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	<title>Child &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>समाज में  बड़े संकट की आहट,सरकार अनजान</title>
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		<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 08:08:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[डिजिटल युग में पश्चिमी नियंत्रण बढ़ती तकनीकी निर्भरता और ऑनलाइन गेमिंग का प्रचलन ई.रवि आनंद आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक ढाँचे के बीच बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य में चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता के व्यस्त होते जीवन और तकनीक के बढ़ते उपयोग ने बच्चों का एक बड़ा हिस्सा स्क्रीन पर निर्भर बना दिया है. टीवी, मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर बच्चों के लिए मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग सबसे अधिक आकर्षक और प्रभावी साबित हो रही है. हालाँकि, ऑनलाइन गेमिंग का यह आकर्षण अब कई गंभीर समस्याओं का कारण बन रहा है. विभिन्न शोधों और मौजूदा सामाजिक घटनाओं के आधार पर यह स्पष्ट हो रहा है कि डिजिटल गेमिंग की लत बच्चों में अकेलापन, अवसाद, व्यवहारिक विकार, चिड़चिड़ापन, हाइपरएक्टिविटी और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याओं को जन्म दे रही है. पहले जहाँ बच्चों में मोटापा और निष्क्रियता मुख्य चिंता के विषय थे, अब स्थितियाँ कहीं अधिक जटिल और खतरनाक रूप ले चुकी हैं. गेमिंग की लत से बच्चों में बढ़ रहा नशे का खतरा जमीनी स्तर पर किए गए अवलोकनों से पता चलता है कि गेमिंग की लत से उत्पन्न तनाव और मानसिक दबाव बच्चों को नशे की ओर धकेल रहा है. मादक पदार्थों, ड्रग्स और शराब की लत स्कूल स्तर पर ही तेजी से फैलती दिख रही है. चिंताजनक बात यह है कि कक्षा 10 तक पहुँचते-पहुँचते कई बच्चे किसी न किसी नशे के संपर्क में आ चुके होते हैं. अपराध की ओर बढ़ते कदम नशे की इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>डिजिटल युग में पश्चिमी नियंत्रण</strong></p>



<p><strong>बढ़ती तकनीकी निर्भरता और ऑनलाइन गेमिंग</strong> <strong>का प्रचलन</strong></p>



<p><strong>ई.रवि आनंद </strong></p>



<p>आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक ढाँचे के बीच बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य में चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता के व्यस्त होते जीवन और तकनीक के बढ़ते उपयोग ने बच्चों का एक बड़ा हिस्सा स्क्रीन पर निर्भर बना दिया है. टीवी, मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर बच्चों के लिए मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग सबसे अधिक आकर्षक और प्रभावी साबित हो रही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/2c6f8fa7-4a75-4c17-ac25-01c7735833f1-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-93042" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/2c6f8fa7-4a75-4c17-ac25-01c7735833f1-scaled.jpeg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/11/2c6f8fa7-4a75-4c17-ac25-01c7735833f1-650x366.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/11/2c6f8fa7-4a75-4c17-ac25-01c7735833f1-1536x864.jpeg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>हालाँकि, ऑनलाइन गेमिंग का यह आकर्षण अब कई गंभीर समस्याओं का कारण बन रहा है. विभिन्न शोधों और मौजूदा सामाजिक घटनाओं के आधार पर यह स्पष्ट हो रहा है कि डिजिटल गेमिंग की लत बच्चों में <strong>अकेलापन</strong><strong>, </strong><strong>अवसाद</strong><strong>, </strong><strong>व्यवहारिक विकार</strong><strong>, </strong><strong>चिड़चिड़ापन</strong><strong>, </strong><strong>हाइपरएक्टिविटी और सामाजिक अलगाव</strong> जैसी समस्याओं को जन्म दे रही है. पहले जहाँ बच्चों में मोटापा और निष्क्रियता मुख्य चिंता के विषय थे, अब स्थितियाँ कहीं अधिक जटिल और खतरनाक रूप ले चुकी हैं.</p>



<p><strong>गेमिंग की लत से बच्चों में बढ़ रहा नशे का खतरा</strong><strong></strong></p>



<p>जमीनी स्तर पर किए गए अवलोकनों से पता चलता है कि गेमिंग की लत से उत्पन्न तनाव और मानसिक दबाव बच्चों को नशे की ओर धकेल रहा है. मादक पदार्थों, ड्रग्स और शराब की लत स्कूल स्तर पर ही तेजी से फैलती दिख रही है. चिंताजनक बात यह है कि कक्षा 10 तक पहुँचते-पहुँचते कई बच्चे किसी न किसी नशे के संपर्क में आ चुके होते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/c38e9f59-5570-480e-b9e3-7c15930f56ac-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-93043" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/c38e9f59-5570-480e-b9e3-7c15930f56ac-scaled.jpeg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/11/c38e9f59-5570-480e-b9e3-7c15930f56ac-650x366.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/11/c38e9f59-5570-480e-b9e3-7c15930f56ac-1536x864.jpeg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>अपराध की ओर बढ़ते कदम</strong><strong></strong></p>



<p>नशे की इस आदत को पूरा करने के लिए बच्चे चोरी, स्नैचिंग और यहाँ तक कि साइबर-जालसाजी जैसी गतिविधियों में शामिल होते पाए जा रहे हैं. कई मामलों में देखा गया है कि किशोर वित्तीय धोखाधड़ी में लिप्त अपराधी गिरोहों का आसानी से हिस्सा बन जाते हैं. विशेषज्ञ इसे “मोरल ब्रेकडाउन” यानी नैतिक पतन की स्थिति बताते हैं, जहाँ बच्चे सही-गलत के बुनियादी अंतर को भी नजरअंदाज करने लगते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="263" height="191" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/images-81.jpeg" alt="" class="wp-image-93044" style="width:436px;height:auto"/></figure>



<p>समाजशास्त्रियों के अनुसार, बच्चों में नशे और अपराध की ओर बढ़ती यह प्रवृत्ति आने वाले समय में गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले सकती है. यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या न केवल बच्चों के भविष्य, बल्कि पूरे समाज की संरचना को प्रभावित कर सकती है. और इन सब के मूल में हैं technology तकनीक</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>पुरानी तकनीक</strong><strong>, </strong><strong>नया संकट: मनोरंजन की मशीन बनते बच्चे और समाज पर उभरता खतरा</strong></h3>



<p>तकनीक हमारे जीवन का हिस्सा कब बनी और कैसे आम जन तक पहुँचीयह समझने के लिए इतिहास में झाँकना जरूरी है. आज ट्रेन में सफर करना जितना सहज और सामान्य लगता है, उतना ही असंभव यह विचार 100 वर्ष  पहले के लोगों के लिए था. उस समय ट्रेनें आम जनता नहीं, बल्कि साम्राज्यवादी शक्तियों की संपत्ति थीं. ब्रिटिश शासन के दौरान रेलवे का उपयोग मुख्यतः उपनिवेशों के संसाधनों के दोहन के लिए किया जाता था, न कि आम लोगों की सुविधा के लिए.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="790" height="440" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/U2JVDSH7QGTO7PIS2EZ7Y2QNGI.avif" alt="" class="wp-image-93045" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/U2JVDSH7QGTO7PIS2EZ7Y2QNGI.avif 790w, https://www.patnanow.com/assets/2025/11/U2JVDSH7QGTO7PIS2EZ7Y2QNGI-650x362.avif 650w" sizes="auto, (max-width: 790px) 100vw, 790px" /></figure>



<p>स्टीम इंजन के जनक ने संभवतः यह कभी नहीं सोचा होगा कि उनका आविष्कार एक दिन दुनिया भर के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाएगा. लेकिन इतिहास का सिद्धांत स्पष्ट है- <strong>जब किसी तकनीक में विश्व की महाशक्तियाँ निवेश करती हैं</strong><strong>, </strong><strong>उसका सर्वाधिक लाभ पहले वे स्वयं उठाती हैं</strong>, और जब उसकी रणनीतिक उपयोगिता घटने लगती है, तब वह तकनीक धीरे-धीरे आम जन के हाथों पहुँचती है.</p>



<p>आज हम ट्रेन में बैठकर खुश होते हैं, पर उसके पीछे शताब्दियों की राजनीति, नियंत्रण और तकनीकी निवेश की कहानी दबी हुई है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>टेक्नोलॉजी नई नहीं होती</strong><strong>, </strong><strong>केवल उसका उपयोग बदलता है</strong></h3>



<p>आज हम जिस युग में जी रहे हैं, उसे सामान्यतः “संचार क्रांति” का युग कहा जाता है. मोबाइल, लैपटॉप, 5G यह सब हमें नई और अत्याधुनिक तकनीक प्रतीत होती है, जबकि वास्तविकता यह है कि टेलीफोन, ई-मेल, GPS, सिमुलेशन, उपग्रह तकनीक, सुपर कंप्यूटर इन सभी का जन्म कई दशक पहले हो चुका था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="318" height="159" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/images-79.jpeg" alt="" class="wp-image-93046" style="width:578px;height:auto"/></figure>



<p>दुनिया कभी अमेरिका जैसे देशों की ओर ताकती थी GPS लोकेशन के लिए, सैटेलाइट तस्वीरों के लिए,<br>संचार तकनीक के लिए. दुनिया भर की सेनाएँ और सरकारें इन तकनीकों पर निर्भर थीं. लेकिन जब इन तकनीकों की <em>रणनीतिक महत्वता</em> &nbsp;कम होने लगी, तब इन्हें सार्वजनिक उपयोग के लिए जारी किया गया. वही GPS, जो कभी युद्धक्षेत्रों में प्रयोग होता था, आज टैक्सी बुलाने और खाना ऑर्डर करने का साधन बन चुका है. वही सैटेलाइट तकनीक अब मोबाइल गेम्स में “रियल वर्ल्ड मैप” दिखा रही है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>तकनीक मनोरंजन बनकर आई</strong><strong> </strong><strong>और अब संकट बनकर उभर रही है</strong></h3>



<p></p>



<p>जब अत्याधुनिक तकनीक आम आदमी तक पहुँची, तो उसका सबसे तेज़ विकास मनोरंजन के क्षेत्र में हुआ. मोबाइल फोन, हाई-स्पीड इंटरनेट और गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म बच्चों और युवाओं के लिए एक आसान ‘डोपामिन मशीन’ बन गए.</p>



<p>लेकिन यही मनोरंजन अब समाज के लिए गंभीर समस्या का रूप ले रहा है.</p>



<p>विशेषज्ञों की मानें तो<br><strong>• गेमिंग की लत,<br>• बिना रोक-टोक स्क्रीन टाइम,<br>• डिजिटल निर्भरता</strong></p>



<p>बच्चों में मानसिक और सामाजिक क्षरण का कारण बन रहे हैं. पहले मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता बड़ी समस्याएँ थीं, पर अब यह <strong>नशे, </strong><strong>अकेलेपन, </strong><strong>व्यवहारिक विकार, </strong><strong>सामाजिक अलगाव और अपराध</strong> जैसे खतरनाक रूप ले चुका है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="266" height="189" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/11/19a02757-566e-4f4f-8ce6-7783e029a29b.jpeg" alt="" class="wp-image-93047" style="width:425px;height:auto"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>&nbsp;“</strong><strong>भारतीय तरीका</strong><strong>”: </strong><strong>विकास भी</strong><strong>, </strong><strong>पर नैतिकता के साथ</strong></h2>



<p>अब सवाल उठता है &#8211; इससे उबरने का रास्ता क्या है?</p>



<p>जवाब सामने है, लेकिन उसे पहचानना कठिन है.<br>क्योंकि वह जवाब उस दर्शन में छिपा है जिस पर सदियों से धूल जमी हुई है &#8211; <strong>भारत का उन्नति-दर्शन</strong>, “Indian Way of Development”.</p>



<p>भारत ने शून्य से लेकर खगोल विज्ञान तक अनगिनत खोजें कीं.<br>परंतु इन सबकी विशेषता यह रही कि <strong>भारतीय विकास ने हमेशा नैतिकता को केंद्र में रखा</strong>.<br>किसी भी तकनीक, किसी भी ज्ञान का उपयोग समाज के हित में होगा या नहीं, इसका विचार पहले से किया जाता था. इसलिए भारत की कोई खोज कभी समाज के लिए संकट नहीं बनी.</p>



<p>यह समय है कि हम <strong>सनातन मूल्यों</strong>, भारतीय ज्ञान-परंपरा और उसके नैतिक ढांचे को फिर से खोजें, पढ़ें, समझें और समाज में प्रसारित करें.</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>अंतिम चेतावनी</strong></h2>



<p>समय का चक्र लगातार चल रहा है.यदि मानव स्वयं को अनुशासित नहीं करता, यदि तकनीक की दिशा और उपयोग पर नियंत्रण नहीं रखता, तो समय उसे कुचलते हुए आगे निकल जाएगा.मानवता का भविष्य  आपका, मेरा, और इस ग्रह पर संपूर्ण मानव जाति का  तभी सुरक्षित है जब विकास के केंद्र में केवल प्रगति नहीं, <strong>नैतिकता और संयम</strong> भी हों.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्क्रीन के पीछे खो रहा है बचपन :डॉ.सरिता शिवांगी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/childhood-is-being-lost-behind-the-screen-dr-sarita-shivangi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Jan 2025 10:44:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
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					<description><![CDATA[सवाल सिर्फ इतना है—अपने बच्चों के बचपन को कैसे बचाते हैं हम ? क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट,पटना आज की डिजिटल दुनिया में, मोबाइल फोन सिर्फ एक ज़रूरत नहीं, बल्कि एक आदत बन चुकी हैं. यह आदत, खासकर किशोरों के लिए, एक साइलेंट एपिडेमिक के रूप में उभर रही है. यह सिर्फ स्क्रीन टाइम का सवाल नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के भावनात्मक और मानसिक विकास का मुद्दा है. एक 21 वर्षीय आदित्य की कहानी लेते हैं.वह हर सुबह अपने फोन के अलार्म से उठता है, पर उसका “गुड मॉर्निंग” पहले उसकी इंस्टा स्टोरीज देखकर होता है, न कि घरवालों से बात करके. यह एक इंसान की नहीं, पूरी जेनरेशन की कहानी बन चुकी है. वर्चुअल दुनिया इतनी ब्राइट लगती है कि रियल दुनिया का रंग फीका हो रहा है. नए समाधान की ज़रूरतआम समाधान जैसे स्क्रीन टाइम लिमिट करना या माता-पिता की निगरानी असरदार हैं, लेकिन अब नए और अनोखे तरीकों की ज़रूरत है: नया बचपन: एक बैलेंस की तलाशमोबाइल एडिक्शन एक आधुनिक समस्या है, लेकिन इसका समाधान पुरानी मान्यताओं में है—रिश्ते, रचनात्मकता और माइंडफुलनेस. किशोरों को यह सिखाना होगा कि टेक्नोलॉजी उनके नियंत्रण में है, न कि वे टेक्नोलॉजी के गुलाम हैं.स्क्रीन के पीछे की दुनिया जितनी भी Shiny हो, असली दुनिया का रंग उससे कहीं ज़्यादा Vibrant है. सवाल सिर्फ इतना है—अपने बच्चों के बचपन को कैसे बचाते हैं हम ? मोबाइल एडिक्शन से जुड़े कुछ लक्षणः  pncdesk]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p> </p>



<p></p>



<p></p>



<p><strong>सवाल सिर्फ इतना है—अपने बच्चों के बचपन को कैसे बचाते हैं हम ?</strong><br><br><strong>क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट</strong>,<strong>पटना</strong></p>



<p>आज की डिजिटल दुनिया में, मोबाइल फोन सिर्फ एक ज़रूरत नहीं, बल्कि एक आदत बन चुकी हैं. यह आदत, खासकर किशोरों के लिए, एक साइलेंट एपिडेमिक के रूप में उभर रही है. यह सिर्फ स्क्रीन टाइम का सवाल नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के भावनात्मक और मानसिक विकास का मुद्दा है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="822" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/IMG-20250109-WA0007-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88623" style="width:594px;height:auto" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/IMG-20250109-WA0007-scaled.jpg 822w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/IMG-20250109-WA0007-522x650.jpg 522w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/IMG-20250109-WA0007-1233x1536.jpg 1233w" sizes="auto, (max-width: 822px) 100vw, 822px" /></figure>



<p>एक 21 वर्षीय आदित्य की कहानी लेते हैं.वह हर सुबह अपने फोन के अलार्म से उठता है, पर उसका “गुड मॉर्निंग” पहले उसकी इंस्टा स्टोरीज देखकर होता है, न कि घरवालों से बात करके. यह एक इंसान की नहीं, पूरी जेनरेशन की कहानी बन चुकी है. वर्चुअल दुनिया इतनी ब्राइट लगती है कि रियल दुनिया का रंग फीका हो रहा है.</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>मोबाइल एडिक्शन का मूल कारण केवल टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि हमारे समाज के बदलते पैटर्न हैं:
<ol class="wp-block-list">
<li><strong>FOMO सिंड्रोम: </strong>“फियर ऑफ मिसिंग आउट” यानी कुछ छूट जाने का डर, एक ऐसी मनोवैज्ञानिक स्थिति है जो किशोरों को हर वक्त सोशल मीडिया चेक करने के लिए मजबूर करती है.</li>



<li><strong>Validation की भूख</strong>: सोशल मीडिया के लाइक्स और कमेंट्स, आत्मसम्मान के नए मापदंड बन गए हैं.हर नोटिफिकेशन एक डोपामाइन किक देता है, जो उन्हें इस चक्र में फंसा देता है.</li>



<li><strong>माता-पिता का विकल्प</strong>: व्यस्त माता-पिता के लिए मोबाइल एक डिजिटल बेबीसिटर बन गया है.बिना सोचे-समझे बचपन स्क्रीन के हवाले हो गया है.</li>



<li><strong>वास्तविक जुड़ाव की कमी</strong>: साथियों के साथ वास्तविक बातचीत की कमी का खालीपन मोबाइल भर रहा है. वर्चुअल चैट्स ने फिजिकल गैदरिंग्स को रिप्लेस कर दिया है.</li>
</ol>
</li>



<li>किशोरों पर मोबाइल एडिक्शन के मानसिक और शारीरिक प्रभाव गहराई से महसूस किए जा रहे हैं:</li>



<li>मानसिक स्वास्थ्य पर असर: चिंता, डिप्रेशन और आत्मसम्मान की कमी जैसे मुद्दे बढ़ रहे हैं.</li>



<li>नींद में बाधा: लेट-नाइट स्क्रोलिंग और गेमिंग मेलाटोनिन प्रोडक्शन को डिस्टर्ब करती है, जिससे ग्रोथ और फोकस दोनों प्रभावित होते हैं.</li>



<li><strong>शैक्षिक प्रदर्शन में गिरावट</strong>: मोबाइल डिस्टर्बेंस का सीधा असर एकाग्रता और सीखने की क्षमता पर पड़ता है.</li>



<li><strong>क्रिएटिविटी की कमी:</strong> गेम्स और वीडियोज़ कंज्यूम करने में उनकी कल्पनाशक्ति और समस्या-समाधान कौशल कमजोर हो रहे हैं.</li>
</ul>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="225" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/mixcollage-20-feb-2024-01-51-pm-9500-1708417300.webp" alt="" class="wp-image-88624" style="width:831px;height:auto"/></figure>



<p><strong>नए समाधान की ज़रूरत</strong><br>आम समाधान जैसे स्क्रीन टाइम लिमिट करना या माता-पिता की निगरानी असरदार हैं, लेकिन अब नए और अनोखे तरीकों की ज़रूरत है:</p>



<ol class="wp-block-list">
<li><strong>टेक-फ्री ज़ोन्स</strong>: हर घर में कुछ जगह जैसे डाइनिंग टेबल और बेडरूम को “नो-मोबाइल ज़ोन” घोषित करें.</li>



<li><strong>वास्तविक दुनिया की हॉबीज़</strong>: आर्ट, स्पोर्ट्स, या गार्डनिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दें जो उनके हाथों और दिमाग दोनों को व्यस्त रखें.</li>



<li><strong>डिजिटल डिटॉक्स चैलेंज: साप्ताहिक डिटॉक्स चैलेंज रखें जिसमें पूरी फैमिली हिस्सा ले और एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं.</strong></li>



<li><strong>भावनात्मक जागरूकता:</strong> किशोरों को आत्मसम्मान और भावनात्मक स्थिरता सिखाने के लिए वर्कशॉप्स या माइंडफुलनेस प्रैक्टिसेस शुरू करें.</li>



<li><strong>माता-पिता की भूमिका</strong>: बच्चों से अपेक्षा करने के बजाय, माता-पिता पहले अपना स्क्रीन टाइम लिमिट करके एक उदाहरण पेश करें.</li>
</ol>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="538" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/mbbrd-min-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88626" style="width:1067px;height:auto" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/mbbrd-min-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/mbbrd-min-650x341.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>नया बचपन: एक बैलेंस की तलाश</strong><br>मोबाइल एडिक्शन एक आधुनिक समस्या है, लेकिन इसका समाधान पुरानी मान्यताओं में है—रिश्ते, रचनात्मकता और माइंडफुलनेस. किशोरों को यह सिखाना होगा कि टेक्नोलॉजी उनके नियंत्रण में है, न कि वे टेक्नोलॉजी के गुलाम हैं.<br>स्क्रीन के पीछे की दुनिया जितनी भी Shiny हो, असली दुनिया का रंग उससे कहीं ज़्यादा Vibrant है. सवाल सिर्फ इतना है—अपने बच्चों के बचपन को कैसे बचाते हैं हम ?</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/IMG-20250109-WA0008-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88627" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/IMG-20250109-WA0008-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/IMG-20250109-WA0008-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/IMG-20250109-WA0008-1536x864.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>मोबाइल एडिक्शन से जुड़े कुछ लक्षणः </strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>अकेले होने पर बोर होकर फ़ोन का इस्तेमाल करना.</li>



<li>रात में फ़ोन चेक करने के लिए कई बार उठना.</li>



<li>फ़ोन से दूर होने पर गुस्सा या परेशान होना.</li>



<li>नौकरी या पढ़ाई के दौरान फ़ोन देखना.</li>



<li>घरवालों का फ़ोन को लेकर चिंतित होना.</li>
</ul>



<p><strong>pncdesk</strong></p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नल जल योजना को अविलम्ब लागु करने और धांधली बरतने वालों पर कार्रवाई करने की मांग</title>
		<link>https://www.patnanow.com/karravaee-ki-mang/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Jul 2022 06:01:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[ARA]]></category>
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		<category><![CDATA[Child]]></category>
		<category><![CDATA[Nal jal yojna]]></category>
		<category><![CDATA[Ward 21]]></category>
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					<description><![CDATA[आरा,19 जुलाई. वार्ड नंबर 21 के वार्ड पार्षद अधिवक्ता अमित कुमार गुप्ता उर्फ बंटी ने अपने वार्ड में नल जल योजना शेष बचे हुए क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाकर नल कनेक्शन करने,नल जल योजना के दौरान उखाड़े गए रोड को बनाने और घटिया काम की जांच करने का मांग जिलाधिकारी भोजपुर को लिखित पत्र देकर किया. वार्ड पार्षद सह अधिवक्ता अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि उनके वार्ड में नल जल योजना का काम बहुत ही घटिया किस्म का किया गया है. महादेवा रोड बिस्कुट गली मगहिया टोली, चित्र टोली रोड, सुंदर मार्केट, गुरु नानक मार्केट में अभी तक पाइप लाइन नहीं दिखाया गया है. उन इलाकों में पाइपलाइन बिछाया जाए भीषण गर्मी का मौसम चल रहा है सूखे की आशंका है. वार्ड नंबर 21 में गरीब महादलित की जनसंख्या ज्यादा है. छठ घाट पानी टंकी से पाइपलाइन जिला स्कूल तक आ गया है. उन्होंने पाइपलाइन को गोला मोहल्ला मोड़ तक बिछाकर तुरंत वार्ड नंबर 21में पानी सप्लाई की मांग की है. लेकिन आलम यह है कि विभाग के अंदर मची भ्रष्टाचार, उदासीनता और अमानवीय सोच के चलते वार्ड नंबर 21 में अभी तक पानी नहीं आ पाया है. PNBC .]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आरा,19 जुलाई. वार्ड नंबर 21 के वार्ड पार्षद अधिवक्ता अमित कुमार गुप्ता उर्फ बंटी ने अपने वार्ड में नल जल योजना शेष बचे हुए क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाकर नल कनेक्शन करने,नल जल योजना के दौरान उखाड़े गए रोड को बनाने और घटिया काम की जांच करने का मांग जिलाधिकारी भोजपुर को लिखित पत्र देकर किया.</p>



<p>वार्ड पार्षद सह अधिवक्ता अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि उनके वार्ड में नल जल योजना का काम बहुत ही घटिया किस्म का किया गया है. महादेवा रोड बिस्कुट गली मगहिया टोली, चित्र टोली रोड, सुंदर मार्केट, गुरु नानक मार्केट में अभी तक पाइप लाइन नहीं दिखाया गया है. उन इलाकों में पाइपलाइन बिछाया जाए भीषण गर्मी का मौसम चल रहा है सूखे की आशंका है. वार्ड नंबर 21 में गरीब महादलित की जनसंख्या ज्यादा है. छठ घाट पानी टंकी से पाइपलाइन जिला स्कूल तक आ गया है. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="300" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Ward-21-complaint.jpg" alt="" class="wp-image-64616" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Ward-21-complaint.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/07/PNC_Ward-21-complaint-350x162.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उन्होंने पाइपलाइन को गोला मोहल्ला मोड़ तक बिछाकर तुरंत वार्ड नंबर 21में पानी सप्लाई की मांग की है. लेकिन आलम यह है कि विभाग के अंदर मची भ्रष्टाचार, उदासीनता और अमानवीय सोच के चलते वार्ड नंबर 21 में अभी तक पानी नहीं आ पाया है. </p>



<p><strong>PNBC</strong></p>



<p>.</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कैसे बचाएं हीट स्ट्रोक से बच्चों को !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bachho-ko-heat-stroke-se-kaise-bachayen/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Apr 2022 13:22:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[ARA]]></category>
		<category><![CDATA[BHOJPUR]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Child]]></category>
		<category><![CDATA[Child health]]></category>
		<category><![CDATA[Heat stroke]]></category>
		<category><![CDATA[Summer]]></category>
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					<description><![CDATA[स्कूली बच्चों को हीट स्ट्रोक से रखने के लिये देना होगा विशेष ध्यान बच्चों को स्कूल जाने के पूर्व तरह आहार का करायें सेवन, मौसमी फल भी जरूरी शारीरिक समस्या होने पर तुरन्त बच्चे को निकट के सरकारी अस्पताल ले जाएं आरा, 28 अप्रैल &#124; जिले में बढ़ती गर्मी के कारण लोगों को हीट स्ट्रोक का सताने लगा है। दोपहर होते ही सड़के सुनसान होने लगी है। मौसम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 42 डिग्री रहा। लेकिन, गर्म पछुआ हवाओं के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। खासतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चे लू की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं। हीट स्ट्रोक के कारण बच्चे डिहाइड्रेशन के भी शिकार हो सकते हैं। ऐसे में बच्चों को गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से बचाने और उन्हें इस भीषण गर्मी में ठंडा रखने के लिए कुछ सुपाच्य और हल्के आहार देना जरूरी है। जिसका इस्तेमाल कर बच्चों को हीट स्ट्रोक के खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है। साथ ही कुछ जरूरी एहतियात भी बरतना जरूरी है, ताकि लू बच्चों को अपनी चपेट में न ले सके। समय समय पर पानी पीते रहने के लिये प्रेरित करें : अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, स्कूल जाने से पहले बच्चे को जूस, नींबू पानी, ग्लूकोज जैसे तरल पदार्थ जरूर दें। स्कूल से आने के बाद थोड़ी देर रुक कर सबसे पहले फिर से ग्लूकोज, नींबू पानी या जूस दें। स्कूल बैग में बच्चे के लिए पानी का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>स्कूली बच्चों को हीट स्ट्रोक से रखने के लिये देना होगा विशेष ध्यान</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="426" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0012.jpg" alt="" class="wp-image-61336" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0012.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0012-350x229.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<ul class="wp-block-list"><li><strong>बच्चों को स्कूल जाने के पूर्व तरह आहार का करायें सेवन, मौसमी फल भी जरूरी</strong></li><li><strong>शारीरिक समस्या होने पर तुरन्त बच्चे को निकट के सरकारी अस्पताल ले जाएं</strong></li><li>आरा, 28 अप्रैल | जिले में बढ़ती गर्मी के कारण लोगों को हीट स्ट्रोक का सताने लगा है। दोपहर होते ही सड़के सुनसान होने लगी है। मौसम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 42 डिग्री रहा। लेकिन, गर्म पछुआ हवाओं के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। खासतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चे लू की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं। हीट स्ट्रोक के कारण बच्चे डिहाइड्रेशन के भी शिकार हो सकते हैं। ऐसे में बच्चों को गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से बचाने और उन्हें इस भीषण गर्मी में ठंडा रखने के लिए कुछ सुपाच्य और हल्के आहार देना जरूरी है। जिसका इस्तेमाल कर बच्चों को हीट स्ट्रोक के खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है। साथ ही कुछ जरूरी एहतियात भी बरतना जरूरी है, ताकि लू बच्चों को अपनी चपेट में न ले सके।</li><li><strong>समय समय पर पानी पीते रहने के लिये प्रेरित करें :</strong></li><li>अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, स्कूल जाने से पहले बच्चे को जूस, नींबू पानी, ग्लूकोज जैसे तरल पदार्थ जरूर दें। स्कूल से आने के बाद थोड़ी देर रुक कर सबसे पहले फिर से ग्लूकोज, नींबू पानी या जूस दें। स्कूल बैग में बच्चे के लिए पानी का बॉटल हो इस बात का ध्यान रखें। वहीं, स्कूल में समय समय पर पानी पीते रहने के लिये प्रेरित करें। स्कूल से छुट्टी होने के बाद के लिय बच्चों को टोपी और आंखों पर धूप का चश्मा उपलब्ध करायें। यदि यह महसूस हो कि गर्मी के कारण बच्चे की तबीयत खराब हो रही है, तो तुरंत आम पन्ना या ओआरएस बना कर पिलाएं। साथ ही, उल्टी, दस्त या बुखार की शिकायत हो तो डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें, सभी सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क चिकित्सा सुविधा का लाभ उठायें।</li><li><br><strong>बच्चों के दैनिक आहार में करें बदलाव:</strong><br>मौसम के हिसाब से आहार परिवर्तन करना हितकर होता है। विशेष रूप से बच्चों को कुछ चीजों के सेवन के लिए प्रेरित करना जरुरी होता है। नींबू पानी ताजा नींबू के रस, पानी, चीनी और नमक से तैयार किया जाता है। नींबू कई आवश्यक विटामिन और खनिजों जैसे विटामिन सी, विटामिन बी 6 और पोटैशियम से भरपूर होते हैं। शिकंजी भारत का प्रसिद्ध पारंपरिक नींबू पेय है। आम में 80 प्रतिशत से अधिक पानी की मात्रा होती और गर्मियों के दौरान यह एक आइडियल फूड ऑप्शन है। वहीं, छाछ को दही, पानी और नमक से बनाया जाता है। छाछ पाचन में सुधार करने में भी मदद करती है। तरबूज में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होने के कारण गर्मियों में हाइड्रेटेड रहने में मदद करता है। तरबूज साइट्रलाइन नामक अमीनो एसिड से भी भरपूर होता है। यह एक आवश्यक अमीनो एसिड है, जो हमारे दिल और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद होता है।सके अलावा सत्तू खाने या पीने से लू लगने का खतरा काफी कम हो जाता है। लेकिन, सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चों को गर्म हवा या दोपहर में घर के बाहर न जाने दें।</li></ul>





<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="608" height="505" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0009.jpg" alt="" class="wp-image-61335" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0009.jpg 608w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0009-350x291.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 608px) 100vw, 608px" /></figure>



<p>आरा से<strong> ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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