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	<title>Chaitra Navratri &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>चैत्र पूर्णिमा गुरुवार पर करें हल्दी के वो उपाय जो बदलेगी आपकी किस्मत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Apr 2023 06:42:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बस एक काम कर लें पीछे मुड़ कर नहीं देखेंगे आप देवी लक्ष्मी की होगी कृपा ,घर से नकारात्मकता होगी दूर चैत्र मास की पूर्णिमा का सभी पूर्णिमा में विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है. इस बार यह शुभ तिथि 6 अप्रैल दिन गुरुवार को है. पूर्णिमा का संबंध माता लक्ष्मी से माना जाता है. इस दिन विधिवत माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. ज्योतिष शास्त्र में चैत्र पूर्णिमा का महत्व बताते हुए हल्दी के कुछ उपाय भी बताए गए हैं. चैत्र पूर्णिमा पर इन उपायों के करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और धन-धान्य की कमी नहीं होती है. चैत्र पूर्णिमा पर केले की जड़ और हल्दी की गांठ को पीले कपड़े में बांधकर दाहिने हाथ की भुजा में बांध लें. ये चीजें पुखराज का काम करती हैं. ऐसा करने से गुरु के शुभ फल के साथ आरोग्य की प्राप्ति होती है और सुख-संपत्ति व ज्ञान में वृद्धि होती है. चैत्र पूर्णिमा पर किए जाने वाला यह उपाय आपको कई संकट से बचाएगा. चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह जल में गंगाजल और हल्दी मिलाकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़काव करें. ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और नकारात्मक ऊर्जा भी दूर रहती है. इस उपाय को आप हर रोज भी कर सकते हैं, जिससे परिवार के सभी सदस्यों पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. चैत्र [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p></p>



<p><strong>बस एक काम कर लें पीछे मुड़ कर नहीं देखेंगे आप </strong></p>



<p><strong>देवी लक्ष्मी की होगी कृपा ,घर से नकारात्मकता होगी दूर</strong></p>



<p>चैत्र मास की पूर्णिमा का सभी पूर्णिमा में विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है. इस बार यह शुभ तिथि 6 अप्रैल दिन गुरुवार को है. पूर्णिमा का संबंध माता लक्ष्मी से माना जाता है. इस दिन विधिवत माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. ज्योतिष शास्त्र में चैत्र पूर्णिमा का महत्व बताते हुए हल्दी के कुछ उपाय भी बताए गए हैं. चैत्र पूर्णिमा पर इन उपायों के करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और धन-धान्य की कमी नहीं होती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/banana.png" alt="" class="wp-image-73111" width="606" height="349" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/banana.png 479w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/banana-350x202.png 350w" sizes="(max-width: 606px) 100vw, 606px" /></figure>



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<p>चैत्र पूर्णिमा पर <strong>केले की जड़ और हल्दी की गांठ को पीले कपड़े में बांधकर दाहिने हाथ की भुजा में बांध लें</strong>. ये चीजें पुखराज का काम करती हैं. ऐसा करने से गुरु के शुभ फल के साथ आरोग्य की प्राप्ति होती है और सुख-संपत्ति व ज्ञान में वृद्धि होती है. चैत्र पूर्णिमा पर किए जाने वाला यह उपाय आपको कई संकट से बचाएगा. चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह जल में गंगाजल और हल्दी मिलाकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़काव करें. ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और नकारात्मक ऊर्जा भी दूर रहती है. इस उपाय को आप हर रोज भी कर सकते हैं, जिससे परिवार के सभी सदस्यों पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. चैत्र पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी की पूजा करें और फिर हल्दी की गांठ, चावल, एक सिक्का को लाल कपड़े में बांधकर माता को अर्पित कर दें. पूजा के बाद इस सामान को घर में धन के स्थान पर रख दें. ऐसा करने से भाग्य जागृत होता है और घर में सुख-संपत्ति व ऐश्वर्य की वृद्धि होती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="589" height="395" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/HALDI1.png" alt="" class="wp-image-73114" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/HALDI1.png 589w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/HALDI1-350x235.png 350w" sizes="(max-width: 589px) 100vw, 589px" /></figure>



<p>चैत्र पूर्णिमा पर घर के<strong> मुख्य द्वार के दोनों ओर हल्दी व सिंदूर से स्वास्तिक का निशान बनाएं</strong>. ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और धन-धान्य में हमेशा वृद्धि होती रहती है. साथ ही परिवार के सभी सदस्यों में आपसी प्रेम बना रहता है और मन में शांति बनी रहती है.चैत्र पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें. दूध में हल्दी मिलाकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें और एक काली हल्दी भी भगवान को अर्पित करें. इसके बाद हाथ जोड़कर मन में भगवान को अपनी इच्छा के बारे में बताएं. ऐसा करने से आपकी मनोकामना पूरी होती है और हर कार्य सफल होता है.</p>



<p><strong>आचार्य ओमप्रकाश </strong></p>
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		<title>पूरे दिन है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त</title>
		<link>https://www.patnanow.com/pure-din-hai-kalash-sthapna-ka-muhurt/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Mar 2023 00:40:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना, 22 मार्च. नवरात्र मातृशक्ति की आराधना का सबसे महत्त्पूर्ण अनुष्ठान होता है. जिसमें माँ जगदम्बे के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा की जाती है. नौ दिनों की अवधि को नवरात्र कहा जाता है और नवरात्र में भक्त जगत जननी की भक्ति में लीन रहते हैं. सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार वर्ष भर में 4 नवरात्र होते हैं. जिनमें दो उदय नवरात्र जबकि दो गुप्त नवरात्र होते हैं. उदय नवरात्र में से एक चैत्र नवरात्र के साथ नव संवत्सर की शुरुआत होती है. 22 मार्च, दिन बुधवार से मातृशक्ति की आराधना का महान पर्व चैत्र नवरात्र शुरू हो रहा है. नवरात्र के दौरान शक्ति के 9 स्वरूपों की उपासना की जाती है. प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणीतृतीयं चंद्रघंटेति कूष्मांडेति चतुर्थकम्पंचमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनीति चसप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमंनवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः यानि शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाताकात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माँ के इन नौ स्वरूपों की पूजा-आराधना होती है तो चलिए जान लेते हैं कि इस बार शारदीय नवरात्र का अनुष्ठान कैसे करें : ब्रह्मपुर के बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी उमलेश पाण्डेय बताते हैं कि नवरात्र के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करनी चाहिए. श्री संवत 2080 राजा बुध, मंत्री शुक्र है और कलश स्थापना सुबह से रात्रि तक एकम में नल नाम संवत्सर है. कलश स्थापना से पहले गणेश और गौरी की षोडशोपचार पूजा करें. फिर कलश-स्थापना कर वरुण आदि देवताओं सहित सभी तीर्थों और पवित्र नदियों का आवाहन करें. कलश के पूजन के बाद षोडशमातृका और नवग्रह पूजन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना, 22 मार्च. नवरात्र मातृशक्ति की आराधना का सबसे महत्त्पूर्ण अनुष्ठान होता है. जिसमें माँ जगदम्बे के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा की जाती है. नौ दिनों की अवधि को नवरात्र कहा जाता है और नवरात्र में भक्त जगत जननी की भक्ति में लीन रहते हैं.<br></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-buxar-maa-durga-murti.jpg" alt="" class="wp-image-23875" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-buxar-maa-durga-murti.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/pnc-buxar-maa-durga-murti-263x350.jpg 263w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p>सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार वर्ष भर में 4 नवरात्र होते हैं. जिनमें दो उदय नवरात्र जबकि दो गुप्त नवरात्र होते हैं. उदय नवरात्र में से एक चैत्र नवरात्र के साथ नव संवत्सर की शुरुआत होती है. 22 मार्च, दिन बुधवार से मातृशक्ति की आराधना का महान पर्व चैत्र नवरात्र शुरू हो रहा है. नवरात्र के दौरान शक्ति के 9 स्वरूपों की उपासना की जाती है.<br></p>



<p>प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी<br>तृतीयं चंद्रघंटेति कूष्मांडेति चतुर्थकम्<br>पंचमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनीति च<br>सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमं<br>नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः<br></p>



<p>यानि शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता<br>कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माँ के इन नौ स्वरूपों की पूजा-आराधना होती है<br></p>



<p>तो चलिए जान लेते हैं कि इस बार शारदीय नवरात्र का अनुष्ठान कैसे करें :</p>



<p>ब्रह्मपुर के बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी उमलेश पाण्डेय बताते हैं कि नवरात्र के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करनी चाहिए. श्री संवत 2080 राजा बुध, मंत्री शुक्र है और कलश स्थापना सुबह से रात्रि तक एकम में नल नाम संवत्सर है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="581" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Umlesh-Pandey-Brahmpur-Pujari.jpg" alt="" class="wp-image-72618" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Umlesh-Pandey-Brahmpur-Pujari.jpg 581w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/PNC_Umlesh-Pandey-Brahmpur-Pujari-339x350.jpg 339w" sizes="(max-width: 581px) 100vw, 581px" /><figcaption>मुख्य पुजारी(बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मन्दिर, ब्रह्मपुर)</figcaption></figure>



<p></p>



<p>कलश स्थापना से पहले गणेश और गौरी की षोडशोपचार पूजा करें. फिर कलश-स्थापना कर वरुण आदि देवताओं सहित सभी तीर्थों और पवित्र नदियों का आवाहन करें. कलश के पूजन के बाद षोडशमातृका और नवग्रह पूजन करें और फिर माँ जगदम्बा की पूजा-आराधना कर नवरात्र का अनुष्ठान प्रारंभ करें.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana-650x399.jpeg" alt="" class="wp-image-23524" width="376" height="231" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/09/PNC-KALASH-Ghatasthapana-350x215.jpeg 350w" sizes="(max-width: 376px) 100vw, 376px" /></figure>



<p><br>22 मार्च, बुधवार को विधिवत कलश-स्थापना कर नौ दिनों तक माँ की पूजा-आराधना करें और नवरात्र के अंतिम दिन हवन के बाद कन्याओं और ब्राह्मणों को भोजन कराकर अनुष्ठान का समापन करें.</p>



<p><br>इस बार 29 मार्च, दिन बुधवार को महाष्टमी है जबकि 30 मार्च को महानवमी है, उस दिन ही हवन संपन्न होगा और नवरात्र का अनुष्ठान संपन्न होगा.<br></p>



<p>नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के पाठ का विशेष महत्त्व बतलाया गया है.तो आप भी इस चैत्र नवरात्र में आस्था और श्रद्धा के साथ माँ की आराधना करें और माँ की कृपा प्राप्त करें.</p>
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