ता हितों की उपेक्षा की जाती है लेकिन अबकी बार आर-पार की लड़ाई होगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-4.jpg" alt="" class="wp-image-64891" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-4.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-4-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>शिवानंद गिरी ने अक्षम एवं वृद्ध वकीलों को पेंशन तथा पारिवारिक पेंशन की व्यवस्था करने की बात कही. कुलदीप नारायण दुबे ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार में 18 कैबिनेट मंत्री है लेकिन अधिवक्ताओ के प्रति गूंगे बहरे बने हुये हैं. राजकुमार राजेश ने अधिवक्ताओं से अपने हक की लड़ाई के लिए एकजुट होने का आहवान किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="400" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-1.jpg" alt="" class="wp-image-64892" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Advocate-protection-law-Patna-1-350x215.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार स्टेट बार कौंसिल सदस्य पंकज कुमार,नीतू झा,जयप्रकाश सिंह एवं काँआर्डरनिशन कमिटि के चेयरमैन योगेन्द्र प्रसाद वर्मा इस धरणा के समर्थन में अपनी उपस्थिती दर्ज करवाई अन्य वक्ताओं में प्रमुख रूप से रश्मीराज कौसिक विकी, सुनील कुमार मिश्रा, शभुशरण शर्मा,जगदीश्वर प्रसाद सिंह,जय शंकर प्रसाद सिंह,गिरीश चन्द्र, प्रभुकुमार सिंह,सृष्टि,धन्जय कुमार,फिरोज अहमद, मनीष कुमार,देव नारायण प्रसाद, ए० के० सिद्दीकी, नवल किशोर सिंह ने अपनी अपनी बात रखी. कार्यक्रम के बीच में बिहार स्टेट बार काउंसिल के चैयरमैन रमाकांत शर्मा ने एडवोकेट वेलफेयर के लिए आश्वासन दिया एवं इस मंच की माँगों को एडवोकट जेनरल ने भी सरकार तक पहुँचाने का आश्वासन दिया वो सर्वसम्मति से निर्णय हुआ कि अधिवक्ता की मांगो को एक माह में पूरा नहीं किया गया तो क्रांतिकारी अधिवक्ता मंच के बैनर तले चल रहे चरणबद्धआंदोलण को और तेज किया जायगा.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>नियमित फिजिकल कोर्ट शुरू करने के लिए  हाईकोर्ट से गुहार, सुझाये उपाय भी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/young-advocate-apeal-for-physical-hearing-court/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Jul 2021 21:00:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Crime]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[UPSC/PCS]]></category>
		<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[Ara civil court lier]]></category>
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		<category><![CDATA[high court]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[Physical court]]></category>
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					<description><![CDATA[आरा ।। अदालतों में एक सुरक्षात्मक तंत्र के माध्यम से अधिवक्ताओं के प्रवेश को सुनिश्चित और नियमित करते हुए न्यायालय कार्य शुरू करवाने के लिए बिहार युवा अधिवक्ता कल्याण समिति पटना के अधिवक्ता नितीश कुमार सिंह ने मननीय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा है. नीतिश कुमार सिंह सिवील कोर्ट,आरा सह शाहाबाद प्रमंडल के संगठन मंत्री भी हैं बिहार युवा अधिवक्ता कल्याण समिति के. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि यह एक तथ्य है कि देश कोविड -19 के प्रसार के कारण बहुत भयावह दौर से गुजर रहा है. इन दिनों का अनुभव बहुत उत्साहजनक नहीं है, न्यायालय में अधिवक्ताओं के प्रवेश को रोक देने के बाद से, उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों में अधिसंख्य अधिवक्ताओं के बहुमत, जो कंप्यूटर के जानकार नहीं हैं जिसके कारण वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते हैं, जिससे माननीय से संपर्क करने में विफल रहे हैं. अधिसंख्य हाइकोर्ट अपने यहाँ फिजिकल सुनवाई करने जा रही है. बिहार में कोरोना के केसेज बहुत ही कम आ रहे हैं इस कारण, कुछ व्यापक मापदंडों और पर्याप्त सुरक्षा उपायों को पेश किया जा सकता है, जो कि अदालतों में एक सुरक्षात्मक तंत्र के माध्यम से अधिवक्ताओं के प्रवेश को चालू और नियमित किया जा सकता है. उन्होंने न्यायालय से अपील किया है कि न्यूनतम संभव कार्य को सुचारू रूप से शुरु कराया जाय जिससे कोर्ट से सम्बंधित सभी लोगों का काम चल सके. इसमें कोई संदेह नहीं है, घर में बेकार बैठना एक मजबूरी है, लेकिन इससे भी अधिक, मुकदमों के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आरा ।। अदालतों में एक सुरक्षात्मक तंत्र के माध्यम से अधिवक्ताओं के प्रवेश को सुनिश्चित और नियमित करते हुए न्यायालय कार्य शुरू करवाने के लिए बिहार युवा अधिवक्ता कल्याण समिति पटना के अधिवक्ता नितीश कुमार सिंह ने मननीय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा है. नीतिश कुमार सिंह सिवील कोर्ट,आरा सह शाहाबाद प्रमंडल के संगठन मंत्री भी हैं बिहार युवा अधिवक्ता कल्याण समिति के.</p>



<p>उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि यह एक तथ्य है कि देश कोविड -19 के प्रसार के कारण बहुत भयावह दौर से गुजर रहा है. इन दिनों का अनुभव बहुत उत्साहजनक नहीं है, न्यायालय में अधिवक्ताओं के प्रवेश को रोक देने के बाद से, उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों में अधिसंख्य अधिवक्ताओं के बहुमत, जो कंप्यूटर के जानकार नहीं हैं जिसके कारण वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते हैं, जिससे माननीय से संपर्क करने में विफल रहे हैं. अधिसंख्य हाइकोर्ट अपने यहाँ फिजिकल सुनवाई करने जा रही है. बिहार में कोरोना के केसेज बहुत ही कम आ रहे हैं इस कारण, कुछ व्यापक मापदंडों और पर्याप्त सुरक्षा उपायों को पेश किया जा सकता है, जो कि अदालतों में एक सुरक्षात्मक तंत्र के माध्यम से अधिवक्ताओं के प्रवेश को चालू और नियमित किया जा सकता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="517" height="562" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_-advocate-Nitish-kumar-singh.jpg" alt="" class="wp-image-54127" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_-advocate-Nitish-kumar-singh.jpg 517w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_-advocate-Nitish-kumar-singh-322x350.jpg 322w" sizes="(max-width: 517px) 100vw, 517px" /><figcaption>अधिवक्ता नीतीश कुमार सिंह</figcaption></figure>



<p>उन्होंने न्यायालय से अपील किया है कि न्यूनतम संभव कार्य को सुचारू रूप से शुरु कराया जाय जिससे कोर्ट से सम्बंधित सभी लोगों का काम चल सके. इसमें कोई संदेह नहीं है, घर में बेकार बैठना एक मजबूरी है, लेकिन इससे भी अधिक, मुकदमों के साथ अन्याय है और हमें अपने संसाधनों का उपयोग करने की आवश्यकता है ताकि कोरोना वायरस को हराने के लिए लक्ष्य के साथ समझौता किए बिना अधिक मामले उठाए जा सके.</p>



<p>उन्होंने माननीय गृह मंत्रालय, बिहार सरकार द्वारा पारित सभी स्कूलो, दुकानों, प्रतिष्ठानों आदि को खोलने के आदेश का हवाला देते हुए अदालत के काम को भी इसी तरह फिर से शुरू करने से संबंधित निर्णय सुनाने की मांग की है.</p>



<p>उन्होंने एक &#8220;<strong>ग्रेडेड एक्शन प्लान</strong>&#8221; बनाने की मांग की है जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं की उन्होंने सिफारिश की है:</p>



<ol class="wp-block-list"><li>उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालयो में अलग प्रवेश और निकास द्वार होना चाहिए और प्रत्येक प्रवेश द्वार पर COVID परीक्षण उपकरणों और स्वच्छता सुरंग से सुसज्जित होना चाहिए.</li><li>उच्च न्यायालय में तीन अलग-अलग इमारतें हैं और विभिन्न जिला न्यायालयों के पास बड़ी-बड़ी इमारतें हैं इसलिए सभी न्यायालयों के कोर्ट हॉल को बड़ा तथा उनके के बीच काफी दूरी रखते हुए कोर्ट फंक्शनिंग अलग-अलग कोर्ट कॉम्प्लेक्स से शुरू हो सकती है और जिला न्यायालयों के लिए भी यही दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं. इस प्रकार, अधिक से अधिक मामलों की सुनवाई उच्च न्यायालय के साथ-साथ जिला न्यायालयों में एकल पीठ की संख्या में वृद्धि करके शुरू की जा सकती है.</li><li>कोर्ट रूम में, कमरे के आकार को ध्यान में रखते हुए, कुर्सियों को दूरी पर रखा जाना चाहिए और न्यायाधीश और वकील के बीच 5-6 फीट की दूरी होनी चाहिए और समान मानदंडों को सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट की सुनवाई के लिए जिला न्यायालयों में बिग कोर्ट हॉल खोले जा सकते हैं.</li><li>प्रत्येक मामले की सुनवाई का समय तय किया जाना चाहिए और उनकी अगली सुनवाई के लिए 2-3 मिनट का समय अंतराल होना चाहिए ताकि संबंधित अधिवक्ता अदालत कक्ष के अंदर आ सकें.</li><li>प्रत्येक न्यायाधीश को कुछ मामलों को चिह्नित किया जाना चाहिए और प्रत्येक अधिवक्ता को अपने मामले में अपने तर्क रखने की संभावित अवधि के बारे में अपनी फाइल पर उल्लेख करना चाहिए और मामला दर्ज होने के दो दिन बाद और मामले की सुनवाई के बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाना चाहिए. यदि मामले में अधिक समय लगता है तो कारण सूची में दिए गए अगले मामले को कारण सूची में दिए गए समय पर कॉल किया जा सकता है और शेष भाग सुने हुए मामले को बोर्ड के अंत में लिया जाना चाहिए.</li><li>जहां तक ​​संभव हो मामलों में सुनवाई शुरू करने और नए मामलों में, केवल अधिवक्ता को मामले में प्रतिनिधित्व करने की अनुमति देने के प्रयास किए जा सकते हैं.</li><li>प्रत्येक पक्ष के लिए केवल दो अधिवक्ताओं को उसी तरह से अनुमति दी जा सकती है जैसे कि एक वरिष्ठ पदनाम अधिवक्ता ब्रीफिंग वकील के साथ दिखाई देते है. जिन मामलों में पक्षकारों की संख्या अधिक है, उन मामलों में प्रत्येक पक्ष के लिए केवल एक अधिवक्ता को अनुमति दी जा सकती है.</li><li>मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीशों को ग्लास शील्ड और माइक की व्यवस्था प्रदान की जानी चाहिए, यदि आवश्यक हो तो न्यायाधीशों के साथ-साथ वकीलों के लिए भी ऐैसी व्यवस्था बनाई जाए.</li><li>एक अधिवक्ता जिसका मामला सूचीबद्ध नहीं है, को कोर्ट हॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.</li><li>कोर्ट हॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए प्रावधान होना चाहिए और लिटिगैंट के अनुरोध पर, उसी की सीडी पार्टी / अधिवक्ता को कुछ राशि के भुगतान पर दी जा सकती है.</li></ol>



<p>11। न्यायालय की सुनवाई की लाइव कार्यवाही का प्रावधान जल्द से जल्द किया जाए जो भविष्य में कोर्ट हॉल में भीड़भाड़ को कम करने के लिए उपयोगी होगा क्योंकि लिटिगैंट अपने मोबाइल पर बहुत अच्छी तरह से देख सकते हैं.</p>



<ol class="wp-block-list" start="12"><li>न्यायालय परिसर के कैंटिनों को चैम्बर डिलिभिरी सेवा देनी चाहिए जिससे अनावश्यक भीड़ कम हो सके.</li><li>वकीलों को सीमित रूप से, नंबर फ्लोरवाइड, तारीख और समय तक सीमित रखते हुए, सीमित रूप से सभी कोर्ट कॉम्प्लेक्स में अपने चैंबर तक पहुंच की अनुमति दी जा सकती है. इसे संबंधित बार एसोसिएशनों द्वारा सुव्यवस्थित किया जा सकता है और जिला जजों को सामाजिक मानदंडों को निर्धारित करना चाहिए.</li><li>सामाजिक दूरियों के साथ चलने के लिए परिसर में कॉरिडोर बनाया जाए और किसी भी व्यक्ति को बिना फेस मास्क के प्रवेश न दिया जाए और एंट्री पॉइंट पर हाथों को साफ सेनेटाइज करावाकर प्रवेश कराया जाए.</li><li>प्रत्येक आवश्यक सूचीबद्ध मामले के लिए निश्चित समय सुनवाई के लिए दिया जाना चाहिए ताकि एक समय में केवल एक ही मामले को सुना जा सके और संवैधानिक अधिकारों के लिए संभावित अपूरणीय चोट के आधार पर मामले की तात्कालिकता का फैसला किया जा सके। अन्य मामलों को तीन महीने के लिए स्थगित किया जा सकता है.</li><li>ताजा मामले केवल प्रत्येक अदालत में 10 तक सीमित होंने चाहिए और लंबित जरूरी मामलों को प्रत्येक अदालत में उसी अनुपात में सूचीबद्ध किया जाए.</li><li>जमानत से संबंधित मामलों में यह सुझाव दिया जाता है कि जब भी मजिस्ट्रेट की अदालत के सामने जमानत के लिए आवेदन दायर किया जाता है, तो स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करना आवश्यक होता है. ऐसी स्थिति में रिपोर्ट की सत्यापित प्रति अनिवार्य रूप से याचिकाकर्ता के वकील को दी जानी चाहिए.</li><li>किसी भी लिटिगैंट को अनावश्यक अदालत परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाए. उन्हें अपने कार्यालयों में और चैम्बर में प्रवेश के लिए अपने वकील को ब्रीफ करना होगा, विशेष तिथि के लिए वकील से क्लाइंट के लिए एक मेल अनिवार्य होना चाहिए.</li><li>सभी अधिवक्ताओं को सामान्य रूप से काम फिर से शुरू करने की उम्मीद है, लेकिन अंत में लॉकडाउन उठाने से पहले, कुछ सिस्टम मानदंडों के साथ समझौता किए बिना प्रयोगात्मक आधार पर फिजीकल कोर्ट शुरू हो सकते हैं.</li><li>स्टेट बार काउंसिल,बिहार द्वारा संबंधित वकीलों को जारी किए गए पहचान पत्र को कर्फ्यू पास माना जा सकता है और कोई अलग पास अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए.</li><li>चूंकि सीमा के प्रयोजनों के लिए, माननीय न्यायालय के आदेश पहले ही पारित किए जा चुके हैं, जैसे ही और जब काम फिर से शुरू किया जाता है, तो पर्याप्त समय दिया जा सकता है ताकि दाखिल होने के पहले दिन से तुरंत दाखिल किया जा सके, सभी मामलों को प्रस्तुत करना संभव नहीं हो सकता है. इस तरह, अदालत के कामकाज शुरू होने से 7 से 10 दिन पहले फाइलिंग को खोला जा सकता है या अदालत के कामकाज शुरू होने के बाद 7 से 10 दिनों तक सीमा को सीमित या निलंबित रखा जा सकता है.</li><li>COVID 19 आपात स्थितियों से निपटने के लिए पूर्ण अवसंरचना के साथ एक एम्बुलेंस COVID परीक्षण किट के साथ न्यायालय परिसर में अनिवार्य होने चाहिए .</li></ol>



<p>अब देखना होगा कि अधिवक्ता नीतीश कुमार सिंह के द्वार सुझाये गए इन बिन्दुओं पर माननीय उच्च न्यायालय क्या निर्णय लेता है.</p>



<p>आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिक्षण संस्थानों को लौटाने पड़ेंगे सामान्य महिला व SC/ST उम्मीदवारों से लिए गए शुल्क</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sc-st-aur-samanya-mahila-ummidwaro-ko-lautane-padega-shulk/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Jul 2021 10:55:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
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					<description><![CDATA[जनहित याचिका पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई पटना, 12 जुलाई. जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है.अपने दिए फैसले में पटना हाईकोर्ट ने सामान्य महिला, SC और ST उम्मीदवारों से शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश,शिक्षण व अन्य लिए गए शुल्कों को एक सप्ताह के भीतर लौटाने का निर्देश राज्य के मुख्य सचिव को दिया है. बता दें कि जनहित याचिका रंजीत पंडित द्वारा दायर की गई थी जिसपर सुनवाई चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने की. याचिका में यह कहा गया कि महिला, SC, STउम्मीदवारों से स्नातकोत्तर स्तर तक प्रवेश, शिक्षण व अन्य शुल्क नहीं लिए जाने का निर्णय लिया गया था. याचिका के अनुसार यह निर्णय राज्य सरकार ने 24 जुलाई,2015 को लिया था, लेकिन राज्य सरकार के निर्णय का उल्लघंन करते हुए विश्वविद्यालयों व कालेजों ने इन श्रेणी के उम्मीदवारों से सभी प्रकार के शुल्क लिया. इस पर पटना हाईकोर्ट ने इन श्रेणी के उम्मीदवारों को सारे लिए गए शुल्कों को एक सप्ताह में लौटाने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है.&#160; माननीय हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि आगे से इन श्रेणियों के उम्मीदवारों से प्रवेश, शिक्षण व अन्य किसी तरह के शुल्क स्नातकोत्तर स्तर तक नहीं लिए जाए. इस मामले पर अगली सुनवाई अगले सप्ताह बाद की जाएगी. PNCB]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><br><strong>जनहित याचिका पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई</strong></p>



<p>पटना, 12 जुलाई. जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है.<br>अपने दिए फैसले में पटना हाईकोर्ट ने सामान्य महिला, SC और ST उम्मीदवारों से शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश,शिक्षण व अन्य लिए गए शुल्कों को एक सप्ताह के भीतर लौटाने का निर्देश राज्य के मुख्य सचिव को दिया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="389" src="https://www.patnanow.com/assets/2018/06/PNC-PATNA-HIGH-COURT-650x389.jpg" alt="" class="wp-image-34009" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2018/06/PNC-PATNA-HIGH-COURT.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2018/06/PNC-PATNA-HIGH-COURT-350x209.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बता दें कि जनहित याचिका रंजीत पंडित द्वारा दायर की गई थी जिसपर सुनवाई चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने की. याचिका में यह कहा गया कि महिला, SC, STउम्मीदवारों से स्नातकोत्तर स्तर तक प्रवेश, शिक्षण व अन्य शुल्क नहीं लिए जाने का निर्णय लिया गया था. याचिका के अनुसार यह निर्णय राज्य सरकार ने 24 जुलाई,2015 को लिया था, लेकिन राज्य सरकार के निर्णय का उल्लघंन करते हुए विश्वविद्यालयों व कालेजों ने इन श्रेणी के उम्मीदवारों से सभी प्रकार के शुल्क लिया. इस पर पटना हाईकोर्ट ने इन श्रेणी के उम्मीदवारों को सारे लिए गए शुल्कों को एक सप्ताह में लौटाने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है.&nbsp; माननीय हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि आगे से इन श्रेणियों के उम्मीदवारों से प्रवेश, शिक्षण व अन्य किसी तरह के शुल्क स्नातकोत्तर स्तर तक नहीं लिए जाए. इस मामले पर अगली सुनवाई अगले सप्ताह बाद की जाएगी.</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
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