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		<title>व्यावसायिक बैंकों की तरह हो सकती हैं ग्रामीण बैंककर्मियों की सेवा शर्तें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Oct 2025 17:37:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MONEY MATTERS]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्रामीण बैंक कर्मियों के लिए अच्छी खबर नाबार्ड की पहल, सेवाशर्तों में सुधार के लिए विचार पटना।। ग्रामीण बैंकों की सेवाशर्तों को व्यावसायिक बैंकों के समान करने की पहल शुरू कर दी गई है. इससे बिहार के हजारों ग्रामीण बैंककर्मियों समेत देशभर के ग्रामीण बैंककर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी. मुंबई स्थित राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के प्रधान कार्यालय में संयुक्त परामर्श समिति की बैठक में इस पर विचार किया गया. नाबार्ड के चेयरमैन केवी शाजी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रायोजक बैंककर्मियों की सेवाशर्त की तर्ज पर ग्रामीण बैंक की सेवाशर्त में संशोधन की पहल हुई. ग्रामीण बैंक कर्मियों की सेवाशर्त के तहत प्रोन्नति, तबादला एवं अन्य सुविधाओं को समान करने पर विचार किया गया. बैठक में भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक के महाप्रबंधक के साथ ही उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु ग्रामीण बैंक के चेयरमैन भी शामिल थे. इस बैठक में प्रोन्नति, तबादला और अन्य सुविधाओं को समान करने पर विचार किया गया. दरअसल, सेवाशर्त में अंतर के कारण ग्रामीण बैंक को छोड़ कर्मचारी अन्य कॉमर्शियल बैंक ज्वाइन कर रहे हैं. बिहार में बिहार ग्रामीण बैंक की 21 सौ शाखाएं हैं. यह राज्य में भारतीय स्टेट बैंक से भी बड़ा बैंक है. ग्रामीण बैंक में राज्य में करीब दस हजार से अधिक कर्मी कार्यरत हैं. सेवाशर्त में सुधार किए जाने से इन सभी कर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी. बैठक में वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि, ग्रामीण बैंक अधिकारियों और कर्मियों के संगठन के प्रतिनिधि भी थे. बैठक से लौटने के बाद ऑल इंडिया ग्रामीण बैंक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>ग्रामीण बैंक कर्मियों के लिए अच्छी खबर </strong></p>



<p><strong>नाबार्ड की पहल, सेवाशर्तों में सुधार के लिए विचार</strong></p>



<p>पटना।। ग्रामीण बैंकों की सेवाशर्तों को व्यावसायिक बैंकों के समान करने की पहल शुरू कर दी गई है. इससे बिहार के हजारों ग्रामीण बैंककर्मियों समेत देशभर के ग्रामीण बैंककर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="648" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/10/1000492285-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-92660" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/10/1000492285-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/10/1000492285-650x411.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>मुंबई स्थित राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के प्रधान कार्यालय में संयुक्त परामर्श समिति की बैठक में इस पर विचार किया गया. नाबार्ड के चेयरमैन केवी शाजी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रायोजक बैंककर्मियों की सेवाशर्त की तर्ज पर ग्रामीण बैंक की सेवाशर्त में संशोधन की पहल हुई. ग्रामीण बैंक कर्मियों की सेवाशर्त के तहत प्रोन्नति, तबादला एवं अन्य सुविधाओं को समान करने पर विचार किया गया. बैठक में भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक के महाप्रबंधक के साथ ही उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु ग्रामीण बैंक के चेयरमैन भी शामिल थे. इस बैठक में प्रोन्नति, तबादला और अन्य सुविधाओं को समान करने पर विचार किया गया. दरअसल, सेवाशर्त में अंतर के कारण ग्रामीण बैंक को छोड़ कर्मचारी अन्य कॉमर्शियल बैंक ज्वाइन कर रहे हैं. बिहार में बिहार ग्रामीण बैंक की 21 सौ शाखाएं हैं. यह राज्य में भारतीय स्टेट बैंक से भी बड़ा बैंक है. ग्रामीण बैंक में राज्य में करीब दस हजार से अधिक कर्मी कार्यरत हैं. सेवाशर्त में सुधार किए जाने से इन सभी कर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी. बैठक में वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि, ग्रामीण बैंक अधिकारियों और कर्मियों के संगठन के प्रतिनिधि भी थे. बैठक से लौटने के बाद ऑल इंडिया ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव डीएन त्रिवेदी ने बताया कि ग्रामीण बैंक के शीर्ष संगठन ने ग्रामीण बैंक और प्रायोजक व्यावसायिक बैंक की कार्यप्रणाली में कोई व्यापक अंतर नहीं होने के कारण ग्रामीण बैंक के कर्मियों और अधिकारियों की सेवाशर्तें समरूप करने का तर्क पेश किया गया है. ग्रामीण और व्यावसायिक बैंककर्मियों के वेतन-भत्ते, पेंशन और अन्य आर्थिक लाभ समरूप हैं, लेकिन अन्य सेवाशर्तों में काफी अंतर है. इसके कारण ग्रामीण बैंक में नियुक्त कर्मी मौका मिलते ही इस्तीफा देकर व्यावसायिक बैंक में योगदान कर लेते हैं.</p>



<p>इस समस्या का समाधान करने के लिए, ग्रामीण बैंकों की सेवाशर्तों को व्यावसायिक बैंकों के समान बनाने का प्रयास किया जा रहा है. इससे ग्रामीण बैंक के कर्मियों को भी समान अवसर और सुविधाएं मिल सकेंगी.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>



<p></p>
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