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	<title>Caste Census &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>Caste Census &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>विपक्ष से छिना जाति गणना का मुद्दा, सीएम ने किया फैसले का स्वागत</title>
		<link>https://www.patnanow.com/modi-cabinet-clears-caste-census/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 May 2025 01:01:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
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		<category><![CDATA[Jati ganana]]></category>
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					<description><![CDATA[केन्द्र सरकार ने देश में जाति गणना कराने का फैसला किया है. बुधवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में राजनीतिक मामलों की कैबिनेट ने इसे हरी झंडी दे दी. इस बारे में सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए विभिन्न राज्यों में जातिगत गणना के नाम पर चल रहे जाति सर्वेक्षणों पर सवाल उठाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत जनगणना का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, इसलिए राज्यों को जातिवार गणना कराने का अधिकार नहीं है. वैष्णव ने कहा कि कई राज्यों ने सर्वेक्षण के माध्यम से जातियों की जनगणना का दावा किया है, लेकिन उन पर राजनीतिक लाभ के लिए गैर-पारदर्शी तरीके से सर्वेक्षण कराने के आरोप लगे हैं. जाहिर है इस प्रकार के जातीय सर्वे ने समाज में भ्रांति फैलाने का काम किया. कैबिनेट कमेटी की बैठक में लिया गया फैसला जातिवार गणना को लेकर पिछले कुछ वर्षों से तेज हुई राजनीति के बीच केंद्र सरकार की इस घोषणा के अनुसार अगले साल संभावित जनगणना के साथ ही जातिवार गणना भी होगी. यह आजादी के बाद पहली बार होगा जब जातिवार गणना की जाएगी, क्योंकि इससे पहले कई बार जाति सर्वेक्षण हुए हैं, लेकिन पूरी गणना नहीं की गई. इस फैसले के साथ राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल जहां इसे अपनी जीत बता रहे हैं, वहीं भाजपा की ओर से स्पष्ट किया गया कि कांग्रेस की सरकारों ने ही जातिगत गणना का विरोध और कहा गया कि अब पहली [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>केन्द्र सरकार ने देश में जाति गणना कराने का फैसला किया है. बुधवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में राजनीतिक मामलों की कैबिनेट ने इसे हरी झंडी दे दी. इस बारे में सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए विभिन्न राज्यों में जातिगत गणना के नाम पर चल रहे जाति सर्वेक्षणों पर सवाल उठाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत जनगणना का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, इसलिए राज्यों को जातिवार गणना कराने का अधिकार नहीं है. वैष्णव ने कहा कि कई राज्यों ने सर्वेक्षण के माध्यम से जातियों की जनगणना का दावा किया है, लेकिन उन पर राजनीतिक लाभ के लिए गैर-पारदर्शी तरीके से सर्वेक्षण कराने के आरोप लगे हैं. जाहिर है इस प्रकार के जातीय सर्वे ने समाज में भ्रांति फैलाने का काम किया. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="440" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/pnc-narendra-modi-cabinet-meeting-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-90031" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/pnc-narendra-modi-cabinet-meeting-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/pnc-narendra-modi-cabinet-meeting-650x279.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>कैबिनेट कमेटी की बैठक में लिया गया फैसला </strong>जातिवार गणना को लेकर पिछले कुछ वर्षों से तेज हुई राजनीति के बीच केंद्र सरकार की इस घोषणा के अनुसार अगले साल संभावित जनगणना के साथ ही जातिवार गणना भी होगी. यह आजादी के बाद पहली बार होगा जब जातिवार गणना की जाएगी, क्योंकि इससे पहले कई बार जाति सर्वेक्षण हुए हैं, लेकिन पूरी गणना नहीं की गई. इस फैसले के साथ राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल जहां इसे अपनी जीत बता रहे हैं, वहीं भाजपा की ओर से स्पष्ट किया गया कि कांग्रेस की सरकारों ने ही जातिगत गणना का विरोध और कहा गया कि अब पहली बार जातिवार गणना होने जा रही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="724" height="482" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/PNC-rail-minister-ashwani-vaishnav.jpg" alt="" class="wp-image-85786" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/PNC-rail-minister-ashwani-vaishnav.jpg 724w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/PNC-rail-minister-ashwani-vaishnav-650x433.jpg 650w" sizes="(max-width: 724px) 100vw, 724px" /></figure>



<p>इस फैसले के बाद एकबारगी जहां देश का ध्यान पाकिस्तान से हटकर घरेलू राजनीति पर आया, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक झटके में विपक्ष का बड़ा चुनावी मुद्दा भी छीन लिया. बिहार में अक्टूबर-नवंबर में होने बिहार चुनाव से पहले विपक्षी महागठबंधन इसे प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहा था.</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr">जाति जनगणना कराने का केंद्र सरकार का फैसला स्वागतयोग्य है। जाति जनगणना कराने की हमलोगों की मांग पुरानी है। यह बेहद खुशी की बात है कि केन्द्र सरकार ने जाति जनगणना कराने का निर्णय किया है। जाति जनगणना कराने से विभिन्न वर्गों के लोगों की संख्या का पता चलेगा जिससे उनके उत्थान एवं…</p>&mdash; Nitish Kumar (@NitishKumar) <a href="https://twitter.com/NitishKumar/status/1917549792462529008?ref_src=twsrc%5Etfw">April 30, 2025</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जाति जनगणना कराने का केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि जाति जनगणना कराने की हमलोगों की मांग पुरानी है. जाति जनगणना कराने से विभिन्न वर्गों के लोगों की संख्या का पता चलेगा जिससे उनके उत्थान एवं विकास के लिए योजनाएं बनाने में सहूलियत होगी. इससे देश के विकास को गति मिलेगी. इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अभिनंदन तथा धन्यवाद.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>&#8216;भाजपा नेताओं की तिलमिलाहट काफी बढ़ गई है&#8217;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/rjd-attacks-bjp-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Oct 2023 13:01:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
		<category><![CDATA[rjd]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि जातीय आंकड़े के प्रकाशन के बाद से भाजपा नेताओं की तिलमिलाहट कुछ ज्यादा हीं बढ़ गई है. इसी वजह से उनके बयानों में विरोधाभास और असहजता दिखाई पड़ने लगी है. उन्होंने कहा कि भाजपा के कई नेता तो बोलने के क्रम में भाषाई मर्यादा भी भूल जाते हैं. केन्द्रीय मंत्री से लेकर बिहार के पूर्व मंत्री और सांसद भी नुक्कड़ पर के लम्पटों की भाषा बोलने लगे हैं. राजद प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि पिछड़ों और दलितों को उनका हक और अधिकार मिले. आरएसएस द्वारा पूर्व के जनसंघ और आज के भाजपा के गठन का बुनियाद हीं पिछड़ा और दलित विरोध का रहा है. भारतीय संविधान लागू होने के समय से हीं समानता और आरक्षण का विरोध तत्कालीन जनसंघ द्वारा किया जाता रहा है.चितरंजन गगन ने कहा कि व्यवहारिक तौर पर भी जब भी मौका आया जनसंघ और भाजपा ने पिछड़ों और दलितों के राह में रोड़ा बनने का काम किया. 1967 में जब पहली बार बिहार में गैर-कांग्रेसी सरकार बनने की स्थिति हुई तो गैर-कांग्रेसी दलों में सबसे बड़े घटक दल संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (जिसके विधायकों की संख्या 68 थी) के नेता कर्पूरी ठाकुर को मुख्यमंत्री बनने का 25 विधायकों वाली पार्टी जनसंघ द्वारा विरोध किया गया. फलत: महामाया प्र. सिन्हा को मुख्यमंत्री बनाया गया. इसी प्रकार 1977 में जब केन्द्र में जनता पार्टी की सरकार बन रही थी तो लोकनायक जयप्रकाश नारायण बाबू जगजीवन राम को प्रधानमंत्री बनाना चाह रहे थे पर जनता पार्टी में शामिल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि जातीय आंकड़े के प्रकाशन के बाद से भाजपा नेताओं की तिलमिलाहट कुछ ज्यादा हीं बढ़ गई है. इसी वजह से उनके बयानों में विरोधाभास और असहजता दिखाई पड़ने लगी है. उन्होंने कहा कि भाजपा के कई नेता तो बोलने के क्रम में भाषाई मर्यादा भी भूल जाते हैं. केन्द्रीय मंत्री से लेकर बिहार के पूर्व मंत्री और सांसद भी नुक्कड़ पर के लम्पटों की भाषा बोलने लगे हैं. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="426" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/01/PNC-rjd-office-n.jpg" alt="" class="wp-image-58536" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/01/PNC-rjd-office-n.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/01/PNC-rjd-office-n-350x229.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>राजद प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि पिछड़ों और दलितों को उनका हक और अधिकार मिले. आरएसएस द्वारा पूर्व के जनसंघ और आज के भाजपा के गठन का बुनियाद हीं पिछड़ा और दलित विरोध का रहा है. भारतीय संविधान लागू होने के समय से हीं समानता और आरक्षण का विरोध तत्कालीन जनसंघ द्वारा किया जाता रहा है.<br>चितरंजन गगन ने कहा कि व्यवहारिक तौर पर भी जब भी मौका आया जनसंघ और भाजपा ने पिछड़ों और दलितों के राह में रोड़ा बनने का काम किया. 1967 में जब पहली बार बिहार में गैर-कांग्रेसी सरकार बनने की स्थिति हुई तो गैर-कांग्रेसी दलों में सबसे बड़े घटक दल संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (जिसके विधायकों की संख्या 68 थी) के नेता कर्पूरी ठाकुर को मुख्यमंत्री बनने का 25 विधायकों वाली पार्टी जनसंघ द्वारा विरोध किया गया. फलत: महामाया प्र. सिन्हा को मुख्यमंत्री बनाया गया. इसी प्रकार 1977 में जब केन्द्र में जनता पार्टी की सरकार बन रही थी तो लोकनायक जयप्रकाश नारायण बाबू जगजीवन राम को प्रधानमंत्री बनाना चाह रहे थे पर जनता पार्टी में शामिल पूर्व के जनसंघ घटक ने विरोध किया और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने. 1977 में हीं बिहार में कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री बने और बिहार में आरक्षण लागू किया तो पूर्व जनसंघ घटक के नेताओं ने साजिश कर कर्पूरी की सरकार को अपदस्थ कर दिया. 1990 में प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा जब मंडल आयोग की अनुशंसा को लागू किया गया तो उसके विरोध में भाजपा के लोग न केवल सड़क पर उतर गए बल्कि मंडल के खिलाफ कमंडल लेकर निकल गए. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="428" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/06/pnc-rjd-chitranjan-gagan.jpg" alt="" class="wp-image-63387" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/06/pnc-rjd-chitranjan-gagan.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/06/pnc-rjd-chitranjan-gagan-350x230.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>राजद प्रवक्ता ने कहा कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के पहल पर जब बिहार की महागठबंधन सरकार द्वारा एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जातीय जनगणना कराकर उसके आंकड़े जारी कर दिए गए हैं तो भाजपा भ्रम पैदा करने की नापाक हरकत कर रही है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong> </p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जाति गणना के आंकड़े जारी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/caste-census-data/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Oct 2023 09:09:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। बड़ी खबर इस वक्त बिहार से आ रही है जहां गांधी जयंती के मौके पर बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना के आंकड़े जारी कर दिए हैं. बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना के आंकड़े जारी किए बिहार के प्रभारी मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने आज जाति आधारित सर्वे के बहुचर्चित आंकड़े जारी किए हैं आंकड़ों के मुताबिक बिहार में सवर्णों की आबादी 15.52% है जिसमें सबसे ज्यादा ब्राह्मण 3.66% हैं. इसके अलावा यादव 14%, मुसहर 3% जबकि कुर्मी 2.87% हैं.राज्य में 82% हिन्दू, 17.7% मुसलमान और बाकी अन्य धर्म के लोगअत्यंत पिछड़ा वर्ग के 36%, पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 27%अनुसूचित जाति की जनसंख्या 19% जबकि सामान्य जाति 15%. देखिए महत्वपूर्ण आंकड़े हिन्दू 81.9986%मुस्लिम 17.7088%ईसाई 0.0576%हिन्दू में जातियादव 14.2666%कुर्मी 2.8785कुशवाहा 4.2120%ब्राह्मण 3.6575%बनिया 2.3155%भूमिहार 2.8683%राजपूत 3.4505%मुसहर 3.0872% 215 जातियों का आंकड़ा जारी किया गया है. पिछड़ा वर्ग (3,54,63,936) 27.1286% अत्यंत पिछड़ा वर्ग (4,70,80,514) 36.0148% अनुसूचित जाति (2,56,89,820) 19.6518% अनुसूचित जनजाति (21,99,361) 1.6824% अनारक्षित (2,02,91,679) 15.5224% कुल 13,07,25,310 pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। बड़ी खबर इस वक्त बिहार से आ रही है जहां गांधी जयंती के मौके पर बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना के आंकड़े जारी कर दिए हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="423" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana.png" alt="" class="wp-image-73927" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana-350x228.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना के आंकड़े जारी किए</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="496" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-based-survey-released-by-CS-ias-vivek-Kumar-Singh.jpg" alt="" class="wp-image-78797" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-based-survey-released-by-CS-ias-vivek-Kumar-Singh.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-based-survey-released-by-CS-ias-vivek-Kumar-Singh-350x267.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बिहार के प्रभारी मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने आज जाति आधारित सर्वे के बहुचर्चित आंकड़े जारी किए हैं आंकड़ों के मुताबिक बिहार में सवर्णों की आबादी 15.52% है जिसमें सबसे ज्यादा ब्राह्मण 3.66% हैं. इसके अलावा यादव 14%, मुसहर 3% जबकि कुर्मी 2.87% हैं.<br>राज्य में 82% हिन्दू, 17.7% मुसलमान और बाकी अन्य धर्म के लोग<br>अत्यंत पिछड़ा वर्ग के 36%, पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 27%<br>अनुसूचित जाति की जनसंख्या 19% जबकि सामान्य जाति 15%.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-data-hindu-muslim-586x650.jpg" alt="" class="wp-image-78791" style="width:379px;height:420px" width="379" height="420" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-data-hindu-muslim-586x650.jpg 586w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-data-hindu-muslim-316x350.jpg 316w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-data-hindu-muslim.jpg 588w" sizes="auto, (max-width: 379px) 100vw, 379px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="449" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-bihar-yadav-449x650.jpg" alt="" class="wp-image-78794" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-bihar-yadav-449x650.jpg 449w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-bihar-yadav-242x350.jpg 242w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-bihar-yadav.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 449px) 100vw, 449px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="461" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-bihar-data-baniya-461x650.jpg" alt="" class="wp-image-78795" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-bihar-data-baniya-461x650.jpg 461w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-bihar-data-baniya-248x350.jpg 248w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/pnc-caste-census-bihar-data-baniya.jpg 584w" sizes="auto, (max-width: 461px) 100vw, 461px" /></figure>



<p><strong>देखिए महत्वपूर्ण आंकड़े </strong></p>



<p><em>हिन्दू</em> 81.9986%<br><em>मुस्लिम</em> 17.7088%<br><em>ईसाई</em> 0.0576%<br><em>हिन्दू में जाति</em><br><em>यादव</em> 14.2666%<br><em>कुर्मी</em> 2.8785<br><em>कुशवाहा</em> 4.2120%<br><em>ब्राह्मण</em> 3.6575%<br><em>बनिया</em> 2.3155%<br><em>भूमिहार</em> 2.8683%<br><em>राजपूत</em> 3.4505%<br><em>मुसहर</em> 3.0872%</p>



<p>215 जातियों का आंकड़ा जारी किया गया है.</p>



<p><em>पिछड़ा वर्ग</em> (3,54,63,936) 27.1286%</p>



<p><em>अत्यंत पिछड़ा वर्ग</em> (4,70,80,514) 36.0148%</p>



<p><em>अनुसूचित जाति</em> (2,56,89,820) 19.6518%</p>



<p><em>अनुसूचित जनजाति</em> (21,99,361) 1.6824%</p>



<p><em>अनारक्षित</em> (2,02,91,679) 15.5224%</p>



<p><em>कुल 13,07,25,310</em></p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बिहार में जाति गणना जारी रहेगी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/high-court-on-caste-census/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Aug 2023 07:58:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
		<category><![CDATA[high court]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। पटना हाईकोर्ट में आज बिहार सरकार को पड़ी राहत मिली है. जाति गणना मामले पर पिछले दिनों को पटना हाईकोर्ट ने लगातार पांच दिन तक सुनवाई की थी और फैसला सुरक्षित रखा था. आज पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए बिहार सरकार को बड़ी राहत दी है. पटना हाईकोर्ट ने बिहार में जाति गणना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. बिहार सरकार ने पटना हाई कोर्ट में कहा था कि जाति गणना का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है और अब हाईकोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि बाकी बचे काम को भी बिहार सरकार जल्द पूरा कराएगी. चीफ जस्टिस के विनोद चन्द्रन ने एक लाइन में फैसला सुनाया जिसमें कहा गया है कि जाति गणना के विरोध वाली सभी याचिका खारिज की जाती है. इधर याचिकाकर्ता अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. बिहार में जाति गणना का काम 2 चरणों में कराया जा रहा है. पहले चरण में 7 जनवरी से 21 जनवरी तक घरों की गणना की गई. उसके बाद 15 अप्रैल से 15 मई के बीच जाति गणना का काम पूरा करना था लेकिन इसी बीच मई के पहले हफ्ते में पटना हाईकोर्ट ने जाति गणना पर रोक लगा दी थी. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। पटना हाईकोर्ट में आज बिहार सरकार को पड़ी राहत मिली है. जाति गणना मामले पर पिछले दिनों को पटना हाईकोर्ट ने लगातार पांच दिन तक सुनवाई की थी और फैसला सुरक्षित रखा था. आज पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए बिहार सरकार को बड़ी राहत दी है. </p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT-650x366.png" alt="" class="wp-image-38512" width="377" height="212" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT-350x197.png 350w" sizes="auto, (max-width: 377px) 100vw, 377px" /></figure>



<p>पटना हाईकोर्ट ने बिहार में जाति गणना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. बिहार सरकार ने पटना हाई कोर्ट में कहा था कि जाति गणना का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है और अब हाईकोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि बाकी बचे काम को भी बिहार सरकार जल्द पूरा कराएगी. चीफ जस्टिस के विनोद चन्द्रन ने एक लाइन में फैसला सुनाया जिसमें कहा गया है कि जाति गणना के विरोध वाली सभी याचिका खारिज की जाती है. इधर याचिकाकर्ता अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-patna-caste-based-census.jpg" alt="" class="wp-image-70698" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-patna-caste-based-census.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-patna-caste-based-census-263x350.jpg 263w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p>बिहार में जाति गणना का काम 2 चरणों में कराया जा रहा है. पहले चरण में 7 जनवरी से 21 जनवरी तक घरों की गणना की गई.  उसके बाद 15 अप्रैल से 15 मई के बीच जाति गणना का काम पूरा करना था लेकिन इसी बीच मई के पहले हफ्ते में पटना हाईकोर्ट ने जाति गणना पर रोक लगा दी थी.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, तीन जुलाई तक करना होगा इंतजार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/supreme-court-rejects/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 May 2023 12:12:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
		<category><![CDATA[supreme court]]></category>
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					<description><![CDATA[जाति आधारित गणना पर पटना हाइकोर्ट की अंतरिक रोक फिलहाल जारी रहेगी. बिहार सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद राहत देने से इंकार कर दिया है. अब 3 जुलाई को पटना हाईकोर्ट में ही इस मामले की अगली सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के द्वारा लगाई गई जाति गणना पर रोक हटाने से इंकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला ऐसा नहीं है कि इस पर तुरंत सुनवाई की जाए. अगर 14 जुलाई तक इस मामले पर पटना हाई कोर्ट में कोई सुनवाई नहीं होती है तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की अंतरिम रोक को हटाने से इंकार करते हुए कहा कि इस बात की जांच करनी होगी कि कहीं यह कवायद सर्वेक्षण की आड़ में जनगणना तो नहीं है. बता दें कि पटना हाइकोर्ट ने जातीय गणना को असंवैधानिक बताते हुए रोक लगाने का आदेश दिया था और 3 जुलाई को सुनवाई की तारीख तय की थी. जिसके बाद बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>जाति आधारित गणना पर पटना हाइकोर्ट की अंतरिक रोक फिलहाल जारी रहेगी. बिहार सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद राहत देने से इंकार कर दिया है. अब 3 जुलाई को पटना हाईकोर्ट में ही इस मामले की अगली सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के द्वारा लगाई गई जाति गणना पर रोक हटाने से इंकार कर दिया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="353" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-650x353.jpg" alt="" class="wp-image-22534" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला ऐसा नहीं है कि इस पर तुरंत सुनवाई की जाए. अगर 14 जुलाई तक इस मामले पर पटना हाई कोर्ट में कोई सुनवाई नहीं होती है तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="340" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jati1.png" alt="" class="wp-image-73928" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jati1.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jati1-350x183.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की अंतरिम रोक को हटाने से इंकार करते हुए कहा कि इस बात की जांच करनी होगी कि कहीं यह कवायद सर्वेक्षण की आड़ में जनगणना तो नहीं है. बता दें कि पटना हाइकोर्ट ने जातीय गणना को असंवैधानिक बताते हुए रोक लगाने का आदेश दिया था और 3 जुलाई को सुनवाई की तारीख तय की थी. जिसके बाद बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. </p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>सुप्रीम कोर्ट से मिलेगी राहत!</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bihar-govt-in-supreme-court/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 May 2023 00:57:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
		<category><![CDATA[Jati ganana]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। बिहार सरकार ने जाति गणना पर पटना हाईकोर्ट के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है. हाईकोर्ट के चार मई के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर बिहार सरकार की अपील में कहा गया है कि रोक से पूरी कवायद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. राज्य सरकार ने कहा कि जाति आधारित डेटा का संग्रह संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत एक संवैधानिक आदेश है. कुछ जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है. पूरी मशीनरी जमीनी स्तर पर काम कर रही है. समय अधिक लगने से सर्वेक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. इधर, पटना हाईकोर्ट में अर्जी दायर करने वाले आवेदक अखिलेश कुमार और यूथ फॉर इक्वलिटी की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में केवियट दायर किया है. बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने चार मई के अपने आदेश में राज्य सरकार को जातीय गणना तत्काल बंद करने का निर्देश दिया था. मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन जुलाई की तारीख तय की थी. बिहार सरकार ने पटना हाईकोर्ट में मामले की जल्द सुनवाई की याचिका दायर की थी जिसे पटना हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था. अब देखना है कि बिहार सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती है या नहीं. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। बिहार सरकार ने जाति गणना पर पटना हाईकोर्ट के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है. हाईकोर्ट के चार मई के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर बिहार सरकार की अपील में कहा गया है कि रोक से पूरी कवायद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="467" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/pnc-bihar-sarkar-sachivalaya.jpg" alt="" class="wp-image-65680" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/08/pnc-bihar-sarkar-sachivalaya.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/08/pnc-bihar-sarkar-sachivalaya-350x251.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>राज्य सरकार ने कहा कि जाति आधारित डेटा का संग्रह संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत एक संवैधानिक आदेश है. कुछ जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है. पूरी मशीनरी जमीनी स्तर पर काम कर रही है. समय अधिक लगने से सर्वेक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. </p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana.png" alt="" class="wp-image-73927" width="342" height="222" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana-350x228.png 350w" sizes="auto, (max-width: 342px) 100vw, 342px" /></figure>



<p>इधर, पटना हाईकोर्ट में अर्जी दायर करने वाले आवेदक अखिलेश कुमार और यूथ फॉर इक्वलिटी की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में केवियट दायर किया है. बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने चार मई के अपने आदेश में राज्य सरकार को जातीय गणना तत्काल बंद करने का निर्देश दिया था. मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन जुलाई की तारीख तय की थी. बिहार सरकार ने पटना हाईकोर्ट में मामले की जल्द सुनवाई की याचिका दायर की थी जिसे पटना हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था. अब देखना है कि बिहार सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती है या नहीं.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बिहार में जातीय गणना पर रोक</title>
		<link>https://www.patnanow.com/caste-census-stopped/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 May 2023 11:05:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार में जातीय गणना पर लगाई अंतरिम रोकपटना हाईकोर्ट ने लगाई जातीय गणना पर रोक3 जुलाई को पटना हाईकोर्ट करेगा सुनवाई पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि फिलहाल इस पर अंतरिम आदेश लगाई जाती है और इसका डाटा संरक्षित करने का आदेश भी जारी किया है. बता दें कि बिहार में राज्य सरकार की ओर से जातीय गणना कराई जा रही थी. अप्रैल से जातीय गणना का दूसरा चरण जारी था. सरकार ने 15 मई तक इस चरण को पूरा करने की अवधि तय की थी. इससे पहले ही गणना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है. अब इस मामले को लेकर अगली सुनवाई 3 जुलाई को होगी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद बिहार सरकार ने भी सभी जिला पदाधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>बिहार में जातीय गणना पर लगाई अंतरिम रोक<br>पटना हाईकोर्ट ने लगाई जातीय गणना पर रोक<br>3 जुलाई को पटना हाईकोर्ट करेगा सुनवाई </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT-650x366.png" alt="" class="wp-image-38512" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2019/02/PNC-PATNA-HIGH-COURT-350x197.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि फिलहाल इस पर अंतरिम आदेश लगाई जाती है और इसका डाटा संरक्षित करने का आदेश भी जारी किया है. बता दें कि बिहार में राज्य सरकार की ओर से जातीय गणना कराई जा रही थी. अप्रैल से जातीय गणना का दूसरा चरण जारी था. सरकार ने 15 मई तक इस चरण को पूरा करने की अवधि तय की थी. इससे पहले ही गणना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है. अब इस मामले को लेकर अगली सुनवाई 3 जुलाई को होगी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद बिहार सरकार ने भी सभी जिला पदाधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राजनीति में प्रतिमान विस्थापन का नया अध्याय रचेगा जातीय जनगणना</title>
		<link>https://www.patnanow.com/caste-census-will-create-a-new-chapter-of-paradigm-shift-in-politics/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 May 2023 04:16:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[brijmohan chaupal]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
		<category><![CDATA[darbahnga]]></category>
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					<description><![CDATA[चौपाल समाज के लोग एक ही कोड में करें जाति को अंकित सामाजिक न्याय की राजनीति का समावेशी सोपान सामाजिक न्याय को ध्यान में रखकर बिहार सरकार जातीय जनगणना करा रही है. विभिन्न समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने और योजनाओं के अमल के लिए जरूरी आंकड़े प्राप्त करना घोषित लक्ष्य है. जानकर मानते हैं कि समावेशी विकास के लिए ये उचित कदम है. ऐसे में ये अहम हो जाता है कि चौपाल जाति का क्या दृष्टिकोण हो? भारतीय समाज में जाति का विशेष स्थान है. इसके बिना भारतीय समाज की कल्पना नहीं की जा सकती. समाज के हर जाति का अपना इतिहास, सुदीर्घ परंपरा, विश्वास और सांस्कृतिक आलोड़ण है जो भारतीय समाज को व्यवस्थाओं की अवधारणा से परिपूर्ण करती है. चौपाल जाति भी इस सिद्धांत को पल्लवित और पुष्पित करती है. अन्य जातियों की तरह चौपाल जाति कई उपनाम/उपजाति जैसे तांती, तन्तावा, पान, स्वांस, कोल, कोली, शर्मा, मंडल, दास आदि से जाने जाते हैं. भौगोलिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह जाति सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि पूरे देश में उपस्थित है. भले ही कई जगहों पर इस जाति के कई उपनाम हों. जिस तरह भारत विविधताओं में एकता की अवधारणा पर खड़ा है ठीक उसी तरह चौपाल जाति अलग अलग उपनाम/उपजातियों के साथ इन विविधताओं को प्रदर्शित करती है. चौपाल जाति में इतनी उपजातियां होने के बावजूद एकता का भाव प्रकट होता है. इस समाज का मूल विचार भारत के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है क्योंकि चौपाल समाज अपना प्रेरक और आदर्श कबीर दास एवं शिसिया महाराज जैसे [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



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<p><strong>चौपाल समाज के लोग एक ही कोड में करें जाति को अंकित</strong></p>



<p><strong>सामाजिक न्याय की राजनीति का समावेशी सोपान</strong></p>



<p>सामाजिक न्याय को ध्यान में रखकर बिहार सरकार जातीय जनगणना करा रही है. विभिन्न समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने और योजनाओं के अमल के लिए जरूरी आंकड़े प्राप्त करना घोषित लक्ष्य है. जानकर मानते हैं कि समावेशी विकास के लिए ये उचित कदम है. ऐसे में ये अहम हो जाता है कि चौपाल जाति का क्या दृष्टिकोण हो?</p>



<p>भारतीय समाज में जाति का विशेष स्थान है. इसके बिना भारतीय समाज की कल्पना नहीं की जा सकती. समाज के हर जाति का अपना इतिहास, सुदीर्घ परंपरा, विश्वास और सांस्कृतिक आलोड़ण है जो भारतीय समाज को व्यवस्थाओं की अवधारणा से परिपूर्ण करती है. चौपाल जाति भी इस सिद्धांत को पल्लवित और पुष्पित करती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="357" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/Capture.png" alt="" class="wp-image-73926" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/Capture.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/Capture-350x192.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अन्य जातियों की तरह चौपाल जाति कई उपनाम/उपजाति जैसे तांती, तन्तावा, पान, स्वांस, कोल, कोली, शर्मा, मंडल, दास आदि से जाने जाते हैं. भौगोलिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह जाति सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि पूरे देश में उपस्थित है. भले ही कई जगहों पर इस जाति के कई उपनाम हों. जिस तरह भारत विविधताओं में एकता की अवधारणा पर खड़ा है ठीक उसी तरह चौपाल जाति अलग अलग उपनाम/उपजातियों के साथ इन विविधताओं को प्रदर्शित करती है. चौपाल जाति में इतनी उपजातियां होने के बावजूद एकता का भाव प्रकट होता है. इस समाज का मूल विचार भारत के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है क्योंकि चौपाल समाज अपना प्रेरक और आदर्श कबीर दास एवं शिसिया महाराज जैसे महान व्यक्तित्व को मानता है.. और इनके दर्शन और विचारों में विश्वास करता है. चौपाल समाज एक तरफ जहां कबीरदास से प्रेरणा लेकर समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वास और सामाजिक बुराई पर कड़ा प्रहार करते हुए तार्किक दृष्टिकोण अपनाने पर ध्यान दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ चौपाल समाज में शक्तिपुंज शीसिया महाराज के शौर्य, पराक्रम, त्याग और सिद्धांत से प्रेरणा लेकर समाज के लोगों को जीवन जीने की राह सिखाते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="423" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana.png" alt="" class="wp-image-73927" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jatijanganana-350x228.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>हर जाति की तरह चौपाल जाति भी भारतीय विचारों की व्याख्या करता है. जिस प्रकार जातीय समझ भारतीय समाज की नियति है ठीक उसी तरह जाति भारतीय राजनीति की नियति है. भारत में विभिन्न कारणों से जनजीवन में राजनीति की पैठ अधिक है. हाल यह है कि राजनीति का क.. ख.. ग भी जाति के बिना अधूरा है. भारतीय राजनीति की संरचना जाति की नीव पर खड़ी है. बिहार में तो खास तौर पर राजनीति में जाति की प्रधानता है.</p>



<p>बिहार में जातीय जनगणना आज कल चर्चा का विषय बना हुआ है. बहुत ही लम्बे समय से देश में जातीय जनगणना की मांग हो रही है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने केंद्र सरकार से जातीय जनगणना कराने के लिए विचार विमर्श किया और सुझाव दिया कि पूरे देश में जातीय जनगणना होनी चाहिए. लेकिन केंद्र सरकार ने इस सुझाव को अनसुना कर दिया. फिर भी बिहार सरकार ने जातीय जनगणना को लेकर 1 जून 2022 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि बिहार में जातीय जनगणना होगी. ऐसा नहीं है कि जातीय जनगणना देश में पहली बार होती. वर्ष 1931 में जातीय जनगणना हुई थी. हाल के समय में वर्ष 2011 में भी सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना हुई थी किन्तु केंद्र सरकार ने जातीय आंकड़ों को जारी नहीं किया. बिहार से पहले राजस्थान और कर्नाटक में जातीय जनगणना हो चुकी है. बिहार में जनगणना दो चरणों में होना है. पहले चरण में मकानों की संख्या की गणना लगभग हो चुकी है. दूसरा चरण शुरू है. इसमें लोगों से जाति, उपजाति और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुडी जानकारी ली जा रही है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="340" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jati1.png" alt="" class="wp-image-73928" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jati1.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/jati1-350x183.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सरकार के इस कदम पर समाज में राय बटी हुई है. फिर भी लोग इस प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं. इस सरकारी कदम का समर्थन और विरोध दोनो हो रहा है. रोचक है कि समर्थन और विरोध भी जाति आधारित ही है. विरोध में अधिकतर उच्च जाति से संबंधित लोग हैं. उनको आशंका है कि जनगणना से समाज की वास्तविक स्थिति सार्वजानिक हो जाएगी और अन्य वर्ग मजबूत हो जाएंगे. दूसरी तरफ इसके समर्थक अधिकतर बहुजन वर्गों से हैं.</p>



<p>जाति व्यवस्था भारतीय समाज में प्रमुखता से मौजूद है. बावजूद इसके कोई प्रामाणिक जातीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं हैं. जातीय जनगणना होने के बाद आंकड़े आ जाएंगे और उन आंकड़ों के आधार पर सरकार कल्याणकारी योजनाओं को संचालित कर सकती हैं जिससे समावेशी विकास संभव हो. जिसका ज्यादा लाभ समाज के उन वंचित वर्गों को मिल सकता है जिन्हें इनकी सब से ज्यादा जरुरत है. अखिल भारतीय चौपाल संघ का दावा है कि पूरा चौपाल समाज जातीय जनगणना के समर्थन में है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="414" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/dta.png" alt="" class="wp-image-73929" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/dta.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/dta-350x223.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>यह मांग कोई नया नहीं है. चौपाल समाज कांशीराम के उस नीति वाक्य में यकीन रखता है जिसके तहत उन्होंने कहा था कि “जिसकी जितनी संख्या भारी… उसकी उतनी हो हिस्सेदारी”. जातीय जनगणना असल में कांशीराम के सिद्धांतो का व्यवहारिक रूप ही है. इस में कोई दो राय नहीं है कि जातीय जनगणना से यह पता चलेगा कि समाज में किस जाति की कितनी संख्या है और किस जाति के लोगों की समाज के संसाधनों पर कितनी हिस्सेदारी है. समाज यह जान पायेगा कि लोकतंत्र के केंद्र में जो लोग (संख्या) हैं.. क्या उनको सही मायने में संसाधनों का लाभ मिल रहा है या कुछ खास जातियों का ही संसाधनों पर कब्ज़ा है.</p>



<p>जातीय जनगणना के आसरे बिहार की हर जाति अपना अपना समीकरण देख रही है. बहुजन वर्ग से आने वाली जातियां कुछ ज्यादा ही उत्साहित हैं. चौपाल जाति के लोगों में भी उत्साह है.. यह जानने के इंतजार में हैं कि चौपाल समाज की कुल जनसंख्या कितनी है. इस समाज के बौद्धिक वर्ग और नेता वर्ग अपने अपने तरीके से जातीय जनगणना को लेकर चौपाल समाज को जागरूक भी कर रहे हैं. उन्हें बता रहे हैं कि चौपाल जाति का कोड 66 है एवं जाति सिर्फ चौपाल ही बताना है आदि. चौपाल समाज जागरूक हो रहा है और एकता में बल है की भावना से आगे भी बढ़ रहा है. चौपाल जाति के श्लाका पुरुष कैलाश चौपाल मानते हैं कि उनका समाज जागरूक हो रहा है लेकिन ये नाकाफी है. समाज को अभी और जागरूक करना है जिसका आधार शिक्षा होगा. चौपाल समाज जितना ही शिक्षित होगा उतना ही बढेगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="303" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/Untitled.png" alt="" class="wp-image-73930" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/05/Untitled.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/05/Untitled-350x163.png 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>वे याद दिलाते हैं कि चौपाल समाज एक मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आभारी हैं क्योंकि जब सीएम को चौपाल जाति की विषम स्थिति से अवगत कराया गया तो उनका सहृदय व्यवहार रहा. सीएम ने इसे पूरे चौपाल समाज की समस्या बताया था. इनका समाधान 16 मई 2014 को सीएम ने कराया. उस हस्तक्षेप से चौपाल जाति के वर्तमान और भविष्य की उन्नति की रुपरेखा को बल मिला.</p>



<p>चौपाल जाति आज फिर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आभारी हैं जिनके नेतृत्व में जातीय जनगणना को साकार किया जा रहा है. ये सिर्फ जातीय जनगणना नही है बल्कि सामाजिक न्याय के लक्ष्य को सुनिश्चित करेगा. इस प्रकार जातीय जनगणना का लक्ष्य सिर्फ बिहार में जाति का जनगणना ही नहीं है बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य भागीदारी से है. चौपाल समाज के लोग इस बात को समझते हैं कि जातीय जनगणना से समाज में उनकी भी भागीदारी बढ़ेगी.</p>



<p>जातीय जनगणना के लिए बिहार सरकार के दस्तावेज में कुल प्रश्नों कि संख्या 17 है और दस्तावेज के प्रश्न संख्या 8 में लोगों को अपने जाति के कोड बताने हैं. वैसे बिहार सरकार ने कुल 215 जातीय कोड का विवरण दिया है. इस दस्तावेज में चौपाल जाति का जातीय कोड 66 है. जैसा कि ऊपर बताया गया है कि भारतीय समाज में कई जातियां है जो कई उपजातियों में बंटे हुए हैं. उसी तरह चौपाल जाति भी कई उपजातियों में बंटे हुए हैं. लेकिन इस दस्तावेज में इन उपजातियों जैसे पान, स्वांसी के लिए अलग से जातीय कोड 112 दिया गया है. दूसरी तरफ कई जाति है जो कई उपजातियां में बंटे हुए हैं लेकिन उन सब का कोड एक ही है. जैसे बनिया और इसकी उपजातियों के कोड, यादव और इसके उपजातियों के कोड. जब विविधता में एकता की बात है.. हम सब एक हैं तो चौपाल के उपजातियों के जातीय कोड अलग-अलग क्यों? इससे भ्रम पैदा हो रहा है. आवाज बुलंद नहीं किया तो सही डेटा नहीं आएगा.</p>



<p><strong>ब्रजमोहन चौपाल<br>अध्यक्ष, अखिल भारतीय चौपाल संघ</strong></p>
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		<title>जातीय गणना पर आशंका के बादल</title>
		<link>https://www.patnanow.com/jati-ganna-per-sankat/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Apr 2023 09:55:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार में 15 अप्रैल से जातीय गणना शुरू होने वाली है. बिहार के लाखों शिक्षक जातीय गणना में भाग लेने वाले हैं लेकिन 10 अप्रैल को नई शिक्षक सेवा नियमावली आने के बाद पहले से काम कर रहे लाखों शिक्षक आक्रोशित हैं और उन्होंने जातीय गणना का बहिष्कार करने की चेतावनी सरकार को दी है. दरअसल बिहार के 20 से ज्यादा शिक्षक संगठनों ने मिलकर दिनांक 13/ 4/2023 को संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा बिहार बनाया है जिसका उद्देश्य नई नियमावली का विरोध करना है. संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. आज शाम तक सरकार नहीं सुनती है तो शनिवार से रणनीति के तहत लाखों शिक्षक सरकार का विरोध करेंगे. ऐसे में 15 अप्रैल से 15 मई तक होने वाली जातीय गणना पर संकट के बादल गहरा गए हैं. विरोध दर्ज कराने वाले विभिन्न संगठन सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि जितने भी पुराने शिक्षक वर्षों से काम कर रहे हैं उन्हें बिना किसी शर्त राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए. शिक्षक संघों ने मांग की है कि उन्हें राज्यकर्मी के दर्जे के साथ समान काम समान वेतन और पुराने शिक्षकों के समान सेवा शर्त का लाभ मिलना चाहिए. pncb]]></description>
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<p>बिहार में 15 अप्रैल से जातीय गणना शुरू होने वाली है. बिहार के लाखों शिक्षक जातीय गणना में भाग लेने वाले हैं लेकिन 10 अप्रैल को नई शिक्षक सेवा नियमावली आने के बाद पहले से काम कर रहे लाखों शिक्षक आक्रोशित हैं और उन्होंने जातीय गणना का बहिष्कार करने की चेतावनी सरकार को दी है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="489" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/pnc-shikshak-sangh-baithak.jpg" alt="" class="wp-image-73449" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/pnc-shikshak-sangh-baithak.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/pnc-shikshak-sangh-baithak-350x263.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>दरअसल बिहार के 20 से ज्यादा शिक्षक संगठनों ने मिलकर दिनांक 13/ 4/2023 को संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा बिहार बनाया है जिसका उद्देश्य नई नियमावली का विरोध करना है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="522" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/pnc-teacher-sangh-meeting-against-new-sewa-shart.jpg" alt="" class="wp-image-73448" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/04/pnc-teacher-sangh-meeting-against-new-sewa-shart.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/04/pnc-teacher-sangh-meeting-against-new-sewa-shart-350x281.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. आज शाम तक सरकार नहीं सुनती है तो शनिवार से रणनीति के तहत लाखों शिक्षक सरकार का विरोध करेंगे. ऐसे में 15 अप्रैल से 15 मई तक होने वाली जातीय गणना पर संकट के बादल गहरा गए हैं. विरोध दर्ज कराने वाले विभिन्न संगठन सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि जितने भी पुराने शिक्षक वर्षों से काम कर रहे हैं उन्हें बिना किसी शर्त राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए. शिक्षक संघों ने मांग की है कि उन्हें राज्यकर्मी के दर्जे के साथ समान काम समान वेतन और  पुराने शिक्षकों के समान सेवा शर्त का लाभ मिलना चाहिए.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>विभाग ने सुन ली शिक्षकों की परेशानी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/caste-based-census-work-update/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jan 2023 16:46:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Buhar teachers]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Census]]></category>
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					<description><![CDATA[शिक्षा विभाग ने आखिरकार जाति गणना कार्य में लगे शिक्षकों की परेशानी को समझते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. दरअसल जिन शिक्षकों को जाति गणना के कार्य में लगाया गया है उन्हें शिक्षण कार्य के बाद यानी स्कूल अवधि के बाद जाति गणना कार्य करने को मजबूर किया जा रहा था. भीषण ठंड में इस तरह के आदेश को लेकर शिक्षक पसोपेश में थे. शाम 4:00 बजे के बाद घर-घर जाकर जाति गणना का कार्य करना काफी मुश्किल हो रहा था. इसे देखते हुए शिक्षक संघों ने सरकार से गुहार लगाई थी और विभाग से शिक्षकों की परेशानी को देखते हुए कोई एक ही कार्य करने देने का अनुरोध किया था. 11 जनवरी को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी जिला पदाधिकारियों को पत्र लिखकर शिक्षकों की इस परेशानी की ओर ध्यान दिलाया है और यह स्पष्ट किया है जाति गणना कार्य में किसी भी स्कूल के सभी शिक्षकों को प्रतिनियुक्त नहीं किया जाए और जो शिक्षक जाति गणना कार्य में हैं उन्हें स्कूल अवधि के दौरान जाति गणना कार्य करने दिया जाए. ऐसे शिक्षक अपनी सुविधानुसार किसी भी वक्त आकर स्कूल में अपना अटेंडेंस बना सकते हैं. जाति गणना कार्य में लगे शिक्षकों के लिए यह बड़े राहत की बात है. क्या बोले शिक्षा मंत्री pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>शिक्षा विभाग ने आखिरकार जाति गणना कार्य में लगे शिक्षकों की परेशानी को समझते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. दरअसल जिन शिक्षकों को जाति गणना के कार्य में लगाया गया है उन्हें शिक्षण कार्य के बाद यानी स्कूल अवधि के बाद जाति गणना कार्य करने को मजबूर किया जा रहा था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="534" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-jati-adharit-ganana-caste-based-census.jpg" alt="" class="wp-image-70699" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-jati-adharit-ganana-caste-based-census.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-jati-adharit-ganana-caste-based-census-350x288.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>भीषण ठंड में इस तरह के आदेश को लेकर शिक्षक पसोपेश में थे. शाम 4:00 बजे के बाद घर-घर जाकर जाति गणना का कार्य करना काफी मुश्किल हो रहा था. इसे देखते हुए शिक्षक संघों ने सरकार से गुहार लगाई थी और विभाग से शिक्षकों की परेशानी को देखते हुए कोई एक ही कार्य करने देने का अनुरोध किया था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="449" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-jati-ganana-caste-based-census-update.jpg" alt="" class="wp-image-70715" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-jati-ganana-caste-based-census-update.jpg 449w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/pnc-jati-ganana-caste-based-census-update-262x350.jpg 262w" sizes="auto, (max-width: 449px) 100vw, 449px" /></figure>



<p>11 जनवरी को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी जिला पदाधिकारियों को पत्र लिखकर शिक्षकों की इस परेशानी की ओर ध्यान दिलाया है और यह स्पष्ट किया है जाति गणना कार्य में किसी भी स्कूल के सभी शिक्षकों को प्रतिनियुक्त नहीं किया जाए और जो शिक्षक जाति गणना कार्य में हैं उन्हें स्कूल अवधि के दौरान जाति गणना कार्य करने दिया जाए. ऐसे शिक्षक अपनी सुविधानुसार किसी भी वक्त आकर स्कूल में अपना अटेंडेंस बना सकते हैं. जाति गणना कार्य में लगे शिक्षकों के लिए यह बड़े राहत की बात है.</p>



<p><strong>क्या बोले शिक्षा मंत्री </strong></p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr">जातिगत सर्वे में लगे शिक्षकों के लिए सन्देश &#8211; <br><br>आप सब निश्चिंत होकर पूरे दिन की कार्यावधि में सही ढंग से, सलीके से आवंटित क्षेत्र में जातिगत सर्वे का कार्य करिए।<br><br>इसी बीच किसी भी समय विद्यालय जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कर लें। <a href="https://twitter.com/hashtag/Bihar?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Bihar</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#बिहार</a></p>&mdash; Prof. Chandra Shekhar (@ProfShekharRJD) <a href="https://twitter.com/ProfShekharRJD/status/1613393281752391680?ref_src=twsrc%5Etfw">January 12, 2023</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
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<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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