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		<title>पीएम नरेंद्र मोदी वापस ले आएंगे भारत का कोहिनूर!</title>
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		<pubDate>Fri, 09 Sep 2022 06:15:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[क्या भारत आ जाएगा कोहिनूर हीरा कोहिनूर 1304 के आसपास मालवा के राजा महलाक देव की संपत्ति 1526 में पानीपत का युद्ध जीतने के बाद कोहिनूर पर बाबर का कब्जा 186 कैरेट के रहे हीरे को बाबर हीरा नाम मिला &#8216;कोहिनूर&#8217; का अर्थ है- आभा या रोशनी का पर्वत एक ऐसा बेशकीमती हीरा जिसके कद्रदान पूरी दुनिया में हैं. कोहिनूर हीरा क्&#x200d;या कभी भारत आ पाएगा. कैसे आएगा. कब आएगा. इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है. कोहिनूर, एक ऐसा बेशकीमती हीरा जिसके कद्रदान पूरी दुनिया में हैं. कोहिनूर हीरा क्&#x200d;या कभी भारत आ पाएगा? कैसे आएगा? कब आएगा? इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है. 2015 में प्रधानमंत्री के ब्रिटेन दौरे के बाद एक उम्मीद जगी थी कि भारत को उसका कोहिनूर मिल जाएगा पर अभी तक भारत सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की गई. कोहिनूर को दुनिया का सबसे मशहूर हीरा कहा जाता है. यह मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गोलकोंडा खनन क्षेत्र में निकला था. पहले यह 793 कैरेट का था लेकिन अब 105.6 कैरेट का ही रह गया है. इसका वजन 21.6 ग्राम है. यह कई राजाओं से होता हुआ ब्रिटेन की महारानी तक पहुंचा है. कोहिनूर 1304 के आसपास मालवा के राजा महलाक देव की संपत्ति का हिस्सा था. 1526 में पानीपत का युद्ध जीतने के बाद कोहिनूर पर बाबर का कब्जा हो गया. तब 186 कैरेट के रहे हीरे को बाबर हीरा कहा जाने लगा. इसके बाद 1739 में ईरानी शासक नादिर शाह ने दिल्ली के शासक [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p></p>



<p><strong>क्या भारत आ जाएगा कोहिनूर हीरा </strong></p>



<p><strong>कोहिनूर 1304 के आसपास मालवा के राजा महलाक देव की संपत्ति</strong></p>



<p><strong>1526 में पानीपत का युद्ध जीतने के बाद कोहिनूर पर बाबर का कब्जा</strong></p>



<p><strong>186 कैरेट के रहे हीरे को बाबर हीरा नाम मिला</strong></p>



<p><strong>&#8216;कोहिनूर&#8217; का अर्थ है- आभा या रोशनी का पर्वत</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="425" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/kohinoor3.png" alt="" class="wp-image-66356" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/kohinoor3.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/kohinoor3-350x229.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>एक ऐसा बेशकीमती हीरा जिसके कद्रदान पूरी दुनिया में हैं. कोहिनूर हीरा क्&#x200d;या कभी भारत आ पाएगा. कैसे आएगा. कब आएगा. इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है. कोहिनूर, एक ऐसा बेशकीमती हीरा जिसके कद्रदान पूरी दुनिया में हैं. कोहिनूर हीरा क्&#x200d;या कभी भारत आ पाएगा? कैसे आएगा? कब आएगा? इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है. 2015 में प्रधानमंत्री के ब्रिटेन दौरे के बाद एक उम्मीद जगी थी कि भारत को उसका कोहिनूर मिल जाएगा पर अभी तक भारत सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की गई.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/kohinoor.png" alt="" class="wp-image-66352" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/kohinoor.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/kohinoor-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>कोहिनूर को दुनिया का सबसे मशहूर हीरा कहा जाता है. यह मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गोलकोंडा खनन क्षेत्र में निकला था. पहले यह 793 कैरेट का था लेकिन अब 105.6 कैरेट का ही रह गया है. इसका वजन 21.6 ग्राम है. यह कई राजाओं से होता हुआ ब्रिटेन की महारानी तक पहुंचा है. कोहिनूर 1304 के आसपास मालवा के राजा महलाक देव की संपत्ति का हिस्सा था. 1526 में पानीपत का युद्ध जीतने के बाद कोहिनूर पर बाबर का कब्जा हो गया. तब 186 कैरेट के रहे हीरे को बाबर हीरा कहा जाने लगा. इसके बाद 1739 में ईरानी शासक नादिर शाह ने दिल्ली के शासक मोहम्मद शाह को हरा दिया. उसने शाही खजाने को लूट लिया, जिसमें बाबर हीरा भी था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="600" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/kohinoor-1.jpg" alt="" class="wp-image-66353" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/kohinoor-1.jpg 600w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/kohinoor-1-350x350.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/kohinoor-1-250x250.jpg 250w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<p>नादिर शाह के पोते शाह रुख मिर्जा, नादिर शाह के सेनापति अहमद अब्दाली और फिर अब्दाली के वंशज शुजा शाह से पंजाब के सिख राजा महाराजा रणजीत सिंह तक कोहिनूर पहुंचा. रणजीत सिंह कोहिनूर हीरे को अपने ताज में पहनते थे. 1839 में उनकी मौत के बाद हीरा उनके बेटे दिलीप सिंह तक पहुंचा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="594" height="516" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Untitled.png" alt="" class="wp-image-66354" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Untitled.png 594w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/Untitled-350x304.png 350w" sizes="(max-width: 594px) 100vw, 594px" /><figcaption><strong>कोहिनूर का सफ़र </strong></figcaption></figure>



<p>1849 में ब्रिटेन से हार के बाद महाराजा को कोहिनूर इंग्लैंड की महारानी को सौंपना पड़ा. 1850 में इसे बकिंघम पैलेस में महारानी विक्टोरिया के सामने पेश किया गया. यहां इसे नया अंदाज दिया. इसका वजन तब 108.93 कैरेट रह गया. यह रानी के ताज का हिस्सा बना. अब कोहिनूर का वजन 105.6 कैरेट है. आजादी के बाद भारत ने कोहिनूर की वापसी का प्रयास किया लेकिन इंग्लैंड ने उसे अस्वीकार कर दिया. अब ये सवाल है कि क्या आजादी के अमृत काल में भारत का प्रसिद्ध हीरा कोहिनूर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वापस लाने में सक्षम हैं या हम भूल जायें कि भारत में कभी कोई कोहिनूर था.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का कैंसर से निधन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/britains-queen-elizabeth-ii-dies-of-cancer/</link>
		
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		<pubDate>Fri, 09 Sep 2022 05:18:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[महारानी ने 70 साल तक शासन किया 1952 में गद्दी पर बैठी थीं महारानी तीन बार भारत आईं एलिजाबेथ II, 1961 में गणतंत्र दिवस पर थीं चीफ गेस्ट 73 साल की उम्र में प्रिंस चार्ल्स ‘महाराज चार्ल्स तृतीय&#8217; बने ब्रिटेन में सबसे लंबे समय तक राज करने वाली महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का गुरुवार को स्कॉटलैंड के बालमोरल कैसल में निधन हो गया. वह 96 वर्ष की थीं. महारानी ने 70 साल तक शासन किया. उनके निधन के साथ ही ब्रिटेन के इतिहास में किसी शासक के सबसे लंबे समय तक किये गये शासन का अंत हो गया. गुरुवार को सुबह उनके स्वास्थ्य के बारे में चिंताएं बढ़ने के बाद उनका परिवार एबरडीनशायर में उनके स्कॉटिश इस्टेट में इकट्ठा होने लगा. ब्रिटिश इतिहास में सबसे लंबे समय तक राज करने वाली महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का गुरुवार को निधन हो गया. वह 96 वर्ष की थीं. बकिंघम पैलेस ने एक बयान में उनकी मृत्यु की घोषणा की, जिससे 10 दिनों का राष्ट्रीय शोक शुरू हो गया. 73 साल की उम्र में प्रिंस चार्ल्स ‘महाराज चार्ल्स तृतीय&#8217; बने हैं. महारानी 1952 में गद्दी पर बैठी थीं और वह अभूतपूर्व सामाजिक परिवर्तन की गवाह रहीं. उनके निधन के बाद उनके सबसे बड़े बेटे और उत्तराधिकारी चार्ल्स 14 राष्ट्रमंडल क्षेत्रों के प्रमुख के रूप में उनके अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे. डॉक्टरों द्वारा महारानी को चिकित्सकीय देखरेख में रखने के बाद चार्ल्स और महारानी के करीबी परिवार के सदस्य एबरडीन के पास बालमोरल पहुंचे. उनके पोते प्रिंस विलियम, उनके भाई प्रिंस हैरी [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p><strong>महारानी ने 70 साल तक शासन किया</strong></p>



<p><strong>1952 में गद्दी पर बैठी थीं महारानी</strong></p>



<p><strong>तीन बार भारत आईं एलिजाबेथ II, 1961 में गणतंत्र दिवस पर थीं चीफ गेस्ट</strong></p>



<p><strong>73 साल की उम्र में प्रिंस चार्ल्स ‘महाराज चार्ल्स तृतीय&#8217; बने</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="365" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/alijabeth.png" alt="" class="wp-image-66348" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/09/alijabeth.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/09/alijabeth-350x197.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ब्रिटेन में सबसे लंबे समय तक राज करने वाली महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का गुरुवार को स्कॉटलैंड के बालमोरल कैसल में निधन हो गया. वह 96 वर्ष की थीं. महारानी ने 70 साल तक शासन किया. उनके निधन के साथ ही ब्रिटेन के इतिहास में किसी शासक के सबसे लंबे समय तक किये गये शासन का अंत हो गया. गुरुवार को सुबह उनके स्वास्थ्य के बारे में चिंताएं बढ़ने के बाद उनका परिवार एबरडीनशायर में उनके स्कॉटिश इस्टेट में इकट्ठा होने लगा. ब्रिटिश इतिहास में सबसे लंबे समय तक राज करने वाली महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का गुरुवार को निधन हो गया. वह 96 वर्ष की थीं. बकिंघम पैलेस ने एक बयान में उनकी मृत्यु की घोषणा की, जिससे 10 दिनों का राष्ट्रीय शोक शुरू हो गया. 73 साल की उम्र में प्रिंस चार्ल्स ‘महाराज चार्ल्स तृतीय&#8217; बने हैं.</p>



<p>महारानी 1952 में गद्दी पर बैठी थीं और वह अभूतपूर्व सामाजिक परिवर्तन की गवाह रहीं. उनके निधन के बाद उनके सबसे बड़े बेटे और उत्तराधिकारी चार्ल्स 14 राष्ट्रमंडल क्षेत्रों के प्रमुख के रूप में उनके अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे. डॉक्टरों द्वारा महारानी को चिकित्सकीय देखरेख में रखने के बाद चार्ल्स और महारानी के करीबी परिवार के सदस्य एबरडीन के पास बालमोरल पहुंचे. उनके पोते प्रिंस विलियम, उनके भाई प्रिंस हैरी के साथ रास्ते में हैं.</p>



<p>एलिजाबेथ द्वितीय 1952 में उस वक्त ब्रिटेन की महारानी बनी थीं, जब उनके पिता जॉर्ज षष्टम की मौत हो गई थी. महज 25 साल की उम्र में ब्रिटेन की महारानी का ताज एलिजाबेथ द्वितीय के सिर पर सजा था. मौजूदा समय में 15 संप्रभु राष्ट्रों की महारानी रहीं एलिजाबेथ द्वितीय अपने पीछे अरबों की संपत्ति छोड़ गई हैं.</p>



<p>ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth II) का गुरुवार को स्कॉटलैंड के बाल्मोरल कैसल में निधन हो गया. 96 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा. एलिजाबेथ द्वितीय 1952 में उस वक्त ब्रिटेन की महारानी बनी थीं, जब उनके पिता की जॉर्ज षष्टम की मौत हो गई थी. महज 25 साल की उम्र में ब्रिटेन की महारानी का ताज एलिजाबेथ द्वितीय के सिर पर सजा था. वे दुनिया की इकलौती ऐसी महिला थीं, जिन्हें विदेशी दौरे के लिए पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं पड़ती थी. मौजूदा समय में 15 संप्रभु राष्ट्रों की महारानी रहीं एलिजाबेथ द्वितीय  अपने पीछे अरबों की संपत्ति छोड़ गई हैं.</p>



<p>महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की नेट वर्थ को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स में कई दावें किए गए हैं. Fortune के अनुसार, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय अपने पीछे 500 मिलियन डॉलर (39,858,975,000 रुपये) की संपत्ति छोड़ गई हैं. ये संपत्ति प्रिंस चार्ल्स को किंग बनने पर विरासत में मिलेगा. महारानी ने अपने निवेश, कला संग्रह, ज्वैलरी और रियल एस्टेट होल्डिंग्स से व्यक्तिगत संपत्ति में के रूप में 500 मिलियन डॉलर से अधिक की रकम जमा किए थे. इसमें सैंड्रिंघम हाउस और बाल्मोरल कैसल शामिल हैं. अब जब उनकी मृत्यु हो गई है, तो उनकी ज्यादातर निजी संपत्ति प्रिंस चार्ल्स को सौंप दी जाएगी.</p>



<p>PNCDESK</p>
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