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	<title>Futab &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<description>Patna News Portal - हर ख़बर पर नज़र</description>
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	<title>Futab &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<item>
		<title>शिक्षकों का समय पर भुगतान न होने से बिफरा फुटाब</title>
		<link>https://www.patnanow.com/smay-per-bhugtan-na-hone-se-bigada-futab/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 31 Dec 2024 09:48:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[फरवरी में पारित बजट के बाद भी अबतक भुगतान नही नौकरशाही द्वारा जानबूझकर पैदा की जा रही समस्या नही हुआ निदान तो हो सकता है बड़ा आंदोलन : फुटाब आरा, 31 दिसम्बर. बिहार राज्य विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुटाब) ने सरकार से मांग किया है कि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को मासिक वेतन और पेंशन के अनियमित भुगतान के कारणों पर एक श्वेत पत्र जारी किया जाए कि जब विश्वविद्यालयों का बजट इस वर्ष फरवरी/मार्च में पारित हो चुका है फिर भी नियमित भुगतान क्यों नहीं हो रहा है? फुटाब के कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा और महासचिव संजय कुमार सिंह, एमएलसी ने कहा है कि पूरे वर्ष 2024 में शिक्षकों और सरकार के बीच लगातार रस्साकशी के बाद, 4+3+1 महीने के अंतराल पर मासिक अनुदान जारी हुआ. अब नवंबर और दिसंबर का भुगतान भी जारी होना बाकी है. आगे बताया कि शिक्षकों के पास नए साल का स्वागत करने के लिए कुछ भी नया नहीं है. उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि केवल पांच विश्वविद्यालयों के लिए अनुदान उपलब्ध है और अन्य के लिए संसाधन जुटाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन महासंघ ने अनुदान को टुकड़ों में जारी करने पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और सरकार में शीर्ष पदों पर बैठे लोग समय पर परीक्षा और परिणाम प्रकाशित करने का श्रेय तो ले रहे हैं, लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि शिक्षकों पर किस तरह का दबाव है, इसके वावजूद शैक्षणिक सत्र को नियमित करने मे सार्थक योगदान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>फरवरी में पारित बजट के बाद भी अबतक भुगतान नही</strong></p>



<p><strong>नौकरशाही द्वारा जानबूझकर पैदा की जा रही समस्या</strong></p>



<p><strong>नही हुआ निदान तो हो सकता है बड़ा आंदोलन : फुटाब</strong></p>



<p>आरा, 31 दिसम्बर. बिहार राज्य विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुटाब) ने सरकार से मांग किया है कि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को मासिक वेतन और पेंशन के अनियमित भुगतान के कारणों पर एक श्वेत पत्र जारी किया जाए कि जब विश्वविद्यालयों का बजट इस वर्ष फरवरी/मार्च में पारित हो चुका है फिर भी नियमित भुगतान क्यों नहीं हो रहा है?</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="325" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/PNC_VKSUAra.jpg" alt="" class="wp-image-53470" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/06/PNC_VKSUAra.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/06/PNC_VKSUAra-350x175.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>फुटाब के कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा और महासचिव संजय कुमार सिंह, एमएलसी ने कहा है कि पूरे वर्ष 2024 में शिक्षकों और सरकार के बीच लगातार रस्साकशी के बाद, 4+3+1 महीने के अंतराल पर मासिक अनुदान जारी हुआ. अब नवंबर और दिसंबर का भुगतान भी जारी होना बाकी है. आगे बताया कि शिक्षकों के पास नए साल का स्वागत करने के लिए कुछ भी नया नहीं है.</p>



<p>उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि केवल पांच विश्वविद्यालयों के लिए अनुदान उपलब्ध है और अन्य के लिए संसाधन जुटाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन महासंघ ने अनुदान को टुकड़ों में जारी करने पर आपत्ति जताई है.</p>



<p>उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और सरकार में शीर्ष पदों पर बैठे लोग समय पर परीक्षा और परिणाम प्रकाशित करने का श्रेय तो ले रहे हैं, लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि शिक्षकों पर किस तरह का दबाव है, इसके वावजूद शैक्षणिक सत्र को नियमित करने मे सार्थक योगदान कर रहें हैं.</p>



<p>उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक संगठन फुटाब और फुस्ताब विश्वविद्यालयों पर थोपी गई इस उदासीन, कष्टप्रद और अपमानजनक व्यवस्था को समाप्त करने के लिए शांतिपूर्ण विरोध/ कलम बंद हड़ताल या कोई अन्य रास्ता अपनाने का फैसला कर सकते हैं. जरूरत पड़ने पर वे नौकरशाही द्वारा जानबूझकर पैदा की जा रही अनिश्चितताओं का स्थायी समाधान करने के लिए कानूनी उपाय भी अपना सकते हैं.</p>



<p>उन्होंने उम्मीद जताई है कि नए राज्यपाल सह कुलाधिपति वित्तीय, शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्र में व्याप्त विसंगतियों पर गौर करेंगे, ताकि नई शिक्षा नीति के वांछित लक्ष्य को हासिल किया जा सके.</p>



<p><strong>pncb</strong></p>
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		<item>
		<title>फुटाब ने की शिक्षा मंत्री और नये एसीएस की सराहना</title>
		<link>https://www.patnanow.com/futab-appreciates-minister-and-acs/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Jun 2024 18:06:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Education department]]></category>
		<category><![CDATA[Futab]]></category>
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					<description><![CDATA[फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज टीचर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार (फुटाब) ने राजभवन, विश्वविद्यालयों और शिक्षा विभाग के बीच कई महीनों से चल रहे गतिरोध के समाधान का स्वागत किया है और इसमें शिक्षा मंत्री सुनील कुमार और एसीएस एस सिद्धार्थ की सकारात्मक भूमिका की सराहना की है. उन्होंने एक ऐसी स्थिति को सामान्य बनाया जिसने अब तक विश्वविद्यालयों के कामकाज को ठप्प कर रखा था. फुटाब के कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा और महासचिव विधान पार्षद संजय कुमार सिंह ने कहा कि जिस तरह से शिक्षा विभाग ने कुलाधिपति और कुलपतियों को उचित सम्मान देकर गतिरोध को समाप्त करने का काम किया है, वह इस आमधारणा की पुष्टि करता है कि उच्च शिक्षा संस्थानों के वैधानिक अधिकारियों को नीचा दिखाकर और संविधान के साथ-साथ विश्वविद्यालय अधिनियम और क़ानून के प्रावधानों को दरकिनार करके एक व्यक्ति की मर्जी से नहीं चलाया जा सकता है.उन्होंने आशा व्यक्त की है कि वेतन, पेंशन और बकाया भुगतान के तरीके और अवधि के संबंध में लिए गए निर्णय तय समय सीमा के भीतर लागू किए जाएंगे.विदित है कि विवादों की वजह से बैंक खातों पर प्रतिबंध लग गया, कुलपतियों के वेतन पर रोक और शिक्षा विभाग के कुछ अवैध और अनधिकृत निर्णयों के खिलाफ असहमति व्यक्त करने वाले शिक्षकों के वेतन/पेंशन पर रोक , जिससे न केवल गंभीर नाराजगी हुई, बल्कि हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को महिनों वगैर वेतन/ पेंशन ‌गंभीर आर्थिक कठिनाइयों से गुजरना पड़ा.सबसे अधिक पीड़ित पारिवारिक पेंशनभोगी और गंभीर रूप से बीमार लोग हुए हैं. इतना अमानवीय रवैया पहले कभी नहीं देखा गया था. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज टीचर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार (फुटाब) ने राजभवन, विश्वविद्यालयों और शिक्षा विभाग के बीच कई महीनों से चल रहे गतिरोध के समाधान का स्वागत किया है और इसमें शिक्षा मंत्री सुनील कुमार और एसीएस एस सिद्धार्थ की सकारात्मक भूमिका की सराहना की है. उन्होंने एक ऐसी स्थिति को सामान्य बनाया जिसने अब तक विश्वविद्यालयों के कामकाज को ठप्प कर रखा था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="340" height="332" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-futab-kb-Sinha-Sanjay-Kumar-Singh.jpg" alt="" class="wp-image-84044"/></figure>



<p>फुटाब के कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा और महासचिव विधान पार्षद संजय कुमार सिंह ने कहा कि जिस तरह से शिक्षा विभाग ने कुलाधिपति और कुलपतियों को उचित सम्मान देकर गतिरोध को समाप्त करने का काम किया है, वह इस आमधारणा की पुष्टि करता है कि उच्च शिक्षा संस्थानों के वैधानिक अधिकारियों को नीचा दिखाकर और संविधान के साथ-साथ विश्वविद्यालय अधिनियम और क़ानून के प्रावधानों को दरकिनार करके एक व्यक्ति की मर्जी से नहीं चलाया जा सकता है.<br>उन्होंने आशा व्यक्त की है कि वेतन, पेंशन और बकाया भुगतान के तरीके और अवधि के संबंध में लिए गए निर्णय तय समय सीमा के भीतर लागू किए जाएंगे.<br>विदित है कि विवादों की वजह से बैंक खातों पर प्रतिबंध लग गया, कुलपतियों के वेतन पर रोक और शिक्षा विभाग के कुछ अवैध और अनधिकृत निर्णयों के खिलाफ असहमति व्यक्त करने वाले शिक्षकों के वेतन/पेंशन पर रोक , जिससे न केवल गंभीर नाराजगी हुई, बल्कि हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को महिनों वगैर वेतन/ पेंशन ‌गंभीर आर्थिक कठिनाइयों से गुजरना पड़ा.<br>सबसे अधिक पीड़ित पारिवारिक पेंशनभोगी और गंभीर रूप से बीमार लोग हुए हैं. इतना अमानवीय रवैया पहले कभी नहीं देखा गया था. उन्होंने आगे कहा कि सम्मानजनक समाधान और कुलपतियों की गरिमा की बहाली के बाद, अब यह कुलपतियों का दायित्व है कि वे विश्वविद्यालयों को अधिनियम और परिनियमों के प्रावधानों के अनुसार विश्वविद्यालय को अत्यधिक पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन चलाने का गंभीर प्रयास करेंगे.<br>उन्होंने कहा कि FUTAB विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और उसकी गरिमा की रक्षा के लिए चट्टान की तरह खड़ा रहा है ऐसे में विश्वविद्यालयों में किसी भी अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाने से महासंघ कभी भी पीछे नहीं हटेगा. विश्वविद्यालयों को ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे सरकार को हस्तक्षेप करने पर मजबूर होना पड़े.<br>उन्होंने बताया कि फेडरेशन ने पहले नए एसीएस को एक ज्ञापन भेजकर शिक्षकों को किसी भी संघ को बनाने या उसमें शामिल होने से रोकने वाले आदेश को वापस लेने की मांग की थी. विभाग द्वारा इसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखते हुए कठोर दंडात्मक कार्रवाई का आदेश दिया था जबकि ऐसा करना संविधान अनुच्छेद 19 से 21 के अनुसार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार के विरुद्ध था.<br>ज्ञापन में शिक्षा विभाग से सीधे भुगतान के प्रस्तावित तरीके को खत्म करने की भी मांग की गई थी.<br>इसमें एनपीएस के प्रभावी कार्यान्वयन, बाल देखभाल अवकाश कानूनों की मंजूरी और पीएचडी धारक नव नियुक्त शिक्षकों को अग्रिम वेतन वृद्धि की भी मांग की गई.<br>वेतन और पेंशन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने, एनईपी के प्रभावी कार्यान्वयन और शैक्षणिक सुधार और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया पर विचार हेतु सरकार के साथ विस्तृत बातचीत करने की भी इच्छा जताई.<br>उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल हितधारकों के साथ नियमित बातचीत ही सुधार ,सहयोग और समझ के लिए एक प्रभावी साधन हो सकती है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8216;हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत, नियमित भुगतान के लिए तैयार हो स्पष्ट रोडमैप&#8217;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/futab-welcome-highcourt-decision/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 May 2024 08:51:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Futab]]></category>
		<category><![CDATA[Highcourt order]]></category>
		<category><![CDATA[Professor salary]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार (फुटैब) ने राजभवन, कुलपतियों और शिक्षा विभाग के बीच जारी गतिरोध को दूर करने के उद्देश्य से पटना उच्च न्यायालय के आदेशों का स्वागत किया है. बता दें कि शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों के बैंक खातों पर रोक लगा दिया था जिसके परिणाम स्वरूप विश्वविद्यालयों का कामकाज ठप हो गया था. ऐसी कार्रवाई बिना किसी ठोस कारण के और शायद ऐसा करने की किसी शक्ति के बिना, बैंक खातों पर रोक लगाई गई, जिससे शिक्षकों और कर्मचारियों को महीनों तक पारिवारिक पेंशन सहित उनके वेतन, पेंशन से वंचित रखा गया. फुटाब के कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा और महासचिव संजय कुमार सिंह , विधान पार्षद ने कहा कि कोर्ट ने अकाउंट फ्रीजिंग को तत्काल वापस लेने का सही आदेश दिया है. कन्हैया बहादुर ने कहा कि यह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि अपमानजनक भी है कि विश्वविद्यालयों को अपने वैधानिक कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए अदालत की शरण में जाना पड़ा, यह पूरे देश में इस तरह का पहला मामला है. उन्होंने कहा, प्रतिशोध पूर्ण आदेश व्यक्ति के सभी अच्छे कार्यों को निष्प्रभावी कर देते हैं. उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश से 6 तारीख को विश्वविद्यालयों और सरकारी अधिकारियों के बीच बैठक होनी है. एजेंडा प्रसारित कर दिया गया है. लेकिन दुर्भाग्य से कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे जैसे एसोसिएशन के गठन और उसकी सदस्यता ग्रहण करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने जैसे असंवैधानिक पत्र को वापस लेना और विभाग के अव्यवहारिक आदेशों का विरोध करने वालों के वेतन और पेंशन पर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार (फुटैब) ने राजभवन, कुलपतियों और शिक्षा विभाग के बीच जारी गतिरोध को दूर करने के उद्देश्य से पटना उच्च न्यायालय के आदेशों का स्वागत किया है. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/high-court-650x488.png" alt="" class="wp-image-77741" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/high-court-650x488.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/high-court-350x263.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/high-court.png 730w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बता दें कि शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों के बैंक खातों पर रोक लगा दिया था जिसके परिणाम स्वरूप विश्वविद्यालयों का कामकाज ठप हो गया था. ऐसी कार्रवाई बिना किसी ठोस कारण के और शायद ऐसा करने की किसी शक्ति के बिना, बैंक खातों पर रोक लगाई गई, जिससे शिक्षकों और कर्मचारियों को महीनों तक पारिवारिक पेंशन सहित उनके वेतन, पेंशन से वंचित रखा गया. फुटाब के कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा और महासचिव संजय कुमार सिंह , विधान पार्षद ने कहा कि कोर्ट ने अकाउंट फ्रीजिंग को तत्काल वापस लेने का सही आदेश दिया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="343" height="558" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/PNC-futab-on-highcourt-order.jpg" alt="" class="wp-image-84036"/></figure>



<p>कन्हैया बहादुर ने कहा कि यह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि अपमानजनक भी है कि विश्वविद्यालयों को अपने वैधानिक कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए अदालत की शरण में जाना पड़ा, यह पूरे देश में इस तरह का पहला मामला है. उन्होंने कहा, प्रतिशोध पूर्ण आदेश व्यक्ति के सभी अच्छे कार्यों को निष्प्रभावी कर देते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="389" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/01/PNC-Shiksha-vibhag-education-department-1.jpg" alt="" class="wp-image-58656" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/01/PNC-Shiksha-vibhag-education-department-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/01/PNC-Shiksha-vibhag-education-department-1-350x209.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश से 6 तारीख को विश्वविद्यालयों और सरकारी अधिकारियों के बीच बैठक होनी है. एजेंडा प्रसारित कर दिया गया है. लेकिन दुर्भाग्य से कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे जैसे एसोसिएशन के गठन और उसकी सदस्यता ग्रहण करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने जैसे असंवैधानिक पत्र को वापस लेना और विभाग के अव्यवहारिक आदेशों का विरोध करने वालों के वेतन और पेंशन पर रोक लगाने वाले आदेशों को वापस लेना तथा वेतन और पेंशन का मासिक भुगतान का विषय एजेंडे से गायब हैं.<br>वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अभी तक कोई अनुदान जारी नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विभाग वित्तीय वर्ष के अंत तक भी बजट समीक्षा बैठकें आयोजित करता रहता है, हमेशा दो तीन महीने के अंतराल पर अनुदान तदर्थ रुप में विमुक्त होती है. उन्होंने मांग की कि ऐसे कई मामलों में उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार भुगतान को नियमित करने के लिए एक स्पष्ट रोड मैप तैयार किया जाए.<br>उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षकों-छात्रों से संबंधित मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता, केवल अहं की संतुष्टि के लिए कुलपतियों के साथ बैठकें करने से परिसर में सामान्य स्थिति नहीं लौटेगी.<br>उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश का साफ मतलब है कि बीच में आए मुद्दों को टुकड़ों में नहीं बल्कि समग्रता में सुलझाया जाए.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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