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	<title>BOOK RELEASE &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<description>Patna News Portal - हर ख़बर पर नज़र</description>
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		<title>सक्षम, जवाबदेह और नियमसम्मत प्रशासन के लिए अधिकारियों को मिला नया ‘साथी’</title>
		<link>https://www.patnanow.com/ais-book-release/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:00:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुख्य सचिव ने ‘Essential Companion of An AIS Officer’ पुस्तक का किया विमोचन, नवीनतम नियमों व न्यायिक निर्णयों का है संकलन अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्द्धन के लिए तैयार की गई संदर्भ पुस्तक, प्रशासनिक कार्यों में होगी उपयोगी पटना।। मुख्य जाँच आयुक्त निदेशालय, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘Essential Companion of An AIS Officer’ का विमोचन मंगलवार को मुख्य सचिवालय के सभाकक्ष में आयोजित एक कार्यक्रम में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा किया गया. कार्यक्रम में भारतीय प्रशासनिक सेवा के कई वरीय अधिकारियों ने भाग लिया. कार्यक्रम का शुभारंभ अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग डॉ बी राजेन्दर के स्वागत संबोधन से हुआ. इसके बाद महानिदेशक-सह-मुख्य जाँच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने पुस्तक का परिचय प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्य एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि यह पुस्तक अखिल भारतीय सेवा (AIS) के नए एवं सेवारत अधिकारियों के प्रशिक्षण, क्षमता संवर्द्धन तथा अनुशासनिक कार्रवाईयों के प्रभावी संचालन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है.उन्होंने कहा कि पुस्तक में लोक सेवाओं से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों, अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969, अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमावली, 1968, अभियोजन स्वीकृति से जुड़े प्रावधानों तथा सिंगल विंडो सिस्टम के तहत अपील एवं समीक्षा संबंधी वर्ष 2023, 2024 एवं 2025 के नवीनतम परिपत्रों और दिशा-निर्देशों को समाहित किया गया है. इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों का भी इसमें संकलन किया गया है. मुख्य सचिव ने पुस्तक का विमोचन करते हुए इसे प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ बताया. उन्होंने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुख्य सचिव ने ‘Essential Companion of An AIS Officer’ पुस्तक का किया विमोचन, नवीनतम नियमों व न्यायिक निर्णयों का है संकलन</strong></p>



<p><strong>अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्द्धन के लिए तैयार की गई संदर्भ पुस्तक, प्रशासनिक कार्यों में होगी उपयोगी</strong></p>



<p>पटना।। मुख्य जाँच आयुक्त निदेशालय, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘Essential Companion of An AIS Officer’ का विमोचन मंगलवार को मुख्य सचिवालय के सभाकक्ष में आयोजित एक कार्यक्रम में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा किया गया. कार्यक्रम में भारतीय प्रशासनिक सेवा के कई वरीय अधिकारियों ने भाग लिया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-book-release-on-ais-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-97001" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-book-release-on-ais-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-book-release-on-ais-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-book-release-on-ais-1536x1024.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-book-release-on-ais-2048x1365.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम का शुभारंभ अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग डॉ बी राजेन्दर के स्वागत संबोधन से हुआ. इसके बाद महानिदेशक-सह-मुख्य जाँच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने पुस्तक का परिचय प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्य एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि यह पुस्तक अखिल भारतीय सेवा (AIS) के नए एवं सेवारत अधिकारियों के प्रशिक्षण, क्षमता संवर्द्धन तथा अनुशासनिक कार्रवाईयों के प्रभावी संचालन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है.<br>उन्होंने कहा कि पुस्तक में लोक सेवाओं से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों, अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969, अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमावली, 1968, अभियोजन स्वीकृति से जुड़े प्रावधानों तथा सिंगल विंडो सिस्टम के तहत अपील एवं समीक्षा संबंधी वर्ष 2023, 2024 एवं 2025 के नवीनतम परिपत्रों और दिशा-निर्देशों को समाहित किया गया है. इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों का भी इसमें संकलन किया गया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-ias-pratyay-amrit-with-b-rajinder-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-97000" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-ias-pratyay-amrit-with-b-rajinder-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-ias-pratyay-amrit-with-b-rajinder-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-ias-pratyay-amrit-with-b-rajinder-1536x1024.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-ias-pratyay-amrit-with-b-rajinder-2048x1365.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>मुख्य सचिव ने पुस्तक का विमोचन करते हुए इसे प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ बताया. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की संकलित और अद्यतन सामग्री अधिकारियों को सेवा संबंधी नियमों, अनुशासनिक प्रक्रियाओं तथा प्रशासनिक निर्णयों के संबंध में बेहतर समझ विकसित करने में सहायक होगी. उन्होंने कहा कि मुख्य जांच आयुक्त के नेतृत्व में उनकी टीम लगातार बेहतरीन कार्य कर रही है. उनकी टीम डॉक्यूमेंटेशन, ट्रेनिंग एवं कैपेसिटी बिल्डिंग की दिशा में बेहतर प्रयास कर रही है. यह फ्यूचर जेनरेशन के लिए उपयोगी कार्य है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="919" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-cs-and-acs-deepak-kumar-Singh-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-97002" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-cs-and-acs-deepak-kumar-Singh-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-cs-and-acs-deepak-kumar-Singh-650x584.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/06/pnc-cs-and-acs-deepak-kumar-Singh-1536x1379.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के अंत में सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो. सोहैल ने धन्यवाद ज्ञापन किया. उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन को प्रशासनिक क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए इसके लिए मुख्य जाँच आयुक्त निदेशालय के प्रयासों की सराहना की. प्रशासनिक अधिकारियों के बीच इस पुस्तक को एक उपयोगी मार्गदर्शिका के रूप में देखा जा रहा है, जो सेवा संबंधी नियमों और प्रक्रियाओं की समग्र जानकारी उपलब्ध कराएगी. कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरविंदर सिंह भी उपस्थित थे.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>&#8216;बिहार की भूमि विधियाँ&#8217; से मिलेगा जमीन विवाद से जुड़े हर सवाल का जवाब</title>
		<link>https://www.patnanow.com/book-release-by-acs/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Apr 2025 06:49:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Bihar Bhumi]]></category>
		<category><![CDATA[Book on land reforms]]></category>
		<category><![CDATA[BOOK RELEASE]]></category>
		<category><![CDATA[Land laws of Bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Land reforms]]></category>
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					<description><![CDATA[पुस्तक &#8216;बिहार की भूमि विधियाँ&#8217; का अपर मुख्य सचिव ने किया विमोचन हिंदी में उपलब्ध इस पुस्तक में भूमि संबंधी सभी कानून किये गए हैं समाहित : दीपक कुमार सिंह पटना : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बुधवार को अपने कार्यालय कक्ष में ‘बिहार की भूमि विधियाँ’ पुस्तक का विमोचन किया. इस अवसर पर सचिव जय सिंह, किताब के लेखक राधा मोहन प्रसाद, विभाग के विशेष सचिव अरुण कुमार सिंह, संयुक्त सचिव अनिल कुमार पांडेय तथा आजीव वत्सराज भी उपस्थित थे. पुस्तक के बारे में जानकारी देते हुये अपर मुख्य सचिव ने बताया कि ‘इस एक किताब से जमीन के कानून से संबंधित सभी अधिनियमों एवं नियमावली की जानकारी रैयतों को एक ही स्थान पर मिल सकेगी। हिंदी में उपलब्ध कराई जा रही यह पुस्तक सभी के लिए उपयोगी है। पुस्तक में विभाग के द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली भूमि सुधार संबंधी नीतियों को भी समेकित किया गया है। इसमें बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाले अधिनियम, 2024 को भी जगह दी गई है । उन्होंने कहा कि आजादी से पूर्व के सभी अधिनियम अंग्रेजी भाषा में थे, जिन्हें समझने में लोगों को परेशानी होती थी। इस पुस्तक में बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885, बंगाल एलुवियन एवं डिल्यूवियन विनियम, 1825; बंगाल एलुवियन एवं डिल्यूवियन एक्ट, 1847; बंगाल गंगबरार भूमि बन्दोबस्ती अधिनियम, 1858; बंगाल गंगबरार संशोधन अधिनियम, 1868; बिहार बकाश्त विवाद निपटारा अधिनियम, 1947 अधिनियम सभी का हिन्दी अनुवाद किया गया है। विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा कि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पुस्तक &#8216;बिहार की भूमि विधियाँ&#8217; का अपर मुख्य सचिव ने किया विमोचन</strong></p>



<p><strong>हिंदी में उपलब्ध इस पुस्तक में भूमि संबंधी सभी कानून किये गए हैं समाहित : दीपक कुमार सिंह</strong></p>



<p>पटना : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बुधवार को अपने कार्यालय कक्ष में ‘बिहार की भूमि विधियाँ’ पुस्तक का विमोचन किया. इस अवसर पर सचिव जय सिंह, किताब के लेखक राधा मोहन प्रसाद, विभाग के विशेष सचिव अरुण कुमार सिंह, संयुक्त सचिव अनिल कुमार पांडेय तथा आजीव वत्सराज भी उपस्थित थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="911" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/04/1000457030-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-89895" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/04/1000457030-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/04/1000457030-650x579.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/04/1000457030-1536x1367.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>पुस्तक के बारे में जानकारी देते हुये अपर मुख्य सचिव ने बताया कि ‘इस एक किताब से जमीन के कानून से संबंधित सभी अधिनियमों एवं नियमावली की जानकारी रैयतों को एक ही स्थान पर मिल सकेगी। हिंदी में उपलब्ध कराई जा रही यह पुस्तक सभी के लिए उपयोगी है। पुस्तक में विभाग के द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली भूमि सुधार संबंधी नीतियों को भी समेकित किया गया है। इसमें बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाले अधिनियम, 2024 को भी जगह दी गई है ।</p>



<p>उन्होंने कहा कि आजादी से पूर्व के सभी अधिनियम अंग्रेजी भाषा में थे, जिन्हें समझने में लोगों को परेशानी होती थी। इस पुस्तक में बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885, बंगाल एलुवियन एवं डिल्यूवियन विनियम, 1825; बंगाल एलुवियन एवं डिल्यूवियन एक्ट, 1847; बंगाल गंगबरार भूमि बन्दोबस्ती अधिनियम, 1858; बंगाल गंगबरार संशोधन अधिनियम, 1868; बिहार बकाश्त विवाद निपटारा अधिनियम, 1947 अधिनियम सभी का हिन्दी अनुवाद किया गया है।</p>



<p>विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा कि भूमि विधियों को विभिन्न कोटि के राजस्व न्यायालयों/प्राधिकारियों/ अधिवक्ताओं/ आम काश्तकारों/व्यक्तियों के लिए सर्व सुलभ बनाने के उद्देश्य से उन्हें समेकित रूप से एक साथ जिल्दबद्ध रूप में प्रकाशित किया गया है। इस हेतु ‘बिहार की भूमि विधियाँ शीर्षक’ अन्तर्गत जमींदारी उन्मूलन के पूर्व में अधिनियमित तथा वर्ष 1950 के बाद विभिन्न भूमि विषयों से सम्बन्धित अधिनियमों, नियमावलियों, खास महाल नीति, रैयती भूमि लीज नीति को एक साथ संकलित कर हिन्दी भाषा में पुस्तकबद्ध रूप दिया गया है।</p>



<p>ज्ञात हो कि भूमि विधियों के निर्माण का प्रारंभ ब्रिटिश शासन काल में भूमि को भू-सम्पदा स्वीकार करने के उपरांत हुआ। आरम्भिक काल में भूमि विधियों के निर्माण का केन्द्रीय उद्देश्य भू-राजस्व का निर्धारण एवं उसके संग्रहण से सम्बन्धित रहा। बाद के समय में भूमि विधियों के माध्यम से काश्तकारों को उनके अधिकार प्रदान करते हुए, उनके अधिकारों की स्पष्ट व्याख्या करना भूमि विधियों का उद्देश्य रहा। 1950 के बाद बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 तथा नियमावली, 1951 के लागू होने के बाद जमींदारी का उन्मूलन हो गया। राज्य सरकार द्वारा भूमि सुधार की नीतियों को प्रचालित करने के उद्देश्य से समय-समय पर कानून बनाये जाते रहे हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/04/1000457031-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-89896" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/04/1000457031-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/04/1000457031-650x365.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/04/1000457031-1536x863.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2025/04/1000457031-2048x1151.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस पुस्तक में बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त अधिनियम, 2011, बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त नियमावली, 2012 (संशोधन नियमावली, 2024 द्वारा यथासंशोधित), बिहार भूमि दाखिल खारिज अधिनियम, 2011, बिहार भूमि दाखिल-खारिज नियमावली, 2012 (संशोधन नियमावली, 2017), बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009, बिहार भूमि विवाद निराकरण नियमावली, 2010 तथा बिहार भूमि न्यायाधिकरण नियमावली, 2010, बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) अधिनियम, 2010 एवं बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) नियमावली, 2011 सहित कुल 47 भूमि सुधार संबंधित कानूनों को समाहित किया गया है.</p>



<p>उल्लेखित अधिनियमों के प्रावधानों से जहाँ बिहार के काश्तकारों/भूधारियों को लाभ मिला है, दूसरी ओर विभिन्न कोटि के राजस्व प्राधिकारियों के द्वारा भूमि से सम्बन्धित विभिन्न प्रकृति के राजस्व वादों के निष्पादन में मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है.<br>लेखक राधा मोहन प्रसाद ने कहा कि उल्लेखित अधिनियमों, नियमावलियों के प्रावधानों को अधिनियम से सम्बन्धित वाद राजस्व न्यायालयों में दायर होने पर विद्वान अधिवक्ताओं द्वारा सुसंगत धाराओं की विवेचना कर तथ्यों को सुस्पष्ट किया जाता रहा है। हिंदी में इस पुस्तक के प्रकाशन से सभी वर्ग के लोग जमीन संबंधित समस्या के समाधान इससे कर सकेंगे.</p>



<p>बिहार की भूमि विधियों से सम्बन्धित इस पुस्तक को प्रकाशित करने, उन्हें सर्व सुलभ बनाने का अति महत्त्वपूर्ण कार्य प्रीतम लॉ हाउस प्राइवेट लिमिटेड, सालिमपुर अहरा, पटना द्वारा किया गया है. लेखक ने कहा कि इस कार्य के लिए प्रीतम लॉ हाउस के प्रोपराईटर सर्वश्री प्रीतम कुमार, उत्तम कुमार धन्यवाद के पात्र हैं। आशा है इस पुस्तक का लाभ बिहार के आमजनों, राजस्व प्राधिकारियों, विद्वान अधिवक्ताओं को प्राप्त हो सकेगा.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>&#8216;कभी चुनाव नहीं लड़ने वाले जेपी थे नया समाज निर्माण के राही&#8217;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/book-release-on-jp/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jan 2025 16:11:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
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		<category><![CDATA[BOOK RELEASE]]></category>
		<category><![CDATA[Jagjivan ram institute]]></category>
		<category><![CDATA[Jp ki vichardhara]]></category>
		<category><![CDATA[Ramvriksh benipuri]]></category>
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					<description><![CDATA[जेपी के नैतिक उत्तराधिकारी हैं नीतीश: हरिवंश पटना।। आज जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान, पटना में रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा संपादित पुस्तक ‘‘जयप्रकाश की विचारधारा’’ का लोकार्पण संपन्न हुआ. राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने अपने संबोधन में कहा कि देश के अनूठे विशिष्ट लोगों में से थे बेनीपुरी जी. उन्होंने जयप्रकाश की विचारधारा का संपादन किया और उनके साथ रहकर समाज को नई दिशा देने का काम किया. जेपी जातीय, आर्थिक, लैंगिक संतुलन के पुरोधा थे. जेपी आंदोलन से बहुत लोग निकले लेकिन नीतीश आज भी उनके अनुयायी बने हुए हैं. जेपी इंसान को बदलने की राजनीति करते थे. उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा. कभी सदन नहीं गए. वे नये समाज बनाने के राही थे. उन्होंने कभी किसी की आलोचना नहीं की और आपको बता दूं आंदोलन एक दिन में नहीं होता. जेपी युवाओं को आगे लाये ताकि बेहतर इंसान बन सके और बेहतर इंसान ही अच्छी सोसाइटी का निर्माण कर सकती है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में जातीय, आर्थिक, लैंगिक न्याय का जो संतुलन बनाया उसका परिणाम बिहार निरंतर विकास कर रहा है. बिहार में जहां जेपी के गांव से पटना आने के लिए दो-दो दिन लग जाया करते थे. आज संपूर्ण बिहार से लोग आसानी से कम समय में पटना पहुंच जाते हैं. वैसे तो जेपी का पटना ही कर्मभूमि रहा लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में आज भी जेपी प्रासंगिक है. इस पुस्तक के पुनर्प्रकाशन के लिए मैं संस्थान के निदेशक को हार्दिक बधाई देता हूं. पूर्व शिक्षा मंत्री रामचंद्र पूर्वे ने अपने संबोधन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>जेपी के नैतिक उत्तराधिकारी हैं नीतीश: हरिवंश</strong></p>



<p>पटना।। आज जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान, पटना में रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा संपादित पुस्तक ‘‘जयप्रकाश की विचारधारा’’ का लोकार्पण संपन्न हुआ.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1000291166-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88678" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1000291166-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1000291166-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1000291166-1536x1023.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने अपने संबोधन में कहा कि देश के अनूठे विशिष्ट लोगों में से थे बेनीपुरी जी. उन्होंने जयप्रकाश की विचारधारा का संपादन किया और उनके साथ रहकर समाज को नई दिशा देने का काम किया. जेपी जातीय, आर्थिक, लैंगिक संतुलन के पुरोधा थे. जेपी आंदोलन से बहुत लोग निकले लेकिन नीतीश आज भी उनके अनुयायी बने हुए हैं. जेपी इंसान को बदलने की राजनीति करते थे. उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा. कभी सदन नहीं गए. वे नये समाज बनाने के राही थे. उन्होंने कभी किसी की आलोचना नहीं की और आपको बता दूं आंदोलन एक दिन में नहीं होता. जेपी युवाओं को आगे लाये ताकि बेहतर इंसान बन सके और बेहतर इंसान ही अच्छी सोसाइटी का निर्माण कर सकती है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में जातीय, आर्थिक, लैंगिक न्याय का जो संतुलन बनाया उसका परिणाम बिहार निरंतर विकास कर रहा है. बिहार में जहां जेपी के गांव से पटना आने के लिए दो-दो दिन लग जाया करते थे. आज संपूर्ण बिहार से लोग आसानी से कम समय में पटना पहुंच जाते हैं. वैसे तो जेपी का पटना ही कर्मभूमि रहा लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में आज भी जेपी प्रासंगिक है. इस पुस्तक के पुनर्प्रकाशन के लिए मैं संस्थान के निदेशक को हार्दिक बधाई देता हूं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1000291169-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88677" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1000291169-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1000291169-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1000291169-1536x1023.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>पूर्व शिक्षा मंत्री रामचंद्र पूर्वे ने अपने संबोधन में पुस्तक की चर्चा करते हुए अनेक तथ्यों को उजागर किया और उन्होंने कहा कि गांधी मैदान में उतनी बड़ी जनसभा आज तक नहीं देखने को मिली, जितनी बड़ी 13 अप्रैल, 1946 को जेपी के लिए उस तपती धूप में एक बड़ा जनसमूह उमड़ पड़ा था.<br>बेनीपुरी जी के नाती राजीव महंत ने कहा कि यह मेरे लिए गौरव का क्षण है कि मेरे नानाजी की पुस्तक पुनर्प्रकाशित हो रही है तथा उन्होंने बेनीपुरी जी के कई अन्य पहलुओं को हमारे समक्ष रखा.<br>लोकार्पण-सह-परिचर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बिहार विधान सभा के उप सभापति प्रो. रामवचन राय ने कहा कि इस पुस्तक के पुनर्प्रकाशन के लिए मैं इतना ही कहूंगा कि एक खोयी हुई रौशनी वापस आयी है. मुझे याद है बेनीपुरी जी ने किस प्रकार जेपी को जेल से भगाने की योजना बनायी थी. दीपावली का समय था, कार्यक्रम चल रहा था. जेपी को बीमार बताकर और योजना के तहत उन्हें जेल से भगाने में कामयाब हुए थे. जेपी मूल्यों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने एक कविता के साथ समापन किया- ‘‘इस देश पर उधार है बूढ़ा आदमी.’’<br>कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. नरेन्द्र पाठक ने कहा कि जयप्रकाश जी की पुस्तक की रचना जो रामवृक्ष बेनीपुरी जी द्वारा की गई. ‘जयप्रकाश की विचारधारा’ इस पुस्तक की रचना में एक ऐसा संदर्भ जिसने बेनीपुरी जी को झकझोर कर रख दिया. जेपी के अनुयायी ने अपने खून से बेनीपुरी जी को एक खत लिखकर इस पुस्तक की रचना करने का आग्रह किया था ताकि जयप्रकाश जी की कृतियों को जनमानस जान सकें. फिर क्या रामवृक्ष बेनीपुरी जी, जो कि जेपी के काफी करीब थे, ने इस पुस्तक की रचना की. इस पुस्तक की रचना में उन तथ्यों को उजागर किया, जिन तथ्यों से लोग काफी दूर थे. वर्ष 1948 में प्रकाशित इस पुस्तक की अनुपलब्धता को देखते हुए हमारे संस्थान ने इसका पुनर्प्रकाशन करने का निर्णय लिया. सभी स्तर पर सहयोग मिला और यह पुस्तक अब आपके समक्ष प्रस्तुत है.<br>मंच संचालन लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने किया.<br>कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय पासवान, सचिव शिक्षा विभाग बैजनाथ यादव, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. रेखा कुमारी, उप निदेशक उच्च शिक्षा, शिक्षा विभाग दीपक कुमार सिंह, प्रो. वीरेन्द्र झा, डॉ. मधुबाला, डॉ. विद्यार्थी विकास, भैरव लाल दास, मिथिलेश, रजनीश उपाध्याय, अरुण नारायण, राष्ट्रीय कुंवर वाहिनी के अध्यक्ष धीरज कुमार सिंह सहित कई बुद्धिजीवी, साहित्यकार एवं पत्रकार उपस्थित रहे.<br><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>मोदी पर जमकर बरसे लालू</title>
		<link>https://www.patnanow.com/lalu-releases-ali-anwar-book/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 Dec 2017 18:38:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[ALI ANWAR]]></category>
		<category><![CDATA[BOOK RELEASE]]></category>
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					<description><![CDATA[देश की जनता अब सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ मन बना चुकी है. गुजरात की जनता ने नरेंद्र मोदी के सब्जबाग और नफरत व घृणा की राजनीति को नकार दिया है. ये बातें राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पटना पुस्तक मेले में शनिवार को पूर्व सांसद अली अनवर पर केंद्रित ‘अली अनवर’ शीर्षक पुस्तक पर विचार-गोष्ठी तथा परिचर्चा में अपने संबोधन के दौरान कही. ‘अली अनवर’ शीर्षक इस किताब का संपादन पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सुमन ने किया है. यह किताब  ‘भारत के राजनेता’ नामक पुस्तक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके श्रृंखला-संपादक फारवर्ड प्रेस पत्रिका के प्रबंध संपादक प्रमोद रंजन हैं. अपने संबोधन में राजद प्रमुख ने पूर्व सांसद अली अनवर को जनता के लिए लड़ने वाला सिपाही बताया. उन्होंने कहा कि अली अनवर पत्रकार के रूप में भी खासे लोकप्रिय रहे. वहीं गुजरात चुनाव के मद्देनजर लालू प्रसाद ने कहा कि देश और गुजरात की जनता नरेंद्र मोदी का सच जान चुकी है. उन्होंने कहा कि देश की जनता अब धर्म के अाधार पर देश को बांटने वाली ताकतों को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि देश का संविधान खतरे में है. कार्यक्रम में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के अलावा जन संस्कृति से जुड़े लेखक मदन कश्यप, पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने भी अपने विचार रखे. परिचर्चा का संचालन युवा साहित्यकार अरूण नारायण ने किया. &#160;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>देश की जनता अब सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ मन बना चुकी है. गुजरात की जनता ने नरेंद्र मोदी के सब्जबाग और नफरत व घृणा की राजनीति को नकार दिया है. ये बातें राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पटना पुस्तक मेले में शनिवार को पूर्व सांसद अली अनवर पर केंद्रित ‘अली अनवर’ शीर्षक पुस्तक पर विचार-गोष्ठी तथा परिचर्चा में अपने संबोधन के दौरान कही. ‘अली अनवर’ शीर्षक इस किताब का संपादन पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सुमन ने किया है. यह किताब  ‘भारत के राजनेता’ नामक पुस्तक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके श्रृंखला-संपादक फारवर्ड प्रेस पत्रिका के प्रबंध संपादक प्रमोद रंजन हैं.</p>
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<p>अपने संबोधन में राजद प्रमुख ने पूर्व सांसद अली अनवर को जनता के लिए लड़ने वाला सिपाही बताया. उन्होंने कहा कि अली अनवर पत्रकार के रूप में भी खासे लोकप्रिय रहे. वहीं गुजरात चुनाव के मद्देनजर लालू प्रसाद ने कहा कि देश और गुजरात की जनता नरेंद्र मोदी का सच जान चुकी है. उन्होंने कहा कि देश की जनता अब धर्म के अाधार पर देश को बांटने वाली ताकतों को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि देश का संविधान खतरे में है.</p>
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<p>कार्यक्रम में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के अलावा जन संस्कृति से जुड़े लेखक मदन कश्यप, पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने भी अपने विचार रखे. परिचर्चा का संचालन युवा साहित्यकार अरूण नारायण ने किया.</p>
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