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	<title>Condolence &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>Condolence &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>खामोश हो गयी सबकी पसंदीदा आवाज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Feb 2024 13:50:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[आवाज की दुनिया के शानदार फनकार अमीन सयानी का जाना एक शून्यता है पटना, 22 फरवरी. आवाज का असर ऐसा होता है कि दूर से ही कोई खींचा चला आता है. तभी तो इस आवाज के करोड़ो प्रशंसक चंद शब्दों और उनकी पुकार पर तुरन्त कूच करने को तैयार रहते हैं. मतलब ये आवाज का ही असर है कि आपको नेता, अभिनेता या सम्राट की उपाधि दे देता है. ऐसे मशहूर आवाज के कई धनी हुए लेकिन अपनी आवाज से लोगों के बीच कई दशकों तक कोई जगह बनाया तो वे थे जाने-माने रेडियो प्रस्तोता अमीन सयानी. 91 वर्ष की उम्र तक उन्होंने अपना जलवा लोगों के दिलों तक बरकरार रखा था. लेकिन लोगों के दिल मायूस हो गए जब 91 की उम्र में उनके निधन की समाचार उनके प्रशंसकों को मिली. देश ही नही विदेशों तक उनके लिए ये मायूसी छाई रही. उनके बेटे राजिल सयानी ने अपने पिता की मृत्यु की पुष्टि करते हुए बताया कि अमीन सयानी ने 20 फरवरी की रात अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनका निधन हृदय गति रुकने के कारण हुआ है. उनका अंतिम संस्कार 22 फरवरी को होगा. अमीन सयानी का जन्म 21 दिसंबर, 1931 में मुंबई में हुआ था. अमीन भारतीय रेडियो के ग्रैंड ओल्ड मैन कहे जाते थे. उनको ऑल इंडिया रेडियो में उनके भाई हामिद सयानी लेकर आए थे. उन्होंने लगभग 10 साल तक अंग्रेजी कार्यक्रम किए. रेडियो के अलावा अमीन &#8216;भूत बंगला&#8217;, &#8216;तीन देवियां&#8217;, &#8216;बॉक्सर और कत्ल&#8217; जैसी फिल्में में भी नजर आए थे. अमीन सयानी भारत के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आवाज की दुनिया के शानदार फनकार अमीन सयानी का जाना एक शून्यता है </strong></p>



<p>पटना, 22 फरवरी. आवाज का असर ऐसा होता है कि दूर से ही कोई खींचा चला आता है. तभी तो इस आवाज के करोड़ो प्रशंसक चंद शब्दों और उनकी पुकार पर तुरन्त कूच करने को तैयार रहते हैं. मतलब ये आवाज का ही असर है कि आपको नेता, अभिनेता या सम्राट की उपाधि दे देता है. ऐसे मशहूर आवाज के कई धनी हुए लेकिन अपनी आवाज से लोगों के बीच कई दशकों तक कोई जगह बनाया तो वे थे जाने-माने रेडियो प्रस्तोता अमीन सयानी. 91 वर्ष की उम्र तक उन्होंने अपना जलवा लोगों के दिलों तक बरकरार रखा था. लेकिन लोगों के दिल मायूस हो गए जब 91 की उम्र में उनके निधन की समाचार उनके प्रशंसकों को मिली. देश ही नही विदेशों तक उनके लिए ये मायूसी छाई रही.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="474" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000482909-474x650.jpg" alt="" class="wp-image-82729" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000482909.jpg 474w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000482909-255x350.jpg 255w" sizes="(max-width: 474px) 100vw, 474px" /></figure>



<p>उनके बेटे राजिल सयानी ने अपने पिता की मृत्यु की पुष्टि करते हुए बताया कि अमीन सयानी ने 20 फरवरी की रात अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनका निधन हृदय गति रुकने के कारण हुआ है. उनका अंतिम संस्कार 22 फरवरी को होगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="400" height="224" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000484403.jpg" alt="" class="wp-image-82732" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000484403.jpg 400w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000484403-350x196.jpg 350w" sizes="(max-width: 400px) 100vw, 400px" /></figure>



<p><em>अमीन सयानी का जन्म 21 दिसंबर, 1931 में मुंबई में हुआ था. अमीन भारतीय रेडियो के ग्रैंड ओल्ड मैन कहे जाते थे. उनको ऑल इंडिया रेडियो में उनके भाई हामिद सयानी लेकर आए थे. उन्होंने लगभग 10 साल तक अंग्रेजी कार्यक्रम किए. रेडियो के अलावा अमीन &#8216;भूत बंगला&#8217;, &#8216;तीन देवियां&#8217;, &#8216;बॉक्सर और कत्ल&#8217; जैसी फिल्में में भी नजर आए थे.</em></p>



<p>अमीन सयानी भारत के एक मशहूर रेडियो अनाउन्सर थे. उन्होंने न सिर्फ़ भारत में, बल्कि पूरे एशिया में ख्याति पाई थी. उनका मशहूर कार्यक्रम &#8220;बिनाका गीतमाला&#8221; रेडियो सिलोन से प्रसारित होता था. उनकी नकल कर कई रेडियो संचालक खुद को संवारने में कामयाब हुए. उनके बात करने की शैली &#8220;बहनों और भाइयो&#8221; काफ़ी सराही गई. उन्होंने 54,000 रेडियो कार्यक्रमों के अलावा 19,000 स्पोर्ट्स या जिंगल्स भी किये. उनका रेडियो सफ़र 1951 में शुरू हुआ था. रेडियो की दुनिया के बेताज बादशाह को पटना नाउ की ओर से श्रद्धा सुमन समर्पित..</p>



<p><strong>pncb</strong></p>
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		<title>गिर गइल भोजपुरिया बरगद के गाछ!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Mar 2021 03:30:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8216;माया महाठगिनी&#8217; के रचयिता छोड़ चले माया नगरी आरा. मूर्धन्य भोजपुरी साहित्यकार और स्नातकोत्तर भोजपुरी-हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ गदाधर सिंह ने मंगलवार सुबह 4 बजे अपने निवास कतिरा में आखरी सांस ली. डॉ गदाधर सिंह का जन्म 24 नवम्बर, 1930 को चकवथ, बिहिया में हुआ था. देश के एकमात्र भोजपुरी विभाग की स्थापना और अध्यापन तथा विवि में भोजपुरी भवन के निर्माण में उनका अविस्मरणीय योगदान था. वे देश ही नही विश्व के पहले भोजपुरी विभागध्यक्ष थे. उनका यह गौरव न सिर्फ भोजपुर का बल्कि भोजपुरी को अंनत तक शान महसूस करता रहेगा. व्यक्ति दो तरह के होते हैं एक जो कुछ लोगों या समाज के लिए जाने जाते हैं और एक वे जो धूमकेतु के प्रकाश की तरह अनंत काल तक अपने प्रकाश से सबको आलोकित किया करते हैं. डॉ गदाधर वैसे ही अनंत काल तक भोजपुरी क्षेत्र और उनके लोगों को प्रकाशवान करने वालों में शीर्ष पर है. सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे आजीवन साहित्य सेवा में लगे रहे और दर्जनों किताब लिखे. भोजपुरी के चर्चित ललित निबंध संग्रह माया महाठगिनी और मोहि ब्रज बिसरत नाहीं की रचना उन्होंने की थी. इसके अलावा भोजपुरी भाषा की विकास यात्रा, भोजपुरी साहित्य का इतिहास और भोजपुरी काव्यधारा उनकी उल्लेखनीय कृतियाँ हैं. भोजपुरी के अलावा हिंदी में कई पुस्तकें उन्होंने लिखी जिनमें हिंदी भाषा के विकास में जैन साहित्य का योगदान और कुँवर सिंह पर एक पुस्तक अहम है. डॉ गदाधर सिंह ने देश के अलग-अलग संस्थानों में भोजपुरी का अध्ययन-अध्यापन कार्य शुरू करवाने में योगदान दिया. भोजपुरी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>&#8216;माया महाठगिनी&#8217; के रचयिता छोड़ चले माया नगरी</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="407" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/03/IMG_20210310_085327.jpg" alt="" class="wp-image-51216" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/03/IMG_20210310_085327.jpg 407w, https://www.patnanow.com/assets/2021/03/IMG_20210310_085327-237x350.jpg 237w" sizes="(max-width: 407px) 100vw, 407px" /><figcaption>स्व. डॉ गदाधर सिंह(फ़ाइल फ़ोटो)</figcaption></figure>



<p>आरा. मूर्धन्य भोजपुरी साहित्यकार और स्नातकोत्तर भोजपुरी-हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ गदाधर सिंह ने मंगलवार सुबह 4 बजे अपने निवास कतिरा में आखरी सांस ली. डॉ गदाधर सिंह का जन्म 24 नवम्बर, 1930 को चकवथ, बिहिया में हुआ था. देश के एकमात्र भोजपुरी विभाग की स्थापना और अध्यापन तथा विवि में भोजपुरी भवन के निर्माण में उनका अविस्मरणीय योगदान था.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="432" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/03/IMG_20210310_085428.jpg" alt="" class="wp-image-51217" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/03/IMG_20210310_085428.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/03/IMG_20210310_085428-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>स्व. डॉ गदाधर भोजपुरी कला के कार्यक्रम के दौरान(फ़ाइल फ़ोटो)</figcaption></figure>



<p>वे देश ही नही विश्व के पहले भोजपुरी विभागध्यक्ष थे. उनका यह गौरव न सिर्फ भोजपुर का बल्कि भोजपुरी को अंनत तक शान महसूस करता रहेगा. व्यक्ति दो तरह के होते हैं एक जो कुछ लोगों या समाज के लिए जाने जाते हैं और एक वे जो धूमकेतु के प्रकाश की तरह अनंत काल तक अपने प्रकाश से सबको आलोकित किया करते हैं. डॉ गदाधर वैसे ही अनंत काल तक भोजपुरी क्षेत्र और उनके लोगों को प्रकाशवान करने वालों में शीर्ष पर है. सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे आजीवन साहित्य सेवा में लगे रहे और दर्जनों किताब लिखे. भोजपुरी के चर्चित ललित निबंध संग्रह माया महाठगिनी और मोहि ब्रज बिसरत नाहीं की रचना उन्होंने की थी. इसके अलावा भोजपुरी भाषा की विकास यात्रा, भोजपुरी साहित्य का इतिहास और भोजपुरी काव्यधारा उनकी उल्लेखनीय कृतियाँ हैं. भोजपुरी के अलावा हिंदी में कई पुस्तकें उन्होंने लिखी जिनमें हिंदी भाषा के विकास में जैन साहित्य का योगदान और कुँवर सिंह पर एक पुस्तक अहम है. डॉ गदाधर सिंह ने देश के अलग-अलग संस्थानों में भोजपुरी का अध्ययन-अध्यापन कार्य शुरू करवाने में योगदान दिया. भोजपुरी के बारे में चर्चा छेड़ते हीं उनमें ऊर्जा की लहर दौड़ उठती थी. वे पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे.</p>



<p>उनके निधन पर भोजपुरी क्षेत्र के लोगों में&nbsp; दुःख की लहर है. साहित्यारों,संस्कृतिकर्मियों, बुद्धिजीवियों, छात्रों,शिक्षकों और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन से भोजपुरी को गहरी क्षति पहुँचने की बात की है. अभिनव एंड एक्ट,सर्जना,आर्ट इन मोशन सहित कई संस्थानों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया. उक्त संस्थानों ने संयुक्त रूप से एक शोक सभा का भी आयोजन किया जिसमें उन्होंने स्व. डॉ गदाधर सिंह के लिए दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा के शांति के लिए प्रार्थना किया. शामिल लोगों में कमल किशोर,अम्बुज आकाश, ओ पी पांडेय,शैलेन्द्र सच्चु,संजीव सिन्हा, शशि सागर बब्बू,हरि गुप्ता,छोटू सोनार,अभिषेक गौरव,प्रेमजीत,विक्की,सत्य प्रकाश,प्रशांत कुमार,मनोज श्रीवास्तव, मनोज सिंह,श्याम कुमार, चांदनी,सोनाली,साधना,लवली,और बंटी समेत कई कलाकार शामिल थे.</p>



<p>आरा से <strong>रवि प्रकाश सूरज</strong> की रिपोर्ट</p>
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