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		<title>मानवाधिकार आयोग ने बिहार सरकार को भेजा नोटिस</title>
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		<pubDate>Thu, 02 Dec 2021 04:54:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अब तक 13 लोगों की निकाली गई आँखे NHRC&#160;ने राज्य सरकार से माँगा चार सप्ताह में जवाब मुजफ्फरपुर में कैसे गई आँखों की रौशनी मुख्य सचिव को देना होगा जवाब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग&#160;&#160;ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है कि श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल,&#160;एस के एम सी एच&#160;में छह रोगियों की आंखें मुजफ्फरपुर नेत्र अस्पताल,&#160;बिहार में&#160;22&#160;तारीख को मोतियाबिंद सर्जरी के कारण हटा दी गई थीं. नवंबर में &#160;सर्जरी के बाद संक्रमण के कारण डॉक्टरों को लगभग एक दर्जन और रोगियों की आंखें निकालने की आवश्यकता हो सकती है. कथित तौर पर,&#160;चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार,&#160;एक डॉक्टर&#160;12&#160;सर्जरी तक कर सकता था,&#160;लेकिन इस मामले में,&#160;डॉक्टर ने&#160;65&#160;रोगियों की सर्जरी की. आयोग ने पाया है कि मीडिया रिपोर्ट की सामग्री,&#160;यदि सही है,&#160;मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मुद्दा उठाती है. सरकारी अस्पताल में इस तरह की लापरवाही से आंखों का ऑपरेशन करना,&#160;मेडिकल प्रोटोकॉल के नियमों का उल्लंघन करना एक गंभीर चिंता का विषय है. इसी को लेकर मुख्य सचिव,&#160;बिहार सरकार को नोटिस जारी कर मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट में उन रोगियों की सटीक संख्या,&#160;जिनकी आंखें चली गई हैं,&#160;उन्हें प्रदान किए जा रहे चिकित्सा उपचार की स्थिति और राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई राहत के बारे में सूचित करने की उम्मीद है,&#160;जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों / डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है. प्रतिक्रिया&#160;4&#160;सप्ताह के भीतर देने की बात कही गई है. 1&#160;दिसंबर, 2021&#160;को की गई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,&#160;ज्यादातर मामलों में मरीजों की कॉर्निया बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती है और उनके दिमाग तक संक्रमण पहुंचने की संभावना रहती है. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>अब तक 13 लोगों की निकाली गई आँखे</strong></p>



<p><strong>NHRC&nbsp;ने राज्य सरकार से माँगा चार सप्ताह में जवाब</strong></p>



<p><strong>मुजफ्फरपुर में कैसे गई आँखों की रौशनी</strong></p>



<p><strong>मुख्य सचिव को देना होगा जवाब</strong></p>



<p>राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग&nbsp;&nbsp;ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है कि श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल,&nbsp;एस के एम सी एच&nbsp;में छह रोगियों की आंखें मुजफ्फरपुर नेत्र अस्पताल,&nbsp;बिहार में&nbsp;22&nbsp;तारीख को मोतियाबिंद सर्जरी के कारण हटा दी गई थीं. नवंबर में &nbsp;सर्जरी के बाद संक्रमण के कारण डॉक्टरों को लगभग एक दर्जन और रोगियों की आंखें निकालने की आवश्यकता हो सकती है. कथित तौर पर,&nbsp;चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार,&nbsp;एक डॉक्टर&nbsp;12&nbsp;सर्जरी तक कर सकता था,&nbsp;लेकिन इस मामले में,&nbsp;डॉक्टर ने&nbsp;65&nbsp;रोगियों की सर्जरी की. आयोग ने पाया है कि मीडिया रिपोर्ट की सामग्री,&nbsp;यदि सही है,&nbsp;मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मुद्दा उठाती है. सरकारी अस्पताल में इस तरह की लापरवाही से आंखों का ऑपरेशन करना,&nbsp;मेडिकल प्रोटोकॉल के नियमों का उल्लंघन करना एक गंभीर चिंता का विषय है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="615" height="615" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/12/tsharn-pnc.jpg" alt="" class="wp-image-57406" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/12/tsharn-pnc.jpg 615w, https://www.patnanow.com/assets/2021/12/tsharn-pnc-350x350.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2021/12/tsharn-pnc-250x250.jpg 250w" sizes="(max-width: 615px) 100vw, 615px" /><figcaption><strong>मुख्यसचिव त्रिपुरारि शरण </strong></figcaption></figure>



<p>इसी को लेकर मुख्य सचिव,&nbsp;बिहार सरकार को नोटिस जारी कर मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट में उन रोगियों की सटीक संख्या,&nbsp;जिनकी आंखें चली गई हैं,&nbsp;उन्हें प्रदान किए जा रहे चिकित्सा उपचार की स्थिति और राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई राहत के बारे में सूचित करने की उम्मीद है,&nbsp;जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों / डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है. प्रतिक्रिया&nbsp;4&nbsp;सप्ताह के भीतर देने की बात कही गई है.</p>



<p>1&nbsp;दिसंबर, 2021&nbsp;को की गई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,&nbsp;ज्यादातर मामलों में मरीजों की कॉर्निया बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती है और उनके दिमाग तक संक्रमण पहुंचने की संभावना रहती है. छह मरीजों की हालत बेहद गंभीर है. अस्पताल के अधिकारियों ने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की और जांच होने तक इसकी सूचना जिला प्रशासन या राज्य के स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी. अधिकारियों ने कथित तौर पर मुजफ्फरपुर नेत्र अस्पताल में गतिविधियों को रोक दिया है और एसीएमओ के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम मामले की जांच कर रही है.</p>



<p>PNCDESK #NHRC </p>
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