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	<title>Book fair &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<description>Patna News Portal - हर ख़बर पर नज़र</description>
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		<title>अब पुस्तक मेला में खरीद सकते हैं कैथी लिपि की पुस्तिका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Dec 2024 14:43:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। अगर आप कैथी लिपि की जानकारी रखने में इच्छुक हैं तो इससे संबंधित पुस्तिका पटना पुस्तक मेला में लगे राजस्व विभाग के स्टॉल से खरीद सकते हैं. विभाग द्वारा हाल हीं में इसका विमोचन किया गया है. दरअसल राज्य में कई पुराने खातियान एवं अन्य दस्तावेज कैथी लिपि में हैं, जिन्हें समझने में आमलोगों के साथ-साथ विशेष सर्वेक्षण में लगे कर्मियों को भी परेशानी होती थी. 5 दिसंबर को इसके विमोचन के साथ हीं विभाग द्वारा इसे अधिकारिक रूप से वेबसाइट https://dlrs.bihar.gov.in/ पर अपलोड कर दिया गया था. नागरिक इस वेबसाइट पर जाकर इसे निःशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं. मेला में स्टॉल पर आने वाले लोगों के द्वारा लगातार इस पुस्तिका की माँग की जा रही थी. आमलोगों की माँग को देखते हुये विभाग द्वारा इस पुस्तिका को अब पटना पुस्तक मेला में लगे राजस्व विभाग के स्टॉल पर उपलब्ध करवा दिया गया है. इसका प्रकाशन भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय द्वारा किया गया है. इक्छुक व्यक्ति इसे मात्र 50 रुपये की नगद राशि देकर खरीद सकते हैं. सोमवार को इस पुस्तिका को राज्य के लगभग 150 रैयतों ने खरीदा. बता दें कि पिछले गुरुवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल द्वारा कैथी लिपि पर लिखी गई इस पुस्तिका का अनावरण किया था. बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों में कैथी की विविध क्षेत्रीय शैलियाँ प्रचलित हैं. जो मुख्यतः तिरहुत, मगध और भोजपुर क्षेत्र की कैथी है. भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशक जे प्रियदर्शिनी ने इस पुस्तिका की विशेष जानकारी देते हुए बताया कि कुछ जिलों के [&#8230;]]]></description>
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<p>पटना।। अगर आप कैथी लिपि की जानकारी रखने में इच्छुक हैं तो इससे संबंधित पुस्तिका पटना पुस्तक मेला में लगे राजस्व विभाग के स्टॉल से खरीद सकते हैं. विभाग द्वारा हाल हीं में इसका विमोचन किया गया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-revenue-department-kaithi-lipi-book-release-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-87986" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-revenue-department-kaithi-lipi-book-release-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-revenue-department-kaithi-lipi-book-release-650x434.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-revenue-department-kaithi-lipi-book-release-1536x1025.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-revenue-department-kaithi-lipi-book-release-2048x1367.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>दरअसल राज्य में कई पुराने खातियान एवं अन्य दस्तावेज कैथी लिपि में हैं, जिन्हें समझने में आमलोगों के साथ-साथ विशेष सर्वेक्षण में लगे कर्मियों को भी परेशानी होती थी. 5 दिसंबर को इसके विमोचन के साथ हीं विभाग द्वारा इसे अधिकारिक रूप से वेबसाइट https://dlrs.bihar.gov.in/ पर अपलोड कर दिया गया था. नागरिक इस वेबसाइट पर जाकर इसे निःशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="458" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1000233116-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88052" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1000233116-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1000233116-650x290.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1000233116-1536x686.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>मेला में स्टॉल पर आने वाले लोगों के द्वारा लगातार इस पुस्तिका की माँग की जा रही थी. आमलोगों की माँग को देखते हुये विभाग द्वारा इस पुस्तिका को अब पटना पुस्तक मेला में लगे राजस्व विभाग के स्टॉल पर उपलब्ध करवा दिया गया है. इसका प्रकाशन भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय द्वारा किया गया है. इक्छुक व्यक्ति इसे मात्र 50 रुपये की नगद राशि देकर खरीद सकते हैं. सोमवार को इस पुस्तिका को राज्य के लगभग 150 रैयतों ने खरीदा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="459" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/Kaithi-varn-650x459.png" alt="" class="wp-image-67414" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/10/Kaithi-varn-650x459.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/10/Kaithi-varn-350x247.png 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/10/Kaithi-varn.png 658w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बता दें कि पिछले गुरुवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल द्वारा कैथी लिपि पर लिखी गई इस पुस्तिका का अनावरण किया था. बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों में कैथी की विविध क्षेत्रीय शैलियाँ प्रचलित हैं. जो मुख्यतः तिरहुत, मगध और भोजपुर क्षेत्र की कैथी है. भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशक जे प्रियदर्शिनी ने इस पुस्तिका की विशेष जानकारी देते हुए बताया कि कुछ जिलों के पुराने खतियान कैथी लिपि में हैं. सर्वे कर्मियों सहित आमलोगों को भी इसे समझने में परेशानी होती थी. वेबसाइट पर यह निःशुल्क डाउनलोड के लिये उपलब्ध है. पर जनता की माँग को देखते हुये निदेशालय द्वारा इसे प्रिंट करवाकर एक पुस्तक के रूप में आमलोगों को एक मामूली शुल्क पर उपलब्ध करवाया गया है. इससे सर्वे संबंधित कार्यों में पारदर्शिता और तेजी आयेगी. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="409" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc-revenue-and-land-reforms-department.jpg" alt="" class="wp-image-54601" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc-revenue-and-land-reforms-department.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc-revenue-and-land-reforms-department-350x220.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम से राज्य के सभी वैसे रैयत लाभान्वित होंगे जिनके पास भू- स्वामित्व से संबंधित पुराने दस्तावेज कैथी लिपि में लिखे हुए हैं और उसके आधार पर ही उनकी भूमि के स्वामित्व का निर्धारण वर्तमान सर्वे की प्रक्रिया में किया जाना है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>चिकित्सा से जुड़े प्राचीन ग्रन्थों की लगी विशाल प्रदर्शनी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/fair-of-ancient-books-in-jain-libreray/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 May 2024 13:58:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[क्या जानते हैं जैन सिद्धान्त भवन के बारे में ! आरा, 21 मई 2024. आरा हमेशा से कला, साहित्य या इतिहास की बात आते ही सबके न सिर्फ जेहन में बल्कि सामने मानो खड़ा हो जाता है. शहर ने इतिहास के गर्भ से पता नही कितने चीजों को अपने पास रखा और कितनों के बदलते स्वरूप को वर्तमान तक देखा. उन्ही में से एक है यहाँ का ऐतिहासिक धरोहर न सिर्फ एक धरोहर है बल्कि उसके अंदर रखे हजरों किताबें प्राचीन इतिहास के पुख्ता सबूत हैं जो समय के धूल खाने के बाद भी अपनी मौजूदगी आने वाली पीढ़ियों के लिए रखा है. हम बात कर रहे हैं ऐतिहासिक जैन सिद्धान्त भवन की. जिला मुख्यालय के जेल रोड में स्थित ऐतिहासिक जैन सिद्धान्त भवन के विशाल सभागार में चिकित्सकीय एव आयुर्वेदिक प्राचीन ग्रंथो की भव्य प्रर्दशनी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का विधिवत उद्‌घाटन आयुष मंत्रालय ,भारत सरकार के केंद्रीय आयुर्वेद विज्ञान अनुसंधान परिषद के क्षेत्र विशेषज्ञ डॉ० दीलिप कुमार कर ने दीप प्रज्जवलित कर किया. बतातें चलें कि सैकड़ो वर्ष पुराने इस जैन लाइब्रेरी में चिकित्सकीय एवं आयुर्वेदिक ग्रंथो के साथ- साथ ज्योतिष, व्याकरण, तन्त्र-मंत्र, गणित, धार्मिक ग्रंथो एव प्राचीन शोध-पत्रिकाओं का विशाल संग्रह है. देश-विदेश से हजारों पर्यटक एंव शोधार्थी प्रति वर्ष यहां आकर इस पुस्तकालय का उपयोग करते है. इस पुस्तकालय में राष्ट्रीय पाण्डु‌लिपी मिशन, सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार के अन्तर्गत पाण्डुलिपि संसाधन केंद्र एंव पाण्डुलिपि संरक्षण केन्द्र की स्थापना कई वर्ष पूर्व की गयी थी जहाँ सैकड़ो दुलर्भ ग्रंथो का वैज्ञानिक विधि से संरक्षण एव मरम्मत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>क्या जानते हैं जैन सिद्धान्त भवन के बारे में</strong> !</p>



<p>आरा, 21 मई 2024. आरा हमेशा से कला, साहित्य या इतिहास की बात आते ही सबके न सिर्फ जेहन में बल्कि सामने मानो खड़ा हो जाता है. शहर ने इतिहास के गर्भ से पता नही कितने चीजों को अपने पास रखा और कितनों के बदलते स्वरूप को वर्तमान तक देखा. उन्ही में से एक है यहाँ का ऐतिहासिक धरोहर न सिर्फ एक धरोहर है बल्कि उसके अंदर रखे हजरों किताबें प्राचीन इतिहास के पुख्ता सबूत हैं जो समय के धूल खाने के बाद भी अपनी मौजूदगी आने वाली पीढ़ियों के लिए रखा है. हम बात कर रहे हैं ऐतिहासिक जैन सिद्धान्त भवन की.</p>



<p>जिला मुख्यालय के जेल रोड में स्थित ऐतिहासिक जैन सिद्धान्त भवन के विशाल सभागार में चिकित्सकीय एव आयुर्वेदिक प्राचीन ग्रंथो की भव्य प्रर्दशनी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का विधिवत उद्‌घाटन आयुष मंत्रालय ,भारत सरकार के केंद्रीय आयुर्वेद विज्ञान अनुसंधान परिषद के क्षेत्र विशेषज्ञ डॉ० दीलिप कुमार कर ने दीप प्रज्जवलित कर किया.</p>



<p>बतातें चलें कि सैकड़ो वर्ष पुराने इस जैन लाइब्रेरी में चिकित्सकीय एवं आयुर्वेदिक ग्रंथो के साथ- साथ ज्योतिष, व्याकरण, तन्त्र-मंत्र, गणित, धार्मिक ग्रंथो एव प्राचीन शोध-पत्रिकाओं का विशाल संग्रह है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="606" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000588300-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84327" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000588300-scaled.jpg 606w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000588300-384x650.jpg 384w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000588300-908x1536.jpg 908w" sizes="(max-width: 606px) 100vw, 606px" /></figure>



<p>देश-विदेश से हजारों पर्यटक एंव शोधार्थी प्रति वर्ष यहां आकर इस पुस्तकालय का उपयोग करते है. इस पुस्तकालय में राष्ट्रीय पाण्डु‌लिपी मिशन, सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार के अन्तर्गत पाण्डुलिपि संसाधन केंद्र एंव पाण्डुलिपि संरक्षण केन्द्र की स्थापना कई वर्ष पूर्व की गयी थी जहाँ सैकड़ो दुलर्भ ग्रंथो का वैज्ञानिक विधि से संरक्षण एव मरम्मत किया जा रहा है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="461" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000588296-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84328" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000588296-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000588296-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000588296-1536x691.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2024/05/1000588296-2048x922.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उद्‌घाटनकर्ता डा. दिलीप कर ने जैन सिद्धान्त भवन में संग्रहित एव संरक्षित आयुर्वेदिक ग्रंथो की भूरी-भूरी प्रशंसा की. उन्होंने लाईब्रेरी के संस्थापक बाबु देव कुमार के प्रति आभार प्रगट किया. लाईब्रेरी के रख-रखाव से वे काफी प्रभावित हुए.शहर के बीचों-बीच स्थित लाईब्रेरी के विशाल भवन एंव यहाँ संग्रहित विभिन्न विषयों के दुलर्भ पुस्तकों को सुव्यवस्थित तरीके से रखे जाने एंव संरक्षण के द्वारा संरक्षण किए जाने की भी उन्होंने सराहना की.</p>



<p>आगत-अतिथियों का स्वागत संस्था के सचिव प्रशांत कुमार जैन ने अंगवस्त्र से किया. इस अवसर पर उन्होंने लाईब्रेरी द्वारा किए जा रहे कार्यों एंव संग्रह के बारे में उपस्थित लोगों को विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह लाइवेरी वीर कुंवर सिंह विश्व विद्यालय से संबंध है तथा शोधार्थी इसका लाभ ले रहे हैं.</p>



<p>इस अवसर पर पटना आयुर्वेद कॉलेज के अधिकारी, अखिलेश्वर प्रसाद, इषिता तिवारी, सुमन कुमारी, अखिलेश कुमार, दिपक जैन, रवि कुमार, आदि उपस्थित थे.</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
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