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	<title>DRUGS &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>समाज में  बड़े संकट की आहट,सरकार अनजान</title>
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		<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 08:08:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[डिजिटल युग में पश्चिमी नियंत्रण बढ़ती तकनीकी निर्भरता और ऑनलाइन गेमिंग का प्रचलन ई.रवि आनंद आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक ढाँचे के बीच बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य में चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता के व्यस्त होते जीवन और तकनीक के बढ़ते उपयोग ने बच्चों का एक बड़ा हिस्सा स्क्रीन पर निर्भर बना दिया है. टीवी, मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर बच्चों के लिए मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग सबसे अधिक आकर्षक और प्रभावी साबित हो रही है. हालाँकि, ऑनलाइन गेमिंग का यह आकर्षण अब कई गंभीर समस्याओं का कारण बन रहा है. विभिन्न शोधों और मौजूदा सामाजिक घटनाओं के आधार पर यह स्पष्ट हो रहा है कि डिजिटल गेमिंग की लत बच्चों में अकेलापन, अवसाद, व्यवहारिक विकार, चिड़चिड़ापन, हाइपरएक्टिविटी और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याओं को जन्म दे रही है. पहले जहाँ बच्चों में मोटापा और निष्क्रियता मुख्य चिंता के विषय थे, अब स्थितियाँ कहीं अधिक जटिल और खतरनाक रूप ले चुकी हैं. गेमिंग की लत से बच्चों में बढ़ रहा नशे का खतरा जमीनी स्तर पर किए गए अवलोकनों से पता चलता है कि गेमिंग की लत से उत्पन्न तनाव और मानसिक दबाव बच्चों को नशे की ओर धकेल रहा है. मादक पदार्थों, ड्रग्स और शराब की लत स्कूल स्तर पर ही तेजी से फैलती दिख रही है. चिंताजनक बात यह है कि कक्षा 10 तक पहुँचते-पहुँचते कई बच्चे किसी न किसी नशे के संपर्क में आ चुके होते हैं. अपराध की ओर बढ़ते कदम नशे की इस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>डिजिटल युग में पश्चिमी नियंत्रण</strong></p>



<p><strong>बढ़ती तकनीकी निर्भरता और ऑनलाइन गेमिंग</strong> <strong>का प्रचलन</strong></p>



<p><strong>ई.रवि आनंद </strong></p>



<p>आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक ढाँचे के बीच बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य में चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता के व्यस्त होते जीवन और तकनीक के बढ़ते उपयोग ने बच्चों का एक बड़ा हिस्सा स्क्रीन पर निर्भर बना दिया है. टीवी, मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर बच्चों के लिए मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग सबसे अधिक आकर्षक और प्रभावी साबित हो रही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/2c6f8fa7-4a75-4c17-ac25-01c7735833f1-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-93042" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/2c6f8fa7-4a75-4c17-ac25-01c7735833f1-scaled.jpeg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/11/2c6f8fa7-4a75-4c17-ac25-01c7735833f1-650x366.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/11/2c6f8fa7-4a75-4c17-ac25-01c7735833f1-1536x864.jpeg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>हालाँकि, ऑनलाइन गेमिंग का यह आकर्षण अब कई गंभीर समस्याओं का कारण बन रहा है. विभिन्न शोधों और मौजूदा सामाजिक घटनाओं के आधार पर यह स्पष्ट हो रहा है कि डिजिटल गेमिंग की लत बच्चों में <strong>अकेलापन</strong><strong>, </strong><strong>अवसाद</strong><strong>, </strong><strong>व्यवहारिक विकार</strong><strong>, </strong><strong>चिड़चिड़ापन</strong><strong>, </strong><strong>हाइपरएक्टिविटी और सामाजिक अलगाव</strong> जैसी समस्याओं को जन्म दे रही है. पहले जहाँ बच्चों में मोटापा और निष्क्रियता मुख्य चिंता के विषय थे, अब स्थितियाँ कहीं अधिक जटिल और खतरनाक रूप ले चुकी हैं.</p>



<p><strong>गेमिंग की लत से बच्चों में बढ़ रहा नशे का खतरा</strong><strong></strong></p>



<p>जमीनी स्तर पर किए गए अवलोकनों से पता चलता है कि गेमिंग की लत से उत्पन्न तनाव और मानसिक दबाव बच्चों को नशे की ओर धकेल रहा है. मादक पदार्थों, ड्रग्स और शराब की लत स्कूल स्तर पर ही तेजी से फैलती दिख रही है. चिंताजनक बात यह है कि कक्षा 10 तक पहुँचते-पहुँचते कई बच्चे किसी न किसी नशे के संपर्क में आ चुके होते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/c38e9f59-5570-480e-b9e3-7c15930f56ac-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-93043" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/c38e9f59-5570-480e-b9e3-7c15930f56ac-scaled.jpeg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/11/c38e9f59-5570-480e-b9e3-7c15930f56ac-650x366.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/11/c38e9f59-5570-480e-b9e3-7c15930f56ac-1536x864.jpeg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>अपराध की ओर बढ़ते कदम</strong><strong></strong></p>



<p>नशे की इस आदत को पूरा करने के लिए बच्चे चोरी, स्नैचिंग और यहाँ तक कि साइबर-जालसाजी जैसी गतिविधियों में शामिल होते पाए जा रहे हैं. कई मामलों में देखा गया है कि किशोर वित्तीय धोखाधड़ी में लिप्त अपराधी गिरोहों का आसानी से हिस्सा बन जाते हैं. विशेषज्ञ इसे “मोरल ब्रेकडाउन” यानी नैतिक पतन की स्थिति बताते हैं, जहाँ बच्चे सही-गलत के बुनियादी अंतर को भी नजरअंदाज करने लगते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="263" height="191" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/images-81.jpeg" alt="" class="wp-image-93044" style="width:436px;height:auto"/></figure>



<p>समाजशास्त्रियों के अनुसार, बच्चों में नशे और अपराध की ओर बढ़ती यह प्रवृत्ति आने वाले समय में गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले सकती है. यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या न केवल बच्चों के भविष्य, बल्कि पूरे समाज की संरचना को प्रभावित कर सकती है. और इन सब के मूल में हैं technology तकनीक</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>पुरानी तकनीक</strong><strong>, </strong><strong>नया संकट: मनोरंजन की मशीन बनते बच्चे और समाज पर उभरता खतरा</strong></h3>



<p>तकनीक हमारे जीवन का हिस्सा कब बनी और कैसे आम जन तक पहुँचीयह समझने के लिए इतिहास में झाँकना जरूरी है. आज ट्रेन में सफर करना जितना सहज और सामान्य लगता है, उतना ही असंभव यह विचार 100 वर्ष  पहले के लोगों के लिए था. उस समय ट्रेनें आम जनता नहीं, बल्कि साम्राज्यवादी शक्तियों की संपत्ति थीं. ब्रिटिश शासन के दौरान रेलवे का उपयोग मुख्यतः उपनिवेशों के संसाधनों के दोहन के लिए किया जाता था, न कि आम लोगों की सुविधा के लिए.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="790" height="440" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/U2JVDSH7QGTO7PIS2EZ7Y2QNGI.avif" alt="" class="wp-image-93045" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/U2JVDSH7QGTO7PIS2EZ7Y2QNGI.avif 790w, https://www.patnanow.com/assets/2025/11/U2JVDSH7QGTO7PIS2EZ7Y2QNGI-650x362.avif 650w" sizes="auto, (max-width: 790px) 100vw, 790px" /></figure>



<p>स्टीम इंजन के जनक ने संभवतः यह कभी नहीं सोचा होगा कि उनका आविष्कार एक दिन दुनिया भर के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाएगा. लेकिन इतिहास का सिद्धांत स्पष्ट है- <strong>जब किसी तकनीक में विश्व की महाशक्तियाँ निवेश करती हैं</strong><strong>, </strong><strong>उसका सर्वाधिक लाभ पहले वे स्वयं उठाती हैं</strong>, और जब उसकी रणनीतिक उपयोगिता घटने लगती है, तब वह तकनीक धीरे-धीरे आम जन के हाथों पहुँचती है.</p>



<p>आज हम ट्रेन में बैठकर खुश होते हैं, पर उसके पीछे शताब्दियों की राजनीति, नियंत्रण और तकनीकी निवेश की कहानी दबी हुई है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>टेक्नोलॉजी नई नहीं होती</strong><strong>, </strong><strong>केवल उसका उपयोग बदलता है</strong></h3>



<p>आज हम जिस युग में जी रहे हैं, उसे सामान्यतः “संचार क्रांति” का युग कहा जाता है. मोबाइल, लैपटॉप, 5G यह सब हमें नई और अत्याधुनिक तकनीक प्रतीत होती है, जबकि वास्तविकता यह है कि टेलीफोन, ई-मेल, GPS, सिमुलेशन, उपग्रह तकनीक, सुपर कंप्यूटर इन सभी का जन्म कई दशक पहले हो चुका था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="318" height="159" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/images-79.jpeg" alt="" class="wp-image-93046" style="width:578px;height:auto"/></figure>



<p>दुनिया कभी अमेरिका जैसे देशों की ओर ताकती थी GPS लोकेशन के लिए, सैटेलाइट तस्वीरों के लिए,<br>संचार तकनीक के लिए. दुनिया भर की सेनाएँ और सरकारें इन तकनीकों पर निर्भर थीं. लेकिन जब इन तकनीकों की <em>रणनीतिक महत्वता</em> &nbsp;कम होने लगी, तब इन्हें सार्वजनिक उपयोग के लिए जारी किया गया. वही GPS, जो कभी युद्धक्षेत्रों में प्रयोग होता था, आज टैक्सी बुलाने और खाना ऑर्डर करने का साधन बन चुका है. वही सैटेलाइट तकनीक अब मोबाइल गेम्स में “रियल वर्ल्ड मैप” दिखा रही है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>तकनीक मनोरंजन बनकर आई</strong><strong> </strong><strong>और अब संकट बनकर उभर रही है</strong></h3>



<p></p>



<p>जब अत्याधुनिक तकनीक आम आदमी तक पहुँची, तो उसका सबसे तेज़ विकास मनोरंजन के क्षेत्र में हुआ. मोबाइल फोन, हाई-स्पीड इंटरनेट और गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म बच्चों और युवाओं के लिए एक आसान ‘डोपामिन मशीन’ बन गए.</p>



<p>लेकिन यही मनोरंजन अब समाज के लिए गंभीर समस्या का रूप ले रहा है.</p>



<p>विशेषज्ञों की मानें तो<br><strong>• गेमिंग की लत,<br>• बिना रोक-टोक स्क्रीन टाइम,<br>• डिजिटल निर्भरता</strong></p>



<p>बच्चों में मानसिक और सामाजिक क्षरण का कारण बन रहे हैं. पहले मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता बड़ी समस्याएँ थीं, पर अब यह <strong>नशे, </strong><strong>अकेलेपन, </strong><strong>व्यवहारिक विकार, </strong><strong>सामाजिक अलगाव और अपराध</strong> जैसे खतरनाक रूप ले चुका है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="266" height="189" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/19a02757-566e-4f4f-8ce6-7783e029a29b.jpeg" alt="" class="wp-image-93047" style="width:425px;height:auto"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>&nbsp;“</strong><strong>भारतीय तरीका</strong><strong>”: </strong><strong>विकास भी</strong><strong>, </strong><strong>पर नैतिकता के साथ</strong></h2>



<p>अब सवाल उठता है &#8211; इससे उबरने का रास्ता क्या है?</p>



<p>जवाब सामने है, लेकिन उसे पहचानना कठिन है.<br>क्योंकि वह जवाब उस दर्शन में छिपा है जिस पर सदियों से धूल जमी हुई है &#8211; <strong>भारत का उन्नति-दर्शन</strong>, “Indian Way of Development”.</p>



<p>भारत ने शून्य से लेकर खगोल विज्ञान तक अनगिनत खोजें कीं.<br>परंतु इन सबकी विशेषता यह रही कि <strong>भारतीय विकास ने हमेशा नैतिकता को केंद्र में रखा</strong>.<br>किसी भी तकनीक, किसी भी ज्ञान का उपयोग समाज के हित में होगा या नहीं, इसका विचार पहले से किया जाता था. इसलिए भारत की कोई खोज कभी समाज के लिए संकट नहीं बनी.</p>



<p>यह समय है कि हम <strong>सनातन मूल्यों</strong>, भारतीय ज्ञान-परंपरा और उसके नैतिक ढांचे को फिर से खोजें, पढ़ें, समझें और समाज में प्रसारित करें.</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>अंतिम चेतावनी</strong></h2>



<p>समय का चक्र लगातार चल रहा है.यदि मानव स्वयं को अनुशासित नहीं करता, यदि तकनीक की दिशा और उपयोग पर नियंत्रण नहीं रखता, तो समय उसे कुचलते हुए आगे निकल जाएगा.मानवता का भविष्य  आपका, मेरा, और इस ग्रह पर संपूर्ण मानव जाति का  तभी सुरक्षित है जब विकास के केंद्र में केवल प्रगति नहीं, <strong>नैतिकता और संयम</strong> भी हों.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बिहार में शराबबंदी कानून और जिद, बन गया उड़ता बिहार !  </title>
		<link>https://www.patnanow.com/liquor-ban-law-and-stubbornness-in-bihar-has-become-flying-bihar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Dec 2022 15:09:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
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					<description><![CDATA[सूद के पैसे से वकील, कोर्ट कचहरी का चक्कर गली से गुजरते वक्त गांजा और अन्य अवैध नशे की आती है दुर्गंध ठीक दो साल पहले दिसंबर 2020 में लालू जी की पार्टी ने कहा था की बिहार में अवैध शराब का व्यापार करीब 20,000+ करोड़ का है. यह एक घोर आरोप था क्योंकि एक तरफ शराबबंदी से सरकार को कई हजार करोड़ का राजस्व का घाटा हो रहा है और दूसरी तरफ जो चेन सिस्टम अवैध शराब में शामिल है , वह कई हजार करोड़ का मालिक बन रहा है. सत्ता मिलते ही लालू जी की पार्टी और उनके दोनो पुत्र इस मुद्दे पर मौन हो गए हैं लेकिन सबसे ज्यादा कष्ट में वो लोग और समाज हैं जहां शराब या अन्य नशा उनके जीवन के दिन चर्या में है और यह आसानी से उपलब्ध भी है. गरीब समाज इस कानून के चक्कर में फंस रहा है. लोग आदत से बाज नहीं आ रहे और सूद के पैसे से वकील, कोर्ट कचहरी का चक्कर है. शराबबंदी कानून का दूसरा असर है की पटना या अन्य शहरों के हर गली से गुजरते वक्त गांजा और अन्य अवैध नशे की दुर्गंध आती है। युवा बुरी तरह से इसके गिरफ्त में हैं. कई समाजसेवी इससे त्रस्त आकर आवाज उठाते हैं लेकिन यह सिंडीकेट इतना मजबूत है की उनकी आवाज बंद कर दी जा रही है । जो अधिकारी और पुलिस वाले की फील्ड पोस्टिंग नही है वो भी करोड़ों का जमीन खरीद रहे हैं. बाकियों का पूछिए ही मत. 20,000+ करोड़ के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p></p>



<p><strong>सूद के पैसे से वकील, कोर्ट कचहरी का चक्कर</strong></p>



<p><strong>गली से गुजरते वक्त गांजा और अन्य अवैध नशे की आती है दुर्गंध</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="540" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/news_ganja_.jpg" alt="" class="wp-image-69471" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/news_ganja_.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/news_ganja_-350x291.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ठीक दो साल पहले दिसंबर 2020 में लालू जी की पार्टी ने कहा था की बिहार में अवैध शराब का व्यापार करीब 20,000+ करोड़ का है. यह एक घोर आरोप था क्योंकि एक तरफ शराबबंदी से सरकार को कई हजार करोड़ का राजस्व का घाटा हो रहा है और दूसरी तरफ जो चेन सिस्टम अवैध शराब में शामिल है , वह कई हजार करोड़ का मालिक बन रहा है.</p>



<p>सत्ता मिलते ही लालू जी की पार्टी और उनके दोनो पुत्र इस मुद्दे पर मौन हो गए हैं लेकिन सबसे ज्यादा कष्ट में वो लोग और समाज हैं जहां शराब या अन्य नशा उनके जीवन के दिन चर्या में है और यह आसानी से उपलब्ध भी है. गरीब समाज इस कानून के चक्कर में फंस रहा है. लोग आदत से बाज नहीं आ रहे और सूद के पैसे से वकील, कोर्ट कचहरी का चक्कर है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="341" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/Untitled.png" alt="" class="wp-image-69472" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/Untitled.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/Untitled-350x184.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>शराबबंदी कानून का दूसरा असर है की पटना या अन्य शहरों के हर गली से गुजरते वक्त गांजा और अन्य अवैध नशे की दुर्गंध आती है। युवा बुरी तरह से इसके गिरफ्त में हैं. कई समाजसेवी इससे त्रस्त आकर आवाज उठाते हैं लेकिन यह सिंडीकेट इतना मजबूत है की उनकी आवाज बंद कर दी जा रही है । जो अधिकारी और पुलिस वाले की फील्ड पोस्टिंग नही है वो भी करोड़ों का जमीन खरीद रहे हैं. बाकियों का पूछिए ही मत. 20,000+ करोड़ के अवैध व्यापार ने हर इलाके में एक दूसरे तरह का आर्थिक अपराधी पैदा कर रहा है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="385" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/bihar.png" alt="" class="wp-image-69473" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/bihar.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/bihar-350x207.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>भय है की बिहार कहीं दूसरा ‘उड़ता पंजाब’ न बन जाए.तेजस्वी खुद युवा हैं और सत्ता मिलते ही इस मुद्दे पर उनकी मौन हैरान कर देने वाली है, या तो वो अपनी नैतिकता बेचने पर मजबूर हैं या इस अति घमंडी रावण के अहंकार में समस्त बिहार जलने को बेकरार है.</p>



<p>आवाज उठाइए, यह आग सबको बर्बाद कर देगी, नीतीश जी, अब भी मान जाइए ..कम से कम बीयर बार का ही परमिशन दीजिए, मुझे डर सिर्फ गांजा और अन्य ऐसे नशे की लत में फंस रहे युवाओं की है, बाकी, आपको क्या है ?</p>



<p><strong>प्रस्तुति:  रंजन ऋतुराज, दालान</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>देश के युवाओं में बढ़ता नशा का ट्रेंड चिंताजनक</title>
		<link>https://www.patnanow.com/the-trend-of-increasing-intoxication-among-the-youth-of-the-country-is-worrying/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Jul 2022 02:45:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[DRUGS]]></category>
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					<description><![CDATA[युवाओं में भांग, कोकीन और ओपीओइड का इस्तेमाल जोरों परमादक पदार्थों के इस्तेमाल की सीमा और पैटर्न के संबंध में व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षणयह संख्या जल्द 29.9 करोड़ के पास होगा,सरकार ने कहा ठोस उपाय करंगे होंगे साल दर साल दुनियाभर में अवैध ड्रग्स के इस्तेमाल और व्यापार दोनों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. भारत में भी बड़ी संख्या में युवा नशीले पदार्थों के शिकार हो रहे हैं. संसद में एक सवाल के जवाब में सरकार की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2018 के दौरान एम्स नई दिल्ली के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर के जरिए देश में मादक पदार्थों के इस्तेमाल की सीमा और पैटर्न के संबंध में व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण किया है. सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक 10 से 17 साल युवाओं में भांग कोकीन और ओपीओइड का काफी इस्तेमाल हो रहा है. वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2020 के आंकड़ों की मानें तो 2018 में दुनियाभर में 15 से 64 साल के आयु वर्ग में 26.9 करोड़ लोग ड्रग्स के शिकार हैं. ये आकंड़ा पूरी दुनिया के इस आयु वर्ग का कुल जनसंख्या के 5.4 फीसदी है. रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक इस जनसंख्या में लगभग 11% वृद्धि होगी और यह संख्या 29.9 करोड़ हो जाएगी. सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक नशे के आदी हो चुके लोगों की मदद के लिए सरकार की ओर से कई तरह के कदम उठाए गए हैं. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय मादक पदार्थों का इस्तेमाल करते वाले [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>युवाओं में भांग, कोकीन और ओपीओइड का इस्तेमाल जोरों पर</strong><br><strong>मादक पदार्थों के इस्तेमाल की सीमा और पैटर्न के संबंध में व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण</strong><br><strong>यह संख्या जल्द 29.9 करोड़ के पास होगा,सरकार ने कहा ठोस उपाय करंगे होंगे</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="360" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs4.png" alt="" class="wp-image-64637" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs4.png 640w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs4-350x197.png 350w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>



<p>साल दर साल दुनियाभर में अवैध ड्रग्स के इस्तेमाल और व्यापार दोनों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. भारत में भी बड़ी संख्या में युवा नशीले पदार्थों के शिकार हो रहे हैं. संसद में एक सवाल के जवाब में सरकार की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2018 के दौरान एम्स नई दिल्ली के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर के जरिए देश में मादक पदार्थों के इस्तेमाल की सीमा और पैटर्न के संबंध में व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="599" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs.png" alt="" class="wp-image-64634" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs.png 599w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs-350x214.png 350w" sizes="auto, (max-width: 599px) 100vw, 599px" /></figure>



<p>सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक 10 से 17 साल युवाओं में भांग कोकीन और ओपीओइड का काफी इस्तेमाल हो रहा है. वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2020 के आंकड़ों की मानें तो 2018 में दुनियाभर में 15 से 64 साल के आयु वर्ग में 26.9 करोड़ लोग ड्रग्स के शिकार हैं. ये आकंड़ा पूरी दुनिया के इस आयु वर्ग का कुल जनसंख्या के 5.4 फीसदी है. रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक इस जनसंख्या में लगभग 11% वृद्धि होगी और यह संख्या 29.9 करोड़ हो जाएगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs2.png" alt="" class="wp-image-64635" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs2.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs2-350x233.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक नशे के आदी हो चुके लोगों की मदद के लिए सरकार की ओर से कई तरह के कदम उठाए गए हैं. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय मादक पदार्थों का इस्तेमाल करते वाले व्यक्तियों को परामर्श प्रदान करने और उन्हें करीबी नशामुक्ति केंद्र में भेजने के लिए एक राष्ट्रीय टोल फ्री हेल्पलाइन 14446 चला रही है. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2018 के दौरान एम्स नई दिल्ली के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर के जरिए देश में मादक पदार्थों के इस्तेमाल की सीमा और पैटर्न के संबंध में व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="360" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs3.png" alt="" class="wp-image-64636" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs3.png 640w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/drugs3-350x197.png 350w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>



<p>वहीं 8000 से अधिक युवा स्वयंसेवकों को शामिल करते हुए एक वृहद सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम के साथ 272 सबसे संवेदनशील जिलों में नशा मुक्त भारत अभियान शुरू किया गया है. अभियान के तहत लगभग तीन करोड़ से ज्यादा युवाओं को जोड़ा गया है. सरकार 350 एकीकृत पुनर्वास केंद्रों का रखरखाव कर रही है जो न केवल मादक पदार्थों का सेवन करने वालों का इलाज करते हैं बल्कि प्रेरक परामर्श के बाद देखभाल और समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम भी कर रहे हैं. सरकारी अस्पतालों में नशा करने वाले लोगों के इलाज के लिए 38 ट्रीटमेंट सेंटर बनाए गए हैं.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>हेरोइन के साथ तस्कर गिरफ्तार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/ara-heroin-baramad/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[amitverma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Aug 2017 14:52:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Crime]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[DRUGS]]></category>
		<category><![CDATA[HEROIN]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-21391" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/08/ARA-BREAKING.png" alt="" width="357" height="331" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/ARA-BREAKING.png 357w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/ARA-BREAKING-350x325.png 350w" sizes="auto, (max-width: 357px) 100vw, 357px" /></p>
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