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	<title>Child health &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>बच्चों को खिलाएं ये आहार, नही होगा कुपोषण !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/is-aahaar-se-nahi-hoga-kuposhan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 May 2022 13:12:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[छह माह के बाद शिशुओं को अनुपूरक आहार देना अनिवार्य : डीपीओ कुपोषण रोकने में अनुपूरक आहार की अहम भूमिका,शारीरिक व मानसिक विकास के लिए जरूरीआंगनबाड़ी केन्द्रों में अन्नप्रासन एवं टीएचआर वितरण के जरिए अनुपूरक आहार पर बल आरा, 19 मई. बच्चों को स्वथ्य रखने के लिए जरूरी है उन्हे अच्छे आहार देना. क्योंकि इसकी कमी के कारण ही बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं. बाल कुपोषण को दूर करने के लिए भोजपुर जिला में विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं. बाल कुपोषण को कम करने में अनुपूरक आहार की अहम भूमिका होती है. छह माह तक शिशु का वजन लगभग दो गुना बढ़ जाता एवं एक वर्ष पूरा होने तक वजन लगभग तीन गुना एवं लंबाई जन्म से लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाती है. जीवन के दो वर्षों में तंत्रिका प्रणाली एवं मस्तिष्क विकास के साथ सभी अंगों में संरचनात्मक एवं कार्यात्मक दृष्टिकोण से बहुत तेजी से विकास होता है. इसके लिए अतिरिक्त पोषक आहार की जरूरत होती है. इसलिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर माह 19 तारीख को 6 माह पूरे कर लिए शिशुओं का अन्नप्राशन कराया जाता है. गुरुवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर शिशुओं के अन्नप्राशन कराया गया. साथ ही, शिशु के परिजनों को शिशुओं के लिए स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार उपयोग करने की जानकारी दी गई. माह में एक बार अन्नप्राशन दिवस का होता है आयोजन आईसीडीएस डीपीओ माला कुमारी ने बताया, छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार की जरूरत होती है. इस दौरान शिशु के शरीर एवं मस्तिष्क का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong><em>छह माह के बाद शिशुओं को अनुपूरक आहार देना अनिवार्य : डीपीओ</em></strong></p>



<p><strong>कुपोषण रोकने में अनुपूरक आहार की अहम भूमिका,<br>शारीरिक व मानसिक विकास के लिए जरूरी<br>आंगनबाड़ी केन्द्रों में अन्नप्रासन एवं टीएचआर वितरण के जरिए अनुपूरक आहार पर बल</strong></p>



<p>आरा, 19 मई. बच्चों को स्वथ्य रखने के लिए जरूरी है उन्हे अच्छे आहार देना. क्योंकि इसकी कमी के कारण ही बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं. बाल कुपोषण को दूर करने के लिए भोजपुर जिला में विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं. बाल कुपोषण को कम करने में अनुपूरक आहार की अहम भूमिका होती है. छह माह तक शिशु का वजन लगभग दो गुना बढ़ जाता एवं एक वर्ष पूरा होने तक वजन लगभग तीन गुना एवं लंबाई जन्म से लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाती है. जीवन के दो वर्षों में तंत्रिका प्रणाली एवं मस्तिष्क विकास के साथ सभी अंगों में संरचनात्मक एवं कार्यात्मक दृष्टिकोण से बहुत तेजी से विकास होता है. इसके लिए अतिरिक्त पोषक आहार की जरूरत होती है. इसलिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर माह 19 तारीख को 6 माह पूरे कर लिए शिशुओं का अन्नप्राशन कराया जाता है. गुरुवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर शिशुओं के अन्नप्राशन कराया गया. साथ ही, शिशु के परिजनों को शिशुओं के लिए स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार उपयोग करने की जानकारी दी गई.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0030.jpg" alt="" class="wp-image-62508" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0030.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0030-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>माह में एक बार अन्नप्राशन दिवस का होता है आयोजन</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0033.jpg" alt="" class="wp-image-62509" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0033.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0033-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आईसीडीएस डीपीओ माला कुमारी ने बताया, छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार की जरूरत होती है. इस दौरान शिशु के शरीर एवं मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है. इसे ध्यान में रखते हुए सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर माह में एक बार अन्नप्राशन दिवस आयोजित किया जाता है. जिसमें छह माह के शिशुओं को अनुपूरक आहार खिलाया जाता है. इसके साथ ही उनके माता-पिता को इसके विषय में जानकारी दी जाती है. इसके अलावा सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर हर माह टेक होम राशन (टीएचआर) का वितरण किया जाता है. जिसमें छह महीने से तीन वर्ष के शिशुओं के लिए चावल, दाल, सोयाबड़ी अथवा अंडा लाभार्थियों को उपलब्ध कराया जाता है. अन्नप्राशन दिवस पर लोगों को सेविकाओं द्वारा शिशुओं के लिए अनुपूरक आहार बनाने के विषय में भी जानकारी दी जाती है जिससे उसे संतुलित भोजन उपलब्ध हो सके.</p>



<p><strong>घर में मौजूद खाद्य पदार्थों का उपयोग करें</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0028.jpg" alt="" class="wp-image-62510" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0028.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220519-WA0028-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>राष्ट्रीय पोषण अभियान जिला समन्वयक पियूष पराग यादव ने बताया, शिशु के लिए प्रारंभिक आहार तैयार करने के लिए घर में मौजूद मुख्य खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है. सूजी, गेहूं का आटा, चावल, रागा, बाजरा आदि की सहायता से पानी या दूध में दलिया बनाया जा सकता है. बच्चे के आहार में चीनी अथवा गुड़ को भी शामिल करना चाहिए क्योंकि उन्हें अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है. 6 से 9 माह तक के बच्चों को गाढ़े एवं सुपाच्य दलिया खिलाना चाहिए. वसा की आपूर्ति के लिए आहार में छोटा चम्मच घी या तेल डालना चाहिये. दलिया के अलावा अंडा, मछली, फलों एवं सब्जियों जैसे संरक्षक आहार शिशुओं के विकास में सहायक होते हैं.</p>



<p><strong>इन बातों का रखें ख्याल:</strong><br>• 6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें<br>• स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें<br>• शिशु को मल्टिंग आहार (अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें<br>• माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है<br>• शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ी थोड़ी मात्रा करके कई बार खिलाएं</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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			</item>
		<item>
		<title>उमस भरी गर्मी से बच्चों में बढ़ सकता है डायरिया का खतरा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/umas-bhari-garmi-badha-sakti-hai-dayariya-ka-khatara/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 May 2022 06:17:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
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					<description><![CDATA[कुशल प्रबंधन नहीं हो तो डायरिया हो सकता है जानलेवा डायरिया के लक्षणों को जानकर एवं सही समय पर उचित प्रबंधन बेहद जरूरी आरा,14 मई. जिले के लोगों को हीट वेव से राहत तो मिल गई है, लेकिन अब बारिश के बाद तल्ख धूप के कारण उमस भरी गर्मी सताने लगी है. जिसके कारण लोगों का जीना दुभर हो गया है. ऐसे मौसम में जरा सी लापरवाही बीमारियों को न्योता दे सकती है. ऐसी स्थिति में लोगों और सावधान रहने की जरूरत है विशेष रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों को. क्योंकि बदलते मौसम और उमस भरी गर्मी के दौरान बच्चों में डायरिया की शिकायत बढ़ जाती है. डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं. यहां तक कि इस दौरान कुशल प्रबंधन नहीं होने से यह जानलेवा भी हो जाता है. स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े भी इसे शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक मानते हैं. सही समय पर डायरिया के लक्षणों को जानने के बाद यदि सही समय पर उचित प्रबंधन कर लिया जाय तो बच्चों को इस गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है. बच्चों को डायरिया से बचाया जा सकता हैअपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, डायरिया के शुरुआती लक्षणों का ध्यान रख माताएं इसकी आसानी से पहचान कर सकती हैं. इससे केवल नवजातों को ही नहीं, बल्कि बड़े बच्चों को भी डायरिया से बचाया जा सकता है. लगातार पतले दस्त आना, बार-बार दस्त के साथ उल्टी का होना, प्यास [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>कुशल प्रबंधन नहीं हो तो डायरिया हो सकता है जानलेवा</strong></p>



<p><strong>डायरिया के लक्षणों को जानकर एवं सही समय पर उचित प्रबंधन बेहद जरूरी</strong></p>



<p>आरा,14 मई. जिले के लोगों को हीट वेव से राहत तो मिल गई है, लेकिन अब बारिश के बाद तल्ख धूप के कारण उमस भरी गर्मी सताने लगी है. जिसके कारण लोगों का जीना दुभर हो गया है. ऐसे मौसम में जरा सी लापरवाही बीमारियों को न्योता दे सकती है. ऐसी स्थिति में लोगों और सावधान रहने की जरूरत है विशेष रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों को. क्योंकि बदलते मौसम और उमस भरी गर्मी के दौरान बच्चों में डायरिया की शिकायत बढ़ जाती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="334" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0031.jpg" alt="" class="wp-image-62264" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0031.jpg 500w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0031-350x234.jpg 350w" sizes="(max-width: 500px) 100vw, 500px" /></figure>



<p><strong>डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक निर्जलीकरण </strong>(डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं. यहां तक कि इस दौरान कुशल प्रबंधन नहीं होने से यह जानलेवा भी हो जाता है. स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े भी इसे शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक मानते हैं. सही समय पर डायरिया के लक्षणों को जानने के बाद यदि सही समय पर उचित प्रबंधन कर लिया जाय तो बच्चों को इस गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="608" height="505" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0030.jpg" alt="" class="wp-image-62265" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0030.jpg 608w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0030-350x291.jpg 350w" sizes="(max-width: 608px) 100vw, 608px" /></figure>



<p><strong>बच्चों को डायरिया से बचाया जा सकता है</strong><br>अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, डायरिया के शुरुआती लक्षणों का ध्यान रख माताएं इसकी आसानी से पहचान कर सकती हैं. इससे केवल नवजातों को ही नहीं, बल्कि बड़े बच्चों को भी डायरिया से बचाया जा सकता है. लगातार पतले दस्त आना, बार-बार दस्त के साथ उल्टी का होना, प्यास बढ़ जाना, भूख का कम जाना या खाना नहीं खाना, दस्त के साथ हल्के बुखार का आना और कभी- कभी स्थिति गंभीर हो जाने पर दस्त में खून भी आने लगता है. यहां तक की गंभीर डायरिया बच्चों या वयस्कों को जान का भी खतरा होने की संभावना रहती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="250" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0029.jpg" alt="" class="wp-image-62266" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0029.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0029-350x194.jpg 350w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p><strong>सेविका या आशा दीदी से करें संपर्क</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="426" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032-650x426.jpg" alt="" class="wp-image-62267" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032-650x426.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032-350x229.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220513-WA0032.jpg 684w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>डॉ. केएन सिन्हा ने बताया कि बार-बार डायरिया या दस्त होने से शरीर में डिहाइड्रेशन हो जाता है. जिसको दूर करने के लिए शिशुओं और बड़े बच्चों को ओरल रीहाइड्रेशन सोल्यूशन (ORS) का घोल पिलाएं. इससे दस्त के कारण पानी के साथ शरीर से निकले जरूरी एल्क्ट्रोलाइट्स (सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड एवं बाईकार्बोनेट) की कमी को दूर किया जा सकता है. माताएं अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका या अपने इलाके की आशा दीदी से संपर्क कर इस बात की जानकारी ले सकती हैं. साथ ही, उनसे ORS का घोल बनाने की विधि और किस उम्र के बच्चे को इसकी कितनी मात्रा व कितने बार दिया जाना है ये भी जान सकती हैं.</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हृदय में छेद वाले बच्चों का भी संभव है इलाज</title>
		<link>https://www.patnanow.com/hridy-me-chhed-wale-bachcho-ka-ilaaj-bhi-hai-sambhav/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 May 2022 06:37:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[बच्चों के हृदय में छेद समेत कई गंभीर बीमारियों का इलाज है संभव RSBK के माध्यम से 42 बीमारियों का होता है नि:शुल्क इलाज बच्चों में जन्म के समय से हुई बीमारी या विकृति का पता लगाकर किया जाता है इलाज बक्सर, 10 मई . जिले में कई ऐसे गरीब व जरूरतमंद परिवार हैं, जो माली हालत ठीक नहीं होनें के कारण बच्चों की गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं करा पाते हैं. जिसके कारण बच्चों को जीवन भर कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे ही परिवार के बच्चों को देखते हुए सरकार ने विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हैं. जिनमें से एक है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK), जिसके माध्यम से गरीब परिवार के बच्चों का इलाज संभव है. RBSK के तहत बच्चे के जन्म से लेकर 18 साल तक के बच्चों में अगर किसी भी प्रकार की बीमारी हो तो सरकार उसका पूरा उपचार करवाती है. खासकर 18 साल से कम उम्र के बच्चे के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया गया है. जिसके तहत मुख्य रूप बच्चों में जन्म के समय से हुई बीमारी या विकृति का पता लगाकर उसका पूरा इलाज किया जाता है आयुष चिकित्सक बच्चों की करते हैं स्क्रीनिंगRBSK के जिला समन्वयक डॉ. विकास कुमार ने बताया, स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्यक्रम की सफलता के लिए गठित मोबाइल मेडिकल टीम जिले के हर आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों में पहुंचती है. तब टीम में शामिल आयुष चिकित्सक बच्चों की स्क्रीनिंग करते हैं. ऐसे में जब सर्दी-खांसी व बुखार जैसी सामान्य बीमारी होगी, तब तुरंत बच्चों को दवा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बच्चों के हृदय में छेद समेत कई गंभीर बीमारियों का इलाज है संभव</strong></p>



<p><strong>RSBK के माध्यम से 42 बीमारियों का होता है नि:शुल्क इलाज</strong></p>



<p><strong>बच्चों में जन्म के समय से हुई बीमारी या विकृति का पता लगाकर किया जाता है इलाज</strong></p>



<p>बक्सर, 10 मई . जिले में कई ऐसे गरीब व जरूरतमंद परिवार हैं, जो माली हालत ठीक नहीं होनें के कारण बच्चों की गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं करा पाते हैं. जिसके कारण बच्चों को जीवन भर कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे ही परिवार के बच्चों को देखते हुए सरकार ने विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हैं. जिनमें से एक है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK), जिसके माध्यम से गरीब परिवार के बच्चों का इलाज संभव है. RBSK के तहत बच्चे के जन्म से लेकर 18 साल तक के बच्चों में अगर किसी भी प्रकार की बीमारी हो तो सरकार उसका पूरा उपचार करवाती है. खासकर 18 साल से कम उम्र के बच्चे के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया गया है. जिसके तहत मुख्य रूप बच्चों में जन्म के समय से हुई बीमारी या विकृति का पता लगाकर उसका पूरा इलाज किया जाता है</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0008-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-62004" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0008-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0008-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0008.jpg 678w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>आयुष चिकित्सक बच्चों की करते हैं स्क्रीनिंग</strong><br>RBSK के जिला समन्वयक डॉ. विकास कुमार ने बताया, स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्यक्रम की सफलता के लिए गठित मोबाइल मेडिकल टीम जिले के हर आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों में पहुंचती है. तब टीम में शामिल आयुष चिकित्सक बच्चों की स्क्रीनिंग करते हैं. ऐसे में जब सर्दी-खांसी व बुखार जैसी सामान्य बीमारी होगी, तब तुरंत बच्चों को दवा दी दिया जाती है, लेकिन बीमारी गंभीर होने की स्थिति में उसे आवश्यक जांच एवं समुचित इलाज के लिए संबंधित PHC में भेजा जाता है. वहीं, टीम में शामिल एएनएम के द्वारा बच्चों का वजन, उनकी ऊंचाई (हाइट), सिर की परिधि, बांह की मोटाई की नापतौल की जाती . फार्मासिस्ट रजिस्टर में स्क्रीनिंग किये गये बच्चों से संबंधित बातों को ऑन द स्पॉट क्रमवार अंकित किया जाता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="295" height="171" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0011.jpg" alt="" class="wp-image-62006"/></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0009.jpg" alt="" class="wp-image-62007" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0009.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0009-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>साल में दो बार होती है आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्क्रीनिंग</strong><br>RBSK कार्यक्रम में शून्य से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों की बीमारियों का समुचित इलाज किया जाता है. 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग आंगनबाड़ी केंद्रों में होती है जबकि 6 से 18 साल तक के बच्चों की स्क्रीनिंग उनके स्कूलों में जाकर की जाती. ताकि चिह्नित बीमारियों के समुचित इलाज में देरी न हो. आंगनबाड़ी केंद्रों पर साल में दो बार यानि हर छह म9हीने पर और स्कूलों में साल में सिर्फ एक बार बच्चों के इलाज के लिए स्क्रीनिंग की जाती है.स्क्रीनिंग करते वक्त बच्चों को हेल्थ कार्ड भी उपलब्ध कराया जाता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="554" height="554" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0010.jpg" alt="" class="wp-image-62008" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0010.jpg 554w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0010-350x350.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/IMG-20220510-WA0010-250x250.jpg 250w" sizes="(max-width: 554px) 100vw, 554px" /></figure>



<p><strong>बच्चों में चार डी पर फोकस किया जाता है</strong><br>राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत 0 से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों में चार डी पर फोकस किया जाता है. जिनमें में डिफेक्ट एट बर्थ, डिफिशिएंसी, डिसीज, डेवलपमेंट डिलेज इन्क्लूडिंग डिसएबिलिटी यानि किसी भी प्रकार का विकार, बीमारी, कमी और विकलांगता है। RBSK के तहत पहले 39 प्रकार की बीमारियां शामिल थीं. लेकिन अब तीन और बीमारियों को जोड़ दिया गया है. इनमें ट्यूबरक्लोसिस, लेप्रोसी और बौनापन शामिल है. इस प्रकार अब बच्चों की 42 प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है.</p>



<p><strong>कार्यक्रम का लाभ उठाएं अभिभावक</strong></p>



<p>डॉ. अनिल भट्ट, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, बक्सर ने बताया कि बच्&#x200d;चों में कुछ प्रकार के रोग समूह बेहद आम है जैसे दांत, हृदय संबंधी अथवा श्&#x200d;वसन संबंधी रोग. यदि इनकी शुरूआती पहचान कर ली जायें तो उपचार संभव है. इन परेशानियों की शुरूआती जांच और उपचार से रोग को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है. RBSK के मध्यम से अस्&#x200d;पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आती और बच्&#x200d;चों में सुधार होता है. अभिभावक अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में संपर्क कर इस कार्यक्रम का लाभ जरूरी उठाएं.</p>



<p>बक्सर से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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		<title>कैसे बचाएं हीट स्ट्रोक से बच्चों को !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bachho-ko-heat-stroke-se-kaise-bachayen/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Apr 2022 13:22:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[We Care]]></category>
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		<category><![CDATA[Child health]]></category>
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					<description><![CDATA[स्कूली बच्चों को हीट स्ट्रोक से रखने के लिये देना होगा विशेष ध्यान बच्चों को स्कूल जाने के पूर्व तरह आहार का करायें सेवन, मौसमी फल भी जरूरी शारीरिक समस्या होने पर तुरन्त बच्चे को निकट के सरकारी अस्पताल ले जाएं आरा, 28 अप्रैल &#124; जिले में बढ़ती गर्मी के कारण लोगों को हीट स्ट्रोक का सताने लगा है। दोपहर होते ही सड़के सुनसान होने लगी है। मौसम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 42 डिग्री रहा। लेकिन, गर्म पछुआ हवाओं के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। खासतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चे लू की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं। हीट स्ट्रोक के कारण बच्चे डिहाइड्रेशन के भी शिकार हो सकते हैं। ऐसे में बच्चों को गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से बचाने और उन्हें इस भीषण गर्मी में ठंडा रखने के लिए कुछ सुपाच्य और हल्के आहार देना जरूरी है। जिसका इस्तेमाल कर बच्चों को हीट स्ट्रोक के खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है। साथ ही कुछ जरूरी एहतियात भी बरतना जरूरी है, ताकि लू बच्चों को अपनी चपेट में न ले सके। समय समय पर पानी पीते रहने के लिये प्रेरित करें : अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, स्कूल जाने से पहले बच्चे को जूस, नींबू पानी, ग्लूकोज जैसे तरल पदार्थ जरूर दें। स्कूल से आने के बाद थोड़ी देर रुक कर सबसे पहले फिर से ग्लूकोज, नींबू पानी या जूस दें। स्कूल बैग में बच्चे के लिए पानी का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>स्कूली बच्चों को हीट स्ट्रोक से रखने के लिये देना होगा विशेष ध्यान</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="426" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0012.jpg" alt="" class="wp-image-61336" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0012.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0012-350x229.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<ul class="wp-block-list"><li><strong>बच्चों को स्कूल जाने के पूर्व तरह आहार का करायें सेवन, मौसमी फल भी जरूरी</strong></li><li><strong>शारीरिक समस्या होने पर तुरन्त बच्चे को निकट के सरकारी अस्पताल ले जाएं</strong></li><li>आरा, 28 अप्रैल | जिले में बढ़ती गर्मी के कारण लोगों को हीट स्ट्रोक का सताने लगा है। दोपहर होते ही सड़के सुनसान होने लगी है। मौसम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 42 डिग्री रहा। लेकिन, गर्म पछुआ हवाओं के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। खासतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चे लू की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं। हीट स्ट्रोक के कारण बच्चे डिहाइड्रेशन के भी शिकार हो सकते हैं। ऐसे में बच्चों को गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से बचाने और उन्हें इस भीषण गर्मी में ठंडा रखने के लिए कुछ सुपाच्य और हल्के आहार देना जरूरी है। जिसका इस्तेमाल कर बच्चों को हीट स्ट्रोक के खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है। साथ ही कुछ जरूरी एहतियात भी बरतना जरूरी है, ताकि लू बच्चों को अपनी चपेट में न ले सके।</li><li><strong>समय समय पर पानी पीते रहने के लिये प्रेरित करें :</strong></li><li>अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, स्कूल जाने से पहले बच्चे को जूस, नींबू पानी, ग्लूकोज जैसे तरल पदार्थ जरूर दें। स्कूल से आने के बाद थोड़ी देर रुक कर सबसे पहले फिर से ग्लूकोज, नींबू पानी या जूस दें। स्कूल बैग में बच्चे के लिए पानी का बॉटल हो इस बात का ध्यान रखें। वहीं, स्कूल में समय समय पर पानी पीते रहने के लिये प्रेरित करें। स्कूल से छुट्टी होने के बाद के लिय बच्चों को टोपी और आंखों पर धूप का चश्मा उपलब्ध करायें। यदि यह महसूस हो कि गर्मी के कारण बच्चे की तबीयत खराब हो रही है, तो तुरंत आम पन्ना या ओआरएस बना कर पिलाएं। साथ ही, उल्टी, दस्त या बुखार की शिकायत हो तो डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें, सभी सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क चिकित्सा सुविधा का लाभ उठायें।</li><li><br><strong>बच्चों के दैनिक आहार में करें बदलाव:</strong><br>मौसम के हिसाब से आहार परिवर्तन करना हितकर होता है। विशेष रूप से बच्चों को कुछ चीजों के सेवन के लिए प्रेरित करना जरुरी होता है। नींबू पानी ताजा नींबू के रस, पानी, चीनी और नमक से तैयार किया जाता है। नींबू कई आवश्यक विटामिन और खनिजों जैसे विटामिन सी, विटामिन बी 6 और पोटैशियम से भरपूर होते हैं। शिकंजी भारत का प्रसिद्ध पारंपरिक नींबू पेय है। आम में 80 प्रतिशत से अधिक पानी की मात्रा होती और गर्मियों के दौरान यह एक आइडियल फूड ऑप्शन है। वहीं, छाछ को दही, पानी और नमक से बनाया जाता है। छाछ पाचन में सुधार करने में भी मदद करती है। तरबूज में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होने के कारण गर्मियों में हाइड्रेटेड रहने में मदद करता है। तरबूज साइट्रलाइन नामक अमीनो एसिड से भी भरपूर होता है। यह एक आवश्यक अमीनो एसिड है, जो हमारे दिल और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद होता है।सके अलावा सत्तू खाने या पीने से लू लगने का खतरा काफी कम हो जाता है। लेकिन, सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चों को गर्म हवा या दोपहर में घर के बाहर न जाने दें।</li></ul>





<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="608" height="505" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0009.jpg" alt="" class="wp-image-61335" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0009.jpg 608w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0009-350x291.jpg 350w" sizes="(max-width: 608px) 100vw, 608px" /></figure>



<p>आरा से<strong> ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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