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	<title>EC &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने से बचेगा पांच लाख करोड़</title>
		<link>https://www.patnanow.com/five-lakh-crores-will-be-made-by-holding-lok-sabha-and-assembly-elections-simultaneously/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Sep 2023 03:49:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[वन नेशन वन इलेक्शन से बचेगा पांच लाख करोड़ रुपया लोकसभा चुनाव 2024 पर ₹1.20 लाख करोड़ खर्च होने का अनुमान सभी विधानसभा चुनाव साथ कराए जाए तो इस पर तीन लाख करोड़ रुपये खर्च एक साथ चुनाव कराने से विज्ञापन और यात्राओं पर कम खर्च होंगे देश में एक साथ लोकसभा और राज्यसभा चुनाव कराए जाने को लेकर एक अध्ययन सामने आई है. जानकारी के मुताबिक स्थानीय चुनाव से लेकर लोकसभा तक सारे चुनाव एक साथ कराने पर 10 लाख करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है लेकिन अगर सभी चुनाव एक हफ्ते के अंदर कराए जाएं तो ये खर्च घट कर तीन से पांच लाख करोड़ रुपये तक आ सकता है.देश में एक राष्ट्र, एक चुनाव को लेकर बहस छिड़ी हुई है. इस मामले पर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं. एक तरफ जहां मोदी सरकार का कहना है कि चुनाव के खर्च में कमी करने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है. वहीं, विपक्षी दलों का मानना है कि इससे संघीय ढांचा कमजोर होगा. एक तिहाई रह जाएगा चुनाव पर खर्च देश में पंचायत से लेकर लोकसभा तक के चुनाव एक साथ कराने से ही चुनाव खर्च कम नहीं हो जाएगा, इसके लिए जरूरी है कि सारे चुनाव एक सप्ताह के अंदर कराए जाएं. अगर ऐसा होता है तो चुनाव पर आने वाले खर्च को घटा कर एक तिहाई किया जा सकता. एक अध्ययन के अनुसार, स्थानीय चुनाव से लेकर लोकसभा तक सारे चुनाव एक साथ कराने पर 10 लाख करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वन नेशन वन इलेक्शन से बचेगा पांच लाख करोड़ रुपया </strong></p>



<p><strong>लोकसभा चुनाव 2024 पर ₹1.20 लाख करोड़ खर्च होने का अनुमान</strong></p>



<p><strong>सभी विधानसभा चुनाव साथ कराए जाए तो इस पर तीन लाख करोड़ रुपये खर्च </strong></p>



<p><strong>एक साथ चुनाव कराने से विज्ञापन और यात्राओं पर कम खर्च होंगे</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="365" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/election-650x365.png" alt="" class="wp-image-77721" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/election-650x365.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/election-350x197.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/election-768x432.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/election.png 948w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>देश में एक साथ लोकसभा और राज्यसभा चुनाव कराए जाने को लेकर एक अध्ययन सामने आई है. जानकारी के मुताबिक स्थानीय चुनाव से लेकर लोकसभा तक सारे चुनाव एक साथ कराने पर 10 लाख करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है लेकिन अगर सभी चुनाव एक हफ्ते के अंदर कराए जाएं तो ये खर्च घट कर तीन से पांच लाख करोड़ रुपये तक आ सकता है.देश में एक राष्ट्र, एक चुनाव को लेकर बहस छिड़ी हुई है. इस मामले पर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं. एक तरफ जहां मोदी सरकार का कहना है कि चुनाव के खर्च में कमी करने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है. वहीं, विपक्षी दलों का मानना है कि इससे संघीय ढांचा कमजोर होगा.</p>



<p><strong>एक तिहाई रह जाएगा चुनाव पर खर्च</strong></p>



<p>देश में पंचायत से लेकर लोकसभा तक के चुनाव एक साथ कराने से ही चुनाव खर्च कम नहीं हो जाएगा, इसके लिए जरूरी है कि सारे चुनाव एक सप्ताह के अंदर कराए जाएं. अगर ऐसा होता है तो चुनाव पर आने वाले खर्च को घटा कर एक तिहाई किया जा सकता. एक अध्ययन के अनुसार, स्थानीय चुनाव से लेकर लोकसभा तक सारे चुनाव एक साथ कराने पर 10 लाख करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है, लेकिन अगर सभी चुनाव एक हफ्ते के अंदर कराए जाएं तो ये खर्च घट कर तीन से पांच लाख करोड़ रुपये तक आ सकता है. पंचायत से लेकर लोकसभा के चुनाव एक साथ कराने पर ₹10 लाख करोड़ खर्च होने का अनुमान है. साल 2019 के लोकसभा चुनावों में 60,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. लोकसभा चुनाव 2024 पर ₹1.20 लाख करोड़ खर्च होने का अनुमान है.</p>



<p><strong>विधानसभा सीटों पर खर्च</strong></p>



<p>देश में 4,500 विधानसभा सीटें है अगर सभी विधानसभा चुनाव साथ कराए जाए तो इस पर तीन लाख करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं.</p>



<p><strong>स्थानीय निकाय चुनाव पर खर्च</strong></p>



<p>देश में 2.5 लाख ग्राम पंचायते हैं. 650 जिला परिषद, 7,000 मंडल, 2 लाख 50 हजार ग्राम पंचायत सीटों के चुनाव पर 4.30 लाख करोड़ रुपये खर्च हो सकते है. देश में हैं 500 नगरपालिका हैं. सभी सीटो पर चुनाव एक साथ कराने पर 1 लाख करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है.</p>



<p><strong>विज्ञापन और यात्राओं के खर्च में होगी कटौती</strong></p>



<p>चुनाव अभियान चलाने के राजनीतिक दलों के मौजूदा तौर-तरीके, पोल पैनल कितना असरदार है और राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव आचार संहिता का कड़ाई से पालन, ये सभी चीजें खर्च घटाने में अहम भूमिका निभाएंगी.अध्ययन के मुताबिक, अगर चुनाव को कई चरणों मे न कराया जाए तो इससे चुनाव पर खर्च कम हो सकता है, क्योकि विज्ञापन और यात्राओं पर कम खर्च होगा.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>&#8216;एक साथ हो सकते हैं चुनाव&#8217;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/ec-on-election/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Amit Verma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Oct 2017 07:55:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[ELECTION COMMISSION]]></category>
		<category><![CDATA[एक साथ चुनाव]]></category>
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					<description><![CDATA[चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने हों तो इसके लिए सभी राजनीतिक दलों की सहमति जरूरी है. आयोग ने कहा कि वो इसके लिए तैयार है. चुनाव आयुक्त OP रावत ने कहा कि चुनाव आयोग का हमेशा से नजरिया रहा है कि एक साथ चुनाव कराने से निवर्तमान सरकार को आदर्श आचार संहिता लागू होने से आने वाली रूकावट के बगैर नीतियां बनाने और लगातार कार्यक्रम लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा. बता दें कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा विधानसभाओं के चुनाव वर्ष 2019 के मध्य में अगले आम चुनाव के साथ होने हैं. OP रावत ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने पर निर्वाचन आयोग से 2015 में अपना रुख बताने को कहा गया था. उन्होंने कहा कि संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून में जरूरी बदलाव करने के बाद ही एक साथ चुनाव कराना मुमकिन हो सकेगा. मौजूदा कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार किसी राज्य की विधानसभा या लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने से छह महीने पहले तक चुनाव कराए जा सकते हैं.]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने हों तो इसके लिए सभी राजनीतिक दलों की सहमति जरूरी है. आयोग ने कहा कि वो इसके लिए तैयार है. चुनाव आयुक्त OP रावत ने कहा कि चुनाव आयोग का हमेशा से नजरिया रहा है कि एक साथ चुनाव कराने से निवर्तमान सरकार को आदर्श आचार संहिता लागू होने से आने वाली रूकावट के बगैर नीतियां बनाने और लगातार कार्यक्रम लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा.</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-15011" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/03/PNC-ELECTION-COMMISSION.jpg" alt="" width="301" height="167" /></p>
<p>बता दें कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा विधानसभाओं के चुनाव वर्ष 2019 के मध्य में अगले आम चुनाव के साथ होने हैं. OP रावत ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने पर निर्वाचन आयोग से 2015 में अपना रुख बताने को कहा गया था. उन्होंने कहा कि संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून में जरूरी बदलाव करने के बाद ही एक साथ चुनाव कराना मुमकिन हो सकेगा. मौजूदा कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार किसी राज्य की विधानसभा या लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने से छह महीने पहले तक चुनाव कराए जा सकते हैं.</p>
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