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	<title>Folk Theatre &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>ग्लोबल नहीं हैं भिखारी ठाकुर !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jul 2024 17:23:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[स्त्री विमर्श के पहले व्यक्ति थे हिंदुस्तान के सोशल इंफ्लुएंसर थे भिखारी ठाकुर पटना,11 जुलाई(ओ पी पांडेय). राय बहादुर, अनगढ़ हीरा, ठाकुर जी और भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने नाच, नाट्य प्रस्तुति एवं परिचर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया. कार्यक्रम का शुभारंभ कला संस्कृति एवं युवा विभाग के अपर मुख्य सचिव हरदीप कौल, निदेशक रूबी के साथ मुख्य वक्ता के रूप मे आये आगत अतिथियों में डॉ. नीतू प्रसाद नूतन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार, लोक गायिका, मनीषा श्रीवास्तव,सन्तोष पटेल और डॉक्टर जैनेन्द्र कुमार दोस्त एवं प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव(पूर्व राजभाधा अध्यक्ष) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस अवसर पर कला एवं सँस्कृति विभाग की अपर मुख्य सचिव हरदीप कॉल ने विभाग की ओर से सभी आगत अतिथियों और दर्शकों का स्वागत और आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि कला विभाग का यह कार्य इसलिए है कि आज की पीढ़ी हमारे पीढ़ी को जान सके. अगर हमें अपनी सुनहरी विरासत का दम्भ भरना है तो यह हमारा दायित्व है कि हम इनके बारे में बताएं. आज वैश्विक दुनिया है जब हर देश अपने विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाता है तो उसको ही दुनिया अपनाने लगती है. उन्होंने कहा कि&#8220;हम ही हम है तो क्या तुम होतुम ही तुम हो तो क्या तुम होबात होगी तब जब हम तुम दोनों हों.&#8221; उन्होंने भिखारी ठाकुर पर प्रकाश डालते हए कहा कि रामायण देखने के बाद उन्हें लगा कि जो वेदना से छुआ जा सकता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>स्त्री विमर्श के पहले व्यक्ति थे हिंदुस्तान के</strong></p>



<p><strong>सोशल इंफ्लुएंसर थे भिखारी ठाकुर</strong></p>



<p>पटना,11 जुलाई(<strong>ओ पी पांडेय</strong>). राय बहादुर, अनगढ़ हीरा, ठाकुर जी और भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने नाच, नाट्य प्रस्तुति एवं परिचर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया. कार्यक्रम का शुभारंभ कला संस्कृति एवं युवा विभाग के अपर मुख्य सचिव हरदीप कौल, निदेशक रूबी के साथ मुख्य वक्ता के रूप मे आये आगत अतिथियों में डॉ. नीतू प्रसाद नूतन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार, लोक गायिका, मनीषा श्रीवास्तव,सन्तोष पटेल और डॉक्टर जैनेन्द्र कुमार दोस्त एवं प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव(पूर्व राजभाधा अध्यक्ष) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="506" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689928-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85456" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689928-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689928-650x320.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस अवसर पर कला एवं सँस्कृति विभाग की अपर मुख्य सचिव हरदीप कॉल ने विभाग की ओर से सभी आगत अतिथियों और दर्शकों का स्वागत और आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि कला विभाग का यह कार्य इसलिए है कि आज की पीढ़ी हमारे पीढ़ी को जान सके. अगर हमें अपनी सुनहरी विरासत का दम्भ भरना है तो यह हमारा दायित्व है कि हम इनके बारे में बताएं. आज वैश्विक दुनिया है जब हर देश अपने विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाता है तो उसको ही दुनिया अपनाने लगती है. उन्होंने कहा कि<br>&#8220;हम ही हम है तो क्या तुम हो<br>तुम ही तुम हो तो क्या तुम हो<br>बात होगी तब जब हम तुम दोनों हों.&#8221;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="498" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689929-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85457" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689929-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689929-650x316.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने भिखारी ठाकुर पर प्रकाश डालते हए कहा कि रामायण देखने के बाद उन्हें लगा कि जो वेदना से छुआ जा सकता है वह किसी और से नही छुआ जा सकता है. वनवास की बात हो या सीता की अग्निपरीक्षा तो वह सबको छू जाती है. वे सिर्फ स्त्री वेदना ही नहीं बल्कि पुरुष वेदना को भी बड़ी सहजता से अपने नाटकों में रखते हैं. साथ ही कई कुरूतियों को, घर की लड़ाई को, समाज के सामने प्रस्तुत करते थे. आजादी की लड़ाई में पति पत्नियों को छोड़कर चले गए उन्होंने नही सोचा की पत्नी भी स्वतंत्रता की लड़ाई में जा सकती है. उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर की जयंती इस साल पूरे बिहार में मनाया जाएगा और स्तरीय प्रस्तुति परक दलों को उन्होंने मंच से ही आमंत्रित भी किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="503" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689930-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85477" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689930-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689930-1-650x320.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम में परिचर्चा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार ने किया. परिचर्चा का विषय भिखारी ठाकुर के नाटकों में स्त्री विमर्श था जिसमें वक्ताओं के रूप में डॉ. नीतू प्रसाद नूतन, लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव, सन्तोष पटेल, डॉक्टर जैनेन्द्र कुमार दोस्त प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव (पूर्व राजभाधा अध्यक्ष) और अमरजीत शामिल थे. सभी ने विभाग को इस चर्चा के लिए धन्यवाद व आभार प्रगट किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="503" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689931-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85478" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689931-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689931-1-650x320.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>भिखरी ठाकुर ने महिलाओं के हर रूप को छूने की कोशिश की है लेकिन उनकी रचना कितना रिलेवेंट है के जवाब में जैनेन्द्र कुमार दोस्त ने कहा कि स्त्री विमर्श क्या है? जेंडर में जो डिस्क्रिमिनेशन था उसके बारे में बात करना. डिबेट भी बाहर से आता है कि वे कैसे सोचे इनके बारे में. आपको बाहर के स्कॉलर की किताब पढ़ना पड़ता है स्त्री विमर्श पर. उन्होंने कहा कि स्त्री को दोयम दर्जे का माना गया है. जब संवाद की बात नाटकों में आती थी तो पुरुष संस्कृत में बोलेंगे लेकिन महिलाएं प्राकृत और लोक भाषा मे. उन्होंने लेखक हेनरिक होल्सन की बुक डॉल्स हाउस का जिक्र करते हुए कहा कि एक स्त्री के घर तलाशने की कहानी की पहली बुक है दुनिया की लेकिन उस बीच भिखरी ठाकुर पर नजर नही गया. किसी का ध्यान नही गया. समाज,पॉलिटिक्स और समाज शास्त्र पर वे पहले भारत के व्यक्ति थे जिन्होंने स्त्री विमर्श पर बात किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="497" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689932-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85479" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689932-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689932-1-650x315.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि दूरदर्शन के सहयोग से एक कार्यक्रम बनने में जब 6 महीना लगा तब पता चला कि कितना कठिन है रचना. जिसका टाइटल बनाने में इतना समय लगा. पिया नीसइल भिखारी ठाकुर का 60 साल पुराना नाटक है जिसे विभाग के प्रयास से प्रस्तुति का प्रस्ताव आया. सरकार चूंकि शराबबंदी और नशामुक्ति पर भी कम कर रही है. भिखारी ठाकुर ग्लोबल नही ग्लोकल हैं. वे स्त्री विमर्श का बीज रोपने वाले पहले व्यक्ति हैं. उन्होंने 1917 में नाच शुरू किया और 1957 तक काम किया. वे अंग्रेजो के साथ लड़ाई में नही थे लेकिन उन्होंने कितना आगे का सोचा कि देश को आजादी तो मिल जाएगी लेकिन स्त्री की ये समस्याएं आजादी के बाद भी रह जाएंगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="497" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689933-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85480" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689933-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689933-1-650x315.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>गायिका नीतू कुमारी नूतन ने भिखारी ठाकुर की रचनाओं में अपने आप को कहाँ पाती हैं के सवाल पर कहा कि मैंने रेडियो में सुनकर मंचो पर गाना शुरू किया. माँ के गीतों को सुना और गया. उन्होंने गीतों में महिला के दर्द को दर्शाया..<br>&#8220;हम त खेलत रहनी हम त सुपनी मोरिया से<br>कर लेइले तब ही बियाह रे विदेसिया<br>गवना कराई पिया घरे बइठले<br>अपने बसले बिदेस रे बिदेसिया&#8221; पक्तियों नारी के बेबसी को साफ बयां करती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="875" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85481" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-650x556.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-350x300.jpg 350w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>भोजपुरी के लिए कई अंदोलन में सक्रिय सन्तोष पटेल ने कहा कि नारी विमर्श,फेमीनिजम जैसे कई पैरामीटर मौजूद है भिखरी ठाकुर के प्रस्तुतियों में. 1940-66 तक के समय को याद करते हुए कहा कि 1940-46 में हिन्दू कोर्ट बिल और बारबरा सीमेन की बात की. स्त्री मुक्ति का धेरी गाथा नारी का पहला साहित्य था. हमारे यहां सारे पैरामीटर हैं बिधवा विवाह,बेटिबेचवा और गबरघिचोर जैसे नाटकों में.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="818" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689935-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85482" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689935-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689935-650x519.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>हार्नेस नीनास मिलना नॉश जैसे तमाम लोग 1920 में लिख रहे थे. मुक्ति ने लिखा था चेरी गाथा. गबर घिचोर नाटक की बात करते हुए उन्होंने कहा कि गलीज बो( गलीज बहु) नाटक में अपने कोख के अधिकार की लड़ाई लड़ती है. 15 साल से आया नही है उसका पति और उसका 13 साल का बेटा हो गया है. गड़बड़ी, गोबर जैसे कैरक्टर हैं जो उनके चरित्र को प्रस्तुत करता है. ब्रेख्त ने लिखा है<br>ब्रेख्त से तुलना करना गलत है क्योंकि दोनों एक ही समय पर लिखते हैं और उन्होंने ब्रेख्त को कभी पढा नही होगा इसलिए तुलना गलत है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="816" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689936-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85483" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689936-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689936-650x518.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वही प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव, पूर्व राजभाधा अध्यक्ष ने भोजपुरी में बोलते हुआ कहा कि छपरा में बने प्रेक्षागृह के नाम का भिखारी ठाकुर के नाम पर रखने का अनुरोध किया और उपस्थित हरदीप कौर से पूछ लिया. फिर उन्होने नाच के बारे में अपने पुराने संस्मरण को गाड़ करते हुए कहा कि उदित बाबू से सुनने का अवसर मिला, वह अद्भुत था. जब वे मिरजई पहन कर मंच पर आते थे तो पिन ड्राप शांति हो जाती थी. उस जमाने मे हार्डिंग पार्क में कार्यक्रम होता था और कानून व्यवस्था की जब बात हुई तो ठाकुर जी ने कहा कि हमारे कार्यक्रम में कोई कानून की जरूरत नही हम खुद इसे ठीक कर देते हैं. जब राहुल सांस्कृयायान ने उनका नाटक देखा तो उन्होंने कहा कि भोजपुरी में किताब और पत्रिका निकलना चाहिए. विश्व भारती विवि के कुलपति को एक कार्यक्रम में जब विदेसिया की प्रस्तुति के समय उछलते देखा तो पता चला कि एक कलाकार के कला की पहुंच कैसे पहुंचती है. 1947 में राहुल सांकृत्यायन ने कहा उसपर अभी तक काम नही हुआ है उसपर काम होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैं ये नही मानता हूं कि वे अंग्रेजी नही समझते थे या वे आजादी की लड़ाई नही समझते थे उनकी लड़ाई आजदी के समक्ष समाजिक कुरीतियों की लड़ाई थी जो आजदी की लड़ाई से कम नही थी.</p>



<p>वही अमरजीत ने अपने अभिभाषण में कहा कि पटना का दियारा क्षेत्र सबसे ज्यादा अत्याचार का शिकार बना उस काल मे जिसे भिखारी ने देखा और उसकी पीड़ा को अपने नाटकों में स्थान दिया. बाप के प्रति आदर और शिकायत भी है जैसे-</p>



<p>कईसे कहीं कहे नईखे आवत बाबूजी,<br>मुह में दांत नईखे लार चुवत बा हो बाबूजी, </p>



<p>मन करे कि जहर खा के मर जाईं ए बाबूजी.&#8221; </p>



<p>उन्होंने कहा कि मैं कुल्हड़िया से आता हूँ और मैने देखा है उनके नाटकों को अपने गांवों में. समय के हिसाब से वे संवाद गढने के माहिर थे. कुल्हड़िया में एक नाटक के दौरान उन्होंने अपने पात्र से ख्वा दिया देरी से आने के कारण की देर से आओगे तो कुल्हड़िया के जमींदार के यहाँ रखवा देंगे देर करोगे तो और कोड़ा से मार कहोगे तो दिमाग सही आ जायेगा. भिखरी ठाकुर एक सोशल एन्फ्लुएंर थे उस काल मे जब कोई सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म नही था।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="795" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689937-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85484" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689937-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689937-650x504.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>लोकचर्चित युवा लोकगायिका मनीषा ने कहा कि बहुत से लिखने वाले है जो स्त्री सौंदये और कोई उनके मन की बात पर कलम चलाया है लेकिन ठाकुर जी रचनाओं में नारी के लोक की बात होती थी जिसमे हर रस का वर्णन होता था. एक स्त्री शादी कर के घर मे रहती है जो घर से लेकर समाज तक के कई समस्याओं से लड़ती है. भिखारी ठाकुर ने समाज मे, परिवार में जो महसूस किया उसे गांव-गांव तक अपनी रचनाओं के जरिये पहुंचाते थे.</p>



<p>रोपिया गिनाई देहली पगहा धराई देहल<br>चेरिया के छेरिया बनाई दिहलs</p>



<p>इतना किसी और ने नही लिखा जितनी मार्मिक उन्होंने लिखा. बेटी बेचवा का एक्सटेंशन विधवा-बिलाप नाटक है जहां बड़ी उम्र के पति से शादी होने के बाद यह विधवा हो जाती है और उसका जीवन बदल जाता है. लोक धुनों को,लोक संस्कृति को उन्होंने अपनी रचनाओं में पिरोया था.</p>



<p>डगरिया जोहत ना हो<br>बीतत बाटे आठों पहरिया हो<br>डगरिया जोहत ना जैसे<br>परोसी कर थरिया डाल भात तरकरिया हो..<br>जैसे पंक्तियों को जँतसार धुन के जरिये प्रस्तुत किया है जो जाँता पर काम करते हुए अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ती है.</p>



<p>परिचर्चा के बाद जैनेन्द्र कुमार दोस्त द्वारा निर्देशित भिखारी ठाकुर के नाटक पिया नीसइल का शानदार मंचन हुआ. नशे की वजह से परिवार के तबाही की कहानी को भिखरी ठाकुर ने बड़ी ही सहजता से नाटक में ढ़ाला जिसे कलाकारों ने भरसक करने का प्रयास किया.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रस्तुति के पहले दिन ही दर्शकों से खचाखच रही ओपन थियेटर गैलरी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/ganga-snan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 May 2022 04:16:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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		<category><![CDATA[Bhikhari Thakur]]></category>
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		<category><![CDATA[Folk Theatre]]></category>
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		<category><![CDATA[Theatre]]></category>
		<category><![CDATA[Veer kunwar singh Stedium]]></category>
		<category><![CDATA[भोजपुरी]]></category>
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					<description><![CDATA[लगभग 2 घंटे देरी से शुरू हुई प्रस्तुति, नही हिले दर्शक नाटक के सकरात्मक संदेश ने अंत तक दर्शकों को जोड़े रखा रंगमंच के मंजे कलाकारों ने दिखाया अभिनय का जलवा, नवोदित कलाकारों में दिखी गजब की ऊर्जा आरा,28 मई. प्रभाव क्रियेटिव सोसाइटी द्वारा तैयार भिखारी ठाकुर रचित सुप्रसिद्ध नाटक &#8216;गंगा स्नान&#8217; का मंचन शुक्रवार की शाम वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में कलाकारों द्वारा बनाए गए बाबू ललन सिंह मुक्ताकाश मंच पर किया गया. नाटक का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में भावी मेयर प्रत्याशी विष्णु सिंह दीप प्रज्जवलित कर किया, जिसमें पूर्व पार्षद व भावी मेयर प्रत्याशी जितेंद्र शुक्ला, समाजसेवी अभय विश्वास भट्ट और संस्था के सचिव कमलेश कुंदन भी संयुक्त रूप से शामिल हुए. मुख्य अतिथि ने कम शब्दों में आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कला से उनका पुराना नाता है. कला न सिर्फ मनोरंजन बल्कि जीवन जीना भी सिखाता है. दो दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन कार्यक्रम लगभग दो घंटे विलंब से शुरू हुआ. बावजूद इसके दर्शकों ने नाटक के अंत तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा यह जरूर साबित कर दिया कि न सिर्फ वे नाट्य प्रेमी हैं बल्कि नाटक ने उन्हें अपने रस से बांधे रखा. ग्रामीण समाज में गंगा स्नान करने के महत्व पर आधारित इस नाटक में एक घर की कहानी है जिसमें मलेछु बहु और अटपट बहु गंगा स्नान करने के लिए जाना चाहती है लेकिन उनके पति तैयार नहीं होते हैं. इसी बीच उनकी बुढ़ी मां भी गंगा स्नान के लिए चलने को कहती है. बेटा मां [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>लगभग 2 घंटे देरी से शुरू हुई प्रस्तुति, नही हिले दर्शक</strong></p>



<p><strong>नाटक के सकरात्मक संदेश ने अंत तक दर्शकों को जोड़े रखा </strong></p>



<p>रं<strong>गमंच के मंजे कलाकारों ने दिखाया अभिनय का जलवा, नवोदित कलाकारों में दिखी गजब की ऊर्जा</strong></p>



<p>आरा,28 मई. प्रभाव क्रियेटिव सोसाइटी द्वारा तैयार भिखारी ठाकुर रचित सुप्रसिद्ध नाटक &#8216;गंगा स्नान&#8217; का मंचन शुक्रवार की शाम वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में कलाकारों द्वारा बनाए गए बाबू ललन सिंह मुक्ताकाश मंच पर किया गया. नाटक का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में भावी मेयर प्रत्याशी विष्णु सिंह दीप प्रज्जवलित कर किया, जिसमें पूर्व पार्षद व भावी मेयर प्रत्याशी जितेंद्र शुक्ला, समाजसेवी अभय विश्वास भट्ट और संस्था के सचिव कमलेश कुंदन भी संयुक्त रूप से शामिल हुए. मुख्य अतिथि ने कम शब्दों में आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कला से उनका पुराना नाता है. कला न सिर्फ मनोरंजन बल्कि जीवन जीना भी सिखाता है.</p>



<p>दो दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन कार्यक्रम लगभग दो घंटे विलंब से शुरू हुआ. बावजूद इसके दर्शकों ने नाटक के अंत तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा यह जरूर साबित कर दिया कि न सिर्फ वे नाट्य प्रेमी हैं बल्कि नाटक ने उन्हें अपने रस से बांधे रखा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="355" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094015.jpg" alt="" class="wp-image-62805" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094015.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094015-350x191.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ग्रामीण समाज में गंगा स्नान करने के महत्व पर आधारित इस नाटक में एक घर की कहानी है जिसमें मलेछु बहु और अटपट बहु गंगा स्नान करने के लिए जाना चाहती है लेकिन उनके पति तैयार नहीं होते हैं. इसी बीच उनकी बुढ़ी मां भी गंगा स्नान के लिए चलने को कहती है. बेटा मां को ले जाने के लिए तैयार हो जाता है लेकिन उसकी पत्नी उसे ले जाने से मना करती है वह कहती है कि अगर वह बुढ़िया को ले जाएगा तो जहर खा कर मर जायेगी. पत्नी के इस हठ के कारण वह अपनी बूढ़ी मां को मारता पीटता और अंत में वह इस बात पर तैयार होता है कि समान बूढ़ी मां को ढोना पड़ेगा. बेचारी बूढ़ी मां तैयार हो जाती है. सभी गंगा स्नान के लिए जाते हैं. गंगा किनारे मेला लगा है बूढ़ी माता से समान गिर जाने के कारण वे उसे वही छोड़ कर चले जाते हैं. मेले में मलेछू को एक बाबा मिलते हैं. वह उनके जाल में फंस जाता है. पुत्र की प्राप्ति के चक्कर में अपनी पत्नी को बाबा के हवाले कर देता है. बाबा उसकी पत्नी के सारे गहने लूट लेता है. अब मलेछु अपनी पत्नी को भटकता मेले में खोजता है. जब उसकी पत्नी मिलती है तब उन्हें अपने किए पर पछतावा होता है और दोनो मिलकर फिर अपनी बूढ़ी मां को खोज घर वापस आते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="351" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094024.jpg" alt="" class="wp-image-62806" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094024.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094024-350x189.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>भिखारी ठाकुर ने गंगा स्नान के माध्यम से परिवार में बुज़ुर्गों की जिस उपेक्षा को दिखाया था प्रभाव क्रियेटिव सोसाइटी की प्रस्तुति ने उसे बेहद ही प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया,जिसके लिए युवा निर्देशक व रंगकर्मी मनोज सिंह बधाई के पात्र हैं.<br>वहीं गीत संगीत को अपने सुरों में पिरोकर नाटक में ठेठ देसीपन का जो आनंद लोकगीतों के माध्यम से श्याम शर्मिला ने दिया कि दर्शक अभिनय और लोकसंगीत के इस जादू में अंत तक फंसे रहे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="441" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094742.jpg" alt="" class="wp-image-62808" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094742.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094742-350x237.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मलेछु की भूमिका में डॉ पंकज भट्ट, मलेछु बहु की भूमिका में खुशबू स्पृहा, मां की भूमिका में आशा पाण्डेय, अटपट की भूमिका में युवा रंगकर्मी शुभम दूबे, अटपट बहु की भूमिका में ऋतु पांडेय, ढोंगी बाबा की भूमिका में हर्ष जैन ने जहां नाटक में अपनी जीवंत अभिनय से दर्शकों के बीच अपनी जादूगरी कायम की, वही विभिन्न भूमिकाओं में प्रिंस शर्मा , दीपक तिवारी ट्रेन,कुणाल, रितेश टाइगर, मुकेश ओझा,अभिषेक, राजू कुमार सिंह,सुन्दरम बाबा ने अपनी ऊर्जा का परिचय उपस्थित दर्शकों को दिया.</p>



<p>संगीत में तबला पर अभय ओझा और नाल पर हरिशंकर निराला ने साथ दिया तो झाल व अन्य वाद्य यंत्रों के साथ सह गायन में जागृति कुमारी,तारकेश्वर चौबे,संतोष चौबे और वीरेंद्र ओझा ने संगीत को प्रभावी बनाने में समूह गायन का लोहा मनवाया. प्रस्तुति संयोजक मनोज श्रीवास्तव, प्रस्तुति नियंत्रक ओ पी पांडेय और मंगलेश तिवारी थे. धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ रंगकर्मी अंबुज कुमार ने किया.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>ओपन थियेटर में होगा आज गंगा-स्नान</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aaj-hoga-open-theatre-me-ganga-snan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 May 2022 04:15:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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		<category><![CDATA[Theatre]]></category>
		<category><![CDATA[Veer kunwar singh Stedium]]></category>
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					<description><![CDATA[आज शाम छह बजे से होगी दो दिवसीय मंचन की शुरुआत, परिवार में उपेक्षित वृद्धजनों पर आधारित है नाटक, देगा सकरात्मक संदेश रंगमंच से जुड़े कलाकारों के साथ नवोदित कलाकार भी दिखाएंगे समाज को आईना आरा,27 मई. वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में भिखारी ठाकुर रचित सुप्रसिद्ध नाटक &#8216;गंगा स्नान&#8217; का मंचन आज शाम छह बजे से होने के साथ ही दो दिवसीय मंचन की शुरुआत हो जायेगी. कोरोना काल के समय से जिले वासियों के मन में बने नकारात्मक माहौल को एक मनोरंजक प्रस्तुति के माध्यम से सकारात्मकता में बदलने के प्रयास में नाटक का मंचन किया जा रहा है. प्रभाव क्रिएटिव सोसायटी के बैनर तले हो रहे नाटक के मंचन में ग्रामीण समाज में गंगा स्नान करने के महत्व को दिखाया गया है. गंगा स्नान मन और शरीर के शुद्धिकरण के लिए तो सभी जाते हैं लेकिन कैसे वे जीवन की मैली व्यवस्था में घिरे होते हैं जो स्नान से साफ नहीं हो सकता. गंगा स्नान के समय जगह-जगह गंगा किनारे मेला लगता है धर्म के साथ ठगों का भी किस प्रकार आराजकता मेले में फैले रहता है जो धर्म और दूसरी चीजों पर वहां गए लोगों को लूटते हैं. गंगा स्नान नाटक में एक परिवार को गंगा स्नान के लिए जाते दिखाया गया है, जिसमें एक बूढ़ी मां है जो परिवार द्वारा उपेक्षित है. इस नाटक में भिखारी ठाकुर ने गंगा स्नान के माध्यम से परिवार में बुज़ुर्गों की उपेक्षा को दिखाया है. नाटक का निर्देशन रंगकर्मी मनोज सिंह कर रहे हैं. वहीं गीत संगीत के माध्यम से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आज शाम छह बजे से होगी दो दिवसीय मंचन की शुरुआत</strong>,</p>



<p><strong>परिवार में उपेक्षित वृद्धजनों पर आधारित है नाटक, देगा सकरात्मक संदेश</strong></p>



<p><strong>रंगमंच से जुड़े कलाकारों के साथ नवोदित कलाकार भी दिखाएंगे समाज को आईना</strong></p>



<p>आरा,27 मई. वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में भिखारी ठाकुर रचित सुप्रसिद्ध नाटक &#8216;गंगा स्नान&#8217; का मंचन आज शाम छह बजे से होने के साथ ही दो दिवसीय मंचन की शुरुआत हो जायेगी. कोरोना काल के समय से जिले वासियों के मन में बने नकारात्मक माहौल को एक मनोरंजक प्रस्तुति के माध्यम से सकारात्मकता में बदलने के प्रयास में नाटक का मंचन किया जा रहा है.</p>



<p>प्रभाव क्रिएटिव सोसायटी के बैनर तले हो रहे नाटक के मंचन में ग्रामीण समाज में गंगा स्नान करने के महत्व को दिखाया गया है. गंगा स्नान मन और शरीर के शुद्धिकरण के लिए तो सभी जाते हैं लेकिन कैसे वे जीवन की मैली व्यवस्था में घिरे होते हैं जो स्नान से साफ नहीं हो सकता.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="424" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093541.jpg" alt="" class="wp-image-62756" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093541.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093541-350x228.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>गंगा स्नान के समय जगह-जगह गंगा किनारे मेला लगता है धर्म के साथ ठगों का भी किस प्रकार आराजकता मेले में फैले रहता है जो धर्म और दूसरी चीजों पर वहां गए लोगों को लूटते हैं.</p>



<p>गंगा स्नान नाटक में एक परिवार को गंगा स्नान के लिए जाते दिखाया गया है, जिसमें एक बूढ़ी मां है जो परिवार द्वारा उपेक्षित है. इस नाटक में भिखारी ठाकुर ने गंगा स्नान के माध्यम से परिवार में बुज़ुर्गों की उपेक्षा को दिखाया है. नाटक का निर्देशन रंगकर्मी मनोज सिंह कर रहे हैं. वहीं गीत संगीत के माध्यम से इस नाटक को सजाया है श्याम शर्मिला ने.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093552.jpg" alt="" class="wp-image-62757" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093552.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093552-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पिछले 15 दिनों से चले नाटक कार्यशाला का समापन बुधवार को होने के बाद गुरुवार को देर शाम तक अंतिम रिहर्सल<br>नेशनल साइंटिफिक रिसर्च एंड एनालिसिस सेंटर, बड़ी मठिया के सभागार में कलाकारों ने किया.</p>



<p>अपनी प्रस्तुति के अंतिम चरण में तैयार नाटक &#8221; गंगा स्नान &#8221; के पूर्वाभ्यास में कलाकारों ने जम के पसीना बहाया. कलाकार आज होने वाली प्रस्तुति को लेकर काफी उत्साहित और ऊर्जायुक्त दिखे. कई बार नाटक के दृश्यों और म्यूजिक का सही इंट्री टाइमिंग के साथ पूर्वाभ्यास किया गया. कलाकारो ने कल शाम में प्रस्तुति स्थल वीर कुंवर सिंह स्टेडियम का भी जायजा भी लिया. कलाकार अपनी एंट्री और एग्जिट को लेकर प्रस्तुति से पहले कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. कोरोना काल में सांस्कृतिक कार्यक्रम नही होने के बाद यह पहला मौका होगा जब नाटक की प्रस्तुति की जाएगी हालांकि इसके पूर्व पिछले साल अभिनव एवम एक्ट ने 20 दिवसीय कार्यशाला के बाद एक प्रस्तुति दी थी. लेकिन उसके बाद यह पहला मौका होगा जब किसी लोक नाटक की प्रस्तुति शहर में होगी. नाटक प्रेमी भी इस नाटक को देखने के लिए समय का बड़ी बेसब्री से इंतजार में हैं. नाटक में कई मंजे हुए कलाकार अपने अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करेंगे।</p>



<p>पूर्वाभ्यास में वरिष्ठ रंगकर्मी अम्बुज कुमार,कार्यशाला व प्रस्तुति संयोजक मनोज श्रीवास्तव, नाट्य निर्देशक मनोज सिंह, संस्था के सचिव कमलेश कुंदन, लोक संगीतकार श्याम शर्मीला,खुशबू s स्पृहा, आशा पाण्डेय,राजन जी, युवा रंगकर्मी शुभम दूबे, प्रिंस शर्मा , दीपक तिवारी ट्रेन,कुणाल, रितेश टाइगर, मुकेश ओझा, रितु पाण्डेय,अभिषेक, राजू कुमार सिंह,सुन्दरम बाबा,अभय ओझा, हरिशंकर निराला डॉ पंकज भट्ट आदि उपस्थित थे. गुरुवार को पूर्वाभ्यास के दौरान प्रस्तुति में लगे बैक स्टेज के कलाकर भी नजर आए. अब देखना जबरदस्त होगा कि कलाकारों की मेहनत 27 और 28 मई को होने वाली प्रस्तुति में अपना कितना प्रभाव दर्शको पर छोड़ते हैं.</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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