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	<title>Family day &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<description>Patna News Portal - हर ख़बर पर नज़र</description>
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		<title>परिवार से बड़ा कोई धन नहीं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 May 2021 16:52:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[सुख समृद्धि]]></category>
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		<category><![CDATA[परिवार दिवस]]></category>
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					<description><![CDATA[भले आज की दुनिया &#8220;विश्व परिवार दिवस&#8221; मनाने का चलन शुरू किया हो, लेकिन हमारी परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज भी चली आ रही है &#8220;वसुधैव कुटुंबकम&#8221;. आज &#8221; वसुधैव कुटुंबकम को ही विश्व के देश विश्व परिवार दिवस के रूप में मना रहे हैं. यह हमारे पुरखों ने स्थापित किया था समूची पृथ्वी पर वास करने वाले जीवो को अपना कुटुम्ब मानते हैं. हम मानव, नदियों, तालाबों, झरनों, पहाड़ों, पेड़ ,पौधे ,पशु, पक्षी, मत्स्य, पानी ,आग, हवा ,मिट्टी ,आकाश ,सूर्य, चंद्र ,नक्षत्र, ग्रह ,तारे,यानी समस्त चराचर जीवोंं की पूजा करने वाली हमारी संस्कृति है. हमारी परंपरा रही है. भले आज परिवार का दायरा छोटा हो गया. धीरे-धीरे हम सिमटते हुए पति ,पत्नी, बच्चे तक आ गए, बहुत हुआ तो बूढ़े मां बाप तक सीमित हो गए. एक समय संयुक्त परिवार का चलन था दादा, परदादा तक सारे परिवार एक साथ जुड़कर रहते थे. अभी भी गांव के गांव गोतिया ,लैया ,भैयारी चलता है. आज भी अतिथि को हम पूजते हैं. &#8220;अतिथि देवो भव:&#8221; हमारा चारित्रिक, व्यवहारिक सूत्र वाक्य है. आगंतुकों का सत्कार कर हम खुश होते हैं. हम &#8220;सर्वे भवंतू सुखिनः,सर्वे संतु निरामया &#8220;को मानने वाले हैं. हमने दुनिया को राम के रूप में आदर्श स्थापित करने वाला महान राजा का संदेश दिया. हमने कृष्ण के रूप में दुनिया को प्यार का पाठ का संदेश देने वाला भगवान दिया. हमने बुद्ध एवं महावीर के रूप में सत्य, अहिंसा का पाठ दुनियाँ को पढ़ाया. हमने गांधी के रूप में शांति से क्रांति को सफल सिद्ध कर दिखाया. आज भी [&#8230;]]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="640" height="352" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/05/PNC-BUXAR-ARTS-7TH-TOPPER-PRAVEEN-FAMILY.jpg" alt="" class="wp-image-18766" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/05/PNC-BUXAR-ARTS-7TH-TOPPER-PRAVEEN-FAMILY.jpg 640w, https://www.patnanow.com/assets/2017/05/PNC-BUXAR-ARTS-7TH-TOPPER-PRAVEEN-FAMILY-350x193.jpg 350w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /><figcaption><strong>Concept Pic</strong></figcaption></figure>



<p>भले आज की दुनिया &#8220;विश्व परिवार दिवस&#8221; मनाने का चलन शुरू किया हो, लेकिन हमारी परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज भी चली आ रही है &#8220;वसुधैव कुटुंबकम&#8221;. आज &#8221; वसुधैव कुटुंबकम को ही विश्व के देश विश्व परिवार दिवस के रूप में मना रहे हैं. यह हमारे पुरखों ने स्थापित किया था समूची पृथ्वी पर वास करने वाले जीवो को अपना कुटुम्ब मानते हैं. हम मानव, नदियों, तालाबों, झरनों, पहाड़ों, पेड़ ,पौधे ,पशु, पक्षी, मत्स्य, पानी ,आग, हवा ,मिट्टी ,आकाश ,सूर्य, चंद्र ,नक्षत्र, ग्रह ,तारे,यानी समस्त चराचर जीवोंं की पूजा करने वाली हमारी संस्कृति है. हमारी परंपरा रही है. भले आज परिवार का दायरा छोटा हो गया. धीरे-धीरे हम सिमटते हुए पति ,पत्नी, बच्चे तक आ गए, बहुत हुआ तो बूढ़े मां बाप तक सीमित हो गए. एक समय संयुक्त परिवार का चलन था दादा, परदादा तक सारे परिवार एक साथ जुड़कर रहते थे. अभी भी गांव के गांव गोतिया ,लैया ,भैयारी चलता है. आज भी अतिथि को हम पूजते हैं. &#8220;अतिथि देवो भव:&#8221; हमारा चारित्रिक, व्यवहारिक सूत्र वाक्य है. आगंतुकों का सत्कार कर हम खुश होते हैं. हम &#8220;सर्वे भवंतू सुखिनः,सर्वे संतु निरामया &#8220;को मानने वाले हैं. हमने दुनिया को राम के रूप में आदर्श स्थापित करने वाला महान राजा का संदेश दिया. हमने कृष्ण के रूप में दुनिया को प्यार का पाठ का संदेश देने वाला भगवान दिया. हमने बुद्ध एवं महावीर के रूप में सत्य, अहिंसा का पाठ दुनियाँ को पढ़ाया. हमने गांधी के रूप में शांति से क्रांति को सफल सिद्ध कर दिखाया. </p>



<p>आज भी हम सर्वश्रेष्ठ दुनिया को देने का प्रयास करते हैं ,चाहे वनस्पति विज्ञान की खोज करने वाले जगदीश चंद्र बसु हो जिन्होंने बताया पौधे भी हँसते,रोते और दुखी होते है या सी वी रमन हो जिन्होंने रमन इफेक्ट की खोज की या फिर जिन्होंने शून्य की खोज करने वाले आर्यभट्ट या फिर प्रसिद्ध धार्मिक अध्यात्म जीवन शैली को जीने वाले स्वामी विवेकानंद हो , स्वामी दयानंद सरस्वती हो या वर्तमान में योग गुरु बाबा रामदेव जिन्होंने योग को रोग से लड़ने का हथियार बनाया और पूरे विश्व में योग को स्थापित किया या फिर &#8220;आर्ट ऑफ लिविंग&#8221; के श्री श्री रविशंकर जी विश्व को जीने की कला सिखा रहे हैं या फिर जब हमने कोविड-19 की वैक्सीन एवं दवाई बनाई तो 70 देशों को दे कर के &#8220;विश्व परिवार है&#8221; को स्थापित किया. &#8220;सर्वे भवंतू सुखिन:, सर्वे संतु निरामया&#8221; का संदेश पीएम मोदी जी ने विश्व को दिया. आइए हम अपनी पुरानी और समृद्ध सांस्कृतिक जीवन पद्धति व परंपराओं को &#8220;वसुधैव कुटुंबकम &#8220;को ,आज &#8220;विश्व परिवार दिवस&#8221; के रूप में मना कर और मजबूती प्रदान करें। किसी ने ठीक ही कहा है-<br> &#8220;परिवार से बड़ा कोई धन नहीं<br> परिवार के बिना सही जीवन नहीं &#8220;</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong><br></p>
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