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	<title>chndraghanta devi &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>मां चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के होते हैं दर्शन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Sep 2022 05:10:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[सुख समृद्धि]]></category>
		<category><![CDATA[chndraghanta devi]]></category>
		<category><![CDATA[शारदीय नवरात्र]]></category>
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					<description><![CDATA[चंद्रघंटा देवी का उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय होता है मां दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है. नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है. इस दिन साधक का मन &#8216;मणिपूर&#8217; चक्र में प्रविष्ट होता है. लोकवेद के अनुसार माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं. ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं. मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है. इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है. इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है. इनके दस हाथ हैं. इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं. इनका वाहन सिंह है. इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है.मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएँ विनष्ट हो जाती हैं. इनकी आराधना सद्यः फलदायी है. माँ भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं. इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है. इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों को प्रेतबाधा से रक्षा करती है. इनका ध्यान करते ही शरणागत की रक्षा के लिए इस घंटे की ध्वनि निनादित हो उठती है.माँ का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण रहता है. इनकी आराधना से वीरता-निर्भयता के साथ ही सौम्यता [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चंद्रघंटा देवी का उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय होता है <br></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/chandra.jpg" alt="" class="wp-image-67001" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/chandra.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/chandra-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मां  दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है. नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है. इस दिन साधक का मन &#8216;मणिपूर&#8217; चक्र में प्रविष्ट होता है. लोकवेद के अनुसार माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं. ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं.</p>



<p>मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है. इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है. इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है. इनके दस हाथ हैं. इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं. इनका वाहन सिंह है. इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है.<br>मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएँ विनष्ट हो जाती हैं. इनकी आराधना सद्यः फलदायी है. माँ भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं. इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है. इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों को प्रेतबाधा से रक्षा करती है. इनका ध्यान करते ही शरणागत की रक्षा के लिए इस घंटे की ध्वनि निनादित हो उठती है.<br>माँ का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण रहता है. इनकी <strong>आराधना से वीरता-निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होकर मुख, नेत्र तथा संपूर्ण काया में कांति-गुण की वृद्धि होती है.</strong> स्वर में दिव्य, अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है. माँ चंद्रघंटा के भक्त और उपासक जहाँ भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं. माँ के आराधक के शरीर से दिव्य प्रकाशयुक्त परमाणुओं का अदृश्य विकिरण होता रहता है. यह दिव्य क्रिया साधारण चक्षुओं से दिखाई नहीं देती, किन्तु साधक और उसके संपर्क में आने वाले लोग इस बात का अनुभव भली-भाँति करते रहते हैं. विद्यार्थियों के लिए मां साक्षात विद्या प्रदान करती है. वहीं, देवी साधक की सभी प्रकार से रक्षा करती है.<br> माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में तृतीय दिन इसका जाप करना चाहिए. मां चन्द्रघंटा को नारंगी रंग प्रिय है. भक्त को जहां तक संभव हो, पुजन के समय सूर्य के आभा के समान रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए.<br></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color">मन्त्र<br>पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता. प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता..</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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