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	<title>Child nutrition &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>बच्चों को खिलाएं ये आहार, नही होगा कुपोषण !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/is-aahaar-se-nahi-hoga-kuposhan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 May 2022 13:12:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
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					<description><![CDATA[छह माह के बाद शिशुओं को अनुपूरक आहार देना अनिवार्य : डीपीओ कुपोषण रोकने में अनुपूरक आहार की अहम भूमिका,शारीरिक व मानसिक विकास के लिए जरूरीआंगनबाड़ी केन्द्रों में अन्नप्रासन एवं टीएचआर वितरण के जरिए अनुपूरक आहार पर बल आरा, 19 मई. बच्चों को स्वथ्य रखने के लिए जरूरी है उन्हे अच्छे आहार देना. क्योंकि इसकी कमी के कारण ही बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं. बाल कुपोषण को दूर करने के लिए भोजपुर जिला में विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं. बाल कुपोषण को कम करने में अनुपूरक आहार की अहम भूमिका होती है. छह माह तक शिशु का वजन लगभग दो गुना बढ़ जाता एवं एक वर्ष पूरा होने तक वजन लगभग तीन गुना एवं लंबाई जन्म से लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाती है. जीवन के दो वर्षों में तंत्रिका प्रणाली एवं मस्तिष्क विकास के साथ सभी अंगों में संरचनात्मक एवं कार्यात्मक दृष्टिकोण से बहुत तेजी से विकास होता है. इसके लिए अतिरिक्त पोषक आहार की जरूरत होती है. इसलिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर माह 19 तारीख को 6 माह पूरे कर लिए शिशुओं का अन्नप्राशन कराया जाता है. गुरुवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर शिशुओं के अन्नप्राशन कराया गया. साथ ही, शिशु के परिजनों को शिशुओं के लिए स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार उपयोग करने की जानकारी दी गई. माह में एक बार अन्नप्राशन दिवस का होता है आयोजन आईसीडीएस डीपीओ माला कुमारी ने बताया, छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार की जरूरत होती है. इस दौरान शिशु के शरीर एवं मस्तिष्क का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong><em>छह माह के बाद शिशुओं को अनुपूरक आहार देना अनिवार्य : डीपीओ</em></strong></p>



<p><strong>कुपोषण रोकने में अनुपूरक आहार की अहम भूमिका,<br>शारीरिक व मानसिक विकास के लिए जरूरी<br>आंगनबाड़ी केन्द्रों में अन्नप्रासन एवं टीएचआर वितरण के जरिए अनुपूरक आहार पर बल</strong></p>



<p>आरा, 19 मई. बच्चों को स्वथ्य रखने के लिए जरूरी है उन्हे अच्छे आहार देना. क्योंकि इसकी कमी के कारण ही बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं. बाल कुपोषण को दूर करने के लिए भोजपुर जिला में विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं. बाल कुपोषण को कम करने में अनुपूरक आहार की अहम भूमिका होती है. छह माह तक शिशु का वजन लगभग दो गुना बढ़ जाता एवं एक वर्ष पूरा होने तक वजन लगभग तीन गुना एवं लंबाई जन्म से लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाती है. जीवन के दो वर्षों में तंत्रिका प्रणाली एवं मस्तिष्क विकास के साथ सभी अंगों में संरचनात्मक एवं कार्यात्मक दृष्टिकोण से बहुत तेजी से विकास होता है. इसके लिए अतिरिक्त पोषक आहार की जरूरत होती है. इसलिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर माह 19 तारीख को 6 माह पूरे कर लिए शिशुओं का अन्नप्राशन कराया जाता है. गुरुवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर शिशुओं के अन्नप्राशन कराया गया. साथ ही, शिशु के परिजनों को शिशुओं के लिए स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार उपयोग करने की जानकारी दी गई.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0030.jpg" alt="" class="wp-image-62508" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0030.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0030-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>माह में एक बार अन्नप्राशन दिवस का होता है आयोजन</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0033.jpg" alt="" class="wp-image-62509" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0033.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0033-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आईसीडीएस डीपीओ माला कुमारी ने बताया, छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार की जरूरत होती है. इस दौरान शिशु के शरीर एवं मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है. इसे ध्यान में रखते हुए सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर माह में एक बार अन्नप्राशन दिवस आयोजित किया जाता है. जिसमें छह माह के शिशुओं को अनुपूरक आहार खिलाया जाता है. इसके साथ ही उनके माता-पिता को इसके विषय में जानकारी दी जाती है. इसके अलावा सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर हर माह टेक होम राशन (टीएचआर) का वितरण किया जाता है. जिसमें छह महीने से तीन वर्ष के शिशुओं के लिए चावल, दाल, सोयाबड़ी अथवा अंडा लाभार्थियों को उपलब्ध कराया जाता है. अन्नप्राशन दिवस पर लोगों को सेविकाओं द्वारा शिशुओं के लिए अनुपूरक आहार बनाने के विषय में भी जानकारी दी जाती है जिससे उसे संतुलित भोजन उपलब्ध हो सके.</p>



<p><strong>घर में मौजूद खाद्य पदार्थों का उपयोग करें</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0028.jpg" alt="" class="wp-image-62510" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0028.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0028-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>राष्ट्रीय पोषण अभियान जिला समन्वयक पियूष पराग यादव ने बताया, शिशु के लिए प्रारंभिक आहार तैयार करने के लिए घर में मौजूद मुख्य खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है. सूजी, गेहूं का आटा, चावल, रागा, बाजरा आदि की सहायता से पानी या दूध में दलिया बनाया जा सकता है. बच्चे के आहार में चीनी अथवा गुड़ को भी शामिल करना चाहिए क्योंकि उन्हें अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है. 6 से 9 माह तक के बच्चों को गाढ़े एवं सुपाच्य दलिया खिलाना चाहिए. वसा की आपूर्ति के लिए आहार में छोटा चम्मच घी या तेल डालना चाहिये. दलिया के अलावा अंडा, मछली, फलों एवं सब्जियों जैसे संरक्षक आहार शिशुओं के विकास में सहायक होते हैं.</p>



<p><strong>इन बातों का रखें ख्याल:</strong><br>• 6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें<br>• स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें<br>• शिशु को मल्टिंग आहार (अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें<br>• माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है<br>• शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ी थोड़ी मात्रा करके कई बार खिलाएं</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>उमस भरी गर्मी से बच्चों में बढ़ सकता है डायरिया का खतरा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/umas-bhari-garmi-badha-sakti-hai-dayariya-ka-khatara/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 May 2022 06:17:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
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					<description><![CDATA[कुशल प्रबंधन नहीं हो तो डायरिया हो सकता है जानलेवा डायरिया के लक्षणों को जानकर एवं सही समय पर उचित प्रबंधन बेहद जरूरी आरा,14 मई. जिले के लोगों को हीट वेव से राहत तो मिल गई है, लेकिन अब बारिश के बाद तल्ख धूप के कारण उमस भरी गर्मी सताने लगी है. जिसके कारण लोगों का जीना दुभर हो गया है. ऐसे मौसम में जरा सी लापरवाही बीमारियों को न्योता दे सकती है. ऐसी स्थिति में लोगों और सावधान रहने की जरूरत है विशेष रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों को. क्योंकि बदलते मौसम और उमस भरी गर्मी के दौरान बच्चों में डायरिया की शिकायत बढ़ जाती है. डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं. यहां तक कि इस दौरान कुशल प्रबंधन नहीं होने से यह जानलेवा भी हो जाता है. स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े भी इसे शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक मानते हैं. सही समय पर डायरिया के लक्षणों को जानने के बाद यदि सही समय पर उचित प्रबंधन कर लिया जाय तो बच्चों को इस गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है. बच्चों को डायरिया से बचाया जा सकता हैअपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, डायरिया के शुरुआती लक्षणों का ध्यान रख माताएं इसकी आसानी से पहचान कर सकती हैं. इससे केवल नवजातों को ही नहीं, बल्कि बड़े बच्चों को भी डायरिया से बचाया जा सकता है. लगातार पतले दस्त आना, बार-बार दस्त के साथ उल्टी का होना, प्यास [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>कुशल प्रबंधन नहीं हो तो डायरिया हो सकता है जानलेवा</strong></p>



<p><strong>डायरिया के लक्षणों को जानकर एवं सही समय पर उचित प्रबंधन बेहद जरूरी</strong></p>



<p>आरा,14 मई. जिले के लोगों को हीट वेव से राहत तो मिल गई है, लेकिन अब बारिश के बाद तल्ख धूप के कारण उमस भरी गर्मी सताने लगी है. जिसके कारण लोगों का जीना दुभर हो गया है. ऐसे मौसम में जरा सी लापरवाही बीमारियों को न्योता दे सकती है. ऐसी स्थिति में लोगों और सावधान रहने की जरूरत है विशेष रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों को. क्योंकि बदलते मौसम और उमस भरी गर्मी के दौरान बच्चों में डायरिया की शिकायत बढ़ जाती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="334" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0031.jpg" alt="" class="wp-image-62264" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0031.jpg 500w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0031-350x234.jpg 350w" sizes="(max-width: 500px) 100vw, 500px" /></figure>



<p><strong>डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक निर्जलीकरण </strong>(डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं. यहां तक कि इस दौरान कुशल प्रबंधन नहीं होने से यह जानलेवा भी हो जाता है. स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े भी इसे शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक मानते हैं. सही समय पर डायरिया के लक्षणों को जानने के बाद यदि सही समय पर उचित प्रबंधन कर लिया जाय तो बच्चों को इस गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="608" height="505" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0030.jpg" alt="" class="wp-image-62265" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0030.jpg 608w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0030-350x291.jpg 350w" sizes="(max-width: 608px) 100vw, 608px" /></figure>



<p><strong>बच्चों को डायरिया से बचाया जा सकता है</strong><br>अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, डायरिया के शुरुआती लक्षणों का ध्यान रख माताएं इसकी आसानी से पहचान कर सकती हैं. इससे केवल नवजातों को ही नहीं, बल्कि बड़े बच्चों को भी डायरिया से बचाया जा सकता है. लगातार पतले दस्त आना, बार-बार दस्त के साथ उल्टी का होना, प्यास बढ़ जाना, भूख का कम जाना या खाना नहीं खाना, दस्त के साथ हल्के बुखार का आना और कभी- कभी स्थिति गंभीर हो जाने पर दस्त में खून भी आने लगता है. यहां तक की गंभीर डायरिया बच्चों या वयस्कों को जान का भी खतरा होने की संभावना रहती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="250" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0029.jpg" alt="" class="wp-image-62266" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0029.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0029-350x194.jpg 350w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p><strong>सेविका या आशा दीदी से करें संपर्क</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="426" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032-650x426.jpg" alt="" class="wp-image-62267" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032-650x426.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032-350x229.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032.jpg 684w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>डॉ. केएन सिन्हा ने बताया कि बार-बार डायरिया या दस्त होने से शरीर में डिहाइड्रेशन हो जाता है. जिसको दूर करने के लिए शिशुओं और बड़े बच्चों को ओरल रीहाइड्रेशन सोल्यूशन (ORS) का घोल पिलाएं. इससे दस्त के कारण पानी के साथ शरीर से निकले जरूरी एल्क्ट्रोलाइट्स (सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड एवं बाईकार्बोनेट) की कमी को दूर किया जा सकता है. माताएं अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका या अपने इलाके की आशा दीदी से संपर्क कर इस बात की जानकारी ले सकती हैं. साथ ही, उनसे ORS का घोल बनाने की विधि और किस उम्र के बच्चे को इसकी कितनी मात्रा व कितने बार दिया जाना है ये भी जान सकती हैं.</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिशुओं का क्या हो आहार, जानें आप</title>
		<link>https://www.patnanow.com/shishuon-ka-kya-ho-aahar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Jan 2021 13:57:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[BHOJPUR]]></category>
		<category><![CDATA[Child nutrition]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना में शिशु आहार]]></category>
		<category><![CDATA[शिशु आहार]]></category>
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					<description><![CDATA[भोजपुर जिला में 6 माह से ऊपर के शिशुओं का किया गया अन्नप्राशन• ऊपरी आहार है सुपोषण की कुंजी• सेविकाओं ने बताए ऊपरी आहार के महत्त्वआरा. कुपोषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाये जा रहे हैं&#124; सभी को पोषित करने तथा पोषण का सन्देश घर घर पहुँचाने के लिए सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जाता है&#124; इसी क्रम में मंगलवार को जिले के आंगनवाडी केन्द्रों पर 6 माह से ऊपर के शिशुओं का अन्नप्राशन किया गया&#124; जिले के क्रियाशील आंगनवाडी केन्द्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया&#124; पोषक क्षेत्र के शिशुओं को खीर खिलाकर इसकी शुरुआत की गयी तथा धात्री माताओं को भी पूरक पोषाहार के विषय में एवं साफ़- सफाई के बारे में जानकारी दी गयी&#124; जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) रश्मि चौधरी ने बताया कि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए 6 माह तक सिर्फ स्तनपान एवं इसके बाद स्तनपान के साथ पूरक पोषाहार बहुत जरूरी है&#124; उन्होंने इस दौरान घर एवं माँ- शिशु की साफ़ सफाई की जरूरत पर जोर दिया&#124; उन्होंने बताया कि अनुपूरक आहार शिशु के आने वाले जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है&#124; 6 माह से 23 माह तक के बच्चों के लिए यह अति आवश्यक है&#124; 6 से 8 माह के बच्चों को दिन भर में 2 से 3 बार एवं 9 से 11 माह के बच्चों को 3 से 4 बार पूरक आहार तथा 12 माह से 2 साल तक के बच्चों को घर में पकने वाला भोजन भी देना चाहिए&#124; इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>भोजपुर जिला में 6 माह से ऊपर के शिशुओं का किया गया अन्नप्राशन</strong><br>• <em><strong>ऊपरी आहार है सुपोषण की कुंजी<br>• सेविकाओं ने बताए ऊपरी आहार के महत्त्व</strong></em><br>आरा. कुपोषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाये जा रहे हैं| सभी को पोषित करने तथा पोषण का सन्देश घर घर पहुँचाने के लिए सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जाता है| इसी क्रम में मंगलवार को जिले के आंगनवाडी केन्द्रों पर 6 माह से ऊपर के शिशुओं का अन्नप्राशन किया गया| जिले के क्रियाशील आंगनवाडी केन्द्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया| पोषक क्षेत्र के शिशुओं को खीर खिलाकर इसकी शुरुआत की गयी तथा धात्री माताओं को भी पूरक पोषाहार के विषय में एवं साफ़- सफाई के बारे में जानकारी दी गयी|</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/01/IMG-20210119-WA0025.jpg" alt="" class="wp-image-50621" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/01/IMG-20210119-WA0025.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/01/IMG-20210119-WA0025-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) रश्मि चौधरी ने बताया कि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए 6 माह तक सिर्फ स्तनपान एवं इसके बाद स्तनपान के साथ पूरक पोषाहार बहुत जरूरी है| उन्होंने इस दौरान घर एवं माँ- शिशु की साफ़ सफाई की जरूरत पर जोर दिया| उन्होंने बताया कि अनुपूरक आहार शिशु के आने वाले जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है| 6 माह से 23 माह तक के बच्चों के लिए यह अति आवश्यक है| 6 से 8 माह के बच्चों को दिन भर में 2 से 3 बार एवं 9 से 11 माह के बच्चों को 3 से 4 बार पूरक आहार तथा 12 माह से 2 साल तक के बच्चों को घर में पकने वाला भोजन भी देना चाहिए| इस दौरान शरीर एवं दिमाग का विकास तेजी से होना शुरू होता है| जिसके लिए स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की भी जरूरत होती है|</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/01/IMG-20210119-WA0023.jpg" alt="" class="wp-image-50622" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/01/IMG-20210119-WA0023.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2021/01/IMG-20210119-WA0023-263x350.jpg 263w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p><br><strong>घर में उपलब्ध सामग्रियों से ही शिशु को पूरी तरह पोषित रखा जा सकता-</strong><br>जिला के जगदीशपुर प्रखंड के आंगनवाड़ी केंद्र संख्या 143 की सेविका पूनम देवी ने बताया सभी बच्चों की माताओं को अनुपूरक आहार के महत्त्व के बारे में जानकारी दी गयी| उन्हें बताया गया कि घर में उपलब्ध सामग्रियों से ही शिशु को पूरी तरह पोषित रखा जा सकता है| माताओं को नियमित स्तनपान कराने की सलाह भी दी गयी|</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/01/IMG-20210119-WA0030.jpg" alt="" class="wp-image-50624" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/01/IMG-20210119-WA0030.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2021/01/IMG-20210119-WA0030-263x350.jpg 263w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p><br><strong>ऐसे दें बच्चों को पूरक आहार: </strong>6 माह से 8 माह के बच्चों के लिए नरम दाल, दलिया, दाल -चावल, दाल में रोटी मसलकर अर्ध ठोस (चम्मच से गिराने पर सरके, बहे नहीं नही) , खूब मसले साग एवं फल प्रतिदिन दो बार 2 से 3 भरे हुए चम्मच से देना चाहिए.| ऐसे ही 9 माह से 11 माह तक के बच्चों को प्रतिदिन 3 से 4 बार एवं 12 माह से 2 वर्ष की अवधि में घर पर पका पूरा खाना एवं धुले धुले एवं कटे फल को प्रतिदिन भोजन एवं नास्ते में देना चाहिए.</p>



<p><br><strong>पूरक पोषाहार है जरूरी</strong> : समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के बेहतर पोषण के लिए पोषाहार वितरित किया जाता है.| पूरक पोषाहार के विषय में सामुदायिक जागरूकता के अभाव आभाव में बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं|. इससे बच्चे की शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी अवरुद्ध होती ता है एवं अति कुपोषित होने से शिशु मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी होती है|.<br>इस दौरान आँगनवाड़ी केंद्र की सहायिका के साथ अन्य धात्री माताएं एवं शिशु उपस्थित थे.|</p>



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<p>PNC</p>
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